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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 पृथ्वी की आंतरिक संरचना

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 – पृथ्वी की आंतरिक संरचना में पृथ्वी के अंदर मौजूद विभिन्न परतों, भूकंपीय तरंगों, ज्वालामुखी, भूकंप तथा पृथ्वी के आंतरिक भाग की जानकारी प्राप्त करने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष साधनों का अध्ययन किया जाता है।

पृथ्वी के अंदर सीधे जाकर उसकी पूरी संरचना का अध्ययन करना संभव नहीं है। इसलिए वैज्ञानिक चट्टानों, खनन, ज्वालामुखी, भूकंपीय तरंगों, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय क्षेत्र और उल्काओं जैसे विभिन्न स्रोतों की सहायता से पृथ्वी के आंतरिक भाग का अनुमान लगाते हैं।

इस पोस्ट में Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, MCQ, पृथ्वी की आंतरिक परतें, P-Waves, S-Waves, Surface Waves, भूकंप, ज्वालामुखी तथा परीक्षा उपयोगी प्रश्नों को सरल भाषा में समझाया गया है।

Table of Contents

पृथ्वी की आंतरिक संरचना – परिचय

पृथ्वी की बाहरी सतह हमें दिखाई देती है, लेकिन इसके नीचे अत्यंत गहराई तक अलग-अलग प्रकार के पदार्थ और परतें मौजूद हैं। तापमान, दबाव, घनत्व तथा पदार्थों की प्रकृति गहराई के साथ बदलती जाती है।

पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के साधनों का उपयोग किया है। इनमें भूकंपीय तरंगें सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष साधनों में से एक हैं।

पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी के साधन

पृथ्वी के अंदर की जानकारी प्राप्त करने वाले साधनों को मुख्य रूप से दो वर्गों में रखा जा सकता है:

  1. प्रत्यक्ष साधन
  2. अप्रत्यक्ष साधन

प्रत्यक्ष साधन

वे साधन जिनसे पृथ्वी के पदार्थों को सीधे प्राप्त करके उनका अध्ययन किया जा सकता है, प्रत्यक्ष साधन कहलाते हैं।

  • खनन से प्राप्त चट्टानें
  • कुएँ
  • गहरे छिद्र या बोरिंग
  • ज्वालामुखी से बाहर निकलने वाला पदार्थ

अप्रत्यक्ष साधन

पृथ्वी के बहुत गहरे भाग तक सीधे पहुँचना कठिन है। इसलिए वैज्ञानिक कुछ भौतिक घटनाओं और उनके प्रभावों का अध्ययन करके आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

  • तापमान
  • दबाव
  • घनत्व
  • भूकंपीय तरंगें
  • गुरुत्वाकर्षण
  • चुंबकीय क्षेत्र
  • उल्काएँ

भूकंपीय तरंगें

भूकंप के दौरान पृथ्वी के अंदर ऊर्जा मुक्त होने से तरंगें उत्पन्न होती हैं। ये तरंगें पृथ्वी के विभिन्न भागों से होकर गुजरती हैं। इनके वेग और दिशा में होने वाले परिवर्तन का अध्ययन करके पृथ्वी के अंदर मौजूद विभिन्न परतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

भूकंपीय तरंगों के प्रमुख प्रकार

भूकंपीय तरंगों को सामान्य रूप से तीन प्रमुख वर्गों में समझा जाता है:

  1. P या प्राथमिक तरंगें
  2. S या द्वितीयक तरंगें
  3. धरातलीय तरंगें

P तरंगें

P तरंगों को प्राथमिक या अनुदैर्ध्य तरंगें कहा जाता है। इनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं। ये ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं।

भूकंपीय तरंगों में P तरंगों का वेग सबसे अधिक होता है। इसलिए भूकंप के समय ये अन्य प्रमुख तरंगों से पहले दर्ज की जाती हैं।

S तरंगें

S तरंगों को द्वितीयक या अनुप्रस्थ तरंगें कहा जाता है। इनमें माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। ये द्रव माध्यम से होकर नहीं गुजर सकतीं और मुख्यतः ठोस पदार्थों में संचरित होती हैं।

इसी विशेषता के कारण S तरंगों का अध्ययन पृथ्वी के क्रोड की अवस्था समझने में बहुत उपयोगी है।

धरातलीय तरंगें

धरातलीय तरंगें पृथ्वी की सतह के आसपास अधिक प्रभाव डालती हैं। इनका प्रभाव धरातल पर काफी विनाशकारी हो सकता है। ये P और S तरंगों की तुलना में धीमी होती हैं।

भूकंपीय छाया क्षेत्र

भूकंप से उत्पन्न तरंगें पृथ्वी के अंदर अलग-अलग पदार्थों से होकर गुजरते समय अपनी गति और दिशा बदल सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में विशेष प्रकार की भूकंपीय तरंगें सीधे दर्ज नहीं होतीं। ऐसे क्षेत्रों को भूकंपीय छाया क्षेत्र (Shadow Zone) कहा जाता है।

छाया क्षेत्रों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को पृथ्वी के अंदर विभिन्न परतों की प्रकृति तथा उनके बीच की सीमाओं के बारे में जानकारी मिलती है।

पृथ्वी की प्रमुख आंतरिक परतें

पृथ्वी की आंतरिक संरचना को सामान्य रूप से तीन प्रमुख भागों में समझा जाता है:

  1. भूपर्पटी (Crust)
  2. मैंटल (Mantle)
  3. क्रोड (Core)
परतमुख्य विशेषता
भूपर्पटीपृथ्वी की सबसे बाहरी और अपेक्षाकृत पतली ठोस परत
मैंटलभूपर्पटी के नीचे स्थित बहुत मोटी परत
क्रोडपृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग, जिसमें मुख्यतः भारी धातुओं की प्रधानता है

भूपर्पटी

भूपर्पटी पृथ्वी की सबसे बाहरी ठोस परत है। महाद्वीपीय और महासागरीय क्षेत्रों की भूपर्पटी की मोटाई तथा संरचना में अंतर पाया जाता है। महाद्वीपीय भूपर्पटी सामान्यतः अधिक मोटी होती है, जबकि महासागरीय भूपर्पटी अपेक्षाकृत पतली होती है।

भूपर्पटी में विभिन्न प्रकार की चट्टानें पाई जाती हैं और यही वह परत है जिस पर मानव जीवन, अधिकांश स्थलरूप और जैविक गतिविधियाँ स्थित हैं।

मैंटल

मैंटल भूपर्पटी के नीचे स्थित पृथ्वी की बहुत मोटी परत है। इसमें उच्च तापमान और दबाव की स्थिति पाई जाती है। मैंटल का ऊपरी भाग पृथ्वी की प्लेटों की गति तथा कई अंतर्जात प्रक्रियाओं से संबंधित है।

दुर्बलतामंडल (Asthenosphere)

ऊपरी मैंटल का एक ऐसा भाग जहाँ पदार्थ अपेक्षाकृत अधिक लचीला होता है और भूकंपीय तरंगों के वेग में कमी देखी जा सकती है, दुर्बलतामंडल कहलाता है। यह पृथ्वी की प्लेटों की गति को समझने में महत्वपूर्ण अवधारणा है।

क्रोड

क्रोड पृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग है। इसमें भारी धातुओं, विशेषकर लोहा और निकिल, की प्रधानता मानी जाती है। क्रोड को बाह्य क्रोड और आंतरिक क्रोड में विभाजित किया जाता है।

बाह्य क्रोड की अवस्था द्रव मानी जाती है, जबकि अत्यधिक दबाव के कारण आंतरिक क्रोड ठोस अवस्था में माना जाता है।

सियाल, सीमा और निफे

पारंपरिक भूगोल में पृथ्वी की संरचना को समझाने के लिए सियाल (Sial), सीमा (Sima) और निफे (Nife) जैसे शब्दों का भी उपयोग किया जाता है।

नामअर्थमुख्य तत्व
SialSilica + Aluminiumसिलिका और एल्युमिनियम
SimaSilica + Magnesiumसिलिका और मैग्नीशियम
NifeNickel + Ferrousनिकिल और लोहा

पृथ्वी के आंतरिक भाग का तापमान

पृथ्वी की गहराई बढ़ने के साथ सामान्यतः तापमान में वृद्धि होती है। ज्वालामुखी गतिविधि, गर्म जल के स्रोत, गहरे खनन क्षेत्रों और गहरे कुओं के अध्ययन से पृथ्वी के आंतरिक भाग में अत्यधिक तापमान होने का संकेत मिलता है।

विद्यालयी पाठ्यक्रम में सामान्यतः सतह के निकट गहराई बढ़ने पर औसत तापमान वृद्धि की दर लगभग 1°C प्रति 32 मीटर बताई जाती है। वास्तविक तापमान वृद्धि पृथ्वी के अलग-अलग भागों में समान नहीं होती।

उल्काएँ पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में कैसे बताती हैं?

उल्काएँ सौरमंडल के निर्माण से संबंधित पदार्थों के नमूने मानी जाती हैं। इनके अध्ययन से वैज्ञानिकों को उन पदार्थों के बारे में जानकारी मिलती है जिनसे ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया जुड़ी हुई है।

उल्काओं में लोहे और निकिल जैसे भारी तत्व पाए जाते हैं। इसलिए इनके अध्ययन से पृथ्वी के भारी आंतरिक भाग, विशेषकर क्रोड, की संरचना के बारे में अनुमान लगाने में सहायता मिलती है।

गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्र

पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण का मान हर स्थान पर बिल्कुल समान नहीं होता। पदार्थों के वितरण और पृथ्वी की आंतरिक संरचना में अंतर के कारण गुरुत्वीय मान में क्षेत्रीय परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। इन्हें गुरुत्वीय विसंगति (Gravity Anomaly) के अध्ययन से समझा जाता है।

इसी प्रकार चुंबकीय सर्वेक्षण पृथ्वी की ऊपरी परतों में चुंबकीय पदार्थों के वितरण के बारे में जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

सिस्मोग्राफ क्या है?

सिस्मोग्राफ वह उपकरण है जिसका उपयोग भूकंपीय कंपन और तरंगों को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। इससे भूकंप की तरंगों के आगमन का समय, उनके स्वरूप तथा अन्य भूकंपीय विशेषताओं का अध्ययन किया जा सकता है।

ज्वालामुखी

ज्वालामुखी पृथ्वी की आंतरिक ऊर्जा से संबंधित एक महत्वपूर्ण अंतर्जात प्रक्रिया है। जब पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म पदार्थ, गैस और मैग्मा किसी प्राकृतिक मार्ग या दरार से धरातल की ओर निकलते हैं, तो ज्वालामुखीय गतिविधि होती है।

मैग्मा और लावा

मैग्मा पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म, पिघला हुआ पदार्थ है। जब यही पदार्थ धरातल पर पहुँचकर बाहर निकलता है, तो उसे लावा कहा जाता है।

मैग्मालावा
पृथ्वी के अंदर पाया जाता है।धरातल पर बाहर निकलने के बाद मैग्मा को लावा कहा जाता है।
इसमें घुली हुई गैसें हो सकती हैं।बाहर निकलने पर दबाव घटने से गैसों का व्यवहार बदल सकता है।

ज्वालामुखी के प्रमुख भाग

  • ज्वालामुखीय नली: वह मार्ग जिससे मैग्मा ऊपर की ओर आता है।
  • मुख या विवर: ज्वालामुखी के ऊपरी भाग का वह स्थान जहाँ से पदार्थ बाहर निकलता है।
  • ज्वालामुखीय शंकु: लावा और अन्य ज्वालामुखीय पदार्थों के जमने से बना शंक्वाकार ऊँचा भाग।
  • काल्डेरा: बड़े आकार का ज्वालामुखीय गर्त, जो बड़े विस्फोट या ज्वालामुखी के ऊपरी भाग के धँसने से बन सकता है।

ज्वालामुखियों के प्रकार

1. सक्रिय ज्वालामुखी

वे ज्वालामुखी जिनमें वर्तमान समय में या हाल के समय में उद्गार की गतिविधि देखी गई है तथा जिनके फिर सक्रिय होने की संभावना रहती है, सक्रिय ज्वालामुखी कहलाते हैं। भारत का बैरन द्वीप सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र का उदाहरण है।

2. प्रसुप्त ज्वालामुखी

वे ज्वालामुखी जो लंबे समय तक शांत रह सकते हैं लेकिन भविष्य में फिर से सक्रिय हो सकते हैं, प्रसुप्त ज्वालामुखी कहलाते हैं।

3. मृत या विलुप्त ज्वालामुखी

ऐसे ज्वालामुखी जिनके दोबारा सक्रिय होने की संभावना अत्यंत कम या नगण्य मानी जाती है, मृत या विलुप्त ज्वालामुखी कहलाते हैं।

ज्वालामुखी के उद्गार के प्रकार

ज्वालामुखीय पदार्थ दो प्रमुख प्रकार के मार्गों से बाहर निकल सकते हैं:

  • केंद्रीय उद्गार: पदार्थ किसी एक प्रमुख मुख या छिद्र से बाहर निकलता है।
  • दरारी उद्गार: मैग्मा लंबी दरारों या विस्तृत भ्रंशों से होकर बाहर आ सकता है।

ज्वालामुखी का महत्व

ज्वालामुखी केवल विनाशकारी प्राकृतिक घटना नहीं है। लंबे समय में ज्वालामुखीय पदार्थों से उपजाऊ मिट्टी का निर्माण हो सकता है। ज्वालामुखीय क्षेत्रों में कुछ खनिज संसाधन और भू-तापीय ऊर्जा की संभावनाएँ भी पाई जाती हैं।

भूकंप

पृथ्वी के धरातल या उसके अंदर होने वाली अचानक कंपन की घटना को भूकंप कहा जाता है। भूकंप के दौरान ऊर्जा का अचानक मुक्त होना भूकंपीय तरंगों को जन्म देता है, जो पृथ्वी के विभिन्न भागों में फैलती हैं।

उद्गम केंद्र (Focus)

पृथ्वी के अंदर वह स्थान जहाँ से भूकंप की ऊर्जा और तरंगों का आरंभ होता है, उद्गम केंद्र या Focus कहलाता है।

अधिकेंद्र (Epicentre)

उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र या Epicentre कहा जाता है। अधिकेंद्र के आसपास भूकंप का प्रभाव कई परिस्थितियों में अधिक महसूस किया जा सकता है।

भूकंप के प्रमुख कारण

  • विवर्तनिक प्लेटों की गति और चट्टानों में तनाव
  • ज्वालामुखीय गतिविधि
  • भूमिगत धँसाव या खनन से जुड़ी गतिविधियाँ
  • बड़े विस्फोट
  • कुछ क्षेत्रों में मानव गतिविधियों से प्रेरित भूकंपीय हलचल

भूकंप के प्रकार

विवर्तनिक भूकंप

प्लेटों की गति, भ्रंश और चट्टानों में जमा तनाव के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न भूकंप को विवर्तनिक भूकंप कहा जाता है। अधिकांश बड़े भूकंप इसी प्रकार के होते हैं।

ज्वालामुखीय भूकंप

ज्वालामुखीय गतिविधियों और मैग्मा की गति से जुड़े भूकंप ज्वालामुखीय भूकंप कहलाते हैं।

धँसाव या Collapse भूकंप

भूमिगत गुफाओं या खनन क्षेत्रों की छत के अचानक गिरने से उत्पन्न छोटे भूकंपीय झटकों को धँसाव भूकंप कहा जा सकता है।

विस्फोटजनित भूकंप

बड़े विस्फोटों के कारण उत्पन्न भूकंपीय कंपन को विस्फोटजनित भूकंप कहा जाता है।

प्रशान्त महासागरीय पेटी और अग्नि वलय

प्रशान्त महासागर के चारों ओर स्थित क्षेत्र में बड़ी संख्या में सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंपीय गतिविधियाँ पाई जाती हैं। यह क्षेत्र लगभग घोड़े की नाल जैसी संरचना में फैला हुआ है और इसी कारण इसे सामान्यतः प्रशान्त अग्नि वलय (Ring of Fire) कहा जाता है।

सुनामी

समुद्र के अंदर होने वाले बड़े भूकंप, ज्वालामुखीय विस्फोट या समुद्रतल में अचानक विस्थापन के कारण समुद्र में अत्यधिक लंबी तरंगों की श्रृंखला उत्पन्न हो सकती है। तट के पास पहुँचने पर इनकी ऊँचाई काफी बढ़ सकती है। ऐसी विनाशकारी समुद्री तरंगों को सुनामी कहा जाता है।

26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आए शक्तिशाली समुद्री भूकंप से उत्पन्न सुनामी ने भारत सहित कई देशों के तटीय क्षेत्रों में भारी जन-धन की हानि की थी।

भूकंपीय तरंगों और पृथ्वी की आंतरिक संरचना का संबंध

भूकंपीय तरंगों के वेग, दिशा और उनके पृथ्वी की विभिन्न परतों से गुजरने के तरीके का अध्ययन करके वैज्ञानिक पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अनुमान लगाते हैं।

यदि किसी तरंग का वेग अचानक बदलता है या उसकी दिशा मुड़ती है, तो इससे यह संकेत मिल सकता है कि वह किसी अलग भौतिक गुण वाली परत में प्रवेश कर रही है। इसी प्रकार S तरंगों का द्रव माध्यम से न गुजरना बाह्य क्रोड की द्रव अवस्था के प्रमाणों में महत्वपूर्ण है।

अति लघु उत्तरीय महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. पृथ्वी की संरचना की जानकारी के प्रत्यक्ष साधन बताएं।

उत्तर: खनन से प्राप्त चट्टानें, गहरे कुएँ तथा पृथ्वी में किए गए गहरे छिद्र प्रत्यक्ष साधनों के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 2. धात्विक क्रोड के दो प्रमुख पदार्थ बताएँ।

उत्तर: लोहा और निकिल।

प्रश्न 3. भूकम्पीय तरंगों के प्रकार बताइए।

उत्तर: प्राथमिक या P तरंगें, द्वितीयक या S तरंगें तथा धरातलीय तरंगें।

प्रश्न 4. पृथ्वी के अंदर पिघले पदार्थ को क्या कहते हैं?

उत्तर: पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म और पिघले हुए पदार्थ को मैग्मा कहा जाता है।

प्रश्न 5. जब मैग्मा धरातल पर आ जाता है तो उसे क्या कहते हैं?

उत्तर: धरातल पर निकलने के बाद मैग्मा को लावा कहा जाता है।

प्रश्न 6. सबसे धीमी गति वाली प्रमुख भूकंपीय तरंग कौन-सी है?

उत्तर: धरातलीय तरंगें।

प्रश्न 7. पृथ्वी के केंद्रीय भाग को क्या कहते हैं?

उत्तर: केंद्रीय भाग को क्रोड (Core) कहा जाता है।

प्रश्न 8. Nife शब्द किन शब्दों से बना है?

उत्तर: Nickel और Ferrous शब्दों से मिलकर Nife शब्द बना है।

प्रश्न 9. Sima शब्द किन शब्दों से बना है?

उत्तर: Silica और Magnesium से Sima शब्द बना है।

प्रश्न 10. Sial शब्द किन शब्दों से बना है?

उत्तर: Silica और Aluminium से Sial शब्द बना है।

प्रश्न 11. भूकंप का उद्गम केंद्र क्या है?

उत्तर: पृथ्वी के अंदर वह स्थान जहाँ से भूकंप की ऊर्जा और भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, उद्गम केंद्र कहलाता है।

प्रश्न 12. अधिकेंद्र क्या है?

उत्तर: उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र कहा जाता है।

प्रश्न 13. भारत का सक्रिय ज्वालामुखी कौन-सा है?

उत्तर: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का बैरन द्वीप भारत का सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र है।

प्रश्न 14. ज्वालामुखियों के तीन प्रकार कौन-से हैं?

उत्तर: सक्रिय, प्रसुप्त और मृत/विलुप्त ज्वालामुखी।

प्रश्न 15. सिस्मोग्राफ किस काम आता है?

उत्तर: सिस्मोग्राफ भूकंपीय कंपन और तरंगों को रिकॉर्ड करने के लिए उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 16. काल्डेरा क्या है?

उत्तर: बड़े आकार के ज्वालामुखीय गर्त को काल्डेरा कहा जाता है। यह बड़े विस्फोट या ज्वालामुखीय संरचना के धँसने से बन सकता है।

प्रश्न 17. भूकंप क्या है?

उत्तर: पृथ्वी के अंदर ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न धरातलीय कंपन को भूकंप कहा जाता है।

प्रश्न 18. विश्व में अधिकांश ज्वालामुखी किस पेटी में पाए जाते हैं?

उत्तर: प्रशान्त महासागरीय पेटी में बड़ी संख्या में ज्वालामुखी पाए जाते हैं।

प्रश्न 19. सुनामी क्या है?

उत्तर: समुद्रतल में अचानक विस्थापन के कारण उत्पन्न अत्यधिक लंबी और शक्तिशाली समुद्री तरंगों की श्रृंखला को सुनामी कहा जाता है।

प्रश्न 20. कौन-सी तरंगें केवल ठोस माध्यम में संचरित होती हैं?

उत्तर: S या अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोस माध्यम से होकर गुजर सकती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. गुरुमंडल से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: गुरुमंडल शब्द का उपयोग पृथ्वी के केंद्रीय और अत्यधिक घनत्व वाले भाग के लिए किया जाता है। आधुनिक वैज्ञानिक वर्गीकरण में इस क्षेत्र को क्रोड कहा जाता है। इसमें भारी तत्वों, विशेषकर लोहा और निकिल, की प्रधानता मानी जाती है।

प्रश्न 2. ज्वालामुखी किसे कहते हैं? इसके प्रमुख भाग बताइए।

उत्तर: पृथ्वी के अंदर से मैग्मा, गैस, राख और अन्य ज्वालामुखीय पदार्थों के धरातल पर निकलने की प्रक्रिया तथा उससे बनी संरचना को ज्वालामुखी से संबंधित माना जाता है। इसके प्रमुख भागों में मैग्मा कक्ष, ज्वालामुखीय नली, मुख या विवर तथा ज्वालामुखीय शंकु शामिल हैं।

प्रश्न 3. ज्वालामुखियों के तीन प्रकारों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: ज्वालामुखियों को उनकी गतिविधि के आधार पर तीन वर्गों में रखा जाता है। सक्रिय ज्वालामुखी में उद्गार की गतिविधि वर्तमान या हाल के समय में देखी जाती है। प्रसुप्त ज्वालामुखी लंबे समय तक शांत रह सकता है, लेकिन भविष्य में सक्रिय हो सकता है। मृत या विलुप्त ज्वालामुखी के फिर सक्रिय होने की संभावना बहुत कम मानी जाती है।

प्रश्न 4. उल्काएँ पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में कैसे जानकारी देती हैं?

उत्तर: उल्काएँ सौरमंडल के निर्माण से संबंधित पदार्थों के नमूने मानी जाती हैं। इनमें पाए जाने वाले तत्वों और खनिजों का अध्ययन करके वैज्ञानिक पृथ्वी के निर्माण में शामिल पदार्थों के बारे में अनुमान लगाते हैं। लोहे और निकिल की उपस्थिति पृथ्वी के भारी क्रोड की संरचना समझने में उपयोगी है।

प्रश्न 5. भूकंपीय तरंगों के मुख्य प्रकार और उनकी गति बताइए।

उत्तर: भूकंपीय तरंगों के तीन प्रमुख प्रकार P तरंगें, S तरंगें और धरातलीय तरंगें हैं। P तरंगें सबसे तेज होती हैं और ठोस, द्रव तथा गैस माध्यम से गुजर सकती हैं। S तरंगें उनसे धीमी होती हैं और द्रव में नहीं चलतीं। धरातलीय तरंगें सामान्यतः सबसे धीमी तथा धरातल पर अधिक विनाशकारी होती हैं।

प्रश्न 6. गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की आंतरिक जानकारी कैसे देते हैं?

उत्तर: पृथ्वी के अंदर पदार्थ समान रूप से वितरित नहीं हैं। इस कारण अलग-अलग स्थानों पर गुरुत्वाकर्षण के मान में छोटे परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। इन परिवर्तनों को गुरुत्वीय विसंगति कहा जाता है। इसी प्रकार चुंबकीय सर्वेक्षण से पृथ्वी की ऊपरी परतों में चुंबकीय पदार्थों के वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 7. सिस्मोग्राफ क्या है और इसका उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर: सिस्मोग्राफ एक वैज्ञानिक उपकरण है जो भूकंपीय तरंगों और धरातलीय कंपन को रिकॉर्ड करता है। इसके रिकॉर्ड से भूकंप के समय, तरंगों के आगमन और उनकी विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। इससे भूकंप के उद्गम और पृथ्वी की आंतरिक संरचना के अध्ययन में भी सहायता मिलती है।

प्रश्न 8. दुर्बलतामंडल क्या है?

उत्तर: दुर्बलतामंडल ऊपरी मैंटल का अपेक्षाकृत कमजोर और लचीला भाग है। यहाँ पदार्थ पूर्ण रूप से द्रव नहीं होता, लेकिन उच्च तापमान के कारण वह लंबे समय में धीरे-धीरे प्रवाहित होने जैसा व्यवहार कर सकता है। प्लेटों की गति को समझने में इसका विशेष महत्व है।

प्रश्न 9. अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ तरंगों में अंतर बताइए।

अनुदैर्ध्य तरंगअनुप्रस्थ तरंग
कणों का कंपन तरंग की दिशा के समानांतर होता है।कणों का कंपन तरंग की दिशा के लंबवत होता है।
P तरंगें इसका उदाहरण हैं।S तरंगें इसका उदाहरण हैं।
ठोस, द्रव और गैस में संचरित हो सकती हैं।S तरंगें द्रव माध्यम में संचरित नहीं होतीं।

प्रश्न 10. भूकंप के प्रमुख प्रकार बताइए।

उत्तर: उत्पत्ति के आधार पर भूकंपों में विवर्तनिक, ज्वालामुखीय, धँसाव तथा विस्फोटजनित भूकंप शामिल किए जा सकते हैं। इनमें विवर्तनिक भूकंप सबसे सामान्य और कई बार सबसे अधिक शक्तिशाली होते हैं।

प्रश्न 11. प्रशान्त महासागरीय पेटी को अग्नि वलय क्यों कहा जाता है?

उत्तर: प्रशान्त महासागर के चारों ओर बड़ी संख्या में सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंपीय क्षेत्र पाए जाते हैं। इनकी स्थिति एक विस्तृत वलय या घोड़े की नाल जैसी दिखाई देती है। इसी कारण इस क्षेत्र को Ring of Fire या अग्नि वलय कहा जाता है।

प्रश्न 12. मैग्मा और लावा में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म और पिघला हुआ पदार्थ मैग्मा कहलाता है। जब यही पदार्थ ज्वालामुखीय मुख या दरार से धरातल पर बाहर निकलता है, तो उसे लावा कहा जाता है। इसलिए दोनों में मुख्य अंतर उनके स्थान का है।

प्रश्न 13. सक्रिय और प्रसुप्त ज्वालामुखी में अंतर बताइए।

उत्तर: सक्रिय ज्वालामुखी में वर्तमान या हाल के समय में उद्गार की गतिविधि देखी गई होती है। प्रसुप्त ज्वालामुखी लंबे समय तक शांत रह सकता है, लेकिन उसमें भविष्य में फिर उद्गार होने की संभावना रहती है।

प्रश्न 14. भू-पृष्ठ और क्रोड में अंतर बताइए।

उत्तर: भू-पृष्ठ पृथ्वी की सबसे बाहरी और अपेक्षाकृत पतली परत है, जबकि क्रोड पृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग है। भू-पृष्ठ मुख्यतः विभिन्न चट्टानों से बना है, जबकि क्रोड में भारी तत्वों, विशेषकर लोहा और निकिल, की प्रधानता है।

प्रश्न 15. प्रसुप्त और मृत ज्वालामुखी में अंतर बताइए।

उत्तर: प्रसुप्त ज्वालामुखी वर्तमान में शांत होता है, लेकिन भविष्य में फिर सक्रिय हो सकता है। मृत या विलुप्त ज्वालामुखी को ऐसा ज्वालामुखी माना जाता है जिसके दोबारा सक्रिय होने की संभावना बहुत कम होती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. भूकंपीय तरंगें कौन-कौन सी हैं? इनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए। ये पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी कैसे देती हैं?

उत्तर: भूकंप के दौरान पृथ्वी के अंदर ऊर्जा मुक्त होने से उत्पन्न तरंगों को भूकंपीय तरंगें कहा जाता है। इनके संचरण और वेग में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

P तरंगें सबसे तेज भूकंपीय तरंगें हैं। इनमें कण तरंग की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं। ये ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं।

S तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं। इनमें कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। ये द्रव माध्यम में नहीं गुजर सकतीं।

धरातलीय तरंगें पृथ्वी की सतह के आसपास अधिक प्रभाव डालती हैं और भूकंप के दौरान भारी विनाश का कारण बन सकती हैं।

इन तरंगों के वेग, मार्ग, परावर्तन और अपवर्तन का अध्ययन करके वैज्ञानिक पृथ्वी की अलग-अलग परतों की सीमाओं तथा उनकी भौतिक अवस्था का अनुमान लगाते हैं। S तरंगों के बाह्य क्रोड से होकर न गुजरने से बाह्य क्रोड की द्रव अवस्था के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।

प्रश्न 2. भूकंप क्या है? यह कैसे उत्पन्न होता है?

उत्तर: पृथ्वी की सतह या उसके भीतर अचानक होने वाली कंपन की घटना को भूकंप कहा जाता है। भूकंप के समय पृथ्वी के अंदर जमा ऊर्जा अचानक मुक्त होती है और उसके कारण भूकंपीय तरंगें चारों ओर फैलती हैं।

भूकंप का सबसे प्रमुख कारण विवर्तनिक प्लेटों की गति है। जब चट्टानों पर लंबे समय तक तनाव जमा होता है और वे अचानक भ्रंश के आसपास खिसकती हैं, तो संचित ऊर्जा तरंगों के रूप में मुक्त होती है। इसके अलावा ज्वालामुखीय गतिविधि, भूमिगत धँसाव तथा कुछ बड़े विस्फोट भी भूकंपीय कंपन पैदा कर सकते हैं।

प्रश्न 3. पृथ्वी की आंतरिक संरचना की विवेचना कीजिए।

उत्तर: पृथ्वी की आंतरिक संरचना को मुख्य रूप से भूपर्पटी, मैंटल और क्रोड में बाँटा जाता है।

भूपर्पटी पृथ्वी की सबसे बाहरी ठोस परत है। इसकी मोटाई महाद्वीपीय और महासागरीय क्षेत्रों में अलग-अलग होती है।

मैंटल भूपर्पटी के नीचे स्थित बहुत मोटी परत है। इसमें उच्च तापमान और दबाव पाया जाता है तथा इसके ऊपरी भाग से प्लेट विवर्तनिकी की प्रक्रियाएँ जुड़ी हुई हैं।

क्रोड पृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग है। इसमें भारी धातुओं, विशेषकर लोहा और निकिल, की प्रधानता मानी जाती है। क्रोड का बाहरी भाग द्रव तथा आंतरिक भाग अत्यधिक दबाव के कारण ठोस अवस्था में माना जाता है।

भूकंपीय तरंगों के व्यवहार से इन परतों की सीमाओं और भौतिक गुणों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

प्रश्न 4. अंतर्वेधी आकृतियों से क्या समझते हैं? विभिन्न अंतर्वेधी आकृतियों का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर: जब मैग्मा धरातल तक पहुँचने से पहले ही पृथ्वी की ऊपरी परतों के भीतर ठंडा होकर जम जाता है, तो उससे बनने वाली आग्नेय चट्टानी संरचनाओं को अंतर्वेधी आकृतियाँ कहा जाता है। इनका आकार और स्वरूप मैग्मा के जमने के स्थान तथा आसपास की चट्टानों की संरचना पर निर्भर करता है।

अंतर्वेधी आकृतियों में बैथोलिथ, लैकोलिथ, सिल और डाइक प्रमुख उदाहरण हैं। बैथोलिथ बहुत बड़े आकार का अंतर्वेधी आग्नेय पिंड होता है। सिल परतों के समानांतर जमता है, जबकि डाइक सामान्यतः चट्टानी परतों को काटते हुए जमता है।

पृथ्वी की आंतरिक संरचना – परीक्षा उपयोगी तुलना

विषयमुख्य बात
P तरंगसबसे तेज, ठोस-द्रव-गैस में संचरित
S तरंगकेवल ठोस माध्यम में संचरित
धरातलीय तरंगधरातल पर अधिक प्रभावकारी और सामान्यतः सबसे धीमी
मैग्मापृथ्वी के अंदर का पिघला पदार्थ
लावाधरातल पर निकला मैग्मा
उद्गम केंद्रपृथ्वी के अंदर भूकंप शुरू होने का स्थान
अधिकेंद्रउद्गम केंद्र के ठीक ऊपर धरातल का बिंदु

अध्याय के महत्वपूर्ण MCQ

  1. पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष साधन कौन-सा है?
    उत्तर: भूकंपीय तरंगें
  2. स्थलमंडल मुख्यतः किससे संबंधित है?
    उत्तर: भूपर्पटी और ऊपरी मैंटल के कठोर भाग से
  3. कौन-सी भूकंपीय तरंग सबसे तेज होती है?
    उत्तर: P तरंग
  4. कौन-सी तरंग द्रव माध्यम से नहीं गुजरती?
    उत्तर: S तरंग
  5. पृथ्वी के क्रोड में किन तत्वों की प्रधानता है?
    उत्तर: लोहा और निकिल
  6. मैग्मा धरातल पर निकलने के बाद क्या कहलाता है?
    उत्तर: लावा
  7. भूकंप का उद्गम केंद्र कहाँ होता है?
    उत्तर: पृथ्वी के अंदर
  8. उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु क्या कहलाता है?
    उत्तर: अधिकेंद्र
  9. अग्नि वलय किस महासागर के आसपास स्थित है?
    उत्तर: प्रशान्त महासागर
  10. भारत का सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र कौन-सा है?
    उत्तर: बैरन द्वीप
  11. पृथ्वी की सबसे बाहरी प्रमुख परत कौन-सी है?
    उत्तर: भूपर्पटी
  12. पृथ्वी की सबसे आंतरिक प्रमुख परत कौन-सी है?
    उत्तर: क्रोड
  13. सियाल शब्द किन तत्वों से संबंधित है?
    उत्तर: सिलिका और एल्युमिनियम
  14. सीमा शब्द किन तत्वों से संबंधित है?
    उत्तर: सिलिका और मैग्नीशियम
  15. निफे शब्द किन तत्वों से संबंधित है?
    उत्तर: निकिल और लोहा

अध्याय के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न

  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष साधनों की व्याख्या कीजिए।
  • भूकंपीय तरंगों के प्रकार एवं उनकी विशेषताएँ बताइए।
  • P और S तरंगों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  • भूकंपीय तरंगें पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी कैसे देती हैं?
  • भूकंपीय छाया क्षेत्र क्या है?
  • पृथ्वी की तीन प्रमुख आंतरिक परतों का वर्णन कीजिए।
  • सियाल, सीमा और निफे से क्या अभिप्राय है?
  • ज्वालामुखी क्या है? इसके प्रमुख भाग बताइए।
  • सक्रिय, प्रसुप्त और मृत ज्वालामुखी में अंतर बताइए।
  • मैग्मा और लावा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  • भूकंप क्या है और इसके प्रमुख कारण क्या हैं?
  • उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र में अंतर बताइए।
  • प्रशान्त महासागरीय अग्नि वलय की व्याख्या कीजिए।
  • सुनामी क्या है और इसका निर्माण कैसे होता है?
  • अंतर्वेधी आकृतियाँ क्या हैं?

Chapter 3 का सारांश

इस अध्याय में पृथ्वी के अंदर मौजूद विभिन्न परतों तथा उनकी संरचना को समझाया गया है। पृथ्वी की आंतरिक जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रत्यक्ष साधनों के साथ-साथ भूकंपीय तरंगों, गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय क्षेत्र और उल्काओं जैसे अप्रत्यक्ष साधनों का उपयोग किया जाता है।

भूकंपीय तरंगों में P, S और धरातलीय तरंगें प्रमुख हैं। इनके वेग और संचरण मार्ग का अध्ययन पृथ्वी की आंतरिक परतों की जानकारी देता है। पृथ्वी की प्रमुख परतें भूपर्पटी, मैंटल और क्रोड हैं।

अध्याय के दूसरे महत्वपूर्ण भाग में ज्वालामुखी और भूकंप का अध्ययन किया गया है। मैग्मा, लावा, ज्वालामुखीय शंकु, विवर, काल्डेरा, उद्गम केंद्र, अधिकेंद्र, भूकंपीय तरंगें तथा अग्नि वलय जैसी अवधारणाएँ परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।

अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक

Chapter 2 – पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

Chapter 4 – महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

Bihar Board Class 11 Geography Solutions

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 – पृथ्वी की आंतरिक संरचना में पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना और उसे समझने के वैज्ञानिक साधनों का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से भूकंपीय तरंगों, पृथ्वी की प्रमुख परतों, मैग्मा-लावा, ज्वालामुखी, भूकंप, उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र के अंतर को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए। ये विषय परीक्षा में वस्तुनिष्ठ, लघु तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के रूप में उपयोगी हैं।

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