Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना में पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाले गैसीय आवरण, उसकी संरचना, संघटन तथा विभिन्न वायुमंडलीय परतों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, धूलकण, ओजोन, क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, आयनमंडल और बाह्यमंडल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से वायुमंडल का संघटन, वायुमंडल की परतें, क्षोभमंडल की विशेषताएँ, ओजोन परत, आयनमंडल, जलवाष्प और धूलकण, मौसम एवं जलवायु के तत्व तथा ग्रीनहाउस प्रभाव अच्छी तरह तैयार करना चाहिए।
वायुमंडल क्या है?
पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गैसों के आवरण को वायुमंडल कहा जाता है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल इस गैसीय आवरण को पृथ्वी के साथ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वायुमंडल में विभिन्न गैसों के साथ जलवाष्प तथा अनेक प्रकार के सूक्ष्म ठोस और द्रव कण भी पाए जाते हैं। पृथ्वी पर जीवन, मौसम, जलचक्र और ताप संतुलन में वायुमंडल की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वायुमंडल का महत्व
पृथ्वी पर जीवन के लिए वायुमंडल अत्यंत आवश्यक है। इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:
- ऑक्सीजन जीव-जंतुओं के श्वसन के लिए आवश्यक है।
- कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के प्रकाश संश्लेषण में उपयोग होती है।
- ओजोन परत हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से रक्षा करती है।
- जलवाष्प जलचक्र और वर्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
- वायुमंडल पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
- मौसम और जलवायु की घटनाएँ वायुमंडल से संबंधित हैं।
- वायुमंडल में प्रवेश करने वाली अनेक उल्काएँ घर्षण के कारण जल सकती हैं।
- आयनमंडल रेडियो संचार से संबंधित प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वायुमंडल का संघटन
वायुमंडल अनेक गैसों का मिश्रण है। स्वच्छ और शुष्क वायु में नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन की मात्रा सबसे अधिक होती है। इनके अतिरिक्त आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा बहुत कम मात्रा में अन्य गैसें पाई जाती हैं।
| गैस | लगभग मात्रा |
|---|---|
| नाइट्रोजन | 78% |
| ऑक्सीजन | 21% |
| आर्गन | लगभग 0.93% |
| कार्बन डाइऑक्साइड | लगभग 0.04% के आसपास |
| अन्य गैसें | बहुत कम मात्रा |
जलवाष्प, धूलकण तथा अन्य सूक्ष्म कणों की मात्रा स्थान और समय के अनुसार बदलती रहती है।
नाइट्रोजन का महत्व
नाइट्रोजन वायुमंडल की सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। यह वायुमंडलीय गैसों के मिश्रण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण है। नाइट्रोजन पौधों के लिए भी आवश्यक पोषक तत्वों से संबंधित है और प्राकृतिक नाइट्रोजन चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ऑक्सीजन का महत्व
ऑक्सीजन अधिकांश जीव-जंतुओं के श्वसन के लिए आवश्यक है। दहन की प्रक्रिया में भी ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा नाइट्रोजन के बाद दूसरी सबसे अधिक है।
कार्बन डाइऑक्साइड का महत्व
वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसका महत्व बहुत अधिक है। पौधे प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं। यह पृथ्वी से निकलने वाले पार्थिव विकिरण के कुछ भाग को अवशोषित करके पृथ्वी के तापीय संतुलन को प्रभावित करती है।
जलवाष्प
वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा स्थिर नहीं रहती। यह स्थान, तापमान और मौसम के अनुसार बदलती रहती है। सामान्यतः गर्म और नम क्षेत्रों में जलवाष्प की मात्रा अधिक तथा ठंडे और शुष्क क्षेत्रों में कम होती है।
जलवाष्प का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह संघनन, बादल और वर्षण की प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह पृथ्वी के तापीय संतुलन को भी प्रभावित करती है।
धूलकण
वायुमंडल में समुद्री नमक, परागकण, राख, धुआँ, महीन मिट्टी और अन्य सूक्ष्म पदार्थों के कण पाए जाते हैं। इन्हें सामान्य रूप से धूलकण या वायुमंडलीय एरोसोल के रूप में समझा जाता है।
धूलकणों का महत्व
- ये सूर्य के विकिरण के प्रकीर्णन और अवशोषण को प्रभावित करते हैं।
- जलवाष्प के संघनन के लिए नाभिक के रूप में कार्य कर सकते हैं।
- बादल बनने की प्रक्रिया में इनकी भूमिका होती है।
- वायुमंडलीय दृश्यता को प्रभावित करते हैं।
- सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दिखाई देने वाले रंगों को प्रभावित कर सकते हैं।
वायुमंडल की परतें
तापमान में ऊँचाई के साथ होने वाले परिवर्तन के आधार पर वायुमंडल को मुख्य रूप से पाँच परतों में समझा जाता है:
- क्षोभमंडल
- समतापमंडल
- मध्यमंडल
- आयनमंडल/तापमंडलीय क्षेत्र
- बाह्यमंडल
1. क्षोभमंडल
क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है। मानव जीवन और मौसम की दृष्टि से यह सबसे महत्वपूर्ण परत है। इसकी ऊँचाई अक्षांश और मौसम के अनुसार बदलती रहती है।
क्षोभमंडल में अधिकांश जलवाष्प, धूलकण और मौसम संबंधी गतिविधियाँ पाई जाती हैं। बादल, वर्षा, आँधी, तूफान तथा अधिकांश मौसम परिवर्तन इसी परत में होते हैं।
क्षोभमंडल की प्रमुख विशेषताएँ
- यह वायुमंडल की सबसे निचली परत है।
- इसमें मौसम संबंधी अधिकांश घटनाएँ होती हैं।
- इसमें जलवाष्प और धूलकण अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं।
- ऊँचाई बढ़ने के साथ सामान्यतः तापमान घटता है।
- भूमध्य रेखा के ऊपर इसकी मोटाई ध्रुवों की तुलना में अधिक होती है।
क्षोभमंडल सीमा
क्षोभमंडल और उसके ऊपर स्थित समतापमंडल के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र को क्षोभसीमा कहा जाता है। इस सीमा की ऊँचाई सभी स्थानों पर समान नहीं होती।
भूमध्य रेखा के ऊपर क्षोभमंडल की ऊँचाई अधिक और ध्रुवों के ऊपर कम होती है।
2. समतापमंडल
क्षोभसीमा के ऊपर समतापमंडल स्थित है। इसमें वायु अपेक्षाकृत स्थिर और कम अशांत होती है। इस परत में ओजोन की अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र पाया जाता है, जिसे सामान्यतः ओजोन परत कहा जाता है।
समतापमंडल में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान सामान्यतः बढ़ता है। इसका प्रमुख कारण ओजोन द्वारा पराबैंगनी विकिरण का अवशोषण है।
समतापमंडल का महत्व
- इसमें ओजोन परत पाई जाती है।
- ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करती है।
- यह परत अपेक्षाकृत स्थिर होती है।
- उड़ान के लिए इसके निचले भाग की अपेक्षाकृत स्थिर वायु उपयोगी हो सकती है।
3. मध्यमंडल
समतापमंडल के ऊपर मध्यमंडल स्थित है। इस परत में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान फिर से घटने लगता है। इसकी ऊपरी सीमा के निकट तापमान बहुत कम हो सकता है।
अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर आने वाले अनेक छोटे उल्कीय पिंड इस क्षेत्र से गुजरते समय वायुमंडलीय घर्षण से गर्म होकर चमक सकते हैं।
4. आयनमंडल
आयनमंडल वायुमंडल का वह क्षेत्र है जहाँ सौर विकिरण के प्रभाव से गैसों के कण आयनीकृत हो जाते हैं। इस क्षेत्र में विद्युत आवेशित कणों की उपस्थिति महत्वपूर्ण है।
आयनमंडल रेडियो तरंगों के प्रसार और संचार से संबंधित प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आयनमंडल की विशेषताएँ
- इस क्षेत्र में आयनीकरण महत्वपूर्ण है।
- ऊँचाई के साथ तापमान में वृद्धि हो सकती है।
- विद्युत आवेशित कण पाए जाते हैं।
- रेडियो संचार में इसका महत्व है।
- ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा जैसी प्रकाशीय घटनाएँ इससे संबंधित हैं।
5. बाह्यमंडल
बाह्यमंडल वायुमंडल का सबसे बाहरी क्षेत्र है। यहाँ गैसों का घनत्व अत्यंत कम होता जाता है और वायुमंडल धीरे-धीरे बाह्य अंतरिक्ष में विलीन होता जाता है।
होमोस्फेयर और हेट्रोस्फेयर
रासायनिक संघटन के आधार पर वायुमंडल को व्यापक रूप से होमोस्फेयर और हेट्रोस्फेयर में विभाजित किया जाता है। Source में भी यह विभाजन दिया गया है।
होमोस्फेयर
वायुमंडल का निचला क्षेत्र जहाँ गैसों का मिश्रण अपेक्षाकृत अधिक समान रहता है, होमोस्फेयर कहलाता है। इसमें क्षोभमंडल, समतापमंडल और मध्यमंडल को शामिल किया जाता है।
हेट्रोस्फेयर
ऊँचाई बढ़ने पर गैसों का मिश्रण अलग-अलग परतों के रूप में व्यवस्थित होने लगता है। इस ऊपरी क्षेत्र को हेट्रोस्फेयर कहा जाता है। इसमें हल्की गैसों की सापेक्ष मात्रा अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
सीमा (Pause) क्या है?
वायुमंडल की दो प्रमुख तापीय परतों के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र को सीमा या Pause कहा जाता है। उदाहरण के लिए क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच क्षोभसीमा तथा समतापमंडल और मध्यमंडल के बीच समतापसीमा होती है।
मौसम और जलवायु
मौसम
किसी निश्चित समय और स्थान पर वायुमंडल की तत्कालीन या अल्पकालीन दशा को मौसम कहते हैं। तापमान, वायुदाब, हवा, आर्द्रता और वर्षण में परिवर्तन के कारण मौसम बदलता रहता है।
जलवायु
किसी क्षेत्र में लंबे समय तक देखी गई मौसम संबंधी दशाओं के औसत स्वरूप और उनकी परिवर्तनशीलता को जलवायु कहा जाता है।
मौसम और जलवायु के प्रमुख तत्व
- तापमान
- वायुदाब
- पवन
- आर्द्रता
- वर्षण
- बादल
जलवायु के प्रमुख नियंत्रक
किसी स्थान की जलवायु केवल वायुमंडलीय तत्वों पर निर्भर नहीं करती। विभिन्न भौगोलिक कारक इन तत्वों को प्रभावित करते हैं। प्रमुख जलवायु नियंत्रक हैं:
- अक्षांश
- स्थल और जल का वितरण
- ऊँचाई
- पवनें
- महासागरीय धाराएँ
- वायुदाब की प्रमुख पट्टियाँ
- पर्वतीय अवरोध
- तूफान तथा अन्य वायुमंडलीय प्रणालियाँ
ग्रीनहाउस प्रभाव
पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें पृथ्वी से निकलने वाले दीर्घतरंगीय विकिरण के एक भाग को अवशोषित करती हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण पृथ्वी का निचला वायुमंडल और सतह जीवन के लिए उपयुक्त तापमान बनाए रखने में सक्षम होते हैं। इसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है।
कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और जलवाष्प जैसी गैसें इस तापीय प्रक्रिया में योगदान करती हैं। मानव गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने पर अतिरिक्त ऊष्मीकरण और जलवायु परिवर्तन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
ओजोन परत
समतापमंडल में ओजोन की अपेक्षाकृत अधिक मात्रा वाला क्षेत्र पृथ्वी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओजोन सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के एक बड़े भाग को अवशोषित करती है।
इस कारण ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वायुमंडलीय गैसों का आयनीकरण
सूर्य से आने वाली उच्च ऊर्जा वाली विकिरणें वायुमंडल की ऊपरी परतों में गैसों के अणुओं और परमाणुओं को आयनीकृत कर सकती हैं। इस प्रक्रिया से विद्युत आवेशित कण उत्पन्न होते हैं। आयनमंडल की अनेक विशेषताएँ इसी आयनीकरण से जुड़ी हैं।
ऑरोरा
ध्रुवीय क्षेत्रों के ऊपरी वायुमंडल में दिखाई देने वाली रंगीन प्रकाशीय घटनाओं को ऑरोरा कहा जाता है। उत्तरी गोलार्द्ध में इसे ऑरोरा बोरियालिस और दक्षिणी गोलार्द्ध में ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस कहा जाता है।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. वायुमंडल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाले गैसों के आवरण को वायुमंडल कहते हैं। इसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प तथा विभिन्न सूक्ष्म कण पाए जाते हैं। पृथ्वी पर जीवन और मौसम संबंधी प्रक्रियाओं में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रश्न 2. वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सी गैस पाई जाती है?
उत्तर: वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में नाइट्रोजन पाई जाती है। स्वच्छ शुष्क वायु में इसकी मात्रा लगभग 78 प्रतिशत होती है।
प्रश्न 3. मौसम और जलवायु के प्रमुख तत्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर: तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षण मौसम एवं जलवायु के प्रमुख तत्व हैं।
प्रश्न 4. वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत कौन-सी है?
उत्तर: मानव जीवन और मौसम की दृष्टि से क्षोभमंडल सबसे महत्वपूर्ण परत है। इसी में अधिकांश जलवाष्प, धूलकण और मौसम संबंधी घटनाएँ पाई जाती हैं।
प्रश्न 5. क्षोभमंडल को महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
उत्तर: क्षोभमंडल में जलवाष्प और धूलकण पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं तथा बादल, वर्षा, आँधी और तूफान जैसी अधिकांश मौसम संबंधी घटनाएँ इसी परत में होती हैं। पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक अनेक प्रक्रियाएँ भी इससे संबंधित हैं।
प्रश्न 6. ओजोन गैस का क्या महत्व है?
उत्तर: ओजोन सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के एक बड़े भाग को अवशोषित करती है। इसलिए यह पृथ्वी की सतह पर मौजूद जीवों को अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 7. धूलकणों का वायुमंडल में क्या महत्व है?
उत्तर: धूलकण सूर्य के विकिरण के प्रकीर्णन को प्रभावित करते हैं और जलवाष्प के संघनन के लिए नाभिक का कार्य कर सकते हैं। इसलिए बादल और वर्षण की प्रक्रियाओं में इनका महत्व है।
प्रश्न 8. वायुमंडल पृथ्वी से जुड़ा कैसे रहता है?
उत्तर: पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल वायुमंडल की गैसों को पृथ्वी के आसपास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण वायुमंडल पृथ्वी से जुड़ा रहता है और अंतरिक्ष में तुरंत विलीन नहीं हो जाता।
प्रश्न 9. आयनमंडल क्या है?
उत्तर: वायुमंडल का ऊपरी क्षेत्र जहाँ सौर विकिरण के प्रभाव से गैसों के कणों का आयनीकरण होता है, आयनमंडल कहलाता है। यह रेडियो संचार और ऊपरी वायुमंडलीय घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 10. हेट्रोस्फेयर क्या है?
उत्तर: वायुमंडल का ऊपरी क्षेत्र जहाँ गैसों का संघटन ऊँचाई के साथ अलग-अलग परतों में बदलता है, हेट्रोस्फेयर कहलाता है। इसमें हल्की गैसों की सापेक्ष मात्रा ऊँचाई के साथ बढ़ती जाती है।
क्षोभमंडल और समतापमंडल में अंतर
| क्षोभमंडल | समतापमंडल |
|---|---|
| वायुमंडल की सबसे निचली परत है। | क्षोभमंडल के ऊपर स्थित है। |
| मौसम की अधिकांश घटनाएँ होती हैं। | वायु अपेक्षाकृत स्थिर होती है। |
| जलवाष्प और धूलकण अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। | जलवाष्प बहुत कम होती है। |
| ऊँचाई के साथ तापमान सामान्यतः घटता है। | ऊँचाई के साथ तापमान सामान्यतः बढ़ता है। |
| बादल, वर्षा और तूफान पाए जाते हैं। | ओजोन परत का प्रमुख क्षेत्र इसी में है। |
नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का महत्व
| गैस | प्रमुख महत्व |
|---|---|
| नाइट्रोजन | वायुमंडल की सबसे प्रमुख गैस; जैव-भूरासायनिक चक्र में महत्वपूर्ण। |
| ऑक्सीजन | श्वसन और दहन के लिए आवश्यक। |
| कार्बन डाइऑक्साइड | प्रकाश संश्लेषण तथा पृथ्वी के तापीय संतुलन में महत्वपूर्ण। |
जलवाष्प और धूलकण का महत्व
जलवाष्प और धूलकण दोनों मौसम एवं जलवायु की प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। जलवाष्प बादल और वर्षण के निर्माण के लिए आवश्यक है। धूलकण जलवाष्प के संघनन के लिए नाभिक का कार्य कर सकते हैं। दोनों पृथ्वी और वायुमंडल के बीच ऊर्जा के आदान-प्रदान को प्रभावित करते हैं।
वायुमंडल की संरचना का संक्षिप्त क्रम
| क्रम | परत | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | क्षोभमंडल | मौसम संबंधी घटनाएँ |
| 2 | समतापमंडल | ओजोन परत |
| 3 | मध्यमंडल | ऊँचाई के साथ तापमान में कमी |
| 4 | आयनमंडल/तापमंडलीय क्षेत्र | आयनीकरण और रेडियो संचार |
| 5 | बाह्यमंडल | अत्यंत विरल गैसें और बाह्य अंतरिक्ष की ओर संक्रमण |
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. वायुमंडल की संरचना एवं प्रत्येक परत की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वायुमंडल पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाला गैसीय आवरण है। इसमें विभिन्न गैसों, जलवाष्प तथा सूक्ष्म कणों का मिश्रण पाया जाता है। तापमान में ऊँचाई के साथ होने वाले परिवर्तन के आधार पर इसे मुख्य रूप से क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, आयनमंडल तथा बाह्यमंडल में समझा जाता है।
क्षोभमंडल सबसे निचली परत है। इसमें अधिकांश जलवाष्प और धूलकण पाए जाते हैं तथा बादल, वर्षा, आँधी और तूफान जैसी मौसम संबंधी घटनाएँ होती हैं।
समतापमंडल क्षोभमंडल के ऊपर स्थित है। इसमें वायु अपेक्षाकृत स्थिर रहती है और ओजोन की अधिक मात्रा वाला क्षेत्र पाया जाता है। ओजोन सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है।
मध्यमंडल में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान फिर घटता है। इसके बाद ऊपरी वायुमंडल में आयनीकरण महत्वपूर्ण हो जाता है। आयनमंडल रेडियो संचार और विद्युत आवेशित कणों के कारण महत्वपूर्ण है। सबसे ऊपर बाह्यमंडल है, जहाँ गैसों का घनत्व अत्यंत कम होता जाता है।
प्रश्न 2. वायुमंडल की संरचना और संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वायुमंडल मुख्यतः नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और आर्गन जैसी गैसों का मिश्रण है। इसके अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, ओजोन, नियॉन, हीलियम तथा अन्य गैसें कम मात्रा में पाई जाती हैं। वायुमंडल में धूलकण और अन्य एरोसोल भी मौजूद रहते हैं।
वायुमंडल की गैसों का अनुपात ऊँचाई के साथ बदलता है। निचले भाग में भारी गैसों की मात्रा अधिक रहती है, जबकि अधिक ऊँचाई पर हल्की गैसों का महत्व बढ़ जाता है। तापमान की संरचना के आधार पर वायुमंडल को विभिन्न परतों में बाँटा जाता है।
वायुमंडल केवल गैसों का आवरण नहीं है, बल्कि इसमें जलवाष्प और सूक्ष्म कण भी महत्वपूर्ण घटक हैं। जलवाष्प बादल और वर्षण से संबंधित है, जबकि धूलकण संघनन और विकिरण के प्रकीर्णन को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 3. वायुमंडल की रचना का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: वायुमंडल अनेक गैसों, जलवाष्प और धूलकणों से मिलकर बना है। नाइट्रोजन और ऑक्सीजन इसकी प्रमुख गैसें हैं। इनके अतिरिक्त आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, ओजोन, मीथेन, हीलियम, हाइड्रोजन तथा अन्य गैसें कम मात्रा में उपस्थित रहती हैं।
जलवाष्प की मात्रा स्थान और तापमान के अनुसार बदलती रहती है। गर्म और नम क्षेत्रों में इसकी मात्रा अधिक होती है। जलवाष्प बादल, वर्षा तथा अन्य वर्षण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है। धूलकण वायुमंडलीय विकिरण और संघनन को प्रभावित करते हैं।
ऊँचाई के साथ गैसों का घनत्व कम होता जाता है। तापमान में परिवर्तन के आधार पर वायुमंडल की विभिन्न परतें विकसित होती हैं। इस प्रकार वायुमंडल का संघटन और उसकी ऊर्ध्वाधर संरचना मिलकर पृथ्वी के मौसम, जलवायु और जीवन को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 4. वायुमंडलीय क्रियाएँ मौसम तथा जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
उत्तर: मौसम और जलवायु के प्रमुख तत्व तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता और वर्षण हैं। इन तत्वों का परस्पर संबंध वायुमंडलीय प्रक्रियाओं से होता है।
सूर्य से प्राप्त ऊर्जा पृथ्वी की सतह को असमान रूप से गर्म करती है। तापमान के इस असमान वितरण से वायुदाब में अंतर उत्पन्न होता है और पवन चलती है। जलवाष्प वायुमंडल में आर्द्रता प्रदान करती है तथा संघनन के बाद बादल बन सकते हैं। पर्याप्त परिस्थितियों में वर्षा, हिमपात या अन्य प्रकार का वर्षण होता है।
अक्षांश, ऊँचाई, स्थल और जल का वितरण, महासागरीय धाराएँ, पवनें तथा पर्वतीय अवरोध जैसे जलवायु नियंत्रक इन तत्वों को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावित करते हैं। परिणामस्वरूप पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार की मौसम और जलवायु दशाएँ विकसित होती हैं।
प्रश्न 5. वायुमंडल के संघटन तथा ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड के महत्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर: वायुमंडल में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाली गैसें हैं। आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसें कम मात्रा में उपस्थित हैं। जलवाष्प तथा धूलकणों की मात्रा स्थान और समय के अनुसार बदलती रहती है।
नाइट्रोजन वायुमंडल की सबसे प्रमुख गैस है और जैविक चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऑक्सीजन जीव-जंतुओं के श्वसन और दहन के लिए आवश्यक है। कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है और पृथ्वी के तापीय संतुलन को प्रभावित करती है।
इसके अतिरिक्त ओजोन पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करके जीवन की रक्षा करती है। इस प्रकार कम मात्रा में मौजूद कुछ गैसें भी वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सी गैस पाई जाती है?
(A) ऑक्सीजन
(B) आर्गन
(C) नाइट्रोजन
(D) कार्बन डाइऑक्साइडउत्तर: (C) नाइट्रोजन
निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ धूलकणों से संबंधित हैं?
(A) समुद्री नमक
(B) पराग
(C) राख और कालिमा
(D) उपर्युक्त सभीउत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
सौर विकिरण और पार्थिव विकिरण के संदर्भ में महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस कौन-सी है?
(A) नाइट्रोजन
(B) ऑक्सीजन
(C) आर्गन
(D) कार्बन डाइऑक्साइडउत्तर: (D) कार्बन डाइऑक्साइड
पृथ्वी से भेजी गई रेडियो तरंगों के प्रसार में कौन-सा वायुमंडलीय क्षेत्र महत्वपूर्ण है?
(A) क्षोभमंडल
(B) समतापमंडल
(C) आयनमंडल
(D) बाह्यमंडलउत्तर: (C) आयनमंडल
वायुमंडल की सबसे निचली परत कौन-सी है?
(A) समतापमंडल
(B) क्षोभमंडल
(C) मध्यमंडल
(D) बाह्यमंडलउत्तर: (B) क्षोभमंडल
ओजोन परत मुख्य रूप से किस परत से संबंधित है?
(A) क्षोभमंडल
(B) समतापमंडल
(C) मध्यमंडल
(D) बाह्यमंडलउत्तर: (B) समतापमंडल
अति महत्वपूर्ण एक-पंक्ति प्रश्न
- वायुमंडल: पृथ्वी के चारों ओर फैला गैसीय आवरण।
- सबसे अधिक गैस: नाइट्रोजन।
- दूसरी प्रमुख गैस: ऑक्सीजन।
- सबसे निचली परत: क्षोभमंडल।
- ओजोन परत: मुख्यतः समतापमंडल में।
- रेडियो संचार में महत्वपूर्ण ऊपरी क्षेत्र: आयनमंडल।
- वायुमंडल की सबसे बाहरी परत: बाह्यमंडल।
- मौसम की अधिकांश घटनाएँ: क्षोभमंडल में।
- पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करने वाली गैस: ओजोन।
- प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक गैस: कार्बन डाइऑक्साइड।
- श्वसन के लिए आवश्यक प्रमुख गैस: ऑक्सीजन।
- जलवाष्प का प्रमुख महत्व: बादल और वर्षण निर्माण में।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अंतर
मौसम और जलवायु में अंतर
| मौसम | जलवायु |
|---|---|
| किसी स्थान की अल्पकालीन वायुमंडलीय दशा। | लंबी अवधि में मौसम की औसत दशाओं का स्वरूप। |
| तेजी से बदल सकता है। | लंबे समय में अपेक्षाकृत स्थिर पैटर्न दिखाता है। |
| आज बारिश, तापमान या हवा की स्थिति मौसम का उदाहरण है। | किसी क्षेत्र का दीर्घकालीन गर्म, ठंडा, नम या शुष्क स्वरूप जलवायु का उदाहरण है। |
क्षोभमंडल और समतापमंडल में अंतर
| आधार | क्षोभमंडल | समतापमंडल |
|---|---|---|
| स्थिति | सबसे निचली परत | क्षोभमंडल के ऊपर |
| मौसम | अधिकांश मौसम घटनाएँ | बहुत कम मौसम गतिविधि |
| जलवाष्प | अधिक | बहुत कम |
| तापमान | ऊँचाई के साथ सामान्यतः घटता है | ऊँचाई के साथ सामान्यतः बढ़ता है |
| विशेषता | बादल, वर्षा, आँधी | ओजोन परत |
अध्याय का सारांश
वायुमंडल का संघटन तथा संरचना अध्याय में पृथ्वी के गैसीय आवरण की संरचना और उसकी विभिन्न परतों का अध्ययन किया जाता है। वायुमंडल में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन सबसे प्रमुख गैसें हैं। इसके अलावा आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, ओजोन तथा विभिन्न धूलकण और एरोसोल भी पाए जाते हैं।
तापमान की ऊँचाई के अनुसार वायुमंडल को मुख्य रूप से क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, आयनमंडल और बाह्यमंडल में समझा जाता है। क्षोभमंडल में अधिकांश मौसम संबंधी घटनाएँ होती हैं, जबकि समतापमंडल में ओजोन परत महत्वपूर्ण है। आयनमंडल आयनीकरण और रेडियो संचार से संबंधित है।
इस अध्याय में मौसम, जलवायु, जलवाष्प, धूलकण, ग्रीनहाउस प्रभाव, ओजोन परत, वायुमंडलीय गैसों का महत्व और जलवायु नियंत्रक भी महत्वपूर्ण विषय हैं। परीक्षा की तैयारी करते समय इन विषयों की परिभाषा, विशेषताएँ और आपसी अंतर अवश्य तैयार करें।
पिछला और अगला अध्याय
Chapter 7 – भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास
Chapter 9 – सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान
Bihar Board Class 11 Geography के सभी अध्याय
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना को अच्छी तरह तैयार करने के लिए वायुमंडल की गैसों, पाँच प्रमुख परतों, क्षोभमंडल की विशेषताओं, ओजोन परत, आयनमंडल, जलवाष्प, धूलकण और मौसम एवं जलवायु के तत्वों को समझना आवश्यक है। विशेष रूप से क्षोभमंडल एवं समतापमंडल का अंतर, वायुमंडल की संरचना, ग्रीनहाउस प्रभाव तथा नाइट्रोजन-ऑक्सीजन-कार्बन डाइऑक्साइड का महत्व परीक्षा में उपयोगी विषय हैं।