📢 महत्वपूर्ण सूचना: BSEB Class 11वीं और 12वीं के Notes, Questions & Answers अभी तैयार किए जा रहे हैं। नए Chapters लगातार जोड़े जा रहे हैं।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

बिहार बोर्ड कक्षा 11 अर्थशास्त्र अध्याय 3 – आँकड़ों का संगठन में हम सीखते हैं कि एकत्र किए गए आँकड़ों को किस प्रकार व्यवस्थित, वर्गीकृत और सारणीबद्ध किया जाता है। जब आँकड़े बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, तो उन्हें सीधे समझना कठिन हो जाता है। इसलिए आँकड़ों को उचित वर्गों और समूहों में बाँटकर प्रस्तुत किया जाता है।

इस अध्याय में वर्गीकरण, चर, सतत एवं विविक्त चर, वर्ग-अंतराल, वर्ग-सीमा, आवृत्ति, आवृत्ति वितरण, समावेशी एवं अपवर्जी विधि, एकल चर, द्विचर एवं बहुचर वितरण, संचयी आवृत्ति तथा वर्ग-अंतराल का समायोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।

Table of Contents

अध्याय 3: आँकड़ों का संगठन – महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. वर्ग-मध्य बिंदु किसके बराबर होता है?

उत्तर: वर्ग-मध्य बिंदु निम्न वर्ग सीमा और उच्च वर्ग सीमा के औसत के बराबर होता है।

सूत्र:

वर्ग-मध्य बिंदु = (निम्न वर्ग सीमा + उच्च वर्ग सीमा) ÷ 2

उदाहरण के लिए 20–30 वर्ग का मध्य बिंदु:

(20 + 30) ÷ 2 = 25

प्रश्न 2. दो चरों के आवृत्ति वितरण को क्या कहते हैं?

उत्तर: दो चरों के आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Frequency Distribution) कहते हैं।

प्रश्न 3. वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन किस आधार पर किया जाता है?

उत्तर: वर्गीकृत आँकड़ों में अनेक सांख्यिकीय गणनाएँ प्रत्येक वर्ग के मध्य-बिंदु के आधार पर की जाती हैं।

प्रश्न 4. अपवर्जी विधि क्या है?

उत्तर: अपवर्जी विधि में किसी वर्ग की उच्च सीमा उस वर्ग में शामिल नहीं होती और अगले वर्ग की निम्न सीमा के रूप में ली जाती है।

उदाहरण:

वर्ग10 किस वर्ग में आएगा?
0–10शामिल नहीं होगा
10–20शामिल होगा

प्रश्न 5. परास से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: किसी आँकड़ा-समूह के अधिकतम और न्यूनतम मूल्य के बीच के अंतर को परास (Range) कहते हैं।

सूत्र:

परास = अधिकतम मूल्य − न्यूनतम मूल्य

आँकड़ों का वर्गीकरण

प्रश्न 6. आँकड़ों के वर्गीकरण का क्या लाभ है? अपने जीवन से उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: आँकड़ों या वस्तुओं का वर्गीकरण करने से उन्हें व्यवस्थित करना और आवश्यकता के समय ढूँढना आसान हो जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी विद्यार्थी की सभी किताबें कमरे में अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हों तो किसी पुस्तक को ढूँढने में काफी समय लगेगा। यदि किताबों को विषय के अनुसार अलग-अलग रखा जाए, जैसे हिन्दी की किताबें एक स्थान पर, गणित की किताबें दूसरे स्थान पर और विज्ञान की किताबें तीसरे स्थान पर, तो आवश्यक पुस्तक आसानी से मिल जाएगी।

इसी प्रकार सांख्यिकी में भी आँकड़ों को उचित वर्गों में बाँटने से उनका अध्ययन और तुलना करना आसान हो जाता है।

प्रश्न 7. चर क्या है? सतत तथा विविक्त चरों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जिस विशेषता का मान अलग-अलग इकाइयों या समय के अनुसार बदल सकता है, उसे चर (Variable) कहते हैं। जैसे आय, ऊँचाई, वजन, उत्पादन आदि।

आधारसतत चरविविक्त चर
अर्थजो किसी दिए गए परास में कोई भी मान ले सकता है।जो केवल निश्चित या अलग-अलग मान लेता है।
मूल्यदशमलव या भिन्नात्मक मान भी हो सकते हैं।सामान्यतः निश्चित पूर्णांक मान होते हैं।
उदाहरणऊँचाई, वजन, समय, दूरीविद्यार्थियों की संख्या, वाहनों की संख्या, पासे पर प्राप्त अंक

प्रश्न 8. समावेशी तथा अपवर्जी विधि को समझाइए।

उत्तर: आँकड़ों को वर्गों में बाँटने के लिए मुख्य रूप से समावेशी और अपवर्जी विधियों का प्रयोग किया जाता है।

समावेशी विधि

समावेशी विधि में वर्ग की निम्न और उच्च दोनों सीमाएँ उसी वर्ग में शामिल होती हैं।

उदाहरण: 10–19, 20–29, 30–39

इसमें 19, पहले वर्ग 10–19 में ही शामिल होगा।

अपवर्जी विधि

अपवर्जी विधि में वर्ग की उच्च सीमा उस वर्ग में शामिल नहीं होती। वह अगले वर्ग की निम्न सीमा बन जाती है।

उदाहरण: 10–20, 20–30, 30–40

इसमें 20, 10–20 वर्ग में नहीं बल्कि 20–30 वर्ग में शामिल होगा।

आधारसमावेशी विधिअपवर्जी विधि
उच्च सीमाउसी वर्ग में शामिलउसी वर्ग में शामिल नहीं
उदाहरण10–19, 20–2910–20, 20–30
उपयोगपूर्णांक आँकड़ों में उपयोगीसतत आँकड़ों में अधिक सुविधाजनक

प्रश्न 9. वर्गीकृत आँकड़ों में सूचनाओं की हानि से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब मूल आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है तो प्रत्येक व्यक्तिगत मूल्य की पूरी जानकारी दिखाई नहीं देती। इसके कारण मूल आँकड़ों की कुछ विस्तृत जानकारी समाप्त हो जाती है। इसे सूचनाओं की हानि कहते हैं।

उदाहरण के लिए यदि 20–30 वर्ग में कई अलग-अलग मूल्य हैं, तो वर्गीकृत तालिका से केवल यह पता चलता है कि कितनी इकाइयाँ इस वर्ग में हैं। प्रत्येक इकाई का वास्तविक मूल्य अलग-अलग नहीं दिखाई देता।

प्रश्न 10. क्या वर्गीकृत आँकड़े मूल आँकड़ों से अधिक उपयोगी हो सकते हैं?

उत्तर: हाँ, अध्ययन और तुलना के लिए वर्गीकृत आँकड़े अधिक सुविधाजनक हो सकते हैं। मूल आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक होने पर उनका अध्ययन कठिन होता है। उन्हें वर्गों में बाँटने से बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी संक्षिप्त और व्यवस्थित हो जाती है।

हालाँकि वर्गीकरण के कारण प्रत्येक व्यक्तिगत मूल्य की जानकारी कम हो सकती है। इसलिए दोनों का उपयोग अध्ययन के उद्देश्य के अनुसार किया जाता है।

प्रश्न 11. एकल चर तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर बताइए।

आधारएकल चर आवृत्ति वितरणद्विचर आवृत्ति वितरण
चरों की संख्याएक चरदो चर
उदाहरणविद्यार्थियों की ऊँचाईविद्यार्थियों की ऊँचाई और वजन
उद्देश्यएक चर का वितरण जाननादो चरों का संयुक्त वितरण जानना

आँकड़ों का संगठन और वर्गीकरण

प्रश्न 12. खुले सिरे वाले वर्ग क्या होते हैं?

उत्तर: ऐसे वर्ग जिनकी निम्न सीमा या उच्च सीमा में से कोई एक निर्धारित नहीं होती, खुले सिरे वाले वर्ग कहलाते हैं।

जैसे: 20 से कम, 20–30, 30–40, 40 से अधिक।

प्रश्न 13. वर्ग का मध्य-बिंदु क्या है?

उत्तर: किसी वर्ग की निम्न सीमा और उच्च सीमा के औसत को उस वर्ग का मध्य-बिंदु कहते हैं।

वर्ग मध्य-बिंदु = (निम्न सीमा + उच्च सीमा) ÷ 2

प्रश्न 14. वर्गीकरण की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: समान विशेषताओं वाले आँकड़ों को विभिन्न वर्गों और समूहों में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 15. वर्गीकरण का कोई एक उद्देश्य लिखिए।

उत्तर: वर्गीकरण का उद्देश्य बड़े और अव्यवस्थित आँकड़ों को व्यवस्थित तथा संक्षिप्त बनाना है, ताकि उनकी समानताओं और असमानताओं को आसानी से समझा जा सके।

प्रश्न 16. व्यक्तिगत श्रेणी क्या है?

उत्तर: जिस श्रेणी में प्रत्येक मद का मूल्य अलग-अलग दिया जाता है, उसे व्यक्तिगत श्रेणी कहते हैं।

प्रश्न 17. अपवर्जी श्रेणी क्या है?

उत्तर: जिस वर्गीकरण में एक वर्ग की उच्च सीमा उस वर्ग में शामिल न होकर अगले वर्ग की निम्न सीमा बनती है, उसे अपवर्जी श्रेणी कहते हैं।

प्रश्न 18. 20–30 वर्ग का मध्य-बिंदु निकालिए।

उत्तर:

मध्य-बिंदु = (20 + 30) ÷ 2

= 25

प्रश्न 19. निम्नलिखित आँकड़ों को बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए: 18, 30, 15, 20, 10, 25, 19, 28

उत्तर:

10, 15, 18, 19, 20, 25, 28, 30

प्रश्न 20. वर्ग-अंतराल किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी वर्ग की उच्च सीमा और निम्न सीमा के बीच के अंतर को वर्ग-अंतराल कहते हैं।

प्रश्न 21. आवृत्ति से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: किसी मूल्य के जितनी बार आने की संख्या को उसकी आवृत्ति (Frequency) कहते हैं।

प्रश्न 22. वर्ग सीमाएँ कितनी होती हैं?

उत्तर: किसी वर्ग की दो सीमाएँ होती हैं:

  1. निम्न वर्ग सीमा
  2. उच्च वर्ग सीमा

प्रश्न 23. निम्न वर्ग सीमा किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी वर्ग में दी गई पहली या छोटी संख्या को निम्न वर्ग सीमा कहते हैं। जैसे 5–10 में 5 निम्न सीमा है।

प्रश्न 24. प्रवेश-पत्रिका के दो लाभ लिखिए।

उत्तर:

  1. आँकड़ों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने में सहायता मिलती है।
  2. दर्ज की गई जानकारी में हुई गलतियों को पहचानना आसान होता है।

प्रश्न 25. शुद्ध आँकड़ों तथा व्यक्तिगत श्रृंखला में अंतर बताइए।

शुद्ध आँकड़ेव्यक्तिगत श्रृंखला
मूल रूप में प्राप्त आँकड़े होते हैं।मूल आँकड़ों को किसी क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
इनमें व्यवस्था आवश्यक नहीं होती।आँकड़े बढ़ते या घटते क्रम में हो सकते हैं।

प्रश्न 26. विन्यास किसे कहते हैं?

उत्तर: व्यक्तिगत आँकड़ों को बढ़ते या घटते क्रम में व्यवस्थित करने को विन्यास कहते हैं।

प्रश्न 27. यदि समान अंतराल आवृत्ति वितरण में आँकड़े एक या दो वर्गों में अधिक केन्द्रित हों तो क्या करेंगे?

उत्तर: ऐसी स्थिति में असमान वर्ग-अंतराल वाला आवृत्ति वितरण बनाया जा सकता है, जिससे आँकड़ों की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

प्रश्न 28. सतत चर के तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तर: वजन, समय और दूरी सतत चर के उदाहरण हैं। इनके मान किसी निश्चित परास में दशमलव सहित अनेक मान ले सकते हैं।

प्रश्न 29. परिणामात्मक गुणों के तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

  1. ऊँचाई
  2. आयु
  3. आय

प्रश्न 30. एक आवृत्ति वितरण में सामान्यतः कितने वर्ग होने चाहिए?

उत्तर: दिए गए अध्ययन और आँकड़ों की प्रकृति के अनुसार वर्गों की संख्या तय की जाती है। सामान्यतः बहुत कम या बहुत अधिक वर्ग बनाने के बजाय ऐसी संख्या रखी जाती है जिससे वितरण स्पष्ट और उपयोगी रहे।

प्रश्न 31. समावेशी विधि में किन वर्ग सीमाओं को शामिल किया जाता है?

उत्तर: समावेशी विधि में वर्ग की निम्न तथा उच्च दोनों सीमाएँ उसी वर्ग में शामिल की जाती हैं।

प्रश्न 32. अव्यवस्थित पुस्तकों से क्या परेशानी होती है?

उत्तर: पुस्तकों को ढूँढने में अधिक समय लगता है और आवश्यक पुस्तक समय पर नहीं मिल पाती। इससे पढ़ाई का समय भी नष्ट हो सकता है।

प्रश्न 33. संख्यात्मक वर्गीकरण क्या है?

उत्तर: आँकड़ों का संख्यात्मक या परिणामात्मक विशेषताओं के आधार पर वर्गीकरण संख्यात्मक वर्गीकरण कहलाता है।

प्रश्न 34. गुणात्मक वर्गीकरण क्या है?

उत्तर: गुणों या विशेषताओं के आधार पर आँकड़ों को वर्गों में बाँटना गुणात्मक वर्गीकरण कहलाता है।

प्रश्न 35. भौगोलिक वर्गीकरण क्या है?

उत्तर: स्थान, क्षेत्र, राज्य, जिला या देश आदि के आधार पर आँकड़ों का वर्गीकरण भौगोलिक वर्गीकरण कहलाता है।

प्रश्न 36. समयानुसार आँकड़ों के वर्गीकरण को क्या कहते हैं?

उत्तर: समय के आधार पर आँकड़ों के वर्गीकरण को काल-श्रेणी कहते हैं।

प्रश्न 37. मूल आँकड़ों को शुद्ध आँकड़े क्यों कहा जाता है?

उत्तर: जो आँकड़े अपने मूल या प्रारंभिक रूप में होते हैं और अभी वर्गीकृत या व्यवस्थित नहीं किए गए हैं, उन्हें शुद्ध या मूल आँकड़े कहा जाता है।

प्रश्न 38. निम्न श्रृंखला का नाम बताइए: 19, 12, 15, 18, 20, 25, 20

उत्तर: यह व्यक्तिगत श्रृंखला है क्योंकि इसमें प्रत्येक व्यक्तिगत मूल्य अलग-अलग दिया गया है।

प्रश्न 39. क्रमबद्ध आँकड़ों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: आँकड़ों को बढ़ते या घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर प्राप्त आँकड़ों को क्रमबद्ध आँकड़े कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 40. सतत तथा विविक्त चरों में अंतर उदाहरण सहित बताइए।

आधारसतत चरविविक्त चर
मानपरास के भीतर अनेक मान ले सकता है।विशिष्ट अलग-अलग मान लेता है।
दशमलवदशमलव या भिन्नात्मक मान संभव हैं।आमतौर पर पूर्णांक मान होते हैं।
उदाहरणऊँचाई, वजन, आय, समयविद्यार्थियों की संख्या, वाहनों की संख्या

प्रश्न 41. एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्वों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: एक आदर्श वर्गीकरण में निम्न गुण होने चाहिए:

  1. वर्गों का आकार उचित हो।
  2. वर्गीकरण सरल हो।
  3. वर्गों में स्पष्टता और निरंतरता हो।
  4. वर्गीकरण शुद्ध हो।
  5. वर्गीकरण अध्ययन के उद्देश्य के अनुकूल हो।
  6. आवश्यकतानुसार उसमें लचीलापन हो।
  7. सभी संबंधित इकाइयों को शामिल करने की क्षमता हो।
  8. एक वर्ग की इकाइयाँ पर्याप्त रूप से सजातीय हों।

प्रश्न 42. अपवर्जी तथा समावेशी विधि समझाइए।

उत्तर:

अपवर्जी विधि: इसमें उच्च सीमा को संबंधित वर्ग में शामिल नहीं किया जाता। जैसे 0–10, 10–20 में 10 को 10–20 वर्ग में रखा जाएगा।

समावेशी विधि: इसमें उच्च सीमा भी उसी वर्ग में शामिल होती है। जैसे 10–19, 20–29 में 19 को 10–19 वर्ग में रखा जाएगा।

प्रश्न 43. एकल, द्विचर तथा बहुचर वितरण को समझाइए।

वितरणअर्थउदाहरण
एकल चरकेवल एक चर का वितरण।विद्यार्थियों की ऊँचाई
द्विचरदो चरों का वितरण।ऊँचाई और वजन
बहुचरदो से अधिक चरों का वितरण।परिवार की आय, आकार और विभिन्न मदों पर व्यय

प्रश्न 44. चर और गुणधर्म में अंतर बताइए।

आधारचरगुणधर्म
मापनसामान्यतः संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है।गुणात्मक विशेषता को दर्शाता है।
उदाहरणआय, ऊँचाई, वजन, उत्पादनरुचि, धर्म, राष्ट्रीयता, लिंग
प्रकृतिमूल्य बदलता रहता है।विभिन्न श्रेणियों में बाँटा जा सकता है।

प्रश्न 45. बारम्बारता सारणी तथा बारम्बारता वितरण में अंतर बताइए।

बारम्बारता सारणीबारम्बारता वितरण
व्यक्तिगत मूल्यों की आवृत्ति दिखाई जा सकती है।वर्गों की आवृत्ति दिखाई जाती है।
छोटे और सीमित आँकड़ों के लिए सुविधाजनक।बड़े आँकड़ा-समूह के लिए अधिक उपयोगी।

प्रश्न 46. वर्ग-अंतराल का आकार कैसे निर्धारित किया जाता है?

उत्तर: वर्ग-अंतराल का आकार निकालने के लिए परास को वर्गों की संख्या से विभाजित किया जाता है।

सूत्र:

h = R ÷ N

जहाँ:

  • h = वर्ग-अंतराल का आकार
  • R = परास
  • N = वर्गों की संख्या

उदाहरण: यदि परास 70 और वर्गों की संख्या 10 है:

h = 70 ÷ 10 = 7

प्रश्न 47. वर्गीकरण की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  • आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है।
  • समान गुण वाली इकाइयों को एक साथ रखा जाता है।
  • वर्गीकरण समय, स्थान, गुण और मात्रा के आधार पर हो सकता है।
  • यह आँकड़ों को संक्षिप्त और समझने योग्य बनाता है।
  • इससे तुलना करना आसान होता है।

दीर्घ उत्तरीय एवं संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 48. उदाहरण की सहायता से सिद्ध कीजिए कि परास सभी वर्ग-अंतरालों के योग के बराबर होता है।

उत्तर: मान लीजिए किसी वितरण की निम्नतम सीमा 0 और उच्चतम सीमा 100 है तथा 10 समान वर्ग बनाए गए हैं। प्रत्येक वर्ग का अंतराल 10 है।

परास = 100 − 0 = 100

सभी वर्ग-अंतरालों का योग:

10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 = 100

अतः इस उदाहरण से स्पष्ट है कि समान वर्ग-अंतरालों की स्थिति में सभी वर्ग-अंतरालों का योग कुल परास के बराबर होता है।

प्रश्न 49. वर्ग-अंतरालों का समायोजन कैसे किया जाता है?

उत्तर: जब लगातार दो वर्गों की सीमाओं के बीच अंतर हो, तब वर्गों को सतत बनाने के लिए समायोजन किया जाता है।

उदाहरण के लिए यदि पहला वर्ग 800–899 और दूसरा वर्ग 900–999 है, तो पहले वर्ग की उच्च सीमा 899 तथा अगले वर्ग की निम्न सीमा 900 है। इनके बीच अंतर:

900 − 899 = 1

इस अंतर को 2 से विभाजित करते हैं:

1 ÷ 2 = 0.5

अब प्रत्येक निम्न सीमा से 0.5 घटाया और प्रत्येक उच्च सीमा में 0.5 जोड़ा जाता है।

मूल वर्गसमायोजित वर्ग
800–899799.5–899.5
900–999899.5–999.5
1000–1099999.5–1099.5

इसके बाद समायोजित वर्ग-मध्य बिंदु निकाला जा सकता है:

मध्य-बिंदु = (समायोजित निम्न सीमा + समायोजित उच्च सीमा) ÷ 2

प्रश्न 50. द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका क्या है?

उत्तर: जब दो चरों के संयुक्त मूल्यों की आवृत्तियों को पंक्तियों और स्तंभों में व्यवस्थित करके तालिका बनाई जाती है, तो उसे द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका कहते हैं।

उदाहरण के लिए किसी कंपनी के लिए विज्ञापन पर व्यय और बिक्री दो चर हैं। इन दोनों के संयुक्त वितरण को द्विचर आवृत्ति तालिका में प्रस्तुत किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 51. ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण कैसे बनाया जाता है?

उत्तर: ‘से कम’ संचयी आवृत्ति में प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति को उससे पहले के सभी वर्गों की आवृत्तियों में जोड़ते हुए संचयी योग बनाया जाता है।

उदाहरण:

वर्गआवृत्ति‘से कम’ संचयी आवृत्ति
0–1055
10–20813
20–301225
30–401035

प्रश्न 52. ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति कैसे बनाई जाती है?

उत्तर: ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति में कुल आवृत्ति से क्रमशः प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति घटाई जाती है।

यदि कुल आवृत्ति 35 है और पहले वर्ग की आवृत्ति 5 है, तो अगले चरण में:

35 − 5 = 30

इसी प्रकार आगे की संचयी आवृत्तियाँ प्राप्त की जाती हैं।

प्रश्न 53. 149 सेमी से कम लंबाई वाले विद्यार्थियों की संख्या कैसे ज्ञात करेंगे?

उत्तर: दिए गए संचयी वितरण में 149 सेमी से कम वाली श्रेणियों की आवृत्तियों को जोड़ना होगा। Reference में दी गई गणना के अनुसार:

1 + 7 + 7 + 13 = 28

अतः दिए गए क्रम के अनुसार 149 सेमी से कम लंबाई वाले विद्यार्थियों की संख्या 28 होगी।

प्रश्न 54. निर्यात के आँकड़ों को आवृत्ति वक्र द्वारा कैसे प्रस्तुत करेंगे?

उत्तर: आवृत्ति वक्र बनाने के लिए पहले प्रत्येक वर्ग का मध्य-बिंदु निकाला जाता है। फिर:

  1. X-अक्ष पर वर्गों के मध्य-बिंदु लिए जाते हैं।
  2. Y-अक्ष पर संबंधित आवृत्तियाँ ली जाती हैं।
  3. प्रत्येक मध्य-बिंदु और आवृत्ति के आधार पर बिंदु लगाए जाते हैं।
  4. इन बिंदुओं को क्रम से जोड़कर आवृत्ति वक्र बनाया जाता है।

प्रश्न 55. असमान वर्ग-अंतराल को समान वर्ग-अंतराल में कैसे बदला जाता है?

उत्तर: सबसे पहले दिए गए सभी वर्ग-अंतरालों को देखा जाता है और ऐसा उपयुक्त सामान्य वर्ग-अंतराल चुना जाता है जिससे नया वितरण स्पष्ट और सुविधाजनक हो। इसके बाद मूल आँकड़ों को नए समान वर्गों में व्यवस्थित किया जाता है।

बहुत छोटा वर्ग-अंतराल चुनने पर वर्गों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है। इसलिए ऐसा वर्ग-अंतराल चुनना चाहिए जिससे वितरण न तो बहुत विस्तृत हो और न ही बहुत संक्षिप्त।

प्रश्न 56. निम्न आँकड़ों को 10 के वर्ग-अंतराल में अपवर्जी विधि के अनुसार सतत श्रृंखला में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया बताइए।

दिए गए आँकड़े:

22, 25, 38, 40, 30, 50, 45, 55, 58, 60, 65, 42, 52, 23, 35, 45, 45, 55, 58, 47, 37

उत्तर: सबसे पहले न्यूनतम और अधिकतम मूल्य की पहचान करके 10 के वर्ग-अंतराल बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए:

वर्ग-अंतरालप्रकृति
20–30अपवर्जी
30–40अपवर्जी
40–50अपवर्जी
50–60अपवर्जी
60–70अपवर्जी

इसके बाद प्रत्येक प्रेक्षण को उसके उपयुक्त वर्ग में रखकर आवृत्ति ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 57. 30 परिवारों के दैनिक खर्च के दिए गए आँकड़ों की आवृत्ति सारणी बनाइए।

दिए गए वर्ग: 10–14, 15–19, 20–24, 25–29, 30–34 तथा 35–39।

प्रत्येक खर्च को संबंधित वर्ग में रखने के बाद उसकी आवृत्ति गिनी जाती है। इस प्रक्रिया को टैली विधि से आसानी से किया जा सकता है।

दैनिक खर्च का वर्गआवृत्ति ज्ञात करने की प्रक्रिया
10–14इस सीमा में आने वाले मूल्यों की संख्या
15–19इस सीमा में आने वाले मूल्यों की संख्या
20–24इस सीमा में आने वाले मूल्यों की संख्या
25–29इस सीमा में आने वाले मूल्यों की संख्या
30–34इस सीमा में आने वाले मूल्यों की संख्या
35–39इस सीमा में आने वाले मूल्यों की संख्या

प्रश्न 58. अपवर्जी और समावेशी विधि के अनुसार आवृत्ति वितरण बनाने की विधि समझाइए।

उत्तर: यदि वर्ग सीमाएँ लगातार हों, तो अपवर्जी विधि में उच्च सीमा को अगले वर्ग में रखा जाता है। समावेशी विधि में उच्च सीमा उसी वर्ग में रखी जाती है।

उदाहरण:

अपवर्जी विधिसमावेशी विधि
10–2010–19
20–3020–29
30–4030–39

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. एक वर्ग की निम्न और उच्च सीमा का अंतर कहलाता है –

(a) आवृत्ति वितरण

(b) वर्ग-आवृत्ति

(c) वर्ग-अंतराल

(d) वर्ग-सीमा

सही उत्तर: (c) वर्ग-अंतराल

व्याख्या: वर्ग की उच्च और निम्न सीमा के अंतर को वर्ग-अंतराल कहा जाता है।

प्रश्न 2. 10, 5, 7, 7, 8, 9, 10, 15 किस प्रकार के आँकड़े हैं?

(a) विविक्त श्रृंखला

(b) सतत श्रृंखला

(c) व्यक्तिगत श्रृंखला

(d) शुद्ध आँकड़े

सही उत्तर: (d) शुद्ध आँकड़े

व्याख्या: आँकड़े किसी क्रम या आवृत्ति वितरण में व्यवस्थित नहीं हैं, इसलिए इन्हें मूल या शुद्ध आँकड़ों के रूप में देखा जाता है।

प्रश्न 3. वर्गीकरण का तात्पर्य वस्तुओं को –

(a) उपयुक्त क्रम से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना

(b) सजाना एवं सँवारना

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) उपयुक्त क्रम से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना

व्याख्या: वर्गीकरण में समान विशेषताओं वाली इकाइयों को उचित समूहों में रखा जाता है।

प्रश्न 4. आँकड़ों को व्यवस्थित किया जा सकता है –

(a) समयानुसार

(b) स्थानानुसार

(c) दोनों के अनुसार

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (c) दोनों के अनुसार

व्याख्या: आँकड़ों का वर्गीकरण समय और स्थान दोनों के आधार पर किया जा सकता है।

प्रश्न 5. चर पद का तात्पर्य ऐसी विशेषताओं से है जो –

(a) अपरिवर्तनशील होती हैं

(b) परिवर्तनशील होती हैं

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) परिवर्तनशील होती हैं

व्याख्या: चर का मान अलग-अलग इकाइयों या परिस्थितियों में बदल सकता है।

प्रश्न 6. सांख्यिकी में चर पद का प्रयोग सामान्यतः ऐसी विशेषताओं के लिए किया जाता है जिन्हें –

(a) केवल शब्दों में व्यक्त किया जा सके

(b) संख्यात्मक रूप में मापा जा सके

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) संख्यात्मक रूप में मापा जा सके

व्याख्या: सांख्यिकीय चर सामान्यतः ऐसी विशेषता होती है जिसका संख्यात्मक मान निर्धारित किया जा सकता है, जैसे आय, ऊँचाई या वजन।

प्रश्न 7. व्यक्तियों का वर्गीकरण उनके गुणों की –

(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं

(b) संख्याओं के आधार पर कर सकते हैं

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं

व्याख्या: गुणात्मक विशेषताओं के आधार पर व्यक्तियों को विभिन्न श्रेणियों में रखा जा सकता है।

प्रश्न 8. कोई चर तब सतत कहा जाता है जब यह किसी दिए गए परास में –

(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके

(b) कोई भी मूल्य धारण न कर सके

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) कोई भी मूल्य धारण कर सके

व्याख्या: सतत चर दिए गए परास में अनेक संभावित मान ले सकता है, जिसमें दशमलव मान भी शामिल हो सकते हैं।

प्रश्न 9. असंतत या विविक्त चर सामान्यतः धारण करते हैं –

(a) कोई भी मूल्य

(b) विशेष मूल्य या निश्चित मान

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) विशेष मूल्य या निश्चित मान

व्याख्या: विविक्त चर अलग-अलग निश्चित मान लेते हैं, जैसे किसी कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या।

प्रश्न 10. सामान्य भाषा में समष्टि का अर्थ है किसी क्षेत्र में रहने वाले –

(a) विशिष्ट व्यक्तियों की संख्या

(b) सभी व्यक्तियों की कुल संख्या

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) सभी व्यक्तियों की कुल संख्या

व्याख्या: सांख्यिकी में अध्ययन से संबंधित सभी इकाइयों के पूर्ण समूह को समष्टि कहा जाता है।

प्रश्न 11. आवृत्ति वितरण में परास का अर्थ है –

(a) उच्चतम मूल्य − न्यूनतम मूल्य

(b) उच्चतम मूल्य + न्यूनतम मूल्य

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) उच्चतम मूल्य − न्यूनतम मूल्य

व्याख्या: परास निकालने के लिए अधिकतम मूल्य में से न्यूनतम मूल्य घटाया जाता है।

प्रश्न 12. किसी विशेष वर्ग में मूल्यों की संख्या उस वर्ग की कहलाती है –

(a) आवृत्ति

(b) संचयी आवृत्ति

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) आवृत्ति

व्याख्या: किसी वर्ग में आने वाली इकाइयों या मूल्यों की संख्या उस वर्ग की आवृत्ति कहलाती है।

अध्याय का त्वरित पुनरावलोकन

अवधारणामुख्य बात
वर्गीकरणसमान विशेषताओं वाले आँकड़ों को समूहों में बाँटना।
चरजिसका मान बदलता रहता है।
सतत चरपरास के भीतर अनेक मान ले सकता है।
विविक्त चरनिश्चित या अलग-अलग मान लेता है।
आवृत्तिकिसी मूल्य या वर्ग में आने वाली इकाइयों की संख्या।
वर्ग-अंतरालउच्च और निम्न सीमा का अंतर।
वर्ग-मध्य बिंदु(निम्न सीमा + उच्च सीमा) ÷ 2
परासअधिकतम मूल्य − न्यूनतम मूल्य।
समावेशी विधिदोनों वर्ग सीमाएँ उसी वर्ग में शामिल होती हैं।
अपवर्जी विधिउच्च सीमा उसी वर्ग में शामिल नहीं होती।
एकल चर वितरणएक चर का वितरण।
द्विचर वितरणदो चरों का वितरण।
बहुचर वितरणदो से अधिक चरों का वितरण।

निष्कर्ष

आँकड़ों का संगठन सांख्यिकी का एक महत्वपूर्ण चरण है। केवल आँकड़े एकत्र कर लेना पर्याप्त नहीं है। उन्हें उचित तरीके से वर्गीकृत और व्यवस्थित करना भी आवश्यक है। वर्गीकरण से बड़े और जटिल आँकड़ों को समझना, तुलना करना और उनसे निष्कर्ष निकालना आसान हो जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से सतत एवं विविक्त चर, समावेशी एवं अपवर्जी विधि, वर्ग-अंतराल, वर्ग-मध्य बिंदु, परास, आवृत्ति वितरण, एकल-द्विचर-बहुचर वितरण तथा संचयी आवृत्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

अर्थशास्त्र के अन्य अध्याय

पिछला अध्याय – Chapter 2: आँकड़ों का संग्रह

कक्षा 11 अर्थशास्त्र के सभी अध्याय देखें

अगला अध्याय – Chapter 4: आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण