प्राकृतिक वनस्पति किसी क्षेत्र की जलवायु, वर्षा, तापमान, मिट्टी, ऊँचाई और अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित होने वाली वनस्पति है। भारत में भौगोलिक एवं जलवायवीय विविधता के कारण कई प्रकार के वन पाए जाते हैं। इस अध्याय में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, पतझड़ीय वन, कांटेदार वन, डेल्टाई या मैंग्रोव वन, पर्वतीय वन, घासभूमि, सामाजिक वानिकी तथा वन संरक्षण का अध्ययन किया जाता है।
यहाँ Bihar Board Class 11 Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति के पाठ्यपुस्तक प्रश्न, अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न, मानचित्र कार्य तथा परीक्षा उपयोगी प्रश्नों के उत्तर आसान और शिक्षक की तरह समझाने वाली भाषा में दिए गए हैं।
अध्याय 5 – प्राकृतिक वनस्पति के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. प्रोजेक्ट टाइगर का उद्देश्य क्या था?
(क) शेरों का शिकार करना
(ख) अवैध शिकार को रोककर बाघों की सुरक्षा करना
(ग) बाघों को चिड़ियाघरों में रखना
(घ) बाघों पर चित्र बनाना
उत्तर: (ख) अवैध शिकार को रोककर बाघों की सुरक्षा करना।
व्याख्या: Project Tiger का मूल उद्देश्य भारत में बाघों की संख्या को बनाए रखना तथा उनके आवास और सुरक्षा को मजबूत करना था। बाघों के अवैध शिकार और आवास के विनाश से उनकी संख्या पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा था।
प्रश्न 2. नंदा देवी जीवमंडल निचय किस राज्य में स्थित है?
(क) बिहार
(ख) उत्तराखंड
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) ओडिशा
उत्तर: (ख) उत्तराखंड।
व्याख्या: नंदा देवी क्षेत्र हिमालयी पारिस्थितिकी और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
प्रश्न 3. चंदन किस प्रकार के वन की लकड़ी है?
(क) सदाबहार वन
(ख) डेल्टाई वन
(ग) पतझड़ीय वन
(घ) कंटीले वन
उत्तर: (ग) पतझड़ीय वन।
व्याख्या: चंदन को भारतीय पतझड़ीय वनों से जुड़े महत्वपूर्ण वृक्षों में रखा गया है और इसकी लकड़ी आर्थिक रूप से बहुत उपयोगी है।
प्रश्न 4. IUCN द्वारा कितने जीवमंडल निचय मान्यता प्राप्त बताए गए हैं?
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4
उत्तर: (घ) 4।
व्याख्या: यह संख्या reference material में दी गई है। परीक्षा में इस प्रश्न का उत्तर अपने पाठ्यक्रम/पुस्तक के अनुसार लिखना चाहिए।
प्रश्न 5. वन नीति के अंतर्गत वन क्षेत्र का लक्ष्य कितना रखा गया था?
(क) 33%
(ख) 55%
(ग) 44%
(घ) 22%
उत्तर: (क) 33%।
व्याख्या: राष्ट्रीय वन नीति में देश के लगभग एक-तिहाई भू-भाग को वनावरण के अंतर्गत लाने के लक्ष्य पर जोर दिया गया है।
प्रश्न 6. चंदन वन किस प्रकार का वन है?
(क) सदाबहार
(ख) डेल्टाई
(ग) पर्णपाती
(घ) काँटेदार
उत्तर: (ग) पर्णपाती।
लगभग 30 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. प्राकृतिक वनस्पति क्या है? जलवायु की किन परिस्थितियों में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं?
उत्तर: प्राकृतिक वनस्पति वह पौधा समुदाय है जो लंबे समय तक मानव के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बिना प्राकृतिक परिस्थितियों में विकसित होता है। उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन अधिक वर्षा, अधिक तापमान और अधिक आर्द्रता वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
प्रश्न 2. जलवायु की कौन-सी परिस्थितियाँ सदाबहार वन उगने के लिए अनुकूल हैं?
उत्तर: अधिक तापमान, अधिक वार्षिक वर्षा और अधिक आर्द्रता सदाबहार वनों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं। जहाँ पूरे वर्ष पर्याप्त नमी रहती है, वहाँ वृक्षों की पत्तियाँ एक साथ नहीं गिरतीं।
प्रश्न 3. सामाजिक वानिकी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: सामाजिक वानिकी का अर्थ समाज की आवश्यकताओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्वजनिक तथा निजी भूमि पर वृक्षारोपण और वनों का प्रबंधन करना है। इसमें कृषि वानिकी, सामुदायिक वानिकी और अन्य वृक्षारोपण कार्यक्रम शामिल हैं।
प्रश्न 4. जीवमंडल निचय को परिभाषित करें। वन क्षेत्र और वन आवरण में क्या अंतर है?
उत्तर: जीवमंडल निचय जैव-विविधता और पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है। वन क्षेत्र सरकारी अभिलेखों में अधिसूचित क्षेत्र होता है, जबकि वन आवरण वास्तव में वृक्षों और वनस्पति से ढका हुआ क्षेत्र होता है।
लगभग 125 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. वन संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर: वन संरक्षण के लिए कई उपाय अपनाए गए हैं। इनमें सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी, सामुदायिक वानिकी और वनरोपण प्रमुख हैं। सामाजिक वानिकी के माध्यम से सार्वजनिक भूमि, सड़कों के किनारे, नहरों के किनारे, विद्यालयों तथा अन्य स्थानों पर वृक्ष लगाए जाते हैं। कृषि वानिकी में कृषि भूमि पर फसलों के साथ वृक्ष भी लगाए जाते हैं। फार्म वानिकी में किसान अपने खेतों में आर्थिक उपयोग वाले वृक्ष लगाते हैं। इसके अतिरिक्त तेजी से बढ़ने वाले वृक्षों का रोपण, घासभूमियों का पुनर्विकास तथा वन क्षेत्र का विस्तार भी संरक्षण के महत्वपूर्ण उपाय हैं। वन संरक्षण से मिट्टी का अपरदन कम होता है, जैव-विविधता सुरक्षित रहती है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 2. वन और वन्यजीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर: वन और वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकार के प्रयासों से पूरी तरह संभव नहीं है। स्थानीय लोगों की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रामीण और जनजातीय समुदायों का वनों से प्रत्यक्ष संबंध रहा है। वे वन संसाधनों, स्थानीय पौधों और पर्यावरण के बारे में पारंपरिक ज्ञान रखते हैं। यदि उन्हें वन संरक्षण में भागीदार बनाया जाए तो अवैध कटाई, अत्यधिक चराई और वन्यजीवों के शिकार को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। लोगों को वृक्षारोपण, वन संरक्षण और जैव-विविधता संरक्षण के लिए जागरूक करना आवश्यक है। सामुदायिक भागीदारी से वन संसाधनों का टिकाऊ उपयोग किया जा सकता है और स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ पर्यावरण का संरक्षण भी किया जा सकता है।
परियोजना कार्य – मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
Reference chapter में भारत के रेखा मानचित्र पर तीन प्रकार के मानचित्र कार्य दिए गए हैं। इनका अभ्यास परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 1
1. भारत के रेखा मानचित्र पर मैंग्रोव वन वाले क्षेत्रों को चिह्नित करें।
उत्तर: भारत में मैंग्रोव वन मुख्यतः समुद्री तटों और डेल्टाई क्षेत्रों में पाए जाते हैं। प्रमुख क्षेत्र गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा, महानदी, गोदावरी और कृष्णा जैसे डेल्टाई क्षेत्र हैं। सुंदरवन मैंग्रोव वन का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।

2. भारत के रेखा मानचित्र पर नंदा देवी, सुंदरवन, मन्नार की खाड़ी और नीलगिरी जीवमंडल निचयों को चिह्नित करें।
उत्तर: मानचित्र पर चारों जीवमंडल निचयों की स्थिति को अलग-अलग संकेतों से दर्शाएँ। नंदा देवी को हिमालय क्षेत्र में, सुंदरवन को गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में, मन्नार की खाड़ी को तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट के पास तथा नीलगिरी को दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में दिखाएँ।

3. भारतीय वन सर्वेक्षण मुख्यालय की स्थिति का पता लगाएँ और उसे रेखांकित करें।
उत्तर: भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) का मुख्यालय देहरादून में स्थित है। भारत के मानचित्र पर देहरादून को चिन्हित करके एक स्पष्ट संकेत लगाएँ।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. भारत के दो राज्य बताइए जहाँ देवदार के वृक्ष मिलते हैं।
उत्तर: जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश।
प्रश्न 2. काँटेदार वन के दो पेड़ों के नाम बताइए।
उत्तर: खैर और खजूरी।
प्रश्न 3. बबूल के वृक्ष से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर: गोंद तथा रंगने वाले पदार्थ।
प्रश्न 4. ज्वारीय वन में गुंझलदार जड़ों का क्या कार्य है?
उत्तर: ये जड़ें दलदली और कीचड़युक्त भूमि में वृक्षों को सहारा देती हैं तथा उन्हें स्थिर रखने में सहायता करती हैं।
प्रश्न 5. भारत का वन अनुसंधान केन्द्र कहाँ स्थित है?
उत्तर: देहरादून।
प्रश्न 6. ज्वारीय वन में पाए जाने वाले दो पेड़ों के नाम लिखिए।
उत्तर: सुंदरी और गुर्जन।
प्रश्न 7. वैज्ञानिक नियम के अनुसार वनों के अंतर्गत कुल कितना क्षेत्र होना चाहिए?
उत्तर: लगभग 33 प्रतिशत।
प्रश्न 8. कोणधारी वन के तीन वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: पाइन, देवदार और सिल्वर फर।
प्रश्न 9. 3500 मीटर से अधिक ऊँचाई पर किस प्रकार की वनस्पति पाई जाती है?
उत्तर: अल्पाइन चरागाह।
प्रश्न 10. उन दो राज्यों के नाम लिखिए जहाँ देवदार पाए जाते हैं।
उत्तर: जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश।
प्रश्न 11. मायरोबोलान वृक्ष का उपयोग बताइए।
उत्तर: इसका उपयोग रंगने वाले पदार्थ प्राप्त करने में किया जाता है।
प्रश्न 12. ज्वारीय वातावरण में कौन-से वन मिलते हैं?
उत्तर: मैंग्रोव या ज्वारीय वन।
प्रश्न 13. भारत में आर्थिक दृष्टि से कौन-सा वनस्पति क्षेत्र महत्वपूर्ण है?
उत्तर: पतझड़ीय वन आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें साल, सागवान, चंदन आदि उपयोगी वृक्ष पाए जाते हैं।
प्रश्न 14. भारत का कुल कितना भौगोलिक क्षेत्र वनों के अंतर्गत है?
उत्तर: Reference में लगभग 22% का आँकड़ा दिया गया है।
प्रश्न 15. भारत का कुल कितना क्षेत्र हेक्टेयर में वनों के अंतर्गत बताया गया है?
उत्तर: Reference में लगभग 750 लाख हेक्टेयर का आँकड़ा दिया गया है।
प्रश्न 16. लकड़ी के दो प्रयोग लिखिए।
उत्तर:
- इमारत और निर्माण कार्य में।
- ईंधन के रूप में।
प्रश्न 17. लकड़ी का एक औद्योगिक प्रयोग लिखिए।
उत्तर: लकड़ी का उपयोग खेल सामग्री, कागज और रेयॉन जैसे उद्योगों में किया जाता है।
प्रश्न 18. बाँस तथा वन की घास के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
- कागज बनाने में।
- कृत्रिम रेशा बनाने में।
प्रश्न 19. वनों से प्राप्त तीन उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर: रबर, गोंद और चमड़ा रंगने वाले पदार्थ।
प्रश्न 20. दो भौगोलिक तत्वों के नाम लिखिए जो वनों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं।
उत्तर: वर्षा की मात्रा और ऊँचाई।
प्रश्न 21. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा तथा तापमान बताइए।
उत्तर: अधिक वर्षा और अधिक तापमान आवश्यक है। Reference में 200 सेमी से अधिक वर्षा तथा लगभग 25°–27°C तापमान दिया गया है।
प्रश्न 22. पतझड़ीय मानसूनी वनों के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा बताइए।
उत्तर: Reference में 150–200 सेमी वर्षा दी गई है।
प्रश्न 23. उस राज्य का नाम बताइए जहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पाए जाते हैं।
उत्तर: केरल।
प्रश्न 24. भारत के उस प्रदेश का नाम बताइए जहाँ काँटे तथा झाड़ियों के वन पाए जाते हैं।
उत्तर: थार मरुस्थल क्षेत्र।
प्रश्न 25. हिन्द महासागर में वह द्वीप समूह बताइए जहाँ उष्णकटिबंधीय वन पाए जाते हैं।
उत्तर: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह।
प्रश्न 26. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में पाए जाने वाले तीन महत्वपूर्ण पेड़ों के नाम लिखिए।
उत्तर: रोजवुड, अर्जुन और आबनूस।
प्रश्न 27. मानसून वनों को पतझड़ीय वन क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि शुष्क ऋतु में इन वनों के अनेक वृक्ष पानी की कमी से अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
प्रश्न 28. उन तीन राज्यों के नाम बताइए जहाँ मानसून वन पाए जाते हैं।
उत्तर: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड।
प्रश्न 29. मध्य प्रदेश के एक महत्वपूर्ण व्यापारिक वृक्ष का नाम बताइए।
उत्तर: सागवान।
लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. नम उष्णकटिबंधीय सदाबहार एवं अर्द्ध-सदाबहार वनों की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए। ये मुख्यतः किन प्रदेशों में पाए जाते हैं?
उत्तर: नम उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में विकसित होते हैं। इनकी वनस्पति घनी होती है और वृक्षों की ऊँचाई काफी अधिक हो सकती है। इनमें कठोर लकड़ी वाले वृक्ष पाए जाते हैं। भारत में इनका विस्तार विशेष रूप से अधिक वर्षा वाले पश्चिमी घाट और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ भागों में मिलता है। अर्द्ध-सदाबहार वन उन क्षेत्रों में मिलते हैं जहाँ वर्षा सदाबहार वनों की तुलना में कुछ कम होती है।
प्रश्न 2. भारत में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन कहाँ पाए जाते हैं? ये भूमध्यरेखीय वनों से किस प्रकार समान और असमान हैं?
उत्तर: भारत में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन अधिक वर्षा वाले पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार क्षेत्र में पाए जाते हैं। इनकी समानता यह है कि दोनों क्षेत्रों में गर्म और आर्द्र परिस्थितियाँ तथा कठोर लकड़ी वाले वृक्ष मिलते हैं। अंतर यह है कि भारत के सदाबहार वन सामान्यतः भूमध्यरेखीय वर्षावनों की तुलना में कम घने और अधिक खुले होते हैं।
प्रश्न 3. सामाजिक वानिकी पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: सामाजिक वानिकी का उद्देश्य समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा करना है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक भूमि, सड़कों, नहरों, गाँवों, विद्यालयों तथा कृषि भूमि पर वृक्ष लगाए जाते हैं। कृषि वानिकी में किसान अपनी भूमि पर फसलों के साथ वृक्ष उगाते हैं। सामुदायिक वानिकी में समुदाय की भागीदारी से वृक्ष लगाए जाते हैं। इससे ईंधन, चारा, छोटी इमारती लकड़ी तथा अन्य वन उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 4. कौन-सी वनस्पति जाति ‘बंगाल का आतंक’ मानी जाती है और क्यों?
उत्तर: जलकुंभी (Water Hyacinth) को ‘बंगाल का आतंक’ कहा गया है। यह एक विदेशी वनस्पति है जो तेजी से फैलकर जलाशयों, नदियों, तालाबों और जलमार्गों की सतह को ढक सकती है। इससे जल का सामान्य प्रवाह बाधित होता है और जलीय पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रश्न 5. “हमारी अधिकांश प्राकृतिक वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: मनुष्य ने कृषि, बस्तियों, उद्योग, सड़क और अन्य विकास कार्यों के लिए प्राकृतिक वनस्पति के बड़े क्षेत्रों को बदल दिया है। इसलिए आज अनेक क्षेत्रों में मिलने वाली वनस्पति अपने मूल प्राकृतिक स्वरूप में नहीं है। जहाँ मानव हस्तक्षेप कम रहा है, वहाँ प्राकृतिक वनस्पति अपने मूल स्वरूप के अधिक निकट दिखाई देती है।
प्रश्न 6. भारत में मुख्य वनस्पतियों के प्रकार को प्रभावित करने वाले भौगोलिक घटकों के नाम बताइए तथा उनके प्रभाव को समझाइए।
उत्तर: वनस्पति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में वर्षा, तापमान, धूप, मिट्टी और ऊँचाई शामिल हैं। अधिक वर्षा और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में सदाबहार वन विकसित होते हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कांटेदार वन मिलते हैं। मौसमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पतझड़ीय वन पाए जाते हैं। अधिक ऊँचाई और कम तापमान वाले हिमालयी क्षेत्रों में शंकुधारी तथा अल्पाइन वनस्पति विकसित होती है। डेल्टाई और ज्वारीय क्षेत्रों की विशेष मिट्टी एवं जल परिस्थितियाँ मैंग्रोव वन के विकास में सहायता करती हैं।
प्रश्न 7. “हिमालय क्षेत्रों में ऊँचाई के क्रम के अनुसार उष्णकटिबंधीय से लेकर अल्पाइन वनस्पति प्रदेशों तक का अनुक्रम पाया जाता है।” समझाइए।
उत्तर: हिमालय में जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, तापमान कम होता जाता है और वनस्पति का स्वरूप बदलता जाता है। निचले भागों में उष्णकटिबंधीय वन मिलते हैं। अधिक ऊँचाई पर ओक, चीड़ आदि के वन पाए जाते हैं। इससे ऊपर शंकुधारी वन मिलते हैं। लगभग ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षों की सीमा समाप्त होने के बाद अल्पाइन घासभूमि दिखाई देती है। इस प्रकार ऊँचाई के साथ वनस्पति का क्रमिक परिवर्तन होता है।
प्रश्न 8. प्राकृतिक वनस्पति को परिभाषित कीजिए। जलवायु की उन परिस्थितियों का वर्णन कीजिए जिनमें उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं।
उत्तर: प्राकृतिक वनस्पति वह वनस्पति है जो प्राकृतिक पर्यावरण में मानव की प्रत्यक्ष सहायता के बिना विकसित होती है। उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के लिए अधिक वर्षा, उच्च तापमान और अधिक आर्द्रता आवश्यक है। इन क्षेत्रों में नमी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण वृक्ष पूरे वर्ष हरे रह सकते हैं।
प्रश्न 9. भारत में वनों के क्षेत्र के कम होने के क्या कारण हैं?
उत्तर: वनों के क्षेत्र में कमी के प्रमुख कारण हैं—बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई, कृषि का विस्तार, स्थानांतरित कृषि, अत्यधिक चराई, ईंधन एवं इमारती लकड़ी के लिए वृक्षों का उपयोग, मृदा अपरदन और बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप। इन कारणों से प्राकृतिक वनस्पति का क्षेत्र घटता है।
प्रश्न 10. वन संपदा के संरक्षण के लिए क्या तरीके अपनाए जा रहे हैं?
उत्तर: वन संपदा के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण, वन क्षेत्र का विस्तार, तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों का रोपण, घासभूमियों का पुनर्विकास और सामाजिक वानिकी जैसे उपाय किए जाते हैं। इसके साथ ही अवैध कटाई को रोकना और वन संसाधनों का टिकाऊ उपयोग भी आवश्यक है।
प्रश्न 11. भारत में विभिन्न प्रकार की घासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: घासभूमियाँ भारत के पारिस्थितिक तंत्र और पशुधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। मैदानों में उष्णकटिबंधीय घासें मिलती हैं, जबकि हिमालय के ऊँचे भागों में उप-अल्पाइन और अल्पाइन घासभूमियाँ पाई जाती हैं। इनका उपयोग मुख्यतः पशुओं के चरागाह के रूप में होता है। घासभूमियाँ मिट्टी को बाँधने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायता करती हैं।
प्रश्न 12. वन संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: वन पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, मिट्टी के अपरदन को रोकने, जैव-विविधता के संरक्षण, जलचक्र को संतुलित रखने और मानव एवं पशुओं को विभिन्न संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों के विनाश से मरुस्थलीकरण, मृदा अपरदन, बाढ़ और जैव-विविधता की हानि जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए वन संरक्षण आवश्यक है।
प्रश्न 13. भारत की वन नीति के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर: Reference में 1988 की राष्ट्रीय वन नीति के अंतर्गत पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखना, वन क्षेत्र बढ़ाना, जैव-विविधता और आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण, मृदा अपरदन एवं मरुस्थलीकरण को रोकना, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की आवश्यकताओं को पूरा करना तथा सामाजिक वानिकी और वनरोपण को बढ़ावा देना प्रमुख उद्देश्यों के रूप में बताया गया है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. भारत में वास्तविक वनावरण के वितरण को समझाइए।
उत्तर: भारत में वास्तविक वनावरण का वितरण सभी राज्यों में समान नहीं है। वर्षा, तापमान, ऊँचाई, स्थलाकृति और मानवीय गतिविधियों के कारण वनावरण में काफी क्षेत्रीय अंतर पाया जाता है। पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार जैसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में वनावरण का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक है। इसके विपरीत राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे शुष्क या अधिक मानवीय दबाव वाले क्षेत्रों में वनावरण कम है। मध्य भारत के कुछ राज्यों में मध्यम से अधिक वनावरण पाया जाता है। Reference में वनावरण के आधार पर राज्यों को अधिक, मध्यम, कम और बहुत कम वनावरण वाले क्षेत्रों में बाँटा गया है। अधिक वनावरण वाले क्षेत्रों में सामान्यतः पर्याप्त वर्षा और अनुकूल तापमान प्रमुख कारण हैं, जबकि कम वनावरण वाले क्षेत्रों में शुष्क जलवायु तथा मानवीय दबाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 2. भारत में प्राकृतिक वनस्पति किस प्रकार वार्षिक वर्षा के वितरण पर निर्भर है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भारत में प्राकृतिक वनस्पति और वर्षा का बहुत गहरा संबंध है। जहाँ वर्षा अधिक होती है, वहाँ घने और ऊँचे वृक्षों वाली वनस्पति विकसित होती है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पाए जाते हैं। पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार इसके उदाहरण हैं। मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में पतझड़ीय वन विकसित होते हैं। इनमें साल, सागवान, चंदन और अन्य आर्थिक रूप से उपयोगी वृक्ष पाए जाते हैं। जहाँ वर्षा बहुत कम होती है, वहाँ पौधे जल की कमी के अनुकूल हो जाते हैं और काँटेदार एवं झाड़ीदार वनस्पति मिलती है। राजस्थान और आसपास के शुष्क क्षेत्रों में ऐसी वनस्पति पाई जाती है। इसलिए वर्षा की मात्रा के अनुसार वनस्पति का घनत्व, वृक्षों की ऊँचाई और प्रजातियों का स्वरूप बदलता है।
प्रश्न 3. भारत के विभिन्न प्रकार के वनों के भौगोलिक वितरण तथा आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत में वनों का वितरण वर्षा, तापमान, ऊँचाई और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार होता है। प्रमुख वन प्रकारों में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, पतझड़ीय मानसूनी वन, शुष्क एवं कांटेदार वन, डेल्टाई/मैंग्रोव वन और पर्वतीय वन शामिल हैं।
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन: अधिक वर्षा वाले पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार में पाए जाते हैं। इनमें रबर, महोगनी, आबनूस आदि वृक्ष मिलते हैं। इनकी लकड़ी फर्नीचर तथा अन्य निर्माण कार्यों में उपयोगी है।
पतझड़ीय वन: मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। साल, सागवान, चंदन, शीशम आदि इनके महत्वपूर्ण वृक्ष हैं। इनसे इमारती लकड़ी और अनेक वन उत्पाद प्राप्त होते हैं।
शुष्क एवं कांटेदार वन: कम वर्षा वाले राजस्थान, हरियाणा, गुजरात तथा अन्य शुष्क क्षेत्रों में मिलते हैं। बबूल, कीकर और खेजड़ी जैसी प्रजातियाँ यहाँ महत्वपूर्ण हैं।
डेल्टाई/मैंग्रोव वन: समुद्र तटीय डेल्टाओं में पाए जाते हैं। सुंदरवन इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
पर्वतीय वन: हिमालय में ऊँचाई के अनुसार वनस्पति बदलती है और उष्णकटिबंधीय वन से शंकुधारी तथा अल्पाइन घासभूमि तक क्रम मिलता है।
प्राकृतिक वनस्पति – महत्वपूर्ण तथ्य
- प्राकृतिक वनस्पति: प्राकृतिक परिस्थितियों में विकसित पौधा समुदाय।
- सदाबहार वन: अधिक वर्षा और आर्द्रता वाले क्षेत्र।
- पतझड़ीय वन: मौसमी वर्षा और शुष्क अवधि वाले क्षेत्र।
- कांटेदार वन: कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्र।
- मैंग्रोव वन: तटीय और डेल्टाई क्षेत्र।
- पर्वतीय वन: ऊँचाई के साथ वनस्पति में क्रमिक परिवर्तन।
- सामाजिक वानिकी: समाज और पर्यावरण की आवश्यकताओं के लिए वृक्षारोपण एवं वन प्रबंधन।
- वन सर्वेक्षण मुख्यालय: देहरादून।
- सुंदरवन: गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा का प्रमुख मैंग्रोव क्षेत्र।
- महत्वपूर्ण व्यापारिक वृक्ष: सागवान।
अध्याय 5 से संबंधित अन्य अध्याय
Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान
Chapter 7 – प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ
निष्कर्ष
प्राकृतिक वनस्पति अध्याय में भारत की वनस्पति की विविधता, उसके भौगोलिक आधार, विभिन्न वन प्रकारों, वन संसाधनों के आर्थिक महत्त्व, सामाजिक वानिकी तथा वन संरक्षण को समझाया गया है। परीक्षा के लिए सदाबहार वन, पतझड़ीय वन, कांटेदार वन, मैंग्रोव वन, पर्वतीय वन, सामाजिक वानिकी, वन नीति और मानचित्र कार्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। मानचित्र अभ्यास में मैंग्रोव क्षेत्रों, प्रमुख जीवमंडल निचयों और भारतीय वन सर्वेक्षण मुख्यालय को भारत के रेखा मानचित्र पर जरूर अभ्यास करें।