Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन में विद्यार्थियों को हाइड्रोजन के गुण, आवर्त सारणी में इसकी स्थिति, समस्थानिक, डाइहाइड्रोजन का निर्माण, हाइड्राइड, जल, हाइड्रोजन परॉक्साइड, कठोर जल तथा हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन कराया जाता है। इस अध्याय के प्रश्न बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। यहाँ Chapter 9 के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं।
यदि आपने पिछला अध्याय नहीं पढ़ा है, तो पहले Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ पढ़ सकते हैं।
अध्याय 9 हाइड्रोजन – संक्षिप्त परिचय
हाइड्रोजन का परमाणु क्रमांक 1 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 है। यह आवर्त सारणी का सबसे हल्का तत्व है। हाइड्रोजन की कुछ विशेषताएँ क्षार धातुओं तथा कुछ विशेषताएँ हैलोजन तत्वों से मिलती हैं। इसी कारण आवर्त सारणी में इसकी स्थिति को समझना महत्वपूर्ण है।
हाइड्रोजन की आवर्त सारणी में स्थिति
हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 है। इसके बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह एक इलेक्ट्रॉन खोकर H+ तथा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके H− बना सकता है। इसी कारण इसमें क्षार धातुओं और हैलोजेनों दोनों से कुछ समानताएँ दिखाई देती हैं।
हाइड्रोजन और क्षार धातुओं में समानताएँ
- दोनों के बाहरी कोश में एक s-इलेक्ट्रॉन होता है।
- दोनों +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित कर सकते हैं।
- दोनों विद्युत-धनात्मक प्रकृति प्रदर्शित कर सकते हैं।
- हाइड्रोजन की तरह क्षार धातुएँ भी अनेक अभिक्रियाओं में अपचायक का कार्य करती हैं।
हाइड्रोजन और क्षार धातुओं में असमानताएँ
- क्षार धातुएँ सामान्यतः धातु हैं, जबकि हाइड्रोजन अधातु है।
- हाइड्रोजन सामान्यतः H2 के रूप में द्विपरमाणुक होता है।
- हाइड्रोजन के अनेक यौगिक सहसंयोजक होते हैं, जबकि क्षार धातुओं के अनेक यौगिक आयनिक होते हैं।
- हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की तुलना में अधिक होती है।
हाइड्रोजन और हैलोजेन में समानताएँ
- दोनों अधातु तत्व हैं।
- दोनों द्विपरमाणुक अणु बना सकते हैं।
- दोनों एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बना सकते हैं।
- दोनों के अनेक यौगिक सहसंयोजक प्रकृति के होते हैं।
हाइड्रोजन और हैलोजेन में असमानताएँ
- हैलोजेन सामान्यतः आसानी से X− आयन बनाते हैं, जबकि H− मुख्यतः कुछ धात्विक हाइड्राइडों में पाया जाता है।
- हैलोजन परमाणुओं में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं, जबकि हाइड्रोजन की संरचना अलग होती है।
- हैलोजेन के ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय प्रकृति के होते हैं, जबकि जल उदासीन प्रकृति का है।
हाइड्रोजन के समस्थानिक
हाइड्रोजन के तीन प्रमुख समस्थानिक हैं:
| समस्थानिक | प्रतीक | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रोटियम | 11H | इसमें कोई न्यूट्रॉन नहीं होता। |
| ड्यूटीरियम | 21H या D | इसमें एक न्यूट्रॉन होता है। |
| ट्राइटियम | 31H या T | इसमें दो न्यूट्रॉन होते हैं। |
इनके द्रव्यमान अनुपात को लगभग 1.008 : 2.014 : 3.016 के रूप में व्यक्त किया जाता है।
डाइहाइड्रोजन (H2)
सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन एक परमाण्विक अवस्था की अपेक्षा H2 के रूप में पाया जाता है। H2 अणु बनने पर दोनों हाइड्रोजन परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों को साझा करते हैं और स्थायी द्विपरमाणुक संरचना बनाते हैं।
हाइड्रोजन अणु का निर्माण:
H + H → H2
डाइहाइड्रोजन का निर्माण
जल के विद्युत-अपघटन द्वारा
जल में उपयुक्त विद्युत-अपघट्य मिलाकर विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर हाइड्रोजन तथा ऐनोड पर ऑक्सीजन प्राप्त होती है।
2H2O → 2H2 + O2
शुद्ध जल विद्युत का खराब चालक होता है। इसलिए उसकी चालकता बढ़ाने के लिए उपयुक्त इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किया जाता है।
कोल गैसीकरण
कोयले से संश्लेषण गैस या सिन्गैस प्राप्त की जा सकती है। इसके बाद कार्बन मोनोऑक्साइड की भाप के साथ अभिक्रिया कराकर हाइड्रोजन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
CO + H2O → CO2 + H2
इस प्रक्रिया को सामान्यतः जल-गैस शिफ्ट अभिक्रिया के रूप में समझा जाता है।
H–H बंध की उच्च बंध-वियोजन एन्थैल्पी
H2 अणु में H–H बंध काफी मजबूत होता है। इस बंध को तोड़ने के लिए पर्याप्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए सामान्य तापमान पर हाइड्रोजन अपेक्षाकृत कम अभिक्रियाशील दिखाई देता है और कई अभिक्रियाओं के लिए विशेष परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।
हाइड्राइड क्या हैं?
हाइड्रोजन जब किसी अन्य तत्व के साथ यौगिक बनाता है तो उसे हाइड्राइड कहा जाता है। हाइड्राइडों को उनकी प्रकृति के आधार पर मुख्य रूप से आयनिक, सहसंयोजक तथा धात्विक हाइड्राइडों में समझा जा सकता है।
1. आयनिक या लवणीय हाइड्राइड
क्षार धातुओं तथा कुछ क्षारीय मृदा धातुओं द्वारा बनाए गए हाइड्राइडों में H− आयन पाया जाता है। उदाहरण के लिए NaH और CaH2।
NaH + H2O → NaOH + H2
2. सहसंयोजक हाइड्राइड
अधातुओं तथा कुछ p-ब्लॉक तत्वों के हाइड्राइडों में सहसंयोजक बंध पाए जाते हैं। CH4, NH3, H2O और HF इसके उदाहरण हैं।
3. धात्विक हाइड्राइड
कुछ संक्रमण धातुएँ हाइड्रोजन को अपने धात्विक जालक में अवशोषित कर सकती हैं। ऐसे हाइड्राइडों का हाइड्रोजन भंडारण के संदर्भ में महत्व है।
इलेक्ट्रॉन-न्यून, इलेक्ट्रॉन-परिशुद्ध और इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हाइड्राइड
| प्रकार | मुख्य विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन-न्यून | परंपरागत लुईस संरचना के लिए इलेक्ट्रॉनों की कमी | B2H6 |
| इलेक्ट्रॉन-परिशुद्ध | आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की उचित संख्या | CH4 |
| इलेक्ट्रॉन-समृद्ध | एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित | NH3, H2O, HF |
धात्विक हाइड्राइड द्वारा हाइड्रोजन का भंडारण
हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसके सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता होती है। कुछ धातु और मिश्रधातुएँ हाइड्रोजन को अवशोषित करके धात्विक हाइड्राइड बना सकती हैं। इस कारण धात्विक हाइड्राइड हाइड्रोजन भंडारण की उपयोगी विधि माने जाते हैं।
हाइड्रोजन बंध
जब हाइड्रोजन किसी अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु जैसे F, O या N से जुड़ा होता है, तब वह दूसरे विद्युत-ऋणात्मक परमाणु के साथ आकर्षण प्रदर्शित कर सकता है। इस प्रकार के आकर्षण को हाइड्रोजन बंध कहते हैं।
HF, H2O और NH3 जैसे यौगिकों में हाइड्रोजन बंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जल (H2O)
जल पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पदार्थ है। इसकी ध्रुवीय प्रकृति, उच्च ऊष्मा-धारिता और हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता इसके विशेष गुणों के लिए जिम्मेदार हैं।
जल का स्वतः प्रोटोनीकरण
जल का एक अणु दूसरे जल अणु को प्रोटॉन दे सकता है। इसे जल का स्वतः प्रोटोनीकरण कहते हैं।
2H2O ⇌ H3O+ + OH−
जल के आयनिक गुणनफल को इस प्रकार लिखा जाता है:
Kw = [H3O+][OH−]
298 K पर Kw का मान लगभग 1.0 × 10−14 होता है।
जल का उभयधर्मी स्वभाव
जल अम्ल तथा क्षार दोनों की तरह व्यवहार कर सकता है। इसलिए इसे उभयधर्मी पदार्थ कहा जाता है।
अम्ल के रूप में:
H2O + NH3 ⇌ NH4+ + OH−
क्षार के रूप में:
H2O + H2S ⇌ H3O+ + HS−
बर्फ की संरचना
बर्फ में जल के अणु हाइड्रोजन बंधों द्वारा एक व्यवस्थित त्रिविमीय संरचना बनाते हैं। इस संरचना में अपेक्षाकृत खुले स्थान बनते हैं, जिसके कारण बर्फ का घनत्व द्रव जल की तुलना में कम होता है।
जल की कठोरता
जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के कुछ लवण घुले होने के कारण जल कठोर हो सकता है। कठोरता को मुख्यतः अस्थायी तथा स्थायी कठोरता में बाँटा जाता है।
अस्थायी कठोरता
कैल्शियम और मैग्नीशियम के हाइड्रोजन कार्बोनेट अस्थायी कठोरता के प्रमुख कारण हैं। इसे जल को उबालकर कम किया जा सकता है।
स्थायी कठोरता
कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा सल्फेट स्थायी कठोरता के प्रमुख कारण हैं। इसे कुछ रासायनिक तथा आयन-विनिमय विधियों से दूर किया जा सकता है।
परम्यूटिट विधि
परम्यूटिट या जियोलाइट विधि में सोडियम जियोलाइट का उपयोग करके कठोर जल में उपस्थित Ca2+ और Mg2+ आयनों को हटाया जाता है। इनके स्थान पर Na+ आयन आ जाते हैं और जल की कठोरता कम हो जाती है।
इस विधि का सामान्य सिद्धांत आयन-विनिमय पर आधारित है।
आयन-विनिमय विधि से विखनिजित जल
विखनिजित जल वह जल है जिसमें घुले हुए अधिकांश खनिज आयनों को आयन-विनिमय प्रक्रिया द्वारा हटा दिया जाता है। पहले धनायन-विनिमय रेजिन Ca2+, Mg2+, Na+ आदि को हटाकर H+ आयन प्रदान करता है। इसके बाद ऋणायन-विनिमय रेजिन Cl−, SO42−, HCO3− आदि को हटाकर OH− आयन प्रदान करता है।
H+ और OH− मिलकर जल बनाते हैं:
H+ + OH− → H2O
विखनिजित जल और आसुत जल
विखनिजित जल तथा आसुत जल में घुले हुए पदार्थों की मात्रा बहुत कम होती है। प्रयोगशाला और औद्योगिक कार्यों में ऐसे जल का उपयोग किया जाता है। पीने के पानी में शरीर के लिए आवश्यक खनिजों की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2)
हाइड्रोजन परॉक्साइड एक महत्वपूर्ण यौगिक है। इसमें ऑक्सीजन की औसत ऑक्सीकरण अवस्था −1 होती है। यह परिस्थितियों के अनुसार ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों की तरह व्यवहार कर सकता है।
H2O2 का अपघटन
हाइड्रोजन परॉक्साइड धीरे-धीरे जल और ऑक्सीजन में विघटित हो सकता है।
2H2O2 → 2H2O + O2
हाइड्रोजन परॉक्साइड का विरंजन में उपयोग
H2O2 के ऑक्सीकरण गुण के कारण इसका उपयोग कुछ पदार्थों के विरंजन में किया जाता है। यह रंगीन पदार्थों को ऑक्सीकरण करके उन्हें रंगहीन बनाने में सहायता करता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड का ऑक्सीकारक और अपचायक व्यवहार
H2O2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था −1 होती है। यह ऑक्सीजन −2 तक अपचयित हो सकती है या 0 तक ऑक्सीकृत हो सकती है। इसी कारण H2O2 दोनों प्रकार का व्यवहार कर सकता है।
जल अपघटन और जलयोजन में अंतर
| जल अपघटन | जलयोजन |
|---|---|
| किसी पदार्थ की जल के साथ ऐसी अभिक्रिया जिसमें उसका रासायनिक परिवर्तन हो। | किसी पदार्थ द्वारा जल के अणुओं को ग्रहण करके जलयोजित अवस्था बनाना। |
| इसमें नया पदार्थ या आयनिक प्रजातियाँ बन सकती हैं। | इसमें क्रिस्टलन जल के रूप में जल जुड़ सकता है। |
जल का विलायक के रूप में महत्व
जल एक उत्कृष्ट ध्रुवीय विलायक है। यह अनेक आयनिक तथा ध्रुवीय पदार्थों को घोल सकता है। इसके हाइड्रोजन बंध और उच्च परावैद्युतांक के कारण इसका विलायक के रूप में विशेष महत्व है।
जीवमंडल में जल का महत्व
- जल जीवों के शरीर का महत्वपूर्ण घटक है।
- यह जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह अनेक पदार्थों के परिवहन में विलायक का कार्य करता है।
- जल की उच्च ऊष्मा-धारिता तापमान को नियंत्रित रखने में सहायता करती है।
- हाइड्रोजन बंध के कारण जल के कई असामान्य भौतिक गुण दिखाई देते हैं।
भारी जल (D2O)
ड्यूटीरियम से बना जल D2O भारी जल कहलाता है। इसके भौतिक और रासायनिक गुण सामान्य जल H2O से कुछ अलग होते हैं। सामान्य पेयजल के स्थान पर भारी जल का उपयोग नहीं किया जाता।
हाइड्रोजनीकरण
असंतृप्त कार्बनिक यौगिक में हाइड्रोजन का योग करके संतृप्त यौगिक बनाने की प्रक्रिया हाइड्रोजनीकरण कहलाती है। यह सामान्यतः उत्प्रेरक की उपस्थिति में कराया जाता है।
वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकेल उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है।
सिन्गैस (Syngas)
कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के मिश्रण को सामान्यतः सिन्गैस या संश्लेषण गैस कहा जाता है। इसका उपयोग विभिन्न रासायनिक पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है।
भाप-अंगार गैस सृति अभिक्रिया
कार्बन मोनोऑक्साइड की भाप के साथ अभिक्रिया से अतिरिक्त हाइड्रोजन प्राप्त की जा सकती है। इस प्रक्रिया का उपयोग औद्योगिक स्तर पर हाइड्रोजन उत्पादन में महत्वपूर्ण है।
CO + H2O → CO2 + H2
हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था
हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की अवधारणा में ऊर्जा के वाहक के रूप में हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग शामिल है। हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग करने पर इसके उपयोग की परिस्थितियों के अनुसार कार्बन-आधारित ईंधनों की तुलना में उत्सर्जन संबंधी लाभ मिल सकते हैं।
ईंधन सेल
ईंधन सेल ऐसा विद्युत-रासायनिक उपकरण है जिसमें ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। हाइड्रोजन आधारित ईंधन सेल ऊर्जा उत्पादन की महत्वपूर्ण तकनीक है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- हाइड्रोजन की आवर्त सारणी में स्थिति को समझाइए।
- हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिखिए।
- हाइड्रोजन द्विपरमाणुक रूप में क्यों पाया जाता है?
- डाइहाइड्रोजन का निर्माण विद्युत-अपघटन द्वारा कैसे किया जाता है?
- हाइड्रोजन की अभिक्रियाशीलता पर H–H बंध की उच्च बंध-वियोजन एन्थैल्पी का क्या प्रभाव पड़ता है?
- इलेक्ट्रॉन-न्यून, इलेक्ट्रॉन-परिशुद्ध और इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हाइड्राइडों को उदाहरण सहित समझाइए।
- धात्विक हाइड्राइड हाइड्रोजन भंडारण में किस प्रकार उपयोगी हैं?
- हाइड्रोजन बंध क्या है?
- जल के स्वतः प्रोटोनीकरण को समझाइए।
- जल के उभयधर्मी स्वभाव को रासायनिक समीकरण द्वारा समझाइए।
- जल की अस्थायी और स्थायी कठोरता में अंतर बताइए।
- परम्यूटिट विधि द्वारा कठोर जल को मृदु कैसे किया जाता है?
- विखनिजित जल क्या है और इसे कैसे प्राप्त किया जाता है?
- H2O2 ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों की तरह कैसे कार्य करता है?
- जल अपघटन तथा जलयोजन में अंतर बताइए।
- हाइड्रोजनीकरण क्या है?
- सिन्गैस क्या है?
- हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था से क्या समझते हैं?
- ईंधन सेल क्या है?
अध्याय 9 के महत्वपूर्ण सूत्र एवं अभिक्रियाएँ
| विषय | सूत्र/अभिक्रिया |
|---|---|
| जल का स्वतः प्रोटोनीकरण | 2H2O ⇌ H3O+ + OH− |
| आयनिक गुणनफल | Kw = [H3O+][OH−] |
| जल का विद्युत-अपघटन | 2H2O → 2H2 + O2 |
| लवणीय हाइड्राइड की जल से अभिक्रिया | NaH + H2O → NaOH + H2 |
| हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन | 2H2O2 → 2H2O + O2 |
| जल-गैस शिफ्ट अभिक्रिया | CO + H2O → CO2 + H2 |
अध्याय 9 हाइड्रोजन का सारांश
हाइड्रोजन आवर्त सारणी का सबसे हल्का तत्व है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 है। इसकी कुछ विशेषताएँ क्षार धातुओं तथा हैलोजेनों से मिलती हैं। इसके तीन समस्थानिक प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम हैं। सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन H2 के रूप में पाया जाता है।
इस अध्याय में हाइड्राइडों के प्रकार, हाइड्रोजन बंध, जल की संरचना एवं गुण, जल की कठोरता, परम्यूटिट तथा आयन-विनिमय विधि, हाइड्रोजन परॉक्साइड, हाइड्रोजनीकरण, सिन्गैस, हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और ईंधन सेल जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।
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निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। हाइड्रोजन की आवर्त सारणी में स्थिति, इसके समस्थानिक, हाइड्राइड, जल की कठोरता, H2O2, हाइड्रोजन बंध और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था जैसे विषयों को अच्छी तरह समझना आवश्यक है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से परिभाषाओं, अंतर, रासायनिक समीकरणों और महत्वपूर्ण प्रश्नों का नियमित अभ्यास करना चाहिए।