बिहार बोर्ड कक्षा 12 गृह विज्ञान का अध्याय “शरीर क्रिया विज्ञान एवं अंतःस्त्रावी प्रणाली” (Physiology and Endocrine System) मानव शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं, ग्रंथियों, अंतःस्त्रावी ग्रंथियों तथा हार्मोनों की भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं, बाह्यस्त्रावी एवं अंतःस्त्रावी ग्रंथियों तथा मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के कार्यों का अध्ययन किया जाता है।
अध्याय का नाम एवं संख्या
- अध्याय संख्या: अध्याय 1
- अध्याय का नाम: शरीर क्रिया विज्ञान एवं अंतःस्त्रावी प्रणाली
- English Title: Physiology and Endocrine System
- विषय: गृह विज्ञान (Home Science)
- कक्षा: 12वीं
अध्याय के सभी प्रमुख Topics
- मानवीय क्रियाएँ (Human Activities)
- ऐच्छिक क्रियाएँ (Voluntary Activities)
- अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Activities)
- ग्रंथि की अवधारणा एवं प्रकार (Glands – Concept and Classification)
- कोशिका से शरीर निर्माण का क्रम
- बाह्यस्त्रावी ग्रंथियां (Exocrine Glands)
- अंतःस्त्रावी ग्रंथियां (Endocrine Glands)
- मानव शरीर की 8 प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियां
- पीयूष ग्रंथि / पिट्यूटरी ग्रंथि
- थायरॉइड ग्रंथि
- अधिवृक्क / एड्रिनल ग्रंथि
- अग्नाशय ग्रंथि
- पैराथायरॉइड ग्रंथि
- थाइमस ग्रंथि
- पीनियल ग्रंथि
- जनन ग्रंथि
- हार्मोन एवं उनके प्रमुख कार्य
- हार्मोन निर्माण में प्रोटीन की भूमिका
- एस्ट्रोजन
- प्रोजेस्टेरोन
- रिलैक्सिन
- प्रोलैक्टिन
- टेस्टोस्टेरोन
- थायरोक्सिन
- इंसुलिन
- ग्लूकागोन
- सेरोटोनिन
- एड्रेनालीन
- महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु
- नेफ्रॉन
- न्यूरॉन
- मस्तिष्क का भार
- यकृत
- विटामिन D की हार्मोनल प्रकृति
1. अध्याय का परिचय (Introduction)
बिहार बोर्ड कक्षा 12 गृह विज्ञान का अध्याय “शरीर क्रिया विज्ञान एवं अंतःस्त्रावी प्रणाली” मानव शरीर की आंतरिक एवं बाह्य क्रियाओं के वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित है। मानव शरीर एक जटिल संरचना है, जिसमें प्रतिपल विभिन्न प्रकार की जैविक क्रियाएँ संचालित होती रहती हैं।
इस अध्याय में मुख्य रूप से ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं, ग्रंथियों के प्रकार तथा अंतःस्त्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित हार्मोनों की भूमिका का अध्ययन किया जाता है। मानव शरीर में वृद्धि, विकास, चयापचय, जनन, रक्त शर्करा नियंत्रण, तनाव प्रतिक्रिया तथा अन्य जैविक प्रक्रियाओं में हार्मोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अध्याय में मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों, उनके स्थान, स्रावित हार्मोनों और उनके प्रमुख कार्यों का अध्ययन भी किया गया है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे परिभाषा, अंतर, वस्तुनिष्ठ प्रश्न, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न तैयार किए जा सकते हैं।
2. अध्याय का सारांश (Chapter Summary)
मानव शरीर में होने वाली क्रियाओं को मुख्य रूप से ऐच्छिक क्रियाएँ और अनैच्छिक क्रियाएँ दो श्रेणियों में समझा जाता है। ऐच्छिक क्रियाएँ व्यक्ति की इच्छा के अनुसार की जाती हैं, जैसे चलना, दौड़ना, बोलना और पढ़ना। अनैच्छिक क्रियाएँ बिना इच्छा के स्वतः होती रहती हैं, जैसे हृदय का धड़कना, श्वसन और पाचन।
शरीर में विशिष्ट रसायनों का स्राव करने वाले विशेष ऊतक या अंग को ग्रंथि (Gland) कहा जाता है। ग्रंथियों को मुख्य रूप से बाह्यस्त्रावी ग्रंथि और अंतःस्त्रावी ग्रंथि में विभाजित किया जाता है। बाह्यस्त्रावी ग्रंथियां नलिका के माध्यम से अपना स्राव पहुंचाती हैं, जबकि अंतःस्त्रावी ग्रंथियां नलिका-विहीन होती हैं और अपने हार्मोन रक्त में छोड़ती हैं।
इस अध्याय में मानव शरीर की आठ प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों का अध्ययन किया गया है। इनमें पीयूष, थायरॉइड, अधिवृक्क, अग्नाशय, पैराथायरॉइड, थाइमस, पीनियल तथा जनन ग्रंथियां शामिल हैं। ये ग्रंथियां विभिन्न हार्मोन स्रावित करती हैं, जो शरीर के विकास, चयापचय, जनन, रक्त शर्करा, नींद, तनाव तथा अन्य जैविक कार्यों से संबंधित होते हैं।
3. अध्याय के मुख्य उद्देश्य / मुख्य बातें
- क्रियाओं का वर्गीकरण: ऐच्छिक तथा अनैच्छिक क्रियाओं के बीच अंतर और उनके नियंत्रण को समझना।
- ग्रंथियों का विभेदन: बाह्यस्त्रावी और अंतःस्त्रावी ग्रंथियों की विशेषताओं तथा कार्यों को समझना।
- अंतःस्त्रावी प्रणाली का ज्ञान: प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों, उनके स्थान तथा कार्यों का अध्ययन करना।
- हार्मोनल भूमिका: वृद्धि, विकास, प्रजनन, तनाव प्रबंधन तथा रक्त शर्करा नियंत्रण में हार्मोनों की भूमिका समझना।
- रोग एवं विकार: आयोडीन की कमी से घेंघा तथा इंसुलिन की कमी से मधुमेह जैसे उदाहरणों को समझना।
4. मानवीय क्रियाएँ (Human Activities)
मानव शरीर द्वारा की जाने वाली विभिन्न शारीरिक एवं जैविक गतिविधियों को मानवीय क्रियाएँ कहा जाता है। इन्हें मुख्य रूप से ऐच्छिक क्रियाएँ और अनैच्छिक क्रियाएँ में विभाजित किया जाता है।
4.1 ऐच्छिक क्रियाएँ (Voluntary Activities)
वे क्रियाएँ जिन्हें व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार संचालित करता है, ऐच्छिक क्रियाएँ कहलाती हैं। इन क्रियाओं पर तंत्रिका तंत्र तथा मस्तिष्क का नियंत्रण होता है।
उदाहरण: खाना खाना, चलना, दौड़ना, पढ़ना, लिखना और बोलना आदि।
- इन क्रियाओं को व्यक्ति अपनी इच्छा से करता है।
- इन पर तंत्रिका तंत्र का नियंत्रण होता है।
- इनकी गति को इच्छा के अनुसार बदला जा सकता है।
- पढ़ना, लिखना, दौड़ना और बोलना इसके उदाहरण हैं।
4.2 अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Activities)
वे क्रियाएँ जो व्यक्ति की इच्छा के बिना स्वतः होती रहती हैं, अनैच्छिक क्रियाएँ कहलाती हैं। अध्ययन स्रोत के अनुसार इनका संबंध हार्मोनल नियंत्रण से बताया गया है।
उदाहरण: हृदय का धड़कना, श्वसन, पाचन, पलकें झपकना तथा पसीना निकलना आदि।
- ये क्रियाएँ व्यक्ति की इच्छा के बिना होती हैं।
- इन्हें सामान्यतः अपनी इच्छा से रोकना या तेज करना संभव नहीं होता।
- हृदय की धड़कन, पाचन तथा श्वसन इसके उदाहरण हैं।
- हार्मोन इनसे संबंधित विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।
5. ग्रंथि की अवधारणा एवं प्रकार (Glands)
5.1 कोशिका से शरीर निर्माण का क्रम
शरीर की संरचना को समझने के लिए कोशिका से शरीर तक के क्रम को समझना आवश्यक है।
कोशिका (Cell) → ऊतक (Tissue) → अंग (Organ) → शरीर (Body)
अनेक कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं। विभिन्न ऊतक मिलकर अंगों का निर्माण करते हैं और अनेक अंग मिलकर शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं को संचालित करते हैं।
5.2 ग्रंथि की परिभाषा
शरीर का वह विशेष ऊतक, अंग या कोशिकाओं का समूह जो शरीर की जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक विशिष्ट रसायनों, जैसे एंजाइम, हार्मोन या अन्य तरल पदार्थों का स्राव करता है, ग्रंथि (Gland) कहलाता है।
5.3 बाह्यस्त्रावी ग्रंथि (Exocrine Gland)
वे ग्रंथियां जो अपने स्राव को नलिकाओं (Ducts) के माध्यम से शरीर की सतह या किसी विशिष्ट अंग तक पहुंचाती हैं, बाह्यस्त्रावी ग्रंथियां कहलाती हैं। इन्हें नलिका-युक्त ग्रंथियां भी कहा जाता है।
उदाहरण: पसीना ग्रंथि, लार ग्रंथि तथा जठर ग्रंथि।
- इनमें नलिकाएँ पाई जाती हैं।
- इनका स्राव नलिका के माध्यम से अपने लक्ष्य स्थान तक पहुंचता है।
- पसीना और लार जैसी ग्रंथियां इसके उदाहरण हैं।
5.4 अंतःस्त्रावी ग्रंथि (Endocrine Gland)
वे ग्रंथियां जिनमें नलिकाएं नहीं होतीं और जो अपने स्रावित हार्मोनों को सीधे रक्त में छोड़ती हैं, अंतःस्त्रावी ग्रंथियां कहलाती हैं। इन्हें नलिका-विहीन ग्रंथियां (Ductless Glands) भी कहा जाता है।
अध्याय के स्रोत के अनुसार मानव शरीर में प्रमुख रूप से आठ अंतःस्त्रावी ग्रंथियों का अध्ययन किया गया है।
6. मानव शरीर की 8 प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियां
6.1 पीयूष ग्रंथि / पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland)
पीयूष ग्रंथि मस्तिष्क के आधार भाग में हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) के नीचे स्थित होती है। इसका आकार मटर के दाने के समान बताया गया है।
इसे “मास्टर ग्रंथि (Master Gland)” कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की अन्य अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के कार्यों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रमुख कार्य:
- शरीर के विकास को नियंत्रित करना।
- हड्डियों और मांसपेशियों की वृद्धि में भूमिका निभाना।
- जल संतुलन से संबंधित कार्यों में भूमिका निभाना।
- रक्तचाप के नियमन में भूमिका निभाना।
- प्रोलैक्टिन के माध्यम से दुग्ध स्राव से संबंधित कार्य में भूमिका निभाना।
6.2 थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland)
थायरॉइड ग्रंथि गले के भाग में स्थित होती है। अध्ययन स्रोत में इसे मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्त्रावी ग्रंथि बताया गया है।
इससे थायरोक्सिन (Thyroxine) हार्मोन स्रावित होता है।
प्रमुख कार्य:
- शरीर के तापमान के नियमन में भूमिका।
- चयापचय (Metabolism) को नियंत्रित करने में भूमिका।
- हृदय की धड़कन से संबंधित कार्यों में भूमिका।
- आयोडीन से संबंधित जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका।
भोजन में आयोडीन की कमी से घेंघा (Goitre) रोग होने का उल्लेख अध्ययन स्रोत में किया गया है।
6.3 अधिवृक्क / एड्रिनल ग्रंथि (Adrenal Gland)
अधिवृक्क ग्रंथियां दोनों गुर्दों के ऊपरी सिरे पर स्थित होती हैं। इनके दो प्रमुख भाग बताए गए हैं—कॉर्टेक्स (Cortex) और मेडुला (Medulla)।
प्रमुख कार्य:
- तनावपूर्ण परिस्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया में सहायता करना।
- “Fight and Flight” प्रतिक्रिया से संबंधित कार्य करना।
- रक्तचाप तथा हृदय गति से संबंधित प्रक्रियाओं में भूमिका निभाना।
- शरीर के जल संतुलन से संबंधित कार्यों में भूमिका निभाना।
- जीवन रक्षक हार्मोन के स्राव से संबंधित कार्य करना।
6.4 अग्नाशय ग्रंथि (Pancreas)
अग्नाशय पेट अर्थात अमाशय के पीछे स्थित होता है। यह एक मिश्रित ग्रंथि (Mixed Gland) है क्योंकि यह बाह्यस्त्रावी तथा अंतःस्त्रावी दोनों प्रकार के कार्यों से संबंधित है।
अग्नाशय में कोशिकाओं के छोटे समूह पाए जाते हैं जिन्हें लैंगरहेंस की द्वीपिकाएं (Islets of Langerhans) कहा जाता है। इनके द्वारा इंसुलिन और ग्लूकागोन जैसे हार्मोन स्रावित होते हैं।
प्रमुख कार्य:
- रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भूमिका।
- कार्बोहाइड्रेट से संबंधित चयापचय में भूमिका।
- इंसुलिन तथा ग्लूकागोन का स्राव।
इंसुलिन की कमी को अध्ययन स्रोत में मधुमेह (Diabetes) से जोड़ा गया है।
6.5 पैराथायरॉइड ग्रंथि (Parathyroid Gland)
पैराथायरॉइड ग्रंथि गले में थायरॉइड ग्रंथि के पीछे स्थित होती है।
प्रमुख कार्य:
- शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करने में भूमिका।
- फास्फेट के स्तर के नियमन में भूमिका।
- कैल्शियम के उत्सर्जन को संतुलित करने में भूमिका।
- हड्डियों की मजबूती से संबंधित कार्यों में योगदान।
6.6 थाइमस ग्रंथि (Thymus Gland)
थाइमस ग्रंथि छाती की हड्डी के पीछे तथा हृदय के ऊपर स्थित होती है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) से संबंधित महत्वपूर्ण ग्रंथि है।
प्रमुख कार्य:
- रोग प्रतिरोधक क्षमता से संबंधित कार्यों में भूमिका।
- टी-कोशिकाओं (T-Cells) से संबंधित कार्य।
- संक्रमण से शरीर की रक्षा में योगदान।
6.7 पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland)
पीनियल ग्रंथि मस्तिष्क के मध्य भाग में स्थित होती है। इससे मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन स्रावित होता है।
मुख्य कार्य: मेलाटोनिन शरीर की नींद-जागने की प्रक्रिया तथा नींद के चक्र से संबंधित है।
6.8 जनन ग्रंथि (Gonads / Reproductive Glands)
जनन ग्रंथियां पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग होती हैं। पुरुषों में वृषण (Testes) तथा महिलाओं में अंडाशय (Ovaries) जनन ग्रंथियों से संबंधित हैं।
प्रमुख कार्य:
- जनन अंगों की वृद्धि एवं विकास में भूमिका।
- द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास में योगदान।
- जनन एवं प्रजनन संबंधी क्रियाओं का नियंत्रण।
7. हार्मोन एवं उनके प्रमुख कार्य (Hormones & Functions)
हार्मोन अंतःस्त्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। ये शरीर की विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। अध्ययन स्रोत के अनुसार हार्मोन निर्माण में प्रोटीन को महत्वपूर्ण पोषक तत्व बताया गया है।
7.1 एस्ट्रोजन (Estrogen)
एस्ट्रोजन एक प्रमुख महिला हार्मोन है जिसका स्राव अंडाशय से संबंधित है। इसे नारी विकास हार्मोन भी कहा गया है। यह किशोरावस्था में स्तन, गर्भाशय तथा योनि के विकास और मासिक धर्म से संबंधित प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।
7.2 प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)
प्रोजेस्टेरोन एक प्रमुख स्त्री हार्मोन है। अध्ययन स्रोत में इसके स्राव को कॉर्पस ल्यूटियम से संबंधित बताया गया है। यह शरीर को गर्भाधारण के लिए तैयार करने तथा मासिक चक्र के नियमन में भूमिका निभाता है।
7.3 रिलैक्सिन (Relaxin)
रिलैक्सिन प्रसव से संबंधित हार्मोन है। अध्ययन स्रोत के अनुसार यह श्रोणि क्षेत्र की संधियों और पेशियों को शिथिल करने में सहायता करता है, जिससे प्रसव की प्रक्रिया आसान होने में सहायता मिलती है।
7.4 प्रोलैक्टिन (Prolactin)
प्रोलैक्टिन पीयूष ग्रंथि से संबंधित हार्मोन है। इसका प्रमुख संबंध प्रसव के बाद दुग्ध उत्पादन और दुग्ध स्राव (Lactation) से है।
7.5 टेस्टोस्टेरोन (Testosterone)
टेस्टोस्टेरोन प्रमुख पुरुष हार्मोन है। यह पुरुषों में जनन अंगों तथा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास से संबंधित है।
7.6 थायरोक्सिन (Thyroxine)
थायरोक्सिन थायरॉइड ग्रंथि से स्रावित होता है। यह शरीर के चयापचय तथा तापमान से संबंधित प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
7.7 इंसुलिन एवं ग्लूकागोन (Insulin & Glucagon)
इंसुलिन और ग्लूकागोन अग्नाशय से संबंधित प्रमुख हार्मोन हैं। ये शरीर में रक्त शर्करा के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
7.8 सेरोटोनिन (Serotonin)
अध्ययन स्रोत में सेरोटोनिन को मनोदशा (Mood) और मानसिक संतुलन से संबंधित बताया गया है।
7.9 एड्रेनालीन (Adrenaline)
एड्रेनालीन आपातकालीन अथवा तनावपूर्ण परिस्थितियों में शरीर की “Fight and Flight” प्रतिक्रिया से संबंधित है। यह ऐसी परिस्थितियों में शरीर को प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने में भूमिका निभाता है।
8. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
- ऐच्छिक क्रियाएँ: वे क्रियाएँ जिन्हें व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार संचालित करता है और जिन पर तंत्रिका तंत्र का नियंत्रण होता है।
- अनैच्छिक क्रियाएँ: वे क्रियाएँ जो व्यक्ति की इच्छा के बिना स्वतः होती रहती हैं।
- ग्रंथि: शरीर का वह विशेष ऊतक, अंग या कोशिकाओं का समूह जो विशिष्ट रसायनों का स्राव करता है।
- बाह्यस्त्रावी ग्रंथि: नलिका युक्त ग्रंथि जो अपना स्राव नलिका के माध्यम से शरीर की सतह या किसी अंग तक पहुंचाती है।
- अंतःस्त्रावी ग्रंथि: नलिका-विहीन ग्रंथि जो अपने हार्मोन सीधे रक्त में स्रावित करती है।
- मास्टर ग्रंथि: पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहा जाता है क्योंकि यह अन्य अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- हार्मोन: अंतःस्त्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक जो शरीर की विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
- मिश्रित ग्रंथि: वह ग्रंथि जो बाह्यस्त्रावी और अंतःस्त्रावी दोनों प्रकार के कार्यों से संबंधित होती है। अग्नाशय इसका उदाहरण है।
- लैंगरहेंस की द्वीपिकाएं: अग्नाशय में पाए जाने वाले कोशिकाओं के समूह, जिनसे इंसुलिन तथा ग्लूकागोन जैसे हार्मोन संबंधित हैं।
- चयापचय (Metabolism): शरीर में होने वाली विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं का समग्र रूप।
9. महत्वपूर्ण तथ्य / बिंदु (Important Facts)
- मानव शरीर में अध्ययन के अनुसार 8 प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियां बताई गई हैं।
- स्वस्थ वयस्क मानव मस्तिष्क का भार स्रोत में 1.36 किग्रा बताया गया है।
- तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई को न्यूरॉन (Neuron) कहा जाता है।
- गुर्दे की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई को नेफ्रॉन (Nephron) कहा जाता है।
- थायरॉइड ग्रंथि को सबसे बड़ी अंतःस्त्रावी ग्रंथि के रूप में बताया गया है।
- समग्र रूप से शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत (Liver) है।
- अग्नाशय एक मिश्रित ग्रंथि है।
- हार्मोन निर्माण में प्रोटीन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।
- स्रोत में स्वस्थ मनुष्य के हृदय की औसत धड़कन 72 बार प्रति मिनट बताई गई है।
- सूर्य की पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से त्वचा में विटामिन D के निर्माण का उल्लेख है।
- विटामिन D को स्रोत में हार्मोन की प्रकृति से भी जोड़ा गया है।
- बाल्यकाल में विटामिन D की कमी से रिकेट्स (Rickets) होने का उल्लेख है।
- अधिवृक्क ग्रंथि जीवन रक्षक हार्मोन से संबंधित है।
10. तुलना/अंतर की तालिकाएँ
10.1 ऐच्छिक क्रियाएँ और अनैच्छिक क्रियाएँ में अंतर
| तुलना का आधार | ऐच्छिक क्रियाएँ | अनैच्छिक क्रियाएँ |
|---|---|---|
| परिभाषा | वे क्रियाएँ जिन्हें व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार करता है। | वे क्रियाएँ जो बिना इच्छा के स्वतः होती रहती हैं। |
| नियंत्रण | तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क से संबंधित नियंत्रण। | स्वतः होने वाली जैविक क्रियाएँ; अध्ययन स्रोत में इनके हार्मोनल नियंत्रण का उल्लेख है। |
| गति | इच्छा के अनुसार गति में परिवर्तन किया जा सकता है। | सामान्यतः स्वतः संचालित होती हैं। |
| उदाहरण | पढ़ना, लिखना, बोलना, चलना और दौड़ना। | हृदय की धड़कन, श्वसन, पाचन तथा पसीना निकलना। |
10.2 बाह्यस्त्रावी और अंतःस्त्रावी ग्रंथियों में अंतर
| तुलना का आधार | बाह्यस्त्रावी ग्रंथि | अंतःस्त्रावी ग्रंथि |
|---|---|---|
| नलिका | नलिका युक्त होती है। | नलिका-विहीन होती है। |
| स्राव का मार्ग | स्राव नलिका के माध्यम से पहुंचता है। | स्राव सीधे रक्त में छोड़ा जाता है। |
| स्राव | स्रोत में एंजाइम/अन्य स्राव से संबंधित बताया गया है। | हार्मोन स्रावित करती है। |
| उदाहरण | पसीना ग्रंथि, लार ग्रंथि और जठर ग्रंथि। | पीयूष, थायरॉइड, अधिवृक्क और पीनियल ग्रंथि आदि। |
11. उदाहरण और अनुप्रयोग (Examples and Applications)
- ऐच्छिक क्रियाएँ: परीक्षा में उत्तर लिखना, पढ़ना, चलना या मैदान में दौड़ना ऐच्छिक क्रियाओं के उदाहरण हैं।
- अनैच्छिक क्रियाएँ: सोते समय भी हृदय की धड़कन और श्वसन जैसी क्रियाएँ जारी रहती हैं।
- बाह्यस्त्रावी ग्रंथियां: गर्मी में शरीर से पसीना निकलना तथा भोजन देखने पर लार का स्राव होना इसके उदाहरण हैं।
- प्रसव एवं दुग्ध स्राव: रिलैक्सिन प्रसव से संबंधित प्रक्रियाओं में तथा प्रोलैक्टिन दुग्ध उत्पादन से संबंधित है।
- आपातकालीन स्थिति: एड्रेनालीन तनावपूर्ण परिस्थितियों में शरीर की Fight and Flight प्रतिक्रिया से संबंधित है।
- नींद का चक्र: पीनियल ग्रंथि से संबंधित मेलाटोनिन नींद-जागने के चक्र से जुड़ा है।
12. महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terms)
- Nutrients: पोषक तत्व
- Nervous System: तंत्रिका तंत्र
- Exocrine Gland: बाह्यस्त्रावी ग्रंथि
- Endocrine Gland: अंतःस्त्रावी ग्रंथि
- Pituitary Gland: पीयूष ग्रंथि
- Thyroid Gland: थायरॉइड ग्रंथि
- Adrenal Gland: अधिवृक्क ग्रंथि
- Pancreas: अग्नाशय
- Islets of Langerhans: लैंगरहेंस की द्वीपिकाएं
- Metabolism: चयापचय
- Prolactin: प्रोलैक्टिन
- Melatonin: मेलाटोनिन
- Serotonin: सेरोटोनिन
- Insulin: इंसुलिन
- Glucagon: ग्लूकागोन
- Adrenaline: एड्रेनालीन
13. Objective Questions / MCQs
प्रश्न 1: मानव शरीर की किस ग्रंथि को ‘मास्टर ग्रंथि’ कहा जाता है?
(A) थायरॉइड ग्रंथि
(B) अधिवृक्क ग्रंथि
(C) पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)
(D) अग्नाशय ग्रंथि
सही उत्तर: (C) पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)
व्याख्या: पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की अन्य अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के कार्यों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 2: थायरोक्सिन नामक हार्मोन किस ग्रंथि द्वारा स्रावित होता है?
(A) पीयूष ग्रंथि
(B) थायरॉइड ग्रंथि
(C) अधिवृक्क ग्रंथि
(D) थाइमस ग्रंथि
सही उत्तर: (B) थायरॉइड ग्रंथि
व्याख्या: थायरॉइड ग्रंथि गले में स्थित होती है और इससे थायरोक्सिन हार्मोन संबंधित है। यह चयापचय तथा शरीर के तापमान से संबंधित प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।
प्रश्न 3: इंसुलिन हार्मोन की कमी से कौन-सा रोग संबंधित है?
(A) घेंघा
(B) रिकेट्स
(C) मधुमेह
(D) एनीमिया
सही उत्तर: (C) मधुमेह (Diabetes)
व्याख्या: इंसुलिन अग्नाशय से संबंधित हार्मोन है और रक्त शर्करा के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्रोत में इसकी कमी को मधुमेह से जोड़ा गया है।
प्रश्न 4: मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्त्रावी ग्रंथि कौन-सी है?
(A) अग्नाशय
(B) यकृत
(C) थायरॉइड ग्रंथि
(D) पीनियल ग्रंथि
सही उत्तर: (C) थायरॉइड ग्रंथि
व्याख्या: दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार थायरॉइड ग्रंथि को मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतःस्त्रावी ग्रंथि बताया गया है।
प्रश्न 5: गुर्दे की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई क्या कहलाती है?
(A) न्यूरॉन
(B) नेफ्रॉन
(C) कोशिका
(D) ऊतक
सही उत्तर: (B) नेफ्रॉन (Nephron)
व्याख्या: नेफ्रॉन गुर्दे की कार्यात्मक इकाई है।
प्रश्न 6: प्रसव से संबंधित हार्मोन कौन-सा है?
(A) प्रोलैक्टिन
(B) रिलैक्सिन
(C) मेलाटोनिन
(D) थायरोक्सिन
सही उत्तर: (B) रिलैक्सिन (Relaxin)
व्याख्या: अध्ययन स्रोत में रिलैक्सिन को प्रसव से संबंधित हार्मोन बताया गया है तथा प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाने में इसकी भूमिका का उल्लेख है।
प्रश्न 7: मेलाटोनिन हार्मोन किस ग्रंथि से संबंधित है?
(A) थाइमस ग्रंथि
(B) पैराथायरॉइड ग्रंथि
(C) पीनियल ग्रंथि
(D) जनन ग्रंथि
सही उत्तर: (C) पीनियल ग्रंथि
व्याख्या: पीनियल ग्रंथि से मेलाटोनिन हार्मोन संबंधित है और यह नींद-जागने के चक्र में भूमिका निभाता है।
प्रश्न 8: स्वस्थ वयस्क मानव मस्तिष्क का भार कितना बताया गया है?
(A) 1.10 किग्रा
(B) 1.36 किग्रा
(C) 1.50 किग्रा
(D) 2.00 किग्रा
सही उत्तर: (B) 1.36 किग्रा
व्याख्या: दिए गए अध्ययन स्रोत में स्वस्थ वयस्क मानव मस्तिष्क का भार 1.36 किलोग्राम बताया गया है।
14. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: ऐच्छिक क्रियाएँ किस तंत्र द्वारा नियंत्रित होती हैं?
उत्तर: ऐच्छिक क्रियाएँ तंत्रिका तंत्र तथा मस्तिष्क के नियंत्रण से संबंधित होती हैं।
प्रश्न 2: बाह्यस्त्रावी ग्रंथि क्या है?
उत्तर: नलिका के माध्यम से अपना स्राव शरीर की सतह या किसी अंग तक पहुंचाने वाली ग्रंथि को बाह्यस्त्रावी ग्रंथि कहते हैं।
प्रश्न 3: आयोडीन की कमी से कौन-सा रोग होता है?
उत्तर: अध्ययन स्रोत के अनुसार आयोडीन की कमी से घेंघा (Goitre) रोग हो सकता है।
प्रश्न 4: मानव शरीर की मिश्रित ग्रंथि का नाम लिखिए।
उत्तर: अग्नाशय (Pancreas) को मिश्रित ग्रंथि बताया गया है।
प्रश्न 5: हार्मोन निर्माण में कौन-सा पोषक तत्व महत्वपूर्ण बताया गया है?
उत्तर: अध्ययन स्रोत के अनुसार हार्मोन निर्माण में प्रोटीन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।
15. लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: बाह्यस्त्रावी और अंतःस्त्रावी ग्रंथियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाह्यस्त्रावी तथा अंतःस्त्रावी ग्रंथियों में प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:
- बाह्यस्त्रावी ग्रंथियां नलिका युक्त होती हैं, जबकि अंतःस्त्रावी ग्रंथियां नलिका-विहीन होती हैं।
- बाह्यस्त्रावी ग्रंथियों का स्राव नलिकाओं के माध्यम से पहुंचता है, जबकि अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के हार्मोन सीधे रक्त में छोड़े जाते हैं।
- पसीना तथा लार ग्रंथियां बाह्यस्त्रावी ग्रंथियों के उदाहरण हैं, जबकि पीयूष और थायरॉइड अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के उदाहरण हैं।
प्रश्न 2: पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि क्यों कहा जाता है?
उत्तर: पीयूष ग्रंथि मस्तिष्क के आधार में हाइपोथैलेमस के नीचे स्थित होती है। इसे मास्टर ग्रंथि कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की अन्य अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के कार्यों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शरीर की वृद्धि, विकास, जल संतुलन तथा अन्य हार्मोनल प्रक्रियाओं से संबंधित कार्यों में भी योगदान करती है।
प्रश्न 3: अग्नाशय ग्रंथि के कार्य तथा इंसुलिन का महत्व समझाइए।
उत्तर: अग्नाशय पेट के पीछे स्थित एक मिश्रित ग्रंथि है। इसके लैंगरहेंस की द्वीपिकाओं से इंसुलिन और ग्लूकागोन जैसे हार्मोन संबंधित हैं। इंसुलिन रक्त शर्करा के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययन स्रोत में इंसुलिन की कमी को मधुमेह से जोड़ा गया है।
प्रश्न 4: महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख हार्मोनों के नाम एवं कार्य लिखिए।
उत्तर:
- एस्ट्रोजन: महिला जनन अंगों तथा लैंगिक विकास से संबंधित।
- प्रोजेस्टेरोन: गर्भाधारण तथा मासिक चक्र से संबंधित।
- रिलैक्सिन: प्रसव प्रक्रिया से संबंधित।
- प्रोलैक्टिन: प्रसव के बाद दुग्ध उत्पादन एवं स्राव से संबंधित।
16. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों की स्थिति, हार्मोन एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मानव शरीर में अध्ययन स्रोत के अनुसार आठ प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों का वर्णन किया गया है। ये नलिका-विहीन ग्रंथियां हैं और हार्मोन से संबंधित कार्य करती हैं।
- पीयूष ग्रंथि: मस्तिष्क के आधार में स्थित होती है। इसे मास्टर ग्रंथि कहा जाता है। यह वृद्धि, विकास तथा अन्य अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- थायरॉइड ग्रंथि: गले में स्थित होती है और थायरोक्सिन हार्मोन से संबंधित है। यह चयापचय तथा शरीर के तापमान से संबंधित कार्यों में भूमिका निभाती है।
- अधिवृक्क ग्रंथि: गुर्दों के ऊपर स्थित होती है। इसके कॉर्टेक्स और मेडुला भाग होते हैं। यह तनाव तथा Fight and Flight प्रतिक्रिया से संबंधित कार्य करती है।
- अग्नाशय: पेट के पीछे स्थित मिश्रित ग्रंथि है। इससे इंसुलिन तथा ग्लूकागोन जैसे हार्मोन संबंधित हैं और यह रक्त शर्करा के नियमन में भूमिका निभाता है।
- पैराथायरॉइड ग्रंथि: थायरॉइड के पीछे स्थित होती है और कैल्शियम तथा फास्फेट के नियमन से संबंधित है।
- थाइमस ग्रंथि: छाती में स्थित होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा T-कोशिकाओं से संबंधित कार्य करती है।
- पीनियल ग्रंथि: मस्तिष्क के मध्य भाग में स्थित होती है। इससे मेलाटोनिन संबंधित है, जो नींद-जागने के चक्र में भूमिका निभाता है।
- जनन ग्रंथियां: पुरुषों में वृषण और महिलाओं में अंडाशय जनन ग्रंथियों से संबंधित हैं। ये जनन तथा लैंगिक विकास से संबंधित हार्मोनल कार्यों में भूमिका निभाती हैं।
प्रश्न 2: ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: मानव शरीर में विभिन्न प्रकार की क्रियाएँ होती हैं। इनमें ऐच्छिक क्रियाएँ वे हैं जिन्हें व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार करता है, जैसे चलना, दौड़ना, बोलना और लिखना। दूसरी ओर, अनैच्छिक क्रियाएँ बिना व्यक्ति की इच्छा के स्वतः होती रहती हैं, जैसे हृदय का धड़कना, श्वसन तथा पाचन।
अंतःस्त्रावी ग्रंथियों से स्रावित हार्मोन शरीर की अनेक अनैच्छिक जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, एड्रेनालीन तनावपूर्ण स्थिति में शरीर की प्रतिक्रिया से संबंधित है, इंसुलिन रक्त शर्करा के नियमन में भूमिका निभाता है और मेलाटोनिन नींद-जागने के चक्र से संबंधित है।
17. परीक्षा में पूछे जा सकने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- मास्टर ग्रंथि किसे कहा जाता है?
- तंत्रिका तंत्र की कार्यात्मक इकाई क्या है?
- गुर्दे की कार्यात्मक इकाई का नाम लिखिए।
- स्वस्थ वयस्क मानव मस्तिष्क का भार कितना बताया गया है?
- इंसुलिन किस ग्रंथि से संबंधित है?
- थायरोक्सिन किस ग्रंथि से संबंधित है?
- मेलाटोनिन किस ग्रंथि से संबंधित है?
- मिश्रित ग्रंथि का एक उदाहरण दीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- ऐच्छिक और अनैच्छिक क्रियाओं में अंतर बताइए।
- बाह्यस्त्रावी और अंतःस्त्रावी ग्रंथियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि क्यों कहा जाता है?
- थायरॉइड ग्रंथि के प्रमुख कार्य लिखिए।
- अग्नाशय को मिश्रित ग्रंथि क्यों कहा जाता है?
- अधिवृक्क ग्रंथि के प्रमुख कार्य लिखिए।
- पैराथायरॉइड ग्रंथि का क्या कार्य है?
- थाइमस ग्रंथि का क्या महत्व है?
- पीनियल ग्रंथि और मेलाटोनिन के संबंध को समझाइए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों की स्थिति, हार्मोन तथा कार्यों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
- ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं को उदाहरण सहित समझाइए।
- बाह्यस्त्रावी तथा अंतःस्त्रावी ग्रंथियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- अग्नाशय ग्रंथि के कार्य तथा इंसुलिन के महत्व का वर्णन कीजिए।
- महिला जनन से संबंधित प्रमुख हार्मोनों के नाम एवं कार्य लिखिए।
- मानव शरीर में हार्मोनों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
18. Quick Revision Notes
- ऐच्छिक क्रियाएँ: इच्छा के अनुसार की जाने वाली क्रियाएँ, जैसे पढ़ना, लिखना और दौड़ना।
- अनैच्छिक क्रियाएँ: बिना इच्छा के स्वतः होने वाली क्रियाएँ, जैसे हृदय की धड़कन और पाचन।
- ग्रंथि: विशिष्ट रसायनों का स्राव करने वाला विशेष ऊतक या अंग।
- बाह्यस्त्रावी ग्रंथि: नलिका युक्त ग्रंथि।
- अंतःस्त्रावी ग्रंथि: नलिका-विहीन ग्रंथि जो हार्मोन रक्त में छोड़ती है।
- पीयूष ग्रंथि: मास्टर ग्रंथि।
- थायरॉइड: थायरोक्सिन से संबंधित ग्रंथि; आयोडीन की कमी से घेंघा होने का उल्लेख है।
- अधिवृक्क: गुर्दों के ऊपर स्थित; Fight and Flight प्रतिक्रिया से संबंधित।
- अग्नाशय: मिश्रित ग्रंथि; इंसुलिन और ग्लूकागोन से संबंधित।
- पैराथायरॉइड: कैल्शियम और फास्फेट के नियमन से संबंधित।
- थाइमस: प्रतिरक्षा और T-कोशिकाओं से संबंधित।
- पीनियल: मेलाटोनिन तथा नींद-जागने के चक्र से संबंधित।
- जनन ग्रंथियां: वृषण तथा अंडाशय।
- नेफ्रॉन: गुर्दे की कार्यात्मक इकाई।
- न्यूरॉन: तंत्रिका तंत्र की कार्यात्मक इकाई।
- मस्तिष्क का भार: स्रोत में 1.36 किग्रा बताया गया है।
- विटामिन D: सूर्य की UV किरणों के प्रभाव से त्वचा में बनने का उल्लेख है और इसे हार्मोन की प्रकृति से भी जोड़ा गया है।
19. महत्वपूर्ण Topics
इस अध्याय की तैयारी करते समय निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहेगा:
- पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland / Master Gland) की स्थिति और कार्य।
- थायरॉइड ग्रंथि एवं थायरोक्सिन तथा आयोडीन की कमी से संबंधित तथ्य।
- अग्नाशय, इंसुलिन और मधुमेह का संबंध।
- एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, रिलैक्सिन और प्रोलैक्टिन के कार्य।
- ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं में अंतर।
- बाह्यस्त्रावी एवं अंतःस्त्रावी ग्रंथियों में अंतर।
- आठ प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों के नाम, स्थान और कार्य।
- नेफ्रॉन, न्यूरॉन और मस्तिष्क के भार से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य।
20. अध्याय का निष्कर्ष (Conclusion)
“शरीर क्रिया विज्ञान एवं अंतःस्त्रावी प्रणाली” अध्याय मानव शरीर की विभिन्न क्रियाओं तथा अंतःस्त्रावी ग्रंथियों की भूमिका को समझने में महत्वपूर्ण है। इस अध्याय में ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं, ग्रंथियों के प्रकार, आठ प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियों तथा उनसे संबंधित हार्मोनों का अध्ययन किया गया है।
पीयूष, थायरॉइड, अधिवृक्क, अग्नाशय, पैराथायरॉइड, थाइमस, पीनियल तथा जनन ग्रंथियां शरीर की विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं से संबंधित हैं। इसी प्रकार इंसुलिन, थायरोक्सिन, प्रोलैक्टिन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, रिलैक्सिन, टेस्टोस्टेरोन, मेलाटोनिन और एड्रेनालीन जैसे हार्मोन शरीर के अलग-अलग कार्यों में भूमिका निभाते हैं।
बिहार बोर्ड कक्षा 12 गृह विज्ञान की परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को इस अध्याय की परिभाषाएँ, ग्रंथियों के प्रकार, आठ प्रमुख अंतःस्त्रावी ग्रंथियां, हार्मोन एवं उनके कार्य, अंतर की तालिकाएँ, MCQs तथा लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अच्छी तरह तैयार करने चाहिए।