हिरोशिमा (अज्ञेय) – गोधूलि भाग 2, कक्षा 10 हिंदी पद्य पाठ 7 सम्पूर्ण व्याख्या

11 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 7)

“हिरोशिमा” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “गोधूलि भाग 2” के पद्य खंड का सातवाँ पाठ है। यह प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ द्वारा रचित एक मार्मिक कविता है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा नगर पर गिराए गए परमाणु बम की विभीषिका का चित्रण करती है। यह कविता आधुनिक सभ्यता की विनाशकारी प्रवृत्ति पर गहरा प्रश्न उठाती है और मानवता को एक अनिवार्य चेतावनी देती है।

कवि परिचय

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का जन्म 7 मार्च 1911 ई. को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ था, किंतु उनका मूल निवास कर्तारपुर (पंजाब) था। उनके पिता डॉ. हीरानंद शास्त्री एक प्रख्यात पुरातत्त्ववेत्ता थे और माता का नाम व्यंती देवी था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ में घर पर ही हुई। उन्होंने 1925 ई. में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक, 1927 ई. में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से इंटरमीडिएट, 1929 ई. में फोरमन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर से बी.एससी. तथा लाहौर से ही अंग्रेजी में एम.ए. किया।

अज्ञेय बहुभाषाविद् थे और उन्हें संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, फारसी, तमिल आदि अनेक भाषाओं का ज्ञान था। वे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि, कथाकार, विचारक एवं पत्रकार थे तथा हिंदी कविता में प्रयोगवाद के प्रवर्तक माने जाते हैं। सात प्रयोगधर्मी कवियों की रचनाओं को संकलित कर उन्होंने “तार सप्तक” नामक काव्य-संकलन प्रस्तुत किया, जिसने हिंदी काव्य में नई हवा के झोंके ला दिए। उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में “भग्नदूत”, “चिंता”, “इत्यलम”, “हरी घास पर क्षण भर”, “बावरा अहेरी” और “सदानीरा” उल्लेखनीय हैं। “हिरोशिमा” कविता उनके संग्रह “सदानीरा” से संकलित है। अज्ञेय को साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ जैसे अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका निधन 4 अप्रैल 1987 ई. को हुआ।

कविता का सारांश (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 7)

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को अमेरिका के एक बमवर्षक विमान ने जापान के हिरोशिमा नगर पर परमाणु बम गिराया था, जिससे भारी जन-धन की क्षति हुई। “हिरोशिमा” कविता की पृष्ठभूमि इसी विनाशकारी घटना पर आधारित है। कवि अज्ञेय बताते हैं कि नगर के चौक पर अचानक एक सूरज प्रकट हुआ, परंतु यह प्रकृति का सामान्य सूरज नहीं था, बल्कि मानव-निर्मित परमाणु बम के विस्फोट से उत्पन्न भयावह प्रकाश-पुंज था। यह सूरज क्षितिज से नहीं, बल्कि धरती को फाड़कर निकला था।

बम के फटते ही उपस्थित लोगों की छायाएँ चारों दिशाओं में बिना किसी निश्चित दिशा के फैल गईं। सामान्यतः सूर्य के उगने पर छाया एक निश्चित दिशा में पड़ती है, परंतु इस विस्फोट की प्रचंडता ने मृत मानवों की परछाइयों को दिशाहीन कर दिया। कवि इसकी तुलना काल-रूपी सूर्य के रथ के पहियों से करते हैं, जो मानो टूटकर दसों दिशाओं में बिखर गए हों।

यह भयावह “सूरज” कुछ ही क्षणों में उदय होकर अस्त भी हो गया — अर्थात यह विनाशकारी प्रकाश-पुंज पल भर में ही अपनी विध्वंसक शक्ति दिखाकर लुप्त हो गया। इस भीषण ताप में अनेक मनुष्य पल भर में भाप बनकर विलीन हो गए और उनकी परछाइयाँ पत्थरों तथा सड़कों पर स्थायी रूप से अंकित हो गईं, जो आज भी उस त्रासदी की मूक साक्षी हैं। कवि इस घटना के माध्यम से आधुनिक विज्ञान और तकनीक के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और मानवता से शांति तथा सह-अस्तित्व की अपील करते हुए युद्ध व विनाश की प्रवृत्ति के विरुद्ध सचेत रहने का आह्वान करते हैं।

केंद्रीय भाव (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 7)

इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि मनुष्य द्वारा निर्मित विज्ञान और शक्ति, जब विनाश के लिए प्रयोग की जाती है, तो वह स्वयं मानवता के लिए ही सबसे बड़ा खतरा बन जाती है। कवि अज्ञेय हिरोशिमा पर हुए परमाणु बम विस्फोट के माध्यम से आधुनिक विज्ञान के दुरुपयोग और युद्धोन्मादी प्रवृत्ति के भयावह परिणामों को उजागर करते हुए विश्व-शांति और मानवता की रक्षा का संदेश देते हैं।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

अज्ञेय इस कविता में हिरोशिमा पर हुए परमाणु बम विस्फोट का अत्यंत प्रभावशाली और मार्मिक चित्रण करते हैं। कवि बताते हैं कि नगर के चौक पर अचानक जो “सूरज” प्रकट हुआ, वह वास्तव में प्रकृति का सूरज नहीं, बल्कि मानव द्वारा निर्मित विनाशकारी अणुबम के विस्फोट से उत्पन्न प्रकाश था। यह धूप आकाश से नहीं, बल्कि धरती के फटने से उत्पन्न हुई, जो इस बात का प्रतीक है कि यह विनाश मानव-निर्मित था, प्राकृतिक नहीं।

कवि आगे बताते हैं कि इस विस्फोट से उपस्थित मानवों की छायाएँ दिशाहीन होकर हर ओर बिखर गईं, क्योंकि विस्फोट का प्रकाश एक साथ सभी दिशाओं में फैला था। “काल-सूर्य के रथ के पहियों” वाली उपमा इस विनाश की भयावहता और अव्यवस्था को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है। यह भयावह सूरज कुछ ही क्षणों में उदय होकर अस्त हो गया, अर्थात विस्फोट की चमक अत्यंत क्षणिक थी, परंतु उसका विनाशकारी प्रभाव चिरस्थायी और अत्यंत भीषण रहा। अंतिम पंक्तियों में “मानव का रचा हुआ सूरज मानव को ही भाप बनाकर सोख गया” — यह पंक्ति कविता का सर्वाधिक मार्मिक कथन है, जो मनुष्य की स्वयं की विनाशकारी प्रवृत्ति पर गहरा कटाक्ष करती है। इस प्रकार अज्ञेय आधुनिक विज्ञान की विध्वंसक शक्ति और युद्ध की भयावहता को उजागर करते हुए मानवता से शांति, संयम और सह-अस्तित्व की अपील करते हैं।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 7)

  1. “हिरोशिमा” कविता के रचयिता कौन हैं?(a) रामधारी सिंह दिनकर (b) कुँवर नारायण (c) अज्ञेय (d) जीवनानंद दास

    उत्तर: (c) अज्ञेय

  2. अज्ञेय किस काव्यधारा के कवि हैं?(a) छायावाद (b) प्रयोगवाद (c) रीतिकाल (d) भक्तिकाल

    उत्तर: (b) प्रयोगवाद

  3. जापान के हिरोशिमा नगर पर अणुबम किसने गिराया था?(a) अमेरिका (b) रूस (c) चीन (d) इंग्लैंड

    उत्तर: (a) अमेरिका

  4. “हिरोशिमा” कविता किस काव्य-संग्रह से संकलित है?(a) चिंता (b) सदानीरा (c) इत्यलम (d) भग्नदूत

    उत्तर: (b) सदानीरा

  5. ‘अज्ञेय’ किसका उपनाम है?(a) सच्चिदानंद वात्स्यायन (b) रामधारी सिंह (c) बदरीनारायण चौधरी (d) वीरेन डंगवाल

    उत्तर: (a) सच्चिदानंद वात्स्यायन

  6. किस काव्य-संकलन के प्रकाशन से हिंदी में नई हवा के झोंके आए?(a) तार-सप्तक (b) हरी घास पर क्षण भर (c) चक्रवाल (d) इन दिनों

    उत्तर: (a) तार-सप्तक

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: अज्ञेय का पूरा नाम क्या था?उत्तर: अज्ञेय का पूरा नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन था।
  2. प्रश्न: कविता में सूरज की संज्ञा किसे दी गई है?उत्तर: कविता में सूरज की संज्ञा अणुबम के विस्फोट से उत्पन्न प्रकाश-पुंज को दी गई है।
  3. प्रश्न: ‘काल-सूर्य’ शब्द से कवि का क्या तात्पर्य है?उत्तर: ‘काल-सूर्य’ से कवि का तात्पर्य मृत्यु और विनाश के प्रतीक सूर्य अर्थात् परमाणु बम से है।
  4. प्रश्न: “हिरोशिमा” कविता किस छंद में लिखी गई है?उत्तर: यह कविता मुक्त छंद में लिखी गई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: हिरोशिमा नगर के चौक पर प्रकट हुए “सूरज” की विशेषता क्या थी?उत्तर: यह सूरज प्रकृति का सामान्य सूरज नहीं था, बल्कि मानव-निर्मित परमाणु बम के विस्फोट से उत्पन्न भयावह प्रकाश-पुंज था, जिसकी धूप आकाश से नहीं बल्कि धरती के फटने से फैली।
  2. प्रश्न: मानव-छायाएँ दिशाहीन क्यों बताई गई हैं?उत्तर: सामान्य सूर्य के प्रकाश से बनने वाली छाया एक निश्चित दिशा में पड़ती है, परंतु बम विस्फोट से उत्पन्न प्रकाश सभी दिशाओं में एक साथ फैला, जिससे मृत मानवों की परछाइयाँ बिना किसी क्रम के चारों ओर बिखर गईं।
  3. प्रश्न: कवि अज्ञेय इस कविता के माध्यम से क्या संदेश देना चाहते हैं?उत्तर: कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि परमाणु हथियार मानवता के लिए अत्यंत विनाशकारी हैं, और विश्व को शस्त्रों की होड़ छोड़कर शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग अपनाना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “हिरोशिमा” कविता के आधार पर परमाणु बम विस्फोट की विभीषिका का वर्णन कीजिए।उत्तर: “हिरोशिमा” कविता में अज्ञेय ने 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा नगर पर अमेरिका द्वारा गिराए गए परमाणु बम की भयावहता का सजीव चित्रण किया है। कवि बताते हैं कि नगर के चौक पर अचानक एक असामान्य सूरज प्रकट हुआ, जो वास्तव में विस्फोट से उत्पन्न प्रकाश-पुंज था। इसकी धूप आकाश से नहीं, बल्कि धरती के फटने से फैली, जो इस बात का प्रतीक है कि यह विनाश प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव-निर्मित था। बम के फटते ही उपस्थित लोगों की छायाएँ दिशाहीन होकर चारों ओर बिखर गईं, और अनेक मनुष्य पल भर में भाप बनकर विलीन हो गए। उनकी परछाइयाँ पत्थरों और सड़कों पर सदा के लिए अंकित हो गईं, जो आज भी उस त्रासदी की मूक साक्षी हैं। इस प्रकार कवि ने परमाणु युद्ध की भयावहता को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
  2. प्रश्न: “हिरोशिमा” कविता की समसामयिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।उत्तर: “हिरोशिमा” कविता आज के युग में भी अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि वर्तमान समय में विश्व के अनेक देश परमाणु हथियारों और अन्य शक्तिशाली शस्त्रों के निर्माण में लगे हुए हैं। प्रत्येक राष्ट्र अपनी सैन्य शक्ति और परमाणु क्षमता दिखाने की होड़ में लगा है, जिससे विश्व-शांति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो हिरोशिमा जैसी विनाशकारी घटनाएँ पुनः घट सकती हैं। अज्ञेय की यह कविता मानवता को सचेत करती है कि विज्ञान और तकनीक का उपयोग विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानव-कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 7)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: यह पद्य पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?उत्तर: यह पाठ “गोधूलि भाग 2” पुस्तक के पद्य खंड का पाठ 7 है।
  2. प्रश्न: अज्ञेय किस-किस भाषा के ज्ञाता थे?उत्तर: अज्ञेय संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, फारसी और तमिल सहित अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे।
  3. प्रश्न: इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?उत्तर: इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि युद्ध और परमाणु हथियार मानवता के लिए विनाशकारी हैं, और विश्व-शांति की स्थापना अत्यंत आवश्यक है।

निष्कर्ष (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 7)

“हिरोशिमा” कविता अज्ञेय की गहन संवेदनशीलता और मानवतावादी दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कविता हमें परमाणु युद्ध की भयावहता से परिचित कराते हुए विश्व-शांति और मानवता की रक्षा का महत्वपूर्ण संदेश देती है। यह पाठ छात्रों में युद्ध-विरोधी चेतना, वैज्ञानिक जिम्मेदारी और शांति के प्रति सजगता विकसित करने में सहायक है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (गोधूलि भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।

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