क्रिया-भेद – कक्षा 10 हिंदी व्याकरण संपूर्ण अध्ययन
प्रस्तावना
हिंदी व्याकरण में “क्रिया” वाक्य का वह अनिवार्य अंग है, जिसके बिना कोई भी वाक्य पूर्ण नहीं हो सकता। बिहार बोर्ड कक्षा 10 की परीक्षा में “क्रिया-भेद” से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं, जिनमें अकर्मक-सकर्मक क्रिया, उनके उपभेद, प्रेरणार्थक क्रिया तथा संयुक्त क्रिया की पहचान करना शामिल है। इस लेख में हम क्रिया की परिभाषा, धातु, क्रिया के मुख्य भेदों तथा उनके सभी उपभेदों को उदाहरण-वाक्यों, तालिकाओं और टिप्स सहित विस्तार से समझेंगे, ताकि विद्यार्थी परीक्षा में इस विषय से जुड़े किसी भी प्रश्न को सरलता से हल कर सकें।
क्रिया की परिभाषा
जिस शब्द या पद से किसी कार्य के करने अथवा होने का बोध होता है, उसे “क्रिया” कहते हैं। जैसे –
- राधा गीत गाती है। (करने का बोध)
- पत्ते हवा में झूल रहे हैं। (होने का बोध)
- बादल गरज रहे हैं।
इन वाक्यों में “गाती है”, “झूल रहे हैं” तथा “गरज रहे हैं” पद किसी कार्य के करने या होने का बोध करा रहे हैं, अतः ये क्रिया-पद हैं।
धातु क्या है?
क्रिया के मूल अंश को “धातु” कहते हैं। जैसे – पढ़, लिख, सो, हँस, खेल, देख आदि। धातु में “ना” प्रत्यय जोड़ने से क्रिया का सामान्य रूप बनता है –
| धातु | प्रत्यय | सामान्य क्रिया रूप |
|---|---|---|
| पढ़ | ना | पढ़ना |
| लिख | ना | लिखना |
| हँस | ना | हँसना |
| खेल | ना | खेलना |
मूल धातु पहचानने की तरकीब: यदि किसी शब्द को “तू” के साथ आज्ञार्थक रूप में प्रयोग किया जा सके, तो वही मूल धातु है। जैसे – तू पढ़, तू खा, तू चल।
क्रिया के मुख्य भेद
प्रयोग की दृष्टि से क्रिया के दो मुख्य भेद माने जाते हैं:
| क्रिया का प्रकार | परिभाषा |
|---|---|
| अकर्मक क्रिया | जिस क्रिया में कर्म की आवश्यकता नहीं होती और जिसका फल सीधे कर्ता पर पड़ता है |
| सकर्मक क्रिया | जिस क्रिया में कर्म की आवश्यकता होती है और जिसका फल कर्म पर पड़ता है |
अकर्मक क्रिया
जिस क्रिया के प्रयोग में “कर्म” की आवश्यकता नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। इसका फल सीधे कर्ता पर पड़ता है। जैसे – रीना हँसती है। यहाँ “हँसना” क्रिया का फल कर्ता ‘रीना’ पर ही पड़ रहा है, इसमें किसी कर्म की आवश्यकता नहीं है।
कुछ सामान्य अकर्मक क्रियाएँ: हँसना, रोना, उठना, गिरना, बैठना, चलना, जागना, सोना, दौड़ना, मरना, जीना, टूटना, आना, जाना।
| वाक्य | अकर्मक क्रिया |
|---|---|
| बच्चे मैदान में दौड़ रहे हैं। | दौड़ना | सूरज पूरब से उगता है। | उगना |
| दादीजी सुबह जल्दी जाग जाती हैं। | जागना |
| पुराना पुल टूट गया। | टूटना |
अकर्मक क्रिया के उपभेद
| उपभेद | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्थित्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया | कर्ता की स्थिर दशा का बोध कराती है, कर्म के बिना ही पूर्ण अर्थ देती है | राहुल सो रहा है। मीरा हँसती है। |
| गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया | कर्ता की गतिमान (चलती हुई) दशा का बोध कराती है | पक्षी आकाश में उड़ रहा है। ट्रेन स्टेशन से निकल रही है। |
| अपूर्ण अकर्मक क्रिया | कर्म की आवश्यकता नहीं, परंतु कर्ता से जुड़े “पूरक” शब्द के बिना अर्थ अधूरा रहता है | मोहन डॉक्टर बनेगा। वह ईमानदार निकला। |
टिप: अपूर्ण अकर्मक क्रिया में प्रायः “होना”, “बनना”, “निकलना” जैसी क्रियाएँ आती हैं और वाक्य में कर्ता से संबंधित एक विशेषण या संज्ञा (पूरक) अनिवार्य रूप से जुड़ा रहता है।
सकर्मक क्रिया
जिस क्रिया के प्रयोग में “कर्म” की आवश्यकता अनिवार्य रूप से होती है और जिसका फल सीधे कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – नेहा ने पत्र लिखा। यहाँ “लिखा” क्रिया ‘पत्र’ (कर्म) के बिना अधूरी है।
कुछ सामान्य सकर्मक क्रियाएँ: देखना, सुनना, पढ़ना, लिखना, खाना, पीना, लेना, देना, तोड़ना, बेचना, बनाना।
| वाक्य | कर्म | सकर्मक क्रिया |
|---|---|---|
| अर्जुन ने आम खाया। | आम | खाना | माँ ने बच्चे को दूध पिलाया। | बच्चे को, दूध | पिलाना | अध्यापक ने छात्रों को कहानी सुनाई। | छात्रों को, कहानी | सुनाना |
सकर्मक क्रिया के उपभेद
| उपभेद | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| पूर्ण एककर्मक क्रिया | इसमें केवल एक ही कर्म की आवश्यकता होती है | माली ने पौधे लगाए। दर्जी कपड़े सिलेगा। | पूर्ण द्विकर्मक क्रिया | इसमें दो कर्मों की आवश्यकता होती है | पिता ने बेटे को साइकिल दी। शिक्षक ने छात्र को किताब बाँटी। |
| अपूर्ण सकर्मक क्रिया | कर्म होते हुए भी कर्म के पूरक शब्द के बिना अर्थ अधूरा रहता है | सभी उसे ईमानदार मानते हैं। कक्षा ने उसे मॉनिटर चुना। |
टिप: पूर्ण द्विकर्मक क्रिया में प्रायः “देना”, “बताना”, “सुनाना” जैसी प्रेरणार्थक क्रियाएँ आती हैं, जिनमें एक कर्म व्यक्ति (संप्रदान कारक) से और दूसरा वस्तु से जुड़ा होता है।
अकर्मक-सकर्मक क्रिया में परिवर्तन
क्रिया का अकर्मक या सकर्मक होना उसके प्रयोग पर निर्भर करता है, न कि केवल उसके रूप पर। एक ही क्रिया प्रसंग के अनुसार अकर्मक भी हो सकती है और सकर्मक भी।
| क्रिया | अकर्मक प्रयोग | सकर्मक प्रयोग |
|---|---|---|
| पढ़ना | सोनू कक्षा नौ में पढ़ता है। | सोनू किताब पढ़ता है। |
| खेलना | बच्चे शाम को खेलते हैं। | बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। |
प्रेरणार्थक क्रिया
जिस क्रिया से यह पता चले कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को वह कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे –
| मूल क्रिया | प्रेरणार्थक रूप | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| पीना | पिलाना | माँ बच्चे को दूध पिलाती है। |
| पढ़ना | पढ़ाना | शिक्षक छात्रों को हिंदी पढ़ाते हैं। |
| करना | करवाना | ठेकेदार ने मजदूरों से काम करवाया। |
संयुक्त क्रिया
दो या दो से अधिक धातुओं के योग से बनी क्रिया को “संयुक्त क्रिया” कहते हैं। जैसे – वह पढ़ लिया करता है। यहाँ “पढ़ लिया करता है” एक संयुक्त क्रिया है।
संयुक्त क्रिया मुख्यतः चार प्रकार की क्रियाओं के मेल से बनती है:
| क्रिया का प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| मुख्य क्रिया | कर्ता या कर्म के मुख्य कार्य को दर्शाती है | सहायक क्रिया | काल, वाच्य आदि की सूचना देती है |
| संयोजी क्रिया | मुख्य क्रिया के पक्ष, वृत्ति या वाच्य को स्पष्ट करती है |
| रंजक क्रिया | मुख्य क्रिया के अर्थ में विशेष छवि (जैसे आकस्मिकता, पूर्णता) जोड़ती है |
रंजक क्रियाओं के उदाहरण
| रंजक क्रिया | भाव | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| उठना | आकस्मिकता | अचानक शोर सुनकर वह चौंक उठा। |
| बैठना | आकस्मिकता | क्रोध में आकर उसने मेज पर हाथ पटक दिया और चिल्ला बैठा। |
| लेना | क्रियापूर्णता | उसने सारा काम समय पर कर लिया। | देना | पूर्णता/विवशता | बच्चे ने रोते हुए सारी बात बता दी। |
| पड़ना | स्वतःस्फूर्तता | बुरी खबर सुनकर वह रो पड़ा। |
| डालना | बलात्/पूर्णता | मजदूरों ने पुरानी दीवार तोड़ डाली। |
ध्यान रखने योग्य नियम: निषेधात्मक (नकारात्मक) वाक्यों में मुख्य क्रिया के साथ रंजक क्रिया प्रायः नहीं आती। जैसे – “वह हँस पड़ा” का निषेध रूप होगा “वह नहीं हँसा”, न कि “वह हँस नहीं पड़ा”।
मुख्य क्रिया की पहचान कैसे करें?
संयुक्त क्रिया में मुख्य क्रिया पहचानने के लिए कर्ता से यह प्रश्न पूछें कि वह “क्या करता है?” जैसे – मैं लिख लेता हूँ। यहाँ प्रश्न होगा – मैं क्या करता हूँ? उत्तर मिलेगा – लिखने का काम। अतः “लिखना” मुख्य क्रिया है और “लेता हूँ” सहायक/रंजक क्रिया है।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- क्रिया के मुख्यतः कितने भेद होते हैं?
(a) दो (b) तीन (c) चार (d) पाँच
उत्तर: (a) दो
- “बच्चे मैदान में दौड़ रहे हैं” में कौन-सी क्रिया है?
(a) सकर्मक (b) अकर्मक (c) प्रेरणार्थक (d) संयुक्त
उत्तर: (b) अकर्मक
- क्रिया के मूल अंश को क्या कहते हैं?
(a) प्रत्यय (b) धातु (c) उपसर्ग (d) विशेषण
उत्तर: (b) धातु
- “पिता ने बेटे को साइकिल दी” में कौन-सी क्रिया है?
(a) पूर्ण एककर्मक (b) पूर्ण द्विकर्मक (c) अपूर्ण सकर्मक (d) अकर्मक
उत्तर: (b) पूर्ण द्विकर्मक
- दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनी क्रिया कहलाती है –
(a) प्रेरणार्थक क्रिया (b) संयुक्त क्रिया (c) सहायक क्रिया (d) अकर्मक क्रिया
उत्तर: (b) संयुक्त क्रिया
अभ्यास हेतु प्रश्न (लघु उत्तरीय)
- प्रश्न: अकर्मक और सकर्मक क्रिया में क्या अंतर है?
उत्तर: अकर्मक क्रिया में कर्म की आवश्यकता नहीं होती और उसका फल कर्ता पर पड़ता है, जबकि सकर्मक क्रिया में कर्म की आवश्यकता होती है और उसका फल कर्म पर पड़ता है।
- प्रश्न: रंजक क्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताएँ।
उत्तर: जो क्रिया मुख्य क्रिया के अर्थ को विशिष्ट भाव (जैसे आकस्मिकता, पूर्णता, विवशता) प्रदान करती है, उसे रंजक क्रिया कहते हैं। जैसे – “वह रो पड़ा” में “पड़ा” रंजक क्रिया है, जो आकस्मिकता का भाव दर्शाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: अकर्मक क्रिया के भेदों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अकर्मक क्रिया के तीन भेद होते हैं – स्थित्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया, जो कर्ता की स्थिर दशा दर्शाती है (जैसे – राहुल सो रहा है); गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया, जो कर्ता की गतिमान दशा दर्शाती है (जैसे – पक्षी उड़ रहा है); और अपूर्ण अकर्मक क्रिया, जिसमें कर्म की आवश्यकता नहीं होती परंतु पूरक शब्द के बिना अर्थ अधूरा रहता है (जैसे – मोहन डॉक्टर बनेगा)।
- प्रश्न: संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं? इसके भेदों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनी क्रिया को संयुक्त क्रिया कहते हैं। इसके चार भेद हैं – मुख्य क्रिया, जो कर्ता या कर्म के मुख्य कार्य को दर्शाती है; सहायक क्रिया, जो काल और वाच्य की सूचना देती है; संयोजी क्रिया, जो मुख्य क्रिया के पक्ष और वृत्ति को स्पष्ट करती है; तथा रंजक क्रिया, जो मुख्य क्रिया के अर्थ में विशेष भाव जोड़ती है, जैसे आकस्मिकता या पूर्णता।
महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न
- सकर्मक क्रिया के भेदों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
- प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
- निम्नलिखित वाक्यों में क्रिया का भेद बताएँ – (क) सूरज डूब रहा है। (ख) माँ ने बच्चे को खाना खिलाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: क्रिया किसे कहते हैं?
उत्तर: जिस शब्द या पद से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं।
- प्रश्न: क्या एक ही क्रिया अकर्मक और सकर्मक दोनों हो सकती है?
उत्तर: हाँ, क्रिया का अकर्मक या सकर्मक होना उसके प्रयोग पर निर्भर करता है, इसलिए एक ही क्रिया प्रसंग के अनुसार दोनों रूपों में प्रयुक्त हो सकती है, जैसे “पढ़ना”।
- प्रश्न: संयुक्त क्रिया में मुख्य क्रिया कैसे पहचानें?
उत्तर: कर्ता से यह प्रश्न पूछकर कि “वह क्या करता है”, जो उत्तर मिलता है वही मुख्य क्रिया होती है, शेष भाग सहायक या रंजक क्रिया कहलाता है।
निष्कर्ष
क्रिया-भेद हिंदी व्याकरण का एक ऐसा महत्वपूर्ण विषय है, जिसकी सही समझ से वाक्य-रचना और अर्थ-ग्रहण दोनों सरल हो जाते हैं। अकर्मक, सकर्मक, प्रेरणार्थक तथा संयुक्त क्रिया के भेदों को उदाहरणों के साथ बार-बार अभ्यास करने से छात्र परीक्षा में इस विषय से जुड़े प्रश्नों को आत्मविश्वास के साथ हल कर सकते हैं।
यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 हिंदी व्याकरण पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है।
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