धरती कब तक घूमेगी (कहानी) – साँवर दइया | वर्णिका भाग 2, कक्षा 10 हिंदी गद्य पाठ 5 सम्पूर्ण व्याख्या

11 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 5)

“धरती कब तक घूमेगी” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “वर्णिका भाग 2” के गद्य खंड का पाँचवाँ पाठ है। यह मूलतः राजस्थानी भाषा में लिखी गई कहानी है, जिसके रचयिता प्रसिद्ध कथाकार साँवर दइया हैं। यह एक वृद्ध, विधवा माँ की मार्मिक कथा है, जो अपने ही घर में उपेक्षा और घुटन का जीवन जीने के लिए विवश है। यह कहानी परिवार में बुजुर्गों की उपेक्षा, स्त्री के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की भावना को बड़ी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।

लेखक परिचय

साँवर दइया राजस्थानी भाषा के सफल और प्रसिद्ध कथाकार हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में ग्रामीण और पारिवारिक जीवन की समस्याओं, विशेषकर वृद्धावस्था में होने वाली उपेक्षा और स्त्री के संघर्ष को बड़ी सूक्ष्मता से चित्रित किया है। “धरती कब तक घूमेगी” कहानी में भी उन्होंने एक वृद्ध माँ के मनोविज्ञान और उसकी आत्म-गरिमा को अत्यंत मार्मिक ढंग से उकेरा है। उनकी लेखन-शैली संवेदनशील, यथार्थवादी और मानवीय भावनाओं से परिपूर्ण है।

कहानी का सारांश (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 5)

“धरती कब तक घूमेगी” कहानी की प्रमुख पात्रा सीता एक विधवा वृद्ध महिला है। उसके तीन बेटे, तीन बहुएँ और कुछ पोते-पोतियाँ हैं, अर्थात् उसका परिवार भरा-पूरा है, फिर भी वह अपने ही घर में अकेली और उपेक्षित महसूस करती है। सीता सहनशील स्वभाव की महिला है, जो बहुओं की कटु बातों का कभी उत्तर नहीं देती, बल्कि अपने हृदय को पत्थर बनाकर चुपचाप सहन करती रहती है।

बेटों ने अपनी माँ को एक व्यवस्था के अंतर्गत बारी-बारी से एक-एक महीने अपने-अपने घर में रखने का निर्णय लिया, जिसे “पाली” कहा जाता है। सीता ने इस व्यवस्था को भी चुपचाप स्वीकार कर लिया और पाँच वर्षों तक इसी प्रकार पाली बदल-बदलकर अपना जीवन व्यतीत किया। परंतु जब बेटों ने बिना उससे कोई राय लिए यह निर्णय लिया कि अब वे उसे अपने घर में न रखकर प्रत्येक व्यक्ति पचास रुपये प्रतिमाह देंगे, तो सीता का स्वाभिमान जाग उठा। उसे यह लगा कि वह अब अपने ही बेटों के लिए एक बोझ बन चुकी है, जिसे पैसे देकर टाला जा रहा है।

सीता को यह भी स्मरण होता है कि जब भी पाली बदलती थी, तो पोते-पोतियाँ खुश होकर कहते थे कि “दादी जी, कल से आप हमारे घर खाना खाएँगी”, क्योंकि बच्चों के निष्कलुष हृदय में दादी के प्रति सच्चा स्नेह था। परंतु उनके माता-पिता इस बात से नाखुश होते थे, क्योंकि वे सीता को एक आर्थिक भार के रूप में देखते थे। सीता स्वयं की तुलना उस भिखारिन बच्ची से करती है, जो “माई-माई रोटी दे” कहकर एक घर से दूसरे घर भटकती रहती है और हर जगह से यही उत्तर मिलता है कि “यह घर छोड़, दूसरे घर जा”।

अंततः पचास रुपये प्रतिमाह देने की बात सुनकर सीता को गहरी पीड़ा होती है। वह सोचती है कि जब उसे मजदूरी करके ही अपना जीवन-यापन करना है, तो वह यह कहीं भी कर सकती है और अपनी रोटी स्वयं कमा सकती है। यही विचार कर वह अपने कुछ पुराने वस्त्र लेकर उस घुटन भरे घर से भोर में ही निकल पड़ती है। घर से निकलते समय उसके मन में जो शांति और स्वाभिमान का भाव उत्पन्न होता है, वह इससे पहले उसने कभी अनुभव नहीं किया था—अब उसकी आँखों के आगे न तो अंधकार था और न ही धरती-आकाश के बीच वह घुटन, जो वर्षों से उसे सालती रही थी। सीता को आशा है कि यह धरती अवश्य घूमेगी और परिस्थितियाँ बदलेंगी, परंतु प्रश्न यही रह जाता है कि वह कब तक घूमेगी।

केंद्रीय भाव (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 5)

इस कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि परिवार में वृद्धजनों, विशेषकर विधवा माताओं की उपेक्षा एक गंभीर सामाजिक समस्या है। लेखक यह संदेश देते हैं कि आत्म-सम्मान और स्वाभिमान किसी भी व्यक्ति के लिए भौतिक सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। सीता का घर छोड़कर आत्मनिर्भर बनने का निर्णय यह दर्शाता है कि व्यक्ति को अपमान सहकर जीने की बजाय आत्म-सम्मान के साथ जीवन जीने का मार्ग चुनना चाहिए।

शीर्षक की सार्थकता

कहानी का शीर्षक “धरती कब तक घूमेगी” प्रतीकात्मक और घटना-प्रधान है। सीता अपने बेटों और बहुओं का विष सहते-सहते व्याकुल हो जाती है और उसे धरती-आकाश के बीच घुटन का अनुभव होता है। घर से निकलते समय जब उसके मन से यह घुटन दूर होती है, तो उसे विश्वास होता है कि परिस्थितियाँ अवश्य बदलेंगी, अर्थात् धरती घूमेगी और बेहतर समय आएगा। परंतु “कब तक” शब्द उसकी अनिश्चितता और प्रतीक्षा को दर्शाता है। इस प्रकार यह शीर्षक कहानी के भाव के अनुरूप पूर्णतः सार्थक है।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

साँवर दइया की यह कहानी एक विधवा माँ की मनोवैज्ञानिक पीड़ा का अत्यंत संवेदनशील चित्रण करती है। सीता का चरित्र भारतीय समाज की उन असंख्य वृद्ध महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो परिवार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने के बाद भी वृद्धावस्था में उपेक्षा और तिरस्कार का सामना करती हैं। बेटों द्वारा उसे “पाली” में बाँटना और फिर पैसे देकर उससे पीछा छुड़ाने का प्रयास, यह दर्शाता है कि आधुनिक पारिवारिक ढाँचे में मानवीय संबंधों की जगह आर्थिक गणना ने ले ली है।

लेखक ने बड़ी कुशलता से यह दिखाया है कि सीता की पीड़ा केवल आर्थिक अभाव की नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की उपेक्षा की है। पोते-पोतियों का निश्छल प्रेम इस कहानी में आशा की एक किरण के रूप में उभरता है, जो यह संकेत देता है कि मानवीय संवेदना पूर्णतः समाप्त नहीं हुई है। सीता का घर से निकलना कोई विद्रोह नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की पुनर्स्थापना का एक साहसिक कदम है। इस प्रकार यह कहानी पारिवारिक संबंधों में संवेदनशीलता, वृद्धजनों के सम्मान और स्त्री की आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण संदेश देती है।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 5)

  1. “धरती कब तक घूमेगी” कहानी के लेखक कौन हैं?(a) सुजाता (b) साँवर दइया (c) सातकोड़ी होता (d) श्रीनिवास

    उत्तर: (b) साँवर दइया

  2. “धरती कब तक घूमेगी” मूलतः किस भाषा की रचना है?(a) उड़िया (b) कन्नड़ (c) राजस्थानी (d) तमिल

    उत्तर: (c) राजस्थानी

  3. कहानी की प्रमुख पात्रा कौन है?(a) मंगम्मा (b) पाप्पाति (c) सीता (d) लक्ष्मी

    उत्तर: (c) सीता

  4. सीता के कितने पुत्र थे?(a) दो (b) तीन (c) चार (d) एक

    उत्तर: (b) तीन

  5. इस कहानी में किसकी प्रधानता दी गई है?(a) नारी (b) पुरुष (c) बच्चे (d) कोई नहीं

    उत्तर: (a) नारी

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: सीता कौन थी?उत्तर: सीता एक विधवा वृद्ध महिला थी, जिसके तीन पुत्र, तीन पुत्रवधुएँ और कुछ पोते-पोतियाँ थे।
  2. प्रश्न: बेटों ने सीता को कितने रुपये प्रतिमाह देने का निर्णय लिया?उत्तर: बेटों ने सीता को पचास रुपये प्रतिमाह प्रति व्यक्ति देने का निर्णय लिया।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: सीता अपने ही घर में घुटन क्यों महसूस करती थी?उत्तर: विधवा होने के बाद सीता को बेटों और बहुओं से उपेक्षा मिलने लगी थी। बात-बात पर उसे दो रोटियों के लिए ताने सुनने पड़ते थे, जिससे वह स्वयं को अपमानित महसूस करती थी और उसे धरती-आकाश सिमटा हुआ प्रतीत होता था।
  2. प्रश्न: सीता अपनी स्थिति की तुलना किससे करती है?उत्तर: सीता अपनी स्थिति की तुलना उस भिखारिन बच्ची से करती है, जो “माई-माई रोटी दे” कहकर घूमती है और हर घर से उसे यही उत्तर मिलता है कि यह घर छोड़कर दूसरे घर जाए।
  3. प्रश्न: पाली बदलने पर बच्चे खुश और माता-पिता नाखुश क्यों होते थे?उत्तर: पोते-पोतियों के निश्छल हृदय में दादी के लिए सच्चा प्रेम था, इसलिए वे पाली बदलने पर खुश होते थे, जबकि उनके माता-पिता सीता को आर्थिक भार समझते थे, इसलिए वे इस पर नाखुश होते थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “धरती कब तक घूमेगी” कहानी के आधार पर सीता का चरित्र-चित्रण कीजिए।उत्तर: सीता इस कहानी की केंद्रीय पात्रा है। वह एक विधवा, सहनशील और शांत स्वभाव की महिला है, जो बहुओं की कटु बातों का कभी प्रतिकार नहीं करती और अपने हृदय को पत्थर बनाकर अपने ही घर में अजनबी जैसा जीवन बिताती है। पाँच वर्षों तक बेटों द्वारा तय की गई “पाली” व्यवस्था को उसने बिना किसी विरोध के स्वीकार किया, परंतु जब बेटों ने बिना उसकी सहमति के उसे पैसे देकर टालने का निर्णय लिया, तो उसका दबा हुआ स्वाभिमान जाग उठा। वह दृढ़ निश्चय की महिला सिद्ध होती है, जो अपमान सहकर जीने के बजाय आत्म-सम्मान के साथ स्वतंत्र जीवन जीने का साहसिक निर्णय लेती है। इस प्रकार सीता का चरित्र सहनशीलता, संयम और अंततः आत्म-गरिमा के जागरण का प्रतीक है।
  2. प्रश्न: “धरती कब तक घूमेगी” कहानी के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।उत्तर: यह शीर्षक घटना-प्रधान और प्रतीकात्मक दोनों है। सीता अपने बेटों और बहुओं के कटु व्यवहार को सहते-सहते मानसिक रूप से व्याकुल हो जाती है और उसे धरती तथा आकाश के बीच घुटन का अनुभव होता है, अर्थात् उसका संसार संकुचित होता प्रतीत होता है। उसे यह अनुभूति होती है कि जीवन में केवल दो रोटियाँ ही सब कुछ नहीं हैं, बल्कि आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता भी उतनी ही आवश्यक है। जब वह घर छोड़कर निकलती है, तो उसकी घुटन समाप्त हो जाती है और उसे विश्वास होता है कि परिस्थितियाँ अवश्य बदलेंगी, अर्थात् धरती घूमेगी। परंतु यह कब होगा, यह अनिश्चित है, इसीलिए शीर्षक में “कब तक” शब्द का प्रयोग किया गया है। इस प्रकार यह शीर्षक कहानी के भाव और संदेश को पूर्णतः सटीक ढंग से व्यक्त करता है।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 5)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: “धरती कब तक घूमेगी” पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?उत्तर: यह पाठ “वर्णिका भाग 2” पुस्तक के गद्य खंड का पाठ 5 है।
  2. प्रश्न: यह कहानी मूलतः किस भाषा में लिखी गई है?उत्तर: यह कहानी मूलतः राजस्थानी भाषा में लिखी गई है, जिसे हिंदी में अनूदित कर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
  3. प्रश्न: इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?उत्तर: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परिवार में वृद्धजनों और विशेषकर विधवा माताओं का सम्मान करना चाहिए, तथा आत्म-सम्मान भौतिक सुविधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 5)

“धरती कब तक घूमेगी” कहानी साँवर दइया की मानवीय संवेदना और पारिवारिक यथार्थ के प्रति गहरी समझ का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कहानी एक वृद्ध विधवा माँ की पीड़ा के माध्यम से परिवार में बुजुर्गों की उपेक्षा, स्त्री के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के महत्वपूर्ण विषयों को उजागर करती है। यह पाठ छात्रों में पारिवारिक मूल्यों, वृद्धजनों के प्रति सम्मान और मानवीय संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (वर्णिका भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।

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