बिहार बोर्ड कक्षा 11 अर्थशास्त्र अध्याय 5 – केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप सांख्यिकी का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें यह समझाया जाता है कि बहुत अधिक संख्या में दिए गए आँकड़ों का प्रतिनिधित्व किसी एक उपयुक्त मूल्य से किस प्रकार किया जा सकता है।
केन्द्रीय प्रवृत्ति के प्रमुख माप हैं—समान्तर माध्य (Arithmetic Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode)। इनके अतिरिक्त इस अध्याय में चतुर्थक, भारित माध्य, सामूहिक माध्य, कल्पित माध्य विधि, पद-विचलन विधि तथा आलेखीय विधि का भी अध्ययन किया जाता है।
केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप – महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित स्थितियों में कौन-सा औसत उपयुक्त होगा?
(क) तैयार वस्त्रों के औसत आकार।
उत्तर: बहुलक।
(ख) एक कक्षा में छात्रों की औसत बौद्धिक प्रतिभा।
उत्तर: माध्यिका।
(ग) एक कारखाने में प्रति पाली औसत उत्पादन।
उत्तर: समान्तर माध्य या बहुलक, परिस्थिति के अनुसार।
(घ) एक कारखाने में औसत मजदूरी।
उत्तर: समान्तर माध्य।
(ङ) जब औसत से निरपेक्ष विचलनों का योग न्यूनतम हो।
उत्तर: माध्यिका।
(च) जब चरों की मात्रा अनुपात में हो।
उत्तर: ज्यामितीय माध्य।
(छ) मुक्तांत बारम्बारता बंटन के मामले में।
उत्तर: माध्यिका।
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों के सामने सही या गलत लिखिए।
| कथन | उत्तर |
|---|---|
| माध्यिका से मदों के विचलनों का योग शून्य होता है। | गलत |
| श्रृंखलाओं की तुलना के लिए केवल औसत ही पर्याप्त नहीं है। | सही |
| समांतर माध्य एक स्थैतिक मूल्य है। | गलत |
| उच्च चतुर्थक शीर्ष 25 प्रतिशत मदों का निम्नतम मान है। | सही |
| माध्यिका चरम प्रेक्षणों द्वारा अनुचित रूप से प्रभावित होती है। | गलत |
प्रश्न 3. गुणात्मक मापन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त औसत कौन-सा है?
(क) समान्तर माध्य
(ख) माध्यिका
(ग) बहुलक
(घ) ज्यामितीय माध्य
उत्तर: (ख) माध्यिका।
प्रश्न 4. चरम पदों की उपस्थिति से कौन-सा औसत सर्वाधिक प्रभावित होता है?
उत्तर: समान्तर माध्य।
समान्तर माध्य की गणना में सभी मूल्यों का प्रयोग होता है, इसलिए बहुत बड़े या बहुत छोटे मूल्य इसका परिणाम काफी बदल सकते हैं।
प्रश्न 5. समान्तर माध्य से मूल्यों के विचलनों का बीजगणितीय योग कितना होता है?
उत्तर: शून्य।
Σ(X − X̄) = 0
समान्तर माध्य
प्रश्न 6. समान्तर माध्य किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी श्रृंखला के सभी मूल्यों के योग को उन मूल्यों की कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त मूल्य को समान्तर माध्य कहते हैं।
सूत्र:
X̄ = ΣX / N
जहाँ:
- ΣX = सभी मूल्यों का योग
- N = मूल्यों की कुल संख्या
उदाहरण के लिए 2, 4, 8 और 14 का समान्तर माध्य:
X̄ = (2 + 4 + 8 + 14) / 4 = 28 / 4 = 7
प्रश्न 7. समान्तर माध्य की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
- यह श्रृंखला के सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
- इसकी गणना निश्चित और स्पष्ट होती है।
- इसका बीजगणितीय उपयोग किया जा सकता है।
- इसके आधार पर विभिन्न श्रृंखलाओं की तुलना की जा सकती है।
- समान्तर माध्य से विचलनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
- यह चरम मूल्यों से प्रभावित होता है।
प्रश्न 8. समान्तर माध्य को चरम मूल्यों से प्रभावित होने वाला क्यों कहा जाता है?
उत्तर: समान्तर माध्य की गणना में श्रृंखला के सभी मूल्यों का प्रयोग किया जाता है। इसलिए यदि किसी श्रृंखला में कोई बहुत बड़ा या बहुत छोटा मूल्य जोड़ दिया जाए, तो कुल योग बदल जाता है और उसके साथ समान्तर माध्य भी बदल जाता है।
उदाहरण के लिए 25, 28, 32, 27 और 33 का माध्य:
(25 + 28 + 32 + 27 + 33) / 5 = 29
यदि इसमें 125 जोड़ दिया जाए, तो नया माध्य काफी बढ़ जाएगा। इससे स्पष्ट है कि चरम मूल्य समान्तर माध्य को प्रभावित करता है।
प्रश्न 9. समान्तर माध्य की बीजगणितीय विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
समान्तर माध्य की प्रमुख बीजगणितीय विशेषताएँ हैं:
- विचलनों का योग शून्य: Σ(X − X̄) = 0
- विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम: माध्य से लिए गए विचलनों के वर्गों का योग किसी अन्य मूल्य से लिए गए वर्ग-विचलनों से कम होता है।
- सभी मूल्यों का योग: X̄ × N = ΣX
- सामूहिक माध्य: दो या अधिक समूहों के माध्य और उनकी संख्या ज्ञात होने पर संयुक्त माध्य निकाला जा सकता है।
प्रश्न 10. सामूहिक समान्तर माध्य का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
X̄ = (N₁X̄₁ + N₂X̄₂) / (N₁ + N₂)
यदि दो से अधिक समूह हों, तो सभी समूहों के N × X̄ का योग करके कुल N से भाग दिया जाता है।
प्रश्न 11. समान्तर माध्य के गुण और दोष लिखिए।
उत्तर:
समान्तर माध्य के गुण
- इसकी गणना अपेक्षाकृत सरल है।
- यह सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
- इसका निश्चित मूल्य प्राप्त होता है।
- बीजगणितीय गणनाओं में उपयोगी है।
- विभिन्न समूहों की तुलना में उपयोगी है।
समान्तर माध्य के दोष
- यह चरम मूल्यों से प्रभावित होता है।
- गुणात्मक आँकड़ों के लिए उपयुक्त नहीं है।
- मुक्तांत वर्गों में इसकी गणना कठिन हो सकती है।
- कभी-कभी इसका मूल्य वास्तविक श्रृंखला के किसी मूल्य के बराबर नहीं होता।
माध्यिका
प्रश्न 12. माध्यिका किसे कहते हैं?
उत्तर: क्रमबद्ध आँकड़ों को दो बराबर भागों में बाँटने वाले केंद्रीय मूल्य को माध्यिका कहते हैं। एक भाग में माध्यिका से छोटे और दूसरे भाग में माध्यिका से बड़े मूल्य होते हैं।
प्रश्न 13. माध्यिका की गणना कैसे की जाती है?
उत्तर: व्यक्तिगत श्रृंखला में पहले आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
यदि N विषम है:
माध्यिका = (N + 1) / 2 वाँ पद
यदि N सम है, तो बीच के दो पदों का औसत लिया जाता है।
प्रश्न 14. सतत आवृत्ति वितरण में माध्यिका का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
M = L + [(N/2 − C.F.) / f] × h
जहाँ:
- L = माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा
- N = कुल आवृत्ति
- C.F. = माध्यिका वर्ग से पहले की संचयी आवृत्ति
- f = माध्यिका वर्ग की आवृत्ति
- h = वर्ग-अंतराल
प्रश्न 15. माध्यिका के गुण लिखिए।
उत्तर:
- इसकी गणना अपेक्षाकृत सरल है।
- यह चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती।
- मुक्तांत वितरण में उपयोगी है।
- कुछ मूल्यों के अज्ञात होने पर भी कई स्थितियों में माध्यिका निकाली जा सकती है।
- इसे आलेखीय विधि से भी ज्ञात किया जा सकता है।
- गुणात्मक विशेषताओं के अध्ययन में उपयोगी हो सकती है।
प्रश्न 16. माध्यिका के दोष लिखिए।
उत्तर:
- यह श्रृंखला के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होती।
- इसका बीजगणितीय उपयोग सीमित है।
- आँकड़ों को क्रमबद्ध करना आवश्यक होता है।
- यह पूर्ण श्रृंखला की गणितीय जानकारी को एक ही मूल्य में नहीं समेटती।
बहुलक
प्रश्न 17. बहुलक किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी श्रृंखला में जो मूल्य सबसे अधिक बार आता है, उसे बहुलक कहते हैं।
उदाहरण: 10, 20, 20, 30, 20, 40 में 20 बहुलक है क्योंकि यह सबसे अधिक बार आया है।
प्रश्न 18. बहुलक की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
- यह सबसे अधिक बार आने वाले मूल्य को दर्शाता है।
- इसे कई बार निरीक्षण द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है।
- यह चरम मूल्यों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है।
- उत्पादन, बिक्री और उपभोक्ता पसंद के अध्ययन में उपयोगी है।
- इसे आलेखीय विधि से भी ज्ञात किया जा सकता है।
प्रश्न 19. बहुलक के दोष लिखिए।
उत्तर:
- कभी-कभी बहुलक स्पष्ट नहीं होता।
- एक से अधिक बहुलक हो सकते हैं।
- यह सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होता।
- कुछ वितरणों में इसका निर्धारण कठिन हो सकता है।
प्रश्न 20. बहुलक और माध्यिका में अंतर बताइए।
| आधार | माध्यिका | बहुलक |
|---|---|---|
| अर्थ | क्रमबद्ध श्रृंखला को दो बराबर भागों में बाँटने वाला मूल्य। | सबसे अधिक बार आने वाला मूल्य। |
| निर्धारण | स्थिति के आधार पर निर्धारित होती है। | आवृत्ति के आधार पर निर्धारित होता है। |
| चरम मूल्य | चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती। | आमतौर पर चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता। |
| आलेखीय विधि | ओजाइव से ज्ञात की जा सकती है। | हिस्टोग्राम से ज्ञात की जा सकती है। |
समान्तर माध्य, माध्यिका और बहुलक की तुलना
प्रश्न 21. समान्तर माध्य, माध्यिका और बहुलक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
| आधार | समान्तर माध्य | माध्यिका | बहुलक |
|---|---|---|---|
| आधार | सभी मूल्यों पर आधारित। | स्थिति पर आधारित। | आवृत्ति पर आधारित। |
| चरम मूल्यों का प्रभाव | अधिक | बहुत कम | बहुत कम |
| गणना | गणितीय सूत्र से। | क्रम और स्थिति से। | अधिकतम आवृत्ति से। |
| आलेखीय विधि | सामान्यतः नहीं। | ओजाइव से। | हिस्टोग्राम से। |
| उपयोग | गणितीय एवं आर्थिक विश्लेषण में व्यापक। | असमान वितरण और गुणात्मक अध्ययन में उपयोगी। | सबसे सामान्य/लोकप्रिय मूल्य जानने में उपयोगी। |
चतुर्थक
प्रश्न 22. चतुर्थक किसे कहते हैं?
उत्तर: क्रमबद्ध आँकड़ों को चार बराबर भागों में बाँटने वाले विभाजन मूल्यों को चतुर्थक कहते हैं। मुख्य रूप से प्रथम चतुर्थक Q₁, द्वितीय चतुर्थक Q₂ और तृतीय चतुर्थक Q₃ का प्रयोग किया जाता है।
Q₂ = माध्यिका
प्रश्न 23. विभाजन मूल्य क्या है?
उत्तर: वह मूल्य जो क्रमबद्ध आँकड़ों को दो या दो से अधिक भागों में बाँटता है, विभाजन मूल्य कहलाता है। चतुर्थक, दशमक, प्रतिशतक और माध्यिका इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 24. चतुर्थकों के प्रमुख प्रकार लिखिए।
उत्तर:
- Q₁: प्रथम चतुर्थक
- Q₂: द्वितीय चतुर्थक या माध्यिका
- Q₃: तृतीय चतुर्थक
भारित माध्य
प्रश्न 25. भारित माध्य क्या है?
उत्तर: जब विभिन्न मूल्यों को उनके महत्त्व के अनुसार अलग-अलग भार दिया जाता है और फिर उस आधार पर औसत निकाला जाता है, तो उसे भारित माध्य कहते हैं।
सूत्र:
X̄w = ΣWX / ΣW
जहाँ W भार और X संबंधित मूल्य है।
प्रश्न 26. भारित माध्य का उपयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर: भारित माध्य का प्रयोग तब किया जाता है जब सभी मदों का महत्त्व समान न हो। इसका उपयोग परीक्षा परिणाम, सूचकांक, विभिन्न समूहों की तुलना और अन्य आर्थिक-सांख्यिकीय विश्लेषण में किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 27. एक कक्षा में 6 विद्यार्थियों के प्राप्तांक 10, 35, 35, 40, 35 और 50 हैं। बहुलक ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 35 तीन बार आया है और बाकी मूल्य इससे कम बार आए हैं।
अतः बहुलक = 35
प्रश्न 28. दस संख्याओं का समान्तर माध्य 18 है। प्रत्येक संख्या में 3 जोड़ दिया जाए तो नया माध्य क्या होगा?
उत्तर: प्रत्येक मूल्य में 3 जोड़ने पर माध्य में भी 3 की वृद्धि होगी।
नया माध्य = 18 + 3 = 21
प्रश्न 29. यदि किसी श्रेणी का समान्तर माध्य 10 और माध्यिका 10 है, तो बहुलक ज्ञात कीजिए।
सूत्र: बहुलक = 3 माध्यिका − 2 समान्तर माध्य
= 3 × 10 − 2 × 10
= 10
अतः बहुलक = 10।
प्रश्न 30. यदि किसी श्रेणी के 100 पदों का समान्तर माध्य 4 है, तो सभी मूल्यों का योग ज्ञात कीजिए।
सूत्र: ΣX = X̄ × N
= 4 × 100 = 400
अतः सभी मूल्यों का योग 400 है।
प्रश्न 31. निम्न श्रृंखला की माध्यिका ज्ञात कीजिए: 2, 8, 7, 3, 9, 10, 6
उत्तर: पहले आरोही क्रम में व्यवस्थित करें:
2, 3, 6, 7, 8, 9, 10
कुल 7 पद हैं। मध्य पद चौथा पद है।
माध्यिका = 7
प्रश्न 32. यदि समान्तर माध्य 25 और माध्यिका 26 है, तो बहुलक ज्ञात कीजिए।
बहुलक = 3 माध्यिका − 2 माध्य
= 3 × 26 − 2 × 25
= 78 − 50 = 28
अतः बहुलक = 28।
प्रश्न 33. यदि बहुलक 30 और माध्यिका 25 है, तो समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए।
सूत्र: बहुलक = 3 माध्यिका − 2 माध्य
30 = 3 × 25 − 2X̄
30 = 75 − 2X̄
2X̄ = 45
X̄ = 22.5
अतः समान्तर माध्य 22.5 है।
प्रश्न 34. एक श्रेणी की माध्यिका 20 सेमी और समान्तर माध्य 16 सेमी है। बहुलक ज्ञात कीजिए।
बहुलक = 3 × 20 − 2 × 16
= 60 − 32 = 28 सेमी
प्रश्न 35. पाँच परिवारों की मासिक आय ₹6,550, ₹7,550, ₹9,550, ₹4,550 और ₹8,000 है। समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
कुल आय:
₹6,550 + ₹7,550 + ₹9,550 + ₹4,550 + ₹8,000 = ₹36,200
परिवारों की संख्या = 5
समान्तर माध्य = ₹36,200 ÷ 5 = ₹7,240
प्रश्न 36. 5 मदों का समान्तर माध्य 30 है। चार मदें 10, 15, 30 और 35 हैं। पाँचवीं मद ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
कुल योग = 30 × 5 = 150
चार मदों का योग = 10 + 15 + 30 + 35 = 90
पाँचवीं मद = 150 − 90
= 60
प्रश्न 37. 20 विद्यार्थियों के औसत अंक 50 हैं। एक विद्यार्थी का अंक अज्ञात है। अज्ञात अंक ज्ञात करने की विधि समझाइए।
उत्तर:
कुल अंकों का योग:
ΣX = 50 × 20 = 1000
यदि ज्ञात विद्यार्थियों के अंकों का योग S है, तो:
अज्ञात अंक = 1000 − S
प्रश्न 38. गलत मूल्य के कारण अशुद्ध समान्तर माध्य से शुद्ध समान्तर माध्य कैसे ज्ञात करेंगे?
उत्तर:
- अशुद्ध माध्य को कुल पदों की संख्या से गुणा करके अशुद्ध योग ज्ञात करें।
- गलत मूल्य को अशुद्ध योग से घटाएँ।
- सही मूल्य को उसमें जोड़ें।
- प्राप्त शुद्ध योग को कुल पदों की संख्या से भाग दें।
शुद्ध माध्य = (अशुद्ध योग − गलत मूल्य + सही मूल्य) ÷ N
प्रश्न 39. 100 विद्यार्थियों का औसत अंक 50 है। एक विद्यार्थी का अंक 63 के स्थान पर 93 पढ़ लिया गया था। सही औसत ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अशुद्ध कुल योग = 50 × 100 = 5000
गलत अंक = 93
सही अंक = 63
शुद्ध कुल योग = 5000 − 93 + 63 = 4970
शुद्ध माध्य = 4970 ÷ 100 = 49.70
प्रश्न 40. किसी कक्षा के 100 विद्यार्थियों का माध्य 48 है। एक विद्यार्थी के 53 के स्थान पर 73 अंक जोड़ दिए गए हैं। सही माध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अशुद्ध कुल योग = 48 × 100 = 4800
शुद्ध कुल योग = 4800 − 73 + 53 = 4780
शुद्ध माध्य = 4780 ÷ 100 = 47.8
प्रश्न 41. पाँच श्रमिकों की दैनिक मजदूरी ₹45, ₹55, ₹55, ₹65 और ₹70 है। यदि एक मजदूर की मजदूरी ₹100 कर दी जाए, तो समान्तर माध्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
पहला कुल योग:
45 + 55 + 55 + 65 + 70 = 290
पहला माध्य = 290 ÷ 5 = ₹58
यदि ₹70 के स्थान पर ₹100 हो जाए:
नया योग = 45 + 55 + 55 + 65 + 100 = 320
नया माध्य = 320 ÷ 5 = ₹64
अतः बड़े मूल्य के कारण समान्तर माध्य बढ़ गया। इससे स्पष्ट है कि समान्तर माध्य चरम मूल्यों से प्रभावित होता है।
प्रश्न 42. एक विद्यार्थी के अंग्रेजी, हिन्दी और गणित में क्रमशः 60%, 75% और 63% अंक हैं। इनके भार क्रमशः 1, 1 और 2 हैं। भारित माध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
भारित माध्य = ΣWX / ΣW
= (60×1 + 75×1 + 63×2) / (1+1+2)
= (60 + 75 + 126) / 4
= 261 / 4
= 65.25%
प्रश्न 43. एक कक्षा के 50 छात्रों की औसत ऊँचाई 61 इंच और दूसरी कक्षा के 70 छात्रों की औसत ऊँचाई 58 इंच है। संयुक्त औसत ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त माध्य = (50×61 + 70×58) / (50+70)
= (3050 + 4060) / 120
= 7110 / 120
= 59.25 इंच
माध्यिका की आलेखीय विधि
प्रश्न 44. ओजाइव की सहायता से माध्यिका कैसे ज्ञात की जाती है?
उत्तर:
- ‘से कम’ और ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति तैयार करें।
- दोनों संचयी आवृत्ति वक्रों को ग्राफ पर बनाएँ।
- दोनों वक्र जहाँ एक-दूसरे को काटते हैं, उस बिंदु को चिन्हित करें।
- उस बिंदु से X-अक्ष पर लंब गिराएँ।
- X-अक्ष पर प्राप्त मान माध्यिका होगा।
बहुलक की गणितीय एवं आलेखीय विधि
प्रश्न 45. अखंडित श्रेणी में बहुलक का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
Z = L + [(f₁ − f₀) / (2f₁ − f₀ − f₂)] × h
जहाँ:
- L = बहुलक वर्ग की निम्न सीमा
- f₁ = बहुलक वर्ग की आवृत्ति
- f₀ = बहुलक वर्ग से पहले की आवृत्ति
- f₂ = बहुलक वर्ग के बाद की आवृत्ति
- h = वर्ग-अंतराल
प्रश्न 46. बहुलक को आलेखीय विधि से कैसे ज्ञात करते हैं?
उत्तर: बहुलक को आलेखीय रूप से ज्ञात करने के लिए आवृत्ति वितरण का हिस्टोग्राम बनाया जाता है। सबसे ऊँचे आयत को बहुलक वर्ग माना जाता है। उसके आधार पर आलेखीय रेखाएँ खींचकर X-अक्ष पर प्राप्त बिंदु बहुलक का अनुमान देता है।
कल्पित माध्य विधि
प्रश्न 47. कल्पित माध्य विधि से समान्तर माध्य कैसे ज्ञात करते हैं?
उत्तर: जब मूल्यों या वर्ग-अंतरालों की संख्या अधिक हो, तब गणना को सरल बनाने के लिए किसी सुविधाजनक मूल्य को कल्पित माध्य माना जाता है।
फिर प्रत्येक मूल्य का कल्पित माध्य से विचलन निकाला जाता है।
X̄ = A + (Σfd / N)
जहाँ A कल्पित माध्य है।
प्रश्न 48. पद-विचलन विधि क्या है?
उत्तर: जब सभी वर्ग-अंतराल समान हों, तो विचलनों को वर्ग-अंतराल के समान गुणक से विभाजित करके छोटे मान प्राप्त किए जाते हैं। इस विधि को पद-विचलन विधि (Step Deviation Method) कहते हैं।
सूत्र:
X̄ = A + (Σfu / N) × h
प्रश्न 49. यदि 45 और 55 को कल्पित माध्य मानकर समान वितरण का माध्य निकाला जाए, तो दोनों स्थितियों में परिणाम कैसा होगा?
उत्तर: उचित गणना करने पर दोनों कल्पित माध्यों से समान समान्तर माध्य प्राप्त होगा। कल्पित माध्य केवल गणना को सरल बनाता है; वास्तविक माध्य पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता।
माध्य, माध्यिका और बहुलक का संबंध
प्रश्न 50. सामान्यतः माध्य, माध्यिका और बहुलक के बीच संबंध लिखिए।
उत्तर: मध्यम रूप से विषम वितरण के लिए अनुभवजन्य संबंध:
बहुलक = 3 × माध्यिका − 2 × समान्तर माध्य
इसी से:
समान्तर माध्य = (3 × माध्यिका − बहुलक) ÷ 2
वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. एक श्रृंखला के सभी मदों को जोड़कर योग को संख्या से भाग करने पर प्राप्त होता है –
(a) समांतर माध्य
(b) मध्यिका
(c) बहुलक
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) समांतर माध्य
व्याख्या: सभी मूल्यों के योग को कुल मूल्यों की संख्या से भाग देने पर समान्तर माध्य प्राप्त होता है।
प्रश्न 2. समान्तर माध्य की गणना पद-विचलन विधि अथवा प्रत्यक्ष विधि से करने पर उत्तर होना चाहिए –
(a) समान
(b) असमान
सही उत्तर: (a) समान
व्याख्या: विधि अलग हो सकती है, लेकिन सही गणना करने पर वास्तविक माध्य एक ही प्राप्त होता है।
प्रश्न 3. एक क्रमबद्ध श्रृंखला को दो समान भागों में बाँटने वाला माप है –
(a) समान्तर माध्य
(b) माध्यिका
(c) बहुलक
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) माध्यिका
प्रश्न 4. ‘से कम’ तथा ‘से अधिक’ तोरण जिस बिंदु पर काटते हैं, वहाँ से X-अक्ष पर खींचा गया लंब किसकी माप देता है?
(a) निम्न चतुर्थक
(b) उच्च चतुर्थक
(c) माध्यिका
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) माध्यिका
प्रश्न 5. ज्यामितीय/आलेखीय विधि से सामान्यतः कौन-सा माप ज्ञात नहीं किया जाता?
(a) समान्तर माध्य
(b) बहुलक
(c) माध्यिका
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) समान्तर माध्य
प्रश्न 6. समान्तर माध्य से विचलनों का योग होता है –
(a) ऋणात्मक
(b) धनात्मक
(c) शून्य
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) शून्य
प्रश्न 7. क्रमबद्ध श्रृंखला को चार भागों में विभाजित करने वाला माप है –
(a) चतुर्थक
(b) माध्यिका
(c) बहुलक
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) चतुर्थक
प्रश्न 8. श्रृंखला में सबसे अधिक बार आने वाला मद होता है –
(a) मध्यिका
(b) चतुर्थक
(c) बहुलक
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) बहुलक
प्रश्न 9. सामान्यतः किन चतुर्थकों की गणना की जाती है?
(a) Q₁
(b) Q₂
(c) Q₃
(d) Q₄
(e) Q₁ तथा Q₃
सही उत्तर: (e) Q₁ तथा Q₃
प्रश्न 10. निम्न में कौन सभी मदों पर आधारित होता है?
(a) समांतर माध्य
(b) मध्यिका
(c) बहुलक
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) समांतर माध्य
अध्याय का त्वरित पुनरावलोकन
| माप | मुख्य अर्थ |
|---|---|
| समान्तर माध्य | सभी मूल्यों के योग को कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त मूल्य। |
| माध्यिका | क्रमबद्ध आँकड़ों को दो बराबर भागों में बाँटने वाला मूल्य। |
| बहुलक | सबसे अधिक बार आने वाला मूल्य। |
| Q₁ | प्रथम चतुर्थक। |
| Q₂ | द्वितीय चतुर्थक अर्थात् माध्यिका। |
| Q₃ | तृतीय चतुर्थक। |
| भारित माध्य | भारों को ध्यान में रखकर निकाला गया औसत। |
| सामूहिक माध्य | दो या अधिक समूहों के माध्यों का संयुक्त औसत। |
महत्वपूर्ण सूत्र
| विषय | सूत्र |
|---|---|
| समान्तर माध्य | X̄ = ΣX / N |
| सामूहिक माध्य | X̄ = (N₁X̄₁ + N₂X̄₂) / (N₁ + N₂) |
| भारित माध्य | X̄w = ΣWX / ΣW |
| माध्यिका | M = L + [(N/2 − C.F.) / f] × h |
| बहुलक | Z = L + [(f₁ − f₀) / (2f₁ − f₀ − f₂)] × h |
| अनुभवजन्य संबंध | Mode = 3 Median − 2 Mean |
निष्कर्ष
केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप के माध्यम से बड़ी मात्रा में उपलब्ध आँकड़ों को एक प्रतिनिधि मूल्य के रूप में समझना आसान हो जाता है। समान्तर माध्य सभी मूल्यों का उपयोग करता है, माध्यिका क्रमबद्ध श्रृंखला की केंद्रीय स्थिति बताती है और बहुलक सबसे अधिक बार आने वाले मूल्य को दर्शाता है।
परीक्षा की दृष्टि से समान्तर माध्य, माध्यिका, बहुलक, चतुर्थक, भारित माध्य, सामूहिक माध्य, कल्पित माध्य विधि, पद-विचलन विधि तथा माध्यिका और बहुलक की आलेखीय विधि विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
अर्थशास्त्र के अन्य अध्याय
पिछला अध्याय – Chapter 4: आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण