Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 4 – समतल में गति में हम ऐसी गति का अध्ययन करते हैं जिसमें किसी कण की गति एक ही सीधी रेखा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दो या अधिक दिशाओं में हो सकती है। इस अध्याय में सदिश एवं अदिश राशियाँ, सदिशों का योग और वियोग, सदिशों के घटक, सापेक्ष वेग, प्रक्षेप्य गति तथा एकसमान वृत्तीय गति जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
यह अध्याय बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। नीचे सिद्धांत, महत्वपूर्ण सूत्र और संख्यात्मक प्रश्नों को आसान भाषा में समझाया गया है।
Chapter 4 – समतल में गति के मुख्य विषय
- अदिश और सदिश राशियाँ
- सदिशों का योग एवं वियोग
- सदिशों के घटक
- इकाई सदिश
- सापेक्ष वेग
- प्रक्षेप्य गति
- प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई
- प्रक्षेप्य की परास
- एकसमान वृत्तीय गति
- अभिकेन्द्रीय त्वरण
- स्थिति, वेग और त्वरण सदिश
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Chapter 3 – सरल रेखा में गति
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Chapter 5 – गति के नियम
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अदिश और सदिश राशियाँ
अदिश राशि (Scalar Quantity): वह भौतिक राशि जिसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती, अदिश राशि कहलाती है।
उदाहरण – द्रव्यमान, समय, दूरी, चाल, तापमान, कार्य, ऊर्जा और घनत्व।
सदिश राशि (Vector Quantity): वह भौतिक राशि जिसमें परिमाण के साथ निश्चित दिशा भी होती है, सदिश राशि कहलाती है।
उदाहरण – विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग और कोणीय वेग।
अदिश एवं सदिश में अंतर
| अदिश राशि | सदिश राशि |
|---|---|
| केवल परिमाण होता है | परिमाण और दिशा दोनों होते हैं |
| जोड़ सामान्य बीजीय नियम से किया जाता है | जोड़ सदिश नियमों के अनुसार किया जाता है |
| उदाहरण – चाल | उदाहरण – वेग |
सदिश का परिमाण
यदि किसी सदिश को
A = Ax î + Ay ĵ
के रूप में लिखा जाए, तो उसका परिमाण होगा:
|A| = √(Ax2 + Ay2)
यदि सदिश x-अक्ष से θ कोण बनाता है, तो:
tan θ = Ay / Ax
सदिशों का योग
दो सदिशों को जोड़ने के लिए त्रिभुज नियम या समांतर चतुर्भुज नियम का प्रयोग किया जा सकता है।
यदि दो सदिश A और B के बीच θ कोण है, तो परिणामी सदिश का परिमाण:
R = √(A2 + B2 + 2AB cos θ)
जब दोनों सदिश एक ही दिशा में हों:
R = A + B
और जब दोनों विपरीत दिशाओं में हों:
R = |A – B|
सदिशों के महत्वपूर्ण असमिकाएँ
दो सदिशों A और B के लिए:
|A + B| ≤ |A| + |B|
तथा
|A – B| ≤ |A| + |B|
इनमें समानता तब प्राप्त होती है जब संबंधित सदिश उचित रूप से एक ही दिशा में संरेखित हों।
सदिशों के घटक
किसी सदिश को परस्पर लंबवत अक्षों के अनुदिश दो या अधिक घटकों में विभाजित किया जा सकता है।
यदि A सदिश x-अक्ष से θ कोण बनाता है, तो:
Ax = A cos θ
Ay = A sin θ
और
A = √(Ax2 + Ay2)
इकाई सदिश
जिस सदिश का परिमाण 1 होता है, उसे इकाई सदिश कहते हैं।
कार्तीय निर्देशांक में x, y और z अक्षों के लिए सामान्यतः क्रमशः î, ĵ और k̂ का प्रयोग किया जाता है।
यदि
A = 2î + 3ĵ
तो इसका परिमाण:
|A| = √(22 + 32)
|A| = √13
सापेक्ष वेग
जब किसी वस्तु का वेग दूसरे गतिशील पिंड के सापेक्ष व्यक्त किया जाता है, तो उसे सापेक्ष वेग कहते हैं।
A का B के सापेक्ष वेग:
vAB = vA − vB
इसी प्रकार B का A के सापेक्ष वेग:
vBA = vB − vA
अतः:
vAB = −vBA
वर्षा और छाते की दिशा
जब कोई व्यक्ति चल रहा हो और वर्षा ऊर्ध्वाधर दिशा में गिर रही हो, तो व्यक्ति को अपने सापेक्ष वर्षा के वेग की दिशा के अनुसार छाते को झुकाना पड़ता है।
उदाहरण के लिए यदि वर्षा का वेग 30 m/s नीचे की ओर और व्यक्ति का वेग 10 m/s क्षैतिज दिशा में है, तो सापेक्ष वेग के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों से छाते का कोण निकाला जा सकता है।
tan θ = क्षैतिज सापेक्ष वेग / ऊर्ध्वाधर सापेक्ष वेग
यहाँ θ लगभग 18.3° प्राप्त होता है।
नदी पार करने की समस्या
यदि व्यक्ति नदी के बहाव के लंबवत तैरता है, तो नदी की धारा उसके परिणामस्वरूप विस्थापन को धारा की दिशा में प्रभावित करती है।
मान लें:
- नदी की चौड़ाई = 1 km
- व्यक्ति की तैरने की चाल = 4 km/h
- नदी की चाल = 3 km/h
नदी पार करने का समय:
t = चौड़ाई / तैरने की चाल
t = 1/4 घंटे = 15 मिनट
इस दौरान नदी व्यक्ति को धारा की दिशा में:
d = 3 × 1/4 = 0.75 km
अर्थात् 750 m आगे ले जाएगी।
प्रक्षेप्य गति
जब किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह के पास किसी कोण पर प्रारंभिक वेग देकर फेंका जाता है और वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है, तो वस्तु की गति को प्रक्षेप्य गति कहा जाता है।
प्रक्षेप्य गति में क्षैतिज दिशा में त्वरण शून्य होता है, जबकि ऊर्ध्वाधर दिशा में त्वरण g के कारण नीचे की ओर होता है।
प्रारंभिक वेग के घटक
यदि प्रारंभिक वेग v0 और प्रक्षेपण कोण θ है, तो:
v0x = v0 cos θ
v0y = v0 sin θ
क्षैतिज विस्थापन
x = v0 cos θ × t
ऊर्ध्वाधर विस्थापन
y = v0 sin θ × t − 1/2 gt2
प्रक्षेप्य का उड़ान समय
जब प्रक्षेप्य उसी ऊँचाई पर वापस आता है जहाँ से उसे छोड़ा गया था, तब कुल उड़ान समय:
T = 2v0 sin θ / g
प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई
प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई:
H = v02 sin2θ / 2g
अधिकतम ऊँचाई पर ऊर्ध्वाधर वेग शून्य हो जाता है।
प्रक्षेप्य की परास
यदि प्रक्षेप्य उसी स्तर पर वापस आता है जहाँ से उसे फेंका गया था, तो उसकी क्षैतिज परास:
R = v02 sin 2θ / g
अधिकतम परास तब प्राप्त होती है जब:
θ = 45°
और उस स्थिति में:
Rmax = v02 / g
उदाहरण: क्या 5 km दूर लक्ष्य को भेदा जा सकता है?
मान लें किसी गोली को 30° के कोण पर दागने पर वह 3 km दूर गिरती है। अब उसी प्रारंभिक चाल से 5 km दूर लक्ष्य को भेदना है।
प्रक्षेप्य की परास:
R = v02 sin 2θ / g
पहले मामले से:
3 = K sin 60°
दूसरे मामले के लिए:
5 = K sin 2θ
अतः:
sin 2θ = 5 sin 60° / 3
इसका मान 1 से अधिक आता है। चूँकि किसी वास्तविक कोण के लिए sine का अधिकतम मान 1 होता है, इसलिए दिए गए प्रारंभिक वेग से 5 km दूर लक्ष्य को भेदना संभव नहीं है।
प्रक्षेप्य के वेग की दिशा
t समय बाद प्रक्षेप्य के वेग के घटक:
vx = v0x
vy = v0y − gt
अतः x-अक्ष के साथ वेग द्वारा बनाया गया कोण:
θ(t) = tan−1[(v0y − gt)/v0x]
एकसमान वृत्तीय गति
जब कोई वस्तु निश्चित त्रिज्या के वृत्त पर समान चाल से घूमती है, तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहते हैं।
चाल समान होने के बावजूद वेग लगातार बदलता रहता है क्योंकि वेग की दिशा बदलती रहती है। इसलिए वस्तु में त्वरण होता है।
अभिकेन्द्रीय त्वरण
एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण की दिशा हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर होती है। इसका परिमाण:
ac = v2/R
जहाँ v रेखीय चाल और R वृत्त की त्रिज्या है।
कोणीय वेग और रेखीय वेग
रेखीय वेग और कोणीय वेग के बीच संबंध:
v = rω
अभिकेन्द्रीय त्वरण को कोणीय वेग के रूप में भी लिखा जा सकता है:
ac = rω2
उदाहरण: वृत्तीय गति में पत्थर का त्वरण
80 cm लंबे धागे से बंधा पत्थर 25 सेकंड में 14 चक्कर लगाता है।
त्रिज्या:
R = 80 cm = 0.8 m
आवर्तकाल:
T = 25/14 s
रेखीय चाल:
v = 2πR/T
अभिकेन्द्रीय त्वरण:
ac = v2/R
त्वरण की दिशा हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर होगी।
स्पर्शरेखीय और अभिकेन्द्रीय त्वरण
यदि कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर चल रही है और उसकी चाल भी बदल रही है, तो उसके त्वरण के दो घटक हो सकते हैं:
- स्पर्शरेखीय त्वरण (at) – चाल बदलने के कारण।
- अभिकेन्द्रीय त्वरण (ac) – गति की दिशा बदलने के कारण।
यदि दोनों परस्पर लंबवत हैं, तो नेट त्वरण:
a = √(at2 + ac2)
उदाहरण: वृत्तीय मोड़ पर साइकिल सवार का नेट त्वरण
एक साइकिल सवार 27 km/h की चाल से 80 m त्रिज्या वाले वृत्तीय मोड़ पर चलता है और उसकी चाल 0.5 m/s2 की दर से घट रही है।
पहले चाल को SI इकाई में बदलें:
v = 27 × 5/18 = 7.5 m/s
अभिकेन्द्रीय त्वरण:
ac = v2/R
ac = 7.52/80 ≈ 0.703 m/s2
स्पर्शरेखीय त्वरण:
at = 0.5 m/s2
नेट त्वरण:
a = √(0.7032 + 0.52) ≈ 0.86 m/s2
अतः नेट त्वरण का परिमाण लगभग 0.86 m/s2 है।
स्थिति सदिश, वेग सदिश और त्वरण सदिश
यदि किसी कण की स्थिति:
r = x î + y ĵ + z k̂
हो, तो वेग स्थिति सदिश के समय के सापेक्ष अवकलज से प्राप्त होता है:
v = dr/dt
और त्वरण:
a = dv/dt = d2r/dt2
उदाहरण: स्थिति सदिश से वेग और त्वरण
यदि:
r = (3t î − 2t2 ĵ + 4k̂) m
तो वेग:
v = dr/dt
v = 3î − 4t ĵ
और त्वरण:
a = dv/dt = −4ĵ m/s2
t = 2 s पर:
v = 3î − 8ĵ
वेग का परिमाण:
|v| = √(32 + 82) = √73 ≈ 8.54 m/s
वेग x-अक्ष के धनात्मक भाग से नीचे की ओर लगभग 69.4° का कोण बनाएगा।
महत्वपूर्ण सत्य/असत्य कथन
1. किसी सदिश का परिमाण सदैव अदिश होता है।
सत्य। सदिश का परिमाण केवल एक संख्यात्मक मान होता है और उसकी कोई दिशा नहीं होती।
2. किसी कण की चाल सदैव उसके औसत वेग के परिमाण के बराबर होती है।
असत्य। सामान्य गति में औसत चाल और औसत वेग के परिमाण अलग हो सकते हैं।
3. वृत्तीय गति में वेग सदिश स्पर्शरेखा के अनुदिश होता है।
सत्य। किसी बिंदु पर तात्कालिक वेग उसी बिंदु पर पथ की स्पर्शरेखा की दिशा में होता है।
4. एकसमान वृत्तीय गति में एक पूर्ण चक्कर का औसत त्वरण शून्य होता है।
सत्य। एक पूर्ण चक्कर के बाद प्रारंभिक और अंतिम वेग समान हो जाते हैं, इसलिए वेग में कुल परिवर्तन शून्य होता है।
अध्याय 4 के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. अदिश राशि क्या है?
जिस भौतिक राशि में केवल परिमाण होता है और दिशा नहीं होती, उसे अदिश राशि कहते हैं। जैसे द्रव्यमान, समय, चाल और कार्य।
प्रश्न 2. सदिश राशि क्या है?
जिस भौतिक राशि में परिमाण के साथ दिशा भी होती है, उसे सदिश राशि कहते हैं। जैसे विस्थापन, वेग, त्वरण और बल।
प्रश्न 3. सापेक्ष वेग का सूत्र लिखिए।
vAB = vA − vB
प्रश्न 4. प्रक्षेप्य गति क्या है?
गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में किसी कोण पर फेंकी गई वस्तु की गति को प्रक्षेप्य गति कहते हैं, जब वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है।
प्रश्न 5. प्रक्षेप्य की परास का सूत्र लिखिए।
R = v02 sin 2θ / g
प्रश्न 6. अधिकतम परास किस कोण पर प्राप्त होती है?
45° के प्रक्षेपण कोण पर।
प्रश्न 7. प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई का सूत्र क्या है?
H = v02 sin2θ / 2g
प्रश्न 8. अभिकेन्द्रीय त्वरण क्या है?
वृत्तीय गति में केंद्र की ओर निर्देशित त्वरण को अभिकेन्द्रीय त्वरण कहते हैं।
ac = v2/R
प्रश्न 9. क्या एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण होता है?
हाँ। चाल समान रहने पर भी वेग की दिशा लगातार बदलती रहती है। इसलिए त्वरण मौजूद रहता है और उसकी दिशा केंद्र की ओर होती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सूत्र
| भौतिक राशि | सूत्र |
|---|---|
| सदिश का परिमाण | |A| = √(Ax2 + Ay2) |
| सदिश की दिशा | tan θ = Ay/Ax |
| सदिश योग | R = √(A2 + B2 + 2AB cos θ) |
| सापेक्ष वेग | vAB = vA − vB |
| प्रक्षेप्य का उड़ान समय | T = 2v0 sin θ/g |
| अधिकतम ऊँचाई | H = v02 sin2θ/2g |
| प्रक्षेप्य की परास | R = v02 sin 2θ/g |
| अधिकतम परास | Rmax = v02/g |
| रेखीय एवं कोणीय वेग | v = rω |
| अभिकेन्द्रीय त्वरण | ac = v2/r |
| अभिकेन्द्रीय त्वरण का दूसरा रूप | ac = rω2 |
| नेट त्वरण | a = √(at2 + ac2) |
Objective Questions – Chapter 4
1. निम्नलिखित में से कौन सदिश राशि है?
(A) द्रव्यमान
(B) चाल
(C) वेग
(D) कार्य
उत्तर: (C) वेग
2. निम्नलिखित में से कौन अदिश राशि है?
(A) विस्थापन
(B) त्वरण
(C) बल
(D) कार्य
उत्तर: (D) कार्य
3. सापेक्ष वेग का सही संबंध क्या है?
(A) vAB = vA + vB
(B) vAB = vA − vB
(C) vAB = vA × vB
(D) vAB = vA/vB
उत्तर: (B)
4. अधिकतम प्रक्षेप्य परास किस कोण पर प्राप्त होती है?
(A) 30°
(B) 45°
(C) 60°
(D) 90°
उत्तर: (B) 45°
5. एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण की दिशा होती है:
(A) केंद्र से बाहर
(B) स्पर्शरेखा के अनुदिश
(C) केंद्र की ओर
(D) कोई दिशा नहीं
उत्तर: (C) केंद्र की ओर
6. अभिकेन्द्रीय त्वरण का सूत्र है:
(A) v/R
(B) v2/R
(C) R/v2
(D) Rv
उत्तर: (B) v2/R
7. प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई पर ऊर्ध्वाधर वेग होता है:
(A) अधिकतम
(B) शून्य
(C) g
(D) 1 m/s
उत्तर: (B) शून्य
Chapter 4 – समतल में गति का संक्षिप्त सार
इस अध्याय में दो या दो से अधिक दिशाओं में होने वाली गति का अध्ययन किया जाता है। सदिश और अदिश की पहचान, सदिशों का योग-वियोग तथा घटकों में विभाजन इसके आधारभूत विषय हैं।
सापेक्ष गति में एक वस्तु का वेग दूसरी वस्तु के सापेक्ष निर्धारित किया जाता है। प्रक्षेप्य गति में क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दिशाओं में गति का अलग-अलग अध्ययन करके वस्तु की परास, अधिकतम ऊँचाई और उड़ान समय निकाला जाता है।
वृत्तीय गति में चाल स्थिर होने पर भी दिशा बदलने के कारण त्वरण उत्पन्न होता है। इसे अभिकेन्द्रीय त्वरण कहते हैं और यह हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर निर्देशित होता है।
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निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 4 – समतल में गति को समझने के लिए सदिशों की मूल अवधारणा, उनके घटक, सापेक्ष वेग, प्रक्षेप्य गति और वृत्तीय गति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। परीक्षा में सूत्र आधारित प्रश्नों के साथ-साथ संख्यात्मक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं, इसलिए प्रत्येक सूत्र का अर्थ और उसका प्रयोग समझना आवश्यक है।
इस अध्याय के numericals हल करते समय पहले दिए गए आँकड़ों को SI इकाई में बदलें, फिर उपयुक्त सूत्र चुनें और अंत में उत्तर की इकाई अवश्य लिखें।