विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 13 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 13)
“विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के भौतिक विज्ञान खंड का तेरहवाँ अध्याय है। इस अध्याय में विद्युत धारा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच संबंध, धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ, परिनालिका, चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाला बल, विद्युत मोटर, विद्युत चुंबकीय प्रेरण तथा विद्युत जनित्र जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।
यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम, फ्लेमिंग का वामहस्त नियम, फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम, विद्युत मोटर का सिद्धांत एवं कार्यविधि, फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण तथा विद्युत जनित्र से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
चुंबकीय क्षेत्र
चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें उसके चुंबकीय बल का अनुभव किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। इसे सामान्यतः B से प्रदर्शित किया जाता है। चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि है।
जब किसी चुंबक के पास एक छोटी चुंबकीय सुई या दिक्सूचक रखा जाता है, तो उसकी दिशा बदल जाती है। इससे पता चलता है कि चुंबक के आसपास चुंबकीय क्षेत्र उपस्थित होता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए खींची गई काल्पनिक रेखाओं को चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं। इन रेखाओं की सहायता से किसी स्थान पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और उसकी सापेक्ष तीव्रता को समझा जा सकता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के प्रमुख गुण
- चुंबक के बाहर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं।
- चुंबक के अंदर इनकी दिशा दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती है।
- इस प्रकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र बनाती हैं।
- दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती हैं।
- जहाँ क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है।
- जहाँ क्षेत्र रेखाएँ दूर-दूर होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर होता है।
धारावाही चालक और चुंबकीय क्षेत्र
जब किसी सीधे चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस चुंबकीय क्षेत्र की दिशा धारा की दिशा पर निर्भर करती है। धारा की दिशा बदलने पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी बदल जाती है।
सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चालक को केंद्र मानकर संकेंद्री वृत्तों के रूप में होती हैं।
दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम
यदि किसी धारावाही सीधे चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा विद्युत धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उँगलियों की दिशा चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा बताती है। इसे दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम कहते हैं।
धारावाही वृत्ताकार कुंडली का चुंबकीय क्षेत्र
यदि किसी तार को वृत्ताकार रूप में मोड़कर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाए, तो उसके प्रत्येक भाग से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र मिलकर कुंडली के केंद्र पर अधिक प्रभावी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाने पर केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ जाती है।
कुंडली में प्रवाहित धारा बढ़ाने पर भी चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ती है।
परिनालिका
पास-पास लिपटे विद्युतरोधी तार के अनेक फेरों वाली बेलनाकार कुंडली को परिनालिका या Solenoid कहते हैं।
जब परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके अंदर एक प्रबल और लगभग एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। परिनालिका का एक सिरा उत्तर ध्रुव और दूसरा सिरा दक्षिण ध्रुव की तरह व्यवहार करता है।
परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ लगभग समानांतर और समान दूरी पर होती हैं। इसलिए इसके अंदर का चुंबकीय क्षेत्र लगभग एकसमान माना जाता है।
परिनालिका में चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
परिनालिका के किसी सिरे की ध्रुवीय प्रकृति ज्ञात करने के लिए दाएँ हाथ के नियम का उपयोग किया जा सकता है। यदि धारा की दिशा को देखते हुए परिनालिका में धारा वामावर्त दिखाई दे, तो वह सिरा उत्तर ध्रुव होता है। यदि धारा दक्षिणावर्त दिखाई दे, तो वह सिरा दक्षिण ध्रुव होता है।
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल
जब किसी धारावाही चालक को बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस चालक पर एक बल कार्य करता है। यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत रखा गया हो, तो बल का मान अधिकतम होता है।
इस बल का सूत्र है:
F = BIL sin θ
जहाँ B चुंबकीय क्षेत्र, I चालक में प्रवाहित धारा, L चालक की लंबाई और θ चालक तथा चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।
यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत हो, तो θ = 90° और:
F = BIL
यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर हो, तो θ = 0° और बल शून्य होता है।
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात की जाती है। बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे को एक-दूसरे के लंबवत फैलाएँ। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा विद्युत धारा की दिशा बताती है, तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल या गति की दिशा बताता है।
चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण
जब कोई आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर चुंबकीय बल लग सकता है। यदि आवेश q, वेग v और चुंबकीय क्षेत्र B हो तथा वेग और चुंबकीय क्षेत्र के बीच θ कोण हो, तो बल:
F = qvB sin θ
यदि कण चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर गति करता है, तो θ = 0° और बल शून्य होता है। यदि कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करता है, तो बल अधिकतम होता है।
विद्युत मोटर
विद्युत मोटर एक ऐसी युक्ति है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है। इसका उपयोग पंखे, कूलर, पंप, मिक्सर, वॉशिंग मशीन तथा अनेक अन्य विद्युत उपकरणों में किया जाता है।
विद्युत मोटर का सिद्धांत
विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है। यदि एक धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाए, तो कुंडली की दोनों भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगता है। ये बल एक बल-युग्म बनाते हैं, जिससे कुंडली घूमने लगती है।
विद्युत मोटर की रचना
एक साधारण विद्युत मोटर में मुख्यतः निम्न भाग होते हैं:
- शक्तिशाली चुंबक
- आर्मेचर या कुंडली
- विभक्त वलय
- कार्बन ब्रश
- बैटरी या विद्युत स्रोत
आर्मेचर
आर्मेचर एक आयताकार कुंडली होती है, जिसे सामान्यतः नरम लोहे के क्रोड पर विद्युतरोधी ताँबे के तार को लपेटकर बनाया जाता है। यह चुंबकीय क्षेत्र में घूम सकती है।
विभक्त वलय
विभक्त वलय धारा की दिशा को प्रत्येक आधे चक्कर के बाद बदलने का कार्य करता है। इसी कारण कुंडली पर लगने वाला बल-युग्म उसकी घूर्णन गति को बनाए रखता है।
ब्रश
कार्बन ब्रश विभक्त वलय से संपर्क बनाए रखते हैं और बाहरी परिपथ से विद्युत धारा को कुंडली तक पहुँचाते हैं।
विद्युत मोटर की कार्यविधि
जब बैटरी से कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चुंबकीय क्षेत्र में स्थित कुंडली की दोनों भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगता है। इन बलों से एक बल-युग्म उत्पन्न होता है और कुंडली घूमने लगती है। आधा चक्कर पूरा होने के बाद विभक्त वलय धारा की दिशा बदल देता है। इससे बल-युग्म की दिशा इस प्रकार बनी रहती है कि कुंडली लगातार घूमती रहती है।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
जब किसी बंद कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो कुंडली में विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। यदि कुंडली का परिपथ बंद हो, तो उसमें प्रेरित विद्युत धारा प्रवाहित होती है। इस घटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज माइकल फैराडे ने की थी।
फैराडे का प्रयोग
एक कुंडली को गैल्वेनोमीटर से जोड़ा जाता है। जब किसी छड़ चुंबक को कुंडली की ओर तेजी से ले जाया जाता है, तो गैल्वेनोमीटर में क्षणिक विक्षेप दिखाई देता है। जब चुंबक को कुंडली से दूर ले जाया जाता है, तो विपरीत दिशा में विक्षेप दिखाई देता है।
जब चुंबक और कुंडली दोनों स्थिर रहते हैं, तो गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता। इससे स्पष्ट होता है कि प्रेरित धारा चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है।
फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम
फैराडे के अनुसार जब किसी बंद परिपथ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
e ∝ -dΦ/dt
ऋणात्मक चिन्ह यह बताता है कि प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह उत्पन्न हुआ है। इसे लेंज का नियम भी स्पष्ट करता है।
फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम
फ्लेमिंग के दक्षिणहस्त नियम से चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात की जाती है। दाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे को एक-दूसरे के लंबवत रखें। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और अंगूठा चालक की गति की दिशा बताता है, तो मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा बताती है।
विद्युत जनित्र
विद्युत जनित्र या डायनमो वह युक्ति है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। यह विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
विद्युत जनित्र का सिद्धांत
जब किसी बंद कुंडली को शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स लगातार बदलता रहता है। इस परिवर्तन के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है और बाहरी परिपथ बंद होने पर प्रेरित विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र में उत्पन्न धारा की दिशा समय के साथ बदलती रहती है। इसमें सामान्यतः दो सर्पी वलय और ब्रश का उपयोग किया जाता है। कुंडली के प्रत्येक आधे चक्कर में प्रेरित धारा की दिशा बदल जाती है।
दिष्ट धारा जनित्र
दिष्ट धारा जनित्र में बाहरी परिपथ में धारा एक ही दिशा में प्राप्त की जाती है। इसमें सर्पी वलयों के स्थान पर विभक्त वलय या दिक्परिवर्तक का उपयोग किया जाता है।
AC और DC जनित्र में अंतर
| आधार | AC जनित्र | DC जनित्र |
|---|---|---|
| धारा की दिशा | समय-समय पर बदलती है | एक ही दिशा में प्राप्त होती है |
| वलय | सर्पी वलय | विभक्त वलय |
| मुख्य कार्य | प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करना | दिष्ट धारा प्राप्त करना |
घरेलू विद्युत सुरक्षा
घरेलू विद्युत परिपथ में विद्युत उपकरणों का सुरक्षित उपयोग अत्यंत आवश्यक है। अत्यधिक धारा, लघुपथन या अतिभारण के कारण तार गर्म हो सकते हैं और आग लगने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए विद्युत परिपथ में फ्यूज या उपयुक्त सर्किट ब्रेकर का उपयोग किया जाता है।
लघुपथन
जब विद्युत परिपथ में धारा बहुत कम प्रतिरोध वाले मार्ग से प्रवाहित होने लगती है, तो इसे लघुपथन या शॉर्ट सर्किट कहते हैं। लघुपथन के समय धारा का मान अचानक बहुत अधिक बढ़ सकता है। इससे तार गर्म होकर क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और आग लगने का खतरा हो सकता है।
अतिभारण
जब किसी विद्युत परिपथ में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है, तो इसे अतिभारण कहते हैं। एक ही सॉकेट से बहुत अधिक विद्युत उपकरण जोड़ने पर अतिभारण हो सकता है। इससे बचने के लिए उचित क्षमता वाले तार, फ्यूज और सर्किट ब्रेकर का उपयोग करना चाहिए।
फ्यूज
फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है जो विद्युत परिपथ को अत्यधिक धारा से बचाती है। इसमें कम गलनांक वाला तार लगाया जाता है। जब परिपथ में अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है।
महत्वपूर्ण सूत्र
- F = BIL sin θ
- F = qvB sin θ
- e ∝ -dΦ/dt
- Φ = BA cos θ
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- विद्युत धारा के कारण किस प्रकार का क्षेत्र उत्पन्न होता है?
(a) केवल विद्युत क्षेत्र (b) चुंबकीय क्षेत्र (c) गुरुत्वीय क्षेत्र (d) कोई क्षेत्र नहीं
उत्तर: (b) चुंबकीय क्षेत्र - धारावाही सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कैसी होती हैं?
(a) सीधी (b) संकेंद्री वृत्ताकार (c) अरीय (d) परवलयाकार
उत्तर: (b) संकेंद्री वृत्ताकार - दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम से क्या ज्ञात किया जाता है?
(a) धारा का परिमाण (b) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा (c) प्रतिरोध (d) विभवांतर
उत्तर: (b) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा - धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र कैसा होता है?
(a) शून्य (b) लगभग एकसमान (c) हमेशा बदलता हुआ (d) केवल सिरों पर
उत्तर: (b) लगभग एकसमान - चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल का सूत्र क्या है?
(a) F = BIL sin θ (b) F = IR (c) F = V/I (d) F = q/t
उत्तर: (a) F = BIL sin θ - यदि चालक चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर हो, तो उस पर चुंबकीय बल कितना होगा?
(a) अधिकतम (b) शून्य (c) अनंत (d) BIL
उत्तर: (b) शून्य - फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से क्या ज्ञात किया जाता है?
(a) प्रेरित धारा की दिशा (b) चालक पर लगने वाले बल की दिशा (c) प्रतिरोध (d) विभव
उत्तर: (b) चालक पर लगने वाले बल की दिशा - विद्युत मोटर किस ऊर्जा को किस ऊर्जा में बदलती है?
(a) यांत्रिक को विद्युत (b) विद्युत को यांत्रिक (c) रासायनिक को विद्युत (d) प्रकाश को विद्युत
उत्तर: (b) विद्युत को यांत्रिक - विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या कार्य है?
(a) धारा की दिशा बदलना (b) धारा रोकना (c) विभव बढ़ाना (d) प्रतिरोध कम करना
उत्तर: (a) धारा की दिशा बदलना - विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज किसने की?
(a) न्यूटन (b) फैराडे (c) ओम (d) आइंस्टीन
उत्तर: (b) फैराडे - विद्युत चुंबकीय प्रेरण में क्या परिवर्तन आवश्यक है?
(a) तापमान (b) चुंबकीय फ्लक्स (c) द्रव्यमान (d) प्रतिरोध
उत्तर: (b) चुंबकीय फ्लक्स - फ्लेमिंग के दक्षिणहस्त नियम से क्या ज्ञात किया जाता है?
(a) बल की दिशा (b) प्रेरित धारा की दिशा (c) प्रतिरोध (d) तापमान
उत्तर: (b) प्रेरित धारा की दिशा - विद्युत जनित्र किस ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है?
(a) विद्युत (b) यांत्रिक (c) रासायनिक (d) ऊष्मीय
उत्तर: (b) यांत्रिक - विद्युत जनित्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
(a) ओम का नियम (b) विद्युत चुंबकीय प्रेरण (c) जूल का नियम (d) परावर्तन
उत्तर: (b) विद्युत चुंबकीय प्रेरण - AC जनित्र में किस प्रकार के वलय होते हैं?
(a) विभक्त वलय (b) सर्पी वलय (c) कोई वलय नहीं (d) लोहे के वलय
उत्तर: (b) सर्पी वलय - DC जनित्र में किसका उपयोग होता है?
(a) सर्पी वलय (b) विभक्त वलय (c) दिक्सूचक (d) संधारित्र
उत्तर: (b) विभक्त वलय - लघुपथन के समय धारा का मान क्या होता है?
(a) बहुत कम (b) शून्य (c) बहुत अधिक (d) स्थिर
उत्तर: (c) बहुत अधिक - अतिभारण से बचाने के लिए किस युक्ति का उपयोग किया जाता है?
(a) फ्यूज (b) बल्ब (c) मोटर (d) गैल्वेनोमीटर
उत्तर: (a) फ्यूज - चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक क्या है?
(a) टेस्ला (b) वेबर (c) ओम (d) ऐम्पियर
उत्तर: (b) वेबर - चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई क्या है?
(a) वेबर (b) टेस्ला (c) वोल्ट (d) जूल
उत्तर: (b) टेस्ला
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: चुंबकीय क्षेत्र क्या है?
उत्तर: चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें चुंबकीय बल का अनुभव किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। - प्रश्न: चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या हैं?
उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने वाली काल्पनिक रेखाओं को चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं। - प्रश्न: परिनालिका क्या है?
उत्तर: पास-पास लिपटे विद्युतरोधी तार के अनेक फेरों वाली बेलनाकार कुंडली को परिनालिका कहते हैं। - प्रश्न: विद्युत मोटर क्या है?
उत्तर: विद्युत मोटर वह युक्ति है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। - प्रश्न: विद्युत चुंबकीय प्रेरण क्या है?
उत्तर: चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण बंद कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा उत्पन्न होने की घटना विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहलाती है। - प्रश्न: विद्युत जनित्र क्या है?
उत्तर: विद्युत जनित्र वह युक्ति है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है। - प्रश्न: फ्लेमिंग का वामहस्त नियम किसके लिए प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: इसका उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है। - प्रश्न: फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम किसके लिए प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: इसका उपयोग गतिमान चालक में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है। - प्रश्न: चुंबकीय फ्लक्स की इकाई क्या है?
उत्तर: चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई वेबर है। - प्रश्न: चुंबकीय क्षेत्र की इकाई क्या है?
उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई टेस्ला है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम को समझाइए।
उत्तर: यदि धारावाही सीधे चालक को दाएँ हाथ से इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उँगलियों की दिशा चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है। - प्रश्न: धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र कैसा होता है?
उत्तर: धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र प्रबल और लगभग एकसमान होता है। इसकी क्षेत्र रेखाएँ लगभग समानांतर होती हैं। - प्रश्न: चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाला बल किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: बल चुंबकीय क्षेत्र B, चालक में प्रवाहित धारा I, चालक की लंबाई L तथा चालक और चुंबकीय क्षेत्र के बीच कोण θ पर निर्भर करता है। इसका सूत्र F = BIL sin θ है। - प्रश्न: विद्युत मोटर का सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है। कुंडली की विपरीत भुजाओं पर लगे बल एक बल-युग्म बनाते हैं, जिससे कुंडली घूमने लगती है। - प्रश्न: विद्युत चुंबकीय प्रेरण को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जब किसी चुंबक को कुंडली के पास लाया या उससे दूर ले जाया जाता है, तो कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इसे विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। - प्रश्न: विद्युत जनित्र का सिद्धांत क्या है?
उत्तर: विद्युत जनित्र विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली को घुमाने पर उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। - प्रश्न: लघुपथन क्या है?
उत्तर: जब परिपथ में विद्युत धारा बहुत कम प्रतिरोध वाले अनचाहे मार्ग से बहने लगती है, तो इसे लघुपथन कहते हैं। इससे धारा अचानक बहुत अधिक बढ़ सकती है। - प्रश्न: अतिभारण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब किसी परिपथ की निर्धारित क्षमता से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होने लगे, तो इसे अतिभारण कहते हैं। एक ही सॉकेट पर बहुत अधिक उपकरण लगाने से यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: विद्युत मोटर की रचना और कार्यविधि समझाइए।
उत्तर: विद्युत मोटर में शक्तिशाली चुंबक, आयताकार आर्मेचर कुंडली, विभक्त वलय, कार्बन ब्रश और बैटरी मुख्य भाग होते हैं। कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है। बैटरी से कुंडली में धारा प्रवाहित करने पर उसकी दोनों भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगता है। ये बल एक बल-युग्म बनाते हैं और कुंडली घूमने लगती है। आधे चक्कर के बाद विभक्त वलय धारा की दिशा बदल देता है, जिससे बल-युग्म की दिशा उचित रूप से बनी रहती है और कुंडली लगातार घूमती रहती है। इस प्रकार विद्युत ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित होती है। - प्रश्न: विद्युत चुंबकीय प्रेरण को फैराडे के प्रयोग द्वारा समझाइए।
उत्तर: एक विद्युतरोधी तार की कुंडली को गैल्वेनोमीटर से जोड़ा जाता है। जब छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव को कुंडली की ओर तेजी से ले जाया जाता है, तो गैल्वेनोमीटर में विक्षेप होता है। चुंबक को कुंडली से दूर ले जाने पर विपरीत दिशा में विक्षेप होता है। चुंबक को कुंडली के पास स्थिर रखने पर कोई विक्षेप नहीं होता। इससे सिद्ध होता है कि कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर ही प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है। - प्रश्न: विद्युत जनित्र की रचना और कार्यविधि समझाइए।
उत्तर: विद्युत जनित्र में शक्तिशाली क्षेत्र चुंबक, आर्मेचर कुंडली, वलय और ब्रश मुख्य भाग होते हैं। कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है। कुंडली के घूमने से उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता है। फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत के अनुसार कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। बाहरी परिपथ बंद होने पर प्रेरित धारा प्रवाहित होती है। इस प्रकार जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। - प्रश्न: चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल को समझाइए।
उत्तर: जब किसी धारावाही चालक को बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो चालक पर चुंबकीय बल लगता है। बल का मान F = BIL sin θ होता है। यहाँ B चुंबकीय क्षेत्र, I धारा, L चालक की लंबाई और θ चालक तथा चुंबकीय क्षेत्र के बीच कोण है। यदि चालक क्षेत्र के लंबवत हो, तो बल अधिकतम होता है और F = BIL होता है। यदि चालक क्षेत्र के समानांतर हो, तो बल शून्य होता है। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से ज्ञात की जाती है। - प्रश्न: AC और DC जनित्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: AC जनित्र में उत्पन्न धारा की दिशा समय के साथ बदलती रहती है और इसमें सर्पी वलय प्रयोग किए जाते हैं। DC जनित्र में बाहरी परिपथ में धारा एक ही दिशा में प्राप्त होती है और इसमें विभक्त वलय या दिक्परिवर्तक प्रयोग किया जाता है। दोनों विद्युत जनित्र विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- चुंबकीय क्षेत्र क्या है?
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण लिखिए।
- दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम को समझाइए।
- धारावाही सीधे चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र को समझाइए।
- परिनालिका क्या है? इसके अंदर चुंबकीय क्षेत्र कैसा होता है?
- चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल का सूत्र लिखिए।
- फ्लेमिंग का वामहस्त नियम लिखिए।
- विद्युत मोटर का सिद्धांत, रचना और कार्यविधि समझाइए।
- विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या कार्य है?
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण क्या है?
- फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के प्रयोग को समझाइए।
- फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम लिखिए।
- विद्युत जनित्र का सिद्धांत और कार्यविधि समझाइए।
- AC और DC जनित्र में अंतर बताइए।
- लघुपथन क्या है?
- अतिभारण क्या है?
- फ्यूज का क्या कार्य है?
- चुंबकीय फ्लक्स क्या है? इसकी SI इकाई लिखिए।
- गतिमान आवेशित कण पर चुंबकीय बल का सूत्र लिखिए।
- विद्युत मोटर और विद्युत जनित्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- विद्युत धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
- धारावाही सीधे चालक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्री वृत्त होती हैं।
- दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम से चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जाती है।
- धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र लगभग एकसमान होता है।
- धारावाही चालक पर बल F = BIL sin θ होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल F = qvB sin θ होता है।
- फ्लेमिंग का वामहस्त नियम मोटर के लिए महत्वपूर्ण है।
- विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज माइकल फैराडे ने की थी।
- फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने में उपयोगी है।
- विद्युत जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
- विद्युत जनित्र विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
- AC जनित्र में सर्पी वलय का उपयोग होता है।
- DC जनित्र में विभक्त वलय का उपयोग होता है।
- लघुपथन में धारा का मान अचानक बहुत अधिक बढ़ सकता है।
- अतिभारण से बचने के लिए फ्यूज या सर्किट ब्रेकर का उपयोग किया जाता है।
- चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई वेबर है।
- चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई टेस्ला है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 13 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 13 “विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव” है। - प्रश्न: विद्युत मोटर किस सिद्धांत पर कार्य करती है?
उत्तर: विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है। - प्रश्न: विद्युत मोटर में विद्युत ऊर्जा किसमें बदलती है?
उत्तर: विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। - प्रश्न: विद्युत जनित्र किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर: विद्युत जनित्र विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। - प्रश्न: विद्युत जनित्र में ऊर्जा का रूपांतरण क्या होता है?
उत्तर: विद्युत जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है। - प्रश्न: फ्लेमिंग का वामहस्त नियम किसके लिए है?
उत्तर: इसका उपयोग चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है। - प्रश्न: फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम किसके लिए है?
उत्तर: इसका उपयोग गतिमान चालक में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है। - प्रश्न: विद्युत चुंबकीय प्रेरण क्या है?
उत्तर: चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा उत्पन्न होने की घटना विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहलाती है। - प्रश्न: लघुपथन के समय धारा क्यों बढ़ जाती है?
उत्तर: लघुपथन में परिपथ का प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है। ओम के नियम के अनुसार समान विभवांतर पर प्रतिरोध कम होने से धारा बहुत अधिक बढ़ जाती है। - प्रश्न: फ्यूज का क्या कार्य है?
उत्तर: फ्यूज अत्यधिक धारा प्रवाहित होने पर पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है और विद्युत उपकरणों तथा तारों को नुकसान से बचाता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 13)
“विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव” अध्याय विद्युत और चुंबकत्व के बीच महत्वपूर्ण संबंध को समझाता है। इसमें धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र, परिनालिका, चुंबकीय क्षेत्र में चालक पर बल, विद्युत मोटर, विद्युत चुंबकीय प्रेरण और विद्युत जनित्र जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ शामिल हैं।
परीक्षा की दृष्टि से दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम, फ्लेमिंग के वामहस्त एवं दक्षिणहस्त नियम, विद्युत मोटर की रचना और कार्यविधि, फैराडे का प्रयोग, विद्युत जनित्र, AC और DC जनित्र में अंतर तथा लघुपथन और अतिभारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को सूत्रों के साथ-साथ नियमों और उपकरणों के सिद्धांत को भी अच्छी तरह समझना चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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