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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण में गुरुत्वाकर्षण बल, गुरुत्वीय त्वरण, गुरुत्वीय विभव, गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा, पलायन चाल, उपग्रह की गति तथा केप्लर के नियम जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय Class 11 Physics के महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है और इससे बोर्ड परीक्षा में वैचारिक प्रश्नों के साथ-साथ numerical questions भी पूछे जाते हैं।

इस पेज पर Bihar Board Class 11 Physics Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर, आवश्यक सूत्र, numerical problems के step-by-step solutions, objective questions और chapter summary को आसान भाषा में दिया गया है।

पिछले अध्याय से पढ़ें:
Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Table of Contents

अध्याय 8 – गुरुत्वाकर्षण का परिचय

ब्रह्मांड में प्रत्येक द्रव्यमान वाली वस्तु दूसरी द्रव्यमान वाली वस्तु को आकर्षित करती है। इस आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है। पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करने वाला बल भी गुरुत्वाकर्षण बल का ही उदाहरण है।

गुरुत्वाकर्षण का नियम ग्रहों की गति, उपग्रहों की कक्षा, पृथ्वी पर वस्तुओं के भार, समुद्र में ज्वार-भाटा तथा पलायन चाल जैसी अनेक घटनाओं को समझने में सहायता करता है।

न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम

न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार ब्रह्मांड में दो पिंडों के बीच आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके केन्द्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

यदि दो पिंडों के द्रव्यमान m1 और m2 तथा उनके बीच की दूरी r हो, तो

F = Gm1m2 / r2

जहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।

G = 6.67 × 10−11 N m2 kg−2

गुरुत्वाकर्षण बल की मुख्य विशेषताएँ

  • यह हमेशा आकर्षण बल होता है।
  • यह दो द्रव्यमान वाले पिंडों के बीच कार्य करता है।
  • बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  • दोनों पिंडों पर बल का परिमाण समान होता है।
  • बल की दिशा दोनों पिंडों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है।

गुरुत्वीय त्वरण

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इसे g से प्रदर्शित किया जाता है। पृथ्वी की सतह के पास इसका औसत मान लगभग 9.8 m/s2 माना जाता है।

पृथ्वी का द्रव्यमान M और त्रिज्या R हो तो पृथ्वी की सतह पर

g = GM / R2

इससे स्पष्ट है कि किसी वस्तु का गुरुत्वीय त्वरण उसके अपने द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।

ऊँचाई के साथ g में परिवर्तन

यदि पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर कोई वस्तु रखी जाए, तो पृथ्वी के केन्द्र से उसकी दूरी R + h होगी। अतः

gh = GM / (R + h)2

क्योंकि g = GM/R2, इसलिए

gh = g [R/(R+h)]2

अतः ऊँचाई बढ़ने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान घटता है।

गहराई के साथ g में परिवर्तन

यदि पृथ्वी को समान घनत्व वाला गोला माना जाए और सतह से d गहराई पर वस्तु रखी जाए, तो

gd = g(1 − d/R)

अतः पृथ्वी के केन्द्र की ओर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण घटता जाता है। पृथ्वी के केन्द्र पर d = R होने पर आदर्श स्थिति में g = 0 हो जाता है।

गुरुत्वीय विभव

किसी बिंदु पर गुरुत्वीय विभव उस कार्य के बराबर होता है जो एकांक द्रव्यमान को अनन्त से उस बिंदु तक लाने में गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किया जाता है। अनन्त पर विभव को शून्य माना जाता है।

द्रव्यमान M से r दूरी पर गुरुत्वीय विभव:

V = −GM/r

गुरुत्वीय विभव एक अदिश राशि है। इसका SI मात्रक J/kg है।

गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा

यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m हो और वह पृथ्वी के केन्द्र से r दूरी पर हो, तो उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा

U = −GMm/r

अनन्त दूरी पर स्थितिज ऊर्जा को शून्य लेने पर पृथ्वी के पास स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक होती है।

पृथ्वी की सतह के पास स्थितिज ऊर्जा

पृथ्वी की सतह के पास यदि ऊँचाई h पृथ्वी की त्रिज्या की तुलना में बहुत छोटी हो, तो स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन के लिए सामान्यतः

ΔU = mgh

का प्रयोग किया जाता है। लेकिन बड़ी ऊँचाई पर पृथ्वी के केन्द्र से दूरी में परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए

U = −GMm/r

का प्रयोग करना अधिक उपयुक्त होता है।

केप्लर के ग्रहों की गति के नियम

केप्लर का प्रथम नियम

प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमता है तथा सूर्य उस दीर्घवृत्त के एक फोकस पर स्थित होता है।

केप्लर का द्वितीय नियम

ग्रह और सूर्य को मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है। इसे समान क्षेत्रफल का नियम भी कहा जाता है।

इसका संबंध ग्रह के कोणीय संवेग के संरक्षण से है।

केप्लर का तृतीय नियम

किसी ग्रह की परिक्रमा अवधि T के वर्ग का उसकी कक्षा की औसत त्रिज्या r के घन से संबंध होता है:

T2 ∝ r3

दो ग्रहों के लिए:

T12/T22 = r13/r23

पृथ्वी के चारों ओर उपग्रह की गति

जब कोई उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में घूमता है, तब पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल ही उसे आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।

यदि उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या r है, तो

GMm/r2 = mv2/r

अतः कक्षीय चाल

v = √(GM/r)

उपग्रह का आवर्तकाल

उपग्रह की चाल

v = 2πr/T

को कक्षीय चाल के सूत्र में रखने पर

T = 2π√(r3/GM)

इससे केप्लर के तृतीय नियम का परिणाम भी प्राप्त होता है:

T2 ∝ r3

उपग्रह की गतिज और कुल ऊर्जा

वृत्ताकार कक्षा में उपग्रह की गतिज ऊर्जा:

K = 1/2 mv2

क्योंकि v2 = GM/r, इसलिए

K = GMm/(2r)

गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा:

U = −GMm/r

अतः कुल यांत्रिक ऊर्जा:

E = K + U = −GMm/(2r)

इसलिए वृत्ताकार कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है।

पलायन चाल

किसी पिंड को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रारंभिक चाल को पलायन चाल (Escape Velocity) कहते हैं।

पृथ्वी की सतह से पलायन चाल:

ve = √(2GM/R)

चूँकि g = GM/R2, इसलिए

ve = √(2gR)

पृथ्वी के लिए इसका मान लगभग 11.2 km/s है।

पलायन चाल किन बातों पर निर्भर करती है?

  • यह प्रक्षेपित किए जाने वाले पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती।
  • आदर्श स्थिति में दिशा पर निर्भर नहीं करती।
  • यह उस ग्रह या पिंड के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करती है।
  • ऊँचाई बढ़ने पर पलायन चाल का मान बदलता है।

गुरुत्वीय त्वरण और भार

किसी वस्तु का भार:

W = mg

चूँकि ऊँचाई या गहराई बदलने पर g बदलता है, इसलिए वस्तु का भार भी बदलता है। लेकिन वस्तु का द्रव्यमान समान रहता है।

प्रश्न 8.1 – महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न

प्रश्न: क्या किसी वस्तु को खोखले चालक के भीतर रखकर पास की वस्तुओं के गुरुत्वीय प्रभाव से उसी प्रकार सुरक्षित किया जा सकता है जिस प्रकार विद्युत आवेश को चालक से परिरक्षित किया जाता है?

उत्तर: नहीं। विद्युत स्थैतिक परिरक्षण और गुरुत्वीय परिरक्षण की प्रकृति अलग है। सामान्यतः किसी खोखले गोले में रखने मात्र से बाहरी गुरुत्वीय प्रभाव को समाप्त नहीं किया जा सकता।

अंतरिक्ष स्टेशन बड़ा होने पर गुरुत्वीय प्रभाव

पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे छोटे अंतरिक्षयान में यात्री को भारहीनता जैसी स्थिति अनुभव हो सकती है। यदि अंतरिक्ष स्टेशन का आकार काफी बड़ा हो, तो उसके अलग-अलग भागों में गुरुत्वीय त्वरण में अंतर यानी tidal effect मापा जा सकता है।

चन्द्रमा का ज्वारीय प्रभाव अधिक क्यों?

सूर्य का गुरुत्वीय बल पृथ्वी पर चन्द्रमा की तुलना में अधिक हो सकता है, लेकिन ज्वारीय प्रभाव दूरी के साथ अधिक तेजी से घटता है। लगभग यह प्रभाव दूरी के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। चन्द्रमा पृथ्वी के बहुत निकट होने के कारण उसका tidal effect महत्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 8.2 – सही विकल्प

  • (a) बढ़ती ऊँचाई के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है।
  • (b) पृथ्वी के भीतर गहराई बढ़ने पर, समान घनत्व की पृथ्वी मानने पर, गुरुत्वीय त्वरण घटता है।
  • (c) गुरुत्वीय त्वरण पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
  • (d) बड़ी दूरी के लिए सटीक गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र −GMm/r है; इसलिए सीमित दूरी के परिवर्तन के लिए इसे स्थिर-g वाले mgh से अधिक सामान्य माना जाता है।

प्रश्न 8.3 – कक्षीय त्रिज्या ज्ञात करना

प्रश्न: एक ग्रह सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से करता है। उसकी कक्षा का आकार पृथ्वी की कक्षा की तुलना में कितना होगा?

वृत्ताकार कक्षा के लिए

v = √(GM/r)

अर्थात्

v ∝ 1/√r

यदि ग्रह की चाल पृथ्वी की चाल की दो गुनी है, तो

vp = 2vE

इसलिए

rp = rE/4

अर्थात् आदर्श वृत्ताकार कक्षा मानने पर ग्रह की कक्षीय त्रिज्या पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या की 1/4 होगी।

प्रश्न 8.4 – बृहस्पति का द्रव्यमान

दिया है:

  • आयो का आवर्तकाल = 1.769 दिन
  • कक्षा की त्रिज्या = 4.22 × 108 m
  • G = 6.67 × 10−11 N m2 kg−2

उपग्रह के लिए

T = 2π√(r3/GM)

इसे M के लिए हल करने पर:

M = 4π2r3/(GT2)

मान रखने पर बृहस्पति का द्रव्यमान लगभग 1.9 × 1027 kg प्राप्त होता है, जो सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 है।

प्रश्न 8.5 – आकाशगंगा में तारे का परिक्रमण काल

यदि आकाशगंगा में लगभग 2.5 × 1011 सौर-द्रव्यमान के बराबर तारकीय द्रव्यमान हो और कोई तारा केन्द्र से लगभग 50,000 प्रकाश वर्ष दूर हो, तो उसके कक्षीय समय का अनुमान गुरुत्वाकर्षण और वृत्तीय गति के संबंध से लगाया जा सकता है।

मुख्य संबंध:

T = 2π√(r3/GM)

इस प्रश्न में दूरी को प्रकाश-वर्ष से मीटर में बदलकर तथा कुल प्रभावी द्रव्यमान को किलोग्राम में बदलकर सूत्र में रखा जाता है।

प्रश्न 8.6 – उपग्रह की कुल ऊर्जा

(a) यदि अनन्त पर स्थितिज ऊर्जा शून्य है, तो वृत्ताकार कक्षा में घूम रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा उसकी गतिज ऊर्जा के ऋणात्मक के बराबर होती है।

क्योंकि

E = −GMm/(2r)

और

K = GMm/(2r)

इसलिए

E = −K

(b) समान ऊँचाई पर स्थिर पिंड की तुलना में पहले से कक्षा में घूम रहे उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए कम अतिरिक्त ऊर्जा चाहिए, क्योंकि उपग्रह के पास पहले से ही गतिज ऊर्जा होती है।

प्रश्न 8.7 – पलायन चाल पर निर्भरता

पृथ्वी की सतह से पलायन चाल

ve = √(2GM/R)

इससे स्पष्ट है कि पलायन चाल प्रक्षेपित पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। ऊँचाई बदलने पर पृथ्वी के केन्द्र से दूरी बदलती है, इसलिए वहाँ पलायन चाल का मान भी बदलता है।

प्रश्न 8.8 – अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में धूमकेतु

सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में घूमते धूमकेतु के लिए निम्न परिणाम महत्वपूर्ण हैं:

राशिनियत रहती है?
रैखिक चालनहीं
कोणीय चालनहीं
कोणीय संवेगहाँ
गतिज ऊर्जानहीं
स्थितिज ऊर्जानहीं
कुल यांत्रिक ऊर्जाहाँ

प्रश्न 8.9 – अंतरिक्ष यात्री के लिए परेशानी वाले लक्षण

अंतरिक्ष में भारहीनता जैसी स्थिति के कारण शरीर में द्रवों के वितरण में परिवर्तन हो सकता है। दिए गए विकल्पों में चेहरे पर सूजन, सिरदर्द और दिक्विन्यास की समस्या अंतरिक्ष यात्री के लिए परेशानी वाली स्थितियाँ हो सकती हैं।

प्रश्न 8.10 और 8.11 – गुरुत्वीय तीव्रता

दो समान अर्धगोलीय खोलों को मिलाकर पूर्ण गोला माना जाए, तो केन्द्र पर दोनों भागों से उत्पन्न गुरुत्वीय प्रभाव समान परिमाण और विपरीत दिशा में होंगे। इसलिए केन्द्र पर परिणामी गुरुत्वीय तीव्रता शून्य होगी।

किसी अन्य बिंदु पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा सममिति और दोनों भागों से उत्पन्न प्रभावों के सदिश योग से निर्धारित की जाती है।

प्रश्न 8.12 – सूर्य और पृथ्वी के बीच गुरुत्वीय बल शून्य होने का बिंदु

दिया है:

  • सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg
  • पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 × 1024 kg
  • सूर्य-पृथ्वी दूरी = 1.5 × 1011 m

मान लें पृथ्वी के केन्द्र से शून्य-बल बिंदु की दूरी x है। तब उस बिंदु की सूर्य से दूरी D − x होगी।

शून्य परिणामी बल के लिए दोनों गुरुत्वीय बल बराबर होंगे:

GMEm/x2 = GMSm/(D−x)2

यहाँ से G और परीक्षण पिंड का द्रव्यमान कट जाता है। प्राप्त समीकरण को हल करके पृथ्वी के निकट वह बिंदु प्राप्त किया जा सकता है जहाँ दोनों बलों का परिणामी शून्य होता है।

प्रश्न 8.13 – सूर्य का द्रव्यमान कैसे ज्ञात करें?

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। पृथ्वी की कक्षा को लगभग वृत्ताकार मानकर सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी को आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।

अतः

GMSm/R2 = mv2/R

जहाँ

v = 2πR/T

इसलिए

MS = 4π2R3/(GT2)

पृथ्वी की कक्षीय त्रिज्या और परिक्रमण काल का उपयोग करके सूर्य का द्रव्यमान लगभग 2 × 1030 kg प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.14 – शनि की सूर्य से दूरी

केप्लर के तृतीय नियम के अनुसार:

T2 ∝ R3

पृथ्वी और शनि के लिए:

(TS/TE)2 = (RS/RE)3

यदि

TS/TE = 29.5

तो

RS/RE = 29.52/3

अर्थात्

RS ≈ 9.57RE

यदि पृथ्वी की सूर्य से दूरी 1.5 × 108 km ली जाए, तो शनि की दूरी लगभग 1.43 × 109 km प्राप्त होती है।

प्रश्न 8.15 – ऊँचाई पर भार

प्रश्न: पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का भार 63 N है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर उसका भार ज्ञात कीजिए।

दिया है:

W = 63 N

h = R/2

ऊँचाई h पर

gh = g[R/(R+h)]2

इसलिए

gh = g[R/(R+R/2)]2

gh = g(2/3)2 = 4g/9

अतः

Wh = 4W/9

Wh = 4 × 63 / 9 = 28 N

उत्तर: 28 N

प्रश्न 8.16 – पृथ्वी के भीतर भार

प्रश्न: पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का भार 250 N है। यदि वस्तु पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी त्रिज्या की दूरी पर हो, तो उसका भार कितना होगा?

समान घनत्व वाली पृथ्वी के लिए:

gd = g(1 − d/R)

यहाँ

d = R/2

अतः

gd = g(1 − 1/2) = g/2

इसलिए नया भार

Wd = W/2

Wd = 250/2 = 125 N

उत्तर: 125 N

प्रश्न 8.17 – रॉकेट की अधिकतम ऊँचाई

प्रश्न: पृथ्वी की सतह से रॉकेट को 5 km/s की प्रारंभिक चाल से ऊपर दागा जाता है। वह वापस आने से पहले कितनी अधिकतम ऊँचाई तक जाएगा?

दिया है:

  • v = 5 km/s = 5000 m/s
  • M = 6.0 × 1024 kg
  • R = 6.4 × 106 m
  • G = 6.67 × 10−11 N m2 kg−2

पृथ्वी की सतह पर कुल ऊर्जा:

Ei = 1/2 mv2 − GMm/R

अधिकतम ऊँचाई पर रॉकेट का वेग शून्य होगा:

Ef = −GMm/(R+h)

ऊर्जा संरक्षण के नियम से:

1/2 mv2 − GMm/R = −GMm/(R+h)

दिए गए मानों को रखने पर पृथ्वी के केन्द्र से दूरी लगभग 8.0 × 106 m प्राप्त होती है।

अतः पृथ्वी की सतह से अधिकतम ऊँचाई:

h ≈ 1.6 × 106 m = 1600 km

प्रश्न 8.18 – पलायन चाल से तीन गुनी चाल

प्रश्न: किसी वस्तु को पृथ्वी की पलायन चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी से बहुत दूर पहुँचने पर उसकी चाल कितनी होगी?

यदि प्रारंभिक चाल v0 = 3ve है, तो ऊर्जा संरक्षण से

1/2 mv02 − GMm/R = 1/2 mv∞2

और

ve2 = 2GM/R

इसलिए

v∞2 = v02 − ve2

जब v0 = 3ve:

v∞ = √8 ve

यदि ve = 11.2 km/s, तो

v∞ ≈ 31.7 km/s

प्रश्न 8.19 – कक्षा में उपग्रह को पृथ्वी से बाहर निकालने की ऊर्जा

दिया है:

  • उपग्रह का द्रव्यमान = 200 kg
  • ऊँचाई = 400 km
  • पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4 × 106 m
  • पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg

उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या:

r = R+h = 6.4 × 106 + 0.4 × 106

r = 6.8 × 106 m

वृत्ताकार कक्षा में कुल ऊर्जा:

E = −GMm/(2r)

उसे अनन्त तक ले जाने के लिए आवश्यक अतिरिक्त ऊर्जा:

ΔE = GMm/(2r)

मान रखने पर ऊर्जा लगभग 5.88 × 109 J प्राप्त होती है।

प्रश्न 8.20 – दो तारों के टकराने की चाल

इस प्रकार के प्रश्न में ऊर्जा संरक्षण का प्रयोग किया जाता है। प्रारंभ में तारों की चाल नगण्य है, इसलिए उनकी कुल ऊर्जा मुख्यतः गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होती है।

दोनों तारों के केन्द्रों के बीच दूरी r होने पर:

Ui = −GM2/r

टकराने के ठीक पहले यदि प्रत्येक तारे की त्रिज्या R है, तो केन्द्रों के बीच दूरी 2R होगी।

ऊर्जा संरक्षण के नियम से प्राप्त समीकरण से उनकी टकराने की चाल निर्धारित की जा सकती है:

v2 = GM(1/2R − 1/r)

यहाँ प्रश्न में दिए गए द्रव्यमान, प्रारंभिक दूरी और तारे की त्रिज्या रखकर चाल निकाली जाती है।

प्रश्न 8.21 – दो गोलों के बीच मध्यबिंदु

दो समान द्रव्यमान वाले गोलों के केन्द्रों को जोड़ने वाली रेखा के मध्य बिंदु पर दोनों गोलों द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल समान परिमाण का और विपरीत दिशा में होता है।

इसलिए परिणामी गुरुत्वाकर्षण बल:

Fnet = 0

लेकिन गुरुत्वीय विभव एक अदिश राशि है, इसलिए दोनों गोलों के विभव जुड़ते हैं। मध्यबिंदु पर विभव शून्य नहीं होगा बल्कि ऋणात्मक होगा।

यदि मध्यबिंदु से प्रत्येक गोले की दूरी d = 0.5 m और प्रत्येक गोले का द्रव्यमान 100 kg है, तो

V = −GM/d − GM/d

V = −2GM/d

मध्य बिंदु पर रखा पिंड क्षणिक रूप से संतुलन में हो सकता है, लेकिन यह संतुलन अस्थायी नहीं बल्कि अस्थिर प्रकृति का होगा।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 8.22 – तुल्यकाली उपग्रह का गुरुत्वीय विभव

तुल्यकाली उपग्रह लगभग 36,000 km की ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। पृथ्वी का द्रव्यमान 6 × 1024 kg तथा त्रिज्या 6400 km है।

केन्द्र से उपग्रह की दूरी:

r = 6400 + 36000 = 42400 km

मीटर में:

r = 4.24 × 107 m

गुरुत्वीय विभव:

V = −GM/r

अतः विभव लगभग −9.4 × 106 J/kg प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.23 – तीव्र गति से घूमता संहत तारा

यदि किसी संहत तारे की त्रिज्या बहुत कम और द्रव्यमान बहुत अधिक हो, तो उसके पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण बहुत बड़ा हो सकता है। विषुवत् रेखा पर रखे पिंड के लिए यह देखना होता है कि गुरुत्वाकर्षण द्वारा दिया गया त्वरण आवश्यक अभिकेन्द्रीय त्वरण से पर्याप्त बड़ा है या नहीं।

गुरुत्वीय त्वरण:

g = GM/R2

अभिकेन्द्रीय त्वरण:

ac = ω2R

यदि

g ≥ ac

तो पिंड तारे के पृष्ठ से अलग नहीं होगा।

प्रश्न 8.24 – मंगल से सौरमंडल से बाहर जाने की ऊर्जा

मंगल पर खड़े अंतरिक्षयान को सौरमंडल से बाहर भेजने के लिए सूर्य और मंगल दोनों के गुरुत्वीय प्रभावों को ध्यान में रखना पड़ता है।

सूर्य के कारण स्थितिज ऊर्जा:

US = −GMSm/rS

मंगल के कारण स्थितिज ऊर्जा:

UM = −GMMm/RM

इसलिए प्रारंभिक कुल ऊर्जा में दोनों योगदान शामिल होंगे। सौरमंडल से बाहर पहुँचने की स्थिति में आवश्यक अतिरिक्त ऊर्जा ऊर्जा संरक्षण के आधार पर निर्धारित की जाती है।

प्रश्न 8.25 – मंगल से रॉकेट की अधिकतम ऊँचाई

दिया है:

  • प्रारंभिक चाल = 2 km/s
  • मंगल का द्रव्यमान = 6.4 × 1023 kg
  • मंगल की त्रिज्या = 3395 km
  • 20% प्रारंभिक गतिज ऊर्जा नष्ट होती है।

अर्थात् प्रारंभिक गतिज ऊर्जा का 80% भाग प्रभावी रूप से उपलब्ध रहता है।

ऊर्जा संरक्षण के आधार पर:

0.8 × 1/2 mv2 − GMm/R = −GMm/(R+h)

दिए गए मानों को रखने पर अधिकतम ऊँचाई लगभग 495 km प्राप्त होती है।

गुरुत्वाकर्षण अध्याय के महत्वपूर्ण सूत्र

विषयसूत्र
गुरुत्वाकर्षण बलF = Gm1m2/r2
सतह पर gg = GM/R2
ऊँचाई पर ggh = g[R/(R+h)]2
गहराई पर ggd = g(1 − d/R)
गुरुत्वीय विभवV = −GM/r
स्थितिज ऊर्जाU = −GMm/r
पृथ्वी की सतह के पास PEΔU = mgh
कक्षीय चालv = √(GM/r)
उपग्रह का आवर्तकालT = 2π√(r3/GM)
उपग्रह की गतिज ऊर्जाK = GMm/(2r)
उपग्रह की कुल ऊर्जाE = −GMm/(2r)
पलायन चालve = √(2GM/R)
पलायन चाल का दूसरा रूपve = √(2gR)
केप्लर का तृतीय नियमT2 ∝ r3

गुरुत्वाकर्षण के महत्वपूर्ण Objective Questions

1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम में बल किसके समानुपाती होता है?

(A) द्रव्यमान के योग के
(B) द्रव्यमानों के गुणनफल के
(C) दूरी के
(D) दूरी के वर्ग के

उत्तर: (B) द्रव्यमानों के गुणनफल के

2. गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का SI मात्रक क्या है?

(A) N kg2/m2
(B) N m2/kg2
(C) N/m
(D) J/kg

उत्तर: (B) N m2/kg2

3. पृथ्वी की सतह से ऊँचाई बढ़ाने पर g का मान क्या होता है?

(A) बढ़ता है
(B) घटता है
(C) स्थिर रहता है
(D) पहले बढ़ता फिर घटता है

उत्तर: (B) घटता है

4. गुरुत्वीय विभव एक कैसी राशि है?

(A) सदिश
(B) अदिश
(C) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) अदिश

5. गुरुत्वीय विभव का SI मात्रक क्या है?

उत्तर: J/kg

6. पृथ्वी की सतह पर पलायन चाल लगभग कितनी है?

(A) 5.6 km/s
(B) 9.8 km/s
(C) 11.2 km/s
(D) 15 km/s

उत्तर: (C) 11.2 km/s

7. वृत्ताकार कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा कैसी होती है?

(A) धनात्मक
(B) ऋणात्मक
(C) शून्य
(D) हमेशा बदलती रहती है

उत्तर: (B) ऋणात्मक

8. केप्लर के तृतीय नियम में T2 किसके समानुपाती है?

उत्तर: कक्षीय त्रिज्या के घन अर्थात् r3 के

9. पृथ्वी के केन्द्र पर आदर्श समान-घनत्व मॉडल में g का मान क्या होगा?

उत्तर: शून्य

10. उपग्रह की कक्षीय चाल का सूत्र क्या है?

उत्तर: v = √(GM/r)

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  • न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम को समझाइए।
  • गुरुत्वीय त्वरण क्या है? इसका सूत्र प्राप्त कीजिए।
  • ऊँचाई के साथ g में परिवर्तन का सूत्र प्राप्त कीजिए।
  • गहराई के साथ g में परिवर्तन समझाइए।
  • गुरुत्वीय विभव और गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा को परिभाषित कीजिए।
  • केप्लर के तीनों नियम लिखिए।
  • कक्षीय चाल का सूत्र प्राप्त कीजिए।
  • उपग्रह के आवर्तकाल का सूत्र प्राप्त कीजिए।
  • वृत्ताकार कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
  • पलायन चाल की परिभाषा दीजिए और उसका सूत्र प्राप्त कीजिए।
  • पलायन चाल पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर क्यों नहीं करती?
  • कक्षा में घूम रहे उपग्रह को पृथ्वी से बाहर निकालने के लिए कम ऊर्जा क्यों चाहिए?
  • ज्वारीय प्रभाव क्या है और चन्द्रमा का ज्वारीय प्रभाव महत्वपूर्ण क्यों है?
  • ग्रहों की गति में कोणीय संवेग संरक्षण का क्या महत्व है?

अध्याय 8 गुरुत्वाकर्षण का संक्षिप्त सार

इस अध्याय में हमने जाना कि ब्रह्मांड में प्रत्येक द्रव्यमान वाली वस्तु दूसरी वस्तु को आकर्षित करती है। न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम दो पिंडों के बीच इस बल को निर्धारित करता है। पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान लगभग 9.8 m/s2 होता है और ऊँचाई तथा गहराई बढ़ने पर इसका मान घटता है।

गुरुत्वीय विभव और गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा को अनन्त पर शून्य मानने पर इनके मान ऋणात्मक होते हैं। ग्रहों की गति को समझाने में केप्लर के तीन नियम महत्वपूर्ण हैं। उपग्रह की वृत्तीय गति में पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ही अभिकेन्द्रीय बल उपलब्ध कराता है।

इस अध्याय का एक महत्वपूर्ण परिणाम पलायन चाल है, जिसका पृथ्वी की सतह पर मान लगभग 11.2 km/s है। साथ ही उपग्रह की कक्षीय चाल, आवर्तकाल, गतिज ऊर्जा और कुल ऊर्जा के सूत्र numerical questions में बहुत उपयोगी हैं।

अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक

Chapter 7 – कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण

Chapter 9 – ठोसों के यांत्रिक गुण

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण में गुरुत्वाकर्षण बल से लेकर उपग्रह की गति और पलायन चाल तक कई महत्वपूर्ण concepts शामिल हैं। परीक्षा की दृष्टि से गुरुत्वाकर्षण का नियम, g में ऊँचाई एवं गहराई के साथ परिवर्तन, गुरुत्वीय विभव, स्थितिज ऊर्जा, केप्लर के नियम, orbital velocity, satellite energy और escape velocity विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

इन सूत्रों को केवल याद करने के बजाय उनके पीछे की physical concept को समझकर numerical questions का अभ्यास करने से इस अध्याय के प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।

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