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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 5 गति के नियम

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 5 – गति के नियम में न्यूटन के गति के नियमों के आधार पर वस्तुओं की गति और उन पर लगने वाले बल का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में न्यूटन के तीनों गति नियम, जड़त्व, बल, संवेग, आवेग, घर्षण, तनाव, अभिलंब प्रतिक्रिया, संवेग संरक्षण तथा वृत्तीय गति जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

यह अध्याय Bihar Board Class 11 Physics के महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। इसमें सिद्धांत के साथ-साथ कई संख्यात्मक प्रश्न भी दिए गए हैं। इसलिए सूत्रों को समझने के साथ उनका प्रयोग करना भी जरूरी है। नीचे अध्याय के प्रमुख प्रश्नों, सूत्रों और numericals को आसान भाषा में व्यवस्थित किया गया है।

Table of Contents

Chapter 5 – गति के नियम के मुख्य विषय

  • न्यूटन का प्रथम गति नियम
  • जड़त्व और उसके प्रकार
  • न्यूटन का द्वितीय गति नियम
  • न्यूटन का तृतीय गति नियम
  • संवेग और आवेग
  • बल और संवेग में संबंध
  • संवेग संरक्षण का नियम
  • घर्षण बल
  • स्थैतिक और गतिज घर्षण
  • डोरी में तनाव
  • अभिलंब प्रतिक्रिया
  • लिफ्ट में व्यक्ति का आभासी भार
  • अजड़त्वीय निर्देश तंत्र और छद्म बल
  • वृत्तीय गति और अभिकेन्द्रीय बल
  • बैंकिंग ऑफ रोड
  • ऊर्ध्वाधर वृत्तीय गति

पिछले और अगले अध्याय से जुड़ें

पिछला अध्याय पढ़ने के लिए
Chapter 4 – समतल में गति
देखें।

इस अध्याय के बाद
Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति
पढ़ सकते हैं।

न्यूटन का प्रथम गति नियम

न्यूटन के प्रथम गति नियम के अनुसार, कोई वस्तु अपनी विरामावस्था या एकसमान सरल रेखीय गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है, जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य नहीं करता।

इस नियम को जड़त्व का नियम भी कहा जाता है।

जड़त्व क्या है?

किसी वस्तु की अपनी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति को जड़त्व कहते हैं। वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसका जड़त्व भी उतना ही अधिक होता है।

जड़त्व के प्रकार

  • विराम का जड़त्व: वस्तु अपनी विराम अवस्था बनाए रखना चाहती है।
  • गति का जड़त्व: गतिशील वस्तु गति में बनी रहना चाहती है।
  • दिशा का जड़त्व: गतिशील वस्तु अपनी गति की दिशा में परिवर्तन का विरोध करती है।

नेट बल और गति

यदि किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल शून्य है, तो वस्तु का त्वरण शून्य होगा। इसका अर्थ है कि वस्तु या तो विराम में होगी या एकसमान वेग से गति करेगी।

उदाहरण के लिए, समान चाल से नीचे गिरती वर्षा की बूंद पर वायु प्रतिरोध और गुरुत्व बल एक-दूसरे को संतुलित कर सकते हैं। इसलिए उसका नेट बल शून्य हो सकता है।

ऊपर फेंके गए पत्थर पर बल

किसी पत्थर को ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकने के बाद, यदि वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाए, तो पत्थर पर केवल गुरुत्व बल कार्य करता है।

अतः पूरे समय पत्थर पर बल:

F = mg

और इसकी दिशा हमेशा नीचे की ओर होती है।

पत्थर ऊपर जा रहा हो, नीचे आ रहा हो या उच्चतम बिंदु पर क्षणभर के लिए उसकी ऊर्ध्वाधर चाल शून्य हो, गुरुत्व बल की दिशा नहीं बदलती।

न्यूटन का द्वितीय गति नियम

न्यूटन के द्वितीय गति नियम के अनुसार किसी वस्तु पर लगाया गया बल उसके संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है।

F = dp/dt

जहाँ p संवेग है।

यदि द्रव्यमान नियत हो, तो:

p = mv

अतः:

F = m dv/dt

और

F = ma

यही न्यूटन के द्वितीय नियम का सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला रूप है।

बल का SI मात्रक

बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।

1 N = 1 kg m/s2

अर्थात् 1 न्यूटन वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m/s2 का त्वरण उत्पन्न करे।

प्रश्न: 20 kg पिंड को रोकने में कितना समय लगेगा?

15 m/s की प्रारंभिक चाल से चल रहे 20 kg द्रव्यमान के पिंड पर 50 N का स्थायी मंदन बल लगाया जाता है।

दिया है:

  • m = 20 kg
  • u = 15 m/s
  • v = 0
  • F = 50 N

न्यूटन के द्वितीय नियम से:

F = ma

a = F/m = 50/20 = 2.5 m/s2

चूँकि यह मंदन है:

a = -2.5 m/s2

अब:

v = u + at

0 = 15 – 2.5t

t = 6 s

अतः पिंड 6 सेकंड में रुक जाएगा।

दो लंबवत बलों से उत्पन्न त्वरण

यदि किसी 5 kg पिंड पर 6 N और 8 N के दो परस्पर लंबवत बल लगते हैं, तो परिणामी बल:

F = √(62 + 82)

F = √100 = 10 N

अतः त्वरण:

a = F/m = 10/5 = 2 m/s2

परिणामी बल की दिशा 6 N वाले बल से:

tan θ = 8/6

अर्थात् θ लगभग 53° होगा।

न्यूटन का तृतीय गति नियम

न्यूटन के तृतीय गति नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर परिमाण की और विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है।

यदि वस्तु A, वस्तु B पर बल लगाती है, तो वस्तु B भी वस्तु A पर समान परिमाण का विपरीत दिशा वाला बल लगाएगी।

FAB = -FBA

क्रिया और प्रतिक्रिया बल अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं। इसलिए वे एक ही वस्तु पर लगने वाले बलों को आपस में रद्द नहीं करते।

घोड़ा गाड़ी को कैसे खींचता है?

घोड़ा जमीन को पीछे की ओर धकेलता है। जमीन घोड़े पर घर्षण बल के रूप में आगे की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती है। यही बाहरी बल घोड़े और गाड़ी की आगे की गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए केवल घोड़े और गाड़ी के बीच के पारस्परिक बलों को देखकर पूरी व्यवस्था की गति को नहीं समझा जा सकता। जमीन के साथ घर्षण को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

संवेग

किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को उसका संवेग कहते हैं।

p = mv

संवेग एक सदिश राशि है। इसकी दिशा वस्तु के वेग की दिशा में होती है।

संवेग का SI मात्रक:

kg m/s

आवेग

बल और उसके कार्य करने के समय-अंतराल के गुणनफल को आवेग कहते हैं। आवेग संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है।

I = F Δt

और

I = Δp = p2 – p1

आवेग का SI मात्रक N s है।

क्रिकेट खिलाड़ी गेंद पकड़ते समय हाथ पीछे क्यों करता है?

गेंद को रोकने के लिए उसके संवेग में परिवर्तन आवश्यक है। यदि गेंद को बहुत कम समय में रोक दिया जाए तो आवश्यक बल अधिक होगा। हाथ को गेंद की गति की दिशा में पीछे ले जाने से गेंद को रोकने का समय बढ़ जाता है।

चूँकि:

F = Δp/Δt

समय बढ़ने पर आवश्यक औसत बल कम हो जाता है। इसी कारण क्रिकेट खिलाड़ी गेंद पकड़ते समय हाथ को पीछे की ओर खींचता है।

ऑटो रिक्शा पर मंदन बल का उदाहरण

एक ऑटो रिक्शा 36 km/h की चाल से चल रहा है और 4 सेकंड में रुक जाता है। ऑटो रिक्शा और चालक का कुल द्रव्यमान 465 kg है।

प्रारंभिक चाल:

u = 36 × 5/18 = 10 m/s

अंतिम चाल:

v = 0

मंदन:

a = (v-u)/t

a = (0-10)/4 = -2.5 m/s2

बल का परिमाण:

F = ma

F = 465 × 2.5 = 1162.5 N

अतः औसत मंदन बल का परिमाण लगभग 1.16 × 103 N है और इसकी दिशा गति के विपरीत होगी।

रॉकेट का प्रणोद बल

जब रॉकेट ऊपर की ओर त्वरण से जाता है, तो उसके ऊपर प्रणोद बल ऊपर की ओर और भार नीचे की ओर कार्य करता है।

यदि ऊपर की दिशा को धनात्मक मानें:

F – mg = ma

अतः:

F = m(g+a)

यह सूत्र रॉकेट के प्रारंभिक प्रणोद से संबंधित प्रश्नों में उपयोगी है।

न्यूटन के गति नियम और लिफ्ट

लिफ्ट में खड़े व्यक्ति का तुला पर पाठ्यांक हमेशा mg के बराबर नहीं होता। यह लिफ्ट के त्वरण पर निर्भर करता है।

लिफ्ट स्थिर या एकसमान वेग से चल रही हो

R = mg

लिफ्ट ऊपर की ओर त्वरण से चल रही हो

R = m(g+a)

लिफ्ट नीचे की ओर त्वरण से चल रही हो

R = m(g-a)

लिफ्ट मुक्त रूप से गिर रही हो

यदि लिफ्ट का त्वरण g के बराबर नीचे की ओर है, तो:

R = m(g-g) = 0

इस स्थिति में व्यक्ति को भारहीनता का अनुभव होगा।

70 kg व्यक्ति के लिफ्ट वाले प्रश्न का हल

मान लें व्यक्ति का द्रव्यमान 70 kg है।

(a) लिफ्ट एकसमान वेग से ऊपर जा रही है

R = mg = 70 × 9.8 = 686 N

(b) लिफ्ट 5 m/s2 के त्वरण से नीचे जा रही है

R = m(g-a)

R = 70(9.8-5) = 336 N

(c) लिफ्ट 5 m/s2 के त्वरण से ऊपर जा रही है

R = m(g+a)

R = 70(9.8+5) = 1036 N

(d) लिफ्ट मुक्त रूप से गिर रही है

R = 0

संवेग संरक्षण का नियम

यदि किसी निकाय पर बाहरी परिणामी बल शून्य है, तो उस निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।

कुल प्रारंभिक संवेग = कुल अंतिम संवेग

दो पिंडों के लिए:

m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2v2

विस्फोट के बाद टुकड़ों की विपरीत दिशा

यदि कोई नाभिक प्रारंभ में विरामावस्था में है और दो छोटे नाभिकों में टूटता है, तो प्रारंभिक संवेग शून्य होगा।

pinitial = 0

संवेग संरक्षण से:

m1v1 + m2v2 = 0

अतः:

m1v1 = -m2v2

ऋण चिह्न बताता है कि दोनों वेग विपरीत दिशाओं में होंगे।

तोप के प्रतिक्षेप का उदाहरण

100 kg की तोप से 0.020 kg का गोला 80 m/s की चाल से दागा जाता है। तोप प्रारंभ में विराम में है।

संवेग संरक्षण से:

m1v1 + m2v2 = 0

अतः:

v1 = -m2v2/m1

v1 = -(0.020 × 80)/100

v1 = -0.016 m/s

ऋण चिह्न बताता है कि तोप की गति गोले की गति के विपरीत दिशा में होगी।

घर्षण बल

दो संपर्क में आई सतहों के बीच सापेक्ष गति या सापेक्ष गति की प्रवृत्ति का विरोध करने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं।

स्थैतिक घर्षण

जब दो सतहों के बीच कोई सापेक्ष गति नहीं है लेकिन गति की प्रवृत्ति है, तब स्थैतिक घर्षण कार्य करता है।

fs ≤ μsN

अधिकतम स्थैतिक घर्षण:

fs,max = μsN

गतिज घर्षण

जब दो सतहें एक-दूसरे के सापेक्ष गति कर रही हों, तब गतिज घर्षण कार्य करता है।

fk = μkN

चलती संवाहक पट्टी पर व्यक्ति

यदि कोई व्यक्ति त्वरण से चलती क्षैतिज पट्टी पर उसके साथ स्थिर खड़ा है, तो व्यक्ति को उसी त्वरण से गति कराने के लिए घर्षण बल आवश्यक होगा।

मान लें व्यक्ति का द्रव्यमान 65 kg और पट्टी का त्वरण 1 m/s2 है।

नेट बल:

F = ma = 65 × 1 = 65 N

यदि स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.2 है, तो:

N = mg = 65 × 10 = 650 N

अधिकतम घर्षण:

fmax = μsN = 0.2 × 650 = 130 N

अतः अधिकतम त्वरण:

mamax = μsmg

amax = μsg = 0.2 × 10 = 2 m/s2

इसलिए व्यक्ति पट्टी के सापेक्ष स्थिर रहने के लिए अधिकतम 2 m/s2 तक के त्वरण के साथ चल सकता है।

डोरी में तनाव

हल्की और अवितान्य डोरी में तनाव से संबंधित प्रश्नों को न्यूटन के द्वितीय नियम से हल किया जाता है। प्रत्येक पिंड का अलग-अलग free body diagram बनाकर समीकरण लिखना सबसे आसान तरीका है।

8 kg और 12 kg के पिंडों का तनाव

8 kg और 12 kg के दो पिंड हल्की अवितान्य डोरी से घर्षणरहित घिरनी पर लटकाए गए हैं। भारी पिंड नीचे और हल्का पिंड ऊपर गति करेगा।

प्रणाली का त्वरण:

a = (m2-m1)g/(m1+m2)

a = (12-8)×10/(12+8)

a = 2 m/s2

अब 12 kg वाले पिंड के लिए:

12g – T = 12a

T = 12(g-a)

T = 12(10-2) = 96 N

अतः डोरी में तनाव 96 N होगा।

दो पिंडों और डोरी का सामान्य सूत्र

यदि घर्षणरहित घिरनी पर m1 और m2 द्रव्यमान लटक रहे हों और m2 > m1, तो:

a = (m2-m1)g/(m1+m2)

तनाव:

T = 2m1m2g/(m1+m2)

आवेग का संख्यात्मक उदाहरण

दो 0.05 kg की बिलियर्ड गेंदें 6 m/s की चाल से विपरीत दिशाओं में चलकर टकराती हैं और टक्कर के बाद उसी चाल से विपरीत दिशा में लौटती हैं।

पहली गेंद के लिए:

u = +6 m/s

v = -6 m/s

आवेग:

I = m(v-u)

I = 0.05(-6-6)

I = -0.6 kg m/s

अतः आवेग का परिमाण 0.6 N s है। दूसरी गेंद पर आवेग समान परिमाण का और विपरीत दिशा में होगा।

54 km/h की गेंद को 45° मोड़ने पर आवेग

गेंद की प्रारंभिक चाल:

u = 54 × 5/18 = 15 m/s

अंतिम चाल भी 15 m/s है और दिशा 45° बदल गई है।

संवेगों का परिमाण:

p = mv = 0.15 × 15 = 2.25 kg m/s

दोनों संवेगों के बीच कोण 45° है। इसलिए संवेग परिवर्तन:

Δp = √(p12 + p22 – 2p1p2cos45°)

अतः आवेग का परिमाण लगभग 1.72 N s प्राप्त होता है।

वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय बल

जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर गति करती है, तो उसकी दिशा लगातार बदलती रहती है। दिशा परिवर्तन के लिए केंद्र की ओर एक बल आवश्यक होता है। इसे अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं।

Fc = mv2/r

कोणीय वेग के रूप में:

Fc = mrω2

ध्यान रखें कि अभिकेन्द्रीय बल कोई नया अलग प्रकार का बल नहीं है। परिस्थिति के अनुसार तनाव, घर्षण, गुरुत्व बल या अभिलंब प्रतिक्रिया अभिकेन्द्रीय बल की भूमिका निभा सकते हैं।

डोरी टूटने पर पत्थर किस दिशा में जाएगा?

यदि डोरी से बंधा पत्थर वृत्तीय गति कर रहा है और डोरी अचानक टूट जाती है, तो पत्थर त्रिज्या की दिशा में बाहर नहीं जाएगा। वह डोरी टूटने के क्षण अपनी स्पर्शरेखीय दिशा में गति करेगा।

इसका कारण यह है कि डोरी टूटते ही अभिकेन्द्रीय बल समाप्त हो जाता है और पत्थर अपने उस क्षण के वेग की दिशा में आगे बढ़ता है।

क्षैतिज वृत्त में डोरी का तनाव

यदि m द्रव्यमान का पत्थर r त्रिज्या के क्षैतिज वृत्त में v चाल से घूम रहा है और डोरी ही आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करती है, तो:

T = mv2/r

यदि पत्थर की आवृत्ति f हो, तो:

v = 2πrf

अतः:

T = 4π2mr f2

0.25 kg पत्थर और डोरी का उदाहरण

0.25 kg का पत्थर 1.5 m त्रिज्या के वृत्त में 40 rev/min की चाल से घूम रहा है।

आवृत्ति:

f = 40/60 = 2/3 Hz

कोणीय वेग:

ω = 2πf = 4π/3 rad/s

तनाव:

T = mrω2

T ≈ 6.58 N

अतः डोरी में तनाव लगभग 6.6 N होगा।

वृत्तीय मोड़ पर वाहन

समतल सड़क पर वृत्तीय मोड़ लेते समय वाहन को अभिकेन्द्रीय बल देने का काम मुख्यतः टायर और सड़क के बीच का घर्षण करता है।

f = mv2/r

यदि उपलब्ध अधिकतम घर्षण μmg से अधिक अभिकेन्द्रीय बल की आवश्यकता हो, तो वाहन फिसल सकता है।

सड़क का बैंकिंग कोण

यदि वाहन बिना घर्षण के बैंक्ड रोड पर वृत्तीय गति करता है, तो आवश्यक संबंध:

tan θ = v2/(rg)

यहाँ θ बैंकिंग कोण है।

इससे स्पष्ट है कि अधिक चाल या कम त्रिज्या होने पर आवश्यक बैंकिंग कोण बढ़ता है।

ऊर्ध्वाधर वृत्तीय गति

ऊर्ध्वाधर वृत्त में किसी वस्तु को घुमाते समय गुरुत्व बल और डोरी का तनाव अलग-अलग बिंदुओं पर अलग दिशा में कार्य करते हैं।

उच्चतम बिंदु पर न्यूनतम चाल की स्थिति में यदि डोरी में तनाव शून्य हो जाए, तो:

mg = mv2/r

अतः:

vmin = √(gr)

‘मौत के कुएँ’ में मोटरसाइकिल क्यों नहीं गिरती?

ऊर्ध्वाधर लूप के उच्चतम बिंदु पर मोटरसाइकिल और सवार को वृत्तीय पथ पर बनाए रखने के लिए केंद्र की ओर आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल चाहिए। उच्चतम बिंदु पर गुरुत्व बल भी केंद्र की ओर कार्य करता है।

न्यूनतम चाल की स्थिति में संपर्क बल शून्य की सीमा पर होता है:

mg = mv2/r

अतः:

v = √(gr)

यदि r = 25 m और g = 10 m/s2 हो:

v = √250 ≈ 15.8 m/s

अतः लूप पूरा करने के लिए उच्चतम बिंदु पर न्यूनतम चाल लगभग 15.8 m/s होगी।

बेलनाकार घूमती दीवार में व्यक्ति

घूमती हुई बेलनाकार दीवार से चिपके व्यक्ति को गिरने से रोकने के लिए घर्षण बल उसके भार को संतुलित करता है। दीवार की अभिलंब प्रतिक्रिया अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करती है।

N = mrω2

और ऊर्ध्वाधर दिशा में:

μN ≥ mg

अतः:

μmrω2 ≥ mg

इससे न्यूनतम कोणीय वेग:

ωmin = √(g/μr)

अजड़त्वीय निर्देश तंत्र और छद्म बल

ऐसा निर्देश तंत्र जो स्वयं त्वरण से गति कर रहा हो, अजड़त्वीय निर्देश तंत्र कहलाता है। ऐसे निर्देश तंत्र में न्यूटन के नियमों को लागू करने के लिए छद्म बल को शामिल करना पड़ सकता है।

यदि निर्देश तंत्र का त्वरण a है, तो m द्रव्यमान की वस्तु पर छद्म बल:

Fpseudo = -ma

इसकी दिशा निर्देश तंत्र के त्वरण की दिशा के विपरीत होती है।

त्वरित ट्राली पर रखे गुटके का उदाहरण

यदि कोई ट्राली 0.5 m/s2 के त्वरण से चल रही है और गुटका ट्राली के साथ नहीं फिसल रहा है, तो धरती के प्रेक्षक के अनुसार गुटका भी उसी त्वरण से आगे बढ़ेगा।

ट्राली के साथ चलने वाले प्रेक्षक के लिए गुटका स्थिर दिखाई दे सकता है, क्योंकि वह और गुटका दोनों समान त्वरण से गति कर रहे हैं।

यही उदाहरण अलग-अलग निर्देश तंत्रों में गति के वर्णन का महत्व बताता है।

ट्रक से संदूक गिरने का विचार

यदि किसी ट्रक का पिछला भाग खुला है और ट्रक तेजी से आगे बढ़ता है, तो ट्रक के सापेक्ष संदूक पीछे की ओर खिसकने की प्रवृत्ति रखता है। घर्षण इस सापेक्ष गति का विरोध करता है।

यदि ट्रक का त्वरण घर्षण द्वारा उपलब्ध कराए जा सकने वाले अधिकतम त्वरण से अधिक हो जाए, तो संदूक ट्रक के पीछे से गिर सकता है।

जलधारा द्वारा दीवार पर बल

किसी नली से जल वेग v और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A के साथ निकलकर दीवार से टकराता है। यदि टक्कर के बाद जल का क्षैतिज वेग शून्य हो जाता है, तो दीवार पर बल संवेग परिवर्तन की दर से प्राप्त किया जा सकता है।

प्रति सेकंड जल का द्रव्यमान:

ṁ = ρAv

अतः बल:

F = ṁv = ρAv2

यदि:

  • ρ = 1000 kg/m3
  • A = 10-2 m2
  • v = 15 m/s

तो:

F = 1000 × 10-2 × 152

F = 2250 N

अतः दीवार पर जल द्वारा लगभग 2250 N बल लगाया जाएगा।

रस्सी पर चढ़ते बंदर का प्रश्न

40 kg का बंदर ऐसी रस्सी पर चढ़ रहा है जो अधिकतम 600 N तनाव सह सकती है। ऊपर की ओर त्वरण a होने पर:

T – mg = ma

अतः:

T = m(g+a)

यदि बंदर 6 m/s2 के त्वरण से ऊपर चढ़ता है:

T = 40(10+6) = 640 N

चूँकि 640 N, 600 N से अधिक है, इसलिए रस्सी टूट जाएगी।

यदि बंदर 4 m/s2 के त्वरण से नीचे जा रहा हो:

T = m(g-a) = 40(10-4) = 240 N

इस स्थिति में रस्सी नहीं टूटेगी।

क्रिया-प्रतिक्रिया और घर्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

बस अचानक रुकने पर यात्री आगे क्यों गिरते हैं?

बस के अचानक रुकने पर यात्री के शरीर का ऊपरी भाग जड़त्व के कारण पहले के वेग से आगे बढ़ने की प्रवृत्ति रखता है। इसलिए यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं या गिर सकते हैं।

लॉन मूवर को खींचना धकेलने से आसान क्यों होता है?

जब मूवर को कोण पर खींचा जाता है, तो खींचने वाले बल का एक ऊर्ध्वाधर घटक अभिलंब प्रतिक्रिया को कम कर सकता है। अभिलंब प्रतिक्रिया कम होने पर घर्षण भी कम होता है। धकेलने पर ऊर्ध्वाधर घटक अभिलंब प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है। इसलिए समान परिस्थितियों में मूवर को खींचना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सूत्र

राशि/स्थितिसूत्र
न्यूटन का द्वितीय नियमF = ma
संवेगp = mv
बलF = dp/dt
आवेगI = Δp = FΔt
अधिकतम स्थैतिक घर्षणfmax = μsN
गतिज घर्षणfk = μkN
अभिकेन्द्रीय बलFc = mv2/r
अभिकेन्द्रीय बलFc = mrω2
वृत्तीय गति में रेखीय वेगv = rω
लिफ्ट ऊपर की ओरR = m(g+a)
लिफ्ट नीचे की ओरR = m(g-a)
मुक्त रूप से गिरती लिफ्टR = 0
Atwood मशीन का त्वरणa = (m2-m1)g/(m1+m2)
Atwood मशीन का तनावT = 2m1m2g/(m1+m2)
बैंकिंग कोणtan θ = v2/(rg)
ऊर्ध्वाधर लूप की न्यूनतम चालvmin = √(gr)

Important Questions – Chapter 5 गति के नियम

प्रश्न 1. न्यूटन का प्रथम गति नियम क्या है?

यदि किसी वस्तु पर कोई असंतुलित बाहरी बल कार्य नहीं करता है, तो वह अपनी विरामावस्था या एकसमान सरल रेखीय गति की अवस्था में बनी रहती है। इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं।

प्रश्न 2. न्यूटन के द्वितीय गति नियम का सूत्र लिखिए।

F = dp/dt

नियत द्रव्यमान के लिए:

F = ma

प्रश्न 3. न्यूटन का तृतीय गति नियम क्या है?

प्रत्येक क्रिया के बराबर परिमाण की और विपरीत दिशा में एक प्रतिक्रिया होती है।

प्रश्न 4. संवेग क्या है?

द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।

p = mv

प्रश्न 5. आवेग क्या है?

बल और बल के कार्य करने के समय के गुणनफल को आवेग कहते हैं। यह संवेग परिवर्तन के बराबर होता है।

I = FΔt = Δp

प्रश्न 6. घर्षण बल क्या है?

दो संपर्क सतहों के बीच सापेक्ष गति या सापेक्ष गति की प्रवृत्ति का विरोध करने वाला बल घर्षण बल कहलाता है।

प्रश्न 7. अभिकेन्द्रीय बल क्या है?

वृत्तीय गति में केंद्र की ओर आवश्यक बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं।

Fc = mv2/r

प्रश्न 8. डोरी टूटने पर वृत्त में घूमता पत्थर किस दिशा में जाएगा?

डोरी टूटने के क्षण पत्थर अपनी स्पर्शरेखीय दिशा में गति करेगा।

प्रश्न 9. लिफ्ट में व्यक्ति का आभासी भार कब शून्य होता है?

जब लिफ्ट मुक्त रूप से गुरुत्व के प्रभाव में नीचे गिरती है, तब अभिलंब प्रतिक्रिया शून्य हो जाती है। इसलिए व्यक्ति का आभासी भार शून्य होता है।

प्रश्न 10. संवेग संरक्षण का नियम लिखिए।

किसी पृथक निकाय पर बाहरी परिणामी बल शून्य होने पर निकाय का कुल संवेग नियत रहता है।

Objective Questions – Chapter 5

1. बल का SI मात्रक क्या है?

(A) जूल
(B) न्यूटन
(C) वाट
(D) पास्कल

उत्तर: (B) न्यूटन

2. न्यूटन के द्वितीय नियम का सही रूप कौन-सा है?

(A) F = m/v
(B) F = ma
(C) F = mv
(D) F = m+a

उत्तर: (B) F = ma

3. संवेग का सूत्र है:

(A) p = m/v
(B) p = mv
(C) p = ma
(D) p = v/m

उत्तर: (B) p = mv

4. आवेग किसके बराबर होता है?

(A) वेग
(B) त्वरण
(C) संवेग में परिवर्तन
(D) विस्थापन

उत्तर: (C) संवेग में परिवर्तन

5. एकसमान वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय बल की दिशा होती है:

(A) केंद्र से बाहर
(B) स्पर्शरेखा के अनुदिश
(C) केंद्र की ओर
(D) ऊपर की ओर

उत्तर: (C) केंद्र की ओर

6. अभिकेन्द्रीय बल का सूत्र है:

(A) mv/r
(B) mv2/r
(C) mr/v
(D) mvr

उत्तर: (B) mv2/r

7. अधिकतम स्थैतिक घर्षण का सूत्र है:

(A) μN
(B) N/μ
(C) μ/N
(D) mN

उत्तर: (A) μN

8. मुक्त रूप से गिरती लिफ्ट में व्यक्ति का आभासी भार होता है:

(A) mg
(B) 2mg
(C) mg/2
(D) शून्य

उत्तर: (D) शून्य

9. डोरी टूटने पर वृत्तीय गति करता पत्थर किस दिशा में जाएगा?

(A) त्रिज्या की दिशा में बाहर
(B) केंद्र की ओर
(C) स्पर्शरेखा की दिशा में
(D) ऊपर की ओर

उत्तर: (C) स्पर्शरेखा की दिशा में

10. न्यूटन का प्रथम गति नियम किस नाम से भी जाना जाता है?

(A) ऊर्जा का नियम
(B) जड़त्व का नियम
(C) संवेग का नियम
(D) गुरुत्व का नियम

उत्तर: (B) जड़त्व का नियम

अध्याय 5 के महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न/स्थितिमुख्य अवधारणा
50 N मंदन बल से 20 kg पिंड को रोकनाF = ma और v = u + at
6 N और 8 N के लंबवत बलपरिणामी बल और त्वरण
36 km/h से ऑटो को रोकनामंदन और F = ma
रॉकेट का प्रणोदF = m(g+a)
लिफ्ट में व्यक्ति का पाठ्यांकअभिलंब प्रतिक्रिया
8 kg और 12 kg की Atwood मशीनत्वरण और तनाव
तोप और गोलासंवेग संरक्षण
गेंद का आवेगसंवेग परिवर्तन
वृत्त में घूमता पत्थरअभिकेन्द्रीय बल
जलधारा का दीवार पर बलसंवेग परिवर्तन की दर
घूमती बेलनाकार दीवारघर्षण और अभिकेन्द्रीय बल
ऊर्ध्वाधर लूपअभिकेन्द्रीय बल और गुरुत्व

अध्याय 5 का परीक्षा उपयोगी सारांश

गति के नियम अध्याय में मुख्य रूप से यह समझना आवश्यक है कि किसी वस्तु की गति में परिवर्तन तभी होता है जब उस पर परिणामी बाहरी बल कार्य करे। न्यूटन का प्रथम नियम जड़त्व को समझाता है, द्वितीय नियम बल और त्वरण के बीच संबंध देता है तथा तृतीय नियम क्रिया और प्रतिक्रिया के संबंध को स्पष्ट करता है।

F = ma इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण संबंध है। इसके साथ p = mv और I = Δp का प्रयोग संवेग तथा आवेग के प्रश्नों में किया जाता है।

घर्षण से संबंधित प्रश्नों में f = μN का प्रयोग किया जाता है। डोरी और घिरनी वाले प्रश्नों में प्रत्येक पिंड के लिए अलग समीकरण बनाना उपयोगी होता है। लिफ्ट के प्रश्नों में अभिलंब प्रतिक्रिया व्यक्ति के आभासी भार को निर्धारित करती है।

वृत्तीय गति के प्रश्नों में Fc = mv2/r तथा tan θ = v2/(rg) जैसे सूत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक

Chapter 1 – भौतिक जगत

Chapter 2 – मात्रक एवं मापन

Chapter 3 – सरल रेखा में गति

Chapter 4 – समतल में गति

Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Physics Chapter 5 – गति के नियम को अच्छी तरह तैयार करने के लिए न्यूटन के तीनों नियम, संवेग, आवेग, घर्षण, तनाव, लिफ्ट और वृत्तीय गति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। संख्यात्मक प्रश्न हल करते समय सबसे पहले सभी दिए गए मानों को SI इकाई में बदलें, फिर संबंधित free body diagram या बलों की दिशा निर्धारित करें और उसके बाद उपयुक्त समीकरण लगाएँ।

बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए इस अध्याय के सूत्रों को याद करने के साथ-साथ यह समझना भी जरूरी है कि किसी विशेष स्थिति में कौन-सा बल किस दिशा में कार्य कर रहा है।

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