कार्बन एवं इसके यौगिक – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
कार्बन एवं इसके यौगिक – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4)
“कार्बन एवं इसके यौगिक” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के रसायन विज्ञान खंड का चौथा अध्याय है। कार्बन एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है, क्योंकि हमारे शरीर, भोजन, ईंधन, औषधियों, प्लास्टिक, कपड़ों और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले अनेक पदार्थों में कार्बन के यौगिक पाए जाते हैं। कार्बन की विशेषता यह है कि यह बड़ी संख्या में यौगिकों का निर्माण करता है।
इस अध्याय में कार्बन की संयोजकता, सहसंयोजक बंध, कार्बन की श्रृंखला बनाने की क्षमता, संतृप्त और असंतृप्त यौगिक, समजातीय श्रेणी तथा विभिन्न कार्बनिक यौगिकों के नामकरण और गुणों का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल, साबुन और डिटर्जेंट जैसे दैनिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पदार्थों को भी समझाया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें कार्बन की चतुसंयोजकता, श्रृंखलन, सहसंयोजक बंध, समजातीय श्रेणी, रासायनिक अभिक्रियाएँ, एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल के गुण तथा साबुन और डिटर्जेंट से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
कार्बन की विशेषताएँ
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है। इसकी इलेक्ट्रॉनिक संरचना 2, 4 होती है। बाहरी कक्षा में चार इलेक्ट्रॉन होने के कारण कार्बन की संयोजकता चार होती है। कार्बन अपने बाहरी कक्षा के चार इलेक्ट्रॉनों को न तो आसानी से त्यागता है और न ही चार इलेक्ट्रॉन आसानी से ग्रहण करता है। इसलिए यह सामान्यतः दूसरे परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके बंध बनाता है।
कार्बन की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं – चतुसंयोजकता और श्रृंखलन। इन्हीं गुणों के कारण कार्बन लाखों प्रकार के यौगिकों का निर्माण करने में सक्षम है।
चतुसंयोजकता
कार्बन की संयोजकता चार होती है, इसलिए इसे चतुसंयोजक कहा जाता है। कार्बन अपने चार संयोजक इलेक्ट्रॉनों की सहायता से अन्य परमाणुओं के साथ चार सहसंयोजक बंध बना सकता है। उदाहरण के लिए मीथेन में एक कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ बंध बनाता है।
CH4 मीथेन का रासायनिक सूत्र है। इसमें कार्बन और प्रत्येक हाइड्रोजन के बीच एक-एक सहसंयोजक बंध होता है।
श्रृंखलन क्या है?
कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखला, शाखित श्रृंखला या वलय बनाने का गुण श्रृंखलन कहलाता है। कार्बन-कार्बन बंध काफी मजबूत होता है। इसी कारण कार्बन अपने ही परमाणुओं के साथ जुड़कर बहुत लंबी श्रृंखलाएँ बना सकता है।
कार्बन के श्रृंखलन गुण के कारण सरल यौगिकों से लेकर अत्यंत जटिल कार्बनिक यौगिकों तक का निर्माण संभव होता है। यही कारण है कि कार्बन के यौगिकों की संख्या बहुत अधिक है।
सहसंयोजक बंध
दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनने वाले बंध को सहसंयोजक बंध कहते हैं। कार्बन अपने चार इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके दूसरे कार्बन या अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है।
मीथेन में कार्बन चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करता है। इसी प्रकार एथेन में दो कार्बन परमाणु आपस में जुड़े होते हैं और प्रत्येक कार्बन अपनी शेष संयोजकताएँ हाइड्रोजन के साथ पूरी करता है।
कार्बन यौगिकों की संरचना
कार्बन यौगिकों में कार्बन परमाणु एकल, द्वि या त्रिबंध बना सकते हैं। एकल बंध वाले यौगिकों को संतृप्त यौगिक कहा जाता है, जबकि द्विबंध या त्रिबंध वाले यौगिक असंतृप्त यौगिक कहलाते हैं।
उदाहरण के लिए एथेन में कार्बन-कार्बन के बीच एकल बंध होता है। एथीन में कार्बन-कार्बन के बीच द्विबंध और एथाइन में त्रिबंध होता है।
संतृप्त हाइड्रोकार्बन
वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध पाए जाते हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। इन्हें सामान्यतः एल्केन कहा जाता है।
एल्केन का सामान्य सूत्र CnH2n+2 होता है। मीथेन, एथेन, प्रोपेन और ब्यूटेन इसके उदाहरण हैं।
- मीथेन – CH4
- एथेन – C2H6
- प्रोपेन – C3H8
- ब्यूटेन – C4H10
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्विबंध या त्रिबंध पाया जाता है, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। द्विबंध वाले यौगिक एल्कीन और त्रिबंध वाले यौगिक एल्काइन कहलाते हैं।
एथीन का सूत्र C2H4 और एथाइन का सूत्र C2H2 है। असंतृप्त यौगिक सामान्यतः योगात्मक अभिक्रियाएँ करते हैं।
हाइड्रोकार्बन क्या हैं?
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें केवल कार्बन और हाइड्रोजन तत्व उपस्थित होते हैं, हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। मीथेन, एथेन, एथीन और एथाइन हाइड्रोकार्बन के उदाहरण हैं।
हाइड्रोकार्बन को मुख्यतः संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में बाँटा जाता है। इनके गुण और रासायनिक अभिक्रियाएँ उनकी संरचना तथा बंधों की प्रकृति पर निर्भर करती हैं।
समजातीय श्रेणी
कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिसमें समान क्रियात्मक समूह और समान रासायनिक गुण होते हैं तथा क्रमिक सदस्यों के आणविक सूत्र में CH2 का अंतर होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
उदाहरण के लिए एल्केन की श्रेणी में मीथेन, एथेन, प्रोपेन और ब्यूटेन क्रमशः आते हैं। प्रत्येक अगले सदस्य में पिछले सदस्य की तुलना में CH2 अधिक होता है।
- CH4 – मीथेन
- C2H6 – एथेन
- C3H8 – प्रोपेन
- C4H10 – ब्यूटेन
समजातीय श्रेणी की विशेषताएँ
- सभी सदस्यों में समान क्रियात्मक समूह होता है।
- सदस्यों के रासायनिक गुण सामान्यतः समान होते हैं।
- क्रमिक सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में 14 u का अंतर होता है।
- क्रमिक सदस्यों के सूत्र में CH2 का अंतर होता है।
- भौतिक गुणों में क्रमिक रूप से परिवर्तन होता है।
क्रियात्मक समूह
कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह परमाणु या परमाणुओं का समूह जो उस यौगिक की विशिष्ट रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए उत्तरदायी होता है, क्रियात्मक समूह कहलाता है।
| क्रियात्मक समूह | नाम | उदाहरण |
|---|---|---|
| –OH | हाइड्रॉक्सिल | एथेनॉल |
| –CHO | ऐल्डिहाइड | एथेनल |
| >C=O | कीटोन | प्रोपेनोन |
| –COOH | कार्बोक्सिलिक अम्ल | एथेनोइक अम्ल |
| –Cl | क्लोरो | क्लोरोएथेन |
कार्बन यौगिकों का नामकरण
कार्बनिक यौगिकों के नामकरण के लिए कार्बन परमाणुओं की संख्या और उपस्थित क्रियात्मक समूह की पहचान महत्वपूर्ण होती है। एक कार्बन वाले यौगिक के लिए “मेथ”, दो के लिए “एथ”, तीन के लिए “प्रोप” और चार के लिए “ब्यूट” जैसे मूल शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण के लिए CH4 का नाम मीथेन, C2H6 का नाम एथेन और C3H8 का नाम प्रोपेन है।
कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण
कार्बन के यौगिक विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ करते हैं। इनमें दहन, ऑक्सीकरण, योगात्मक अभिक्रिया और प्रतिस्थापन अभिक्रिया प्रमुख हैं।
दहन अभिक्रिया
कार्बन के अधिकांश यौगिक ऑक्सीजन में जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। इस प्रक्रिया को दहन कहते हैं।
मीथेन के दहन की अभिक्रिया:
CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + ऊर्जा
कार्बन यौगिकों का दहन ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न कर सकता है। पेट्रोल, डीजल, LPG और CNG जैसे अनेक ईंधनों का उपयोग इसी कारण ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
ऑक्सीकरण अभिक्रिया
किसी कार्बनिक यौगिक में ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना सामान्यतः ऑक्सीकरण कहलाता है। एथेनॉल का ऑक्सीकरण करके एथेनोइक अम्ल प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में ऑक्सीकारक का उपयोग किया जाता है।
CH3CH2OH + 2[O] → CH3COOH + H2O
योगात्मक अभिक्रिया
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में द्विबंध या त्रिबंध के कारण अतिरिक्त परमाणुओं या समूहों के जुड़ने की अभिक्रिया को योगात्मक अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण के लिए एथीन हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके एथेन बनाता है:
CH2=CH2 + H2 → CH3–CH3
इस अभिक्रिया में निकेल या प्लेटिनम जैसे उत्प्रेरक का उपयोग किया जा सकता है। वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में भी इस प्रकार की अभिक्रिया का उपयोग किया जाता है।
प्रतिस्थापन अभिक्रिया
संतृप्त हाइड्रोकार्बन सामान्यतः प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ करते हैं। इसमें हाइड्रोकार्बन के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को किसी अन्य परमाणु या समूह द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
उदाहरण के लिए मीथेन सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोमीथेन बनाता है:
CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl
एथेनॉल
एथेनॉल एक महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक है। इसका रासायनिक सूत्र C2H5OH है। इसे सामान्यतः एथिल अल्कोहल भी कहा जाता है। यह रंगहीन द्रव है और पानी में घुलनशील होता है।
एथेनॉल का उपयोग विलायक, औषधीय उत्पादों और कुछ ईंधन मिश्रणों में किया जाता है। इसका औद्योगिक और रासायनिक महत्व भी बहुत अधिक है।
एथेनॉल की सोडियम के साथ अभिक्रिया
एथेनॉल सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एथॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाता है।
2C2H5OH + 2Na → 2C2H5ONa + H2↑
इस अभिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि एथेनॉल में उपस्थित हाइड्रॉक्सिल समूह रासायनिक अभिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एथेनॉल का ऑक्सीकरण
एथेनॉल को उपयुक्त ऑक्सीकारक की सहायता से ऑक्सीकृत करने पर एथेनोइक अम्ल प्राप्त होता है।
CH3CH2OH + 2[O] → CH3COOH + H2O
एथेनॉल के ऑक्सीकरण की प्रक्रिया कार्बनिक रसायन में अत्यंत महत्वपूर्ण है और परीक्षा में इससे संबंधित रासायनिक समीकरण पूछा जा सकता है।
एथेनोइक अम्ल
एथेनोइक अम्ल का रासायनिक सूत्र CH3COOH है। इसे सामान्यतः एसीटिक अम्ल कहा जाता है। सिरके में एथेनोइक अम्ल का तनु विलयन पाया जाता है। यह एक कार्बोक्सिलिक अम्ल है।
एथेनोइक अम्ल में –COOH क्रियात्मक समूह उपस्थित होता है। यह अम्लीय प्रकृति का होता है और कई सामान्य अम्ल-क्षार अभिक्रियाएँ करता है।
एथेनोइक अम्ल की सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट से अभिक्रिया
एथेनोइक अम्ल सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एसीटेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑
इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। गैस निकलने के कारण बुलबुले दिखाई देते हैं। यह कार्बोक्सिलिक अम्ल की पहचान से संबंधित महत्वपूर्ण अभिक्रिया है।
एस्टरीकरण अभिक्रिया
कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की अभिक्रिया से एस्टर तथा जल बनने की प्रक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं। एस्टर सामान्यतः सुखद गंध वाले पदार्थ होते हैं और उनका उपयोग सुगंध तथा फ्लेवर बनाने में किया जाता है।
एथेनोइक अम्ल और एथेनॉल की अभिक्रिया से एथिल एथेनोएट बनता है:
CH3COOH + C2H5OH ⇌ CH3COOC2H5 + H2O
साबुनीकरण
एस्टर की क्षार के साथ अभिक्रिया से अल्कोहल और कार्बोक्सिलेट लवण बनने की प्रक्रिया को साबुनीकरण कहा जाता है। साबुन के निर्माण में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
साबुन क्या है?
साबुन उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। ये जल में घुलकर ऐसे अणु बनाते हैं जो तेल और गंदगी को हटाने में सहायता करते हैं। साबुन के अणु में एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है जो जल से दूर रहने वाली होती है तथा एक आयनिक सिरा होता है जो जल के साथ आकर्षित होता है।
साबुन की सफाई की क्रिया
साबुन का अणु दो भागों से बना माना जा सकता है। इसका लंबा हाइड्रोकार्बन भाग तेल और चिकनाई की ओर आकर्षित होता है, जबकि आयनिक भाग जल की ओर आकर्षित होता है। जब साबुन पानी में मिलाया जाता है, तो इसके अणु गंदगी और तेल के आसपास व्यवस्थित होकर मिसेल बना सकते हैं।
मिसेल की सहायता से तेल और गंदगी पानी में निलंबित हो जाती है और कपड़े या वस्तु को पानी से धोने पर गंदगी हट जाती है। इसी कारण साबुन सफाई करने में सक्षम होता है।
मिसेल क्या है?
साबुन के अणुओं का ऐसा समूह जिसमें जलविरागी भाग अंदर की ओर और जलस्नेही भाग बाहर की ओर व्यवस्थित हो जाता है, मिसेल कहलाता है। मिसेल निर्माण साबुन की सफाई प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भाग है।
कठोर जल में साबुन
कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण उपस्थित होते हैं। ये लवण साबुन के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील पदार्थ बनाते हैं जिसे सामान्यतः स्कम कहा जाता है। इसके कारण साबुन की सफाई क्षमता कम हो जाती है।
कठोर जल में साबुन अधिक मात्रा में खर्च होता है और झाग भी कम बनता है। यही कारण है कि कठोर जल में साबुन की तुलना में डिटर्जेंट अधिक उपयोगी हो सकते हैं।
डिटर्जेंट क्या है?
डिटर्जेंट ऐसे कृत्रिम सफाई पदार्थ हैं जिनमें सामान्यतः सल्फोनेट या सल्फेट जैसे समूह पाए जाते हैं। डिटर्जेंट कठोर जल में भी प्रभावी ढंग से सफाई कर सकते हैं, क्योंकि वे कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ साबुन की तरह अघुलनशील स्कम नहीं बनाते।
साबुन और डिटर्जेंट में अंतर
| आधार | साबुन | डिटर्जेंट |
|---|---|---|
| निर्माण | वसीय अम्लों के लवण | कृत्रिम कार्बनिक सफाई पदार्थ |
| कठोर जल | कम प्रभावी | अधिक प्रभावी |
| स्कम | कठोर जल में स्कम बना सकता है | सामान्यतः ऐसा स्कम नहीं बनाता |
| पर्यावरण | कई साबुन जैव-अवक्रमणीय होते हैं | कुछ डिटर्जेंट पर्यावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं |
कार्बन यौगिकों के उपयोग
कार्बन यौगिकों का उपयोग हमारे दैनिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र में होता है। ईंधन के रूप में LPG, CNG, पेट्रोल और डीजल कार्बन यौगिकों पर आधारित हैं। एथेनॉल का उपयोग विभिन्न औद्योगिक और रासायनिक कार्यों में किया जाता है। एथेनोइक अम्ल का उपयोग खाद्य संरक्षण और अन्य रासायनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
इसके अलावा प्लास्टिक, रबर, औषधियाँ, रंग, सौंदर्य प्रसाधन, कृत्रिम रेशे और अनेक औद्योगिक पदार्थ भी कार्बन यौगिकों से संबंधित हैं। इसलिए कार्बन का अध्ययन रसायन विज्ञान के साथ-साथ दैनिक जीवन को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण
- CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O
- CH2=CH2 + H2 → CH3–CH3
- CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl
- 2C2H5OH + 2Na → 2C2H5ONa + H2
- CH3CH2OH + 2[O] → CH3COOH + H2O
- CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2
- CH3COOH + C2H5OH ⇌ CH3COOC2H5 + H2O
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- कार्बन का परमाणु क्रमांक कितना है?
(a) 4 (b) 6 (c) 8 (d) 12
उत्तर: (b) 6 - कार्बन की संयोजकता कितनी होती है?
(a) 1 (b) 2 (c) 3 (d) 4
उत्तर: (d) 4 - कार्बन की अपने ही परमाणुओं से बंध बनाकर श्रृंखला बनाने की क्षमता क्या कहलाती है?
(a) चतुसंयोजकता (b) श्रृंखलन (c) आयनीकरण (d) विस्थापन
उत्तर: (b) श्रृंखलन - इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनने वाला बंध क्या कहलाता है?
(a) आयनिक बंध (b) धात्विक बंध (c) सहसंयोजक बंध (d) हाइड्रोजन बंध
उत्तर: (c) सहसंयोजक बंध - मीथेन का रासायनिक सूत्र क्या है?
(a) CH3 (b) CH4 (c) C2H6 (d) C2H4
उत्तर: (b) CH4 - संतृप्त हाइड्रोकार्बन में किस प्रकार के बंध पाए जाते हैं?
(a) केवल एकल बंध (b) केवल द्विबंध (c) केवल त्रिबंध (d) द्वि और त्रिबंध
उत्तर: (a) केवल एकल बंध - एथीन किस प्रकार का हाइड्रोकार्बन है?
(a) संतृप्त (b) असंतृप्त (c) धातु (d) अधातु
उत्तर: (b) असंतृप्त - समजातीय श्रेणी के क्रमिक सदस्यों में कितना अंतर होता है?
(a) CH3 (b) CH2 (c) OH (d) COOH
उत्तर: (b) CH2 - एथेनॉल का रासायनिक सूत्र क्या है?
(a) CH3OH (b) C2H5OH (c) CH3COOH (d) C2H6
उत्तर: (b) C2H5OH - एथेनोइक अम्ल का सूत्र क्या है?
(a) CH3OH (b) CH3COOH (c) C2H6 (d) C2H4
उत्तर: (b) CH3COOH - एथेनोइक अम्ल का सामान्य नाम क्या है?
(a) फॉर्मिक अम्ल (b) एसीटिक अम्ल (c) ऑक्सैलिक अम्ल (d) साइट्रिक अम्ल
उत्तर: (b) एसीटिक अम्ल - एथेनॉल के ऑक्सीकरण से क्या प्राप्त होता है?
(a) मीथेन (b) एथेन (c) एथेनोइक अम्ल (d) एथीन
उत्तर: (c) एथेनोइक अम्ल - एथेनोइक अम्ल और एथेनॉल की अभिक्रिया क्या कहलाती है?
(a) दहन (b) एस्टरीकरण (c) प्रतिस्थापन (d) अपघटन
उत्तर: (b) एस्टरीकरण - साबुन की सफाई प्रक्रिया में किस संरचना का महत्वपूर्ण योगदान है?
(a) क्रिस्टल (b) मिसेल (c) अयस्क (d) मिश्रधातु
उत्तर: (b) मिसेल - कठोर जल में साबुन के साथ क्या बन सकता है?
(a) ऑक्सीजन (b) स्कम (c) हाइड्रोजन (d) एथेनॉल
उत्तर: (b) स्कम
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: कार्बन की संयोजकता कितनी है?
उत्तर: कार्बन की संयोजकता चार है। - प्रश्न: श्रृंखलन क्या है?
उत्तर: कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखला या वलय बनाने का गुण श्रृंखलन कहलाता है। - प्रश्न: सहसंयोजक बंध क्या है?
उत्तर: दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनने वाला बंध सहसंयोजक बंध कहलाता है। - प्रश्न: एथेनॉल का सूत्र लिखिए।
उत्तर: C2H5OH। - प्रश्न: एथेनोइक अम्ल का सूत्र लिखिए।
उत्तर: CH3COOH। - प्रश्न: एस्टरीकरण क्या है?
उत्तर: कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की अभिक्रिया से एस्टर और जल बनने की प्रक्रिया एस्टरीकरण कहलाती है। - प्रश्न: मिसेल क्या है?
उत्तर: साबुन के अणुओं का ऐसा समूह जो जल में विशेष व्यवस्था बनाकर तेल और गंदगी को हटाने में सहायता करता है, मिसेल कहलाता है। - प्रश्न: समजातीय श्रेणी क्या है?
उत्तर: समान क्रियात्मक समूह वाले कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिसके क्रमिक सदस्यों में CH2 का अंतर होता है, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: कार्बन इतने अधिक यौगिक क्यों बनाता है?
उत्तर: कार्बन की चतुसंयोजकता और श्रृंखलन क्षमता के कारण वह अपने तथा अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ मजबूत सहसंयोजक बंध बना सकता है। कार्बन लंबी, शाखित और वलयाकार संरचनाएँ भी बना सकता है। इसी कारण कार्बन के यौगिकों की संख्या बहुत अधिक है। - प्रश्न: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अंतर बताइए।
उत्तर: संतृप्त हाइड्रोकार्बन में कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध होते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में कम-से-कम एक द्विबंध या त्रिबंध पाया जाता है। एल्केन संतृप्त तथा एल्कीन और एल्काइन असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के उदाहरण हैं। - प्रश्न: समजातीय श्रेणी की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: इसके सभी सदस्यों में समान क्रियात्मक समूह होता है, क्रमिक सदस्यों के सूत्र में CH2 का अंतर होता है और इनके रासायनिक गुण सामान्यतः समान होते हैं। इनके भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन देखा जाता है। - प्रश्न: एथेनोइक अम्ल की सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर: CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2। इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। - प्रश्न: साबुन कठोर जल में प्रभावी क्यों नहीं होता?
उत्तर: कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण होते हैं। ये साबुन के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील स्कम बनाते हैं। इससे साबुन की सफाई क्षमता कम हो जाती है। - प्रश्न: डिटर्जेंट कठोर जल में साबुन से अधिक उपयोगी क्यों होता है?
उत्तर: डिटर्जेंट सामान्यतः कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ साबुन जैसी अघुलनशील परत नहीं बनाते। इसलिए कठोर जल में भी डिटर्जेंट प्रभावी रूप से सफाई कर सकता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: कार्बन की चतुसंयोजकता और श्रृंखलन को समझाइए।
उत्तर: कार्बन की बाहरी कक्षा में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसकी संयोजकता चार होती है। इसलिए कार्बन अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके चार सहसंयोजक बंध बना सकता है। इसे चतुसंयोजकता कहते हैं। इसके अतिरिक्त कार्बन-कार्बन बंध की मजबूती के कारण कार्बन अपने ही परमाणुओं के साथ जुड़कर लंबी, शाखित और वलयाकार संरचनाएँ बना सकता है। इस गुण को श्रृंखलन कहते हैं। चतुसंयोजकता और श्रृंखलन दोनों के कारण कार्बन असंख्य यौगिकों का निर्माण करता है। - प्रश्न: कार्बन यौगिकों की प्रमुख रासायनिक अभिक्रियाओं को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: कार्बन यौगिक दहन, ऑक्सीकरण, योगात्मक और प्रतिस्थापन जैसी प्रमुख अभिक्रियाएँ करते हैं। मीथेन का ऑक्सीजन में जलना दहन अभिक्रिया है। एथेनॉल का ऑक्सीकरण करने पर एथेनोइक अम्ल प्राप्त होता है। एथीन में हाइड्रोजन जोड़ने पर एथेन बनता है, जो योगात्मक अभिक्रिया का उदाहरण है। मीथेन सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोमीथेन बनाता है, जो प्रतिस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है। - प्रश्न: एथेनॉल के गुण और उपयोग लिखिए।
उत्तर: एथेनॉल का सूत्र C2H5OH है। यह रंगहीन द्रव है और जल में घुल सकता है। यह सोडियम के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एथॉक्साइड और हाइड्रोजन बनाता है। इसका ऑक्सीकरण करने पर एथेनोइक अम्ल प्राप्त होता है। एथेनॉल का उपयोग विलायक, औद्योगिक रसायनों, औषधीय उत्पादों और कुछ ईंधन मिश्रणों में किया जाता है। - प्रश्न: एथेनोइक अम्ल के प्रमुख गुणों और अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: एथेनोइक अम्ल का सूत्र CH3COOH है और इसे एसीटिक अम्ल भी कहा जाता है। सिरके में इसका तनु विलयन पाया जाता है। यह अम्लीय प्रकृति का होता है। यह सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। यह एथेनॉल के साथ एस्टरीकरण अभिक्रिया करके एस्टर बनाता है। इसके ये गुण इसे प्रयोगशाला और दैनिक जीवन दोनों में महत्वपूर्ण बनाते हैं। - प्रश्न: साबुन की सफाई क्रिया को समझाइए।
उत्तर: साबुन के अणु में एक जलविरागी हाइड्रोकार्बन भाग और एक जलस्नेही आयनिक भाग होता है। जलविरागी भाग तेल और चिकनाई से आकर्षित होता है, जबकि जलस्नेही भाग जल की ओर आकर्षित रहता है। पानी में साबुन के अणु तेल और गंदगी के चारों ओर एक विशेष व्यवस्था बनाकर मिसेल का निर्माण कर सकते हैं। धोने पर ये मिसेल गंदगी को पानी के साथ बाहर निकालने में सहायता करते हैं। इसी कारण साबुन सफाई करने में सक्षम होता है। - प्रश्न: साबुन और डिटर्जेंट में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: साबुन सामान्यतः उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ साबुन अघुलनशील स्कम बना सकता है, जिससे इसकी सफाई क्षमता कम होती है। डिटर्जेंट कृत्रिम सफाई पदार्थ होते हैं और कठोर जल में अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी रहते हैं। इसलिए कठोर जल में कपड़े धोने के लिए डिटर्जेंट अधिक उपयोगी हो सकता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- कार्बन की चतुसंयोजकता क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
- श्रृंखलन से आप क्या समझते हैं?
- कार्बन इतने अधिक यौगिक क्यों बनाता है?
- सहसंयोजक बंध क्या है?
- संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अंतर बताइए।
- समजातीय श्रेणी क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
- क्रियात्मक समूह क्या है?
- दहन और ऑक्सीकरण अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
- योगात्मक अभिक्रिया क्या है?
- प्रतिस्थापन अभिक्रिया क्या है?
- एथेनॉल के प्रमुख गुण और उपयोग लिखिए।
- एथेनोइक अम्ल क्या है? इसकी प्रमुख अभिक्रियाएँ लिखिए।
- एस्टरीकरण और साबुनीकरण अभिक्रिया समझाइए।
- साबुन की सफाई क्रिया को मिसेल के आधार पर समझाइए।
- कठोर जल में साबुन की सफाई क्षमता कम क्यों हो जाती है?
- साबुन और डिटर्जेंट में अंतर लिखिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है।
- कार्बन की संयोजकता चार होती है।
- कार्बन की अपने परमाणुओं से श्रृंखला बनाने की क्षमता श्रृंखलन कहलाती है।
- इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से सहसंयोजक बंध बनता है।
- संतृप्त हाइड्रोकार्बन में केवल एकल बंध पाए जाते हैं।
- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में द्विबंध या त्रिबंध पाया जाता है।
- समजातीय श्रेणी के क्रमिक सदस्यों में CH2 का अंतर होता है।
- एथेनॉल का सूत्र C2H5OH है।
- एथेनोइक अम्ल का सूत्र CH3COOH है।
- एथेनोइक अम्ल का सामान्य नाम एसीटिक अम्ल है।
- एथेनॉल के ऑक्सीकरण से एथेनोइक अम्ल बनता है।
- कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की अभिक्रिया से एस्टर बनता है।
- साबुन की सफाई प्रक्रिया में मिसेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- कठोर जल में साबुन स्कम बना सकता है।
- डिटर्जेंट कठोर जल में साबुन की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 4 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 4 “कार्बन एवं इसके यौगिक” है। - प्रश्न: कार्बन की संयोजकता कितनी होती है?
उत्तर: कार्बन की संयोजकता चार होती है। - प्रश्न: कार्बन में श्रृंखलन का गुण क्यों पाया जाता है?
उत्तर: कार्बन-कार्बन बंध की मजबूती के कारण कार्बन अपने ही परमाणुओं के साथ जुड़कर लंबी, शाखित और वलयाकार संरचनाएँ बना सकता है। - प्रश्न: एथेनॉल का रासायनिक सूत्र क्या है?
उत्तर: एथेनॉल का रासायनिक सूत्र C2H5OH है। - प्रश्न: एथेनोइक अम्ल का रासायनिक सूत्र क्या है?
उत्तर: एथेनोइक अम्ल का रासायनिक सूत्र CH3COOH है। - प्रश्न: एथेनोइक अम्ल का सामान्य नाम क्या है?
उत्तर: एथेनोइक अम्ल का सामान्य नाम एसीटिक अम्ल है। - प्रश्न: एस्टरीकरण अभिक्रिया क्या है?
उत्तर: कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल की अभिक्रिया से एस्टर और जल बनने की प्रक्रिया एस्टरीकरण कहलाती है। - प्रश्न: साबुन कठोर जल में कम प्रभावी क्यों होता है?
उत्तर: कठोर जल में उपस्थित कैल्शियम और मैग्नीशियम आयन साबुन के साथ अघुलनशील स्कम बनाते हैं, जिससे साबुन की सफाई क्षमता कम हो जाती है। - प्रश्न: मिसेल क्या है?
उत्तर: साबुन के अणुओं का ऐसा समूह जिसमें जलविरागी भाग अंदर और जलस्नेही भाग बाहर की ओर व्यवस्थित होता है, मिसेल कहलाता है। - प्रश्न: साबुन और डिटर्जेंट में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: साबुन कठोर जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के साथ स्कम बना सकता है, जबकि डिटर्जेंट कठोर जल में भी सामान्यतः अधिक प्रभावी ढंग से सफाई करता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4)
“कार्बन एवं इसके यौगिक” BSEB कक्षा 10 विज्ञान का एक महत्वपूर्ण रसायन विज्ञान अध्याय है। इसमें कार्बन की चतुसंयोजकता, श्रृंखलन और सहसंयोजक बंध के माध्यम से कार्बन यौगिकों की विशाल विविधता को समझाया जाता है। संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, समजातीय श्रेणी तथा क्रियात्मक समूह इस अध्याय की आधारभूत अवधारणाएँ हैं।
एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल के गुण एवं रासायनिक अभिक्रियाएँ तथा साबुन और डिटर्जेंट की सफाई प्रक्रिया अध्याय के महत्वपूर्ण भाग हैं। परीक्षा की तैयारी करते समय विद्यार्थियों को विशेष रूप से रासायनिक समीकरण, समजातीय श्रेणी, क्रियात्मक समूह, एस्टरीकरण, साबुनीकरण और मिसेल निर्माण का अच्छी तरह अभ्यास करना चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.