Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 14 दोलन में आवर्ती गति, दोलन, सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion), आयाम, आवर्तकाल, आवृत्ति, कोणीय आवृत्ति, वेग, त्वरण, स्प्रिंग तथा सरल लोलक जैसे महत्वपूर्ण topics को समझाया गया है। इस अध्याय में दिए गए प्रश्नों के उत्तर और महत्वपूर्ण numericals को आसान भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
दोलन वह गति है जिसमें कोई वस्तु अपनी माध्य या साम्य स्थिति के इधर-उधर बार-बार गति करती है। यदि यह गति निश्चित समय के बाद दोहराती है तो इसे आवर्ती गति कहा जाता है। सरल आवर्त गति दोलन की एक विशेष अवस्था है जिसमें त्वरण विस्थापन के समानुपाती तथा विस्थापन की विपरीत दिशा में होता है।
पिछला अध्याय: Chapter 13 – अणुगति सिद्धांत
दोलन क्या है?
जब कोई कण या वस्तु अपनी साम्य स्थिति के आसपास बार-बार आगे-पीछे गति करती है, तो इस प्रकार की गति को दोलन कहते हैं। उदाहरण के लिए, स्प्रिंग से जुड़े पिंड का आगे-पीछे चलना और सरल लोलक का छोटे कोण पर झूलना दोलन के उदाहरण हैं।
आवर्ती गति क्या है?
जिस गति में कोई वस्तु समान समयांतराल के बाद अपनी गति को दोहराती है, उसे आवर्ती गति (Periodic Motion) कहते हैं।
Reference में स्वतंत्र रूप से लटकाए गए दंड चुंबक को उसकी N-S दिशा से विस्थापित करके छोड़ने तथा हाइड्रोजन अणु की अपने द्रव्यमान केंद्र के परितः घूर्णन गति को आवर्ती गति के उदाहरण के रूप में दिया गया है। वहीं छोड़े गए तीर की गति आवर्ती नहीं है क्योंकि वह अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस नहीं आता।
सरल आवर्त गति (SHM)
यदि किसी कण का त्वरण उसके विस्थापन के समानुपाती हो और विस्थापन की विपरीत दिशा में हो, तो कण की गति को सरल आवर्त गति कहते हैं।
सरल आवर्त गति की मुख्य शर्त:
a ∝ −x
या
a = −ω2x
यहाँ x माध्य स्थिति से विस्थापन तथा ω कोणीय आवृत्ति है।
Reference के प्रश्न 14.6 में दिए गए विकल्पों में केवल a = −10x सरल आवर्त गति को प्रदर्शित करता है, क्योंकि इसमें त्वरण विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में है। 1
SHM के महत्वपूर्ण पद
1. माध्य स्थिति
जिस स्थिति के दोनों ओर कण दोलन करता है और जहाँ विस्थापन शून्य होता है, उसे माध्य या साम्य स्थिति कहते हैं।
2. आयाम (Amplitude)
माध्य स्थिति से कण के अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं। इसे A से प्रदर्शित करते हैं।
3. आवर्तकाल (Time Period)
एक पूर्ण दोलन पूरा करने में लगे समय को आवर्तकाल कहते हैं। इसे T से प्रदर्शित किया जाता है।
4. आवृत्ति (Frequency)
एक सेकंड में किए गए पूर्ण दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
f = 1/T
5. कोणीय आवृत्ति
कोणीय आवृत्ति को ω से प्रदर्शित किया जाता है।
ω = 2πf = 2π/T
सरल आवर्त गति का समीकरण
SHM को सामान्यतः निम्न समीकरण से व्यक्त किया जाता है:
x = A cos(ωt + φ)
जहाँ:
- A = आयाम
- ω = कोणीय आवृत्ति
- t = समय
- φ = प्रारंभिक कला कोण (Initial Phase)
ज्या फलन के रूप में भी SHM लिखा जा सकता है:
x = A sin(ωt + φ)
SHM में वेग
यदि:
x = A cos(ωt + φ)
तो वेग:
v = −Aω sin(ωt + φ)
SHM में अधिकतम वेग:
vmax = Aω
एक अन्य महत्वपूर्ण संबंध:
v = ±ω√(A2 − x2)
माध्य स्थिति पर x = 0 होता है, इसलिए वहाँ वेग अधिकतम होता है। चरम स्थिति पर x = ±A होता है और वेग शून्य होता है।
SHM में त्वरण
सरल आवर्त गति में:
a = −ω2x
अधिकतम त्वरण:
amax = ω2A
चरम स्थिति पर त्वरण अधिकतम और माध्य स्थिति पर शून्य होता है।
SHM में बल
न्यूटन के दूसरे नियम से:
F = ma
और SHM में:
a = −ω2x
अतः:
F = −mω2x
इसलिए SHM में प्रत्यानयन बल विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में होता है।
स्प्रिंग से जुड़े पिंड का दोलन
यदि m द्रव्यमान का पिंड k बल-स्थिरांक वाली स्प्रिंग से जुड़ा है, तो पिंड की सरल आवर्त गति के लिए:
ω = √(k/m)
अतः आवर्तकाल:
T = 2π√(m/k)
और आवृत्ति:
f = 1/(2π)√(k/m)
स्प्रिंग के दोलन का महत्वपूर्ण numerical
प्रश्न: 1200 N/m बल-स्थिरांक वाली स्प्रिंग से 3 kg द्रव्यमान का पिंड जुड़ा है। पिंड को 2 cm खींचकर छोड़ दिया जाता है। आवृत्ति, अधिकतम त्वरण तथा अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए।
दिया है:
- k = 1200 N/m
- m = 3 kg
- A = 2 cm = 0.02 m
पहला चरण: कोणीय आवृत्ति
ω = √(k/m)
ω = √(1200/3)
ω = 20 rad/s
दूसरा चरण: आवृत्ति
f = ω/(2π)
f = 20/(2π)
f ≈ 3.18 Hz
तीसरा चरण: अधिकतम त्वरण
amax = ω2A
amax = 202 × 0.02
amax = 8 m/s2
चौथा चरण: अधिकतम चाल
vmax = Aω
vmax = 0.02 × 20
vmax = 0.40 m/s
Reference के प्रश्न 14.9 में यही data दिया गया है और अधिकतम त्वरण 8 m/s2 तथा अधिकतम चाल 0.40 m/s प्राप्त होती है। 2
माध्य और चरम स्थिति पर SHM
| स्थिति | विस्थापन | वेग | त्वरण |
|---|---|---|---|
| माध्य स्थिति | 0 | अधिकतम | 0 |
| धनात्मक चरम स्थिति | +A | 0 | अधिकतम |
| ऋणात्मक चरम स्थिति | −A | 0 | अधिकतम |
SHM में ऊर्जा
सरल आवर्त गति में कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है, यदि अवमंदन नगण्य हो।
गतिज ऊर्जा
K = 1/2 mv2
SHM में:
K = 1/2 mω2(A2 − x2)
स्थितिज ऊर्जा
U = 1/2 mω2x2
कुल ऊर्जा
E = K + U
E = 1/2 mω2A2
अतः SHM में कुल ऊर्जा नियत रहती है।
एक पूर्ण दोलन में औसत गतिज और स्थितिज ऊर्जा
Reference के प्रश्न 14.22 में सिद्ध किया गया है कि रैखिक SHM करते कण के एक पूर्ण दोलन की अवधि में औसत गतिज ऊर्जा और औसत स्थितिज ऊर्जा बराबर होती हैं। 3
अतः:
औसत K = औसत U = E/2
प्रश्न 14.1: कौन-सी गति आवर्ती है?
Reference के अनुसार:
- तैराक का नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और वापस आना आवश्यक रूप से आवर्ती गति नहीं है।
- N-S दिशा से विस्थापित करके छोड़े गए दंड चुंबक की गति आवर्ती है।
- अपने द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर घूमता हाइड्रोजन अणु आवर्ती गति करता है।
- धनुष से छोड़ा गया तीर आवर्ती गति नहीं करता क्योंकि वह अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस नहीं आता।
यह वर्गीकरण दिए गए reference के प्रश्न 14.1 पर आधारित है। 4
प्रश्न 14.2: आवर्ती और सरल आवर्त गति की पहचान
Reference में निम्न उदाहरण दिए गए हैं:
- पृथ्वी का अपनी धुरी के चारों ओर घूमना – आवर्ती गति, लेकिन SHM नहीं।
- U-नली में दोलन करता पारा – लगभग SHM।
- चिकने वक्रीय कटोरे में बॉल बेयरिंग का छोटा दोलन – लगभग SHM।
- बहुपरमाणुक अणु का साम्य स्थिति के आसपास व्यापक कंपन – आवर्ती गति, लेकिन SHM नहीं।
5
प्रश्न 14.3: x-t graph से आवर्तकाल
x-t graph में यदि कण अपनी पूरी गति को निश्चित समय के बाद दोहराता है, तो वह आवर्ती गति होती है। Reference में दिए गए graphs में (b) और (d) आवर्ती गति प्रदर्शित करते हैं और दोनों का आवर्तकाल 2 s दिया गया है। 6
प्रश्न 14.4: विभिन्न time functions की पहचान
दिए गए functions में:
(a) sin ωt − cos ωt
इसे एक single sinusoidal function के रूप में लिखा जा सकता है, इसलिए यह SHM प्रदर्शित करता है। इसका आवर्तकाल:
T = 2π/ω
(b) sin3ωt
यह आवर्ती गति है, लेकिन सरल आवर्त गति नहीं। Reference में इसका आवर्तकाल 2π/ω दिया गया है।
(c) यह SHM को प्रदर्शित करता है और इसकी angular frequency function में उपस्थित coefficient से निर्धारित होती है।
(d) cosωt + cos3ωt + cos5ωt
यह आवर्ती गति है, लेकिन सामान्यतः SHM नहीं।
(e) e−ω²t² और (f) 1 + ωt + ω²t² आवर्ती गति नहीं हैं।
Reference में यही classification दिया गया है। 7
प्रश्न 14.5: SHM में वेग, त्वरण और बल के चिह्न
मान लीजिए A और B के बीच कण SHM करता है और A से B की दिशा को धनात्मक माना गया है। तब:
- A पर वेग शून्य तथा त्वरण और बल धनात्मक दिशा में होंगे।
- B पर वेग शून्य तथा त्वरण और बल ऋणात्मक दिशा में होंगे।
- माध्य स्थिति पर त्वरण और बल शून्य होंगे।
- माध्य स्थिति से किसी दिशा में हटे कण पर त्वरण हमेशा माध्य स्थिति की ओर होगा।
इसका मूल कारण a = −ω2x है। Reference में प्रश्न 14.5 के सभी cases इसी आधार पर समझाए गए हैं। 8
प्रश्न 14.7: प्रारंभिक स्थिति से आयाम
प्रश्न: किसी कण की SHM का समीकरण x(t) = A cos(ωt + φ) है। t = 0 पर विस्थापन 1 cm, प्रारंभिक वेग π cm/s तथा ω = π s−1 है। आयाम और प्रारंभिक कला कोण ज्ञात कीजिए।
t = 0 पर:
x = A cosφ = 1
वेग:
v = −Aω sinφ
अतः:
π = −Aπ sinφ
इसलिए:
1 = −A sinφ
दोनों संबंधों का वर्ग करके जोड़ने पर:
A2(cos2φ + sin2φ) = 12 + 12
A = √2 cm
Reference में भी आयाम √2 cm प्राप्त होता है। 9
प्रश्न 14.8: कमानीदार तुला का numerical
प्रश्न: एक spring balance का scale 0 से 50 kg तक है और उसकी लंबाई 20 cm है। उससे लटकाया गया पिंड 0.65 s के आवर्तकाल से दोलन करता है। पिंड का भार ज्ञात कीजिए।
अधिकतम विस्तार:
y = 20 cm = 0.2 m
50 kg भार के लिए:
F = mg = 50 × 9.8 = 490 N
अतः spring constant:
k = F/y
k = 490/0.2 = 2450 N/m
स्प्रिंग के दोलन का आवर्तकाल:
T = 2π√(m/k)
अतः:
m = kT2/(4π2)
दिए गए मान रखने पर:
m ≈ 26.3 kg
और भार:
W = mg ≈ 258 N
नोट: Reference के इस प्रश्न में अंतिम numerical line OCR के कारण अस्पष्ट है; ऊपर स्पष्ट दिए गए k, T और standard spring-SHM relation से परिणाम निकाला गया है। Reference में k = 2450 N/m स्पष्ट रूप से दिया गया है। 10
प्रश्न 14.10: अलग-अलग प्रारंभिक स्थितियों के लिए SHM equation
यदि t = 0 पर पिंड माध्य स्थिति में है और धनात्मक दिशा में गति शुरू करता है, तो:
x = A sinωt
यदि t = 0 पर पिंड अधिकतम धनात्मक विस्थापन पर है, तो:
x = A cosωt
यदि t = 0 पर पिंड अधिकतम ऋणात्मक विस्थापन पर है, तो:
x = −A cosωt
इस प्रकार अलग-अलग प्रारंभिक स्थितियों में मुख्य अंतर phase का होता है; आयाम और angular frequency समान रह सकते हैं। Reference के प्रश्न 14.10 में इसी प्रकार प्रारंभिक स्थिति के आधार पर equations लिखने को कहा गया है। 11
प्रश्न 14.14: पिस्टन की अधिकतम चाल
प्रश्न: किसी engine piston का stroke 1.0 m है। यदि piston 200 rad/min की angular frequency से SHM करता है, तो उसकी maximum speed ज्ञात कीजिए।
Stroke = 2A
2A = 1 m
A = 0.5 m
Angular frequency:
ω = 200/60 = 10/3 rad/s
अधिकतम चाल:
vmax = Aω
vmax = 0.5 × 10/3
vmax ≈ 1.67 m/s
Reference में भी 1.67 m/s परिणाम दिया गया है। 12
सरल लोलक (Simple Pendulum)
छोटे कोण के लिए सरल लोलक लगभग SHM करता है। इसका आवर्तकाल:
T = 2π√(l/g)
जहाँ:
- l = लोलक की लंबाई
- g = गुरुत्वीय त्वरण
आवृत्ति:
f = 1/(2π)√(g/l)
सरल लोलक का आवर्तकाल किन राशियों पर निर्भर करता है?
सरल लोलक के छोटे कोणीय दोलन के लिए:
T = 2π√(l/g)
इससे स्पष्ट है कि आवर्तकाल लोलक की लंबाई और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है। यह लोलक के bob के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
Reference के प्रश्न 14.16(a) में भी यही पूछा गया है कि जबकि spring-mass system का period mass पर निर्भर करता है, सरल लोलक का period mass पर निर्भर क्यों नहीं करता। 13
प्रश्न 14.15: चंद्रमा पर सरल लोलक का आवर्तकाल
प्रश्न: किसी सरल लोलक का पृथ्वी पर आवर्तकाल 3.5 s है। चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की तुलना में कम है। चंद्रमा पर इसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
सरल लोलक के लिए:
T ∝ 1/√g
अतः:
Tm/Te = √(ge/gm)
अर्थात चंद्रमा पर g कम होने के कारण उसी लंबाई के लोलक का आवर्तकाल पृथ्वी की तुलना में अधिक होगा।
महत्वपूर्ण नोट: दिए गए reference में इस प्रश्न के gm का OCR रूप 17 m/s² दिखाई देता है, जो संदर्भ के अनुसार अस्पष्ट/त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है। इसलिए यहाँ source के अस्पष्ट मान को silently replace नहीं किया गया है। 14
प्रश्न 14.16: सरल लोलक से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न
(a) लोलक का आवर्तकाल द्रव्यमान पर निर्भर क्यों नहीं करता?
सरल लोलक के समीकरण में restoring force और inertia दोनों mass के समानुपाती होते हैं। इसलिए mass cancel हो जाता है और:
T = 2π√(l/g)
प्राप्त होता है।
(b) बड़े amplitude पर period क्यों बढ़ता है?
छोटे कोण के लिए sinθ ≈ θ माना जाता है। बड़े कोण पर यह approximation उतनी सटीक नहीं रहती। इसलिए restoring effect छोटे कोण वाली approximation की तुलना में अलग होता है और period बढ़ जाता है।
(c) मुक्त रूप से गिरते व्यक्ति की mechanical wristwatch क्या समय सही बताएगी?
Reference के अनुसार mechanical watch की periodic spring action गुरुत्वीय त्वरण पर सीधे निर्भर नहीं करती, इसलिए idealized स्थिति में उसका period सामान्य रूप से बना रहता है।
(d) मुक्त रूप से गिरते cabin में pendulum की frequency
Free fall में प्रभावी gravitational acceleration शून्य माना जाता है। इसलिए simple pendulum का restoring effect समाप्त हो जाता है और उसका oscillation frequency शून्य हो जाती है। 15
कार के मोड़ पर लोलक
जब कोई कार त्रिज्या R के वृत्तीय पथ पर वेग v से चलती है, तो कार को अभिकेंद्रीय त्वरण मिलता है:
ac = v2/R
कार के frame से देखने पर pendulum पर बाहर की ओर pseudo force प्रभावी होती है। इससे effective gravitational acceleration बदल जाता है।
Reference के अनुसार effective acceleration का परिमाण:
g′ = √(g2 + v4/R2)
इसलिए छोटे दोलनों के लिए नया period:
T = 2π√(l/g′)
16
द्रव में तैरते कॉर्क का दोलन
Reference के प्रश्न 14.18 में आधार क्षेत्रफल A और ऊँचाई h वाले कॉर्क के बेलनाकार टुकड़े को द्रव में तैरता हुआ माना गया है। उसे थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ने पर buoyancy के परिवर्तन के कारण restoring force उत्पन्न होता है।
यदि कॉर्क का घनत्व ρ और द्रव का घनत्व ρi है, तो reference में प्राप्त period:
T = 2π√(hρ/(ρig))
यह derivation इस बात को प्रदर्शित करता है कि restoring acceleration विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में है, इसलिए कॉर्क SHM करता है। 17
U-नली में पारे का दोलन
U-नली में पारे के दोनों स्तंभों में pressure difference बनाया जाता है। suction pump हटाने पर पारा अपनी साम्य स्थिति की ओर लौटता है।
यदि साम्य स्थिति से विस्थापन y हो, तो restoring force:
F = −2mgy
और reference में कुल द्रव्यमान को ध्यान में रखने पर:
a = −(g/h)y
अर्थात:
a ∝ −y
इसलिए U-नली में पारे का स्तंभ सरल आवर्त गति करता है। 18
निर्देश वृत्त (Reference Circle)
SHM को एक समान वृत्तीय गति के किसी diameter पर projection के रूप में समझा जा सकता है। यदि वृत्त की त्रिज्या A है और angular speed ω है, तो उसके किसी diameter पर projection SHM करता है।
इसलिए SHM के लिए:
x = A cos(ωt + φ)
यह representation amplitude, angular frequency और phase को समझने में विशेष रूप से उपयोगी है। Reference के प्रश्न 14.12 में विभिन्न SHM equations के लिए corresponding reference circle बनाने को कहा गया है। 19
मरोड़ी दोलन (Torsional Oscillation)
जब कोई चक्रिका या वस्तु अपने axis के चारों ओर कोणीय विस्थापन करती है और restoring torque उसे वापस equilibrium position की ओर खींचता है, तो इसे मरोड़ी दोलन कहते हैं।
Restoring torque:
τ = −Cθ
जहाँ C torsional spring constant और θ angular displacement है।
Rotational SHM के लिए:
T = 2π√(I/C)
जहाँ I rotational inertia है।
अवमंदित दोलन (Damped Oscillation)
जब किसी दोलनशील system में friction या resistance के कारण उसका amplitude समय के साथ घटता जाता है, तो उसे अवमंदित दोलन कहते हैं।
व्यवहार में air resistance, friction और shock absorbers damping के उदाहरण हैं।
Reference के प्रश्न 14.21 में 3000 kg वाहन की suspension system में amplitude के एक पूर्ण oscillation में 50% घटने के आधार पर spring constant और damping constant का आकलन करने को कहा गया है। 20
प्रश्न 14.21: वाहन की suspension system
दिया है:
- वाहन का कुल द्रव्यमान = 3000 kg
- प्रत्येक wheel पर mass = 750 kg
- निलंबन का deflection = 15 cm = 0.15 m
प्रत्येक wheel के लिए static equilibrium पर:
mg = ky
अतः:
k = mg/y
k = (750 × 9.8)/0.15
k = 4.90 × 104 N/m
Reference में damping constant का भाग image/OCR के कारण पूर्ण रूप से text में उपलब्ध नहीं है। इसलिए उस भाग के लिए कोई अतिरिक्त numerical value source से अनुमान लगाकर नहीं जोड़ी गई है। 21
प्रश्न 14.23: मरोड़ी दोलन का spring constant
प्रश्न: 10 kg की circular disc एक तार से लटकी है। disc की radius 15 cm और torsional oscillation का period 1.5 s है। तार का torsional spring constant ज्ञात कीजिए।
Disc का moment of inertia:
I = 1/2 mr2
मरोड़ी दोलन के लिए:
T = 2π√(I/C)
अतः:
C = 4π2I/T2
दिए गए:
- m = 10 kg
- r = 0.15 m
- T = 1.5 s
पहले:
I = 1/2 × 10 × (0.15)2
I = 0.1125 kg m2
अतः:
C ≈ 1.97 N m/rad
Reference में इसी problem के लिए torsional constant निकालने की यही rotational-SHM प्रक्रिया दी गई है। 22
प्रश्न 14.24: विस्थापन पर वेग और त्वरण
प्रश्न: एक वस्तु 5 cm amplitude और 0.2 s period के साथ SHM करती है। विस्थापन 5 cm, 3 cm और 0 cm पर वेग तथा त्वरण ज्ञात कीजिए।
दिया है:
- A = 5 cm = 0.05 m
- T = 0.2 s
Angular frequency:
ω = 2π/T = 10π rad/s
(a) x = 5 cm = A
चरम स्थिति पर:
v = 0
अधिकतम त्वरण:
|a| = ω2A
|a| = (10π)2 × 0.05
|a| = 5π2 ≈ 49.35 m/s2
(b) x = 3 cm = 0.03 m
वेग:
v = ±ω√(A2 − x2)
|v| = 10π√(0.052 − 0.032)
|v| ≈ 1.257 m/s
त्वरण:
a = −ω2x
|a| = (10π)2 × 0.03
|a| ≈ 29.61 m/s2
(c) x = 0
माध्य स्थिति पर:
|v| = vmax = Aω
|v| = 0.05 × 10π ≈ 1.571 m/s
और:
a = 0
Reference के प्रश्न 14.24 में यही amplitude और period दिए गए हैं; source की equation image/OCR में अस्पष्ट है, इसलिए ऊपर standard SHM relations से परिणाम स्पष्ट रूप में लिखा गया है। 23
प्रश्न 14.25: प्रारंभिक विस्थापन और वेग से amplitude
यदि:
x = A cos(ωt + φ)
और t = 0 पर कण का विस्थापन x0 तथा वेग v0 है, तो:
x0 = A cosφ
और:
v0 = −Aω sinφ
दोनों समीकरणों का वर्ग करके जोड़ने पर:
A2 = x02 + v02/ω2
अतः परिणामी amplitude:
A = √(x02 + v02/ω2)
Reference के प्रश्न 14.25 में इसी स्थिति के लिए amplitude को ω, x0 और v0 के रूप में प्राप्त करने को कहा गया है। 24
दोलन के महत्वपूर्ण सूत्र
| क्रम | सूत्र | उपयोग |
|---|---|---|
| 1 | f = 1/T | आवृत्ति |
| 2 | ω = 2π/T | कोणीय आवृत्ति |
| 3 | x = A cos(ωt + φ) | SHM का विस्थापन |
| 4 | v = −Aω sin(ωt + φ) | SHM का वेग |
| 5 | a = −ω2x | SHM का त्वरण |
| 6 | vmax = Aω | अधिकतम वेग |
| 7 | amax = Aω2 | अधिकतम त्वरण |
| 8 | v = ±ω√(A2 − x2) | विस्थापन पर वेग |
| 9 | T = 2π√(m/k) | स्प्रिंग-पिंड प्रणाली |
| 10 | ω = √(k/m) | स्प्रिंग की angular frequency |
| 11 | T = 2π√(l/g) | सरल लोलक |
| 12 | K = 1/2 mω2(A2 − x2) | गतिज ऊर्जा |
| 13 | U = 1/2 mω2x2 | स्थितिज ऊर्जा |
| 14 | E = 1/2 mω2A2 | कुल ऊर्जा |
| 15 | T = 2π√(I/C) | मरोड़ी दोलन |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- आवर्ती गति और दोलन में क्या अंतर है?
- सरल आवर्त गति की परिभाषा दीजिए।
- सरल आवर्त गति के लिए आवश्यक शर्त लिखिए।
- SHM में त्वरण और विस्थापन के बीच संबंध स्थापित कीजिए।
- SHM में अधिकतम वेग और अधिकतम त्वरण के सूत्र लिखिए।
- माध्य स्थिति और चरम स्थिति पर वेग एवं त्वरण की तुलना कीजिए।
- स्प्रिंग से जुड़े पिंड के आवर्तकाल का सूत्र प्राप्त कीजिए।
- सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र लिखिए।
- सरल लोलक का आवर्तकाल उसके द्रव्यमान पर निर्भर क्यों नहीं करता?
- SHM की कुल ऊर्जा का सूत्र लिखिए।
- सिद्ध कीजिए कि SHM में एक पूर्ण चक्र की औसत गतिज ऊर्जा और औसत स्थितिज ऊर्जा समान होती हैं।
- निर्देश वृत्त की सहायता से SHM समझाइए।
- मरोड़ी दोलन क्या है?
- अवमंदित दोलन से क्या समझते हैं?
- U-नली में पारे का दोलन SHM क्यों करता है?
Objective Questions – दोलन
सरल आवर्त गति में त्वरण किसके समानुपाती होता है?
(A) x
(B) x2
(C) −x
(D) 1/xउत्तर: (C) −x
SHM में माध्य स्थिति पर त्वरण कितना होता है?
(A) अधिकतम
(B) शून्य
(C) न्यूनतम
(D) अनंतउत्तर: (B) शून्य
SHM में अधिकतम वेग क्या होता है?
(A) A/ω
(B) Aω
(C) Aω2
(D) ω/Aउत्तर: (B) Aω
SHM में अधिकतम त्वरण क्या होता है?
(A) Aω
(B) A/ω
(C) Aω2
(D) ω/Aउत्तर: (C) Aω2
स्प्रिंग से जुड़े द्रव्यमान का आवर्तकाल क्या है?
(A) 2π√(k/m)
(B) 2π√(m/k)
(C) √(m/k)
(D) 2πmkउत्तर: (B) 2π√(m/k)
सरल लोलक का आवर्तकाल क्या है?
(A) 2π√(g/l)
(B) 2π√(l/g)
(C) √(lg)
(D) l/gउत्तर: (B) 2π√(l/g)
सरल लोलक का आवर्तकाल किस पर निर्भर नहीं करता?
(A) लंबाई
(B) g
(C) bob का द्रव्यमान
(D) दोनों A और Bउत्तर: (C) bob का द्रव्यमान
SHM में चरम स्थिति पर वेग होता है:
(A) अधिकतम
(B) शून्य
(C) न्यूनतम लेकिन शून्य नहीं
(D) अनंतउत्तर: (B) शून्य
SHM में कुल ऊर्जा कैसी रहती है?
(A) बढ़ती है
(B) घटती है
(C) नियत रहती है
(D) शून्य रहती हैउत्तर: (C) नियत रहती है
मरोड़ी दोलन में restoring torque किसके समानुपाती होता है?
(A) θ
(B) θ2
(C) 1/θ
(D) θ + constantउत्तर: (A) θ
Chapter 14 दोलन का संक्षिप्त सार
- निश्चित समयांतराल के बाद दोहराई जाने वाली गति को आवर्ती गति कहते हैं।
- साम्य स्थिति के आसपास बार-बार होने वाली गति को दोलन कहते हैं।
- SHM में त्वरण विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में होता है।
- SHM का मूल संबंध a = −ω2x है।
- SHM का displacement equation x = A cos(ωt + φ) है।
- अधिकतम वेग vmax = Aω होता है।
- अधिकतम त्वरण amax = Aω2 होता है।
- स्प्रिंग-पिंड प्रणाली का period T = 2π√(m/k) होता है।
- छोटे कोण के लिए सरल लोलक का period T = 2π√(l/g) होता है।
- SHM में kinetic और potential energy लगातार एक-दूसरे में परिवर्तित होती रहती हैं।
- एक पूर्ण दोलन में औसत kinetic और potential energy समान होती हैं।
- मरोड़ी दोलन में restoring torque angular displacement के समानुपाती होता है।
- अवमंदन के कारण oscillation का amplitude समय के साथ घटता है।
अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 14 दोलन में आवर्ती गति और सरल आवर्त गति की मूल अवधारणाओं से लेकर spring-mass system, simple pendulum, energy, torsional oscillation और damped oscillation तक महत्वपूर्ण topics का अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की तैयारी के लिए a = −ω2x, vmax = Aω, amax = Aω2, T = 2π√(m/k) और T = 2π√(l/g) जैसे सूत्र विशेष रूप से याद रखें।
नोट: दिए गए reference में कुछ equations और numerical steps image/OCR के कारण text में अधूरे या अस्पष्ट हैं। ऐसे स्थानों पर ऊपर केवल source से समर्थित जानकारी रखी गई है और जहाँ numerical को स्पष्ट रूप से हल करना संभव था, वहाँ उसी प्रश्न के दिए data के साथ संबंधित SHM relation दिखाया गया है।