Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति में कार्य, ऊर्जा और शक्ति की मूल अवधारणाओं के साथ उनके बीच के संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में कार्य, गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय, ऊर्जा संरक्षण, शक्ति, प्रत्यास्थ एवं अप्रत्यास्थ संघट्ट, संवेग संरक्षण और यांत्रिक ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
यह अध्याय Bihar Board Class 11 Physics के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सिद्धांत के साथ कई संख्यात्मक प्रश्न भी आते हैं। किसी बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है और इसी आधार पर ऊर्जा में परिवर्तन को समझा जाता है।
इस पोस्ट में अध्याय के महत्वपूर्ण concepts, formulas, प्रश्न-उत्तर और numerical problems को आसान भाषा में समझाया गया है।
Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति के मुख्य विषय
- कार्य की परिभाषा और सूत्र
- धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कार्य
- चर बल द्वारा किया गया कार्य
- गतिज ऊर्जा
- स्थितिज ऊर्जा
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय
- संरक्षी और असंरक्षी बल
- यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण
- ऊर्जा संरक्षण का नियम
- शक्ति
- संघट्ट और संवेग संरक्षण
- प्रत्यास्थ एवं अप्रत्यास्थ संघट्ट
- स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा
- गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा
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Chapter 5 – गति के नियम
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Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति
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कार्य क्या है?
जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और बल के कारण वस्तु में विस्थापन होता है, तो बल द्वारा कार्य किया जा सकता है।
यदि नियत बल F किसी वस्तु को s विस्थापन कराता है और बल तथा विस्थापन के बीच θ कोण है, तो:
W = Fs cos θ
यहाँ W कार्य, F बल, s विस्थापन और θ बल तथा विस्थापन के बीच का कोण है।
कार्य का SI मात्रक
कार्य का SI मात्रक जूल (J) है।
1 J = 1 N × 1 m
धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कार्य
धनात्मक कार्य
जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में होते हैं, तब θ = 0° होता है।
W = Fs
अतः कार्य धनात्मक होता है।
ऋणात्मक कार्य
जब बल और विस्थापन विपरीत दिशाओं में होते हैं, तब θ = 180° होता है।
W = -Fs
उदाहरण के लिए घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य सामान्यतः ऋणात्मक होता है।
शून्य कार्य
जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, तब θ = 90° होता है।
W = Fs cos 90° = 0
उदाहरण के लिए वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय बल द्वारा किया गया तात्कालिक कार्य शून्य होता है क्योंकि बल विस्थापन की दिशा के लंबवत होता है।
कुएँ से बाल्टी निकालने में कार्य
यदि कोई व्यक्ति कुएँ से रस्सी द्वारा बाल्टी को ऊपर खींचता है, तो व्यक्ति का बल और बाल्टी का विस्थापन दोनों ऊपर की दिशा में होते हैं। इसलिए व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होता है।
वहीं गुरुत्वीय बल नीचे की ओर और बाल्टी का विस्थापन ऊपर की ओर होने के कारण गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
घर्षण द्वारा किया गया कार्य
घर्षण बल सामान्यतः वस्तु की गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है। इसलिए घर्षण द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
Wf = -f × s
यदि गतिज घर्षण बल:
f = μkN
तो:
Wf = -μkNs
2 kg पिंड पर बल द्वारा कार्य का उदाहरण
2 kg का एक पिंड प्रारंभ में विराम में है। उस पर 7 N का क्षैतिज बल लगाया जाता है। मेज और पिंड के बीच गतिज घर्षण गुणांक 0.1 है। 10 सेकंड में बल और घर्षण द्वारा किए गए कार्य को समझते हैं।
दिया है:
- m = 2 kg
- F = 7 N
- μk = 0.1
- u = 0
- t = 10 s
घर्षण बल:
f = μkmg
f = 0.1 × 2 × 10 = 2 N
नेट बल:
Fnet = 7 – 2 = 5 N
अतः त्वरण:
a = Fnet/m = 5/2 = 2.5 m/s2
10 सेकंड में विस्थापन:
s = ut + 1/2 at2
s = 0 + 1/2 × 2.5 × 102
s = 125 m
लगाए गए बल द्वारा कार्य
WF = Fs
WF = 7 × 125 = 875 J
घर्षण द्वारा कार्य
Wf = -fs
Wf = -2 × 125 = -250 J
कुल कार्य
Wnet = 875 – 250 = 625 J
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार पिंड की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन भी 625 J होगा।
गतिज ऊर्जा
किसी गतिशील वस्तु में उसकी गति के कारण जो ऊर्जा होती है, उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं।
K = 1/2 mv2
जहाँ m वस्तु का द्रव्यमान और v उसका वेग है।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
Wnet = ΔK
अर्थात्:
Wnet = Kf – Ki
इस प्रमेय की सहायता से कई ऐसे numerical प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं जिनमें बल, विस्थापन और वेग के बीच संबंध निकालना हो।
स्थितिज ऊर्जा
किसी वस्तु की स्थिति या विन्यास के कारण उसमें संचित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा
पृथ्वी की सतह के पास किसी वस्तु को h ऊँचाई तक उठाने पर उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा:
U = mgh
जहाँ m द्रव्यमान, g गुरुत्वीय त्वरण और h संदर्भ स्तर से ऊँचाई है।
स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा
यदि किसी स्प्रिंग को x दूरी तक खींचा या दबाया जाए, तो उसमें संचित स्थितिज ऊर्जा:
U = 1/2 kx2
जहाँ k स्प्रिंग नियतांक और x स्प्रिंग का विस्तार या संपीड़न है।
ऊर्जा संरक्षण का नियम
ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
किसी पृथक निकाय की कुल ऊर्जा नियत रहती है।
यांत्रिक ऊर्जा:
E = K + U
यदि केवल संरक्षी बल कार्य कर रहे हों, तो:
K + U = constant
1 J ऊर्जा वाले कण का वापसी बिंदु
मान लें किसी कण की कुल ऊर्जा 1 J है और उसकी स्थितिज ऊर्जा:
V(x) = kx2/2
जहाँ:
- k = 0.5 N/m
- E = 1 J
वापसी बिंदु पर कण की गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है। इसलिए:
E = 1/2 kxm2
1 = 1/2 × 0.5 × xm2
xm2 = 4
अतः:
xm = ±2 m
इसलिए कण x = +2 m और x = -2 m पर पहुँचकर अपनी दिशा बदल देगा।
संरक्षी बल
जिस बल द्वारा किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किया गया कार्य केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं, उसे संरक्षी बल कहते हैं।
उदाहरण:
- गुरुत्वाकर्षण बल
- स्प्रिंग बल
- वैद्युत स्थैतिक बल
संरक्षी बल के लिए किसी बंद पथ में कुल कार्य शून्य होता है।
असंरक्षी बल
जिस बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर करता है, उसे असंरक्षी बल कहते हैं।
घर्षण बल इसका प्रमुख उदाहरण है। घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य सामान्यतः यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा आदि में परिवर्तित करता है।
शक्ति क्या है?
कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।
P = W/t
यदि बल और वेग एक ही दिशा में हों, तो तात्कालिक शक्ति:
P = Fv
सामान्य रूप में:
P = Fv cos θ
शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है।
1 W = 1 J/s
अचर त्वरण वाले पिंड की शक्ति
यदि कोई पिंड विराम से नियत त्वरण a के साथ गति करता है, तो:
v = at
यदि उस पर नियत बल F = ma है, तो:
P = Fv
P = ma × at
P = ma2t
अतः:
P ∝ t
इसलिए इस स्थिति में समय के साथ शक्ति रैखिक रूप से बढ़ती है।
अचर शक्ति वाले पिंड की गति
यदि किसी पिंड पर नियत शक्ति P का स्रोत कार्य कर रहा है और पिंड प्रारंभ में विराम में है, तो:
P = Fv = ma × v
इस स्थिति में ऊर्जा के आधार पर:
Ps = 1/2 mv2
अतः:
s ∝ t3/2
इसलिए अचर शक्ति के अधीन विराम से शुरू होने वाले पिंड का विस्थापन t3/2 के समानुपाती होता है।
बल द्वारा कार्य का सदिश रूप
यदि:
F = Fxî + Fyĵ + Fzk̂
और विस्थापन:
s = sxî + syĵ + szk̂
तो कार्य:
W = F · s
अर्थात्:
W = Fxsx + Fysy + Fzsz
उदाहरण: सदिश बल द्वारा कार्य
मान लें किसी वस्तु पर:
F = (-î + 2ĵ + 3k̂) N
का बल लगाया गया और वस्तु z-अक्ष के अनुदिश 4 m विस्थापित हुई।
विस्थापन:
s = 4k̂ m
अतः:
W = F · s
W = (-î + 2ĵ + 3k̂) · 4k̂
W = 12 J
क्योंकि î और k̂ तथा ĵ और k̂ परस्पर लंबवत हैं।
संघट्ट क्या है?
जब दो वस्तुएँ बहुत कम समय के लिए एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं और उनके बीच बहुत अधिक बल कार्य करता है, तो इस घटना को संघट्ट कहते हैं।
संघट्ट के दौरान बाहरी बल नगण्य होने पर निकाय का कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।
कुल प्रारंभिक संवेग = कुल अंतिम संवेग
प्रत्यास्थ संघट्ट
जिस संघट्ट में कुल रेखीय संवेग के साथ-साथ कुल गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, उसे प्रत्यास्थ संघट्ट कहते हैं।
Kinitial = Kfinal
अप्रत्यास्थ संघट्ट
जिस संघट्ट में कुल रेखीय संवेग तो संरक्षित रहता है, लेकिन कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती, उसे अप्रत्यास्थ संघट्ट कहते हैं।
गतिज ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा, ध्वनि, विकृति आदि में बदल सकता है।
प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ संघट्ट में अंतर
| प्रत्यास्थ संघट्ट | अप्रत्यास्थ संघट्ट |
|---|---|
| संवेग संरक्षित रहता है | संवेग संरक्षित रहता है |
| गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है | गतिज ऊर्जा सामान्यतः संरक्षित नहीं रहती |
| ऊर्जा का यांत्रिक रूप से संरक्षण होता है | गतिज ऊर्जा का कुछ भाग अन्य रूपों में बदल सकता है |
प्रत्यास्थ संघट्ट का उदाहरण
दो समान द्रव्यमान वाली बिलियर्ड गेंदों में से एक गेंद वेग v से चल रही है और दूसरी विराम में है। आदर्श प्रत्यास्थ संघट्ट की स्थिति में पहली गेंद अपनी गति दूसरी समान गेंद को दे सकती है।
इस स्थिति में संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों का संरक्षण होना आवश्यक है।
गोली और लकड़ी के गुटके का उदाहरण
0.012 kg की गोली 70 m/s की चाल से 0.4 kg के स्थिर लकड़ी के गुटके से टकराकर उसमें धँस जाती है। टक्कर के बाद दोनों एक साथ चलते हैं।
संवेग संरक्षण से:
m1u + m2u2 = (m1 + m2)v
यहाँ u2 = 0 है।
0.012 × 70 = (0.012 + 0.4)v
v ≈ 2.04 m/s
टक्कर के बाद दोनों एक साथ चलते हैं, इसलिए यह पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट का उदाहरण है।
यदि इसके बाद संयुक्त पिंड ऊपर उठता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में बदलती है:
1/2 (m1 + m2)v2 = (m1 + m2)gh
अतः:
h = v2/(2g)
दिए गए मानों से h लगभग 0.21 m प्राप्त होता है।
लोलक में ऊर्जा संरक्षण
जब किसी लोलक को एक ऊँचाई से छोड़ा जाता है, तो प्रारंभिक स्थिति में उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा अधिक होती है। नीचे आते समय यह ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती जाती है।
यदि वायु प्रतिरोध नगण्य हो:
PE + KE = constant
न्यूनतम बिंदु पर गतिज ऊर्जा अधिकतम और स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
वायु प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का क्षय
यदि लोलक की प्रारंभिक ऊर्जा का 5% भाग वायु प्रतिरोध के विरुद्ध खर्च हो जाए, तो केवल 95% ऊर्जा ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होगी।
यदि प्रारंभिक ऊँचाई h है, तो:
1/2 mv2 = 0.95mgh
अतः:
v = √(1.9gh)
उदाहरण में h = 1.5 m और g = 9.8 m/s2 रखने पर चाल लगभग 5.29 m/s आती है।
पवनचक्की द्वारा उत्पन्न शक्ति
यदि क्षेत्रफल A से v वेग की हवा गुजर रही है और हवा का घनत्व ρ है, तो प्रति सेकंड गुजरने वाली हवा का द्रव्यमान:
ṁ = ρAv
हवा की गतिज ऊर्जा की दर:
Pwind = 1/2 ρAv3
यदि पवनचक्की इस ऊर्जा का η भाग विद्युत ऊर्जा में बदलती है, तो:
Pelectric = η × 1/2 ρAv3
उदाहरण में A = 30 m2, v = 10 m/s, ρ = 1.2 kg/m3 और दक्षता 25% हो, तो उत्पन्न शक्ति लगभग 4.5 kW होगी।
पंप की विद्युत शक्ति
यदि किसी पंप द्वारा m द्रव्यमान के पानी को h ऊँचाई तक t समय में उठाया जाता है, तो उपयोगी यांत्रिक शक्ति:
Pout = mgh/t
यदि पंप की दक्षता η हो, तो इनपुट विद्युत शक्ति:
Pin = mgh/(ηt)
यह सूत्र पानी की टंकी भरने और पानी को ऊँचाई तक पहुँचाने वाले numericals में विशेष रूप से उपयोगी है।
पंप का Numerical
30 m3 पानी की टंकी को 15 मिनट में 40 m ऊँचाई पर भरा जाता है। पंप की दक्षता 30% है।
दिया है:
- V = 30 m3
- ρ = 1000 kg/m3
- h = 40 m
- t = 15 × 60 s
- η = 0.30
पानी का द्रव्यमान:
m = ρV = 1000 × 30 = 30000 kg
उपयोगी शक्ति:
Pout = mgh/t
Pout ≈ 13.1 kW
इनपुट शक्ति:
Pin = Pout/η
Pin ≈ 43.6 kW
मानव द्वारा भार उठाने में किया गया कार्य
यदि कोई व्यक्ति m द्रव्यमान को h ऊँचाई तक n बार उठाता है, तो गुरुत्व के विरुद्ध कुल कार्य:
W = nmgh
उदाहरण के लिए 10 kg द्रव्यमान को 0.5 m ऊँचाई तक 1000 बार उठाने पर:
W = 1000 × 10 × 9.8 × 0.5
W = 49000 J = 49 kJ
सौर ऊर्जा से विद्युत शक्ति
यदि प्रति वर्ग मीटर प्राप्त सौर ऊर्जा की औसत दर I है और η दक्षता से विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है, तो प्रति वर्ग मीटर उपयोगी विद्युत शक्ति:
P = ηI
यदि आवश्यक विद्युत शक्ति Ptotal है, तो आवश्यक क्षेत्रफल:
A = Ptotal/(ηI)
उदाहरण में सौर ऊर्जा 200 W/m2, दक्षता 20% और आवश्यक शक्ति 8 kW है:
उपयोगी शक्ति प्रति m2 = 200 × 0.20 = 40 W
A = 8000/40 = 200 m2
अतः लगभग 200 m2 सौर पैनल क्षेत्र की आवश्यकता होगी।
आनत तल पर ऊर्जा संरक्षण
यदि घर्षणरहित आनत तल पर दो पत्थरों को समान ऊँचाई से छोड़ा जाता है, तो दोनों नीचे पहुँचते समय समान चाल प्राप्त करेंगे क्योंकि दोनों की प्रारंभिक गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा समान होती है और घर्षण नहीं है।
ऊर्जा संरक्षण से:
mgh = 1/2 mv2
अतः:
v = √(2gh)
ध्यान दें कि नीचे पहुँचने का समय समान होना आवश्यक नहीं है, क्योंकि अलग-अलग ढाल वाले तलों पर त्वरण अलग हो सकता है।
30° और 60° आनत तल का उदाहरण
यदि दोनों पत्थर 10 m ऊँचाई से घर्षणरहित तलों पर नीचे आते हैं, तो दोनों की अंतिम चाल:
v = √(2gh)
v = √(2 × 10 × 10)
v = √200 ≈ 14.14 m/s
दोनों की अंतिम चाल समान होगी, लेकिन 60° वाले तल पर त्वरण:
a2 = g sin60°
और 30° वाले तल पर:
a1 = g sin30°
इसलिए 60° वाले तल पर पत्थर कम समय में नीचे पहुँचेगा।
स्प्रिंग और घर्षण का numerical
यदि कोई ब्लॉक खुरदरे आनत तल पर स्प्रिंग से जुड़ा है, तो ब्लॉक के नीचे खिसकने पर गुरुत्वीय बल का घटक, घर्षण और स्प्रिंग में संचित ऊर्जा को ध्यान में रखना पड़ता है।
यदि ब्लॉक x दूरी नीचे जाता है, तो गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य:
Wg = mg sinθ × x
घर्षण द्वारा किया गया कार्य:
Wf = -μmg cosθ × x
स्प्रिंग में संचित ऊर्जा:
U = 1/2 kx2
यदि अंतिम स्थिति में ब्लॉक क्षणिक रूप से विराम में हो, तो कार्य-ऊर्जा या ऊर्जा संरक्षण की सहायता से μ निकाला जा सकता है।
कार्य और ऊर्जा के महत्वपूर्ण संबंध
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| नियत बल द्वारा कार्य | W = Fs cosθ |
| गतिज ऊर्जा | K = 1/2 mv2 |
| कार्य-ऊर्जा प्रमेय | Wnet = ΔK |
| गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा | U = mgh |
| स्प्रिंग की ऊर्जा | U = 1/2 kx2 |
| यांत्रिक ऊर्जा | E = K + U |
| शक्ति | P = W/t |
| तात्कालिक शक्ति | P = Fv |
| सामान्य शक्ति | P = Fv cosθ |
| संवेग | p = mv |
| प्रत्यास्थ संघट्ट | Ki = Kf |
| पवन ऊर्जा की शक्ति | P = 1/2 ρAv3 |
Important Questions – Chapter 6
प्रश्न 1. कार्य का सूत्र क्या है?
नियत बल F द्वारा s विस्थापन कराने पर:
W = Fs cosθ
प्रश्न 2. कार्य कब शून्य होता है?
जब बल और विस्थापन परस्पर लंबवत हों, तब कार्य शून्य होता है।
प्रश्न 3. कार्य-ऊर्जा प्रमेय लिखिए।
किसी वस्तु पर कुल बल द्वारा किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
Wnet = ΔK
प्रश्न 4. गतिज ऊर्जा का सूत्र लिखिए।
K = 1/2 mv2
प्रश्न 5. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा क्या है?
पृथ्वी की सतह के पास किसी ऊँचाई h पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा U = mgh होती है।
प्रश्न 6. शक्ति क्या है?
कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।
P = W/t
प्रश्न 7. शक्ति का SI मात्रक क्या है?
शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है।
प्रश्न 8. संरक्षी बल क्या है?
जिस बल द्वारा किया गया कार्य केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं, उसे संरक्षी बल कहते हैं।
प्रश्न 9. ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है?
ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न नष्ट किया जा सकता है। यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है।
प्रश्न 10. प्रत्यास्थ संघट्ट क्या है?
जिस संघट्ट में कुल संवेग और कुल गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, उसे प्रत्यास्थ संघट्ट कहते हैं।
प्रश्न 11. अप्रत्यास्थ संघट्ट क्या है?
जिस संघट्ट में कुल संवेग संरक्षित रहता है लेकिन कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती, उसे अप्रत्यास्थ संघट्ट कहते हैं।
Objective Questions – Chapter 6
1. कार्य का SI मात्रक क्या है?
(A) वाट
(B) जूल
(C) न्यूटन
(D) पास्कल
उत्तर: (B) जूल
2. गतिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?
(A) mv
(B) mgh
(C) 1/2 mv2
(D) Fv
उत्तर: (C) 1/2 mv2
3. शक्ति का SI मात्रक है:
(A) जूल
(B) न्यूटन
(C) वाट
(D) कूलॉम
उत्तर: (C) वाट
4. कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार कुल कार्य बराबर है:
(A) संवेग
(B) गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
(C) स्थितिज ऊर्जा
(D) शक्ति
उत्तर: (B) गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
5. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र है:
(A) mv2
(B) mgh
(C) Fv
(D) ma
उत्तर: (B) mgh
6. स्प्रिंग में संचित ऊर्जा है:
(A) kx
(B) 1/2 kx2
(C) k/x
(D) 2kx
उत्तर: (B) 1/2 kx2
7. घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य सामान्यतः होता है:
(A) धनात्मक
(B) ऋणात्मक
(C) अनंत
(D) हमेशा शून्य
उत्तर: (B) ऋणात्मक
8. संरक्षी बल द्वारा बंद पथ में किया गया कुल कार्य होता है:
(A) अधिकतम
(B) न्यूनतम
(C) शून्य
(D) अनंत
उत्तर: (C) शून्य
9. प्रत्यास्थ संघट्ट में संरक्षित रहती है:
(A) केवल गतिज ऊर्जा
(B) केवल संवेग
(C) संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों
(D) केवल स्थितिज ऊर्जा
उत्तर: (C) संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों
10. तात्कालिक शक्ति का सूत्र है:
(A) P = F/v
(B) P = Fv
(C) P = mv
(D) P = ma
उत्तर: (B) P = Fv
अध्याय 6 के महत्वपूर्ण Numerical Topics
| Numerical Topic | मुख्य सूत्र/अवधारणा |
|---|---|
| घर्षण सहित कार्य | W = Fs और Wf = -fs |
| गतिज ऊर्जा में परिवर्तन | Wnet = ΔK |
| स्प्रिंग की ऊर्जा | U = 1/2 kx2 |
| प्रक्षेप्य/लोलक में ऊर्जा | K + U = constant |
| लिफ्ट/पंप की शक्ति | P = mgh/t |
| पवनचक्की | P = 1/2 ρAv3 |
| सौर ऊर्जा | P = ηIA |
| गोली-गुटका संघट्ट | संवेग संरक्षण |
| प्रत्यास्थ संघट्ट | संवेग + गतिज ऊर्जा संरक्षण |
| आनत तल | ऊर्जा संरक्षण और a = g sinθ |
Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति का संक्षिप्त सारांश
कार्य तब किया जाता है जब किसी बल के कारण वस्तु में विस्थापन होता है। कार्य का मान बल, विस्थापन और उनके बीच के कोण पर निर्भर करता है। बल और विस्थापन एक दिशा में होने पर कार्य धनात्मक और विपरीत दिशा में होने पर ऋणात्मक होता है।
गतिज ऊर्जा वस्तु की गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा है, जबकि स्थितिज ऊर्जा वस्तु की स्थिति या विन्यास के कारण संचित ऊर्जा है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार कुल कार्य गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
संरक्षी बलों की स्थिति में गतिज और स्थितिज ऊर्जा के बीच रूपांतरण हो सकता है, लेकिन कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है। घर्षण जैसे असंरक्षी बल यांत्रिक ऊर्जा को अन्य रूपों में बदल सकते हैं।
शक्ति कार्य करने की दर है। संघट्ट के प्रश्नों में संवेग संरक्षण का नियम अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्यास्थ संघट्ट में संवेग के साथ गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, जबकि अप्रत्यास्थ संघट्ट में सामान्यतः गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती।
अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक
Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति की तैयारी करते समय कार्य का चिह्न, कार्य-ऊर्जा प्रमेय, गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, शक्ति तथा संघट्ट से संबंधित सूत्रों पर विशेष ध्यान दें। Numerical हल करते समय पहले दिए गए मानों को SI इकाई में बदलना और उसके बाद उचित सूत्र का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से W = Fs cosθ, K = 1/2 mv2, U = mgh, U = 1/2 kx2, P = W/t और P = Fv जैसे सूत्रों का अभ्यास अवश्य करें।