बिहार बोर्ड कक्षा 11 अर्थशास्त्र अध्याय 4 – आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण में हम सीखते हैं कि एकत्र और व्यवस्थित किए गए आँकड़ों को सारणी, आरेख और रेखाचित्र के माध्यम से किस प्रकार सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
इस अध्याय में सारणीयन, सांख्यिकीय सारणी, दंड आरेख, बहुदंड आरेख, घटक दंड आरेख, प्रतिशत घटक दंड आरेख, वृत्त आरेख, आयत चित्र, आवृत्ति बहुभुज, आवृत्ति वक्र, तोरण तथा काल-श्रेणी आरेख का अध्ययन किया जाता है।
आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण – महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. दंड-आरेख क्या होता है?
उत्तर: दंड-आरेख एक एक-विमीय आरेख है। इसमें आँकड़ों के मूल्यों को दंडों की ऊँचाई के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है।
प्रश्न 2. आयत चित्र द्वारा किस प्रकार की जानकारी प्राप्त की जा सकती है?
उत्तर: आयत चित्र द्वारा आवृत्ति वितरण को आलेखी रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उपयुक्त आवृत्ति वितरण के आयत चित्र से बहुलक को भी आलेखी रूप में ज्ञात किया जा सकता है।
प्रश्न 3. तोरणों द्वारा क्या ज्ञात किया जा सकता है?
उत्तर: ‘से कम’ तथा ‘से अधिक’ दोनों संचयी आवृत्ति वक्रों अर्थात् तोरणों के प्रतिच्छेदन से माध्यिका को आलेखी रूप में ज्ञात किया जा सकता है।
प्रश्न 4. अंकगणितीय रेखाचित्र द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से क्या समझने में सहायता मिलती है?
उत्तर: अंकगणितीय रेखाचित्र या काल-श्रेणी आरेख से किसी चर में समय के साथ होने वाले परिवर्तन और उसकी दीर्घकालिक प्रवृत्ति को समझने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 5. दंड-आरेख के दंडों की चौड़ाई का एक समान होना जरूरी नहीं है। सही या गलत?
उत्तर: गलत।
दंड-आरेख में दंडों की चौड़ाई समान रखी जाती है और उनके बीच उचित समान दूरी रखी जाती है।
प्रश्न 6. आयत चित्र में आयतों की चौड़ाई अवश्य एक समान होनी चाहिए। सही या गलत?
उत्तर: गलत।
यदि वर्ग-अंतराल समान हैं तो आयतों की चौड़ाई समान होती है। असमान वर्ग-अंतराल होने पर चौड़ाई भी असमान हो सकती है।
प्रश्न 7. आयत चित्र की रचना केवल सतत वर्गीकरण के लिए की जा सकती है।
उत्तर: सही।
आयत चित्र मुख्यतः सतत या अखंडित आवृत्ति वितरण को प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 8. आयत चित्र एवं स्तंभ आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने की एक जैसी विधियाँ हैं।
उत्तर: गलत।
दंड आरेख और आयत चित्र दोनों अलग-अलग प्रकार के आलेख हैं। दंड आरेख में दंडों के बीच अंतर रहता है, जबकि आयत चित्र में वर्ग-अंतराल के आयत एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
प्रश्न 9. आयत चित्र की सहायता से आवृत्ति वितरण का बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।
उत्तर: सही।
प्रश्न 10. तोरणों से आवृत्ति वितरण की माध्यिका ज्ञात नहीं की जा सकती है।
उत्तर: गलत।
‘से कम’ और ‘से अधिक’ दोनों तोरणों के प्रतिच्छेदन बिंदु से माध्यिका ज्ञात की जा सकती है।
किस आँकड़े के लिए कौन-सा आरेख?
प्रश्न 11. निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए कौन-सा आरेख प्रभावी होगा?
| आँकड़े | उपयुक्त आरेख |
|---|---|
| वर्ष विशेष की मासिक वर्षा | काल-श्रेणी आरेख |
| धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन | सरल दंड आरेख |
| एक कारखाने में लागत के विभिन्न घटक | वृत्त आरेख |
प्रश्न 12. भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या तथा शहरीकरण के निम्न स्तर को दिखाने के लिए आँकड़ों का सारणीयन कैसे करेंगे?
उत्तर: ऐसे आँकड़ों को वर्ष, शहरी जनसंख्या तथा गैर-कामगारों की संख्या जैसे शीर्षकों के अंतर्गत व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे अलग-अलग वर्षों में शहरी गैर-कामगारों की स्थिति की तुलना करना आसान होगा।
प्रश्न 13. समान और असमान वर्ग-अंतराल होने पर आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया में क्या अंतर होता है?
उत्तर: समान वर्ग-अंतराल होने पर आवृत्तियों को उनके मूल रूप में लेकर आयत बनाए जा सकते हैं। प्रत्येक आयत की चौड़ाई समान रहती है और ऊँचाई संबंधित आवृत्ति के अनुसार होती है।
जब वर्ग-अंतराल असमान होते हैं, तो केवल मूल आवृत्तियों की तुलना करना उचित नहीं होता। ऐसी स्थिति में आवृत्तियों को वर्ग-अंतराल के अनुपात में संशोधित किया जाता है।
संशोधित आवृत्ति = आवृत्ति × (न्यूनतम वर्ग-अंतराल ÷ संबंधित वर्ग-अंतराल)
उदाहरण के लिए यदि न्यूनतम वर्ग-अंतराल 10 है और किसी वर्ग का अंतराल 20 है तथा उसकी आवृत्ति 20 है, तो संशोधित आवृत्ति होगी:
20 × (10 ÷ 20) = 10
प्रश्न 14. निम्नलिखित चीनी उत्पादन के आँकड़ों को तालिका में प्रस्तुत कीजिए।
दिए गए आँकड़ों में दिसम्बर 2001 के पहले 15 दिनों और पिछले वर्ष के समान 15 दिनों के चीनी उत्पादन तथा आंतरिक उपभोग और निर्यात की जानकारी दी गई है।
| मद | 2000 | 2001 |
|---|---|---|
| चीनी उत्पादन | 3,78,000 टन | 3,87,000 टन |
| आंतरिक उपभोग | 1,54,000 टन | 2,83,000 टन |
| निर्यात | आँकड़ा उपलब्ध नहीं | 41,000 टन |
आरेख: इन आँकड़ों की तुलना के लिए बहुदंड आरेख उपयुक्त है क्योंकि इसमें एक से अधिक संबंधित आँकड़ों की तुलना की जा सकती है।
प्रश्न 15. अनुमानित क्षेत्रीय वास्तविक वृद्धि दरों को बहु काल-श्रेणी आरेख में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: इसमें X-अक्ष पर वर्ष और Y-अक्ष पर वास्तविक वृद्धि दर प्रतिशत में ली जाएगी। प्रत्येक क्षेत्र की वृद्धि दर के लिए अलग रेखा बनाकर संबंधित वर्षों के बिंदुओं को जोड़ा जाएगा।
सारणीयन
प्रश्न 16. सारणीयन के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
- आँकड़ों को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना।
- बड़ी मात्रा में उपलब्ध आँकड़ों को सरल और संक्षिप्त बनाना।
प्रश्न 17. वर्गीकरण तथा सारणीयन में अंतर बताइए।
| वर्गीकरण | सारणीयन |
|---|---|
| समान विशेषताओं वाले आँकड़ों को समूहों में बाँटना। | आँकड़ों को पंक्तियों और स्तंभों वाली सारणी में प्रस्तुत करना। |
| यह आँकड़ों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है। | यह आँकड़ों को संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने की विधि है। |
प्रश्न 18. सांख्यिकीय सारणी के प्रमुख अंग लिखिए।
उत्तर: एक अच्छी सांख्यिकीय सारणी के प्रमुख अंग हैं:
- सारणी संख्या
- शीर्षक
- शीर्ष टिप्पणी
- पंक्ति शीर्षक
- उपशीर्षक
- सारणी का मुख्य भाग
- स्रोत
- फुटनोट, यदि आवश्यक हो
प्रश्न 19. यदि सारणी में किसी संख्या को विशेष महत्त्व देना हो तो क्या करना चाहिए?
उत्तर: विशेष महत्त्व वाले आँकड़े को मोटे अक्षरों में या उचित तरीके से अलग दिखाया जा सकता है, ताकि वह पाठक का ध्यान आसानी से आकर्षित करे।
प्रश्न 20. सरल सारणी क्या है?
उत्तर: जिस सारणी में आँकड़ों की केवल एक विशेषता को प्रदर्शित किया जाता है, उसे सरल सारणी कहते हैं।
प्रश्न 21. जटिल सारणी क्या है?
उत्तर: जिस सारणी में आँकड़ों की एक से अधिक विशेषताओं को एक साथ प्रदर्शित किया जाता है, उसे जटिल सारणी कहते हैं।
प्रश्न 22. स्तंभों के शीर्षक को क्या कहते हैं?
उत्तर: सारणी के स्तंभों के शीर्षक को उपशीर्षक (Caption) कहा जाता है।
प्रश्न 23. आरेखीय प्रदर्शन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: आँकड़ों को दंड आरेख, आयत चित्र, वृत्त आरेख, आवृत्ति वक्र आदि के माध्यम से दृश्य रूप में प्रस्तुत करना आरेखीय प्रदर्शन कहलाता है।
प्रश्न 24. आरेखों की दो सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
- आरेख विस्तृत जानकारी नहीं दे पाते।
- आरेखों को समझने के लिए उचित पैमाने और सही प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 25. आरेखों के दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
- जटिल आँकड़ों को सरलता से समझने में सहायता मिलती है।
- विभिन्न आँकड़ों की तुलना आसानी से की जा सकती है।
प्रश्न 26. सरल दंड आरेख क्या है?
उत्तर: सरल दंड आरेख में केवल एक चर या एक प्रकार के आँकड़ों के विभिन्न मूल्यों को दंडों की ऊँचाई द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। दंडों की चौड़ाई समान रखी जाती है और उनके बीच उचित अंतर रखा जाता है।
प्रश्न 27. सूचना के स्रोत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जिस व्यक्ति, संस्था, रिपोर्ट, पुस्तक या अन्य माध्यम से आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं, उसे आँकड़ों का स्रोत कहा जाता है।
प्रश्न 28. बहुगुणी सारणी क्या है?
उत्तर: ऐसी सारणी जिसमें दो से अधिक विशेषताओं के आधार पर आँकड़ों को प्रस्तुत किया जाता है, बहुगुणी या बहु-विशेषता सारणी कहलाती है।
प्रश्न 29. एक अच्छी सांख्यिकीय सारणी की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
- सरल और संक्षिप्त हो।
- स्पष्ट और आकर्षक हो।
- विश्वसनीय और उद्देश्य के अनुकूल हो।
प्रश्न 30. सारणीयन में वर्गीकरण कितने प्रकार का होता है?
उत्तर: सारणीयन में वर्गीकरण के चार प्रमुख प्रकार हैं:
- परिमाणात्मक वर्गीकरण
- गुणात्मक वर्गीकरण
- कालिक वर्गीकरण
- स्थानिक वर्गीकरण
प्रश्न 31. परिमाणात्मक वर्गीकरण क्या है?
उत्तर: जब आँकड़ों को आयु, आय, ऊँचाई, उत्पादन आदि जैसी मापी जा सकने वाली संख्यात्मक विशेषताओं के आधार पर वर्गों में बाँटा जाता है, तो इसे परिमाणात्मक वर्गीकरण कहते हैं।
प्रश्न 32. सारणी का मुख्य भाग कौन-सा है?
उत्तर: सारणी का मुख्य भाग कलेवर (Body) कहलाता है। इसमें वास्तविक आँकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं।
प्रश्न 33. आँकड़ों को दर्शाने वाले मुख्य आरेख कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
- ज्यामितीय आरेख – दंड आरेख, बहुदंड आरेख, वृत्त आरेख।
- आवृत्ति आरेख – आयत चित्र, आवृत्ति बहुभुज, आवृत्ति वक्र, तोरण।
- गणितीय रेखा आरेख – काल-श्रेणी आरेख।
प्रश्न 34. सांख्यिकीय सारणी क्या है?
उत्तर: आँकड़ों को पंक्तियों और स्तंभों में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने वाली संरचना को सांख्यिकीय सारणी कहते हैं।
प्रश्न 35. सारणीयन किसे कहते हैं?
उत्तर: सांख्यिकीय आँकड़ों को पंक्तियों और स्तंभों वाली सारणी के रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सारणीयन कहते हैं।
प्रश्न 36. आयत चित्र क्या है?
उत्तर: सतत या अखंडित आवृत्ति वितरण को आपस में जुड़े हुए आयतों के माध्यम से प्रस्तुत करने वाले आरेख को आयत चित्र (Histogram) कहते हैं।
प्रश्न 37. यदि सभी वर्ग-अंतराल समान हों तो आयत चित्र की चौड़ाई कैसी होगी?
उत्तर: सभी वर्ग-अंतराल समान होने पर आयतों की चौड़ाई समान होगी।
प्रश्न 38. आवृत्ति बहुभुज कैसे बनाया जाता है?
उत्तर: आवृत्ति वितरण के प्रत्येक वर्ग के मध्य-बिंदु को उसकी आवृत्ति के साथ लेकर बिंदु बनाए जाते हैं। इन बिंदुओं को सीधी रेखाओं से जोड़ने पर आवृत्ति बहुभुज बनता है।
प्रश्न 39. श्रम पर कुल खर्च का 30% खर्च होता है। इसका कोण कितना होगा?
उत्तर:
वृत्त आरेख में कोण:
= प्रतिशत × 3.6
= 30 × 3.6
= 108°
अतः श्रम का कोण 108° होगा।
प्रश्न 40. 102 मजदूरों में 31 मुख्य मजदूर हैं। मुख्य मजदूरों के लिए वृत्त आरेख का कोण निकालिए।
उत्तर:
कोण = (31 ÷ 102) × 360°
≈ 109.41°
अतः मुख्य मजदूरों का कोण लगभग 109.4° होगा।
प्रश्न 41. दो तोरण M बिंदु पर एक-दूसरे को काटते हैं। माध्यिका कैसे ज्ञात करेंगे?
उत्तर: दोनों तोरणों के प्रतिच्छेदन बिंदु M से X-अक्ष पर लंब गिराया जाता है। X-अक्ष पर जहाँ यह लंब पहुँचता है, उस मान को माध्यिका माना जाता है।
प्रश्न 42. निम्नलिखित के लिए उपयुक्त आरेख बताइए।
| स्थिति | आरेख |
|---|---|
| वर्ष विशेष की मासिक वर्षा | काल-श्रेणी आरेख |
| धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या | सरल दंड आरेख |
| कारखाने के लागत घटक | वृत्त आरेख |
प्रश्न 43. असमान वर्ग-अंतराल होने पर आयत चित्र की ऊँचाई कैसे निर्धारित की जाती है?
उत्तर: असमान वर्ग-अंतराल में बड़े वर्ग की आवृत्ति को सीधे उसकी ऊँचाई के रूप में नहीं लिया जाता। उसे न्यूनतम वर्ग-अंतराल के अनुपात में संशोधित किया जाता है।
संशोधित आवृत्ति = मूल आवृत्ति × (न्यूनतम वर्ग-अंतराल ÷ संबंधित वर्ग-अंतराल)
प्रश्न 44. संचयी आवृत्ति के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर: संचयी आवृत्ति के दो प्रमुख प्रकार हैं:
- ‘से कम’ संचयी आवृत्ति
- ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति
प्रश्न 45. समावेशी श्रृंखला को आयत चित्र बनाने के लिए अपवर्जी श्रृंखला में क्यों बदलते हैं?
उत्तर: आयत चित्र में वर्ग-अंतराल निरंतर होने चाहिए। समावेशी वर्गों में दो लगातार वर्गों के बीच अंतर रहता है। इसलिए निरंतरता प्राप्त करने के लिए उन्हें अपवर्जी वर्ग-अंतराल में बदला जाता है।
प्रश्न 46. ओजाइब का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर: ओजाइब को संचयी आवृत्ति वक्र या तोरण भी कहा जाता है।
प्रश्न 47. दोनों ओजाइब की विशेषता क्या है?
उत्तर: ‘से कम’ और ‘से अधिक’ दोनों ओजाइब जिस बिंदु पर एक-दूसरे को काटते हैं, उस बिंदु से माध्यिका ज्ञात की जा सकती है।
प्रश्न 48. सरल दंड आरेख द्वारा कितने चरों को प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर: सरल दंड आरेख द्वारा सामान्यतः एक चर के मूल्यों को प्रदर्शित किया जाता है।
प्रश्न 49. विभिन्न वर्षों के एक से अधिक चरों को प्रदर्शित करने के लिए कौन-सा दंड आरेख प्रयोग करेंगे?
उत्तर: इसके लिए बहुदंड आरेख का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 50. किसी देश के आयात और निर्यात को किस दंड आरेख से दिखाएँगे?
उत्तर: आयात और निर्यात दो अलग-अलग चरों के मूल्य हैं। इसलिए उनकी तुलना के लिए बहुदंड आरेख उपयुक्त है।
प्रश्न 51. सरल दंड आरेख का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: विभिन्न जनगणना वर्षों में किसी एक राज्य की जनसंख्या को प्रदर्शित करने के लिए सरल दंड आरेख का प्रयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 52. सरल दंड आरेख और बहुदंड आरेख में अंतर बताइए।
| सरल दंड आरेख | बहुदंड आरेख |
|---|---|
| एक चर के मूल्यों को प्रदर्शित करता है। | दो या अधिक चरों के मूल्यों की तुलना करता है। |
| एक ही प्रकार के आँकड़ों की तुलना के लिए उपयोगी। | संबंधित अलग-अलग आँकड़ों की तुलना के लिए उपयोगी। |
प्रश्न 53. कालिक श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर: जब किसी चर के मूल्य अलग-अलग समय या वर्षों के अनुसार दिए जाते हैं, तो उस श्रृंखला को कालिक या काल-श्रेणी कहते हैं। जैसे विभिन्न वर्षों का कृषि उत्पादन।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 54. आँकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ लिखिए।
उत्तर:
- जटिल आँकड़ों को सरल बनाया जा सकता है।
- आँकड़ों को समझना आसान होता है।
- समय और श्रम की बचत होती है।
- विभिन्न आँकड़ों की तुलना आसानी से की जा सकती है।
- आँकड़े अधिक आकर्षक और स्मरणीय बनते हैं।
- व्यापार, उत्पादन, परिवहन आदि क्षेत्रों में उपयोगी होते हैं।
प्रश्न 55. दंड आरेख की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
- यह एक-विमीय आरेख है।
- दंड क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर हो सकते हैं।
- दंडों की चौड़ाई समान रखी जाती है।
- दंडों के बीच उचित अंतर रखा जाता है।
- सरल, बहुदंड, घटक और प्रतिशत घटक दंड आरेख इसके प्रमुख प्रकार हैं।
प्रश्न 56. परिमाणात्मक वर्गीकरण का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: विद्यार्थियों को उनकी ऊँचाई के आधार पर 140–150 सेमी, 150–160 सेमी, 160–170 सेमी आदि वर्गों में बाँटना परिमाणात्मक वर्गीकरण का उदाहरण है।
प्रश्न 57. गुणात्मक वर्गीकरण का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: व्यक्तियों को उनकी वैवाहिक स्थिति के आधार पर अविवाहित, विवाहित, विधवा/विधुर आदि वर्गों में बाँटना गुणात्मक वर्गीकरण का उदाहरण है।
प्रश्न 58. कालिक वर्गीकरण का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: किसी दुकान की 1995, 1996, 1997, 1998, 1999 और 2000 की वार्षिक बिक्री को अलग-अलग वर्षों के अनुसार प्रस्तुत करना कालिक वर्गीकरण का उदाहरण है।
प्रश्न 59. वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखिए।
उत्तर:
- प्रत्येक मद को कुल के प्रतिशत में बदलें।
- प्रत्येक प्रतिशत को 3.6 से गुण करके उसका कोण निकालें।
- एक वृत्त बनाएँ।
- प्रत्येक मद के लिए संबंधित कोण बनाएँ।
- प्रत्येक खंड को उचित नाम दें।
सूत्र: कोण = प्रतिशत × 3.6°
प्रश्न 60. प्रतिशत घटक दंड आरेख और घटक दंड आरेख में अंतर बताइए।
| घटक दंड आरेख | प्रतिशत घटक दंड आरेख |
|---|---|
| कुल वास्तविक मात्रा को दंड की ऊँचाई से दिखाया जाता है। | प्रत्येक दंड की कुल ऊँचाई 100% मानी जाती है। |
| घटक वास्तविक मूल्यों में दिखाए जाते हैं। | घटक प्रतिशत में दिखाए जाते हैं। |
| कुल मात्रा की तुलना भी की जा सकती है। | घटकों के प्रतिशत की तुलना अधिक स्पष्ट होती है। |
प्रश्न 61. प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि लिखिए।
उत्तर:
- प्रत्येक समय या स्थान की कुल मात्रा को 100% माना जाता है।
- सभी घटकों को प्रतिशत में बदला जाता है।
- समान ऊँचाई वाले दंड बनाए जाते हैं।
- संचयी प्रतिशत के अनुसार प्रत्येक घटक को दंड में विभाजित किया जाता है।
प्रश्न 62. सामान्य प्रयोग में आने वाले आरेखों के विभिन्न रूप लिखिए।
उत्तर:
- ज्यामितीय आरेख: दंड आरेख, बहुदंड आरेख, वृत्त आरेख।
- आवृत्ति आरेख: आयत चित्र, आवृत्ति बहुभुज, आवृत्ति वक्र, तोरण।
- गणितीय समय ग्राफ: काल-श्रेणी आरेख।
प्रश्न 63. सामान्य उद्देश्य सारणी और विशेष उद्देश्य सारणी में अंतर बताइए।
| सामान्य उद्देश्य सारणी | विशेष उद्देश्य सारणी |
|---|---|
| व्यापक उपयोग के लिए तैयार की जाती है। | किसी विशेष उद्देश्य के लिए तैयार की जाती है। |
| इसमें अपेक्षाकृत अधिक विस्तृत जानकारी हो सकती है। | आमतौर पर आवश्यक जानकारी को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है। |
प्रश्न 64. घटक दंड आरेख का प्रयोग कब किया जाता है?
उत्तर: जब किसी कुल मात्रा के साथ उसके विभिन्न घटकों को भी प्रदर्शित करना हो, तब घटक दंड आरेख उपयोगी होता है। उदाहरण के लिए किसी विद्यालय में कुल विद्यार्थियों की संख्या तथा उनमें लड़के और लड़कियों की संख्या।
प्रश्न 65. सांख्यिकी में समग्र या जनसंख्या का अर्थ क्या है?
उत्तर: अध्ययन से संबंधित सभी इकाइयों के पूर्ण समूह को सांख्यिकी में समग्र या जनसंख्या कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी विद्यालय के सभी विद्यार्थियों का अध्ययन करना हो तो उस विद्यालय के सभी विद्यार्थी समग्र होंगे।
प्रश्न 66. अविछिन्न तथा विच्छिन्न चरों में अंतर बताइए।
| अविछिन्न/सतत चर | विच्छिन्न चर |
|---|---|
| एक निश्चित परास में अनेक मान ले सकता है। | अलग-अलग निश्चित मान लेता है। |
| दशमलव या भिन्नात्मक मान संभव हैं। | आमतौर पर पूर्णांक मान होते हैं। |
| उदाहरण: ऊँचाई, भार, आय। | उदाहरण: विद्यार्थियों की संख्या, परिवार में बच्चों की संख्या। |
प्रश्न 67. एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्व लिखिए।
उत्तर: एक आदर्श वर्गीकरण में निम्न गुण होने चाहिए:
- सरलता
- स्पष्टता
- निरंतरता
- शुद्धता
- उद्देश्य के अनुकूलता
- लोचशीलता
- व्यापकता
- सजातीयता
दीर्घ उत्तरीय एवं प्रायोगिक प्रश्न
प्रश्न 68. निम्नलिखित आँकड़ों का आयत आरेख बनाकर बहुलक ज्ञात कीजिए।
उत्तर: आयत चित्र बनाने के लिए पहले दिए गए वर्ग-अंतरालों की प्रकृति देखी जाती है। यदि वर्ग-अंतराल असमान हैं, तो आवृत्तियों को न्यूनतम वर्ग-अंतराल के अनुसार संशोधित किया जाता है। इसके बाद X-अक्ष पर वर्ग-अंतराल और Y-अक्ष पर संशोधित आवृत्तियाँ लेकर आयत बनाए जाते हैं।
आयत चित्र में जिस वर्ग का आयत सबसे अधिक ऊँचा होता है, वह बहुलक वर्ग होता है।
प्रश्न 69. ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाइए।
उत्तर:
- ‘से कम’ संचयी आवृत्तियाँ तैयार करें।
- X-अक्ष पर संबंधित उच्च वर्ग सीमाएँ लें।
- Y-अक्ष पर संचयी आवृत्तियाँ लें।
- प्रत्येक बिंदु को अंकित करें।
- सभी बिंदुओं को क्रम से मिलाएँ।
प्रश्न 70. ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाइए।
उत्तर:
- ‘से अधिक’ संचयी आवृत्तियाँ तैयार करें।
- X-अक्ष पर संबंधित निम्न वर्ग सीमाएँ लें।
- Y-अक्ष पर संचयी आवृत्तियाँ लें।
- प्राप्त बिंदुओं को अंकित करें।
- बिंदुओं को क्रम से मिलाकर वक्र बनाएँ।
प्रश्न 71. आरेखीय विधि द्वारा माध्यिका निर्धारित कीजिए।
उत्तर: इसके लिए ‘से कम’ तथा ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाए जाते हैं। दोनों वक्र जहाँ एक-दूसरे को काटते हैं, उस बिंदु से X-अक्ष पर लंब डालने पर प्राप्त मूल्य माध्यिका होता है।
प्रश्न 72. दिए गए आँकड़ों को वृत्त आरेख में प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर: वृत्त आरेख के लिए प्रत्येक मद का कोण निम्न सूत्र से निकाला जाता है:
कोण = (मद का मूल्य ÷ कुल मूल्य) × 360°
या यदि प्रतिशत दिया हो:
कोण = प्रतिशत × 3.6°
प्रत्येक मद के कोण निकालने के बाद वृत्त में संबंधित खंड बनाए जाते हैं।
प्रश्न 73. एक सांख्यिकीय सारणी के मुख्य भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- सारणी संख्या: सारणी की पहचान के लिए क्रम संख्या दी जाती है।
- शीर्षक: सारणी में प्रस्तुत आँकड़ों के विषय को स्पष्ट करता है।
- शीर्ष टिप्पणी: आवश्यक अतिरिक्त जानकारी या माप की इकाई बताती है।
- पंक्ति शीर्षक: पंक्तियों में प्रस्तुत मदों का परिचय देता है।
- उपशीर्षक: स्तंभों में दी गई जानकारी का परिचय देता है।
- कलेवर: इसमें वास्तविक आँकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं।
- स्रोत: आँकड़े कहाँ से लिए गए हैं, यह बताया जाता है।
- फुटनोट: आवश्यक अतिरिक्त स्पष्टीकरण दिया जाता है।
प्रश्न 74. दंड आरेख और आयत चित्र में अंतर बताइए।
| आधार | दंड आरेख | आयत चित्र |
|---|---|---|
| उपयोग | व्यक्तिगत, कालिक या भौगोलिक आँकड़ों के लिए उपयोगी। | सतत आवृत्ति वितरण के लिए उपयोगी। |
| दंड/आयत | दंडों के बीच अंतर रहता है। | आयत एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। |
| X-अक्ष | श्रेणी या मदें प्रदर्शित की जाती हैं। | वर्ग-अंतराल प्रदर्शित किए जाते हैं। |
| चौड़ाई | समान रखी जाती है। | वर्ग-अंतराल के अनुसार होती है। |
प्रश्न 75. आरेखों द्वारा सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन के लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- जटिल आँकड़ों को सरल बनाया जा सकता है।
- आँकड़ों को समझने में कम समय लगता है।
- तुलना करना आसान होता है।
- आँकड़े अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं।
- मुख्य प्रवृत्तियाँ आसानी से दिखाई देती हैं।
- आँकड़े लंबे समय तक याद रह सकते हैं।
- व्यापार, उत्पादन, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में इनका उपयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 76. सारणीयन के लाभ लिखिए।
उत्तर:
- आँकड़ों को समझना आसान होता है।
- बड़ी मात्रा में आँकड़ों को कम स्थान में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- विभिन्न आँकड़ों की तुलना आसान होती है।
- आँकड़ों का विश्लेषण करने में सहायता मिलती है।
- आरेख और ग्राफ बनाने में सहायता मिलती है।
- समय और श्रम की बचत होती है।
प्रश्न 77. विवरणात्मक और सारणीयन विधि की तुलना कीजिए।
| विवरणात्मक विधि | सारणीयन विधि |
|---|---|
| आँकड़ों को वाक्यों या अनुच्छेदों के माध्यम से समझाया जाता है। | आँकड़ों को पंक्तियों और स्तंभों में व्यवस्थित किया जाता है। |
| लंबे विवरण में तुलना कठिन हो सकती है। | तुलना अपेक्षाकृत आसान होती है। |
| आँकड़ों की विस्तृत व्याख्या की जा सकती है। | आँकड़े संक्षिप्त और व्यवस्थित रूप में दिखाई देते हैं। |
प्रश्न 78. निम्नलिखित को संक्षेप में समझाइए – विवर्तमुखी वर्ग, असमान वर्ग-अंतराल और संचयी आवृत्ति वितरण।
विवर्तमुखी वर्ग: ऐसा वर्गीकरण जिसमें सबसे निचले या सबसे ऊँचे वर्ग की एक सीमा खुली रहती है। उदाहरण: “10 से कम” या “40 और अधिक”।
असमान वर्ग-अंतराल: जब विभिन्न वर्गों के वर्ग-अंतराल समान नहीं होते, तो उन्हें असमान वर्ग-अंतराल कहते हैं।
संचयी आवृत्ति वितरण: जब आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर संचयी रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे संचयी आवृत्ति वितरण कहते हैं। इसके दो प्रकार हैं – ‘से कम’ और ‘से अधिक’।
प्रश्न 79. संचयी आवृत्ति वितरण का महत्त्व बताइए।
उत्तर:
- किसी दिए गए मूल्य से कम या अधिक इकाइयों की संख्या ज्ञात की जा सकती है।
- माध्यिका और अन्य विभाजन मूल्यों को ज्ञात करने में सहायता मिलती है।
- किसी विशेष वर्ग-अंतराल में आने वाली इकाइयों की संख्या ज्ञात की जा सकती है।
प्रश्न 80. असमान वर्ग-अंतराल में आवृत्तियों का संशोधन क्यों किया जाता है?
उत्तर: अलग-अलग वर्ग-अंतराल की आवृत्तियों की सीधे तुलना करना उचित नहीं होता। इसलिए सभी वर्गों को न्यूनतम वर्ग-अंतराल के आधार पर तुलनीय बनाने के लिए आवृत्तियों को संशोधित किया जाता है।
यदि न्यूनतम वर्ग-अंतराल 10 और किसी वर्ग का अंतराल 30 है तथा उसकी आवृत्ति 15 है, तो:
संशोधित आवृत्ति = 15 × (10 ÷ 30) = 5
महत्वपूर्ण सारणी एवं प्रायोगिक प्रश्न
प्रश्न 81. भारत सरकार को करों से प्राप्त आगम की सूचना को सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: दिए गए आँकड़ों को वर्षवार तथा प्रत्यक्ष एवं परोक्ष करों के आधार पर इस प्रकार व्यवस्थित किया जा सकता है:
| वर्ष | कुल कर-आगम (करोड़ ₹) | प्रत्यक्ष कर | परोक्ष कर |
|---|---|---|---|
| 1997–98 | 77,693 | 11,165 | 66,528 |
| 1998–99 | 89,303 | 13,397 | 75,906 |
| 1999–2000 | 1,02,896 | 15,338 | 87,558 |
प्रश्न 82. भारत में चीनी निर्यात से आय को निरपेक्ष कालिक आरेख में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: निरपेक्ष कालिक आरेख में:
- X-अक्ष पर वर्ष लिए जाते हैं।
- Y-अक्ष पर आय की राशि ली जाती है।
- प्रत्येक वर्ष के सामने संबंधित आय का बिंदु लगाया जाता है।
- सभी बिंदुओं को क्रम से रेखा द्वारा जोड़ा जाता है।
प्रश्न 83. द्विविमीय आरेख क्या है?
उत्तर: जिस आरेख में किसी मात्रा को केवल लंबाई ही नहीं बल्कि लंबाई और चौड़ाई दोनों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है, उसे द्विविमीय आरेख कहते हैं।
इसे निरपेक्ष और सापेक्ष दोनों रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है। सापेक्ष द्विविमीय आरेख में आँकड़ों को प्रतिशत में बदलकर तुलना की जाती है।
प्रश्न 84. भारत की जनसंख्या के दिए गए आँकड़ों को उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: जनसंख्या संबंधी आँकड़ों को वर्ष, कुल जनसंख्या, पुरुष तथा महिला के आधार पर सारणीबद्ध किया जाता है।
प्रश्न 85. 2004–05 के खाद्यान्न उत्पादन को उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: दिए गए आँकड़ों को कुल उत्पादन, विभिन्न खाद्यान्नों के उत्पादन तथा उनके प्रतिशत योगदान के आधार पर सारणीबद्ध किया जा सकता है।
प्रश्न 86. भारत की जनगणना 2001 के अनुसार जनसंख्या, ग्रामीण-शहरी जनसंख्या और काम करने वाले व्यक्तियों की जानकारी को तालिका में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: इस जानकारी को अलग-अलग पंक्तियों और स्तंभों में कुल भारत, ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र के आधार पर प्रस्तुत करना उपयुक्त होगा।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. आँकड़ों को खानों एवं पंक्तियों में व्यवस्थित करने को कहते हैं –
(a) वर्गीकरण
(b) सारणीयन
(c) चित्रमय प्रदर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) सारणीयन
प्रश्न 2. एक अच्छी सारणी की विशेषता है –
(a) सुन्दर
(b) स्वयं परिचायक
(c) संक्षिप्त
(d) ये सभी
सही उत्तर: (d) ये सभी
प्रश्न 3. निम्न में कौन अधिक प्रभावशाली होता है?
(a) सारणी
(b) चित्रमय प्रदर्शन
(c) वर्गीकरण
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) चित्रमय प्रदर्शन
प्रश्न 4. दो या अधिक चरों के मूल्यों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है –
(a) दंड चित्र
(b) बहुगुणी दंड चित्र
(c) अन्तर्विभक्त दंड चित्र
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) बहुगुणी दंड चित्र
प्रश्न 5. चित्रमय प्रदर्शन की उपयोगिता है –
(a) सार्वभौमिक
(b) राष्ट्रीय
(c) स्थानीय
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) सार्वभौमिक
प्रश्न 6. सारणी में स्रोत लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) सारणी के नीचे
प्रश्न 7. सारणी का शीर्षक सामान्यतः लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) सारणी के ऊपर
प्रश्न 8. चित्रमय प्रदर्शन का सबसे सरल रूप है –
(a) सरल दंड चित्र
(b) वृत्त चित्र
(c) चित्र व लेख
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) सरल दंड चित्र
प्रश्न 9. कालिक चित्र में आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) यथातथ्य रूप में
(b) प्रतिशत में
(c) अनुपात में
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) प्रतिशत में
प्रश्न 10. आवृत्ति वितरण के आयत चित्र बनाए जाते हैं –
(a) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(b) अखंडित श्रृंखला में
(c) खंडित श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) अखंडित श्रृंखला में
प्रश्न 11. आवृत्ति आयत चित्र में आवृत्तियाँ दर्शाई जाती हैं –
(a) X-अक्ष पर
(b) Y-अक्ष पर
(c) दोनों पर
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) Y-अक्ष पर
प्रश्न 12. आवृत्ति आयत चित्र में वर्ग-अंतराल दर्शाए जाते हैं –
(a) X-अक्ष पर
(b) Y-अक्ष पर
(c) दोनों पर
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) X-अक्ष पर
प्रश्न 13. आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय ध्यान रखा जाता है –
(a) उपयुक्त शीर्षक
(b) पैमाना
(c) आधार रेखा
(d) उपरोक्त सभी
सही उत्तर: (d) उपरोक्त सभी
प्रश्न 14. आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय X-अक्ष पर दर्शाते हैं –
(a) वर्ग-अंतराल
(b) आवृत्ति
(c) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) वर्ग-अंतराल
प्रश्न 15. आवृत्ति वक्र के अंतर्गत क्षेत्रफल समानुपाती है –
(a) आवृत्तियों के
(b) वर्ग-अंतरालों के
(c) दोनों के
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) आवृत्तियों के
प्रश्न 16. काल-श्रेणी आरेख के X-अक्ष पर दर्शाया जाता है –
(a) चर मूल्य
(b) समय
(c) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) समय
प्रश्न 17. समावेशी श्रृंखला से आयत चित्र बनाने के लिए श्रृंखला को बदला जाता है –
(a) अपवर्जी श्रृंखला में
(b) खंडित श्रृंखला में
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) अपवर्जी श्रृंखला में
प्रश्न 18. ‘से अधिक’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) X-अक्ष के समानांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) ऋणात्मक
प्रश्न 19. ‘से कम’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) X-अक्ष के समानांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) धनात्मक
अध्याय का त्वरित पुनरावलोकन
| अवधारणा | मुख्य बात |
|---|---|
| सारणीयन | आँकड़ों को पंक्तियों और स्तंभों में व्यवस्थित करना। |
| सरल सारणी | एक विशेषता को प्रस्तुत करने वाली सारणी। |
| जटिल सारणी | एक से अधिक विशेषताओं को प्रस्तुत करने वाली सारणी। |
| दंड आरेख | दंडों की ऊँचाई द्वारा आँकड़ों का प्रदर्शन। |
| बहुदंड आरेख | दो या अधिक चरों की तुलना के लिए। |
| घटक दंड आरेख | कुल मात्रा और उसके घटकों को दिखाने के लिए। |
| वृत्त आरेख | कुल मात्रा में विभिन्न घटकों के अनुपात को दिखाने के लिए। |
| आयत चित्र | सतत आवृत्ति वितरण के लिए। |
| आवृत्ति बहुभुज | वर्ग-मध्य बिंदुओं और आवृत्तियों को जोड़कर बनाया जाता है। |
| तोरण | संचयी आवृत्ति वक्र। |
| काल-श्रेणी आरेख | समय के साथ होने वाले परिवर्तन को दिखाता है। |
निष्कर्ष
आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण सांख्यिकी का महत्वपूर्ण भाग है। सही तरीके से प्रस्तुत किए गए आँकड़े जटिल जानकारी को सरल, स्पष्ट और तुलनात्मक बना देते हैं। सारणी, दंड आरेख, वृत्त आरेख, आयत चित्र, आवृत्ति वक्र और तोरण जैसे माध्यमों का चुनाव आँकड़ों की प्रकृति और अध्ययन के उद्देश्य के अनुसार किया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से सारणीयन, दंड आरेख और आयत चित्र का अंतर, वृत्त आरेख के कोण की गणना, असमान वर्ग-अंतराल में आवृत्ति संशोधन, संचयी आवृत्ति, तोरण तथा काल-श्रेणी आरेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
अर्थशास्त्र के अन्य अध्याय
पिछला अध्याय – Chapter 3: आँकड़ों का संगठन