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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति में एक से अधिक कणों वाले निकाय की गति तथा किसी वस्तु की घूर्णन गति का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में द्रव्यमान केंद्र, रैखिक संवेग, कोणीय संवेग, बलाघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण, कोणीय वेग, घूर्णी गतिज ऊर्जा और लोटनिक गति जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ शामिल हैं।

यह अध्याय Bihar Board Class 11 Physics की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसमें कई ऐसे numerical questions हैं जिनमें द्रव्यमान केंद्र की स्थिति, संतुलन, बलाघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण, कोणीय संवेग संरक्षण और rolling motion का प्रयोग किया जाता है। इसलिए केवल सूत्र याद करना पर्याप्त नहीं है; यह समझना भी जरूरी है कि किस परिस्थिति में कौन-सा सूत्र लागू होगा।

इस पोस्ट में Chapter 7 के महत्वपूर्ण concepts, formulas, numerical examples, प्रश्न-उत्तर और objective questions को आसान भाषा में व्यवस्थित किया गया है।

Table of Contents

Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति के मुख्य विषय

  • कणों का निकाय
  • द्रव्यमान केंद्र
  • द्रव्यमान केंद्र की स्थिति
  • द्रव्यमान केंद्र की गति
  • रैखिक संवेग और द्रव्यमान केंद्र
  • बलाघूर्ण
  • कोणीय संवेग
  • कोणीय संवेग का संरक्षण
  • जड़त्व आघूर्ण
  • समांतर अक्ष प्रमेय
  • लंबवत अक्ष प्रमेय
  • घूर्णी गति
  • घूर्णी गतिज ऊर्जा
  • लोटनिक गति
  • लोटनिक गति में ऊर्जा
  • आनत तल पर लुढ़कता पिंड

पिछले और अगले अध्याय से जुड़ें

पिछला अध्याय पढ़ने के लिए
Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति
देखें।

इस अध्याय के बाद
Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण
पढ़ सकते हैं।

कणों का निकाय क्या है?

जब दो या दो से अधिक कणों को एक साथ लेकर उनके सामूहिक व्यवहार का अध्ययन किया जाता है, तो उसे कणों का निकाय कहा जाता है।

किसी निकाय में प्रत्येक कण की गति अलग हो सकती है, लेकिन पूरे निकाय की गति को समझने के लिए द्रव्यमान केंद्र की अवधारणा बहुत उपयोगी होती है।

द्रव्यमान केंद्र

किसी कण-निकाय का वह काल्पनिक बिंदु जहाँ पूरे निकाय का द्रव्यमान केंद्रित मानकर उसके स्थानांतरीय गति का अध्ययन किया जा सकता है, उसे द्रव्यमान केंद्र (Centre of Mass) कहते हैं।

दो कणों के लिए द्रव्यमान केंद्र की स्थिति:

rcm = (m1r1 + m2r2)/(m1 + m2)

अनेक कणों के लिए:

rcm = Σmiri / Σmi

क्या द्रव्यमान केंद्र हमेशा वस्तु के अंदर होता है?

नहीं। सममित ठोस पिंडों में द्रव्यमान केंद्र अक्सर ज्यामितीय केंद्र पर होता है, लेकिन खोखले या वलयाकार पिंडों में द्रव्यमान केंद्र ऐसे स्थान पर भी हो सकता है जहाँ स्वयं कोई पदार्थ मौजूद न हो।

उदाहरण के लिए समान द्रव्यमान घनत्व वाले गोले, बेलन, छल्ले और घन के लिए द्रव्यमान केंद्र उनके ज्यामितीय केंद्र से संबंधित होता है।

HCl अणु का द्रव्यमान केंद्र

HCl अणु में H और Cl नाभिकों के बीच दूरी लगभग 1.27 Å है। यदि Cl का द्रव्यमान H के द्रव्यमान का लगभग 35.5 गुना माना जाए, तो द्रव्यमान केंद्र भारी Cl परमाणु की ओर स्थित होगा।

यदि H से द्रव्यमान केंद्र की दूरी x है, तो द्रव्यमान केंद्र की शर्त:

mHx = mCl(1.27 – x)

जहाँ:

mCl = 35.5mH

इससे:

x = (35.5 × 1.27)/36.5

अर्थात् द्रव्यमान केंद्र H परमाणु से लगभग 1.24 Å की दूरी पर Cl की ओर होगा।

द्रव्यमान केंद्र की गति

किसी निकाय के द्रव्यमान केंद्र की गति पूरे निकाय पर लगने वाले बाहरी बल पर निर्भर करती है।

यदि निकाय का कुल द्रव्यमान M है, तो:

M acm = Fext

इससे स्पष्ट है कि आंतरिक बल द्रव्यमान केंद्र की गति को अकेले नहीं बदल सकते।

ट्रॉली और बच्चे का उदाहरण

यदि बच्चा चिकने क्षैतिज फर्श पर चल रही ट्रॉली के ऊपर दौड़ता है और फर्श से निकाय पर कोई क्षैतिज बाहरी बल नहीं लगता, तो ट्रॉली + बच्चा निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहेगा।

अतः द्रव्यमान केंद्र की चाल नियत रहेगी।

द्रव्यमान केंद्र और रैखिक संवेग

किसी निकाय का कुल रैखिक संवेग:

P = Mvcm

जहाँ M पूरे निकाय का कुल द्रव्यमान और vcm द्रव्यमान केंद्र का वेग है।

यदि बाहरी परिणामी बल शून्य है:

Fext = 0

तो:

P = constant

अर्थात् द्रव्यमान केंद्र का वेग नियत रहता है।

बलाघूर्ण क्या है?

किसी बल द्वारा किसी निश्चित बिंदु या अक्ष के सापेक्ष घूर्णन प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता को बलाघूर्ण (Torque) कहते हैं।

बलाघूर्ण का सदिश रूप:

τ = r × F

बलाघूर्ण का परिमाण:

τ = rF sinθ

जहाँ r बल के अनुप्रयोग बिंदु की स्थिति सदिश और θ, r तथा F के बीच का कोण है।

बलाघूर्ण कब अधिकतम होता है?

जब:

θ = 90°

तब:

τmax = rF

बलाघूर्ण कब शून्य होता है?

जब बल की क्रिया रेखा घूर्णन अक्ष से होकर गुजरती है, तब लंबवत दूरी शून्य हो जाती है और बलाघूर्ण भी शून्य होता है।

संतुलन की अवस्था

किसी कठोर पिंड के स्थैतिक संतुलन के लिए दो प्रमुख शर्तें पूरी होनी चाहिए:

ΣF = 0

और

Στ = 0

पहली शर्त सुनिश्चित करती है कि पिंड का स्थानांतरीय त्वरण शून्य हो और दूसरी शर्त घूर्णी त्वरण को शून्य रखने से संबंधित है।

असमांग छड़ के द्रव्यमान केंद्र का उदाहरण

एक 2 m लंबी असमांग छड़ को दो हल्की डोरियों से संतुलित किया गया है। डोरियाँ ऊर्ध्वाधर से अलग-अलग कोण बनाती हैं। ऐसी स्थिति में छड़ के संतुलन के लिए केवल ऊर्ध्वाधर बलों का संतुलन पर्याप्त नहीं है; किसी एक बिंदु के सापेक्ष कुल बलाघूर्ण भी शून्य होना चाहिए।

इस प्रकार के प्रश्न में सामान्य विधि:

  1. दोनों डोरियों के तनाव T1 और T2 मानें।
  2. बलों को क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों में विभाजित करें।
  3. ΣFx = 0 और ΣFy = 0 लिखें।
  4. किसी एक सिरे के सापेक्ष Στ = 0 लगाएँ।
  5. अंत में द्रव्यमान केंद्र की दूरी प्राप्त करें।

दिए गए प्रश्न के अनुसार द्रव्यमान केंद्र बाएँ सिरे से लगभग 72.1 cm पर प्राप्त होता है।

वाहन के पहियों पर अभिलंब बल

यदि किसी कार का कुल द्रव्यमान और उसके गुरुत्व केंद्र की स्थिति ज्ञात हो, तो आगे और पीछे के पहियों पर पृथ्वी द्वारा लगाए गए अभिलंब बल निकाले जा सकते हैं।

इसके लिए:

Nfront + Nrear = Mg

और किसी सुविधाजनक बिंदु के सापेक्ष बलाघूर्ण का संतुलन लगाया जाता है।

उदाहरण में 1800 kg द्रव्यमान की कार के लिए आगे के प्रत्येक पहिए पर लगभग 3675 N और पीछे के प्रत्येक पहिए पर लगभग 5145 N अभिलंब बल प्राप्त होता है।

कोणीय संवेग

किसी कण का किसी बिंदु के सापेक्ष कोणीय संवेग:

L = r × p

जहाँ:

  • r = स्थिति सदिश
  • p = रैखिक संवेग

परिमाण:

L = rp sinθ

चूँकि p = mv, इसलिए:

L = mvr sinθ

कार्तीय निर्देशांक में कोणीय संवेग

यदि:

r = xî + yĵ + zk̂

और:

p = pxî + pyĵ + pzk̂

तो कोणीय संवेग के घटक:

Lx = ypz – zpy

Ly = zpx – xpz

Lz = xpy – ypx

यदि कण केवल xy-तल में गति करता है, तो कोणीय संवेग का मुख्य घटक z-अक्ष के अनुदिश होता है।

बलाघूर्ण और कोणीय संवेग का संबंध

किसी कण पर बाहरी बलाघूर्ण और उसके कोणीय संवेग में संबंध:

τ = dL/dt

अर्थात् बलाघूर्ण कोणीय संवेग के परिवर्तन की दर के बराबर होता है।

यदि बाहरी बलाघूर्ण शून्य है:

τext = 0

तो:

dL/dt = 0

अतः:

L = constant

इसे कोणीय संवेग संरक्षण का नियम कहते हैं।

दो समानांतर दिशाओं में विपरीत गति करते कण

यदि समान द्रव्यमान m के दो कण समान चाल v से समानांतर रेखाओं पर विपरीत दिशाओं में चलते हैं और उनके बीच लंबवत दूरी d है, तो किसी उपयुक्त बिंदु के सापेक्ष संयुक्त कोणीय संवेग का परिमाण:

L = mvd

यह परिणाम बताता है कि ऐसे द्विकण निकाय का कोणीय संवेग परिमाण और दिशा में स्थिर रह सकता है।

जड़त्व आघूर्ण

किसी घूर्णन अक्ष के सापेक्ष वस्तु के द्रव्यमान के वितरण को मापने वाली राशि को जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) कहते हैं।

कण के लिए:

I = mr2

अनेक कणों के लिए:

I = Σmiri2

जड़त्व आघूर्ण का SI मात्रक:

kg m2

घूर्णी त्रिज्या

यदि किसी पिंड का जड़त्व आघूर्ण:

I = MK2

तो K को उस अक्ष के सापेक्ष घूर्णन त्रिज्या (Radius of Gyration) कहते हैं।

अतः:

K = √(I/M)

कुछ महत्वपूर्ण पिंडों के जड़त्व आघूर्ण

पिंडअक्षजड़त्व आघूर्ण
पतला वलयकेंद्र से लंबवत अक्षI = MR2
ठोस डिस्ककेंद्र से लंबवत अक्षI = 1/2 MR2
ठोस गोलाव्यास के सापेक्षI = 2/5 MR2
खोखला पतला बेलन/वलयसममित अक्षI = MR2

समांतर अक्ष प्रमेय

समांतर अक्ष प्रमेय के अनुसार किसी पिंड का किसी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण:

I = Icm + Md2

जहाँ Icm द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली समानांतर अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण है और d दोनों अक्षों के बीच की दूरी है।

ठोस गोले के स्पर्शी अक्ष का जड़त्व आघूर्ण

गोले का व्यास से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष:

Icm = 2/5 MR2

स्पर्शी अक्ष की दूरी R है। अतः:

I = 2/5 MR2 + MR2

I = 7/5 MR2

लंबवत अक्ष प्रमेय

समतलीय पिंड के लिए लंबवत अक्ष प्रमेय के अनुसार:

Iz = Ix + Iy

इसका प्रयोग मुख्य रूप से समतलीय पिंडों के जड़त्व आघूर्ण को निर्धारित करने में किया जाता है।

घूर्णी गति

जब कोई पिंड किसी निश्चित अक्ष के चारों ओर घूमता है, तो उसकी गति को घूर्णी गति कहते हैं।

घूर्णी गति में मुख्य राशियाँ हैं:

  • कोणीय विस्थापन – θ
  • कोणीय वेग – ω
  • कोणीय त्वरण – α
  • बलाघूर्ण – τ
  • जड़त्व आघूर्ण – I

कोणीय वेग

कोणीय विस्थापन के समय के सापेक्ष परिवर्तन की दर को कोणीय वेग कहते हैं।

ω = dθ/dt

कोणीय त्वरण:

α = dω/dt

रैखिक और कोणीय वेग का संबंध:

v = rω

घूर्णी गति का न्यूटन नियम

घूर्णी गति में बलाघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण और कोणीय त्वरण के बीच संबंध:

τ = Iα

यह रैखिक गति के समीकरण F = ma के समान है।

घूर्णी गतिज ऊर्जा

घूर्णन करते हुए पिंड की गतिज ऊर्जा:

Krot = 1/2 Iω2

यदि पिंड लोटनिक गति कर रहा है, तो उसकी कुल गतिज ऊर्जा में रैखिक तथा घूर्णी दोनों भाग होते हैं:

K = 1/2 Mv2 + 1/2 Iω2

लोटनिक गति क्या है?

जब कोई पिंड किसी सतह पर इस प्रकार घूमते हुए आगे बढ़ता है कि संपर्क बिंदु पर फिसलन नहीं होती, तो इसे परिशुद्ध लोटनिक गति (Pure Rolling) कहते हैं।

इस स्थिति में:

v = Rω

जहाँ v द्रव्यमान केंद्र का रैखिक वेग और R पिंड की त्रिज्या है।

लोटनिक गति में ऊर्जा

यदि कोई पिंड बिना फिसले लुढ़क रहा है, तो उसकी कुल गतिज ऊर्जा:

K = 1/2 Mv2 + 1/2 Iω2

और क्योंकि:

ω = v/R

इसलिए:

K = 1/2 Mv2 + 1/2 I(v2/R2)

आनत तल पर लुढ़कता पिंड

जब कोई पिंड ऊँचाई h से बिना फिसले किसी आनत तल पर लुढ़कता है, तो गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा रैखिक तथा घूर्णी गतिज ऊर्जा में बदलती है।

ऊर्जा संरक्षण से:

Mgh = 1/2 Mv2 + 1/2 Iω2

और:

v = Rω

यदि:

I = Mk2

तो:

Mgh = 1/2 Mv2(1 + k2/R2)

अतः:

v2 = 2gh / (1 + k2/R2)

समान ऊँचाई से अलग-अलग आनत तलों पर गोला

यदि एक ही ठोस गोले को अलग-अलग झुकाव वाले दो आनत तलों पर समान ऊँचाई से बिना फिसले लुढ़काया जाए, तो नीचे पहुँचने पर उसकी चाल समान होगी क्योंकि अंतिम चाल मुख्यतः ऊँचाई में कमी पर निर्भर करती है।

लेकिन दोनों तलों पर नीचे पहुँचने में लगा समय समान नहीं होगा। कम झुकाव वाले तल पर त्वरण कम होने के कारण गोला अधिक समय लेगा।

अर्थात्:

  • नीचे पहुँचने की अंतिम चाल – समान
  • नीचे पहुँचने का समय – अलग
  • कम ढाल – अधिक समय

लोटनिक गति में घर्षण

परिशुद्ध लोटनिक गति में संपर्क बिंदु पर सतह के सापेक्ष फिसलन नहीं होती। इसलिए स्थैतिक घर्षण की भूमिका गतिशील संतुलन और rolling condition स्थापित करने में हो सकती है, लेकिन आदर्श pure rolling में स्थैतिक घर्षण द्वारा किया गया कार्य शून्य माना जाता है।

यदि किसी चक्रिका को पूरी तरह घर्षणरहित मेज पर रखा जाए, तो वह आवश्यक घर्षणी बलाघूर्ण प्राप्त नहीं कर पाएगी और स्वतः pure rolling में नहीं जाएगी।

घूमती चक्रिका का उदाहरण

यदि किसी चक्रिका को कोणीय वेग ω0 के साथ घर्षणरहित मेज पर रखा जाता है, तो उसके अलग-अलग बिंदुओं के रैखिक वेग उनकी अक्ष से दूरी के अनुसार अलग होंगे:

v = rω0

लेकिन मेज और चक्रिका के बीच घर्षण न होने के कारण चक्रिका का संपर्क बिंदु स्वतः विराम में लाकर pure rolling स्थापित नहीं कर सकता।

घूर्णन करती चक्रिका को pure rolling कराने के लिए घर्षण क्यों आवश्यक है?

जब चक्रिका किसी सतह के संपर्क में आती है, तो संपर्क बिंदु पर सापेक्ष गति को कम करने के लिए घर्षण बल आवश्यक हो सकता है। यह घर्षण बल चक्रिका पर बलाघूर्ण उत्पन्न करता है और धीरे-धीरे ऐसी स्थिति स्थापित कर सकता है जहाँ:

v = Rω

अर्थात् pure rolling condition प्राप्त हो जाती है।

एक बार ideal pure rolling स्थापित हो जाने पर संपर्क बिंदु पर फिसलन नहीं होती और आदर्श स्थिति में घर्षण द्वारा कार्य शून्य माना जाता है।

छल्ले और ठोस चक्रिका का जड़त्व आघूर्ण

समान द्रव्यमान और त्रिज्या के लिए:

छल्ले का जड़त्व आघूर्ण:

Iring = MR2

ठोस चक्रिका का जड़त्व आघूर्ण:

Idisc = 1/2 MR2

इसी कारण दोनों के rolling dynamics में अंतर आता है। समान प्रारंभिक कोणीय वेग और समान घर्षण परिस्थितियों में कौन पहले pure rolling तक पहुँचेगा, यह प्रश्न उनके जड़त्व आघूर्ण और घर्षण बलाघूर्ण के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

वलय को रोकने में किया गया कार्य

यदि कोई वलय लोटनिक गति कर रहा है और उसे रोकना है, तो उसके पूरे kinetic energy को हटाना होगा।

कुल गतिज ऊर्जा:

K = 1/2 Mv2 + 1/2 Iω2

वलय के लिए:

I = MR2

और:

ω = v/R

इससे:

K = Mv2

अतः पिंड को रोकने के लिए आवश्यक बाहरी कार्य का परिमाण उसकी प्रारंभिक कुल गतिज ऊर्जा के बराबर होगा।

बेलन का कोणीय त्वरण

यदि किसी खोखले बेलन पर त्रिज्या R पर स्पर्शरेखीय बल F लगाया जाए, तो बलाघूर्ण:

τ = FR

खोखले बेलन के लिए:

I = MR2

अतः कोणीय त्वरण:

α = τ/I

या:

α = F/(MR)

और यदि रस्सी बिना फिसले लिपटी हो, तो रस्सी का रैखिक त्वरण:

a = Rα

बेलन का Numerical

3 kg द्रव्यमान और 0.4 m त्रिज्या वाले खोखले बेलन पर 30 N का स्पर्शरेखीय बल लगाया जाता है।

I = MR2

I = 3 × (0.4)2 = 0.48 kg m2

बलाघूर्ण:

τ = FR = 30 × 0.4 = 12 N m

अतः:

α = τ/I = 12/0.48 = 25 rad/s2

रैखिक त्वरण:

a = Rα = 0.4 × 25 = 10 m/s2

घूर्णी शक्ति

घूर्णन गति में शक्ति का संबंध बलाघूर्ण और कोणीय वेग से:

P = τω

यदि किसी rotor को 200 rad/s की कोणीय चाल पर बनाए रखने के लिए 180 N m का बलाघूर्ण आवश्यक हो, तो:

P = 180 × 200

P = 36000 W

अर्थात्:

P = 36 kW

बच्चे द्वारा हाथ सिकोड़ने का उदाहरण

जब कोई बच्चा घूमते प्लेटफॉर्म पर अपनी बाहें शरीर से दूर रखता है, तो उसका जड़त्व आघूर्ण अधिक होता है। बाहें शरीर के पास लाने पर जड़त्व आघूर्ण कम हो जाता है।

यदि बाहरी बलाघूर्ण नगण्य हो, तो कोणीय संवेग संरक्षित रहता है:

I1ω1 = I2ω2

अतः:

ω2 = I1ω1/I2

इसलिए I कम होने पर कोणीय वेग बढ़ जाता है।

क्या इस प्रक्रिया में गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है?

नहीं, कोणीय संवेग का संरक्षण अपने-आप घूर्णी गतिज ऊर्जा के संरक्षण की गारंटी नहीं देता।

घूर्णी गतिज ऊर्जा:

K = 1/2 Iω2

यदि व्यक्ति अपनी बाहों को स्वयं अंदर खींचता है, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा द्वारा किया गया कार्य घूर्णी गतिज ऊर्जा में वृद्धि कर सकता है।

दो घूमती चक्रिकाओं को मिलाने पर

यदि दो चक्रिकाओं के जड़त्व आघूर्ण I1 और I2 तथा कोणीय वेग ω1 और ω2 हैं और उन्हें एक ही अक्ष पर संपर्क में लाया जाता है, तो बाहरी बलाघूर्ण नगण्य होने पर कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहेगा।

अतः:

(I1 + I2)ω = I1ω1 + I2ω2

इससे संयुक्त निकाय का अंतिम कोणीय वेग:

ω = (I1ω1 + I2ω2)/(I1 + I2)

यदि दोनों चक्रिकाओं की प्रारंभिक कोणीय चाल अलग थी और संपर्क के बाद वे एक साथ घूमने लगीं, तो सामान्यतः कुछ घूर्णी गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि और अन्य आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तित हो सकती है।

मीटर छड़ का द्रव्यमान ज्ञात करने का तरीका

संतुलन से जुड़े प्रश्नों में किसी सुविधाजनक आधार बिंदु के सापेक्ष बलाघूर्ण का उपयोग किया जाता है।

संतुलन की स्थिति में:

घड़ी की दिशा के कुल आघूर्ण = घड़ी की विपरीत दिशा के कुल आघूर्ण

उदाहरण में 12 cm के निशान पर रखे दो 5 g के सिक्कों के कारण संतुलन बिंदु 45 cm पर आ जाता है। बलाघूर्ण संतुलन लगाने पर मीटर छड़ का द्रव्यमान लगभग 66 g प्राप्त होता है।

डिस्क से वृत्ताकार भाग काटने पर द्रव्यमान केंद्र

यदि समान द्रव्यमान घनत्व वाली डिस्क से कोई छोटा वृत्ताकार भाग काटकर निकाल दिया जाए, तो शेष भाग का द्रव्यमान केंद्र मूल केंद्र से हट जाएगा।

ऐसे प्रश्नों में कटे हुए भाग को ऋणात्मक द्रव्यमान मानकर द्रव्यमान केंद्र की विधि लागू करना आसान होता है।

सामान्य संबंध:

xcm = Σmixi/Σmi

कटे हुए भाग का द्रव्यमान ऋणात्मक लेने पर शेष डिस्क के द्रव्यमान केंद्र की दिशा कटे हुए भाग के विपरीत होगी।

संयुक्त निकाय का कोणीय संवेग

कई कणों वाले निकाय का कुल कोणीय संवेग सभी कणों के कोणीय संवेगों का सदिश योग होता है:

L = L1 + L2 + … + Ln

यदि निकाय पर कोई बाहरी बलाघूर्ण नहीं लगता, तो:

L = constant

यह सिद्धांत घूमते हुए व्यक्ति, rotating platform, चक्रिकाओं और अन्य rotational motion numericals में बहुत उपयोगी है।

गति और घूर्णी गति में तुलना

रैखिक गतिघूर्णी गति
विस्थापन – xकोणीय विस्थापन – θ
वेग – vकोणीय वेग – ω
त्वरण – aकोणीय त्वरण – α
द्रव्यमान – mजड़त्व आघूर्ण – I
बल – Fबलाघूर्ण – τ
संवेग – pकोणीय संवेग – L
F = maτ = Iα
K = 1/2 mv2K = 1/2 Iω2

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सूत्र

अवधारणामहत्वपूर्ण सूत्र
द्रव्यमान केंद्रrcm = Σmiri/Σmi
द्रव्यमान केंद्र का बल समीकरणFext = Macm
कुल संवेगP = Mvcm
बलाघूर्णτ = r × F
बलाघूर्ण का परिमाणτ = rF sinθ
कोणीय संवेगL = r × p
कण का कोणीय संवेगL = mvr sinθ
बलाघूर्ण और कोणीय संवेगτ = dL/dt
कण का जड़त्व आघूर्णI = mr2
घूर्णी गति का नियमτ = Iα
कोणीय वेगω = dθ/dt
कोणीय त्वरणα = dω/dt
रेखीय एवं कोणीय वेगv = rω
घूर्णी गतिज ऊर्जाK = 1/2 Iω2
लोटनिक गति की कुल ऊर्जाK = 1/2 Mv2 + 1/2 Iω2
घूर्णन त्रिज्याI = MK2
समांतर अक्ष प्रमेयI = Icm + Md2
लंबवत अक्ष प्रमेयIz = Ix + Iy
घूर्णी शक्तिP = τω

Important Questions – Chapter 7

प्रश्न 1. द्रव्यमान केंद्र क्या है?

किसी कण-निकाय का वह बिंदु जिसके माध्यम से निकाय की स्थानांतरीय गति का अध्ययन किया जा सकता है, द्रव्यमान केंद्र कहलाता है।

प्रश्न 2. क्या द्रव्यमान केंद्र हमेशा पिंड के अंदर होता है?

नहीं। खोखले पिंड या वलय जैसे पिंडों में द्रव्यमान केंद्र ऐसे स्थान पर हो सकता है जहाँ पदार्थ मौजूद न हो।

प्रश्न 3. द्रव्यमान केंद्र का मूल सूत्र क्या है?

rcm = Σmiri/Σmi

प्रश्न 4. बलाघूर्ण क्या है?

किसी बल का किसी अक्ष या बिंदु के सापेक्ष घूर्णन प्रभाव बलाघूर्ण कहलाता है।

τ = r × F

प्रश्न 5. कोणीय संवेग का सूत्र लिखिए।

L = r × p

प्रश्न 6. कोणीय संवेग कब संरक्षित रहता है?

जब निकाय पर बाहरी परिणामी बलाघूर्ण शून्य हो, तब उसका कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।

प्रश्न 7. जड़त्व आघूर्ण क्या है?

किसी अक्ष के सापेक्ष पिंड के द्रव्यमान के वितरण को व्यक्त करने वाली राशि जड़त्व आघूर्ण कहलाती है।

प्रश्न 8. जड़त्व आघूर्ण का सूत्र क्या है?

कण के लिए:

I = mr2

प्रश्न 9. समांतर अक्ष प्रमेय लिखिए।

I = Icm + Md2

प्रश्न 10. घूर्णी गतिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?

K = 1/2 Iω2

प्रश्न 11. pure rolling की condition क्या है?

v = Rω

प्रश्न 12. लोटनिक गति में कुल गतिज ऊर्जा क्या होगी?

K = 1/2 Mv2 + 1/2 Iω2

प्रश्न 13. घूर्णी शक्ति का सूत्र क्या है?

P = τω

Objective Questions – Chapter 7

1. द्रव्यमान केंद्र की स्थिति किस पर निर्भर करती है?

(A) केवल आयतन पर
(B) केवल वेग पर
(C) द्रव्यमान के वितरण पर
(D) केवल समय पर

उत्तर: (C) द्रव्यमान के वितरण पर

2. बलाघूर्ण का सूत्र है:

(A) τ = F/r
(B) τ = r × F
(C) τ = m/a
(D) τ = mv

उत्तर: (B) τ = r × F

3. कोणीय संवेग का सूत्र है:

(A) L = r × p
(B) L = ma
(C) L = F/t
(D) L = mv2

उत्तर: (A) L = r × p

4. जड़त्व आघूर्ण का SI मात्रक है:

(A) kg m
(B) kg m2
(C) N m
(D) kg/s

उत्तर: (B) kg m2

5. घूर्णी गति का समीकरण है:

(A) F = ma
(B) P = mv
(C) τ = Iα
(D) W = Fs

उत्तर: (C) τ = Iα

6. घूर्णी गतिज ऊर्जा का सूत्र है:

(A) 1/2 mv2
(B) mgh
(C) 1/2 Iω2
(D) Fv

उत्तर: (C) 1/2 Iω2

7. pure rolling के लिए सही संबंध है:

(A) v = ω/R
(B) v = Rω
(C) v = R/ω
(D) v = R + ω

उत्तर: (B) v = Rω

8. समांतर अक्ष प्रमेय है:

(A) I = Md2
(B) I = Icm + Md2
(C) I = Icm – Md2
(D) I = MR

उत्तर: (B)

9. घूर्णी शक्ति का सूत्र है:

(A) P = Fv
(B) P = τω
(C) P = ma
(D) P = mgh

उत्तर: (B) P = τω

10. बाहरी बलाघूर्ण शून्य होने पर क्या संरक्षित रहता है?

(A) केवल वेग
(B) केवल ऊर्जा
(C) कोणीय संवेग
(D) केवल त्वरण

उत्तर: (C) कोणीय संवेग

Chapter 7 के महत्वपूर्ण Numerical Topics

Numerical Topicमुख्य अवधारणा
HCl का द्रव्यमान केंद्रCentre of Mass
ट्रॉली और बच्चे की गतिद्रव्यमान केंद्र एवं संवेग संरक्षण
असमांग छड़ का संतुलनबलों और बलाघूर्ण का संतुलन
कार के पहियों पर बलद्रव्यमान केंद्र और torque
गोले का स्पर्शी अक्षसमांतर अक्ष प्रमेय
घूमते दो कणकोणीय संवेग
खोखले बेलन का कोणीय त्वरणτ = Iα
घूर्णी इंजन की शक्तिP = τω
डिस्क से भाग काटनाद्रव्यमान केंद्र
लुढ़कता ठोस गोलाऊर्जा संरक्षण
घूमते बच्चे की कोणीय चालकोणीय संवेग संरक्षण
दो चक्रिकाओं का संयुक्त घूर्णनAngular Momentum Conservation
लोटनिक गतिv = Rω

Chapter 7 – परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें

  • द्रव्यमान केंद्र का सूत्र अच्छी तरह याद रखें।
  • संतुलन के प्रश्नों में ΣF = 0 और Στ = 0 दोनों पर ध्यान दें।
  • बलाघूर्ण का सदिश सूत्र τ = r × F याद रखें।
  • कोणीय संवेग L = r × p और τ = dL/dt बहुत महत्वपूर्ण हैं।
  • बाहरी बलाघूर्ण शून्य होने पर कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।
  • जड़त्व आघूर्ण में द्रव्यमान की अक्ष से दूरी का वर्ग महत्वपूर्ण होता है।
  • समांतर अक्ष प्रमेय और लंबवत अक्ष प्रमेय से जुड़े numericals का अभ्यास करें।
  • घूर्णी गति में τ = Iα का प्रयोग करें।
  • Rolling motion में v = Rω का ध्यान रखें।
  • Rolling body की कुल kinetic energy में translational और rotational दोनों भाग शामिल होते हैं।

Chapter 7 का संक्षिप्त सारांश

कणों के निकाय तथा घूर्णी गति अध्याय में पहले अनेक कणों वाले निकाय के द्रव्यमान केंद्र और उसकी गति का अध्ययन किया जाता है। बाहरी बल शून्य होने पर द्रव्यमान केंद्र की गति और कुल रैखिक संवेग संरक्षण की अवधारणा महत्वपूर्ण है।

घूर्णी गति के लिए बलाघूर्ण, कोणीय संवेग और जड़त्व आघूर्ण प्रमुख राशियाँ हैं। बलाघूर्ण कोणीय संवेग की परिवर्तन दर से संबंधित है और बाहरी बलाघूर्ण शून्य होने पर कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।

किसी पिंड के घूर्णन में उसका जड़त्व आघूर्ण यह बताता है कि द्रव्यमान घूर्णन अक्ष से किस प्रकार वितरित है। समांतर अक्ष प्रमेय और लंबवत अक्ष प्रमेय इसके महत्वपूर्ण परिणाम हैं।

लोटनिक गति में पिंड के पास रैखिक तथा घूर्णी दोनों प्रकार की गतिज ऊर्जा होती है। pure rolling की स्थिति में v = Rω संबंध लागू होता है। आनत तल पर rolling body के प्रश्न ऊर्जा संरक्षण तथा जड़त्व आघूर्ण की सहायता से हल किए जाते हैं।

अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक

Chapter 1 – भौतिक जगत

Chapter 2 – मात्रक एवं मापन

Chapter 3 – सरल रेखा में गति

Chapter 4 – समतल में गति

Chapter 5 – गति के नियम

Chapter 6 – कार्य, ऊर्जा और शक्ति

Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Physics Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति को अच्छी तरह तैयार करने के लिए द्रव्यमान केंद्र, बलाघूर्ण, कोणीय संवेग, जड़त्व आघूर्ण और लोटनिक गति की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। Numerical questions में सबसे पहले यह पहचानें कि प्रश्न द्रव्यमान केंद्र, संतुलन, torque, angular momentum या rolling motion में से किस concept पर आधारित है।

परीक्षा की तैयारी के दौरान τ = r × F, L = r × p, τ = Iα, I = mr2, K = 1/2 Iω2, v = Rω और P = τω जैसे सूत्रों का नियमित अभ्यास करें।

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