बिहार बोर्ड कक्षा 12 गृह विज्ञान अध्याय 2 – पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र में मानव प्रजनन तंत्र, पुरुष एवं स्त्री जनन अंगों की संरचना, जनन हार्मोन, शुक्राणु एवं अंडाणु, मासिक धर्म चक्र, निषेचन, भ्रूण विकास, प्लेसेंटा, दुग्ध स्राव, गुणसूत्र द्वारा लिंग निर्धारण तथा परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय मानव जीवन, प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन की मूलभूत अवधारणाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
अध्याय संबंधी सूचना: बिहार बोर्ड Class 12 Home Science Chapter 2 के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पाठ्यपुस्तक या विभिन्न स्रोतों में अध्याय क्रमांक में अंतर हो सकता है, इसलिए विद्यार्थियों को अपने विद्यालय/बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम से भी अध्याय क्रम की पुष्टि करनी चाहिए।
अध्याय के सभी प्रमुख Topics
- जीवों में प्रजनन एवं मानव जनन की विशेषताएँ
- किशोरावस्था एवं द्वितीयक लैंगिक लक्षण
- पुरुष प्रजनन तंत्र की संरचना एवं अंग
- शुक्राणु की संरचना एवं जीवनकाल
- स्त्री प्रजनन तंत्र की संरचना एवं अंग
- मासिक धर्म चक्र एवं ओवुलेशन
- स्तन/दुग्ध ग्रंथियों का विकास एवं दुग्ध स्राव
- निषेचन एवं भ्रूण का विकास
- प्लेसेंटा की संरचना एवं कार्य
- गुणसूत्र एवं लिंग निर्धारण
- परिवार नियोजन एवं गर्भनिरोधक उपाय
1. अध्याय का परिचय
प्रकृति के नियमानुसार पृथ्वी पर उपस्थित जीव-जंतुओं में अपने समान नई संतान उत्पन्न करने की क्षमता पाई जाती है। इसी प्रक्रिया को प्रजनन (Reproduction) कहा जाता है। विभिन्न जीवों में प्रजनन की विधियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। मानव में प्रजनन मुख्य रूप से पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र के माध्यम से होता है।
मनुष्य एक विकसित एवं सामाजिक प्राणी है। मानव प्रजनन में पुरुष जनन कोशिका अर्थात् शुक्राणु (Sperm) तथा स्त्री जनन कोशिका अर्थात् अंडाणु (Ovum) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शुक्राणु और अंडाणु के संलयन से युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है, जो आगे चलकर भ्रूण के रूप में विकसित होता है।
इस अध्याय में पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र की संरचना, उनके प्रमुख अंगों के कार्य, जनन हार्मोन, मासिक धर्म चक्र, ओवुलेशन, निषेचन, भ्रूण विकास, प्लेसेंटा, स्तन ग्रंथियों एवं दुग्ध स्राव तथा परिवार नियोजन की प्रमुख विधियों का अध्ययन किया जाता है।
2. अध्याय का सारांश
मानव प्रजनन तंत्र पुरुष एवं स्त्री दोनों में अलग-अलग संरचना वाला होता है। पुरुष प्रजनन तंत्र में मुख्य रूप से वृषण, अंडकोष, शुक्रवाहिनी, शुक्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, कॉपर ग्रंथि, मूत्रमार्ग तथा लिंग शामिल होते हैं। वृषण में शुक्राणुओं का निर्माण तथा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है।
स्त्री प्रजनन तंत्र में अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा तथा योनि प्रमुख अंग हैं। अंडाशय अंडाणु का निर्माण करते हैं तथा एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्राव करते हैं।
पुरुष के शुक्राणु और स्त्री के अंडाणु के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहा जाता है। निषेचन के बाद युग्मनज बनता है और आगे चलकर गर्भाशय में भ्रूण का विकास होता है। भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन पहुँचाने में प्लेसेंटा (Placenta) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रसव के बाद स्तन ग्रंथियों से दुग्ध उत्पादन में प्रोलैक्टिन तथा दूध को बाहर निकालने में ऑक्सीटोसिन की भूमिका बताई जाती है। प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम (Colostrum) कहलाता है।
3. अध्याय के मुख्य उद्देश्य
- पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र की संरचना को समझना।
- पुरुष एवं स्त्री के प्रमुख जनन हार्मोनों के कार्यों को जानना।
- शुक्राणु और अंडाणु की संरचना एवं विशेषताओं का अध्ययन करना।
- मासिक धर्म चक्र एवं ओवुलेशन की प्रक्रिया को समझना।
- निषेचन, युग्मनज तथा भ्रूण विकास की प्रक्रिया को समझना।
- प्लेसेंटा की भूमिका एवं भ्रूण के पोषण को समझना।
- दुग्ध ग्रंथियों के विकास एवं दुग्ध स्राव की प्रक्रिया को जानना।
- गुणसूत्रों द्वारा लिंग निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझना।
- परिवार नियोजन एवं गर्भनिरोधक उपायों की जानकारी प्राप्त करना।
4. जीवों में प्रजनन एवं मानव जनन
प्रजनन की परिभाषा
प्रजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीव अपने समान नई संतान उत्पन्न करता है। यह जीवों की निरंतरता एवं वंशवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
मानव प्रजनन की विशेषताएँ
- मानव में प्रजनन पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र की सहायता से होता है।
- पुरुष में शुक्राणु तथा स्त्री में अंडाणु जनन कोशिकाएँ होती हैं।
- शुक्राणु एवं अंडाणु के मिलने से युग्मनज का निर्माण होता है।
- युग्मनज आगे विकसित होकर भ्रूण का रूप लेता है।
- भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है।
5. किशोरावस्था एवं द्वितीयक लैंगिक लक्षण
किशोरावस्था में बालक एवं बालिकाओं के शरीर में अनेक शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तन होने लगते हैं। यौवनारंभ के बाद पुरुष एवं स्त्री में अलग-अलग द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित होते हैं।
बालकों में प्रमुख परिवर्तन
- चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ का विकास।
- आवाज में भारीपन।
- कंधों का चौड़ा होना।
- वृषण एवं लिंग का विकास।
- शुक्राणु निर्माण की शुरुआत।
बालिकाओं में प्रमुख परिवर्तन
- स्तनों के आकार में वृद्धि।
- आवाज में परिवर्तन।
- श्रोणि प्रदेश का चौड़ा होना।
- मासिक धर्म चक्र की शुरुआत।
- अंडाणु परिपक्व होने की प्रक्रिया शुरू होना।
6. पुरुष प्रजनन तंत्र
पुरुष प्रजनन तंत्र में विभिन्न अंग एवं ग्रंथियाँ मिलकर कार्य करते हैं। इसका प्रमुख कार्य शुक्राणुओं का निर्माण, उनका परिवहन तथा पुरुष जनन हार्मोन का स्राव करना है।
पुरुष प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंग
- वृषण (Testes): वृषण पुरुष के प्राथमिक जनन अंग हैं। इनमें शुक्राणुओं का निर्माण तथा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है।
- अंडकोष (Scrotum): यह त्वचा की थैली होती है जिसमें वृषण स्थित होते हैं। यह शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक तापमान बनाए रखने में सहायता करता है।
- शुक्रवाहिनी (Vas Deferens): यह शुक्राणुओं को आगे ले जाने वाली नली है।
- शुक्राशय (Seminal Vesicle): यह शुक्राणुओं को पोषण देने वाले तरल का स्राव करता है।
- प्रोस्टेट ग्रंथि: यह वीर्य में तरल पदार्थ मिलाने में सहायता करती है।
- कॉपर ग्रंथि (Cowper’s Gland): यह पारदर्शी एवं चिपचिपा स्राव उत्पन्न करती है।
- मूत्रमार्ग (Urethra): यह मूत्र तथा वीर्य के शरीर से बाहर निकलने का मार्ग है।
- लिंग (Penis): यह पुरुष का बाह्य जनन अंग है।
7. शुक्राणु की संरचना
शुक्राणु (Sperm) पुरुष की नर जनन कोशिका है। यह सूक्ष्म एवं गतिशील कोशिका होती है। इसके मुख्यतः तीन भाग बताए जाते हैं।
शुक्राणु के तीन प्रमुख भाग
- सिर (Head): इसमें केंद्रक तथा आनुवंशिक पदार्थ पाया जाता है।
- मध्य भाग (Middle Piece): इसमें माइटोकॉन्ड्रिया पाए जाते हैं, जो गति के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
- पूँछ (Tail): यह शुक्राणु को आगे बढ़ने में सहायता करती है।
8. स्त्री प्रजनन तंत्र
स्त्री प्रजनन तंत्र में बाह्य एवं आंतरिक जनन अंग शामिल होते हैं। इसका प्रमुख कार्य अंडाणु का निर्माण, निषेचन के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना तथा गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास में सहायता करना है।
स्त्री प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंग
- अंडाशय (Ovaries): सामान्यतः दो अंडाशय होते हैं। इनमें अंडाणु बनते हैं तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है।
- फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tubes): ये अंडाशय से गर्भाशय की ओर जाने वाली नलिकाएँ हैं। निषेचन की प्रक्रिया सामान्यतः इसी क्षेत्र में होती है।
- गर्भाशय (Uterus): यह वह अंग है जहाँ गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का विकास होता है।
- गर्भाशय ग्रीवा (Cervix): यह गर्भाशय का निचला संकरा भाग है।
- योनि (Vagina): यह गर्भाशय ग्रीवा को बाह्य जनन क्षेत्र से जोड़ने वाला पेशीय मार्ग है।
9. मासिक धर्म चक्र एवं ओवुलेशन
महिलाओं में किशोरावस्था के बाद मासिक धर्म चक्र प्रारंभ होता है। स्रोत सामग्री के अनुसार सामान्य मासिक धर्म चक्र को लगभग 28 दिनों का बताया गया है। इस चक्र में अंडाणु के विकास एवं ओवुलेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ओवुलेशन
ओवुलेशन (Ovulation) वह प्रक्रिया है जिसमें परिपक्व अंडाणु अंडाशय से बाहर निकलता है। दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार 28 दिवसीय चक्र में ओवुलेशन लगभग 14वें दिन होता है।
मासिक धर्म चक्र के प्रमुख चरण
| समय | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 1–4 दिन | मासिक स्राव का चरण |
| 5–13 दिन | अंडाणु की परिपक्वता का चरण |
| 14वाँ दिन | ओवुलेशन |
| 14–22 दिन | निषेचन की संभावना वाला चरण |
| 22–24 दिन | निषेचन न होने पर अंडाणु का नष्ट होना |
| लगभग 28वाँ दिन | गर्भाशय की भीतरी परत का टूटकर बाहर निकलना |
रजोनिवृत्ति
महिलाओं में मासिक धर्म का स्थायी रूप से बंद हो जाना रजोनिवृत्ति (Menopause) कहलाता है।
10. स्तन ग्रंथियों का विकास एवं दुग्ध स्राव
स्तन ग्रंथियों का विकास विभिन्न चरणों में हार्मोनल प्रभावों से होता है। किशोरावस्था में एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन स्तन ग्रंथियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दुग्ध स्राव में प्रमुख हार्मोन
- प्रोलैक्टिन: दुग्ध उत्पादन को सक्रिय करने में सहायता करता है।
- ऑक्सीटोसिन: दूध को दुग्ध नलिकाओं से निप्पल की ओर बाहर निकालने में सहायता करता है।
कोलेस्ट्रम
प्रसव के तुरंत बाद स्तन से निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम (Colostrum) कहलाता है। यह नवजात शिशु के लिए महत्वपूर्ण पोषण एवं प्रतिरक्षात्मक घटक प्रदान करता है।
11. निषेचन एवं भ्रूण का विकास
निषेचन क्या है?
पुरुष के शुक्राणु और स्त्री के अंडाणु के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहा जाता है। अध्ययन स्रोत के अनुसार यह प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में होती है।
युग्मनज का निर्माण
निषेचन के परिणामस्वरूप बनने वाली प्रारंभिक द्विगुणित कोशिका को युग्मनज (Zygote) कहा जाता है। यह आगे विभाजित होकर विकसित होती है।
प्रत्यारोपण
स्रोत सामग्री के अनुसार निषेचन के लगभग 5 से 7 दिन बाद विकसित युग्मनज गर्भाशय की आंतरिक परत अर्थात् एंडोमेट्रियम में स्थापित होता है। इस प्रक्रिया को प्रत्यारोपण (Implantation) कहा जाता है।
भ्रूण विकास
गर्भाशय में भ्रूण का विकास होता है और मानव गर्भावस्था की अवधि लगभग 9 माह या 280 दिन बताई जाती है। इसके बाद प्रसव द्वारा शिशु का जन्म होता है।
12. प्लेसेंटा के कार्य
प्लेसेंटा (Placenta) गर्भावस्था के दौरान माता और भ्रूण के बीच पोषक पदार्थों तथा गैसों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्लेसेंटा के प्रमुख कार्य
- माता के रक्त से भ्रूण तक ऑक्सीजन पहुँचाने में सहायता करना।
- भ्रूण तक आवश्यक पोषक तत्व पहुँचाना।
- भ्रूण से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने में सहायता करना।
- भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थों को माता के परिसंचरण तंत्र तक पहुँचाने में सहायता करना।
13. गुणसूत्र एवं लिंग निर्धारण
मानव कोशिकाओं में सामान्यतः 23 जोड़े अर्थात् कुल 46 गुणसूत्र पाए जाते हैं। इनमें एक जोड़ा लिंग निर्धारण से संबंधित होता है।
| लिंग | लिंग गुणसूत्र |
|---|---|
| स्त्री | XX |
| पुरुष | XY |
स्त्री का अंडाणु सामान्यतः X गुणसूत्र लेकर चलता है। पुरुष के शुक्राणु X अथवा Y गुणसूत्र लेकर चल सकते हैं।
- X गुणसूत्र वाला शुक्राणु + X अंडाणु = XX
- Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु + X अंडाणु = XY
महत्वपूर्ण: जैविक लिंग निर्धारण में X या Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु की भूमिका के कारण संतान के XX या XY संयोजन का निर्धारण निषेचन के समय होता है।
14. परिवार नियोजन
परिवार नियोजन (Family Planning) का उद्देश्य दंपति को अपनी इच्छा एवं परिस्थितियों के अनुसार संतान की संख्या तथा जन्म के बीच अंतर के संबंध में निर्णय लेने में सहायता करना है।
प्रमुख गर्भनिरोधक विधियाँ
- IUCD: आंतर गर्भाशयी उपकरण।
- ओरल पिल्स: गर्भनिरोधक गोलियाँ।
- गर्भनिरोधक इंजेक्शन।
- इमरजेंसी पिल्स।
- पुरुष नसबंदी (Vasectomy): शुक्रवाहिनी को अवरुद्ध करने की शल्य प्रक्रिया।
- स्त्री नसबंदी (Tubectomy): फैलोपियन ट्यूब को अवरुद्ध करने की शल्य प्रक्रिया।
15. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- प्रजनन: वह जैविक प्रक्रिया जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतान उत्पन्न करता है।
- शुक्राणु: पुरुष की नर जनन कोशिका।
- अंडाणु: स्त्री की मादा जनन कोशिका।
- निषेचन: शुक्राणु और अंडाणु के संलयन की प्रक्रिया।
- युग्मनज: निषेचन के बाद बनने वाली प्रारंभिक द्विगुणित कोशिका।
- भ्रूण: गर्भाशय में विकसित हो रहा प्रारंभिक जीव।
- एंडोमेट्रियम: गर्भाशय की आंतरिक परत।
- प्लेसेंटा: गर्भावस्था में माता एवं भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करने वाली संरचना।
- ओवुलेशन: अंडाशय से परिपक्व अंडाणु के बाहर निकलने की प्रक्रिया।
- रजोनिवृत्ति: मासिक धर्म के स्थायी रूप से बंद होने की अवस्था।
- कोलेस्ट्रम: प्रसव के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध।
- नसबंदी: शल्य प्रक्रिया द्वारा प्रजनन क्षमता को स्थायी रूप से रोकने की विधि।
16. महत्वपूर्ण तथ्य
- पुरुष का प्रमुख जनन हार्मोन टेस्टोस्टेरोन है।
- स्त्री के प्रमुख जनन हार्मोन एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन हैं।
- दुग्ध उत्पादन में प्रोलैक्टिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- दूध बाहर निकालने में ऑक्सीटोसिन की भूमिका होती है।
- निषेचन का स्थान फैलोपियन ट्यूब बताया जाता है।
- भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है।
- अध्ययन स्रोत के अनुसार प्रत्यारोपण लगभग 5–7 दिन बाद होता है।
- मानव गर्भावधि लगभग 9 माह या 280 दिन बताई जाती है।
- मासिक धर्म चक्र सामान्यतः 28 दिन का बताया जाता है।
- ओवुलेशन लगभग 14वें दिन बताया जाता है।
- मानव में कुल 46 गुणसूत्र या 23 जोड़े होते हैं।
- स्त्री में सामान्यतः XX तथा पुरुष में XY लिंग गुणसूत्र होते हैं।
17. पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र में अंतर
| क्र.सं. | तुलना का आधार | पुरुष प्रजनन तंत्र | स्त्री प्रजनन तंत्र |
|---|---|---|---|
| 1 | मुख्य जनन अंग | वृषण (Testes) | अंडाशय (Ovaries) |
| 2 | जनन कोशिका | शुक्राणु | अंडाणु |
| 3 | मुख्य हार्मोन | टेस्टोस्टेरोन | एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन |
| 4 | मुख्य अंगों की स्थिति | प्रमुख जनन अंगों में वृषण शरीर के बाहर अंडकोष में स्थित होते हैं। | अंडाशय एवं गर्भाशय शरीर के अंदर स्थित होते हैं। |
| 5 | मुख्य कार्य | शुक्राणु निर्माण एवं पुरुष जनन कार्य। | अंडाणु निर्माण, निषेचन एवं गर्भावस्था में भ्रूण विकास। |
18. शुक्राणु और अंडाणु में अंतर
| विशेषता | शुक्राणु | अंडाणु |
|---|---|---|
| उत्पत्ति स्थल | वृषण | अंडाशय |
| प्रकार | नर जनन कोशिका | मादा जनन कोशिका |
| गतिशीलता | गतिशील | स्वयं सक्रिय रूप से गतिशील नहीं |
| संरचना | सिर, मध्य भाग एवं पूँछ | गोलाकार एकल कोशिका |
| मुख्य भूमिका | निषेचन के लिए आनुवंशिक पदार्थ पहुँचाना | निषेचन के लिए मादा जनन कोशिका उपलब्ध कराना |
19. उदाहरण एवं अनुप्रयोग
कोलेस्ट्रम का महत्व
प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला कोलेस्ट्रम नवजात शिशु के लिए महत्वपूर्ण पोषण एवं प्रतिरक्षात्मक घटकों का स्रोत माना जाता है। इसलिए प्रारंभिक स्तनपान का विशेष महत्व है।
परिवार नियोजन का अनुप्रयोग
परिवार नियोजन के माध्यम से दंपति संतान की संख्या एवं जन्म के बीच अंतर से संबंधित निर्णय ले सकते हैं। इसके लिए उपलब्ध गर्भनिरोधक विकल्पों के बारे में स्वास्थ्यकर्मी से उचित जानकारी लेना उपयोगी होता है।
लिंग निर्धारण की वैज्ञानिक समझ
मानव में XX और XY गुणसूत्र संयोजन की जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि संतान के जैविक लिंग निर्धारण को लेकर महिला को दोष देना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।
20. महत्वपूर्ण शब्दावली
| English Term | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| Reproduction | प्रजनन |
| Sperm | शुक्राणु |
| Ovum | अंडाणु |
| Fertilization | निषेचन |
| Zygote | युग्मनज |
| Embryo | भ्रूण |
| Placenta | प्लेसेंटा / अपरा |
| Ovulation | अंडोत्सर्जन / ओवुलेशन |
| Menopause | रजोनिवृत्ति |
| Colostrum | कोलेस्ट्रम |
| Testosterone | टेस्टोस्टेरोन |
| Estrogen | एस्ट्रोजन |
| Progesterone | प्रोजेस्टेरोन |
| Prolactin | प्रोलैक्टिन |
| Oxytocin | ऑक्सीटोसिन |
21. Objective Questions / MCQs
प्रश्न 1: पुरुष प्रजनन तंत्र में शुक्राणु का निर्माण कहाँ होता है?
(A) प्रोस्टेट ग्रंथि
(B) शुक्रवाहिनी
(C) वृषण
(D) मूत्राशय
सही उत्तर: (C) वृषण
व्याख्या: वृषण पुरुष के प्रमुख जनन अंग हैं जहाँ शुक्राणुओं का निर्माण होता है तथा टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है।
प्रश्न 2: निषेचन की प्रक्रिया सामान्यतः कहाँ होती है?
(A) गर्भाशय
(B) योनि
(C) फैलोपियन ट्यूब
(D) अंडाशय
सही उत्तर: (C) फैलोपियन ट्यूब
व्याख्या: शुक्राणु और अंडाणु का संलयन फैलोपियन ट्यूब में होता है।
प्रश्न 3: गर्भाशय की आंतरिक परत को क्या कहा जाता है?
(A) मायोमेट्रियम
(B) एंडोमेट्रियम
(C) पेरीमेट्रियम
(D) एक्टोडर्म
सही उत्तर: (B) एंडोमेट्रियम
व्याख्या: गर्भाशय की आंतरिक परत एंडोमेट्रियम कहलाती है।
प्रश्न 4: स्त्री में सामान्यतः कितने अंडाशय होते हैं?
(A) एक
(B) दो
(C) तीन
(D) चार
सही उत्तर: (B) दो
व्याख्या: गर्भाशय के दोनों ओर एक-एक अंडाशय स्थित होता है।
प्रश्न 5: प्रोस्टेट ग्रंथि का प्रमुख कार्य क्या है?
(A) शुक्राणु बनाना
(B) वीर्य में तरल स्राव मिलाना
(C) अंडाणु बनाना
(D) एस्ट्रोजन बनाना
सही उत्तर: (B) वीर्य में तरल स्राव मिलाना
व्याख्या: प्रोस्टेट ग्रंथि का स्राव वीर्य के तरल भाग में योगदान देता है।
प्रश्न 6: मासिक धर्म चक्र सामान्यतः कितने दिनों का बताया जाता है?
(A) 14 दिन
(B) 20 दिन
(C) 28 दिन
(D) 40 दिन
सही उत्तर: (C) 28 दिन
व्याख्या: अध्ययन स्रोत के अनुसार सामान्य मासिक धर्म चक्र 28 दिनों का बताया गया है।
प्रश्न 7: ओवुलेशन सामान्यतः किस दिन बताया जाता है?
(A) 1वें दिन
(B) 7वें दिन
(C) 14वें दिन
(D) 28वें दिन
सही उत्तर: (C) 14वें दिन
व्याख्या: 28 दिवसीय चक्र में परिपक्व अंडाणु के अंडाशय से निकलने की प्रक्रिया लगभग 14वें दिन बताई जाती है।
प्रश्न 8: शुक्राणु के मध्य भाग में कौन-सा कोशिकांग पाया जाता है?
(A) राइबोसोम
(B) माइटोकॉन्ड्रिया
(C) गोल्जी बॉडी
(D) लाइसोसोम
सही उत्तर: (B) माइटोकॉन्ड्रिया
व्याख्या: शुक्राणु के मध्य भाग में माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहायता करता है।
प्रश्न 9: भ्रूण को पोषण एवं ऑक्सीजन पहुँचाने में कौन सहायता करता है?
(A) एंडोमेट्रियम
(B) डिंबवाहिनी
(C) प्लेसेंटा
(D) योनि
सही उत्तर: (C) प्लेसेंटा
व्याख्या: प्लेसेंटा माता एवं भ्रूण के बीच ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 10: दुग्ध उत्पादन को सक्रिय करने वाला प्रमुख हार्मोन कौन-सा है?
(A) टेस्टोस्टेरोन
(B) प्रोलैक्टिन
(C) इंसुलिन
(D) थायरोक्सिन
सही उत्तर: (B) प्रोलैक्टिन
व्याख्या: प्रोलैक्टिन दुग्ध उत्पादन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 11: पुरुष नसबंदी में किस नली को अवरुद्ध किया जाता है?
(A) फैलोपियन ट्यूब
(B) शुक्रवाहिनी
(C) मूत्रवाहिनी
(D) कॉपर नली
सही उत्तर: (B) शुक्रवाहिनी
व्याख्या: पुरुष नसबंदी अर्थात् वासेक्टॉमी में शुक्रवाहिनी को अवरुद्ध किया जाता है।
प्रश्न 12: मानव में गर्भावधि लगभग कितनी होती है?
(A) 5 माह
(B) 7 माह
(C) 9 माह
(D) 12 माह
सही उत्तर: (C) 9 माह
व्याख्या: मानव गर्भावस्था की अवधि लगभग 9 माह या 280 दिन बताई जाती है।
प्रश्न 13: प्रसव के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध क्या कहलाता है?
(A) प्लाज्मा
(B) कोलेस्ट्रम
(C) लैक्टोज
(D) सीरम
सही उत्तर: (B) कोलेस्ट्रम
व्याख्या: प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम कहलाता है।
प्रश्न 14: स्त्री के लिंग गुणसूत्रों का सामान्य संयोजन क्या है?
(A) XY
(B) YY
(C) XX
(D) XO
सही उत्तर: (C) XX
व्याख्या: सामान्यतः स्त्री में XX लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं।
प्रश्न 15: पुरुष में कौन-सा लिंग गुणसूत्र संयोजन पाया जाता है?
(A) XX
(B) XY
(C) YY
(D) XO
सही उत्तर: (B) XY
व्याख्या: सामान्यतः पुरुष में XY लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं।
22. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: पुरुषों के मुख्य जनन हार्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर: पुरुषों का प्रमुख जनन हार्मोन टेस्टोस्टेरोन है, जो वृषण से स्रावित होता है।
प्रश्न 2: स्त्रियों के दो प्रमुख जनन हार्मोन कौन-से हैं?
उत्तर: स्त्रियों के दो प्रमुख जनन हार्मोन एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन हैं।
प्रश्न 3: निषेचन किसे कहते हैं?
उत्तर: शुक्राणु और अंडाणु के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं।
प्रश्न 4: प्लेसेंटा का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: प्लेसेंटा माता और भ्रूण के बीच ऑक्सीजन एवं पोषक तत्वों के आदान-प्रदान में सहायता करता है तथा भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में मदद करता है।
प्रश्न 5: रजोनिवृत्ति क्या है?
उत्तर: महिलाओं में मासिक धर्म चक्र का स्थायी रूप से बंद हो जाना रजोनिवृत्ति कहलाता है।
23. लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: निषेचन क्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर: पुरुष के शुक्राणु और स्त्री के अंडाणु के संलयन को निषेचन कहते हैं। यह प्रक्रिया सामान्यतः फैलोपियन ट्यूब में होती है। निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज का निर्माण होता है, जो आगे विभाजित होकर विकसित होता है और गर्भाशय में स्थापित होता है।
प्रश्न 2: शुक्राणु की संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर: शुक्राणु एक सूक्ष्म नर जनन कोशिका है। इसके तीन प्रमुख भाग होते हैं—
- सिर: इसमें केंद्रक एवं आनुवंशिक पदार्थ होता है।
- मध्य भाग: इसमें माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं जो ऊर्जा प्रदान करते हैं।
- पूँछ: यह शुक्राणु को गति प्रदान करती है।
प्रश्न 3: गर्भाशय में भ्रूण का पोषण किस प्रकार होता है?
उत्तर: गर्भाशय में भ्रूण को पोषण एवं ऑक्सीजन प्लेसेंटा के माध्यम से प्राप्त होते हैं। माता के रक्त से आवश्यक पोषक तत्व एवं ऑक्सीजन भ्रूण तक पहुँचते हैं तथा भ्रूण से कार्बन डाइऑक्साइड और अपशिष्ट पदार्थ हटाने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 4: प्रोस्टेट एवं कॉपर ग्रंथि के कार्य लिखिए।
उत्तर:
- प्रोस्टेट ग्रंथि: वीर्य के तरल भाग में योगदान करती है और शुक्राणुओं के लिए अनुकूल माध्यम बनाने में सहायता करती है।
- कॉपर ग्रंथि: पारदर्शी एवं चिपचिपा स्राव उत्पन्न करती है, जो मूत्रमार्ग को अनुकूल वातावरण प्रदान करने में सहायता करता है।
24. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: पुरुष प्रजनन तंत्र के मुख्य अंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पुरुष प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:
- वृषण: शुक्राणु तथा टेस्टोस्टेरोन का निर्माण करते हैं।
- अंडकोष: वृषण को सुरक्षित रखता है तथा शुक्राणु निर्माण के लिए उपयुक्त तापमान बनाए रखने में सहायता करता है।
- शुक्रवाहिनी: शुक्राणुओं को आगे ले जाने वाली नली है।
- शुक्राशय: शुक्राणुओं को पोषण देने वाले तरल का स्राव करता है।
- प्रोस्टेट ग्रंथि: वीर्य के तरल भाग में योगदान करती है।
- कॉपर ग्रंथि: विशेष तरल स्राव उत्पन्न करती है।
- मूत्रमार्ग: मूत्र तथा वीर्य के बाहर निकलने का मार्ग है।
- लिंग: पुरुष का बाह्य जनन अंग है।
प्रश्न 2: स्त्री प्रजनन तंत्र के प्रमुख आंतरिक अंगों एवं उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: स्त्री प्रजनन तंत्र के प्रमुख आंतरिक अंग निम्नलिखित हैं:
- अंडाशय: अंडाणु का निर्माण करते हैं तथा एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन का स्राव करते हैं।
- फैलोपियन ट्यूब: अंडाणु को गर्भाशय की ओर ले जाने में सहायता करती हैं तथा निषेचन की प्रक्रिया सामान्यतः यहीं होती है।
- गर्भाशय: गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास का प्रमुख स्थान है।
- गर्भाशय ग्रीवा: गर्भाशय का निचला संकरा भाग है।
- योनि: यह गर्भाशय ग्रीवा से बाह्य भाग तक जाने वाला पेशीय मार्ग है।
प्रश्न 3: स्तनों के विकास एवं दुग्ध स्राव की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर: स्तनों का विकास किशोरावस्था से शुरू होता है और इसमें विभिन्न हार्मोनों की भूमिका होती है। एस्ट्रोजन दुग्ध नलिकाओं के विकास में तथा प्रोजेस्टेरोन दुग्ध ग्रंथियों के विकास में योगदान करता है।
गर्भावस्था एवं प्रसव के बाद प्रोलैक्टिन दुग्ध उत्पादन में तथा ऑक्सीटोसिन दूध को नलिकाओं से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम कहलाता है।
25. परीक्षा में पूछे जा सकने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
- पुरुष का प्रमुख जनन हार्मोन कौन-सा है?
- स्त्री के प्रमुख जनन हार्मोन कौन-कौन से हैं?
- निषेचन कहाँ होता है?
- ओवुलेशन क्या है?
- प्लेसेंटा का मुख्य कार्य क्या है?
- कोलेस्ट्रम किसे कहते हैं?
- रजोनिवृत्ति क्या है?
लघु उत्तरीय
- पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- शुक्राणु की संरचना का वर्णन कीजिए।
- अंडाशय के प्रमुख कार्य लिखिए।
- मासिक धर्म चक्र समझाइए।
- प्लेसेंटा के कार्य लिखिए।
- प्रोलैक्टिन एवं ऑक्सीटोसिन की भूमिका बताइए।
दीर्घ उत्तरीय
- पुरुष प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंगों का वर्णन कीजिए।
- स्त्री प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंगों एवं उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
- निषेचन एवं भ्रूण विकास की प्रक्रिया समझाइए।
- स्तन ग्रंथियों के विकास एवं दुग्ध स्राव की प्रक्रिया समझाइए।
- गुणसूत्रों द्वारा लिंग निर्धारण की प्रक्रिया समझाइए।
- परिवार नियोजन की प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।
26. Quick Revision Notes
- पुरुष जनन अंग: वृषण → शुक्राणु एवं टेस्टोस्टेरोन।
- स्त्री जनन अंग: अंडाशय → अंडाणु, एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन।
- निषेचन: शुक्राणु + अंडाणु → युग्मनज।
- निषेचन का स्थान: फैलोपियन ट्यूब।
- भ्रूण विकास: गर्भाशय में।
- मासिक धर्म चक्र: लगभग 28 दिन।
- ओवुलेशन: लगभग 14वें दिन।
- दुग्ध उत्पादन: प्रोलैक्टिन।
- दूध बाहर निकालना: ऑक्सीटोसिन।
- पहला दूध: कोलेस्ट्रम।
- महिला लिंग गुणसूत्र: XX।
- पुरुष लिंग गुणसूत्र: XY।
- मानव गुणसूत्र: 23 जोड़े अर्थात् 46।
- पुरुष नसबंदी: Vasectomy।
- स्त्री नसबंदी: Tubectomy।
27. परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण Topics
- पुरुष प्रजनन तंत्र एवं उसके प्रमुख अंग।
- स्त्री प्रजनन तंत्र एवं उसके प्रमुख अंग।
- शुक्राणु की संरचना और उसके भाग।
- मासिक धर्म चक्र एवं ओवुलेशन।
- निषेचन एवं युग्मनज निर्माण।
- भ्रूण विकास एवं प्लेसेंटा के कार्य।
- दुग्ध ग्रंथियों का विकास एवं प्रोलैक्टिन-ऑक्सीटोसिन की भूमिका।
- कोलेस्ट्रम का महत्व।
- XX एवं XY गुणसूत्र द्वारा लिंग निर्धारण।
- परिवार नियोजन एवं गर्भनिरोधक विधियाँ।
28. अध्याय का निष्कर्ष
पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र मानव जीवन एवं प्रजनन स्वास्थ्य को समझने वाला महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें पुरुष एवं स्त्री जनन अंगों की संरचना एवं कार्य, जनन हार्मोन, शुक्राणु एवं अंडाणु, मासिक धर्म चक्र, ओवुलेशन, निषेचन, युग्मनज, भ्रूण विकास तथा प्लेसेंटा की भूमिका का अध्ययन किया जाता है।
इसके साथ ही स्तन ग्रंथियों के विकास, दुग्ध स्राव, कोलेस्ट्रम, गुणसूत्रों द्वारा लिंग निर्धारण तथा परिवार नियोजन की जानकारी भी इस अध्याय को परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से पुरुष एवं स्त्री प्रजनन तंत्र, निषेचन, मासिक धर्म चक्र, प्लेसेंटा, दुग्ध स्राव तथा XX-XY गुणसूत्र से संबंधित अवधारणाओं को अच्छी तरह समझना चाहिए।
📚 अध्याय 2 Quick Recall: पुरुष → वृषण → शुक्राणु/टेस्टोस्टेरोन | स्त्री → अंडाशय → अंडाणु/एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन | निषेचन → फैलोपियन ट्यूब | भ्रूण → गर्भाशय | पोषण → प्लेसेंटा | दूध उत्पादन → प्रोलैक्टिन | दूध निष्कासन → ऑक्सीटोसिन।