जैव प्रक्रम – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6)
“जैव प्रक्रम” BSEB कक्षा 10 विज्ञान का छठा अध्याय है। इस अध्याय में उन सभी महत्वपूर्ण जीवन-क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, जो किसी जीव को जीवित रखने और उसके शरीर का अनुरक्षण करने के लिए आवश्यक होती हैं। सभी जीवों में पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसी जैविक क्रियाएँ किसी न किसी रूप में होती हैं।
हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण के द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जबकि मनुष्य और अन्य जन्तु भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं। भोजन से प्राप्त पोषक पदार्थों का पाचन, उनका अवशोषण और कोशिकाओं तक पहुँचना शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी प्रकार भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए श्वसन होता है और शरीर में बने अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए उत्सर्जन आवश्यक है।
इस अध्याय में पादपों और मनुष्यों में पोषण, प्रकाश-संश्लेषण, मानव पाचन तंत्र, श्वसन, मानव श्वसन तंत्र, रक्त परिसंचरण, पौधों में जल एवं भोजन का परिवहन तथा मानव उत्सर्जन तंत्र का विस्तार से अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है।
जैव प्रक्रम क्या है?
जीवों के शरीर में जीवन को बनाए रखने के लिए होने वाली विभिन्न आवश्यक जैविक क्रियाओं को जैव प्रक्रम कहा जाता है। पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन प्रमुख जैव प्रक्रम हैं। इन क्रियाओं के बिना जीवों का जीवन संभव नहीं है।
बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में नहीं रहतीं। इसलिए शरीर के विभिन्न भागों तक भोजन, ऑक्सीजन, जल और अन्य आवश्यक पदार्थ पहुँचाने के लिए विशेष परिवहन तंत्र की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार कोशिकाओं में बने अपशिष्ट पदार्थों को भी शरीर से बाहर निकालना आवश्यक होता है।
जीवन के लिए आवश्यक प्रमुख प्रक्रम
- पोषण: भोजन प्राप्त करने और उसका उपयोग करने की प्रक्रिया।
- श्वसन: भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया।
- परिवहन: पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाने की प्रक्रिया।
- उत्सर्जन: शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया।
पोषण
जीवों द्वारा भोजन प्राप्त करने तथा भोजन से आवश्यक पोषक पदार्थों को ग्रहण करने की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं। भोजन जीवों को ऊर्जा प्रदान करता है और शरीर की वृद्धि, मरम्मत तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक पदार्थ उपलब्ध कराता है।
पोषण मुख्यतः दो प्रकार का होता है – स्वपोषी पोषण और विषमपोषी पोषण।
स्वपोषी पोषण
जिस पोषण विधि में जीव सरल अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उसे स्वपोषी पोषण कहते हैं। हरे पौधे स्वपोषी होते हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की सहायता से भोजन का निर्माण करते हैं।
विषमपोषी पोषण
जिस पोषण विधि में जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और दूसरे जीवों से प्राप्त भोजन पर निर्भर रहते हैं, उसे विषमपोषी पोषण कहते हैं। मनुष्य, अधिकांश जन्तु और अनेक सूक्ष्मजीव विषमपोषी होते हैं।
विषमपोषी पोषण में जीव भोजन को सीधे ग्रहण कर सकते हैं, परजीवी रूप में भोजन प्राप्त कर सकते हैं अथवा मृत एवं सड़े-गले पदार्थों से पोषण प्राप्त कर सकते हैं।
प्रकाश-संश्लेषण
हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन उप-उत्पाद के रूप में मुक्त होती है।
प्रकाश-संश्लेषण के लिए मुख्य रूप से चार चीजें आवश्यक होती हैं – सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड और जल।
प्रकाश-संश्लेषण का सामान्य समीकरण:
6CO2 + 6H2O → C6H12O6 + 6O2
इस प्रक्रिया में सूर्य की प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में भोजन में संचित हो जाती है। यही भोजन आगे चलकर पौधे तथा अन्य जीवों के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बनता है।
प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक घटक
- सूर्य का प्रकाश
- क्लोरोफिल
- कार्बन डाइऑक्साइड
- जल
प्रकाश-संश्लेषण में पत्तियों की भूमिका
पत्तियाँ पौधों में प्रकाश-संश्लेषण का प्रमुख स्थान हैं। पत्तियों में उपस्थित हरितलवक में क्लोरोफिल पाया जाता है। क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है। पत्तियों की सतह पर उपस्थित सूक्ष्म छिद्रों को रंध्र कहा जाता है। इन्हीं रंध्रों के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है।
प्रकाश-संश्लेषण में प्रकाश का महत्त्व
प्रकाश-संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक है। यदि किसी हरे पौधे को कुछ समय तक अंधकार में रखा जाए, तो उसकी पत्तियों में संचित स्टार्च का उपयोग हो जाता है। बाद में प्रकाश की उपस्थिति में पत्ती फिर से प्रकाश-संश्लेषण कर भोजन बनाती है।
प्रकाश-संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड का महत्त्व
कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्चा पदार्थ है। पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और प्रकाश-संश्लेषण के दौरान इसका उपयोग भोजन बनाने में करते हैं। यदि कार्बन डाइऑक्साइड उपलब्ध न हो, तो प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
प्रकाश-संश्लेषण में जल का महत्त्व
पौधे जड़ों द्वारा मिट्टी से जल ग्रहण करते हैं। जल जाइलम ऊतक के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचता है। प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया में जल एक आवश्यक कच्चे पदार्थ के रूप में उपयोग होता है।
प्रकाश-संश्लेषण में क्लोरोफिल का महत्त्व
क्लोरोफिल हरे पौधों में पाया जाने वाला हरा वर्णक है। यह सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करके प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक ऊर्जा उपलब्ध कराता है। इसलिए क्लोरोफिल के बिना सामान्य प्रकाश-संश्लेषण संभव नहीं होता।
मानव में पोषण
मनुष्य विषमपोषी जीव है। वह भोजन को बाहर से ग्रहण करता है और पाचन तंत्र की सहायता से जटिल भोजन को सरल पदार्थों में बदलता है। पचे हुए पोषक पदार्थों का अवशोषण होता है और उनका उपयोग शरीर की कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा, वृद्धि तथा मरम्मत के लिए किया जाता है।
मानव पाचन तंत्र
मानव पाचन तंत्र में एक लंबी आहार नली और उससे संबंधित विभिन्न पाचन ग्रंथियाँ शामिल होती हैं। आहार नली में मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय और गुदा प्रमुख भाग हैं।
मुख और मुखगुहा
भोजन का प्रवेश मुख द्वारा होता है। मुखगुहा में दाँत भोजन को काटने और पीसने का कार्य करते हैं। जीभ भोजन को मिलाने तथा निगलने में सहायता करती है। लार ग्रंथियों से निकलने वाली लार भोजन को नम करती है और उसमें उपस्थित एंजाइम स्टार्च के पाचन की शुरुआत करता है।
आमाशय
आमाशय एक पेशीय थैलीनुमा अंग है। यहाँ भोजन कुछ समय तक रुकता है। आमाशय की ग्रंथियों से जठर रस निकलता है। इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा पाचक एंजाइम पाए जाते हैं। अम्लीय माध्यम भोजन के पाचन में सहायता करता है और कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में भी सहायक होता है।
छोटी आंत
छोटी आंत पाचन और अवशोषण का प्रमुख स्थान है। यहाँ यकृत से आने वाला पित्त तथा अग्न्याशय से आने वाले पाचक रस भोजन के पाचन में सहायता करते हैं। छोटी आंत की आंतरिक सतह पर अनेक उंगलीनुमा संरचनाएँ होती हैं जिन्हें विल्ली या रसांकुर कहा जाता है। इनकी सहायता से पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है।
बड़ी आंत
बड़ी आंत में मुख्यतः जल और कुछ लवणों का अवशोषण होता है। अपचित भोजन आगे बढ़कर मलाशय में पहुँचता है और अंत में गुदा द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
श्वसन
भोजन के जैविक ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं। इस प्रक्रिया में भोजन से प्राप्त ऊर्जा ATP के रूप में संचित होती है। ATP को कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है।
वायवीय और अवायवीय श्वसन
वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है और कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
अवायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ऊर्जा प्राप्त होती है। यीस्ट में ग्लूकोज के अवायवीय अपघटन से एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं। मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी होने पर लैक्टिक अम्ल बन सकता है।
वायवीय श्वसन का सामान्य समीकरण:
C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा
मानव श्वसन तंत्र
मानव श्वसन तंत्र में नासिका, नासा मार्ग, ग्रसनी, कंठ, श्वासनली, श्वसनी और फेफड़े प्रमुख अंग हैं। श्वसन के दौरान वायु नासिका के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती है। वायु फेफड़ों तक पहुँचती है, जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है।
फेफड़े और कूपिकाएँ
मानव शरीर में दो फेफड़े होते हैं। फेफड़ों के भीतर अनेक सूक्ष्म वायुकोष पाए जाते हैं जिन्हें कूपिकाएँ कहा जाता है। कूपिकाओं की दीवारें बहुत पतली होती हैं और इनके चारों ओर रक्त केशिकाओं का जाल होता है। इसी कारण कूपिकाओं और रक्त के बीच ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान आसानी से होता है।
श्वसन में हीमोग्लोबिन की भूमिका
रक्त में उपस्थित लाल रक्त कणिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक वर्णक पाया जाता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ मिलकर उसे फेफड़ों से शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तक पहुँचाने में सहायता करता है। इसलिए शरीर में हीमोग्लोबिन की पर्याप्त मात्रा होना आवश्यक है।
परिवहन
जीवों के शरीर में भोजन, ऑक्सीजन, जल, हार्मोन और अन्य आवश्यक पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया को परिवहन कहते हैं। इसी प्रकार कोशिकाओं में बने अपशिष्ट पदार्थों को भी उत्सर्जी अंगों तक पहुँचाया जाता है।
मानव रक्त परिसंचरण
मनुष्य में परिवहन का कार्य मुख्यतः रक्त परिसंचरण तंत्र द्वारा होता है। रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। इसमें प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स पाए जाते हैं।
रक्त के प्रमुख घटक
- प्लाज्मा: यह रक्त का तरल भाग है और विभिन्न पदार्थों के परिवहन में सहायता करता है।
- लाल रक्त कणिकाएँ: इनमें हीमोग्लोबिन पाया जाता है और ये मुख्यतः ऑक्सीजन के परिवहन में सहायता करती हैं।
- श्वेत रक्त कणिकाएँ: ये शरीर को रोगाणुओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- प्लेटलेट्स: ये रक्त के थक्के बनने में सहायता करती हैं।
हृदय
हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है। मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं – दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद और बायाँ निलय। हृदय की सहायता से ऑक्सीजनयुक्त और ऑक्सीजनरहित रक्त का उचित परिसंचरण होता है।
दोहरा रक्त परिसंचरण
मनुष्य में रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से दो बार होकर गुजरता है। इसे दोहरा रक्त परिसंचरण कहते हैं। इसमें फुफ्फुसीय परिसंचरण और शारीरिक परिसंचरण शामिल हैं।
फुफ्फुसीय परिसंचरण में हृदय से अशुद्ध रक्त फेफड़ों तक पहुँचता है और वहाँ ऑक्सीजन ग्रहण करता है। इसके बाद शुद्ध रक्त हृदय में वापस आता है। शारीरिक परिसंचरण में हृदय से ऑक्सीजनयुक्त रक्त पूरे शरीर में पहुँचता है और कोशिकाओं से कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त वापस हृदय में आता है।
पौधों में परिवहन
पौधों में जल और खनिजों का परिवहन जाइलम ऊतक द्वारा तथा भोजन का परिवहन फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है। जाइलम मुख्यतः जड़ों से जल और खनिजों को पौधे के ऊपरी भागों तक पहुँचाता है। फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
जाइलम द्वारा जल का परिवहन
जड़ें मिट्टी से जल और खनिज लवणों को अवशोषित करती हैं। यह जल जाइलम की वाहिकाओं के माध्यम से तने और पत्तियों तक पहुँचता है। जल के ऊपर की ओर जाने में जड़ दाब तथा वाष्पोत्सर्जन खिंचाव जैसे कारक सहायता करते हैं।
वाष्पोत्सर्जन
पौधों के वायवीय भागों, विशेषकर पत्तियों, से जल का जलवाष्प के रूप में बाहर निकलना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। यह मुख्यतः रंध्रों के माध्यम से होता है। वाष्पोत्सर्जन पौधे में जल के ऊपर की ओर परिवहन में सहायक होता है और पौधे को ठंडा रखने में भी मदद करता है।
फ्लोएम द्वारा भोजन का परिवहन
पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण से बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाना आवश्यक होता है। इस भोजन का परिवहन फ्लोएम द्वारा किया जाता है। भोजन का परिवहन आवश्यकता के अनुसार पत्तियों से जड़ों, तने, फूलों, फलों तथा अन्य भंडारण अंगों तक हो सकता है।
उत्सर्जन
जीवों के शरीर में उपापचय की क्रियाओं के दौरान बने हानिकारक या अनावश्यक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। मनुष्य में कार्बन डाइऑक्साइड, यूरिया, अतिरिक्त जल और लवण जैसे पदार्थ उत्सर्जित किए जाते हैं।
मानव उत्सर्जन तंत्र
मानव शरीर में प्रमुख उत्सर्जी अंग एक जोड़ी वृक्क हैं। इसके अतिरिक्त फेफड़े, त्वचा और यकृत भी कुछ अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करते हैं। वृक्क रक्त से नाइट्रोजनी अपशिष्ट जैसे यूरिया को अलग करके मूत्र का निर्माण करते हैं।
वृक्क की संरचना
मनुष्य में दो वृक्क होते हैं। प्रत्येक वृक्क में अनेक सूक्ष्म नलिकाकार संरचनाएँ होती हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। नेफ्रॉन वृक्क की क्रियात्मक इकाई है। प्रत्येक नेफ्रॉन में बोमन सम्पुट, ग्लोमेरुलस तथा वृक्क नलिका जैसे भाग पाए जाते हैं।
नेफ्रॉन का कार्य
नेफ्रॉन में रक्त का छनन, आवश्यक पदार्थों का पुनरवशोषण तथा मूत्र निर्माण की प्रक्रिया होती है। ग्लोमेरुलस में रक्त का निस्यंदन होता है। इसके बाद नलिका में उपयोगी पदार्थों और जल का आवश्यकतानुसार पुनरवशोषण होता है। शेष पदार्थ मूत्र के रूप में आगे बढ़ते हैं।
मूत्र निर्माण
मूत्र निर्माण में मुख्य रूप से तीन प्रक्रियाएँ शामिल मानी जाती हैं – निस्यंदन, पुनरवशोषण और स्रवण। रक्त से छनकर आए द्रव में से शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों का पुनरवशोषण हो जाता है। शेष अपशिष्ट पदार्थ मूत्र के रूप में बाहर निकाल दिए जाते हैं।
पौधों में उत्सर्जन
पौधों में मनुष्यों की तरह कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं होता। वे विभिन्न तरीकों से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं। गैसीय पदार्थ रंध्रों तथा अन्य सतहों से बाहर निकल सकते हैं। अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा बाहर निकलता है। कुछ अपशिष्ट पदार्थ पत्तियों, छाल या अन्य भागों में जमा होकर बाद में उनके गिरने के साथ बाहर निकल जाते हैं।
महत्वपूर्ण जैव प्रक्रमों का सार
| जैव प्रक्रम | मुख्य कार्य |
|---|---|
| पोषण | भोजन प्राप्त करना और उसका उपयोग करना |
| श्वसन | भोजन से ऊर्जा प्राप्त करना |
| परिवहन | आवश्यक पदार्थों और अपशिष्टों का परिवहन |
| उत्सर्जन | शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना |
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- हरे पौधों में भोजन निर्माण की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(a) श्वसन (b) प्रकाश-संश्लेषण (c) उत्सर्जन (d) परिवहन
उत्तर: (b) प्रकाश-संश्लेषण
- प्रकाश-संश्लेषण के लिए कौन-सा वर्णक आवश्यक है?
(a) हीमोग्लोबिन (b) क्लोरोफिल (c) इंसुलिन (d) मायलिन
उत्तर: (b) क्लोरोफिल
- पौधों में जल का परिवहन किस ऊतक द्वारा होता है?
(a) फ्लोएम (b) जाइलम (c) मेरिस्टेम (d) एपिडर्मिस
उत्तर: (b) जाइलम
- पौधों में भोजन का परिवहन किस ऊतक द्वारा होता है?
(a) जाइलम (b) फ्लोएम (c) कॉर्क (d) एपिडर्मिस
उत्तर: (b) फ्लोएम
- मानव शरीर में गैसों का आदान-प्रदान मुख्यतः कहाँ होता है?
(a) आमाशय (b) कूपिकाओं में (c) वृक्क में (d) ग्रासनली में
उत्तर: (b) कूपिकाओं में
- रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन मुख्यतः किसके द्वारा होता है?
(a) प्लाज्मा (b) हीमोग्लोबिन (c) प्लेटलेट्स (d) श्वेत रक्त कणिकाएँ
उत्तर: (b) हीमोग्लोबिन
- मानव हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
(a) दो (b) तीन (c) चार (d) पाँच
उत्तर: (c) चार
- मानव शरीर में वृक्क की क्रियात्मक इकाई क्या है?
(a) न्यूरॉन (b) नेफ्रॉन (c) कूपिका (d) विल्ली
उत्तर: (b) नेफ्रॉन
- वाष्पोत्सर्जन मुख्यतः किसके द्वारा होता है?
(a) जड़ (b) रंध्र (c) फूल (d) बीज
उत्तर: (b) रंध्र
- श्वसन में कोशिका की ऊर्जा मुद्रा किसे कहा जाता है?
(a) DNA (b) RNA (c) ATP (d) ADP
उत्तर: (c) ATP
- मानव में भोजन का अधिकांश अवशोषण कहाँ होता है?
(a) मुख (b) आमाशय (c) छोटी आंत (d) बड़ी आंत
उत्तर: (c) छोटी आंत
- रक्त का थक्का बनने में कौन सहायता करता है?
(a) लाल रक्त कणिकाएँ (b) प्लेटलेट्स (c) प्लाज्मा (d) हीमोग्लोबिन
उत्तर: (b) प्लेटलेट्स
- शरीर से यूरिया को मुख्यतः कौन-सा अंग बाहर निकालता है?
(a) हृदय (b) फेफड़े (c) वृक्क (d) आमाशय
उत्तर: (c) वृक्क
- विषमपोषी जीवों की विशेषता क्या है?
(a) वे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं
(b) वे दूसरे स्रोतों से भोजन प्राप्त करते हैं
(c) वे केवल जल ग्रहण करते हैं
(d) वे प्रकाश-संश्लेषण करते हैं
उत्तर: (b) वे दूसरे स्रोतों से भोजन प्राप्त करते हैं
- फेफड़ों में गैसों के आदान-प्रदान के लिए कौन-सी संरचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है?
(a) कूपिका (b) विल्ली (c) नेफ्रॉन (d) फ्लोएम
उत्तर: (a) कूपिका
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: जैव प्रक्रम क्या है?
उत्तर: जीवों में जीवन को बनाए रखने के लिए होने वाली आवश्यक जैविक क्रियाओं को जैव प्रक्रम कहते हैं।
- प्रश्न: स्वपोषी पोषण क्या है?
उत्तर: जिस पोषण में जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उसे स्वपोषी पोषण कहते हैं।
- प्रश्न: प्रकाश-संश्लेषण क्या है?
उत्तर: हरे पौधों द्वारा प्रकाश और क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल से भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रकाश-संश्लेषण कहलाती है।
- प्रश्न: श्वसन क्या है?
उत्तर: भोजन के जैविक ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया श्वसन कहलाती है।
- प्रश्न: ATP क्या है?
उत्तर: ATP कोशिकाओं में ऊर्जा का प्रमुख वाहक है और इसे कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है।
- प्रश्न: जाइलम का क्या कार्य है?
उत्तर: जाइलम जड़ों से जल और खनिज लवणों को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।
- प्रश्न: फ्लोएम का क्या कार्य है?
उत्तर: फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
- प्रश्न: नेफ्रॉन क्या है?
उत्तर: नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है, जहाँ रक्त का छनन और मूत्र निर्माण होता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: स्वपोषी और विषमपोषी पोषण में अंतर बताइए।
उत्तर: स्वपोषी जीव सरल अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसके विपरीत विषमपोषी जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और अन्य जीवों या स्रोतों से प्राप्त भोजन पर निर्भर रहते हैं। हरे पौधे स्वपोषी तथा मनुष्य विषमपोषी हैं।
- प्रश्न: प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक चार घटक लिखिए।
उत्तर: प्रकाश-संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड और जल आवश्यक हैं।
- प्रश्न: बहुकोशिकीय जीवों में केवल विसरण पर्याप्त क्यों नहीं है?
उत्तर: बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में नहीं रहतीं। शरीर के आकार और कोशिकाओं की संख्या अधिक होने के कारण केवल विसरण द्वारा सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन और पोषक पदार्थ तेजी से पहुँचाना संभव नहीं होता। इसलिए विशेष परिवहन तंत्र आवश्यक होता है।
- प्रश्न: वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर बताइए।
उत्तर: वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है और इसमें ग्लूकोज का अधिक पूर्ण अपघटन होकर पर्याप्त ऊर्जा उत्पन्न होती है। अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है और इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा प्राप्त होती है।
- प्रश्न: रक्त के प्रमुख घटक और उनके कार्य लिखिए।
उत्तर: रक्त में प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स होते हैं। प्लाज्मा विभिन्न पदार्थों के परिवहन में सहायता करता है। लाल रक्त कणिकाएँ ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं। श्वेत रक्त कणिकाएँ रोगों से रक्षा करती हैं और प्लेटलेट्स रक्त का थक्का बनाने में सहायता करती हैं।
- प्रश्न: मनुष्य में दोहरा रक्त परिसंचरण क्या है?
उत्तर: जब रक्त एक पूर्ण परिसंचरण चक्र में हृदय से दो बार होकर गुजरता है, तो इसे दोहरा रक्त परिसंचरण कहते हैं। इसमें फुफ्फुसीय और शारीरिक परिसंचरण शामिल होते हैं।
- प्रश्न: वाष्पोत्सर्जन का पौधों में क्या महत्त्व है?
उत्तर: वाष्पोत्सर्जन से पौधे से जलवाष्प बाहर निकलती है और इससे जड़ों से ऊपर की ओर जल के परिवहन में सहायता मिलती है। यह पौधे को ठंडा रखने में भी मदद करता है।
- प्रश्न: उत्सर्जन क्या है?
उत्तर: शरीर में उपापचय से बने अनावश्यक और हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए।
उत्तर: प्रकाश-संश्लेषण हरे पौधों में होने वाली वह प्रक्रिया है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड और जल से सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की सहायता से भोजन का निर्माण होता है। पौधे जड़ों से जल ग्रहण करते हैं और पत्तियों तक पहुँचाते हैं। वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड रंध्रों के माध्यम से पत्तियों में प्रवेश करती है। क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है। इस ऊर्जा की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट बनते हैं तथा ऑक्सीजन उप-उत्पाद के रूप में बाहर निकलती है। प्रकाश-संश्लेषण पृथ्वी पर भोजन और ऑक्सीजन का अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत है।
- प्रश्न: मानव पाचन तंत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मानव पाचन तंत्र में मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय और गुदा शामिल हैं। मुख में भोजन को चबाया जाता है और लार मिलती है। आमाशय में जठर रस भोजन के पाचन में सहायता करता है। छोटी आंत में पाचन लगभग पूरा होता है और विल्ली की सहायता से पोषक पदार्थों का अवशोषण होता है। बड़ी आंत में मुख्यतः जल का अवशोषण होता है। अपशिष्ट पदार्थ मल के रूप में मलाशय में पहुँचते हैं और गुदा द्वारा बाहर निकाल दिए जाते हैं।
- प्रश्न: मानव श्वसन तंत्र और गैसों के आदान-प्रदान को समझाइए।
उत्तर: मानव श्वसन तंत्र में नासिका, नासा मार्ग, ग्रसनी, कंठ, श्वासनली, श्वसनी और फेफड़े प्रमुख अंग हैं। वायु नासिका से होकर श्वासनली के माध्यम से फेफड़ों तक पहुँचती है। फेफड़ों में अनेक कूपिकाएँ होती हैं जिनकी दीवारें पतली और रक्त केशिकाओं से घिरी होती हैं। कूपिकाओं में उपस्थित ऑक्सीजन रक्त में पहुँचती है और रक्त में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कूपिकाओं में आकर श्वास छोड़ने के समय बाहर निकल जाती है।
- प्रश्न: मानव रक्त परिसंचरण और हृदय की संरचना को समझाइए।
उत्तर: मानव हृदय एक पेशीय पंप है जिसमें चार कक्ष होते हैं – दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद और बायाँ निलय। शरीर से आया ऑक्सीजनरहित रक्त दाएँ अलिंद में पहुँचता है और फिर दाएँ निलय से फेफड़ों तक जाता है। फेफड़ों में रक्त ऑक्सीजन ग्रहण करता है और बाएँ अलिंद में लौटता है। वहाँ से बाएँ निलय में पहुँचकर यह पूरे शरीर में पंप किया जाता है। इस प्रकार मानव में दोहरा रक्त परिसंचरण पाया जाता है।
- प्रश्न: पौधों में जल और भोजन के परिवहन को समझाइए।
उत्तर: पौधों में जल और खनिज लवणों का परिवहन जाइलम द्वारा तथा भोजन का परिवहन फ्लोएम द्वारा होता है। जड़ें मिट्टी से जल और खनिज ग्रहण करती हैं और जाइलम उन्हें तने तथा पत्तियों तक पहुँचाता है। वाष्पोत्सर्जन से उत्पन्न खिंचाव जल को ऊपर की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा बने भोजन का परिवहन फ्लोएम द्वारा पौधे के विभिन्न भागों तक किया जाता है।
- प्रश्न: मानव उत्सर्जन तंत्र और नेफ्रॉन की कार्यप्रणाली समझाइए।
उत्तर: मानव उत्सर्जन तंत्र में मुख्य रूप से दो वृक्क, दो मूत्रवाहिनियाँ, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल होते हैं। वृक्क रक्त से नाइट्रोजनी अपशिष्ट जैसे यूरिया को अलग करते हैं। वृक्क की क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन है। नेफ्रॉन में ग्लोमेरुलस द्वारा रक्त का निस्यंदन होता है। नलिका में आवश्यक जल और अन्य पदार्थों का पुनरवशोषण होता है। शेष अपशिष्ट मूत्र का निर्माण करते हैं। मूत्र मूत्रवाहिनियों से होकर मूत्राशय में जमा होता है और फिर मूत्रमार्ग द्वारा शरीर से बाहर निकलता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- जैव प्रक्रम से क्या समझते हैं?
- स्वपोषी और विषमपोषी पोषण में अंतर बताइए।
- प्रकाश-संश्लेषण की परिभाषा और रासायनिक समीकरण लिखिए।
- प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक घटकों का वर्णन कीजिए।
- प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता को प्रयोग द्वारा स्पष्ट कीजिए।
- मानव पाचन तंत्र का वर्णन कीजिए।
- छोटी आंत में भोजन का अवशोषण कैसे होता है?
- वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर लिखिए।
- मानव श्वसन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
- फेफड़ों की कूपिकाएँ गैसों के आदान-प्रदान में किस प्रकार सहायक हैं?
- रक्त के प्रमुख घटकों और उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
- मानव हृदय की संरचना समझाइए।
- मनुष्य में दोहरे रक्त परिसंचरण को समझाइए।
- पौधों में जल और खनिजों का परिवहन किस प्रकार होता है?
- फ्लोएम द्वारा भोजन के परिवहन को समझाइए।
- वाष्पोत्सर्जन क्या है? इसका महत्त्व लिखिए।
- उत्सर्जन क्या है?
- नेफ्रॉन की संरचना और कार्य का वर्णन कीजिए।
- मनुष्य में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।
- पौधों में उत्सर्जन किस प्रकार होता है?
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- जैव प्रक्रम जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक जैविक क्रियाएँ हैं।
- हरे पौधे स्वपोषी होते हैं।
- प्रकाश-संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनता है।
- क्लोरोफिल प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक वर्णक है।
- रंध्र गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करते हैं।
- मानव में पाचन का प्रमुख भाग छोटी आंत में पूरा होता है।
- छोटी आंत की विल्ली पचे हुए भोजन के अवशोषण में सहायता करती है।
- श्वसन से भोजन से ऊर्जा प्राप्त होती है।
- ATP को कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है।
- फेफड़ों की कूपिकाओं में गैसों का आदान-प्रदान होता है।
- हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के परिवहन में सहायता करता है।
- मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं।
- मनुष्य में दोहरा रक्त परिसंचरण पाया जाता है।
- जाइलम जल और खनिजों का परिवहन करता है।
- फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
- वाष्पोत्सर्जन मुख्यतः रंध्रों द्वारा होता है।
- नेफ्रॉन वृक्क की क्रियात्मक इकाई है।
- वृक्क रक्त से यूरिया जैसे नाइट्रोजनी अपशिष्टों को अलग करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 6 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 6 “जैव प्रक्रम” है।
- प्रश्न: जैव प्रक्रम क्या है?
उत्तर: जीवों में जीवन को बनाए रखने के लिए होने वाली आवश्यक जैविक क्रियाओं को जैव प्रक्रम कहा जाता है।
- प्रश्न: प्रकाश-संश्लेषण क्या है?
उत्तर: हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल से भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रकाश-संश्लेषण कहलाती है।
- प्रश्न: पौधों में जल का परिवहन किस ऊतक से होता है?
उत्तर: पौधों में जल और खनिज लवणों का परिवहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है।
- प्रश्न: पौधों में भोजन का परिवहन किस ऊतक से होता है?
उत्तर: पौधों में भोजन का परिवहन फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है।
- प्रश्न: मानव शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन कौन करता है?
उत्तर: रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्रश्न: मानव हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
उत्तर: मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं – दो अलिंद और दो निलय।
- प्रश्न: नेफ्रॉन क्या है?
उत्तर: नेफ्रॉन वृक्क की क्रियात्मक इकाई है, जिसमें रक्त का छनन और मूत्र निर्माण होता है।
- प्रश्न: वाष्पोत्सर्जन क्या है?
उत्तर: पौधों के वायवीय भागों से जल का जलवाष्प के रूप में बाहर निकलना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है।
- प्रश्न: उत्सर्जन क्या है?
उत्तर: शरीर में बने अनावश्यक और हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6)
“जैव प्रक्रम” BSEB कक्षा 10 विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें जीवों के जीवन को बनाए रखने वाली प्रमुख क्रियाओं – पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन – का अध्ययन किया जाता है। प्रकाश-संश्लेषण के माध्यम से पौधे भोजन का निर्माण करते हैं, जबकि मनुष्य भोजन को पाचन और अवशोषण के बाद ऊर्जा तथा शरीर की अन्य आवश्यकताओं के लिए उपयोग करता है।
श्वसन द्वारा भोजन से ऊर्जा प्राप्त होती है और परिवहन तंत्र इस ऊर्जा तथा आवश्यक पदार्थों को शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचाता है। पौधों में जाइलम और फ्लोएम परिवहन का कार्य करते हैं, जबकि मनुष्य में रक्त परिसंचरण तंत्र यह कार्य करता है। इसी प्रकार वृक्क और नेफ्रॉन शरीर से नाइट्रोजनी अपशिष्टों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को प्रकाश-संश्लेषण, पाचन, श्वसन, दोहरा रक्त परिसंचरण, जाइलम-फ्लोएम तथा नेफ्रॉन से संबंधित परिभाषाएँ, आरेख और प्रक्रियाएँ विशेष रूप से तैयार करनी चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.