नगर (कहानी) – सुजाता | वर्णिका भाग 2, कक्षा 10 हिंदी गद्य पाठ 4 सम्पूर्ण व्याख्या

11 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 4)

“नगर” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “वर्णिका भाग 2” के गद्य खंड का चौथा पाठ है। यह मूलतः तमिल भाषा में लिखी गई कहानी है, जिसके रचयिता प्रसिद्ध तमिल कथाकार सुजाता हैं। यह कहानी एक अशिक्षित ग्रामीण माँ की व्यथा-कथा है, जो अपनी बीमार पुत्री को लेकर बड़े नगर मदुरै के अस्पताल में इलाज कराने जाती है, लेकिन नगर की उदासीनता, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण उसे निराश होकर लौटना पड़ता है। यह कहानी गाँव और नगर की जीवन-शैली के बीच के गहरे अंतर को बड़ी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।

लेखक परिचय

सुजाता आधुनिक तमिल साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में सामान्य जन-जीवन, विशेषकर ग्रामीण समाज की समस्याओं और शहरी जीवन की विसंगतियों को बड़ी सूक्ष्मता से चित्रित किया है। “नगर” कहानी में भी उन्होंने एक साधारण ग्रामीण परिवार की पीड़ा के माध्यम से नगरीय जीवन की संवेदनहीनता और अव्यवस्था को उजागर किया है। उनकी लेखन-शैली सरल, प्रभावशाली और यथार्थवादी है, जो पाठकों के हृदय को सीधे स्पर्श करती है।

कहानी का सारांश (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 4)

“नगर” कहानी की मुख्य पात्रा वल्लि अम्माल एक अशिक्षित, सीधी-सादी ग्रामीण महिला है। उसकी पुत्री पाप्पाति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाती है। गाँव के प्राइमरी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर पाप्पाति की गंभीर स्थिति देखकर उसे तुरंत बड़े नगर मदुरै के अस्पताल में ले जाने की सलाह देते हैं, क्योंकि गाँव में समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

वल्लि अम्माल अपनी बीमार बेटी को लेकर मदुरै पहुँचती है। मदुरै नगर पांड्य राजाओं की दूसरी राजधानी रह चुका है। इसे प्राचीन मानचित्रों में “मदरा” कहा गया, अंग्रेजों ने इसे “मदुरा” कहा, तथा यूनानी लोग इसे “मदोरा” के नाम से जानते थे। लेखक इस ऐतिहासिक नगर का वर्णन व्यंग्यात्मक ढंग से करते हैं—चप्पल रहित गँवार लोगों की भीड़, मीनाक्षी मंदिर के ऊँचे-ऊँचे स्तब्ध गोपुरम् और सूखी हुई वेगवती नदी का पुल, यही है मदुरै नगर का यथार्थ चित्रण।

अस्पताल पहुँचने पर बड़े डॉक्टर पाप्पाति की गहन जाँच करते हैं और यह जानकर कि उसे “एक्यूट केस ऑफ मेनिनजाइटिस” (मस्तिष्कावरण शोथ का गंभीर रोग) है, वे अत्यंत चिंतित हो जाते हैं। यह रोग इतना खतरनाक था कि तुरंत उपचार न मिलने पर पाप्पाति की जान को खतरा था। बड़े डॉक्टर अपने अधीनस्थ डॉ. धनशेखरन को आदेश देते हैं कि पाप्पाति को तुरंत अस्पताल में भर्ती किया जाए। जब उन्हें पता चलता है कि रोगी को अगली सुबह साढ़े सात बजे बुलाया गया है, तो वे क्रोधित होकर अपने अधीनस्थों को डाँटते हैं और तुरंत रोगी को खोजने का आदेश देते हैं।

परंतु दुर्भाग्यवश, बड़े डॉक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद पाप्पाति अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाती। इसका मुख्य कारण था वल्लि अम्माल की अशिक्षा—वह न तो अस्पताल की जटिल प्रक्रिया को समझ पाती है, न ही किसी अधिकारी से पूछने का साहस जुटा पाती है। अस्पताल में व्याप्त घूसखोरी और पैरवी का वातावरण भी उसकी राह में बाधा बनता है। दिनभर इधर-उधर भटकने और अनेक कठिनाइयों को झेलने के बाद, थकी-हारी और निराश वल्लि अम्माल अंततः अपनी बीमार पुत्री को लेकर वापस गाँव लौट जाती है।

इस प्रकार यह कहानी नगर की संवेदनहीन, नौकरशाही-ग्रस्त और भ्रष्ट व्यवस्था का यथार्थ चित्रण करती है, जहाँ एक निर्धन और अशिक्षित ग्रामीण महिला अपनी बेटी का जीवन बचाने के संघर्ष में हार जाती है।

केंद्रीय भाव (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 4)

इस कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि नगरीय जीवन-शैली अव्यावहारिक, संवेदनहीन और औपचारिकताओं से भरी है, जबकि ग्रामीण जीवन में परस्पर सहयोग और आत्मीयता होती है। लेखक स्त्री-शिक्षा की आवश्यकता पर भी बल देते हैं—यदि वल्लि अम्माल शिक्षित होती, तो वह प्रतिकूल परिस्थितियों से बेहतर ढंग से लड़ पाती। यह कहानी अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही पर भी करारा प्रहार करती है।

शीर्षक की सार्थकता

कहानी का शीर्षक “नगर” प्रतीकात्मक है। यह घटना-स्थान का द्योतक तो है ही, साथ ही यह नगरीय जीवन की अव्यावहारिक और रूखी जीवन-शैली का भी प्रतीक है। गाँव में लोग एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, जबकि नगर में वल्लि अम्माल को एक स्थान पर खड़े होकर रोने तक की अनुमति नहीं मिलती। अतः “नगर” शीर्षक पूर्णतः सार्थक और उपयुक्त है।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

सुजाता की यह कहानी एक साधारण ग्रामीण परिवार की व्यथा के माध्यम से भारतीय समाज की गहरी विसंगतियों को उजागर करती है। वल्लि अम्माल का चरित्र एक ऐसी नारी का प्रतिनिधित्व करता है, जो पूर्णतः अशिक्षित है और शहरी वातावरण से पूरी तरह अपरिचित है। वह पुराने रीति-रिवाजों में पली-बढ़ी है, उसे झोला-छाप वैद्यों, ओझाओं और देवी-देवताओं पर विश्वास है, लेकिन आधुनिक अस्पताल की प्रक्रिया और नियमों की उसे कोई जानकारी नहीं। यही कारण है कि बड़े डॉक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद वह अपनी बेटी को अस्पताल में भर्ती नहीं करा पाती।

लेखक ने इस कहानी के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि नगर केवल भौतिक दृष्टि से विकसित होते हैं, परंतु वहाँ के लोगों में मानवीय संवेदना का अभाव होता जा रहा है। अस्पताल जैसी सेवा-संस्थाओं में भी भ्रष्टाचार और लापरवाही व्याप्त है, जिसके कारण गरीब और अशिक्षित लोगों को न्याय और सुविधा नहीं मिल पाती। इसके विपरीत, गाँव का जीवन भले ही सुविधाओं से रहित हो, परंतु वहाँ लोग एक-दूसरे के दुःख-सुख में सहभागी होते हैं। इस प्रकार सुजाता ने “नगर” कहानी के माध्यम से नगरीय जीवन की अव्यावहारिकता, संवेदनहीनता और स्त्री-शिक्षा की आवश्यकता को बड़ी मार्मिकता से प्रस्तुत किया है।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 4)

  1. “नगर” कहानी के लेखक कौन हैं?

    (a) सातकोड़ी होता (b) सुजाता (c) श्रीनिवास (d) साँवर दइया

    उत्तर: (b) सुजाता

  2. “नगर” मूलतः किस भाषा की कहानी है?

    (a) कन्नड़ (b) उड़िया (c) तमिल (d) गुजराती

    उत्तर: (c) तमिल

  3. पाप्पाति किस रोग से पीड़ित थी?

    (a) मलेरिया (b) मेनिनजाइटिस (c) डेंगू (d) टिटनेस

    उत्तर: (b) मेनिनजाइटिस

  4. पाप्पाति को इलाज के लिए किस नगर ले जाया गया?

    (a) पटना (b) कोलकाता (c) मदुरै (d) दिल्ली

    उत्तर: (c) मदुरै

  5. पाप्पाति की माँ का नाम क्या था?

    (a) वल्लि अम्माल (b) मीनाक्षी (c) सुजाता (d) कमला

    उत्तर: (a) वल्लि अम्माल

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: पाप्पाति कौन थी?

    उत्तर: पाप्पाति वल्लि अम्माल की पुत्री थी, जो गंभीर रूप से बीमार थी।

  2. प्रश्न: बड़े डॉक्टर ने पाप्पाति को भर्ती करने का आदेश किसे दिया?

    उत्तर: बड़े डॉक्टर ने अपने अधीनस्थ डॉ. धनशेखरन को पाप्पाति को तुरंत भर्ती करने का आदेश दिया।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: पाप्पाति को शहर के अस्पताल क्यों लाया गया था?

    उत्तर: गाँव के प्राइमरी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर की सलाह पर पाप्पाति की गंभीर बीमारी के समुचित इलाज के लिए उसे मदुरै शहर के बड़े अस्पताल लाया गया था।

  2. प्रश्न: बड़े डॉक्टर ने अस्पताल के बाबू को क्यों डाँटा?

    उत्तर: जब बड़े डॉक्टर को पता चला कि पाप्पाति को अगली सुबह साढ़े सात बजे बुलाया गया है, तो वे क्रोधित हो गए, क्योंकि वे रोग की गंभीरता समझ चुके थे कि बिना तुरंत इलाज के रोगी सुबह तक जीवित नहीं बचेगी। इसी कारण उन्होंने बाबू को डाँटा।

  3. प्रश्न: पाप्पाति अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं हो पाई?

    उत्तर: वल्लि अम्माल अशिक्षित थी, उसे अस्पताल की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, तथा अस्पताल में व्याप्त घूसखोरी और पैरवी के कारण वह अपनी बेटी को भर्ती नहीं करा सकी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “नगर” कहानी के आधार पर वल्लि अम्माल के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

    उत्तर: वल्लि अम्माल इस कहानी की प्रमुख पात्रा है। वह पूर्णतः अशिक्षित और शहरी वातावरण से अपरिचित एक ग्रामीण महिला है। देहाती परिवेश में पली-बढ़ी होने के कारण वह मुखर नहीं है और उसमें आत्मविश्वास की कमी है। उसे अस्पताल का माहौल और दवाओं की गंध असहनीय लगती है। वह पुराने रीति-रिवाजों में विश्वास रखने वाली, झोला-छाप वैद्यों और देवी-देवताओं पर भरोसा करने वाली महिला है। शहरी नियमों और प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ होने के कारण वह अपनी बीमार बेटी को अस्पताल में भर्ती कराने में असफल रहती है। उसका चरित्र भारत की उन असंख्य अशिक्षित ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो व्यवस्था की जटिलताओं के सामने असहाय हो जाती हैं।

  2. प्रश्न: “नगर” कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।

    उत्तर: “नगर” शीर्षक कहानी के मूल भाव को सटीक ढंग से व्यक्त करता है। यह केवल घटना-स्थान (मदुरै नगर) का द्योतक नहीं है, बल्कि यह नगरीय जीवन की अव्यावहारिक, संवेदनहीन और भ्रष्ट व्यवस्था का भी प्रतीक है। वल्लि अम्माल अपनी बीमार पुत्री को लेकर मदुरै नगर जाती है, परंतु वहाँ के लोगों का रूखा व्यवहार, अस्पताल की जटिल प्रक्रिया और घूसखोरी उसे निराश कर देती है। नगर में उसे एक स्थान पर खड़े होकर रोने तक की अनुमति नहीं मिलती, जबकि गाँव में लोग एक-दूसरे के दुःख-सुख में सहभागी होते हैं। इस प्रकार लेखक ने नगर की अमानवीयता और अव्यवस्था को शीर्षक के माध्यम से सार्थक ढंग से प्रस्तुत किया है, जिससे यह शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त सिद्ध होता है।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 4)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: “नगर” पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?

    उत्तर: यह पाठ “वर्णिका भाग 2” पुस्तक के गद्य खंड का पाठ 4 है।

  2. प्रश्न: “नगर” कहानी मूलतः किस भाषा में लिखी गई है?

    उत्तर: यह कहानी मूलतः तमिल भाषा में लिखी गई है, जिसे हिंदी में अनूदित कर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

  3. प्रश्न: इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

    उत्तर: इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि स्त्रियों का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं का बचाव कर सकें, और साथ ही यह भी संदेश मिलता है कि सेवा-संस्थाओं को संवेदनशील और भ्रष्टाचार-मुक्त होना चाहिए।

निष्कर्ष (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 4)

“नगर” कहानी सुजाता की सामाजिक यथार्थ के प्रति गहरी संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कहानी एक अशिक्षित ग्रामीण माँ की व्यथा के माध्यम से नगरीय जीवन की संवेदनहीनता, अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार और स्त्री-शिक्षा की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उजागर करती है। यह पाठ छात्रों में सामाजिक जागरूकता, मानवीय संवेदना और व्यवस्थागत खामियों के प्रति सजगता विकसित करने में सहायक है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (वर्णिका भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।

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