Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी में ऊष्मा, कार्य, आंतरिक ऊर्जा, ऊष्मागतिकी के नियम, गैसों के प्रक्रम, ऊष्मा इंजन, दक्षता और प्रशीतक जैसे महत्वपूर्ण topics को आसान भाषा में समझाया गया है। इस अध्याय में दिए गए numericals को step-by-step तरीके से हल किया गया है, ताकि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें।
ऊष्मागतिकी भौतिक विज्ञान की वह शाखा है जिसमें ऊष्मा, कार्य और किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा के बीच संबंध का अध्ययन किया जाता है। Bihar Board Class 11 Physics के इस अध्याय में ऊष्मागतिकीय निकाय, अवस्था, ऊष्मा, कार्य, आंतरिक ऊर्जा तथा विभिन्न ऊष्मागतिकीय प्रक्रमों की महत्वपूर्ण अवधारणाएँ शामिल हैं।
पिछला अध्याय: Chapter 11 – द्रव्य के तापीय गुण
ऊष्मागतिकी क्या है?
ऊष्मागतिकी में किसी निकाय में ऊष्मा के रूप में दी गई ऊर्जा, निकाय द्वारा किए गए कार्य तथा उसकी आंतरिक ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के संबंध का अध्ययन किया जाता है।
किसी गैस को गर्म करने पर उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ सकती है और गैस बाहरी माध्यम पर कार्य भी कर सकती है। इसलिए ऊष्मा की आपूर्ति का प्रभाव केवल ताप बढ़ाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसका कुछ भाग कार्य करने में भी खर्च हो सकता है।
ऊष्मागतिकीय निकाय और परिवेश
जिस वस्तु या पदार्थ का अध्ययन किया जाता है उसे ऊष्मागतिकीय निकाय (Thermodynamic System) कहते हैं। निकाय के बाहर की सभी वस्तुएँ उसका परिवेश (Surroundings) कहलाती हैं।
निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा तथा कार्य के रूप में ऊर्जा का आदान-प्रदान हो सकता है।
ऊष्मा, कार्य और आंतरिक ऊर्जा
ऊष्मा (Heat)
तापांतर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में स्थानांतरित होने वाली ऊर्जा को ऊष्मा कहते हैं।
कार्य (Work)
जब कोई गैस अपने आयतन में परिवर्तन करते हुए बाहरी माध्यम के विरुद्ध कार्य करती है, तो इसे ऊष्मागतिकीय कार्य कहा जाता है।
स्थिर दाब पर गैस के लिए:
W = PΔV
जहाँ P दाब तथा ΔV आयतन में परिवर्तन है।
आंतरिक ऊर्जा (Internal Energy)
किसी निकाय के अणुओं की सूक्ष्म गतिज तथा स्थितिज ऊर्जाओं के योग को उसकी आंतरिक ऊर्जा कहते हैं। आंतरिक ऊर्जा को सामान्यतः U से प्रदर्शित किया जाता है।
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का ही एक रूप है। इसके अनुसार निकाय को दी गई ऊष्मा का एक भाग उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने में तथा शेष भाग निकाय द्वारा कार्य करने में खर्च होता है।
Q = ΔU + W
अर्थात्,
ΔU = Q − W
जहाँ:
- Q = निकाय को दी गई ऊष्मा
- ΔU = आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन
- W = निकाय द्वारा किया गया कार्य
ऊष्मागतिकीय प्रक्रम
निकाय की एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन को ऊष्मागतिकीय प्रक्रम कहते हैं। अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग प्रकार के प्रक्रम हो सकते हैं।
1. समतापी प्रक्रम (Isothermal Process)
जिस प्रक्रम में तापमान स्थिर रहता है उसे समतापी प्रक्रम कहते हैं।
T = Constant
2. समदाबी प्रक्रम (Isobaric Process)
जिस प्रक्रम में दाब स्थिर रहता है उसे समदाबी प्रक्रम कहते हैं।
P = Constant
3. समआयतनी प्रक्रम (Isochoric Process)
जिस प्रक्रम में आयतन स्थिर रहता है उसे समआयतनी प्रक्रम कहते हैं।
V = Constant
इस स्थिति में गैस द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है:
W = PΔV = 0
4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process)
जिस प्रक्रम में निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता, उसे रुद्धोष्म प्रक्रम कहते हैं।
Q = 0
ऐसे प्रक्रम में प्रथम नियम के अनुसार:
ΔU = −W
आदर्श गैस के रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए:
PVγ = Constant
जहाँ γ को गैस का adiabatic index कहते हैं।
विशिष्ट ऊष्मा धारिता और मोलर विशिष्ट ऊष्मा
किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का तापमान 1°C या 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा को उसकी विशिष्ट ऊष्मा धारिता कहते हैं।
Q = mcΔT
जहाँ m द्रव्यमान, c विशिष्ट ऊष्मा धारिता तथा ΔT तापमान में परिवर्तन है।
गैसों के लिए दो महत्वपूर्ण विशिष्ट ऊष्माएँ होती हैं:
- Cv – स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा
- Cp – स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा
आदर्श गैस के लिए:
Cp − Cv = R
और
γ = Cp/Cv
ऊष्मा इंजन
ऊष्मा इंजन ऐसा यंत्र है जो ऊष्मा ऊर्जा के एक भाग को यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करता है।
यदि इंजन को स्रोत से Q1 ऊष्मा प्राप्त होती है और वह W कार्य करता है, तो अपशिष्ट ऊष्मा:
Q2 = Q1 − W
ऊष्मा इंजन की दक्षता
इंजन की दक्षता:
η = W/Q1
प्रतिशत दक्षता:
η% = (W/Q1) × 100
प्रशीतक (Refrigerator)
प्रशीतक ऐसा यंत्र है जो कम तापमान वाले स्थान से ऊष्मा लेकर उसे अधिक तापमान वाले परिवेश में स्थानांतरित करता है।
प्रशीतक के निष्पादन गुणांक (Coefficient of Performance) को सामान्यतः β से प्रदर्शित किया जाता है।
आदर्श प्रशीतक के लिए:
β = T2/(T1 − T2)
जहाँ T1 परिवेश का तापमान तथा T2 प्रशीतक के अंदर का तापमान है। तापमान यहाँ Kelvin में लिया जाता है।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 12 Important Questions
प्रश्न 12.1: गीजर में ईंधन की खपत की दर
प्रश्न: कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27°C से 77°C तक गर्म करता है। ईंधन की दहन-ऊष्मा 4.0 × 104 Jg−1 है। ईंधन के व्यय की दर ज्ञात कीजिए।
दिया गया:
- जल का प्रवाह = 3 kg/min
- ताप वृद्धि = 77 − 27 = 50°C
- जल की विशिष्ट ऊष्मा = 4.2 × 103 Jkg−1°C−1
- ईंधन की दहन-ऊष्मा = 4 × 104 Jg−1
एक मिनट में जल द्वारा अवशोषित ऊष्मा:
Q = mcΔT
Q = 3 × 4.2 × 103 × 50
Q = 6.3 × 105 J
यदि प्रति मिनट m′ ग्राम ईंधन जलता है, तो:
m′H = Q
अतः:
m′ = Q/H
m′ = (6.3 × 105)/(4 × 104)
m′ = 15.75 g/min
अर्थात लगभग 16 g/min ईंधन की आवश्यकता होगी। Reference में भी लगभग 16 g/min का परिणाम दिया गया है।
प्रश्न 12.2: नाइट्रोजन को गर्म करने के लिए आवश्यक ऊष्मा
प्रश्न: स्थिर दाब पर 2.0 × 10−2 kg नाइट्रोजन के ताप में 45°C की वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए? N2 का अणुभार 28 और R = 8.3 Jmol−1K−1 है।
नाइट्रोजन एक द्विपरमाणुक गैस है, इसलिए:
Cp = 7R/2
गैस के मोल:
n = m/M
n = 20/28 = 0.714 mol
अब:
Q = nCpΔT
Q = 0.714 × (7/2) × 8.3 × 45
Q ≈ 934 J
अतः आवश्यक ऊष्मा लगभग 934 J है।
प्रश्न 12.3: अंतिम तापमान औसत क्यों नहीं होता?
(a) यदि अलग-अलग तापमान वाले दो पिंडों को ऊष्मीय संपर्क में लाया जाए, तो अंतिम तापमान केवल उनके प्रारंभिक तापमान पर निर्भर नहीं करता। उनकी ऊष्मा धारिता भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अंतिम तापमान सामान्यतः (T1 + T2)/2 नहीं होता।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयंत्रों में अधिक विशिष्ट ऊष्मा धारिता वाला शीतलक उपयोगी होता है, क्योंकि वह कम ताप वृद्धि के साथ अधिक ऊष्मा अवशोषित कर सकता है।
(c) कार के चलते समय टायर गर्म होते हैं। टायर के अंदर मौजूद हवा का तापमान बढ़ने पर उसका दाब भी बढ़ सकता है।
(d) समुद्र या बंदरगाह के समीप के क्षेत्रों की जलवायु पर जल की ऊष्मीय विशेषताओं का प्रभाव पड़ता है। जल धीरे-धीरे गर्म और ठंडा होता है, इसलिए ऐसे क्षेत्रों में तापमान में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम रहता है।
प्रश्न 12.4: रुद्धोष्म संपीडन में दाब
प्रश्न: मानक ताप और दाब पर 3 mol हाइड्रोजन को ऊष्मारोधी सिलिंडर में उसके प्रारंभिक आयतन के आधे तक संपीडित किया जाता है। गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
हाइड्रोजन एक द्विपरमाणुक गैस है, इसलिए:
γ = 7/5 = 1.4
रुद्धोष्म प्रक्रम में:
PVγ = Constant
अतः:
P1V1γ = P2V2γ
चूँकि:
V2 = V1/2
इसलिए:
P2/P1 = (V1/V2)γ
P2/P1 = 21.4
अर्थात अंतिम दाब प्रारंभिक दाब का लगभग 2.64 गुना होगा।
अतः दाब में वृद्धि:
ΔP = P2 − P1 ≈ 1.64P1
प्रश्न 12.5: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का प्रयोग
प्रश्न: एक गैस को रुद्धोष्म प्रक्रिया द्वारा अवस्था A से B तक ले जाने में निकाय पर 22.3 J कार्य किया जाता है। दूसरी प्रक्रिया में A से B जाने पर निकाय 9.35 cal ऊष्मा अवशोषित करता है। दूसरी प्रक्रिया में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य ज्ञात कीजिए।
रुद्धोष्म प्रक्रिया में:
Q = 0
पहली प्रक्रिया में निकाय पर किया गया कार्य 22.3 J है। इसलिए प्रथम नियम का प्रयोग करके दोनों अवस्थाओं के बीच आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन का संबंध स्थापित किया जा सकता है।
दूसरी प्रक्रिया में:
Q = 9.35 × 4.19 J
Q ≈ 38.97 J
अतः दूसरी प्रक्रिया में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य लगभग:
W ≈ 38.97 − 22.3
W ≈ 16.67 J
अर्थात लगभग 16.7 J।
प्रश्न 12.6: निर्वात में गैस का मुक्त प्रसार
प्रश्न: समान आयतन वाले दो सिलिंडर A और B एक स्टॉपकॉक से जुड़े हैं। A में मानक ताप और दाब पर गैस है तथा B पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉपकॉक खोलने पर अंतिम दाब क्या होगा?
मान लें:
P1 = 1 atm
V1 = V
अंतिम आयतन:
V2 = 2V
मुक्त प्रसार के बाद आदर्श गैस के लिए:
P1V1 = P2V2
अतः:
P2 = (P1V1)/V2
P2 = 1/2 atm
P2 = 0.5 atm
मुक्त प्रसार में गैस द्वारा बाहरी माध्यम के विरुद्ध कार्य नहीं किया जाता और आदर्श स्थिति में ऊष्मा का आदान-प्रदान भी नहीं होता। इसलिए आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन शून्य माना जाता है।
प्रश्न 12.7: भाप इंजन की दक्षता
प्रश्न: एक वाष्प इंजन के बॉयलर से प्रति मिनट 3.6 × 109 J ऊर्जा प्राप्त होती है और इंजन प्रति मिनट 5.4 × 108 J कार्य करता है। इंजन की दक्षता तथा अपशिष्ट ऊष्मा ज्ञात कीजिए।
दिया है:
- Q1 = 3.6 × 109 J/min
- W = 5.4 × 108 J/min
दक्षता:
η = W/Q1
η = (5.4 × 108)/(3.6 × 109)
η = 0.15
प्रतिशत दक्षता:
η = 15%
अपशिष्ट ऊष्मा:
Q2 = Q1 − W
Q2 = 3.6 × 109 − 5.4 × 108
Q2 = 3.06 × 109 J/min
अतः इंजन की दक्षता 15% और अपशिष्ट ऊष्मा 3.06 × 109 J/min है।
प्रश्न 12.8: आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि की दर
प्रश्न: एक हीटर किसी निकाय को 100 W की दर से ऊष्मा देता है। यदि निकाय 75 J/s की दर से कार्य करता है, तो आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि की दर ज्ञात कीजिए।
दिया है:
Q/t = 100 J/s
W/t = 75 J/s
प्रथम नियम:
Q = ΔU + W
अतः:
ΔU/t = Q/t − W/t
ΔU/t = 100 − 75
ΔU/t = 25 J/s
अतः आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि की दर 25 J/s है।
प्रश्न 12.9: P-V diagram से कार्य
प्रश्न: किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को P-V diagram में दर्शाए गए मार्ग से एक अवस्था से दूसरी अवस्था में ले जाया जाता है। D से E और फिर E से F तक कुल कार्य ज्ञात करना है।
P-V diagram में गैस द्वारा किया गया कार्य curve के नीचे के क्षेत्रफल से प्राप्त किया जाता है:
W = ∫P dV
दिए गए diagram के अनुसार D से E में विस्तार के दौरान कार्य धनात्मक होता है, जबकि E से F में संपीड़न के कारण कार्य ऋणात्मक होता है।
Reference में दिए गए मानों के अनुसार:
- आयतन परिवर्तन = 3 × 10−3 m3
- दाब अंतर = 300 N/m2
इस प्रकार P-V graph के संबंधित क्षेत्रों को जोड़कर और संपीड़न वाले क्षेत्र को ऋणात्मक लेकर कुल कार्य निर्धारित किया जाता है। Reference में कुल कार्य लगभग 0.450 J दिया गया है।
प्रश्न 12.10: प्रशीतक का निष्पादन गुणांक
प्रश्न: एक प्रशीतक खाद्य पदार्थ को 9°C पर रखता है। यदि कमरे का तापमान 36°C है, तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आकलन कीजिए।
Kelvin scale में:
T1 = 36 + 273 = 309 K
T2 = 9 + 273 = 282 K
आदर्श प्रशीतक के लिए:
β = T2/(T1 − T2)
β = 282/(309 − 282)
β = 282/27
β ≈ 10.44
अतः प्रशीतक का निष्पादन गुणांक लगभग 10.4 है।
ऊष्मागतिकी के महत्वपूर्ण सूत्र
| क्रम | सूत्र | उपयोग |
|---|---|---|
| 1 | Q = ΔU + W | ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम |
| 2 | ΔU = Q − W | आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन |
| 3 | W = PΔV | स्थिर दाब पर कार्य |
| 4 | Q = mcΔT | ऊष्मा की गणना |
| 5 | Cp − Cv = R | आदर्श गैस के लिए |
| 6 | γ = Cp/Cv | ऊष्माधारिता अनुपात |
| 7 | PVγ = Constant | रुद्धोष्म प्रक्रम |
| 8 | η = W/Q1 | ऊष्मा इंजन की दक्षता |
| 9 | Q2 = Q1 − W | अपशिष्ट ऊष्मा |
| 10 | β = T2/(T1 − T2) | आदर्श प्रशीतक का COP |
ऊष्मागतिकी Chapter 12 के परीक्षा उपयोगी प्रश्न
- ऊष्मागतिकी क्या है?
- ऊष्मागतिकीय निकाय और परिवेश से क्या समझते हैं?
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम लिखिए।
- आंतरिक ऊर्जा क्या है?
- समतापी और रुद्धोष्म प्रक्रम में अंतर बताइए।
- समदाबी और समआयतनी प्रक्रम क्या हैं?
- रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए PVγ = Constant सिद्ध कीजिए।
- ऊष्मा इंजन की दक्षता का सूत्र लिखिए।
- प्रशीतक के निष्पादन गुणांक से क्या समझते हैं?
- गैस को संपीडित करने पर उसका तापमान क्यों बढ़ सकता है?
- कार के चलते समय टायरों में वायुदाब क्यों बढ़ता है?
- शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अधिक क्यों होनी चाहिए?
- P-V diagram के नीचे का क्षेत्रफल किस भौतिक राशि को प्रदर्शित करता है?
- मुक्त प्रसार क्या है?
- ऊष्मा इंजन में अपशिष्ट ऊष्मा क्यों निकलती है?
Objective Questions – ऊष्मागतिकी
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम किस नियम पर आधारित है?
(A) संवेग संरक्षण
(B) ऊर्जा संरक्षण
(C) आवेश संरक्षण
(D) द्रव्यमान संरक्षणउत्तर: (B) ऊर्जा संरक्षण
रुद्धोष्म प्रक्रम में Q का मान क्या होता है?
(A) 1
(B) ∞
(C) 0
(D) −1उत्तर: (C) 0
समतापी प्रक्रम में कौन-सी राशि स्थिर रहती है?
(A) दाब
(B) आयतन
(C) तापमान
(D) आंतरिक ऊर्जा हमेशाउत्तर: (C) तापमान
समआयतनी प्रक्रम में गैस द्वारा किया गया कार्य कितना होता है?
(A) अधिकतम
(B) शून्य
(C) न्यूनतम लेकिन शून्य नहीं
(D) अनंतउत्तर: (B) शून्य
ऊष्मा इंजन की दक्षता का सूत्र क्या है?
(A) W/Q1
(B) Q1/W
(C) Q2/W
(D) W/Q2उत्तर: (A) W/Q1
आदर्श गैस के लिए Cp − Cv का मान क्या है?
(A) 0
(B) R
(C) 2R
(D) γRउत्तर: (B) R
रुद्धोष्म प्रक्रम में कौन-सा संबंध लागू होता है?
(A) PV = Constant
(B) PT = Constant
(C) PVγ = Constant
(D) V/T = Constantउत्तर: (C) PVγ = Constant
प्रशीतक का मुख्य कार्य क्या है?
(A) कार्य को ऊष्मा में बदलना
(B) कम ताप वाले क्षेत्र से ऊष्मा हटाना
(C) तापमान को हमेशा शून्य करना
(D) दाब को शून्य करनाउत्तर: (B) कम ताप वाले क्षेत्र से ऊष्मा हटाना
Chapter 12 ऊष्मागतिकी का संक्षिप्त सार
- ऊष्मागतिकी में ऊष्मा, कार्य और आंतरिक ऊर्जा के बीच संबंध का अध्ययन किया जाता है।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
- प्रथम नियम का मुख्य समीकरण Q = ΔU + W है।
- समतापी प्रक्रम में तापमान स्थिर रहता है।
- समदाबी प्रक्रम में दाब स्थिर रहता है।
- समआयतनी प्रक्रम में आयतन स्थिर रहता है और कार्य शून्य होता है।
- रुद्धोष्म प्रक्रम में ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता।
- रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए PVγ = Constant होता है।
- ऊष्मा इंजन ऊष्मा ऊर्जा के एक भाग को कार्य में बदलता है।
- प्रशीतक कम ताप वाले क्षेत्र से ऊष्मा निकालकर उसे उच्च ताप वाले परिवेश में स्थानांतरित करता है।
अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक
Chapter 11 – द्रव्य के तापीय गुण
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें ऊष्मा, कार्य और आंतरिक ऊर्जा के संबंध के साथ-साथ ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम, रुद्धोष्म प्रक्रम, ऊष्मा इंजन तथा प्रशीतक जैसे topics शामिल हैं। विद्यार्थियों को विशेष रूप से Q = ΔU + W, PVγ = Constant, इंजन की दक्षता तथा प्रशीतक के निष्पादन गुणांक से संबंधित numericals का अभ्यास करना चाहिए।
नोट: दिए गए reference page में कुछ equations और calculations में OCR/typing inconsistencies दिखाई देती हैं। ऊपर numerical solutions में जहाँ आवश्यक था, वहाँ उसी प्रश्न के दिए हुए data और standard thermodynamic relation को स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया गया है।