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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु

Bihar Board Class 11 Geography Chapter4 – जलवायु में भारत की जलवायु, मानसूनी पवनों, तापमान और वर्षा के वितरण, भारतीय ऋतुओं, पश्चिमी विक्षोभ, जेट प्रवाह, ITCZ, मानसून प्रस्फोट, लू, शीत लहर, एल-नीनो तथा कोपेन और थार्नवेट के जलवायु वर्गीकरण का अध्ययन किया जाता है।

भारत की जलवायु को समझने के लिए केवल यह याद करना पर्याप्त नहीं है कि यहाँ मानसूनी जलवायु पाई जाती है। यह समझना भी जरूरी है कि मानसून क्यों आता है, इसकी दिशा क्यों बदलती है, भारत के अलग-अलग भागों में वर्षा और तापमान अलग क्यों होते हैं तथा इसका कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसी दृष्टि से इस अध्याय के प्रश्नों को आसान और शिक्षक जैसी व्याख्या के साथ समझाया गया है।

Table of Contents

अध्याय 4 – जलवायु का परिचय

जलवायु किसी स्थान पर लंबे समय तक देखी गई मौसम की औसत दशाओं को कहा जाता है। इसमें तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता और वर्षा जैसे तत्व शामिल होते हैं।

भारत की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी जलवायु है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वर्ष के अलग-अलग समय में पवनों की दिशा बदलती रहती है। गर्मी में समुद्र से स्थल की ओर आने वाली नम पवनें वर्षा कराती हैं, जबकि सर्दी में स्थल से समुद्र की ओर चलने वाली पवनें सामान्यतः शुष्क होती हैं।

लेकिन पूरे भारत में एक जैसी जलवायु नहीं है। राजस्थान में गर्म और शुष्क दशाएँ मिलती हैं, जबकि पूर्वोत्तर भारत तथा पश्चिमी तट के कुछ भागों में बहुत अधिक वर्षा होती है। इसी प्रकार हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक ठंड पड़ सकती है, जबकि दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत सम रहता है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न (MCQ) एवं व्याख्या

प्रश्न 1. शीतकाल में तमिलनाडु के तटीय मैदान में किस कारण वर्षा होती है?

(क) दक्षिण-पश्चिम मानसून

(ख) उत्तर-पूर्वी मानसून

(ग) शीतोष्ण चक्रवात

(घ) स्थानीय पवनें

सही उत्तर: (ख) उत्तर-पूर्वी मानसून

व्याख्या: तमिलनाडु भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है। जब दक्षिण-पश्चिम मानसून वापस लौटता है, तब उत्तर-पूर्वी मानसूनी पवनें बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करके तमिलनाडु के तट की ओर आती हैं। इसलिए तमिलनाडु को वर्षा का एक महत्वपूर्ण भाग शीत ऋतु के आसपास प्राप्त होता है।

प्रश्न 2. कितने प्रतिशत भाग में भारत में 75 सेमी से कम वार्षिक वर्षा होती है?

(क) आधे

(ख) दो-तिहाई

(ग) एक तिहाई

(घ) तीन चौथाई

सही उत्तर: (घ) तीन चौथाई

व्याख्या: दिए गए reference में इस प्रश्न का उत्तर तीन-चौथाई दिया गया है। इसका उद्देश्य भारत में वर्षा के असमान वितरण को समझाना है। भारत के सभी क्षेत्रों में समान मात्रा में वर्षा नहीं होती। कुछ भागों में बहुत अधिक वर्षा होती है, जबकि कई क्षेत्रों में वर्षा कम होती है।

प्रश्न 3. दक्षिणी भारत के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?

(क) दैनिक तापान्तर कम है

(ख) वार्षिक तापान्तर कम है

(ग) वर्षभर तापमान अधिक है

(घ) यहाँ कठोर जलवायु है

सही उत्तर: (घ) यहाँ कठोर जलवायु है

व्याख्या: दक्षिणी भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है। समुद्र तापमान को संतुलित करता है, इसलिए यहाँ दैनिक और वार्षिक तापान्तर सामान्यतः कम रहता है। इसके विपरीत कठोर महाद्वीपीय जलवायु आंतरिक क्षेत्रों में अधिक दिखाई देती है।

प्रश्न 4. जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर लंबवत चमकता है तो उत्तर-पश्चिमी भारत में क्या स्थिति बनती है?

(क) उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायुदाब

(ख) उत्तर-पश्चिमी भारत में निम्न वायुदाब

(ग) तापमान और वायुदाब में कोई परिवर्तन नहीं

(घ) उत्तर-पश्चिमी भाग में लू चलती है

सही उत्तर: (क) उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायुदाब

व्याख्या: शीत ऋतु के दौरान सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध की ओर होता है। इस समय उत्तर-पश्चिमी भारत अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है। ठंडी हवा भारी होकर नीचे बैठती है और वहाँ उच्च वायुदाब की स्थिति बनती है। यही वायुदाब व्यवस्था शीतकालीन पवनों को प्रभावित करती है।

प्रश्न 5. भारत के किस क्षेत्र में कोपेन के ‘AS’ वर्ग की जलवायु पाई जाती है?

(क) केरल तथा कर्नाटक

(ख) अंडमान-निकोबार द्वीप

(ग) कोरोमंडल तट

(घ) असम-अरुणाचल

सही उत्तर: (ग) कोरोमंडल तट

व्याख्या: reference में AS वर्ग के लिए कोरोमंडल तट को उत्तर दिया गया है। कोपेन का वर्गीकरण तापमान और वर्षण के आधार पर जलवायु के प्रकारों को पहचानने की एक पद्धति है।

प्रश्न 6. भारत में किस प्रकार की जलवायु पाई जाती है?

(क) उष्ण मानसूनी

(ख) भूमध्यसागरीय

(ग) उष्ण मरुस्थलीय

(घ) सागरीय

सही उत्तर: (क) उष्ण मानसूनी

व्याख्या: भारत की जलवायु का प्रमुख स्वरूप मानसून से निर्धारित होता है। पवनों की दिशा में मौसमी परिवर्तन तथा वर्षा का मौसमी वितरण इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं। हालांकि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय जलवायवी भिन्नताएँ भी मिलती हैं।

प्रश्न 7. उत्तर-पूर्वी मानसून से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला राज्य कौन-सा है?

(क) असम

(ख) पश्चिम बंगाल

(ग) तमिलनाडु

(घ) ओडिशा

सही उत्तर: (ग) तमिलनाडु

व्याख्या: उत्तर-पूर्वी मानसून की पवनें बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरते समय नमी ग्रहण करती हैं। ये तमिलनाडु के तटीय भागों में महत्वपूर्ण वर्षा कराती हैं। इसलिए तमिलनाडु को उत्तर-पूर्वी मानसून से विशेष लाभ मिलता है।

प्रश्न 8. उत्तर भारत में गर्मियों में तीव्र गति से चलने वाली गर्म हवाओं को क्या कहते हैं?

(क) हरमट्टन

(ख) लू

(ग) टाइफून

(घ) हरिकेन

सही उत्तर: (ख) लू

व्याख्या: गर्मियों में उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में चलने वाली गर्म और शुष्क स्थानीय हवा को लू कहा जाता है। यह विशेष रूप से मई-जून के गर्म मौसम में महसूस होती है और तापमान को बहुत अधिक बढ़ा सकती है।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. भारतीय मौसम तंत्र को प्रभावित करने वाले तीन महत्वपूर्ण कारक कौन-से हैं?

उत्तर: भारतीय मौसम तंत्र को मुख्यतः धरातलीय वायुदाब एवं पवनों का वितरण, ऊपरी वायु परिसंचरण तथा पश्चिमी विक्षोभ एवं उष्णकटिबंधीय अवदाब जैसी मौसमी प्रणालियाँ प्रभावित करती हैं।

आसान भाषा में समझें तो जमीन के पास की हवाएँ, ऊपरी वायुमंडल की तेज हवाएँ और विभिन्न चक्रवाती प्रणालियाँ मिलकर भारत के मौसम को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 2. अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र क्या है?

उत्तर: अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र अर्थात ITCZ निम्न वायुदाब का वह क्षेत्र है जहाँ दोनों गोलार्द्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं और हवा ऊपर उठती है। इसकी स्थिति मौसम के अनुसार बदलती रहती है।

गर्मियों में ITCZ उत्तर की ओर खिसकता है और भारतीय मानसून की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 3. मानसून प्रस्फोट से आपका क्या अभिप्राय है? भारत में सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाले स्थान का नाम लिखिए।

उत्तर: मानसून प्रस्फोट से आशय दक्षिण-पश्चिम मानसून के अचानक सक्रिय होकर तेज वर्षा शुरू करने से है। भारत में अत्यधिक वर्षा वाला क्षेत्र मेघालय की पहाड़ियों का दक्षिणी ढाल क्षेत्र है, जहाँ अत्यधिक वर्षा दर्ज की जाती है।

प्रश्न 4. जलवायु प्रदेश क्या होता है? कोपेन की पद्धति के प्रमुख आधार कौन-से हैं?

उत्तर: समान जलवायवी विशेषताओं वाले क्षेत्र को जलवायु प्रदेश कहते हैं। कोपेन ने मुख्यतः तापमान और वर्षण के मासिक मानों को जलवायु वर्गीकरण का आधार बनाया। प्राकृतिक वनस्पति को भी जलवायु की दशाओं को समझने के संकेतक के रूप में महत्व दिया गया।

प्रश्न 5. पश्चिमी भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को किस प्रकार के चक्रवातों से वर्षा प्राप्त होती है? वे कहाँ उत्पन्न होते हैं?

उत्तर: पश्चिमी भारत में रबी की फसलों को शीतकाल में होने वाली वर्षा मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभों से मिलती है। इनका संबंध भूमध्यसागरीय-पश्चिमी एशियाई क्षेत्र में बनने वाली मौसम प्रणालियों से है। यह वर्षा गेहूँ जैसी रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।

लगभग 125 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. जलवायु में एक प्रकार का ऐक्य होते हुए भी भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। उपयुक्त उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भारत की जलवायु का मूल स्वरूप मानसूनी है। मानसून की मौसमी पवनें देश के अधिकांश भागों को एक समान मौसमी चक्र से जोड़ती हैं। इसी कारण भारत की जलवायु में एक व्यापक एकता दिखाई देती है।

लेकिन भारत का विशाल क्षेत्रफल, अक्षांशीय विस्तार, समुद्र से दूरी, ऊँचाई, पर्वतों की स्थिति तथा धरातलीय स्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों में जलवायु की भिन्नता उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए राजस्थान के पश्चिमी भाग में गर्म और शुष्क जलवायु मिलती है, जबकि मेघालय में बहुत अधिक वर्षा होती है। दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में समुद्र के प्रभाव के कारण तापमान का वार्षिक अंतर कम रहता है। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिमी भारत में गर्मी और सर्दी के तापमान में काफी अंतर पाया जाता है।

इस प्रकार पूरे देश को मानसून एक व्यापक जलवायविक एकता प्रदान करता है, लेकिन स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियाँ क्षेत्रीय विविधता पैदा करती हैं।

प्रश्न 2. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में कितने स्पष्ट मौसम पाए जाते हैं? किसी एक मौसम की दशाओं का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में सामान्यतः चार प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं—शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा ऋतु और मानसून की वापसी की ऋतु।

उदाहरण के लिए शीत ऋतु को समझें। इस समय उत्तर भारत में तापमान काफी कम रहता है। जनवरी और फरवरी सामान्यतः ठंडे महीने होते हैं। उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायुदाब की स्थिति बनती है और हवाएँ सामान्यतः स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं। इसी समय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत में वर्षा कर सकते हैं। यह वर्षा रबी की फसलों के लिए उपयोगी होती है। दक्षिण-पूर्वी भारत, विशेषकर तमिलनाडु के तटीय भागों में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण वर्षा हो सकती है।

भारतीय जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

1. अक्षांशीय स्थिति

भारत का अक्षांशीय विस्तार काफी बड़ा है और कर्क रेखा देश के मध्य भाग से गुजरती है। इसलिए भारत के उत्तरी और दक्षिणी भागों में तापमान तथा ऋतुओं की प्रकृति में अंतर दिखाई देता है।

2. हिमालय का प्रभाव

हिमालय भारत की जलवायु में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मध्य एशिया से आने वाली अत्यधिक ठंडी हवाओं के प्रभाव को सीमित करता है। साथ ही मानसूनी पवनों के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करके वर्षा के वितरण को प्रभावित करता है।

3. समुद्र से दूरी

समुद्र के पास स्थित क्षेत्रों में समुद्र तापमान को नियंत्रित करता है। इसलिए मुंबई जैसे तटीय क्षेत्रों में तापमान का वार्षिक अंतर आंतरिक क्षेत्रों की तुलना में कम होता है। समुद्र से दूर क्षेत्रों में महाद्वीपीय प्रभाव अधिक होता है।

4. धरातलीय स्वरूप

पर्वतों की स्थिति पवनों और वर्षा के वितरण को प्रभावित करती है। पश्चिमी घाट की पवनाभिमुख ढाल पर अधिक वर्षा होती है, जबकि उसके पीछे का क्षेत्र वृष्टि-छाया में आ सकता है।

5. मानसूनी पवनें

भारत की जलवायु का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानसूनी पवनें हैं। इनकी दिशा ऋतु के अनुसार बदलती है और इनके साथ वर्षा का वितरण भी बदलता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. भारत में सबसे अधिक ठंडे स्थान का नाम लिखें।

उत्तर: लद्दाख तथा कारगिल क्षेत्र के ऊँचे पर्वतीय भागों में अत्यधिक ठंड पड़ती है। द्रास को भारत के अत्यंत ठंडे बसे हुए स्थानों में गिना जाता है।

प्रश्न 2. भारत में सबसे अधिक वर्षा वाले स्थान का नाम लिखें।

उत्तर: मेघालय की खासी पहाड़ियों के दक्षिणी ढाल पर स्थित मौसिनराम को विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले स्थानों में माना जाता है।

प्रश्न 3. उस राज्य का नाम लिखें जहाँ तापमान में कम अंतर होता है।

उत्तर: केरल।

व्याख्या: केरल तीन ओर से समुद्र के निकट है। समुद्री प्रभाव के कारण यहाँ तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं होता।

प्रश्न 4. भारत में सम जलवायु वाले तटीय राज्य का नाम लिखें।

उत्तर: तमिलनाडु के तटीय भागों में समुद्री प्रभाव के कारण अपेक्षाकृत सम जलवायु पाई जाती है।

प्रश्न 5. पूर्वी मानसून पवनों से होने वाली वर्षा का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: तमिलनाडु के तटीय भागों में उत्तर-पूर्वी मानसून से होने वाली वर्षा इसका प्रमुख उदाहरण है।

प्रश्न 6. किन प्रदेशों में शीतकाल में रात को पाला पड़ता है?

उत्तर: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ आंतरिक भागों में शीतकाल में पाला पड़ सकता है।

प्रश्न 7. लू से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: गर्मियों में उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में चलने वाली तेज, गर्म और शुष्क स्थानीय हवा को लू कहते हैं।

प्रश्न 8. वह क्षेत्र कौन-सा है जो दोनों मानसूनी ऋतुओं में वर्षा प्राप्त करता है?

उत्तर: तमिलनाडु के तटीय भाग को दक्षिण-पश्चिम मानसून तथा उत्तर-पूर्वी मानसून दोनों से वर्षा प्राप्त हो सकती है, हालांकि उत्तर-पूर्वी मानसून का योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 9. जलवायु से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: किसी स्थान के लंबे समय की औसत मौसम दशाओं को जलवायु कहते हैं।

प्रश्न 10. भारत में सबसे गर्म भागों में से एक का नाम बताइए।

उत्तर: पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र भारत के अत्यधिक गर्म क्षेत्रों में शामिल है।

प्रश्न 11. कर्क रेखा किन दो जलवायु कटिबंधों को प्रभावित करती है?

उत्तर: कर्क रेखा उष्ण कटिबंध और उससे उत्तर की ओर स्थित उपोष्ण/शीतोष्ण प्रभाव वाले क्षेत्रों के बीच महत्वपूर्ण अक्षांशीय सीमा बनाती है।

प्रश्न 12. भारत के मध्य से कौन-सी अक्षांश रेखा गुजरती है?

उत्तर: कर्क रेखा।

प्रश्न 13. भारत में किस प्रकार की जलवायु मिलती है?

उत्तर: भारत में मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पाई जाती है।

प्रश्न 14. तमिलनाडु में वर्षा कराने वाली प्रमुख मानसूनी पवन कौन-सी है?

उत्तर: उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु की शीतकालीन वर्षा में प्रमुख भूमिका निभाता है।

प्रश्न 15. तमिलनाडु में वर्षा कराने वाली पवनों का नाम बताइए।

उत्तर: उत्तर-पूर्वी मानसूनी पवनें।

प्रश्न 16. वृष्टि-छाया से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: पर्वत के उस ढाल वाले भाग को वृष्टि-छाया क्षेत्र कहते हैं जहाँ पर्वत की दूसरी ओर से गुजर चुकी पवनों में नमी कम रह जाती है और वर्षा बहुत कम होती है।

प्रश्न 17. वृष्टि-छाया क्षेत्र का एक उदाहरण बताइए।

उत्तर: पश्चिमी घाट के पूर्वी भाग में स्थित दक्कन का पठारी क्षेत्र वृष्टि-छाया का प्रमुख उदाहरण है।

प्रश्न 18. किस पर्वत के कारण दक्कन पठार का बड़ा भाग वृष्टि-छाया में आता है?

उत्तर: पश्चिमी घाट के कारण।

प्रश्न 19. पठार तथा पहाड़ियाँ गर्मियों में अपेक्षाकृत ठंडी क्यों होती हैं?

उत्तर: ऊँचाई बढ़ने के साथ सामान्यतः तापमान कम होता है। इसलिए ऊँचे पठारी और पर्वतीय क्षेत्रों में आसपास के निचले क्षेत्रों की तुलना में गर्मियों में तापमान कम रह सकता है।

प्रश्न 20. असम में कौन-सी फसल गर्मियों की वर्षा से लाभ प्राप्त करती है?

उत्तर: चाय।

प्रश्न 21. Mango Showers किन फसलों के लिए लाभदायक हैं?

उत्तर: आम की बौछारें दक्षिण भारत में चाय, कॉफी तथा आम जैसी फसलों के लिए लाभकारी हो सकती हैं।

प्रश्न 22. पूर्व मानसून से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: दक्षिण-पश्चिम मानसून के नियमित आगमन से पहले होने वाली स्थानीय वर्षा या वर्षा-प्रवृत्ति को पूर्व-मानसूनी वर्षा कहा जाता है।

प्रश्न 23. कौन-सा तटीय मैदान दक्षिण-पश्चिम मानसून से अधिक वर्षा प्राप्त करता है?

उत्तर: पश्चिमी तटीय मैदान, विशेषकर पश्चिमी घाट की पवनाभिमुख ढाल के निकट क्षेत्र।

प्रश्न 24. जुलाई में भारत के किस भाग में निम्न वायुदाब का प्रभाव रहता है?

उत्तर: जुलाई में उत्तर-पश्चिमी भारत तथा उससे जुड़े स्थल भागों में मानसूनी निम्न वायुदाब की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।

प्रश्न 25. भारत के किस भाग में पश्चिमी विक्षोभ वर्षा करते हैं?

उत्तर: मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी भारत में।

प्रश्न 26. देश में किस भाग में लू चलती है?

उत्तर: उत्तर भारत के मैदानी भागों में, विशेषकर गर्मियों में।

प्रश्न 27. भारतीय जलवायु में विशाल विविधता क्यों है?

उत्तर: भारत के विशाल क्षेत्रफल, अक्षांशीय विस्तार, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, पर्वतों की स्थिति तथा धरातलीय विविधता के कारण यहाँ जलवायु में व्यापक क्षेत्रीय विविधता पाई जाती है।

प्रश्न 28. गर्मी में भारत में प्रमुख मानसूनी पवन किस दिशा में चलती है?

उत्तर: दक्षिण-पश्चिम मानसून की नम पवनें मुख्यतः समुद्र से स्थल की ओर आती हैं।

प्रश्न 29. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों से किन तटीय प्रदेशों पर प्रभाव पड़ सकता है?

उत्तर: बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से जुड़े तटीय क्षेत्रों पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से पूर्वी तट के राज्य अधिक संवेदनशील हैं।

प्रश्न 30. अक्टूबर की गर्मी से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: मानसून की वापसी के समय तापमान और आर्द्रता के कारण अक्टूबर में जो उमस भरी गर्मी महसूस होती है, उसे सामान्यतः अक्टूबर की गर्मी कहा जाता है।

प्रश्न 31. मानसून प्रस्फोट से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: दक्षिण-पश्चिम मानसून के अचानक सक्रिय होकर तेज और व्यापक वर्षा शुरू करने की घटना को मानसून प्रस्फोट कहा जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. भारत में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान कौन-सा है?

उत्तर: मेघालय की खासी पहाड़ियों के दक्षिणी ढाल पर स्थित मौसिनराम को अत्यधिक वर्षा के लिए जाना जाता है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम मानसूनी पवनें खासी पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं। ऊपर उठने पर हवा ठंडी होती है और उसमें मौजूद जलवाष्प संघनित होकर भारी वर्षा करती है।

यहाँ की भौगोलिक स्थिति और पहाड़ियों की बनावट वर्षा को बहुत अधिक बढ़ाने में सहायता करती है। इसलिए मौसिनराम को विश्व के अत्यधिक वर्षा वाले स्थानों में माना जाता है।

प्रश्न 2. भारतीय मानसून की तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: भारतीय मानसून की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. पवनों की दिशा में मौसमी परिवर्तन – गर्मी और सर्दी में पवनों की दिशा बदलती है।
  2. अनिश्चितता – मानसून हर वर्ष बिल्कुल एक ही समय और समान मात्रा में वर्षा नहीं करता।
  3. असमान वितरण – भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा बहुत अलग होती है।

इसी कारण मानसून भारत की जलवायु को एक ओर जोड़ता है, लेकिन दूसरी ओर विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग जलवायवी परिस्थितियाँ भी उत्पन्न करता है।

प्रश्न 3. पश्चिमी विक्षोभ क्या है? भारत के किस भाग में ये जाड़े की ऋतु में वर्षा लाते हैं?

उत्तर: पश्चिमी विक्षोभ पश्चिम से भारत की ओर आने वाली शीतोष्ण अक्षांशों की मौसम प्रणालियाँ हैं। इनका संबंध भूमध्यसागरीय और पश्चिमी एशियाई क्षेत्रों में बनने वाली निम्न वायुदाब प्रणालियों से होता है।

ये पश्चिमी दिशा से आगे बढ़ते हुए उत्तर-पश्चिमी भारत तक पहुँचते हैं। इनके कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में शीतकालीन वर्षा हो सकती है। यह वर्षा रबी फसलों, विशेषकर गेहूँ के लिए उपयोगी होती है।

प्रश्न 4. भारतीय मौसम तंत्र को प्रभावित करने वाले तीन महत्वपूर्ण कारक कौन-कौन से हैं?

उत्तर: भारतीय मौसम तंत्र को मुख्य रूप से तीन स्तरों पर समझा जा सकता है। पहला है धरातलीय वायुदाब और पवनों का वितरण। दूसरा है ऊपरी वायु परिसंचरण, जिसमें जेट प्रवाह महत्वपूर्ण है। तीसरा है विभिन्न वायुमंडलीय विक्षोभ, जैसे पश्चिमी विक्षोभ और उष्णकटिबंधीय अवदाब।

इन तीनों के संयुक्त प्रभाव से भारत में तापमान, पवन और वर्षा की मौसमी दशाएँ विकसित होती हैं।

प्रश्न 5. ‘मानसून’ शब्द से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: मानसून का संबंध मौसम के अनुसार पवनों की दिशा में होने वाले परिवर्तन से है। सामान्य अर्थ में जब किसी क्षेत्र में पवनें वर्ष के अलग-अलग मौसम में विपरीत दिशाओं में चलती हैं, तो ऐसी मौसमी पवन व्यवस्था को मानसून कहा जाता है।

भारत में गर्मी के मौसम में समुद्र से स्थल की ओर आने वाली नम मानसूनी पवनें वर्षा कराती हैं। सर्दी में पवनों की दिशा बदल जाती है और स्थल से समुद्र की ओर बहने वाली हवाएँ सामान्यतः शुष्क होती हैं।

प्रश्न 6. पश्चिमी जेट प्रवाह शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ को भारतीय उपमहाद्वीप में लाने में किस प्रकार सहायता करता है?

उत्तर: पश्चिमी जेट प्रवाह ऊपरी वायुमंडल में पश्चिम से पूर्व की ओर तेज गति से बहने वाली वायुधारा है। शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ इस ऊपरी वायुप्रवाह के साथ आगे बढ़ते हुए पश्चिमी एशिया से भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग तक पहुँच सकते हैं।

जब ये प्रणालियाँ भारत पहुँचती हैं, तो उत्तर-पश्चिमी भारत में बादल और वर्षा की स्थिति बन सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा के स्थान पर हिमपात भी हो सकता है।

प्रश्न 7. जेट प्रवाह क्या हैं? समझाइए।

उत्तर: वायुमंडल के ऊपरी भाग में बहुत तेज गति से बहने वाली संकरी वायुधाराओं को जेट प्रवाह कहा जाता है। ये सामान्य धरातलीय हवाओं से काफी ऊँचाई पर बहती हैं और बड़े पैमाने पर मौसम प्रणालियों को प्रभावित करती हैं।

भारत के संदर्भ में पश्चिमी जेट प्रवाह शीतकालीन पश्चिमी विक्षोभों से जुड़ा है, जबकि गर्मी में ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव मानसून की क्रियाविधि को प्रभावित करता है।

प्रश्न 8. भारत में कितनी ऋतुएँ होती हैं? क्या उनकी अवधि में दक्षिण से उत्तर अंतर मिलता है?

उत्तर: भारत में सामान्यतः चार प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं—शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा ऋतु और मानसून की वापसी की ऋतु।

इन ऋतुओं की तीव्रता और अवधि पूरे देश में समान नहीं होती। दक्षिण भारत समुद्र और भूमध्य रेखा के अपेक्षाकृत निकट होने के कारण पूरे वर्ष अधिक गर्म रहता है। इसके विपरीत उत्तर भारत में गर्मी और सर्दी का अंतर अधिक स्पष्ट है। ऊँचाई और समुद्र से दूरी भी ऋतु की दशाओं को प्रभावित करती है।

प्रश्न 9. मानसूनी वर्षा की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर: मानसूनी वर्षा की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • यह मुख्यतः मौसमी होती है।
  • वर्षा का वितरण पूरे भारत में समान नहीं है।
  • मानसून के आगमन और वापसी में वर्ष-दर-वर्ष अंतर हो सकता है।
  • मानसून के दौरान वर्षा लगातार नहीं होती; बीच-बीच में शुष्क अवधि आ सकती है।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में पवनों के ऊपर उठने के कारण भारी वर्षा हो सकती है।

प्रश्न 10. ‘मानसून प्रस्फोट’ किसे कहते हैं?

उत्तर: दक्षिण-पश्चिम मानसून के अचानक सक्रिय होकर तेज वर्षा शुरू करने की घटना को मानसून प्रस्फोट कहा जाता है। इसे मानसून की अचानक शुरुआत के रूप में समझा जा सकता है।

मानसून प्रस्फोट के बाद कई क्षेत्रों में मौसम की स्थिति तेजी से बदल जाती है और वर्षा का क्रम शुरू हो जाता है। इसलिए यह भारतीय वर्षा ऋतु की एक महत्वपूर्ण घटना है।

प्रश्न 11. लू से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: लू उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान चलने वाली तेज, गर्म और शुष्क स्थानीय हवा है। यह विशेषकर दोपहर के समय अधिक प्रभावशाली होती है। लू के कारण तापमान बहुत बढ़ सकता है और शरीर में पानी की कमी तथा गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रश्न 12. कोपेन की जलवायु वर्गीकरण पद्धति किन दो तत्वों पर आधारित है?

उत्तर: कोपेन की जलवायु वर्गीकरण पद्धति मुख्यतः तापमान और वर्षण के मासिक मानों पर आधारित है। किसी क्षेत्र में तापमान कितना रहता है और वर्षा किस मात्रा तथा किस मौसम में होती है, इन्हीं आधारों पर जलवायु के प्रकारों की पहचान की जाती है।

प्रश्न 13. उन चार महीनों के नाम बताइए जिनमें भारत में अधिकतम वर्षा होती है।

उत्तर: भारत में अधिकांश मानसूनी वर्षा सामान्यतः जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों के दौरान होती है। हालांकि वर्षा का समय और मात्रा क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

प्रश्न 14. भारत के अत्यधिक गर्म भाग कौन-कौन से हैं और उनके कारण क्या हैं?

उत्तर: पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर थार मरुस्थल का क्षेत्र, भारत के अत्यधिक गर्म भागों में शामिल है। यहाँ समुद्र से दूरी अधिक है, इसलिए समुद्री समकारी प्रभाव कम होता है। गर्मियों में साफ आकाश, शुष्क वातावरण और गर्म स्थानीय हवाएँ तापमान को और बढ़ा देती हैं।

प्रश्न 15. भारत के अत्यधिक ठंडे भाग कौन-कौन से हैं और क्यों?

उत्तर: हिमालय के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर के कुछ ऊँचे भाग अत्यधिक ठंडे होते हैं। इसका मुख्य कारण इन क्षेत्रों की अधिक ऊँचाई, हिमपात, समुद्र से दूरी और शीतकालीन ठंडी हवाएँ हैं। ऊँचाई बढ़ने के साथ सामान्यतः तापमान घटता है, इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक ठंड पड़ती है।

प्रश्न 16. कौन-कौन से कारक भारतीय उपमहाद्वीप में तापमान के वितरण को नियंत्रित करते हैं?

उत्तर: तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं:

  1. अक्षांशीय स्थिति
  2. समुद्र से दूरी
  3. ऊँचाई
  4. धरातलीय स्वरूप
  5. पर्वतों की स्थिति
  6. प्रचलित पवनें
  7. चक्रवाती प्रणालियाँ

इन सभी कारकों के कारण भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान में काफी अंतर पाया जाता है।

प्रश्न 17. अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण कटिबंध (ITCZ) क्या है?

उत्तर: ITCZ उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित निम्न वायुदाब का एक क्षेत्र है, जहाँ विभिन्न दिशाओं से आने वाली व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं। यहाँ हवा ऊपर उठती है और बादल बनने की अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।

ITCZ की स्थिति सूर्य की आभासी गति के साथ उत्तर-दक्षिण दिशा में बदलती है। भारतीय मानसून की मौसमी व्यवस्था में इसका विशेष महत्व है।

प्रश्न 18. भारत में गर्मी की लहर का वर्णन कीजिए।

उत्तर: गर्मी की लहर ऐसी स्थिति है जब किसी क्षेत्र में तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है और कई दिनों तक गर्मी बनी रहती है। भारत में गर्मियों के दौरान उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में ऐसी स्थिति अधिक देखी जाती है।

अत्यधिक गर्मी से मनुष्य, पशु और फसलें प्रभावित हो सकती हैं। लगातार गर्मी रहने पर जल की मांग बढ़ती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

प्रश्न 19. कोपेन द्वारा जलवायु के प्रकारों के लिए अक्षरों का संकेत किस प्रकार प्रयोग किया गया?

उत्तर: कोपेन ने जलवायु के विभिन्न प्रकारों को पहचानने के लिए अंग्रेजी के बड़े और छोटे अक्षरों का उपयोग किया। बड़े अक्षर मुख्य जलवायु समूहों को तथा छोटे अक्षर उनके मौसमी तापमान और वर्षण संबंधी उपप्रकारों को दर्शाते हैं।

इस प्रकार अक्षरों की सहायता से किसी क्षेत्र की जलवायु को संक्षिप्त रूप में पहचानना आसान हो जाता है।

प्रश्न 20. भारतीय मानसून पर एल-नीनो का प्रभाव बताइए।

उत्तर: एल-नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय भाग में समुद्री सतह के तापमान तथा वायुमंडलीय परिसंचरण में होने वाला महत्वपूर्ण परिवर्तन है। इसका प्रभाव विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के मौसम पर पड़ सकता है।

भारतीय मानसून के संदर्भ में एल-नीनो को अक्सर मानसूनी वर्षा में कमी या मानसून के कमजोर होने की संभावित स्थिति से जोड़ा जाता है। लेकिन इसका प्रभाव हर घटना में बिल्कुल समान नहीं होता। इसलिए इसे मानसून को प्रभावित करने वाले अनेक कारकों में से एक माना जाना चाहिए।

प्रश्न 21. भारत में अधिकतम एवं न्यूनतम वर्षा प्राप्त करने वाले भाग कौन-कौन से हैं? कारण बताइए।

उत्तर: भारत में अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में मेघालय की खासी-गारो पहाड़ियाँ तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में नम मानसूनी पवनें पर्वतों से टकराकर ऊपर उठती हैं और भारी वर्षा करती हैं।

इसके विपरीत पश्चिमी राजस्थान, लद्दाख और दक्कन के कुछ वृष्टि-छाया क्षेत्र कम वर्षा प्राप्त करते हैं। राजस्थान में अरावली की दिशा मानसूनी पवनों के मार्ग को प्रभावी रूप से रोक नहीं पाती और क्षेत्र समुद्र से बहुत दूर है। दक्कन के कुछ भाग पश्चिमी घाट की वृष्टि-छाया में स्थित हैं।

प्रश्न 22. राजस्थान का पश्चिमी भाग क्यों शुष्क है?

उत्तर: राजस्थान के पश्चिमी भाग में वर्षा कम होने के कई कारण हैं। अरब सागर शाखा की मानसूनी पवनें अरावली पर्वतमाला के लगभग समानांतर चलती हैं, इसलिए उन्हें पर्याप्त पर्वतीय आरोहण नहीं मिलता। दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी की शाखा राजस्थान तक पहुँचते-पहुँचते काफी नमी खो देती है।

इसके अलावा यह क्षेत्र समुद्र से बहुत दूर है और मरुस्थलीय परिस्थितियों के कारण वायुमंडल में नमी कम रहती है। इन सभी कारणों से पश्चिमी राजस्थान शुष्क बना रहता है।

प्रश्न 23. भारत में शीत लहर का वर्णन कीजिए।

उत्तर: जब किसी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है और ठंडी हवाओं के कारण कई दिनों तक असामान्य ठंड बनी रहती है, तो उसे शीत लहर कहा जाता है।

उत्तर-पश्चिमी भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा हिमालयी क्षेत्रों में शीत लहर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। दक्षिण भारत में समुद्री प्रभाव के कारण ऐसी स्थिति अपेक्षाकृत कम होती है।

प्रश्न 24. भारत के पश्चिमी तटीय प्रदेशों में वर्षा की परिवर्तिता कम तथा कच्छ और गुजरात में अधिक क्यों है?

उत्तर: वर्षा की परिवर्तिता का अर्थ है कि किसी स्थान पर अलग-अलग वर्षों में वर्षा की मात्रा कितनी बदलती है। पश्चिमी तटीय क्षेत्र में समुद्र की निकटता और मानसूनी पवनों के नियमित प्रभाव के कारण वर्षा की वार्षिक परिवर्तनशीलता अपेक्षाकृत कम रहती है।

इसके विपरीत कच्छ और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में वर्षा कम तथा अनिश्चित होती है। वहाँ वर्षा के स्रोत और पर्वतीय अवरोध की परिस्थितियाँ पश्चिमी तट की तुलना में अलग हैं। इसलिए वर्ष-दर-वर्ष वर्षा में अधिक उतार-चढ़ाव दिखाई दे सकता है।

प्रश्न 25. तमिलनाडु के तटीय प्रदेशों में अधिकांश वर्षा जाड़े में क्यों होती है?

उत्तर: तमिलनाडु भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय इसका बड़ा भाग पश्चिमी घाट की वृष्टि-छाया के प्रभाव में रहता है। इसलिए गर्मियों में यहाँ अपेक्षाकृत कम वर्षा होती है।

मानसून की वापसी के समय उत्तर-पूर्वी पवनें बंगाल की खाड़ी से होकर नमी ग्रहण करती हैं और तमिलनाडु के तट पर वर्षा कराती हैं। इसी कारण तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा का विशेष महत्व है।

प्रश्न 26. भारत में उत्तर-पश्चिमी मैदान में शीत ऋतु में वर्षा क्यों होती है?

उत्तर: उत्तर-पश्चिमी मैदान में शीतकालीन वर्षा का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ हैं। ये पश्चिमी एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्र से संबंधित मौसम प्रणालियाँ हैं जो पश्चिमी पवनों और ऊपरी वायुप्रवाह के साथ भारत की ओर बढ़ती हैं।

इनके कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में वर्षा होती है। यह वर्षा रबी की फसलों के लिए उपयोगी होती है।

प्रश्न 27. मौसिनराम संसार में सर्वाधिक वर्षा क्यों प्राप्त करता है?

उत्तर: मौसिनराम मेघालय की खासी पहाड़ियों के दक्षिणी ढाल पर स्थित है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम मानसूनी पवनें जब इस क्षेत्र की पहाड़ियों से टकराती हैं, तो उन्हें ऊपर उठना पड़ता है। ऊपर उठते समय हवा ठंडी होती है और जलवाष्प का संघनन होकर भारी वर्षा होती है।

क्षेत्र की पर्वतीय बनावट वर्षा को और बढ़ाती है। इसी कारण मौसिनराम अत्यधिक वर्षा के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 28. “मानसून भारत की मौसमी स्थितियों पर समरूपक प्रभाव डाल रहा है।” व्याख्या कीजिए।

उत्तर: भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और वर्षा की मात्रा में बहुत अंतर है, फिर भी मानसून पूरे देश को एक व्यापक मौसमी चक्र से जोड़ता है। गर्मी, मानसून का आगमन, वर्षा ऋतु और मानसून की वापसी जैसी मौसमी घटनाएँ देश के बड़े भाग को प्रभावित करती हैं।

कृषि व्यवस्था भी मानसून से गहराई से जुड़ी है। राजस्थान से लेकर पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत तक मानसून की सफलता कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव डालती है। इसलिए स्थानीय भिन्नताओं के बावजूद मानसून भारतीय जलवायु में एक व्यापक एकता स्थापित करता है।

प्रश्न 29. भारत के पश्चिमी एवं पूर्वी तटीय मैदान में अंतर बताइए।

आधारपश्चिमी तटीय मैदानपूर्वी तटीय मैदान
स्थितिपश्चिमी घाट और अरब सागर के बीचपूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच
चौड़ाईसामान्यतः संकरासामान्यतः अधिक चौड़ा
नदियों का स्वरूपकई छोटी और तीव्र ढाल वाली नदियाँमहानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों के बड़े डेल्टा
तटीय स्थलरूपमुहाने और लैगून जैसे स्थलरूप महत्वपूर्णडेल्टा और विस्तृत तटीय मैदान प्रमुख

इस प्रकार दोनों तटीय मैदानों में उनकी भौगोलिक स्थिति, चौड़ाई और नदी निक्षेप के कारण स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

प्रश्न 30. भारतीय मानसून की चार विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. मानसून पवनों की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन होता है।
  2. मानसून का आगमन और वर्षा की मात्रा हर वर्ष बिल्कुल समान नहीं होती।
  3. वर्षा का वितरण पूरे देश में असमान है।
  4. मानसून भारत के अधिकांश भागों को एक व्यापक मौसमी चक्र से जोड़ता है।

प्रश्न 31. “जैसलमेर की वार्षिक वर्षा शायद ही कभी 12 सेंटीमीटर से अधिक होती है।” कारण बताइए।

उत्तर: जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान में स्थित है और थार मरुस्थल का भाग है। अरब सागर की मानसूनी पवनें अरावली पर्वतमाला के लगभग समानांतर चलती हैं, इसलिए यहाँ प्रभावी पर्वतीय वर्षा नहीं हो पाती। बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा भी यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते काफी नमी खो देती है।

इसके अतिरिक्त जैसलमेर समुद्र से बहुत दूर है। इसलिए समुद्री नमी का प्रभाव भी कम है। इन कारणों से यहाँ वर्षा बहुत कम और अनिश्चित रहती है।

प्रश्न 32. दक्षिण-पश्चिम मानसून में वर्षा के क्रमभंग की प्रवृत्ति क्यों होती है?

उत्तर: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा लगातार पूरे मौसम में एक समान नहीं होती। कई बार कुछ दिनों या सप्ताहों के लिए वर्षा रुक जाती है। इस अवधि को मानसून ब्रेक या वर्षा का क्रमभंग कहा जाता है।

मानसून गर्त की स्थिति में परिवर्तन, उष्णकटिबंधीय अवदाबों की गतिविधि और वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। लंबे समय तक वर्षा रुकने पर कृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ सकता है।

मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाइए –

  1. शीतकालीन वर्षा के क्षेत्र।
  2. ग्रीष्म ऋतु में पवनों की दिशा।
  3. 50% से अधिक वर्षा की परिवर्तिता वाले क्षेत्र।
  4. जनवरी माह में 15° सेल्सियस से कम तापमान वाले क्षेत्र।
  5. भारत पर 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा।

1. शीतकालीन वर्षा के क्षेत्र

उत्तर: भारत में शीतकालीन वर्षा मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण होती है। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पूर्वी भारत के कुछ भागों में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण भी शीतकाल में वर्षा होती है।

मानचित्र में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा उत्तर-पश्चिमी भारत के संबंधित क्षेत्रों को दर्शाया जाता है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु, दक्षिणी आंध्र प्रदेश, दक्षिण-पूर्वी कर्नाटक तथा दक्षिण-पूर्वी केरल के क्षेत्रों को भी दर्शाया जा सकता है। पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश और असम को भी स्रोत में शीतकालीन वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

“शीतकालीन वर्षा के क्षेत्र” का मानचित्र

BSEB Class 11 Geography Chapter 4 Climate – भारत में शीतकालीन वर्षा के क्षेत्र (Areas of Winter Rainfall in India)

2. ग्रीष्म ऋतु में पवनों की दिशा

उत्तर: ग्रीष्म ऋतु में भारत में मानसूनी पवनों की दिशा को मानचित्र पर तीरों द्वारा दर्शाया जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की पवनें समुद्र से भारत की ओर आती हैं और भारत के विभिन्न भागों में वर्षा कराती हैं।

मानचित्र में अरब सागर शाखा तथा बंगाल की खाड़ी शाखा की दिशा को स्पष्ट तीरों द्वारा दिखाएँ। अध्याय के संदर्भ में ऊपरी वायुमंडल में ग्रीष्मकालीन पवनों की दिशा को भी मानचित्र पर दर्शाया जाता है।

“ग्रीष्म ऋतु में पवनों की दिशा” का मानचित्र

BSEB Class 11 Geography Chapter 4 Climate – ग्रीष्म ऋतु में पवनों की दिशा (Wind Direction During Summer)

3. 50% से अधिक वर्षा की परिवर्तिता वाले क्षेत्र

उत्तर: वर्षा की परिवर्तिता का अर्थ है किसी स्थान पर वर्ष-दर-वर्ष होने वाली वर्षा में परिवर्तन। भारत में 50% से अधिक वर्षा की परिवर्तिता मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा कम होती है।

मानचित्र में मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान, जम्मू-कश्मीर के उत्तरी भाग तथा दक्कन के पठार के आंतरिक भागों को 50% से अधिक वर्षा की परिवर्तिता वाले क्षेत्रों के रूप में दर्शाएँ।

इन क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा में वर्ष-दर-वर्ष अधिक उतार-चढ़ाव होता है। इसलिए यहाँ वर्षा की अनिश्चितता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

“50% से अधिक वर्षा की परिवर्तिता वाले क्षेत्र” का मानचित्र

BSEB Class 11 Geography Chapter 4 Climate – 50% से अधिक वर्षा की परिवर्तिता वाले क्षेत्र (Areas Having More Than 50% Rainfall Variability)

4. जनवरी माह में 15° सेल्सियस से कम तापमान वाले क्षेत्र

उत्तर: जनवरी भारत में शीत ऋतु का प्रमुख महीना है। इस समय तापमान उत्तर से दक्षिण की ओर सामान्यतः बढ़ता है। इसलिए जनवरी में 15°C से कम तापमान वाले क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तरी भारत तथा हिमालय से लगे क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

मानचित्र में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा उत्तरी मैदान के अपेक्षाकृत ठंडे भागों को 15°C से कम तापमान वाले क्षेत्र के रूप में दर्शाया जाता है। मानचित्र में तापमान की सीमा को स्पष्ट रंग या shading से दिखाएँ।

“जनवरी में 15°C से कम तापमान वाले क्षेत्र” का मानचित्र

BSEB Class 11 Geography Chapter 4 Climate – जनवरी में 15°C से कम तापमान वाले क्षेत्र (Areas Having Less Than 15°C Temperature in January)

5. भारत पर 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा

उत्तर: समवर्षा रेखा (Isohyet) वह रेखा है जो समान मात्रा में प्राप्त वर्षा वाले स्थानों को जोड़ती है। भारत के मानचित्र पर 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा को एक स्पष्ट रेखा द्वारा दर्शाया जाता है।

मानचित्र में 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा को अन्य वर्षा क्षेत्रों से अलग दिखाने के लिए एक स्पष्ट और निरंतर रेखा का प्रयोग करें तथा उसके पास 100 cm लिखें।

“भारत पर 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा” का मानचित्र

BSEB Class 11 Geography Chapter 4 Climate – भारत पर 100 सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा (100 cm Isohyet Over India)

मानचित्र कार्य को याद रखने की आसान विधि

क्रममानचित्र में क्या दिखाना है?मुख्य संकेत
1शीतकालीन वर्षाक्षेत्र को shading से दिखाएँ
2ग्रीष्म ऋतु की पवन दिशातीर (Arrows) लगाएँ
350% से अधिक वर्षा की परिवर्तिताअलग shading/pattern
4जनवरी में 15°C से कम तापमानठंडे क्षेत्र को shading
5100 cm समवर्षा रेखाएक स्पष्ट रेखा + 100 cm

नोट: मानचित्र बनाते समय प्रत्येक मानचित्र में अलग-अलग संकेत (Legend) रखें, ताकि विद्यार्थी आसानी से समझ सके कि shading, line या arrow का क्या अर्थ है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. “व्यापक जलवायविक एकता के होते हुए भी भारत की जलवायु में प्रादेशिक स्वरूप पाए जाते हैं।” इस कथन की पुष्टि उपयुक्त उदाहरण देते हुए कीजिए।

उत्तर: भारत की जलवायु का मूल स्वरूप मानसूनी है। मानसून की मौसमी पवनें देश के बड़े भाग को एक समान मौसमी चक्र से जोड़ती हैं। मानसून का आगमन, वर्षा ऋतु, मानसून की वापसी और शुष्क ऋतु जैसी घटनाएँ देश के अधिकांश भागों को प्रभावित करती हैं। इसी कारण भारतीय जलवायु में एक व्यापक एकता दिखाई देती है।

लेकिन भारत का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है और यहाँ अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, पर्वत तथा धरातलीय स्वरूप में काफी विविधता है। इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और वर्षा की दशाएँ अलग हो जाती हैं।

उदाहरण के लिए राजस्थान के पश्चिमी भाग में गर्मी के दौरान तापमान बहुत अधिक और वर्षा बहुत कम रहती है। दूसरी ओर मेघालय में पर्वतीय परिस्थितियों के कारण अत्यधिक वर्षा होती है। दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में समुद्र के प्रभाव से तापमान में वार्षिक अंतर कम रहता है, जबकि उत्तर-पश्चिमी भारत में गर्मी और सर्दी का अंतर अधिक स्पष्ट है।

इसी प्रकार हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों में हिमपात होता है, जबकि दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है। तमिलनाडु को उत्तर-पूर्वी मानसून से महत्वपूर्ण वर्षा मिलती है, जबकि उत्तर-पश्चिमी भारत में पश्चिमी विक्षोभ शीतकालीन वर्षा कराते हैं।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि मानसून भारत को जलवायविक एकता देता है, जबकि भौगोलिक परिस्थितियाँ उसमें प्रादेशिक विविधता उत्पन्न करती हैं।

प्रश्न 2. मानसूनी वर्षा की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए और देश की कृषि अर्थव्यवस्था में इसका महत्व बताइए।

उत्तर: भारतीय मानसूनी वर्षा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका मौसमी स्वरूप है। भारत की अधिकांश वार्षिक वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान होती है। लेकिन वर्षा की मात्रा, समय और वितरण पूरे देश में समान नहीं है।

मानसूनी वर्षा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. मौसमी वर्षा: अधिकांश वर्षा कुछ महीनों में केंद्रित रहती है।
  2. अनिश्चितता: मानसून कभी समय से पहले या देर से आ सकता है तथा वर्षा की मात्रा में भी अंतर होता है।
  3. असमान वितरण: मेघालय और पश्चिमी तट जैसे क्षेत्रों में बहुत अधिक वर्षा होती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में बहुत कम।
  4. मूसलाधार वर्षा: कम अवधि में बहुत अधिक वर्षा होने से बाढ़ और मिट्टी के कटाव की समस्या पैदा हो सकती है।
  5. वर्षा का क्रमभंग: मानसून के दौरान कुछ दिनों के लिए वर्षा रुक सकती है।
  6. वृष्टि-छाया: पर्वतों के विमुख ढाल वाले क्षेत्रों में वर्षा कम हो सकती है।

भारतीय कृषि मानसून पर काफी निर्भर है। समय पर और पर्याप्त वर्षा होने पर बुआई, फसल वृद्धि और उत्पादन अच्छा रहता है। कम वर्षा से सूखा और फसल नुकसान हो सकता है, जबकि अत्यधिक वर्षा से बाढ़ और जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए मानसून का भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 3. भारत की जलवायु किन-किन तत्वों पर निर्भर है?

उत्तर: भारत की जलवायु अनेक भौगोलिक और वायुमंडलीय तत्वों के संयुक्त प्रभाव से बनती है। प्रमुख तत्व इस प्रकार हैं:

1. मानसूनी पवनें: भारत की जलवायु की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मानसूनी पवनों का मौसमी परिवर्तन है। इन्हीं पवनों से देश के बड़े भाग में वर्षा होती है।

2. अक्षांशीय विस्तार: कर्क रेखा भारत के मध्य भाग से गुजरती है। इसलिए दक्षिण और उत्तर भारत में तापमान तथा ऋतुओं की प्रकृति में अंतर मिलता है।

3. हिमालय: हिमालय मध्य एशिया से आने वाली ठंडी हवाओं के प्रभाव को सीमित करता है और मानसूनी पवनों के मार्ग को प्रभावित करता है।

4. हिंद महासागर से स्थिति: भारत के दक्षिण में विशाल हिंद महासागर होने के कारण समुद्री पवनों और मानसून का प्रभाव भारत पर पड़ता है।

5. चक्रवाती प्रणालियाँ: पश्चिमी विक्षोभ और उष्णकटिबंधीय चक्रवात वर्षा तथा मौसम की दशाओं को प्रभावित करते हैं।

6. धरातलीय स्वरूप: पश्चिमी घाट और हिमालय जैसे पर्वत पवनों के मार्ग और वर्षा के वितरण को प्रभावित करते हैं।

7. समुद्र से दूरी: तटीय क्षेत्रों में समुद्र तापमान को नियंत्रित करता है, जबकि आंतरिक क्षेत्रों में तापमान का वार्षिक अंतर अधिक हो सकता है।

इन सभी तत्वों के कारण भारत की जलवायु में एक साथ मानसूनी एकता और क्षेत्रीय विविधता दिखाई देती है।

प्रश्न 4. मौसम के अनुसार भारत में कितनी ऋतुएँ पाई जाती हैं? किसी एक ऋतु का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत में सामान्यतः चार प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं:

  1. शीत ऋतु
  2. ग्रीष्म ऋतु
  3. दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा ऋतु
  4. मानसून की वापसी की ऋतु

शीत ऋतु: शीत ऋतु में उत्तर भारत में तापमान कम हो जाता है। जनवरी और फरवरी सामान्यतः ठंडे महीने होते हैं। उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायुदाब की स्थिति विकसित होती है और पवनें सामान्यतः स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं।

इस ऋतु में अधिकांश भारत में मौसम शुष्क रहता है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिमी भारत में वर्षा हो सकती है। यह वर्षा गेहूँ जैसी रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।

तमिलनाडु और दक्षिण-पूर्वी तट के कुछ भागों में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण वर्षा होती है। दक्षिण भारत में समुद्र की निकटता और उष्णकटिबंधीय स्थिति के कारण सर्दी उत्तर भारत की तुलना में कम कठोर होती है।

प्रश्न 5. भारतीय मौसम रचना तंत्र का वर्णन जेट प्रवाह के संदर्भ में कीजिए।

उत्तर: भारतीय मौसम रचना तंत्र को समझने के लिए धरातलीय वायुदाब, पवनों, ऊपरी वायु परिसंचरण, वायु राशियों, पश्चिमी विक्षोभ, उष्णकटिबंधीय अवदाब और जेट प्रवाह को समझना आवश्यक है।

शीत ऋतु में एशिया के आंतरिक भागों में उच्च वायुदाब की स्थिति रहती है। इससे ठंडी और शुष्क हवाएँ भारतीय उपमहाद्वीप की ओर प्रभावित होती हैं। इसी मौसम में पश्चिमी विक्षोभ पश्चिम से भारत की ओर आते हैं और उत्तर-पश्चिमी भागों में वर्षा कर सकते हैं।

गर्मी में स्थल भाग अधिक गर्म होता है और वायुदाब की स्थिति बदलती है। उत्तर-पश्चिमी भारत में निम्न वायुदाब विकसित होता है। इससे समुद्र से स्थल की ओर नम पवनों का प्रवाह बढ़ता है और दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय होता है।

जेट प्रवाह ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज वायु धाराएँ हैं। पश्चिमी जेट प्रवाह शीतकालीन पश्चिमी विक्षोभों की गति से जुड़ा है। गर्मियों में ऊपरी वायु परिसंचरण में परिवर्तन मानसूनी परिसंचरण को प्रभावित करता है। इसलिए जेट प्रवाह भारतीय मौसम प्रणाली को समझने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रश्न 6. थार्नवेट द्वारा भारत के विभाजित जलवायु प्रदेशों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: थार्नवेट की जलवायु वर्गीकरण पद्धति मुख्य रूप से जल संतुलन की अवधारणा पर आधारित है। इसमें वर्षा, तापमान और वाष्पोत्सर्जन जैसी दशाओं का उपयोग करके यह समझा जाता है कि किसी क्षेत्र में जल की अधिकता है या कमी।

इस दृष्टिकोण से भारत में विभिन्न प्रकार के आर्द्र और शुष्क जलवायु प्रदेशों की पहचान की जाती है। सामान्य रूप से अत्यधिक आर्द्र क्षेत्रों में पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर भारत के कुछ भाग शामिल किए जाते हैं। आर्द्र प्रदेशों का विस्तार पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत में मिलता है।

गंगा घाटी और मध्य भारत के कुछ भागों में उप-आर्द्र दशाएँ मिलती हैं। प्रायद्वीपीय आंतरिक भागों और उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ क्षेत्रों में अर्द्ध-शुष्क दशाएँ पाई जाती हैं। राजस्थान के मरुस्थल तथा कच्छ-सौराष्ट्र क्षेत्र में शुष्क जलवायु की विशेषताएँ दिखाई देती हैं।

इस प्रकार थार्नवेट का वर्गीकरण केवल तापमान देखने के बजाय किस क्षेत्र में कितना जल उपलब्ध है और कितना जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा बाहर जा रहा है, इस संबंध को समझने में सहायता करता है।

अध्याय 4 – महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न

  • भारतीय मानसून की प्रमुख विशेषताओं को समझाइए।
  • भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विविधता के कारण बताइए।
  • मानसून प्रस्फोट क्या है?
  • ITCZ क्या है और इसका मानसून में क्या महत्व है?
  • पश्चिमी विक्षोभ क्या है?
  • जेट प्रवाह भारतीय मौसम को किस प्रकार प्रभावित करता है?
  • भारत में शीतकालीन वर्षा के कारण बताइए।
  • तमिलनाडु में शीतकालीन वर्षा क्यों होती है?
  • राजस्थान का पश्चिमी भाग शुष्क क्यों है?
  • भारत में वर्षा का असमान वितरण क्यों पाया जाता है?
  • वृष्टि-छाया क्षेत्र क्या है? उदाहरण दीजिए।
  • लू और शीत लहर में अंतर बताइए।
  • भारतीय जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की व्याख्या कीजिए।
  • मानसूनी वर्षा का भारतीय कृषि में क्या महत्व है?
  • एल-नीनो का भारतीय मानसून पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
  • कोपेन की जलवायु वर्गीकरण पद्धति समझाइए।
  • थार्नवेट की जलवायु वर्गीकरण पद्धति की विशेषताएँ बताइए।

अध्याय 4 – जलवायु का त्वरित पुनरावर्तन

  • भारत की प्रमुख जलवायु: मानसूनी जलवायु।
  • मुख्य मानसूनी ऋतु: दक्षिण-पश्चिम मानसून।
  • तमिलनाडु की महत्वपूर्ण वर्षा: उत्तर-पूर्वी मानसून।
  • शीतकालीन वर्षा का प्रमुख कारण: पश्चिमी विक्षोभ।
  • गर्म स्थानीय हवा: लू।
  • निम्न वायुदाब का महत्वपूर्ण क्षेत्र: ITCZ।
  • अचानक मानसून की शुरुआत: मानसून प्रस्फोट।
  • अत्यधिक वर्षा का क्षेत्र: मेघालय की खासी पहाड़ियों का क्षेत्र।
  • वृष्टि-छाया का उदाहरण: दक्कन का पठारी भाग।
  • कोपेन के प्रमुख आधार: तापमान और वर्षण।
  • थार्नवेट का प्रमुख आधार: जल संतुलन।

बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल के अन्य अध्याय

भारत-भौतिक पर्यावरण के अन्य अध्यायों की तैयारी के लिए नीचे दिए गए अध्याय भी पढ़ें:

Chapter 1 – भारत-स्थिति

Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Chapter 3 – अपवाह तंत्र

Chapter 5 – प्राकृतिक वनस्पति

Chapter 6 – मृदा

Chapter 7 – प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 4 – जलवायु को केवल प्रश्न-उत्तर याद करके नहीं, बल्कि मानसून की पूरी प्रक्रिया को समझकर पढ़ना चाहिए। भारत की जलवायु को समझने के लिए वायुदाब, पवनों, ITCZ, जेट प्रवाह, पश्चिमी विक्षोभ, मानसून प्रस्फोट, वर्षा का वितरण और ऋतु परिवर्तन को आपस में जोड़कर देखना जरूरी है।

परीक्षा की दृष्टि से विशेष रूप से भारतीय मानसून की विशेषताएँ, भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विविधता, मानसूनी वर्षा का कृषि में महत्व, पश्चिमी विक्षोभ, जेट प्रवाह, तमिलनाडु की शीतकालीन वर्षा, राजस्थान की शुष्कता और जलवायु वर्गीकरण को अच्छी तरह तैयार करें।

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