एक वृक्ष की हत्या (कविता) – कुँवर नारायण | गोधूलि भाग 2, कक्षा 10 हिंदी पद्य पाठ 8

11 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 8)

“एक वृक्ष की हत्या” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “गोधूलि भाग 2” के पद्य खंड का आठवाँ पाठ है। यह नई कविता धारा के प्रमुख कवि कुँवर नारायण द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील कविता है, जो एक वृक्ष के काटे जाने के बहाने पर्यावरण, मानवीय संवेदना और सभ्यता के संकट को उजागर करती है। यह कविता उनके काव्य-संग्रह “इन्हीं दिनों” से संकलित है।

कवि परिचय

कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर 1927 ई. को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने कविता लिखने की शुरुआत लगभग सन् 1950 के आसपास की। कविता के अतिरिक्त उन्होंने कहानी, चिंतनपरक लेख तथा सिनेमा एवं अन्य कलाओं पर समीक्षाएँ भी लिखीं, परंतु कविता उनके सृजन-कर्म में सदैव केंद्र में रही। उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में “चक्रव्यूह”, “परिवेश: हम-तुम”, “अपने सामने”, “कोई दूसरा नहीं” और “इन्हीं दिनों” उल्लेखनीय हैं। उन्होंने “आत्मजयी” नामक प्रबंधकाव्य की रचना भी की। कुँवर नारायण नई कविता धारा के कवि माने जाते हैं और उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, कुमारन आशान पुरस्कार, व्यास सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, लोहिया सम्मान तथा कबीर सम्मान जैसे अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उनकी कविताओं में भाषा और विषय की विविधता तथा यथार्थ का खुरदरापन एवं सहज सौंदर्य दोनों साथ-साथ देखने को मिलते हैं।

कविता का सारांश (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 8)

इस कविता में कवि कुँवर नारायण एक बूढ़े वृक्ष के काटे जाने की घटना के माध्यम से पर्यावरण-संकट और मानवीय मूल्यों के क्षरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। कवि जब इस बार अपने घर लौटते हैं, तो पाते हैं कि घर के दरवाजे पर वर्षों से चौकीदार की तरह तैनात रहने वाला बूढ़ा वृक्ष अब वहाँ नहीं है — उसे काट दिया गया है। कवि उस वृक्ष का मानवीकरण करते हुए उसका वर्णन करते हैं: उसका तना पुराने चमड़े जैसा सख्त और झुर्रियों से भरा था, उसकी सूखी डाल राइफल के समान थी, ऊपर फैली पत्तियाँ मानो पगड़ी हों, और उसकी जड़ें फटे-पुराने जूते के समान थीं। धूप, बारिश, गर्मी और सर्दी — हर मौसम में यह वृक्ष खाकी वर्दीधारी चौकीदार की तरह चौकन्ना खड़ा रहता था। जब भी कवि घर लौटता, वृक्ष मानो दूर से पूछता — “कौन?” और कवि उत्तर देता — “दोस्त!” फिर वह उसकी ठंडी छाँव में पल भर बैठ जाता।

कविता के उत्तरार्ध में कवि अपने मन की गहरी आशंका व्यक्त करते हैं। उन्हें सदा से यह भय रहा है कि घर को लुटेरों से, शहर को हमलावरों से और देश को उसके शत्रुओं से बचाना आवश्यक है। परंतु इससे भी आगे बढ़कर कवि नदियों को नाला बनने से, हवा को धुएँ में बदलने से, भोजन को विषाक्त होने से, जंगल को मरुस्थल बनने से और सबसे बढ़कर मनुष्य को स्वयं जंगली (असभ्य और संवेदनहीन) बनने से बचाने की आवश्यकता पर बल देते हैं। इस प्रकार एक वृक्ष की हत्या के बहाने कवि संपूर्ण पारिस्थितिकी और मानवता के भविष्य पर गहन चिंतन प्रस्तुत करते हैं।

केंद्रीय भाव (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 8)

इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि वृक्ष केवल प्राकृतिक संपदा ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति और पर्यावरण के प्रहरी हैं। एक वृक्ष की हत्या वास्तव में मानवीय संवेदना, सभ्यता और भविष्य की सुरक्षा पर आघात है। कवि यह संदेश देते हैं कि यदि समय रहते पर्यावरण की रक्षा नहीं की गई, तो मनुष्य स्वयं अपनी मानवता खोकर जंगली प्रवृत्ति की ओर बढ़ जाएगा।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

कुँवर नारायण इस कविता में वृक्ष का मानवीकरण करते हुए उसे घर के चौकीदार के रूप में चित्रित करते हैं। बूढ़े वृक्ष का पुराना, झुर्रियोंदार तना, सूखी डाल और फैली हुई जड़ें — इन सबकी तुलना एक बूढ़े, अनुभवी पहरेदार के शरीर, राइफल, पगड़ी और जूतों से की गई है। यह रूपक अत्यंत सजीव है, क्योंकि यह वृक्ष को केवल निर्जीव वस्तु नहीं, बल्कि परिवार का एक आत्मीय सदस्य और सुरक्षा-प्रहरी बना देता है। “दोस्त” कहकर पहचान देने का प्रसंग वृक्ष और मनुष्य के बीच के मैत्रीपूर्ण, विश्वासपूर्ण संबंध को दर्शाता है।

कविता का दूसरा भाग व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए कवि की आंतरिक आशंकाओं को उजागर करता है। घर, शहर और देश को बाहरी शत्रुओं से बचाने की चिंता स्वाभाविक है, परंतु कवि इससे भी गंभीर खतरे की ओर इशारा करते हैं — वह है पर्यावरण का विनाश। नदियों का नाला बनना, हवा का धुएँ में बदलना, भोजन का विषाक्त होना और जंगल का मरुस्थल में परिवर्तित होना — ये सभी संकेत हैं कि मनुष्य स्वयं अपनी जड़ें काट रहा है। अंतिम पंक्ति “मनुष्य को जंगली हो जाने से बचाना है” कविता की सबसे गहरी चेतावनी है — इसका अर्थ है कि यदि मनुष्य ने संवेदनशीलता और विवेक खो दिया, तो वह सभ्य होते हुए भी आचरण में बर्बर बन जाएगा।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 8)

  1. “एक वृक्ष की हत्या” कविता के रचयिता कौन हैं?

    (a) अज्ञेय (b) सुमित्रानंदन पंत (c) कुँवर नारायण (d) जीवनानंद दास

    उत्तर: (c) कुँवर नारायण

  2. “एक वृक्ष की हत्या” किस काव्य-संग्रह से संकलित है?

    (a) इन्हीं दिनों (b) हम-तुम (c) आमने-सामने (d) चक्रव्यूह

    उत्तर: (a) इन्हीं दिनों

  3. कुँवर नारायण आधुनिक युग की किस काव्य-धारा के कवि हैं?

    (a) प्रगतिवादी (b) प्रयोगवादी (c) यथार्थवादी (d) नई कविता

    उत्तर: (d) नई कविता

  4. कवि ने वृक्ष की डाल की तुलना किससे की है?

    (a) लाठी से (b) राइफल से (c) भाला से (d) तोप से

    उत्तर: (b) राइफल से

  5. कुँवर नारायण का जन्म कहाँ हुआ था?

    (a) लखनऊ (b) दिल्ली (c) पटना (d) इलाहाबाद

    उत्तर: (a) लखनऊ

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था?

    उत्तर: वृक्ष प्राचीन काल से मानव और पर्यावरण की रक्षा करता रहा है, इसलिए कवि को वह बूढ़ा चौकीदार लगता था।

  2. प्रश्न: वृक्ष और कवि के बीच क्या संवाद होता था?

    उत्तर: वृक्ष दूर से “कौन?” पूछता था और कवि उत्तर देता था “दोस्त!”

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: कवि किन चीजों को बचाने की बात करता है और क्यों?

    उत्तर: कवि घर, शहर, देश के साथ-साथ नदियों, हवा, भोजन, जंगल और मनुष्य को बचाने की बात करता है, क्योंकि इनके बिना मानव-जीवन और पर्यावरण दोनों संकट में पड़ जाएँगे।

  2. प्रश्न: कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: शीर्षक “एक वृक्ष की हत्या” वृक्ष के कटने के बहाने पर्यावरण-विनाश और मानवीय संवेदनहीनता की ओर संकेत करता है, इसलिए यह पूर्णतः सार्थक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “एक वृक्ष की हत्या” कविता के आधार पर वृक्ष के मानवीकरण को स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: कवि कुँवर नारायण ने इस कविता में वृक्ष का सजीव मानवीकरण किया है। वृक्ष का तना पुराने चमड़े जैसा, सूखी डाल राइफल जैसी, पत्तियाँ पगड़ी जैसी और जड़ें फटे जूते जैसी बताई गई हैं। हर मौसम में यह वृक्ष खाकी वर्दीधारी चौकीदार की भाँति चौकन्ना खड़ा रहता है और आने-जाने वालों से “कौन?” पूछता है। इस प्रकार कवि ने वृक्ष को घर के रक्षक और आत्मीय मित्र के रूप में चित्रित किया है।

  2. प्रश्न: कविता के माध्यम से पर्यावरण-संकट पर कवि के विचार स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: कवि एक वृक्ष की हत्या के बहाने संपूर्ण पर्यावरण-संकट की ओर संकेत करते हैं। वे कहते हैं कि नदियाँ नाला बन रही हैं, हवा धुएँ में बदल रही है, भोजन विषाक्त हो रहा है और जंगल मरुस्थल में परिवर्तित हो रहे हैं। इन सबसे बढ़कर कवि की चिंता यह है कि मनुष्य स्वयं संवेदनहीन होकर जंगली प्रवृत्ति अपना रहा है। कवि इस प्रवृत्ति के प्रति सचेत रहने का आह्वान करते हैं।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 8)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: यह पद्य पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?

    उत्तर: यह पाठ “गोधूलि भाग 2” पुस्तक के पद्य खंड का पाठ 8 है।

  2. प्रश्न: कुँवर नारायण किस काव्यधारा के कवि हैं?

    उत्तर: कुँवर नारायण नई कविता धारा के प्रमुख कवि हैं।

  3. प्रश्न: इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

    उत्तर: इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि वृक्षों और पर्यावरण की रक्षा करना मानवता और सभ्यता की रक्षा के समान है।

निष्कर्ष (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 8)

“एक वृक्ष की हत्या” कविता कुँवर नारायण की गहन पर्यावरणीय संवेदनशीलता और मानवतावादी दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कविता एक साधारण वृक्ष के कटने की घटना को माध्यम बनाकर पर्यावरण-संकट, मानवीय मूल्यों के क्षरण और सभ्यता की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को उजागर करती है। यह पाठ छात्रों में प्रकृति-प्रेम, पर्यावरण-संरक्षण की चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने में सहायक है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (गोधूलि भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।

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