Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 – खनिज एवं शैल में हम खनिज, शैल, आग्नेय शैल, अवसादी शैल, कायांतरित शैल, शैल चक्र, खनिजों के प्रकार और इनके आर्थिक महत्व को सरल भाषा में समझेंगे। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें परिभाषा, अंतर, वर्गीकरण और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस अध्याय में विशेष रूप से खनिजों की प्रकृति, शैलों का निर्माण, आग्नेय शैलों के प्रकार, अवसादी शैलों की विशेषताएँ, कायांतरण तथा शैल चक्र को समझना आवश्यक है।
खनिज एवं शैल – परिचय
पृथ्वी की भूपर्पटी विभिन्न प्रकार के खनिजों और शैलों से बनी है। खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ हैं जिनकी अपनी निश्चित रासायनिक संरचना और भौतिक गुण होते हैं। कई खनिज मिलकर शैलों का निर्माण करते हैं।
शैलों को उनकी उत्पत्ति और निर्माण प्रक्रिया के आधार पर मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
- आग्नेय शैल
- अवसादी शैल
- कायांतरित शैल
खनिज क्या है?
खनिज एक प्राकृतिक, अकार्बनिक पदार्थ है जिसकी निश्चित रासायनिक संरचना, व्यवस्थित आंतरिक संरचना तथा विशिष्ट भौतिक गुण होते हैं। खनिज एक तत्व के रूप में भी हो सकता है और कई तत्वों से बने यौगिक के रूप में भी।
स्वर्ण, चाँदी, ताँबा, ग्रेफाइट और सल्फर जैसे कुछ खनिज एक प्रमुख तत्व से संबंधित होते हैं, जबकि अनेक खनिज कई तत्वों के संयोजन से बनते हैं।
शैल निर्माणकारी खनिज
वे खनिज जो मुख्य रूप से शैलों के निर्माण में भाग लेते हैं, शैल निर्माणकारी खनिज कहलाते हैं। इनमें सिलिकेट खनिजों का विशेष महत्व है। क्वार्ट्ज, फेल्डस्पर, पाइरॉक्सीन, एम्फीबोल और माइका इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रमुख खनिज
1. फेल्डस्पर
फेल्डस्पर शैल निर्माण में महत्वपूर्ण खनिज समूह है। इसमें सिलिका, ऑक्सीजन, सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और एल्यूमीनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं।
2. क्वार्ट्ज
क्वार्ट्ज में मुख्य रूप से सिलिका पाया जाता है। यह रेत और ग्रेनाइट का महत्वपूर्ण घटक है। यह अपेक्षाकृत कठोर तथा जल में लगभग अघुलनशील खनिज है।
3. पाइरॉक्सीन
पाइरॉक्सीन में कैल्शियम, मैग्नीशियम, लौह, एल्यूमीनियम और सिलिका जैसे तत्व पाए जाते हैं।
4. एम्फीबोल
एम्फीबोल में सिलिका, एल्यूमीनियम, कैल्शियम, लौह और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं।
5. माइका
माइका में पोटैशियम, एल्यूमीनियम, मैग्नीशियम, लौह और सिलिका जैसे तत्व पाए जाते हैं। इसकी परतदार संरचना इसे अन्य खनिजों से अलग बनाती है।
धात्विक एवं अधात्विक खनिज
धात्विक खनिज
जिन खनिजों से धातु प्राप्त की जाती है, उन्हें धात्विक खनिज कहा जाता है। इन्हें व्यापक रूप से बहुमूल्य, लौह तथा अलौहिक खनिजों में समझा जा सकता है।
- बहुमूल्य धातु: स्वर्ण, चाँदी, प्लैटिनम
- लौह धातु: लौह आदि
- अलौहिक धातु: ताँबा, जस्ता, टिन, सीसा, एल्यूमीनियम आदि
अधात्विक खनिज
जिन खनिजों से धातु प्राप्त नहीं होती, उन्हें अधात्विक खनिज कहा जाता है। गंधक, फॉस्फेट और नाइट्रेट इसके उदाहरण हैं।
शैल क्या है?
पृथ्वी की भूपर्पटी का निर्माण करने वाले प्राकृतिक ठोस पदार्थों को सामान्य रूप से शैल या चट्टान कहा जाता है। शैल एक या अनेक खनिजों से मिलकर बनी हो सकती है। शैलों की कठोरता, रंग और अन्य गुण उनकी खनिज संरचना पर निर्भर करते हैं।
शैलों के तीन प्रमुख प्रकार
| शैल का प्रकार | निर्माण प्रक्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| आग्नेय शैल | मैग्मा या लावा के ठंडा होकर ठोस बनने से | ग्रेनाइट, बेसाल्ट |
| अवसादी शैल | अवसादों के निक्षेप, संघनन और शिलाभवन से | बलुआ पत्थर, चूना पत्थर |
| कायांतरित शैल | ताप, दाब और अन्य परिस्थितियों से पुरानी शैलों के रूपांतरण से | संगमरमर, स्लेट, नीस |
आग्नेय शैल
मैग्मा या लावा के ठंडा होकर ठोस और क्रिस्टलीय रूप में परिवर्तित होने से बनने वाली शैलों को आग्नेय शैल कहते हैं। इन्हें प्राथमिक शैल भी कहा जाता है क्योंकि अन्य प्रकार की शैलों के निर्माण की प्रक्रिया में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।
आग्नेय शैलों की बनावट
आग्नेय शैलों के क्रिस्टल का आकार मुख्य रूप से मैग्मा या लावा के ठंडा होने की गति पर निर्भर करता है। धीरे-धीरे ठंडा होने पर बड़े क्रिस्टल बनते हैं, जबकि तेजी से ठंडा होने पर छोटे क्रिस्टल बनते हैं।
आंतरिक और बाह्य आग्नेय शैल
आंतरिक आग्नेय शैल पृथ्वी की सतह के नीचे मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होने से बनती हैं। इसका प्रमुख उदाहरण ग्रेनाइट है।
बाह्य आग्नेय शैल धरातल पर लावा के अपेक्षाकृत तेजी से ठंडा होने से बनती हैं। इसका प्रमुख उदाहरण बेसाल्ट है।
ग्रेनाइट
ग्रेनाइट एक आंतरिक आग्नेय शैल है। मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होने के कारण इसमें अपेक्षाकृत बड़े क्रिस्टल विकसित होते हैं। इसका उपयोग भवन, स्मारक, मंदिर, सड़क तथा अन्य निर्माण कार्यों में किया जाता है।
बेसाल्ट
बेसाल्ट एक बाह्य आग्नेय शैल है। धरातल पर लावा के तेजी से ठंडा होने के कारण इसके क्रिस्टल सामान्यतः छोटे होते हैं।
आग्नेय शैलों की प्रमुख विशेषताएँ
- इनका निर्माण मैग्मा या लावा से होता है।
- इनमें सामान्यतः क्रिस्टलीय संरचना होती है।
- क्रिस्टल का आकार शीतलन की गति से प्रभावित होता है।
- ग्रेनाइट और बेसाल्ट इनके प्रमुख उदाहरण हैं।
- इनमें जीवाश्म सामान्यतः नहीं पाए जाते।
अवसादी शैल
धरातलीय शैलों के अपक्षय और अपरदन से प्राप्त पदार्थ जब जल, वायु या हिम द्वारा परिवहन होकर किसी स्थान पर जमा होते हैं और समय के साथ दबाव तथा संयोजन से ठोस शैल में बदलते हैं, तो उन्हें अवसादी शैल कहते हैं।
इस प्रक्रिया को समझने के लिए निक्षेपण → परत निर्माण → संघनन → शिलाभवन को क्रम से याद किया जा सकता है।
अवसादी शैलों के निर्माण के प्रमुख प्रकार
- यांत्रिक रूप से निर्मित: बालू या अन्य चट्टानी कणों के निक्षेप से।
- जैविक रूप से निर्मित: पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेषों से।
- रासायनिक रूप से निर्मित: घोल में मौजूद पदार्थों के रासायनिक निक्षेप से।
यांत्रिक अवसादी शैल
नदी, पवन और हिमनद जैसे कारकों द्वारा लाए गए चट्टानी कणों के जमा होने से इन शैलों का निर्माण होता है। बलुआ पत्थर इसका प्रमुख उदाहरण है।
जैविक अवसादी शैल
जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के अवशेषों के लंबे समय तक जमा होने और दबने से जैविक अवसादी शैल बन सकती हैं। कोयला और कुछ प्रकार के चूना पत्थर इसके उदाहरण हैं।
रासायनिक अवसादी शैल
जल में घुले पदार्थों के रासायनिक निक्षेप या वाष्पीकरण से कुछ अवसादी शैलों का निर्माण होता है। जिप्सम और चट्टानी नमक इसके उदाहरण हैं।
अवसादी शैलों की विशेषताएँ
- इनमें अक्सर स्पष्ट परतें दिखाई देती हैं।
- इनका निर्माण अवसादों के निक्षेप से होता है।
- इनमें जीवाश्म सुरक्षित मिल सकते हैं।
- इनका निर्माण धरातल या उसके निकट अधिक होता है।
- बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और कोयला इसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
कायांतरित शैल
जब पहले से मौजूद आग्नेय या अवसादी शैलें उच्च तापमान, दबाव या अन्य भूगर्भीय परिस्थितियों के प्रभाव से अपने मूल रूप और संरचना में परिवर्तन करती हैं, तो उनसे बनने वाली शैलों को कायांतरित शैल कहते हैं।
कायांतरण के दौरान शैल पूरी तरह पिघलकर मैग्मा नहीं बनती, बल्कि ठोस अवस्था में उसके खनिजों की संरचना और व्यवस्था में परिवर्तन हो सकता है।
कायांतरण के प्रमुख प्रकार
संपर्क कायांतरण: जब शैल गर्म मैग्मा के संपर्क में आती है और उच्च ताप के कारण उसके खनिजों में परिवर्तन होता है, तो इसे संपर्क कायांतरण कहते हैं।
प्रादेशिक कायांतरण: बड़े भू-क्षेत्र में ताप और दबाव के प्रभाव से शैलों में व्यापक परिवर्तन होने पर इसे प्रादेशिक कायांतरण कहा जाता है।
कायांतरित शैलों के उदाहरण
- चूना पत्थर → संगमरमर
- मृत्तिका/शेल → स्लेट
- ग्रेनाइट → नीस
- बलुआ पत्थर → क्वार्ट्जाइट
पल्लवन और बैंडिंग
कायांतरण के दौरान खनिज कणों की विशेष दिशा में व्यवस्था होने पर शैल में पल्लवन या रेखांकन जैसी संरचना विकसित हो सकती है। कुछ कायांतरित शैलों में हल्के और गहरे रंगों की पट्टियाँ दिखाई देती हैं, जिसे बैंडिंग कहा जाता है।
शैल चक्र (Rock Cycle)
एक प्रकार की शैल का भूगर्भीय प्रक्रियाओं के कारण दूसरे प्रकार की शैल में बदलते रहना शैल चक्र कहलाता है। यह एक सतत प्रक्रिया है।
उदाहरण के लिए, आग्नेय शैलों का अपक्षय और अपरदन होकर अवसाद बन सकता है। इन अवसादों के निक्षेपण और शिलाभवन से अवसादी शैल बन सकती है। ताप और दबाव के प्रभाव से अवसादी शैल कायांतरित शैल में बदल सकती है। अत्यधिक ताप के कारण शैल पिघलकर मैग्मा बन सकती है और मैग्मा के ठंडा होने से फिर आग्नेय शैल बन सकती है।
अपक्षय और अपरदन में अंतर
| आधार | अपक्षय | अपरदन |
|---|---|---|
| अर्थ | शैलों का अपने स्थान पर टूटना या विघटन | टूटे पदार्थ का हटना और परिवहन |
| स्थान | मुख्यतः उसी स्थान पर | एक स्थान से दूसरे स्थान तक |
| मुख्य कारक | ताप, जल, पाला आदि | नदी, पवन, हिमनद आदि |
भौतिक एवं रासायनिक अपक्षय में अंतर
| भौतिक अपक्षय | रासायनिक अपक्षय |
|---|---|
| शैल का भौतिक रूप से टूटना | शैल के खनिजों में रासायनिक परिवर्तन |
| रासायनिक संरचना सामान्यतः नहीं बदलती | रासायनिक संरचना बदल सकती है |
| तापमान परिवर्तन और पाला जैसे कारक महत्वपूर्ण | ऑक्सीकरण, घुलन, जलयोजन आदि महत्वपूर्ण |
मैग्मा और लावा में अंतर
| मैग्मा | लावा |
|---|---|
| पृथ्वी के अंदर पाया जाने वाला पिघला पदार्थ | धरातल पर निकल आया पिघला पदार्थ |
| भूपर्पटी के नीचे पाया जाता है | ज्वालामुखी से बाहर आने के बाद धरातल पर बहता है |
| धीरे ठंडा होने पर बड़े क्रिस्टल बन सकते हैं | तेजी से ठंडा होने पर छोटे क्रिस्टल बनते हैं |
दक्कन ट्रैप
भारत के प्रायद्वीपीय भाग में बेसाल्टिक लावा के विशाल प्रसार से निर्मित क्षेत्र को दक्कन ट्रैप कहा जाता है। इसके अपक्षय से काली मिट्टी का विकास हुआ, जो कपास की खेती के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
कोयले के प्रमुख प्रकार
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| पीट | कोयले के निर्माण की प्रारंभिक अवस्था |
| लिग्नाइट | भूरे रंग का अपेक्षाकृत निम्न श्रेणी का कोयला |
| बिटुमिनस | व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला कोयला |
| एन्थ्रासाइट | उच्च कार्बन वाला कठोर कोयला |
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. शैल के तीन प्रमुख वर्ग कौन-कौन से हैं?
उत्तर: शैलों के तीन प्रमुख वर्ग हैं—आग्नेय शैल, अवसादी शैल और कायांतरित शैल।
प्रश्न 2. आग्नेय शैल क्या है?
उत्तर: मैग्मा या लावा के ठंडा होकर ठोस बनने से बनने वाली शैल को आग्नेय शैल कहते हैं। ग्रेनाइट और बेसाल्ट इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 3. अवसादी शैल का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: शैलों के अपक्षय और अपरदन से प्राप्त अवसादों के परिवहन, निक्षेपण, संघनन और शिलाभवन से अवसादी शैलों का निर्माण होता है।
प्रश्न 4. कायांतरित शैल क्या है?
उत्तर: पहले से मौजूद शैलों पर ताप, दबाव और अन्य भूगर्भीय परिस्थितियों के प्रभाव से उनके रूप और खनिजीय संरचना में परिवर्तन होने पर बनने वाली शैल कायांतरित शैल कहलाती है।
प्रश्न 5. ग्रेनाइट में बड़े क्रिस्टल क्यों पाए जाते हैं?
उत्तर: ग्रेनाइट का मैग्मा पृथ्वी के अंदर अपेक्षाकृत धीरे-धीरे ठंडा होता है। लंबे समय तक शीतलन मिलने के कारण खनिजों को बड़े क्रिस्टल विकसित करने का अवसर मिलता है।
प्रश्न 6. बेसाल्ट में क्रिस्टल छोटे क्यों होते हैं?
उत्तर: बेसाल्ट लावा के धरातल पर अपेक्षाकृत तेजी से ठंडा होने से बनता है। तेजी से ठंडा होने के कारण खनिजों को बड़े क्रिस्टल विकसित करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।
प्रश्न 7. पेट्रोलॉजी क्या है?
उत्तर: पेट्रोलॉजी शैलों के वैज्ञानिक अध्ययन की शाखा है। इसमें शैलों की उत्पत्ति, संरचना, बनावट, खनिजीय संघटन और परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 8. शैल चक्र क्या है?
उत्तर: भूगर्भीय प्रक्रियाओं के कारण एक प्रकार की शैल का दूसरे प्रकार की शैल में बदलते रहना शैल चक्र कहलाता है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
प्रश्न 9. शैलों का ज्ञान भूगोल में क्यों आवश्यक है?
उत्तर: शैलों का संबंध भू-आकृतियों, मृदा, खनिज संसाधनों और अनेक भूगर्भीय प्रक्रियाओं से है। इसलिए भौतिक भूगोल के अध्ययन में शैलों का ज्ञान आवश्यक है।
प्रश्न 10. “चट्टानें पृथ्वी के इतिहास के पृष्ठ हैं” – समझाइए।
उत्तर: शैलों में खनिजों के साथ-साथ कई बार जीवाश्म, परतों और भूगर्भीय प्रक्रियाओं के प्रमाण सुरक्षित रहते हैं। इन प्रमाणों का अध्ययन करके पृथ्वी के पुराने वातावरण, जीव-जगत और भूगर्भीय घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इसलिए शैलों को पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक इतिहास के पृष्ठ कहा जाता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अंतर
खनिज और शैल में अंतर
| खनिज | शैल |
|---|---|
| प्राकृतिक अकार्बनिक पदार्थ | एक या अनेक खनिजों का समुच्चय हो सकती है |
| निश्चित रासायनिक संरचना होती है | संरचना खनिजों के अनुपात के अनुसार बदलती है |
| उदाहरण: क्वार्ट्ज | उदाहरण: ग्रेनाइट |
आग्नेय और अवसादी शैल में अंतर
| आग्नेय शैल | अवसादी शैल |
|---|---|
| मैग्मा या लावा से बनती है | अवसादों के निक्षेप से बनती है |
| सामान्यतः क्रिस्टलीय | अक्सर परतदार |
| जीवाश्म सामान्यतः नहीं | जीवाश्म मिल सकते हैं |
| ग्रेनाइट, बेसाल्ट | बलुआ पत्थर, चूना पत्थर |
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
- ग्रेनाइट के दो प्रमुख घटक कौन-से हैं?
(A) लोहा और निकिल
(B) सिलिका और एल्यूमीनियम
(C) लोहा और चाँदी
(D) लौह ऑक्साइड और पोटैशियमउत्तर: (B) सिलिका और एल्यूमीनियम
- एकमात्र तत्व से संबंधित खनिज का उदाहरण कौन-सा है?
(A) स्वर्ण
(B) चाँदी
(C) माइका
(D) ग्रेफाइटउत्तर: माइका एकल-तत्व खनिज नहीं है।
- सबसे कठोर प्राकृतिक खनिज कौन-सा है?
(A) टोपाज
(B) क्वार्ट्ज
(C) हीरा
(D) फेल्डस्परउत्तर: (C) हीरा
- निम्न में से कौन-सी अवसादी शैल है?
(A) बलुआ पत्थर
(B) अभ्रक
(C) ग्रेनाइट
(D) नीसउत्तर: (A) बलुआ पत्थर
- चट्टानों का अपने स्थान पर टूटना क्या कहलाता है?
(A) अपक्षय
(B) अपरदन
(C) निक्षेपण
(D) परिवहनउत्तर: (A) अपक्षय
- ग्रेनाइट किस प्रकार की शैल है?
(A) अवसादी
(B) कायांतरित
(C) आंतरिक आग्नेय
(D) जैविकउत्तर: (C) आंतरिक आग्नेय
- बेसाल्ट किस प्रकार की शैल है?
(A) बाह्य आग्नेय
(B) अवसादी
(C) कायांतरित
(D) रासायनिक अवसादीउत्तर: (A) बाह्य आग्नेय
- चूना पत्थर के कायांतरण से सामान्यतः कौन-सी शैल बनती है?
(A) बेसाल्ट
(B) संगमरमर
(C) ग्रेनाइट
(D) स्लेटउत्तर: (B) संगमरमर
- बलुआ पत्थर के कायांतरण से कौन-सी शैल बन सकती है?
(A) क्वार्ट्जाइट
(B) बेसाल्ट
(C) ग्रेनाइट
(D) कोयलाउत्तर: (A) क्वार्ट्जाइट
- दक्कन ट्रैप मुख्य रूप से किस शैल से संबंधित है?
(A) संगमरमर
(B) बेसाल्ट
(C) बलुआ पत्थर
(D) स्लेटउत्तर: (B) बेसाल्ट
अति महत्वपूर्ण एक-पंक्ति प्रश्न
- आग्नेय शैल का प्रमुख स्रोत: मैग्मा और लावा।
- बाह्य आग्नेय शैल का उदाहरण: बेसाल्ट।
- आंतरिक आग्नेय शैल का उदाहरण: ग्रेनाइट।
- सबसे कठोर खनिज: हीरा।
- अवसादी शैल का उदाहरण: बलुआ पत्थर।
- चूना पत्थर का कायांतरित रूप: संगमरमर।
- बलुआ पत्थर का कायांतरित रूप: क्वार्ट्जाइट।
- ग्रेनाइट का कायांतरित रूप: नीस।
- शैलों के अध्ययन का विज्ञान: पेट्रोलॉजी।
- शैलों के परिवर्तन की सतत प्रक्रिया: शैल चक्र।
- दक्कन ट्रैप की प्रमुख शैल: बेसाल्ट।
अध्याय का सारांश
खनिज एवं शैल अध्याय में पृथ्वी की भूपर्पटी के प्रमुख घटकों का अध्ययन किया जाता है। खनिज प्राकृतिक पदार्थ हैं, जबकि शैल एक या अनेक खनिजों से मिलकर बनी हो सकती है। शैलों को उनकी उत्पत्ति के आधार पर आग्नेय, अवसादी और कायांतरित तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है।
मैग्मा और लावा के ठंडा होने से आग्नेय शैल बनती हैं। अपक्षय और अपरदन से प्राप्त अवसादों के निक्षेप तथा शिलाभवन से अवसादी शैल बनती हैं। ताप और दबाव जैसी परिस्थितियों से पहले से मौजूद शैलों में परिवर्तन होने पर कायांतरित शैल बनती हैं। इन तीनों प्रकार की शैलों के बीच निरंतर परिवर्तन को शैल चक्र कहा जाता है।
इस अध्याय में खनिजों के प्रकार, आग्नेय शैलों की बनावट, अवसादी शैलों का निर्माण, कायांतरण, अपक्षय, शिलाभवन, दक्कन ट्रैप और खनिजों के आर्थिक महत्व को विशेष रूप से तैयार करना चाहिए।
अगला अध्याय
भूगोल के अगले अध्याय में आप भू-आकृतिक प्रक्रियाओं और पृथ्वी की सतह को बदलने वाली शक्तियों का अध्ययन करेंगे।
Chapter 4 – महासागरों और महाद्वीपों का वितरण
Chapter 6 – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
Bihar Board Class 11 Geography के सभी अध्याय
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 5 – खनिज एवं शैल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से शैलों के तीन प्रकार, उनके निर्माण की प्रक्रिया, आग्नेय शैलों की बनावट, अवसादी शैलों की विशेषताएँ, कायांतरित शैलों के उदाहरण और शैल चक्र को अच्छी तरह समझना चाहिए। साथ ही खनिज और शैल के बीच अंतर तथा महत्वपूर्ण उदाहरणों को याद करना परीक्षा में उपयोगी रहेगा।