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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 9 – ठोसों के यांत्रिक गुण में प्रत्यास्थता, प्रतिबल, विकृति, हुक का नियम, यंग प्रत्यास्थता गुणांक, अपरूपण गुणांक और आयतन प्रत्यास्थता गुणांक जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है। बिहार बोर्ड कक्षा 11 भौतिकी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अध्याय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे theory के साथ numerical questions भी पूछे जाते हैं।

यहाँ Bihar Board Class 11 Physics Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, आवश्यक सूत्र और numericals को सरल हिंदी में समझाया गया है।

पिछला अध्याय:
Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण

Table of Contents

अध्याय 9 – ठोसों के यांत्रिक गुण

जब किसी ठोस वस्तु पर बाहरी बल लगाया जाता है तो उसके आकार या आयाम में परिवर्तन हो सकता है। बाहरी बल हटाने पर कुछ पदार्थ अपनी मूल अवस्था में वापस आ जाते हैं। पदार्थों के इसी व्यवहार का अध्ययन ठोसों के यांत्रिक गुण के अंतर्गत किया जाता है।

प्रत्यास्थता क्या है?

किसी पदार्थ का वह गुण जिसके कारण बाहरी विरूपक बल हटाने के बाद वह पुनः अपने मूल आकार और आयाम को प्राप्त करने का प्रयास करता है, प्रत्यास्थता (Elasticity) कहलाता है।

उदाहरण के लिए, किसी तार को उसकी प्रत्यास्थ सीमा के भीतर खींचकर छोड़ने पर वह लगभग अपनी प्रारंभिक लंबाई प्राप्त कर लेता है।

प्लास्टिकता क्या है?

यदि बाहरी बल हटाने के बाद पदार्थ अपने मूल आकार में वापस नहीं आता और उसमें स्थायी विरूपण रह जाता है, तो इस गुण को प्लास्टिकता (Plasticity) कहा जाता है।

प्रतिबल (Stress)

किसी वस्तु पर बाहरी बल लगाने पर उसके भीतर उत्पन्न प्रति इकाई क्षेत्रफल के प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं।

प्रतिबल = बल / क्षेत्रफल

Stress = F/A

प्रतिबल का SI मात्रक N/m2 या Pascal (Pa) है।

प्रतिबल के प्रकार

  • अनुदैर्ध्य प्रतिबल
  • तनन प्रतिबल
  • संपीडन प्रतिबल
  • अपरूपण प्रतिबल
  • आयतन प्रतिबल

विकृति (Strain)

बाहरी बल के कारण किसी वस्तु के आयाम में होने वाले परिवर्तन और उसके मूल आयाम के अनुपात को विकृति कहते हैं।

यदि किसी तार की प्रारंभिक लंबाई L और लंबाई में परिवर्तन ΔL हो, तो

अनुदैर्ध्य विकृति = ΔL/L

विकृति दो समान राशियों का अनुपात है, इसलिए इसका कोई मात्रक नहीं होता।

हुक का नियम

प्रत्यास्थ सीमा के भीतर किसी पदार्थ में उत्पन्न प्रतिबल, विकृति के समानुपाती होता है। इसे हुक का नियम (Hooke’s Law) कहते हैं।

Stress ∝ Strain

अथवा

Stress = E × Strain

जहाँ E संबंधित प्रत्यास्थता गुणांक है।

यंग प्रत्यास्थता गुणांक

अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young’s Modulus) कहते हैं। इसे सामान्यतः Y से प्रदर्शित किया जाता है।

Y = अनुदैर्ध्य प्रतिबल / अनुदैर्ध्य विकृति

Y = (F/A)/(ΔL/L)

अतः

Y = FL/(AΔL)

इससे तार की लंबाई में वृद्धि:

ΔL = FL/(AY)

अपरूपण गुणांक

अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति के अनुपात को अपरूपण गुणांक (Shear Modulus) कहते हैं।

G = अपरूपण प्रतिबल / अपरूपण विकृति

यदि किसी वस्तु की ऊँचाई L हो और ऊपरी सतह में पार्श्व विस्थापन Δx हो, तो छोटे विरूपण के लिए

G = (F/A)/(Δx/L)

अतः

Δx = FL/(GA)

आयतन प्रत्यास्थता गुणांक

आयतन प्रतिबल और आयतन विकृति के अनुपात को आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus) कहते हैं। इसे K से प्रदर्शित किया जाता है।

K = −ΔP/(ΔV/V)

यहाँ ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि दाब बढ़ने पर सामान्यतः पदार्थ का आयतन कम होता है।

संपीड्यता

आयतन प्रत्यास्थता गुणांक के व्युत्क्रम को संपीड्यता (Compressibility) कहते हैं।

Compressibility = 1/K

प्रतिबल-विकृति वक्र

किसी पदार्थ पर धीरे-धीरे बढ़ता हुआ बल लगाकर प्रतिबल और विकृति के बीच ग्राफ बनाया जाए तो उसे प्रतिबल-विकृति वक्र (Stress-Strain Curve) कहते हैं। इस वक्र से पदार्थ के प्रत्यास्थ और प्लास्टिक व्यवहार के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।

प्रारंभिक क्षेत्र में प्रतिबल और विकृति लगभग समानुपाती होते हैं। इस क्षेत्र में हुक का नियम लागू होता है। प्रत्यास्थ सीमा पार करने के बाद पदार्थ में स्थायी विरूपण शुरू हो सकता है। बहुत अधिक प्रतिबल लगाने पर पदार्थ अंततः टूट सकता है।

प्रश्न 9.1 – स्टील और ताँबे के यंग गुणांक का अनुपात

प्रश्न: 4.7 m लंबे तथा 3.0 × 10−5 m2 अनुप्रस्थ क्षेत्रफल वाले स्टील के तार और 3.5 m लंबे तथा 4.0 × 10−5 m2 क्षेत्रफल वाले ताँबे के तार पर समान भार लगाने से दोनों की लंबाई में समान वृद्धि होती है। यंग गुणांकों का अनुपात ज्ञात कीजिए।

हम जानते हैं:

Y = FL/(AΔL)

दोनों तारों के लिए F और ΔL समान हैं। इसलिए

YS/YC = (LS/AS) × (AC/LC)

YS/YC = (4.7 × 4.0)/(3.0 × 3.5)

YS/YC ≈ 1.79

उत्तर: स्टील और ताँबे के यंग गुणांक का अनुपात लगभग 1.79 : 1 है।

प्रश्न 9.2 – प्रतिबल-विकृति ग्राफ से यंग गुणांक

यदि किसी पदार्थ के प्रतिबल-विकृति ग्राफ के प्रत्यास्थ क्षेत्र में

विकृति = 0.002

और

प्रतिबल = 150 × 106 N/m2

हो, तो

Y = Stress/Strain

Y = (150 × 106)/0.002

Y = 7.5 × 1010 N/m2

ग्राफ के उच्चतम बिंदु के आधार पर पदार्थ की लगभग पराभव सामर्थ्य 290 × 106 N/m2 ली जा सकती है।

प्रश्न 9.3 – पदार्थ A और B की तुलना

प्रतिबल-विकृति ग्राफ में प्रारंभिक प्रत्यास्थ भाग का ढाल यंग गुणांक को दर्शाता है। जिस पदार्थ के ग्राफ का प्रारंभिक ढाल अधिक होगा, उसका यंग गुणांक अधिक होगा।

दिए गए ग्राफ में पदार्थ A का ढाल अधिक होने के कारण उसका यंग गुणांक अधिक है। ग्राफ के व्यवहार के आधार पर पदार्थ A को अधिक मजबूत भी माना जाता है।

प्रश्न 9.4 – सत्य या असत्य

(a) इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग गुणांक अधिक है।

उत्तर: असत्य। समान विकृति उत्पन्न करने के लिए इस्पात में रबड़ की अपेक्षा अधिक प्रतिबल आवश्यक होता है। इसलिए इस्पात का यंग गुणांक अधिक होता है।

(b) किसी स्प्रिंग का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।

उत्तर: सत्य। स्प्रिंग को खींचने पर उसके तार में मुख्य रूप से अपरूपण प्रकार का विरूपण उत्पन्न होता है।

प्रश्न 9.5 – स्टील और पीतल के तार में विस्तार

तार की लंबाई में वृद्धि ज्ञात करने के लिए

ΔL = FL/(AY)

का उपयोग किया जाता है।

यदि तार की त्रिज्या 1.25 × 10−3 m है, तो

A = πr2

A ≈ 4.91 × 10−6 m2

पीतल के तार पर 6 kg द्रव्यमान के कारण

FB = 6 × 9.8 = 58.8 N

और स्टील के तार पर कुल 10 kg द्रव्यमान के कारण

FS = 10 × 9.8 = 98 N

अब संबंधित लंबाई, क्षेत्रफल और यंग गुणांक को ΔL = FL/(AY) में रखकर दोनों तारों का विस्तार निकाला जाता है।

प्रश्न 9.6 – ऐल्युमिनियम घन का अपरूपण

10 cm किनारे वाले ऐल्युमिनियम के घन के एक फलक पर 100 kg का भार लगाया गया है और ऐल्युमिनियम का अपरूपण गुणांक 25 GPa है।

फलक का क्षेत्रफल:

A = 0.1 × 0.1 = 0.01 m2

लगाया गया बल:

F = 100 × 9.8 = 980 N

अपरूपण गुणांक:

G = 25 × 109 Pa

और

Δx = FL/(GA)

अतः

Δx = (980 × 0.1)/(25 × 109 × 0.01)

Δx ≈ 3.92 × 10−7 m

प्रश्न 9.7 – खोखले इस्पात स्तम्भों में संपीडन विकृति

चार समान खोखले बेलनाकार स्तम्भ 50,000 kg द्रव्यमान वाले ढाँचे को सहारा देते हैं। प्रत्येक स्तम्भ की भीतरी त्रिज्या 0.3 m और बाहरी त्रिज्या 0.6 m है।

प्रत्येक स्तम्भ का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल:

A = π(R2 − r2)

A = π[(0.6)2 − (0.3)2]

A ≈ 0.85 m2

कुल भार:

W = 50000 × 9.8 = 4.9 × 105 N

प्रत्येक स्तम्भ पर बल:

F = W/4 = 1.225 × 105 N

संपीडन विकृति:

Strain = Stress/Y = F/(AY)

स्टील के लिए Y = 2 × 1011 Pa रखने पर प्रत्येक स्तम्भ की संपीडन विकृति लगभग 7.2 × 10−7 प्राप्त होती है।

प्रश्न 9.8 – ताँबे में उत्पन्न विकृति

ताँबे के टुकड़े का अनुप्रस्थ परिच्छेद:

A = 15.2 mm × 19.1 mm

A = 15.2 × 10−3 × 19.1 × 10−3 m2

लगाया गया बल F = 44500 N और ताँबे का यंग गुणांक Y = 1.1 × 1011 Pa है।

Strain = F/(AY)

इन मानों को रखने पर ताँबे में उत्पन्न अनुदैर्ध्य विकृति ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 9.9 – स्टील केबल द्वारा उठाया जा सकने वाला अधिकतम भार

केबल की त्रिज्या:

r = 1.5 cm = 1.5 × 10−2 m

अनुप्रस्थ क्षेत्रफल:

A = πr2

अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल 108 N/m2 है।

Fmax = Stress × Area

Fmax = 108 × π × (1.5 × 10−2)2

Fmax ≈ 7.1 × 104 N

उत्तर: केबल लगभग 7.1 × 104 N का अधिकतम भार उठा सकता है।

प्रश्न 9.10 – ताँबे और लोहे के तारों के व्यास का अनुपात

यदि समान लंबाई वाले तारों में समान तनाव और समान विस्तार आवश्यक हो, तो

ΔL = FL/(AY)

से स्पष्ट है कि

ACuYCu = AFeYFe

और चूँकि वृत्ताकार तार के लिए A ∝ d2, इसलिए आवश्यक व्यासों का अनुपात संबंधित यंग गुणांकों से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 9.11 – ऊर्ध्वाधर वृत्त में घूमते द्रव्यमान से तार का विस्तार

वृत्त के सबसे निचले बिंदु पर तार में तनाव द्रव्यमान के भार और आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल दोनों के कारण होता है।

T − mg = mv2/r

अतः

T = mg + mv2/r

कोणीय वेग ω के रूप में:

T = mg + mω2r

इसके बाद तार के विस्तार के लिए

ΔL = TL/(AY)

का उपयोग किया जाता है। दिए गए आँकड़ों से विस्तार लगभग 0.19 cm प्राप्त होता है।

प्रश्न 9.12 – जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक

आयतन प्रत्यास्थता गुणांक:

K = −ΔP/(ΔV/V)

जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक वायु की तुलना में बहुत अधिक होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि समान दाब परिवर्तन पर जल के आयतन में होने वाला परिवर्तन वायु की तुलना में बहुत कम होता है।

इसलिए जल को वायु की तुलना में संपीडित करना काफी कठिन होता है।

प्रश्न 9.13 – अधिक दाब पर जल का घनत्व

गहराई बढ़ने पर जल पर दाब बढ़ता है और उसके आयतन में थोड़ी कमी आती है। समान द्रव्यमान के लिए आयतन कम होने पर घनत्व बढ़ता है।

ρ = M/V

संपीड्यता और दाब परिवर्तन के संबंध का उपयोग करके अधिक दाब पर जल के नए आयतन तथा फिर उसके घनत्व की गणना की जाती है।

प्रश्न 9.14 – काँच के स्लैब के आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन

आयतन प्रत्यास्थता गुणांक:

K = −P/(ΔV/V)

अतः

ΔV/V = −P/K

यदि दाब 10 atm और काँच का आयतन गुणांक 37 × 109 Pa हो, तो इन मानों को सूत्र में रखकर आयतन का भिन्नात्मक परिवर्तन निकाला जाता है।

प्रश्न 9.15 – ताँबे के घन का आयतन संकुचन

10 cm किनारे वाले ताँबे के घन का आयतन:

V = L3 = (0.1)3 = 0.001 m3

यदि दाब 7 × 106 Pa तथा ताँबे का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक 140 × 109 Pa हो, तो

ΔV = −PV/K

का प्रयोग करके आयतन संकुचन ज्ञात किया जाता है। ऋणात्मक चिह्न आयतन में कमी को दर्शाता है।

प्रश्न 9.16 – जल को 0.10% संपीडित करने के लिए दाब

यदि जल को 0.10% संपीडित करना हो, तो

ΔV/V = −0.10/100 = −0.001

अब

K = −ΔP/(ΔV/V)

से

ΔP = −K(ΔV/V)

प्राप्त होता है। जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का मान रखने पर आवश्यक दाब परिवर्तन ज्ञात किया जाता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 9.17 – हीरे की निहाई पर दाब

यदि संकीर्ण सिरे का व्यास 0.50 mm और लगाया गया बल 50000 N है, तो

r = 0.25 mm = 2.5 × 10−4 m

क्षेत्रफल:

A = πr2

दाब:

P = F/A

मान रखने पर

P ≈ 2.55 × 1011 Pa

उत्तर: निहाई की नोक पर दाब लगभग 2.55 × 1011 Pa होगा।

प्रश्न 9.18 – स्टील और ऐल्युमिनियम तारों में समान प्रतिबल

यदि किसी छड़ को दो अलग-अलग पदार्थों के तारों से लटकाया गया है, तो भार की स्थिति इस प्रकार निर्धारित की जा सकती है कि दोनों तारों में समान प्रतिबल या समान विकृति उत्पन्न हो।

समान प्रतिबल के लिए:

F1/A1 = F2/A2

और छड़ के घूर्णन संतुलन के लिए:

F1x = F2y

इन दोनों समीकरणों का उपयोग करके भार की आवश्यक स्थिति ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 9.19 – क्षैतिज तार के मध्य बिंदु का अवनमन

जब दो खंभों के बीच तने हुए तार के मध्य में कोई भार लटकाया जाता है, तो तार थोड़ा नीचे झुक जाता है। इस झुकाव को अवनमन कहते हैं।

इस प्रश्न में तार की लंबाई, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल, यंग गुणांक और लगाए गए भार का उपयोग करके तार के विस्तार तथा ज्यामितीय संबंधों से मध्य बिंदु का अवनमन निर्धारित किया जाता है।

प्रश्न 9.20 – रिवेट पर अपरूपण प्रतिबल

रिवेट द्वारा वहन किए जाने वाले अधिकतम बल को उसके अनुमत अपरूपण प्रतिबल और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल की सहायता से निकाला जाता है।

Shear Stress = F/A

अतः

F = Shear Stress × A

यदि कई समान रिवेट भार को बराबर बाँटते हैं, तो कुल अनुमत बल सभी रिवेटों द्वारा वहन किए जाने वाले बलों का योग होगा।

ठोसों के यांत्रिक गुण के महत्वपूर्ण सूत्र

राशिसूत्र
प्रतिबलStress = F/A
अनुदैर्ध्य विकृतिStrain = ΔL/L
यंग गुणांकY = FL/(AΔL)
तार का विस्तारΔL = FL/(AY)
अपरूपण गुणांकG = Shear Stress/Shear Strain
आयतन गुणांकK = −ΔP/(ΔV/V)
संपीड्यताβ = 1/K
दाबP = F/A

महत्वपूर्ण Objective Questions

1. प्रत्यास्थता क्या है?

उत्तर: बाहरी बल हटाने पर पदार्थ का अपने मूल आकार और आयाम को पुनः प्राप्त करने का गुण।

2. प्रतिबल का SI मात्रक क्या है?

(A) Joule
(B) Newton
(C) Pascal
(D) Watt

उत्तर: (C) Pascal

3. विकृति का मात्रक क्या है?

उत्तर: विकृति विमाहीन राशि है, इसलिए इसका कोई मात्रक नहीं होता।

4. यंग गुणांक का SI मात्रक क्या है?

उत्तर: Pascal (Pa) या N/m2

5. हुक का नियम किस सीमा में लागू होता है?

उत्तर: प्रत्यास्थ सीमा के भीतर।

6. हुक के नियम के अनुसार प्रतिबल किसके समानुपाती है?

उत्तर: विकृति के।

7. इस्पात और रबड़ में किसका यंग गुणांक अधिक है?

उत्तर: इस्पात का।

8. आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का व्युत्क्रम क्या कहलाता है?

उत्तर: संपीड्यता।

9. प्रतिबल का सूत्र क्या है?

उत्तर: F/A

10. यंग गुणांक का सूत्र क्या है?

उत्तर: Y = FL/(AΔL)

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  • प्रत्यास्थता की परिभाषा दीजिए।
  • प्रतिबल क्या है? इसके प्रकार बताइए।
  • विकृति क्या है? इसका मात्रक क्यों नहीं होता?
  • हुक का नियम लिखिए।
  • यंग प्रत्यास्थता गुणांक की परिभाषा और सूत्र लिखिए।
  • अपरूपण गुणांक क्या है?
  • आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की व्याख्या कीजिए।
  • संपीड्यता क्या है?
  • प्रतिबल-विकृति वक्र की व्याख्या कीजिए।
  • इस्पात का यंग गुणांक रबड़ से अधिक क्यों होता है?
  • स्प्रिंग का व्यवहार अपरूपण गुणांक से क्यों निर्धारित होता है?
  • तार की लंबाई में वृद्धि का सूत्र प्राप्त कीजिए।

Chapter 9 का संक्षिप्त सार

ठोसों के यांत्रिक गुण अध्याय में मुख्य रूप से यह अध्ययन किया जाता है कि बाहरी बल लगाए जाने पर ठोस पदार्थ किस प्रकार विरूपित होते हैं और बल हटाने पर उनका व्यवहार कैसा होता है। प्रत्यास्थ पदार्थ अपनी प्रत्यास्थ सीमा के भीतर बल हटाने के बाद मूल अवस्था में लौटने का प्रयास करते हैं।

प्रतिबल प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल से संबंधित है, जबकि विकृति वस्तु के आयाम में हुए सापेक्ष परिवर्तन को दर्शाती है। हुक के नियम के अनुसार प्रत्यास्थ सीमा के भीतर प्रतिबल और विकृति एक-दूसरे के समानुपाती होते हैं।

इस अध्याय में Young’s Modulus, Shear Modulus और Bulk Modulus विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। बोर्ड परीक्षा के numericals में Y = FL/AΔL, G = Shear Stress/Shear Strain और K = −ΔP/(ΔV/V) जैसे सूत्रों का बार-बार उपयोग होता है।

अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक

Chapter 8 – गुरुत्वाकर्षण

Chapter 9 – ठोसों के यांत्रिक गुण

Chapter 10 – तरलों के यांत्रिक गुण

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 9 – ठोसों के यांत्रिक गुण की अच्छी तैयारी के लिए प्रत्यास्थता, प्रतिबल, विकृति और विभिन्न प्रत्यास्थता गुणांकों की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। इस अध्याय में formulas के साथ numerical practice भी महत्वपूर्ण है।

बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते समय Stress-Strain Curve, Hooke’s Law, Young’s Modulus, Shear Modulus और Bulk Modulus से संबंधित प्रश्नों तथा numericals का विशेष अभ्यास करें।

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