Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 11 – द्रव्य के तापीय गुण में तापमान, तापमिति, ऊष्मीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा धारिता, गुप्त ऊष्मा, ऊष्मा का संचरण, ऊष्मीय विकिरण और न्यूटन का शीतलन नियम जैसे महत्वपूर्ण topics का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय Bihar Board Class 11 Physics की परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें theory के साथ कई numerical questions भी आते हैं।
इस पोस्ट में Bihar Board Class 11 Physics Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, आवश्यक formulas, step-by-step numericals, objective questions और chapter summary को आसान हिंदी में समझाया गया है।
पिछला अध्याय:
Chapter 10 – तरलों के यांत्रिकी गुण
अध्याय 11 – द्रव्य के तापीय गुण
तापीय गुणों का संबंध पदार्थ के तापमान में परिवर्तन, ऊष्मा के आदान-प्रदान तथा तापमान बदलने पर पदार्थ के आकार, आयतन और अन्य भौतिक गुणों में होने वाले परिवर्तन से है।
इस अध्याय में तापमान मापने के विभिन्न पैमाने, तापीय प्रसार, ऊष्मा धारिता, विशिष्ट ऊष्मा, अवस्था परिवर्तन, ऊष्मा संचरण और विकिरण को समझाया जाता है।
तापमान और ऊष्मा
तापमान किसी वस्तु की गर्माहट या ठंडक की अवस्था का माप है। दो वस्तुओं के बीच ऊष्मा का प्रवाह तापमान के अंतर के कारण होता है।
ऊष्मा वह ऊर्जा है जो तापमान के अंतर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित होती है।
ऊष्मा का SI मात्रक जूल (J) है।
तापमिति (Thermometry)
तापमान को मापने की प्रक्रिया को तापमिति कहते हैं। तापमान मापने के लिए ऐसे भौतिक गुण का उपयोग किया जाता है जो तापमान के साथ नियमित रूप से बदलता हो।
उदाहरण:
- द्रव का आयतन
- गैस का दाब
- विद्युत प्रतिरोध
- तापीय विकिरण
तापमान के प्रमुख पैमाने
सेल्सियस पैमाना
सेल्सियस पैमाने पर सामान्य वायुमंडलीय दाब में बर्फ का गलनांक 0°C और जल का क्वथनांक 100°C माना जाता है।
फारेनहाइट पैमाना
फारेनहाइट पैमाने पर सामान्य वायुमंडलीय दाब में बर्फ का गलनांक 32°F और जल का क्वथनांक 212°F होता है।
केल्विन पैमाना
केल्विन एक परम तापमान पैमाना है। सेल्सियस और केल्विन तापमान में संबंध:
T(K) = t(°C) + 273.15
अर्थात्
t(°C) = T(K) − 273.15
तापमान पैमानों के बीच संबंध
सेल्सियस और फारेनहाइट पैमानों के लिए:
C/100 = (F − 32)/180
अथवा
F = (9/5)C + 32
जल का त्रिक बिंदु
वह ताप और दाब जिस पर जल की ठोस, द्रव और वाष्प तीनों अवस्थाएँ एक साथ साम्य में उपस्थित रहती हैं, त्रिक बिंदु (Triple Point) कहलाता है। जल के त्रिक बिंदु का ताप लगभग 273.16 K है।
आधुनिक तापमिति में त्रिक बिंदु को एक महत्वपूर्ण मानक नियत बिंदु माना जाता है क्योंकि यह निश्चित परिस्थितियों में एक विशिष्ट अवस्था है।
प्रश्न 11.1 – त्रिक बिंदु को Celsius और Fahrenheit में बदलना
प्रश्न: निऑन तथा CO2 के त्रिक बिंदु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को Celsius और Fahrenheit में व्यक्त कीजिए।
निऑन के लिए
केल्विन से सेल्सियस:
t = T − 273.15
t = 24.57 − 273.15 = −248.58°C
फारेनहाइट:
F = (9/5)t + 32
अतः
F ≈ −415.44°F
CO2 के लिए
t = 216.55 − 273.15 = −56.60°C
अतः
F ≈ −69.88°F
प्रश्न 11.2 – दो परम ताप पैमानों का संबंध
यदि दो परम ताप पैमानों A और B पर जल के त्रिक बिंदु के तापमान क्रमशः 200 A और 350 B दिए गए हैं, तो समान वास्तविक तापमान के लिए:
TA/TB = 350/200
अतः
TA/TB = 7/4
उत्तर: TA : TB = 7 : 4
प्रतिरोध तापमापी
किसी तापमापी में तापमान के साथ विद्युत प्रतिरोध बदलता है। यदि प्रतिरोध और तापमान का संबंध लगभग रैखिक हो, तो:
R = R0[1 + α(T − T0)]
जहाँ R0 संदर्भ ताप T0 पर प्रतिरोध और α ताप गुणांक है।
प्रश्न 11.3 – प्रतिरोध तापमापी से ताप ज्ञात करना
यदि किसी तापमापी का प्रतिरोध 273.16 K पर 101.6 Ω, 600.5 K पर 165.5 Ω और अज्ञात ताप पर 123.4 Ω है, तो दिए गए calibration relation से अज्ञात ताप निर्धारित किया जाता है।
Reference में दिए गए calculation के अनुसार ताप लगभग:
T ≈ 385 K
अर्थात् लगभग 111.85°C।
आधुनिक तापमिति में त्रिक बिंदु का महत्व
जल का हिमांक और क्वथनांक दाब में परिवर्तन से प्रभावित हो सकते हैं। इसके विपरीत जल का त्रिक बिंदु एक निश्चित अवस्था को दर्शाता है और इसलिए आधुनिक तापमिति में इसका विशेष महत्व है।
केल्विन पैमाने पर जल के त्रिक बिंदु का मान 273.16 K निर्धारित किया गया है।
प्रश्न 11.4 – तापमिति के महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न
(a) त्रिक बिंदु को मानक नियत बिंदु क्यों माना जाता है?
उत्तर: त्रिक बिंदु ठोस, द्रव और वाष्प तीनों अवस्थाओं के एक निश्चित साम्य से संबंधित है। इसलिए यह तापमिति के लिए एक पुनरुत्पाद्य मानक प्रदान करता है।
(b) परम ताप पैमाने पर दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु कौन-सा है?
उत्तर: परम शून्य ताप, अर्थात् 0 K, परम ताप पैमाने की मूल सीमा है।
(c) T = tC + 273.15 क्यों?
उत्तर: 0°C का संगत ताप 273.15 K है। इसलिए Celsius और Kelvin के बीच 273.15 का अंतर रहता है।
प्रश्न 11.5 – गैस तापमापी
आदर्श गैस तापमापी के लिए स्थिर आयतन पर दाब तापमान के समानुपाती माना जाता है:
T/Ttr = P/Ptr
दिए गए oxygen और hydrogen gas thermometer के readings से सल्फर के सामान्य गलनांक का परम ताप निकाला जाता है। Reference के अनुसार दोनों तापमापियों से क्रमशः लगभग 392.69 K और 391.98 K प्राप्त होते हैं। 1
दोनों परिणामों में थोड़ा अंतर इसलिए आता है क्योंकि वास्तविक गैसें पूरी तरह आदर्श व्यवहार नहीं करतीं। कम दाब पर measurement करने से आदर्श व्यवहार के निकट परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।
ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion)
तापमान बढ़ाने पर अधिकांश पदार्थों के आयाम बढ़ जाते हैं। इस घटना को ऊष्मीय प्रसार कहते हैं।
ऊष्मीय प्रसार मुख्यतः तीन प्रकार का होता है:
- रेखीय प्रसार
- क्षेत्रीय प्रसार
- आयतन प्रसार
रेखीय प्रसार
किसी वस्तु की लंबाई में तापमान परिवर्तन के कारण होने वाले परिवर्तन को रेखीय प्रसार कहते हैं।
रेखीय प्रसार गुणांक:
α = ΔL/(LΔT)
अतः
ΔL = αLΔT
नई लंबाई:
L2 = L1(1 + αΔT)
क्षेत्रीय प्रसार
तापमान परिवर्तन से किसी ठोस की सतह के क्षेत्रफल में परिवर्तन को क्षेत्रीय प्रसार कहते हैं।
क्षेत्रीय प्रसार गुणांक को β से प्रदर्शित किया जाता है। समदैशिक ठोस के लिए:
β ≈ 2α
आयतन प्रसार
तापमान परिवर्तन से वस्तु के आयतन में होने वाले परिवर्तन को आयतन प्रसार कहते हैं।
आयतन प्रसार गुणांक:
γ = ΔV/(VΔT)
समदैशिक ठोस के लिए लगभग:
γ ≈ 3α
छेद के तापीय प्रसार का नियम
यदि किसी धातु की चादर में छेद हो और पूरी चादर को गर्म किया जाए, तो छेद भी उसी अनुपात में फैलता है जैसे चादर का पदार्थ फैलता है।
इसलिए छेद का व्यास भी तापमान बढ़ने पर बढ़ता है।
प्रश्न 11.6 – स्टील के फीते से लंबाई का मापन
27°C पर ठीक calibrated स्टील tape से 45°C पर किसी स्टील की छड़ की लंबाई 63.0 cm मापी जाती है। स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक:
α = 1.20 × 10−5 K−1
तापमान अंतर:
ΔT = 45 − 27 = 18°C
100 cm tape में विस्तार:
ΔL = αLΔT
ΔL = 1.20 × 10−5 × 100 × 18
ΔL = 0.0216 cm
63 cm के लिए वृद्धि:
Δl = 0.0136 cm
अतः वास्तविक लंबाई लगभग:
L = 63.0136 cm
Reference में भी लगभग यही परिणाम दिया गया है। 2
प्रश्न 11.7 – पहिए को धुरी पर चढ़ाने के लिए ठंडा करना
27°C पर स्टील की धुरी का व्यास 8.70 cm और पहिए के छेद का व्यास 8.69 cm है। पहिए को चढ़ाने के लिए धुरी को इतना ठंडा करना होगा कि उसका व्यास 8.69 cm हो जाए।
सूत्र:
L2 = L1[1 + α(T2 − T1)]
दिए गए मानों को रखने पर reference में धुरी का ताप लगभग −69°C प्राप्त होता है। 3
प्रश्न 11.8 – गर्म करने पर छेद का व्यास
दिया है:
- प्रारंभिक ताप = 27°C
- अंतिम ताप = 227°C
- ΔT = 200°C
- प्रारंभिक व्यास = 4.24 cm
- α = 1.70 × 10−5 K−1
छेद भी उसी पदार्थ का हिस्सा है, इसलिए व्यास में परिवर्तन के लिए रेखीय प्रसार का संबंध प्रयोग किया जा सकता है:
Δd = αdΔT
Δd = 1.70 × 10−5 × 4.24 × 200
Δd ≈ 0.0144 cm
उत्तर: छेद के व्यास में लगभग 1.44 × 10−2 cm की वृद्धि होगी।
तापीय प्रतिबल
यदि किसी वस्तु को गर्म या ठंडा करने पर उसका प्रसार या संकुचन पूरी तरह रोक दिया जाए, तो उसमें तापीय प्रतिबल उत्पन्न हो सकता है।
यदि लंबाई में मुक्त तापीय परिवर्तन:
ΔL = αLΔT
हो और वस्तु को पूरी तरह रोक दिया जाए, तो तापीय विकृति लगभग αΔT होगी।
यंग गुणांक Y के लिए तापीय प्रतिबल:
Stress = YαΔT
और यदि क्षेत्रफल A हो, तो बल:
F = YAαΔT
प्रश्न 11.9 – तापीय संकुचन से तार में तनाव
यदि किसी तार को दो कठोर टेकों के बीच इस प्रकार रखा गया हो कि उसका प्रसार या संकुचन संभव न हो, तो तापमान घटने पर तार में तनाव उत्पन्न होगा।
मुक्त लंबाई परिवर्तन:
ΔL = αLΔT
तापीय प्रतिबल:
Stress = Yα|ΔT|
अतः तनाव बल:
F = YAα|ΔT|
Reference के दिए गए numerical data के अनुसार बल लगभग 3.81 × 102 N दिया गया है। 4
प्रश्न 11.10 – पीतल और स्टील की संयुक्त छड़
50 cm लंबी पीतल की छड़ और 50 cm लंबी स्टील की छड़ को जोड़ा गया है। दोनों की प्रारंभिक लंबाई 40°C पर है और अंतिम ताप 250°C है।
तापमान परिवर्तन:
ΔT = 250 − 40 = 210°C
पीतल की छड़
ΔLB = αBLΔT
ΔLB = 2.0 × 10−5 × 50 × 210
ΔLB = 0.21 cm
स्टील की छड़
ΔLS = 1.2 × 10−5 × 50 × 210
ΔLS = 0.126 cm
कुल परिवर्तन:
ΔL = 0.21 + 0.126 = 0.336 cm
उत्तर: संयुक्त छड़ की लंबाई में लगभग 0.336 cm की वृद्धि होगी।
क्योंकि दोनों सिरों को प्रसार के लिए स्वतंत्र रखा गया है, reference के अनुसार संधि पर तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होता। 5
द्रवों का तापीय प्रसार
द्रवों में मुख्य रूप से आयतन प्रसार का अध्ययन किया जाता है क्योंकि उनका निश्चित आकार नहीं होता।
आयतन प्रसार:
ΔV = γVΔT
तापमान बढ़ने पर अधिकांश द्रवों का आयतन बढ़ता है और समान द्रव्यमान के लिए घनत्व घटता है।
प्रश्न 11.11 – ताप बढ़ने पर ग्लिसरीन के घनत्व में परिवर्तन
दिया है:
- आयतन प्रसार गुणांक = 4.9 × 10−5 K−1
- तापमान वृद्धि = 30°C
आयतन:
V2 = V1(1 + γΔT)
क्योंकि द्रव्यमान स्थिर है और
ρ = m/V
इसलिए आयतन बढ़ने पर घनत्व घटता है।
छोटे परिवर्तन के लिए:
Δρ/ρ ≈ −γΔT
Δρ/ρ ≈ −4.9 × 10−5 × 30
Δρ/ρ ≈ −1.47 × 10−3
ऋणात्मक चिन्ह बताता है कि तापमान बढ़ने पर घनत्व कम होता है।
असामान्य ऊष्मीय प्रसार
कुछ पदार्थ सामान्य नियम से अलग व्यवहार करते हैं। जल इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। 0°C से 4°C तक गर्म करने पर जल का आयतन घटता है और घनत्व बढ़ता है। 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है। इसके बाद तापमान बढ़ाने पर जल सामान्य रूप से फैलता है।
ऊष्मा धारिता
किसी वस्तु का तापमान 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा को उस वस्तु की ऊष्मा धारिता (Heat Capacity) कहते हैं।
C = Q/ΔT
SI मात्रक:
J/K
विशिष्ट ऊष्मा धारिता
किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का तापमान 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा को विशिष्ट ऊष्मा धारिता कहते हैं।
Q = mcΔT
जहाँ c विशिष्ट ऊष्मा धारिता है।
SI मात्रक:
J kg−1 K−1
प्रश्न 11.12 – बरमी से एल्युमिनियम ब्लॉक का ताप बढ़ना
यदि शक्ति P समय t तक कार्य करती है, तो दी गई ऊर्जा:
Q = Pt
यदि इसका केवल η भाग ब्लॉक द्वारा अवशोषित किया जाए, तो:
Qabsorbed = ηPt
और
Q = mcΔT
अतः
ΔT = ηPt/(mc)
इस प्रकार दिए गए numerical में शक्ति, समय, द्रव्यमान और aluminium की specific heat capacity का उपयोग करके ताप वृद्धि निकाली जाती है। Reference में दिए गए data और calculation के अनुसार लगभग 103°C का परिणाम दिया गया है। 6
गुप्त ऊष्मा
अवस्था परिवर्तन के दौरान पदार्थ का तापमान स्थिर रहते हुए जो ऊष्मा अवशोषित या मुक्त होती है, उसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
गुप्त ऊष्मा:
Q = mL
जहाँ L विशिष्ट गुप्त ऊष्मा है।
संगलन की गुप्त ऊष्मा
ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा को संगलन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा
द्रव को उसके क्वथनांक पर वाष्प में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा को वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
प्रश्न 11.13 – गर्म ताँबे के गुटके से बर्फ का गलना
दिया है:
- ताँबे का द्रव्यमान = 2.5 kg
- प्रारंभिक ताप = 500°C
- ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा = 0.39 J g−1 K−1
- बर्फ की संगलन ऊष्मा = 335 J g−1
ताँबे के गुटके के 500°C से 0°C तक ठंडा होने पर छोड़ी गई ऊष्मा:
Q = mcΔT
Q = 2.5 × 390 × 500
यह ऊष्मा बर्फ को गलाने में खर्च होती है:
Q = miceLf
अतः
mice = mcΔT/Lf
Reference calculation के अनुसार अधिकतम बर्फ का द्रव्यमान लगभग 1.45 kg प्राप्त होता है। 7
ऊष्मामापी (Calorimetry)
किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता ज्ञात करने के लिए ऊष्मामापी का उपयोग किया जाता है। आदर्श स्थिति में:
गर्म वस्तु द्वारा खोई ऊष्मा = ठंडी वस्तु द्वारा प्राप्त ऊष्मा
यही ऊष्मा विनिमय का सिद्धांत है।
प्रश्न 11.14 – धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता
यदि गर्म धातु के गुटके को जल और ऊष्मामापी में डालने पर अंतिम तापमान प्राप्त हो, तो:
धातु द्वारा खोई ऊष्मा = जल + ऊष्मामापी द्वारा प्राप्त ऊष्मा
धातु के लिए:
Qlost = mmcm(Ti − Tf)
जल और ऊष्मामापी के लिए:
Qgained = (mwcw + Wcw)(Tf − Tw)
जहाँ W जल तुल्यांक है।
परिवेश में ऊष्मा का क्षय हो तो केवल आदर्श heat balance से प्राप्त विशिष्ट ऊष्मा वास्तविक मान से अलग हो सकती है।
गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा
गैस के अणुओं में ऊर्जा के विभिन्न degrees of freedom हो सकते हैं। एकपरमाणुक गैसों में मुख्यतः स्थानांतरीय गति होती है, जबकि द्विपरमाणुक गैसों में घूर्णी गति के अतिरिक्त अन्य ऊर्जा modes भी योगदान दे सकते हैं।
इसी कारण विभिन्न गैसों की molar specific heat capacities अलग-अलग हो सकती हैं।
प्रश्न 11.15 – गैसों की विशिष्ट ऊष्मा में अंतर
द्विपरमाणुक गैसों के अणु केवल स्थानांतरीय गति तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे अपने कुछ घूर्णी degrees of freedom में भी ऊर्जा रख सकते हैं। इसलिए उनकी molar specific heat एकपरमाणुक गैसों की तुलना में अधिक हो सकती है।
किसी गैस की विशिष्ट ऊष्मा का असामान्य रूप से अधिक होना अतिरिक्त सक्रिय degrees of freedom की ओर संकेत कर सकता है।
वाष्पीकरण द्वारा शीतलन
किसी द्रव के वाष्पीकरण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा आसपास या द्रव की सतह से ली जाती है, जिसके कारण शीतलन होता है।
इसी कारण पसीने के वाष्पीकरण से मानव शरीर का तापमान कम करने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 11.16 – पसीने के वाष्पीकरण की दर
दिया है:
- शरीर का द्रव्यमान = 30 kg
- ताप में कमी = 101°F − 98°F = 3°F
- समय = 20 min
- जल के समान विशिष्ट ऊष्मा धारिता
- वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा = 580 cal/g
पहले तापमान अंतर को Celsius में बदलें:
ΔT = 3 × 5/9 = 5/3°C
शरीर से निकलने वाली ऊष्मा:
Q = mcΔT
यह ऊष्मा पसीने के वाष्पीकरण में खर्च होती है:
Q = msL
अतः
ms = mcΔT/L
Reference calculation के अनुसार 20 मिनट में लगभग 0.0862 kg पसीना वाष्पित होता है।
औसत दर:
Rate ≈ 4.31 g/min
8
ऊष्मा का संचरण
ऊष्मा तीन प्रमुख तरीकों से स्थानांतरित हो सकती है:
- चालन (Conduction)
- संवहन (Convection)
- विकिरण (Radiation)
चालन (Conduction)
पदार्थ के कणों के वास्तविक स्थानांतरण के बिना, एक भाग से दूसरे भाग में ऊष्मा के स्थानांतरण को चालन कहते हैं। ठोस पदार्थों में यह प्रक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
ऊष्मीय चालकता
समतल स्लैब के लिए ऊष्मा प्रवाह की दर:
Q/t = KAΔT/L
जहाँ K ऊष्मीय चालकता, A क्षेत्रफल, ΔT तापांतर और L मोटाई है।
प्रश्न 11.17 – थर्मोकोल हिम बॉक्स
हिम बॉक्स में बाहर का तापमान अधिक होने के कारण ऊष्मा थर्मोकोल की दीवार से अंदर प्रवेश करती है। यह ऊष्मा बर्फ को गलाने में खर्च होती है।
चालन से प्राप्त ऊष्मा:
Q = KA(ΔT/d)t
बर्फ गलाने के लिए:
Q = mLf
अतः
m = KAΔTt/(dLf)
Reference के अनुसार 6 घंटे में लगभग 0.313 kg बर्फ पिघलती है और 4 kg में से लगभग 3.687 kg, यानी लगभग 3.7 kg बर्फ बचती है। 9
प्रश्न 11.18 – पीतल के बॉयलर का तापमान
बॉयलर की तली से ऊष्मा conduction द्वारा जल तक पहुँचती है।
ऊष्मा प्रवाह की दर:
Q/t = KA(θ1 − θ2)/d
उबलते जल को वाष्प में बदलने के लिए प्रति सेकंड आवश्यक ऊष्मा:
Q/t = ṁL
अतः
KA(θ1 − θ2)/d = ṁL
दिए गए आंकड़ों के अनुसार reference में flame-contact वाले हिस्से का ताप लगभग 238°C प्राप्त किया गया है। 10
विकिरण (Radiation)
ऊष्मा के उस स्थानांतरण को विकिरण कहते हैं जिसमें माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। सूर्य से पृथ्वी तक ऊर्जा का पहुँचना विकिरण का प्रमुख उदाहरण है।
विकिरण विद्युतचुंबकीय तरंगों के रूप में ऊर्जा का स्थानांतरण करता है।
कृष्णिका (Black Body)
ऐसा आदर्श पिंड जो उस पर पड़ने वाले सभी प्रकार के विकिरणों को पूर्णतः अवशोषित कर ले, कृष्णिका कहलाता है।
कृष्णिका का उत्सर्जन भी आदर्श विकिरण व्यवहार का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण है।
अवशोषण, परावर्तन और उत्सर्जन
जब किसी वस्तु पर विकिरण पड़ता है तो उसका कुछ भाग अवशोषित, कुछ परावर्तित और कुछ संचारित हो सकता है।
किसी अच्छे अवशोषक का उत्सर्जन भी सामान्यतः अच्छा होता है। इसी कारण अच्छे अवशोषक और अच्छे उत्सर्जक के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया जाता है।
प्रश्न 11.19 – तापीय विकिरण से संबंधित कारण
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिंड अल्प उत्सर्जक क्यों होते हैं?
उत्तर: अधिक परावर्तकता का अर्थ है कि पिंड आने वाले विकिरण का बड़ा भाग परावर्तित कर देता है। इसलिए उसकी अवशोषण क्षमता कम होती है और thermal equilibrium की स्थिति में उसकी उत्सर्जन क्षमता भी कम होती है।
(b) पीतल का गिलास लकड़ी की ट्रे से अधिक ठंडा क्यों लगता है?
उत्तर: पीतल ऊष्मा का अच्छा चालक है। इसलिए वह हाथ से ऊष्मा तेजी से लेता है। लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है और हाथ से ऊष्मा धीरे लेती है। इसलिए समान तापमान पर भी पीतल अधिक ठंडा महसूस होता है।
(c) खुले में तप्त लोहे का ताप optical pyrometer कम क्यों दिखा सकता है?
उत्तर: खुले वातावरण में तप्त वस्तु तेजी से ऊष्मा खो सकती है और उसका ताप स्थिर नहीं रह सकता। भट्टी में ताप अपेक्षाकृत स्थिर रहने से विकिरण आधारित मापन अधिक उपयुक्त हो सकता है।
(d) वातावरण पृथ्वी के लिए blanket की तरह कैसे काम करता है?
उत्तर: वायुमंडल पृथ्वी की सतह से निकलने वाले कुछ दीर्घ-तरंग ऊष्मीय विकिरणों को अवशोषित और पुनः उत्सर्जित करता है। इससे पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन पर प्रभाव पड़ता है।
(e) भाप से heating अधिक प्रभावी क्यों हो सकती है?
उत्तर: भाप के संघनन के समय बड़ी मात्रा में गुप्त ऊष्मा निकलती है। इसलिए समान द्रव्यमान की गर्म जल की तुलना में भाप अधिक ऊर्जा स्थानांतरित कर सकती है।
न्यूटन का शीतलन नियम
जब किसी गर्म वस्तु और उसके आसपास के वातावरण के बीच तापमान अंतर बहुत अधिक न हो, तो वस्तु के ठंडा होने की दर लगभग उसके और परिवेश के तापमान के अंतर के समानुपाती होती है।
−dT/dt ∝ (T − Ts)
जहाँ T वस्तु का तापमान और Ts परिवेश का तापमान है।
प्रश्न 11.20 – न्यूटन के शीतलन नियम का numerical
किसी वस्तु का तापमान 5 मिनट में 80°C से 50°C हो जाता है और परिवेश का तापमान 20°C है। 60°C से 30°C तक ठंडा होने में लगने वाला समय ज्ञात करना है।
पहले तापमानों का औसत:
Tavg1 = (80 + 50)/2 = 65°C
परिवेश से औसत तापांतर:
65 − 20 = 45°C
दूसरे interval में:
Tavg2 = (60 + 30)/2 = 45°C
परिवेश से तापांतर:
45 − 20 = 25°C
Newton’s law के अनुसार:
ΔT1/t1 ÷ ΔT2/t2 = 45/25
अतः
t2 = 5 × (30/30) × (45/25)
t2 = 9 मिनट
उत्तर: वस्तु को 60°C से 30°C तक ठंडा होने में लगभग 9 मिनट लगेंगे। 11
CO2 का P-T प्रावस्था आरेख
CO2 के phase diagram से तापमान और दाब बदलने पर पदार्थ की अवस्था निर्धारित की जा सकती है। इसमें मुख्य रूप से ठोस, द्रव और वाष्प क्षेत्रों को दिखाया जाता है।
त्रिक बिंदु
CO2 का त्रिक बिंदु लगभग:
−56.6°C और 5.11 atm
क्रांतिक तापमान और क्रांतिक दाब
CO2 के लिए reference में क्रांतिक तापमान लगभग 31.1°C और क्रांतिक दाब लगभग 73 atm दिया गया है। 12
क्रांतिक तापमान से अधिक ताप पर केवल दाब बढ़ाकर गैस को सामान्य द्रव अवस्था में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 11.21 – CO2 के phase diagram पर आधारित प्रश्न
(a) CO2 की तीनों अवस्थाएँ कब साम्य में रहती हैं?
उत्तर: लगभग −56.6°C ताप और 5.11 atm दाब पर।
(b) दाब घटाने पर गलनांक और क्वथनांक पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: दिए गए phase diagram के अनुसार संबंधित phase-transition temperatures में परिवर्तन होता है; reference में दोनों के घटने का उल्लेख किया गया है।
(c) CO2 का critical temperature और pressure क्या है?
उत्तर: लगभग 31.1°C और 73 atm।
(d) विभिन्न ताप-दाब पर CO2 की अवस्था
- −70°C और 1 atm → गैसीय/वाष्प अवस्था
- −60°C और 10 atm → ठोस अवस्था
- 15°C और 56 atm → द्रव अवस्था
13
प्रश्न 11.22 – CO2 में phase परिवर्तन
(a) −60°C और 1 atm पर समतापी संपीडन
Reference phase diagram के अनुसार इस स्थिति में दाब बढ़ाने पर CO2 गैस से सीधे ठोस अवस्था की ओर जा सकता है और सामान्य द्रव क्षेत्र से नहीं गुजरता। इसे deposition के रूप में समझा जा सकता है। 14
(b) 4 atm पर कक्ष ताप से शीतलन
Reference के phase diagram के अनुसार इस पथ में गैस सीधे ठोस क्षेत्र में जा सकती है।
(c) 10 atm और −65°C से गर्म करने पर
दिए गए phase diagram के अनुसार पदार्थ ठोस अवस्था से द्रव और फिर वाष्प अवस्था की ओर जा सकता है।
(d) 70°C पर CO2 को संपीडित करने पर
70°C, CO2 के critical temperature से अधिक है। इसलिए केवल समतापी संपीडन द्वारा इसे सामान्य द्रव अवस्था में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
द्रव्य के तापीय गुण के महत्वपूर्ण सूत्र
| विषय | सूत्र |
|---|---|
| Kelvin-Celsius | T = t + 273.15 |
| Celsius-Fahrenheit | F = 9C/5 + 32 |
| रेखीय प्रसार | ΔL = αLΔT |
| नई लंबाई | L2 = L1(1 + αΔT) |
| क्षेत्रीय प्रसार | ΔA = βAΔT |
| आयतन प्रसार | ΔV = γVΔT |
| समदैशिक ठोस | β ≈ 2α, γ ≈ 3α |
| ऊष्मा धारिता | C = Q/ΔT |
| विशिष्ट ऊष्मा | Q = mcΔT |
| गुप्त ऊष्मा | Q = mL |
| चालन | Q/t = KAΔT/L |
| तापीय प्रतिबल | Stress = YαΔT |
| तापीय बल | F = YAαΔT |
| Newton’s Cooling Law | −dT/dt ∝ (T − Ts) |
| Gas thermometer | T/Ttr = P/Ptr |
Important Objective Questions
1. तापमान की SI इकाई क्या है?
(A) Celsius
(B) Fahrenheit
(C) Kelvin
(D) Joule
उत्तर: (C) Kelvin
2. जल के त्रिक बिंदु का ताप कितना है?
उत्तर: 273.16 K
3. Celsius और Kelvin में संबंध क्या है?
उत्तर: T(K) = t(°C) + 273.15
4. तापमान बढ़ने पर अधिकांश ठोसों की लंबाई क्या होती है?
उत्तर: बढ़ती है।
5. रेखीय प्रसार गुणांक का सूत्र क्या है?
उत्तर: α = ΔL/(LΔT)
6. समदैशिक ठोस के लिए क्षेत्रीय प्रसार गुणांक और रेखीय प्रसार गुणांक का संबंध क्या है?
उत्तर: β ≈ 2α
7. आयतन प्रसार गुणांक और रेखीय प्रसार गुणांक का संबंध क्या है?
उत्तर: γ ≈ 3α
8. विशिष्ट ऊष्मा धारिता का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: J kg−1 K−1
9. अवस्था परिवर्तन के दौरान आवश्यक ऊष्मा का सूत्र क्या है?
उत्तर: Q = mL
10. ऊष्मा संचरण के कितने प्रमुख तरीके हैं?
उत्तर: तीन – चालन, संवहन और विकिरण।
11. सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा किस प्रकार पहुँचती है?
उत्तर: विकिरण द्वारा।
12. न्यूटन का शीतलन नियम किससे संबंधित है?
उत्तर: गर्म वस्तु के ठंडा होने की दर से।
13. 4°C पर जल का कौन-सा गुण महत्वपूर्ण है?
उत्तर: सामान्य परिस्थितियों में जल का घनत्व लगभग अधिकतम होता है।
14. तापीय प्रतिबल कब उत्पन्न होता है?
उत्तर: जब तापीय प्रसार या संकुचन को रोका जाता है।
15. CO2 का critical temperature लगभग कितना है?
उत्तर: 31.1°C
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- तापमान और ऊष्मा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- जल के त्रिक बिंदु को समझाइए।
- विभिन्न तापमान पैमानों के बीच संबंध स्थापित कीजिए।
- गैस तापमापी का सिद्धांत समझाइए।
- रेखीय प्रसार गुणांक की परिभाषा और सूत्र लिखिए।
- क्षेत्रीय और आयतन प्रसार को समझाइए।
- समदैशिक ठोस के लिए α, β और γ के बीच संबंध स्थापित कीजिए।
- छेद को गर्म करने पर उसका व्यास क्यों बढ़ता है?
- तापीय प्रतिबल क्या है?
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता की परिभाषा और SI मात्रक लिखिए।
- गुप्त ऊष्मा क्या है?
- ऊष्मामापी का सिद्धांत लिखिए।
- ऊष्मा संचरण के तीनों तरीकों को समझाइए।
- ऊष्मीय चालकता क्या है?
- कृष्णिका क्या है?
- अच्छे अवशोषक और अच्छे उत्सर्जक के बीच संबंध समझाइए।
- न्यूटन के शीतलन नियम को लिखिए।
- CO2 के phase diagram से critical temperature और triple point समझाइए।
Chapter 11 का संक्षिप्त सार
द्रव्य के तापीय गुण अध्याय में तापमान, ऊष्मा और तापमान परिवर्तन के कारण पदार्थों में होने वाले विभिन्न परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है। तापमिति में Celsius, Fahrenheit और Kelvin scales का प्रयोग किया जाता है तथा जल का triple point तापमान मापन में महत्वपूर्ण reference point है।
तापमान बढ़ने पर ठोसों में रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार हो सकता है। इनके लिए क्रमशः α, β और γ जैसे coefficients का प्रयोग किया जाता है। यदि प्रसार को रोका जाए तो thermal stress उत्पन्न हो सकता है।
ऊष्मा के कारण वस्तु का तापमान बदल सकता है या पदार्थ की अवस्था बदल सकती है। तापमान परिवर्तन के लिए Q = mcΔT और अवस्था परिवर्तन के लिए Q = mL महत्वपूर्ण सूत्र हैं।
ऊष्मा का स्थानांतरण चालन, संवहन और विकिरण द्वारा होता है। ऊष्मीय विकिरण में कृष्णिका, अवशोषण और उत्सर्जन महत्वपूर्ण concepts हैं। इसके अलावा Newton’s law of cooling और CO2 का P-T phase diagram भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक
Chapter 10 – तरलों के यांत्रिकी गुण
Chapter 11 – द्रव्य के तापीय गुण
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 11 – द्रव्य के तापीय गुण की तैयारी के लिए तापमान पैमाने, ऊष्मीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा, ऊष्मामापी, ऊष्मा संचरण, विकिरण और न्यूटन के शीतलन नियम को अच्छी तरह समझना आवश्यक है।
Numerical questions के लिए विशेष रूप से ΔL = αLΔT, Q = mcΔT, Q = mL, Q/t = KAΔT/L और −dT/dt ∝ (T − Ts) जैसे सूत्रों का अभ्यास करें।
Chapter 11 के theory questions के साथ numerical problems का step-by-step अभ्यास करने से बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से पूछे जाने वाले प्रश्नों को बेहतर तरीके से हल किया जा सकता है।