गृह विज्ञान (Home Science) कक्षा 12 के अंतर्गत पर्यावरण प्रदूषण एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक अध्याय है। यह अध्याय विद्यार्थियों को हमारे आसपास के परिवेश, उसकी स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक बनाता है। मानव जीवन का अस्तित्व पूरी तरह से स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण पर टिका हुआ है। आधुनिक समय में औद्योगीकरण, शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और मानवीय गतिविधियों के कारण हमारा पर्यावरण तेजी से दूषित हो रहा है। इस अध्याय में पर्यावरण के मूल अर्थ, इसके विभिन्न घटकों, प्रदूषण के प्रकारों, उनके प्रभावों तथा रोकथाम के व्यावहारिक उपायों का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview
पर्यावरण दो शब्दों ‘परि’ और ‘आवरण’ से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है हमारे चारों ओर फैला हुआ आवरण। हमारे आसपास मौजूद सभी प्राकृतिक एवं मानव निर्मित घटक मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। जब इस प्राकृतिक आवरण में विषैले या हानिकारक तत्व मिल जाते हैं, तो इसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।
इस अध्याय में पारंपरिक चार प्रदूषणों—वायु, जल, मृदा और ध्वनि के साथ-साथ आधुनिक युग के 5वें प्रकार यानी इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण को भी शामिल किया गया है। यह अध्याय विद्यार्थियों को परीक्षा के दृष्टिकोण से तैयार करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण हेतु एक जिम्मेदार नागरिक बनाने का उद्देश्य रखता है।
मुख्य अवधारणाएँ
विषय 1: पर्यावरण का अर्थ एवं इसके प्रकार (Meaning and Types of Environment)
1. पर्यावरण की परिभाषा
पर्यावरण का अर्थ उस संपूर्ण परिवेश से है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है और हमारे जीवन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। इसमें हवा, जल, मिट्टी, पेड़-पौधे, नदियाँ, पर्वत, जीव-जंतु, भवन, सड़कें और मशीनें सभी शामिल हैं।
प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है ताकि जन-सामान्य को पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा सके।
2. पर्यावरण के मुख्य प्रकार
पर्यावरण को मुख्य रूप से निम्नलिखित भागों में समझा जा सकता है:
प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment)
यह प्रकृति द्वारा निर्मित पर्यावरण है जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अस्तित्व में रहता है। इसके अंतर्गत नदियाँ, पहाड़, समुद्र, हवा, मिट्टी, जंगल, पेड़-पौधे, जीव-जंतु और सूर्य का प्रकाश आते हैं।
मानव निर्मित या कृत्रिम पर्यावरण (Human-made Environment)
मनुष्य ने अपनी सुविधा, सुरक्षा और उपयोग के लिए प्राकृतिक संसाधनों का रूप बदलकर जिस परिवेश का निर्माण किया है, उसे मानव निर्मित पर्यावरण कहते हैं। उदाहरण के लिए—घर, सड़कें, पुल, बड़ी इमारतें, रेलगाड़ी, हवाई अड्डे, कारखाने और मशीनें।
सामाजिक पर्यावरण (Social Environment)
मानवीय संबंधों, सांस्कृतिक परंपराओं, रीति-रिवाजों, जातियों और धार्मिक नियमों के ताने-बाने से निर्मित वातावरण को सामाजिक पर्यावरण कहा जाता है।
विषय 2: पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ एवं कारण (Meaning and Causes of Environmental Pollution)
1. पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ
पर्यावरण के शुद्ध घटकों जैसे वायु, जल, मिट्टी आदि में किसी अवांछनीय या हानिकारक पदार्थ का मिल जाना, जिससे उसकी गुणवत्ता नष्ट हो जाए और वह जीवों के लिए हानिकारक बन जाए, पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है।
2. पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण
- तीव्र जनसंख्या वृद्धि (Population Growth): बढ़ती जनसंख्या के कारण संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जो प्रदूषण की प्रमुख जड़ों में से एक है।
- औद्योगीकरण (Industrialization): कारखानों से निकलने वाले विषैले धुएँ और रासायनिक कचरे ने पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित किया है।
- शहरीकरण (Urbanization): शहरों के अनियंत्रित विस्तार से कचरा, सीवेज और वाहनों की संख्या बढ़ी है।
- वनों की अंधाधुंध कटाई (Deforestation): पेड़ कटने से कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ रहा है और मृदा अपरदन बढ़ रहा है।
- कृषि में रसायनों का प्रयोग: कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और जल दोनों दूषित हो रहे हैं।
- वाहनों की संख्या में वृद्धि: पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों से हानिकारक गैसें निकलती हैं।
विषय 3: वायु प्रदूषण (Air Pollution)
1. अर्थ
शुद्ध हवा में अवांछित गैसों, धुएँ, धूल कणों और विषैले रसायनों के मिलने से वायु की शुद्धता खत्म होना वायु प्रदूषण कहलाता है।
2. प्रमुख कारण
- उद्योगों और कारखानों से निकलने वाला विषैला धुआँ, जिसमें SO2, NO2, CO जैसी गैसें हो सकती हैं।
- वाहनों में पेट्रोल एवं डीजल का जलना।
- जंगलों की कटाई तथा खेतों में पराली जलाना।
- घरेलू उपयोग में लकड़ी और कोयला जलाना।
3. हानिकारक प्रभाव
- मानव स्वास्थ्य पर: दमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस और श्वसन संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।
- अम्लीय वर्षा (Acid Rain): वातावरण में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) वर्षा के पानी के साथ क्रिया करके अम्लीय यौगिक बना सकते हैं, जो फसलों, इमारतों और जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं।
- ओजोन परत का क्षरण (Ozone Depletion): पराबैंगनी किरणों से रक्षा करने वाली ओजोन परत के क्षरण से UV विकिरण का प्रभाव बढ़ सकता है।
- ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming): वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि होती है।
4. रोकथाम के उपाय
- पेट्रोल/डीजल के स्थान पर अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधनों का उपयोग करना।
- अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
- औद्योगिक चिमनियों में फिल्टर और आधुनिक तकनीक का उपयोग करना।
- सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना।
विषय 4: जल प्रदूषण (Water Pollution)
1. अर्थ
जल में विषैले रसायनों, कचरे, रोगाणुओं और गंदे पदार्थों के मिलने से जल की प्राकृतिक गुणवत्ता नष्ट होना जल प्रदूषण कहलाता है।
2. महत्वपूर्ण तथ्यात्मक जानकारी
- हमारे शरीर के कुल वजन का लगभग 50% से 60% भाग जल होता है।
- पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल में से केवल सीमित भाग ही मीठा और मानव उपयोग के लिए उपलब्ध है।
- प्राकृतिक रूप से वर्षा का जल सामान्यतः अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है, हालांकि वातावरण और संग्रहण के कारण इसकी गुणवत्ता बदल सकती है।
- दूषित जल अनेक जलजनित रोगों के प्रसार का प्रमुख माध्यम बन सकता है।
3. प्रमुख कारण
- कारखानों का रासायनिक कचरा नदियों और समुद्रों में बहाना।
- बड़े शहरों का सीवेज और कचरा नदियों में गिरना।
- खेतों में छिड़के गए रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों का बारिश के पानी में बहकर जल स्रोतों में मिलना।
- जल में सीसा (Lead/Pb) जैसे भारी विषैले तत्वों का मिलना।
- नदियों में तेल रिसाव (Oil Spills) और प्लास्टिक सामग्री डालना।
4. प्रभाव एवं बीमारियाँ
- दूषित जल पीने से पीलिया (Jaundice), हैजा (Cholera), डायरिया और आंतों से संबंधित बीमारियाँ हो सकती हैं।
- जल में रहने वाले जीवों जैसे मछली और अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुँच सकता है।
- कुछ विषैले प्रदूषक शरीर के आंतरिक अंगों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
5. जल स्वच्छता एवं रोकथाम के उपाय
- जल को जीवाणु रहित और सुरक्षित बनाने के लिए उचित जल-शोधन एवं कीटाणुशोधन विधियों का प्रयोग करना।
- पानी को उचित रूप से उबालकर पीना एक उपयोगी घरेलू जल-शोधन विधि है।
- औद्योगिक कचरे और सीवेज को बिना उपचारित किए जल स्रोतों में न बहाया जाए।
विषय 5: मृदा प्रदूषण / मिट्टी प्रदूषण (Soil/Land Pollution)
1. अर्थ
मिट्टी में हानिकारक रसायनों, कचरे और प्लास्टिक के मिलने से उसकी प्राकृतिक उर्वरता और गुणवत्ता का नष्ट होना मृदा प्रदूषण कहलाता है।
2. प्रमुख कारण
- खेत में प्लास्टिक और पॉलीथीन फेंकना, जो अजैविक (Non-biodegradable) अपशिष्ट हैं।
- खेतों में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग।
- वनों की अंधाधुंध कटाई जिससे मृदा अपरदन (Soil Erosion) होता है।
- खनन और औद्योगिक अपशिष्ट का भूमि पर जमना।
3. प्रभाव
- मिट्टी की उर्वरता कम हो सकती है और भूमि की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
- कृषि उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
4. रोकथाम के उपाय
- जैविक खाद (Compost/Vermicompost) और गोबर खाद का अधिक से अधिक उपयोग करना।
- प्लास्टिक के स्थान पर जूट या कपड़े के थैलों का उपयोग करना।
- बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना।
विषय 6: ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
1. अर्थ
वातावरण में अवांछित, तीव्र और अप्रिय ध्वनि का उत्पन्न होना, जो मानव स्वास्थ्य और मानसिक शांति में बाधा डाले, ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।
2. मापन इकाई
- ध्वनि की तीव्रता को मापने की इकाई डेसीबल (Decibel – dB) है।
- लगातार अत्यधिक तेज ध्वनि का संपर्क स्वास्थ्य और सुनने की क्षमता के लिए हानिकारक हो सकता है।
3. प्रमुख कारण
- वाहनों के तेज हॉर्न और यातायात का शोर।
- लाउडस्पीकर, डीजे (DJ) और तेज आवाज में बजने वाले संगीत उपकरण।
- कारखानों की मशीनों और निर्माण कार्य का शोर।
4. स्वास्थ्य पर प्रभाव
- मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा।
- सुनने की क्षमता कमजोर होना।
- लगातार तेज शोर के संपर्क से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
5. रोकथाम के उपाय
- वाहनों और मशीनों में ध्वनि रोधक उपकरणों का प्रयोग करना।
- लाउडस्पीकर और डीजे के उपयोग से संबंधित निर्धारित नियमों और समय-सीमाओं का पालन करना।
- सड़कों के किनारे हरे वृक्ष लगाकर ग्रीन बेल्ट विकसित करना।
विषय 7: इलेक्ट्रॉनिक एवं रेडिएशन प्रदूषण (Electronic and Radiation Pollution)
1. अर्थ एवं महत्व
यह आधुनिक युग से संबंधित प्रदूषण की एक अवधारणा है। मोबाइल टावर, सेटेलाइट, एंटीना, परमाणु संयंत्रों और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक या विकिरण स्रोतों से निकलने वाले विकिरण को पर्यावरणीय दृष्टि से अध्ययन किया जाता है।
2. प्रमुख कारण
- मोबाइल फोन, वाई-फाई और मोबाइल टावरों का व्यापक उपयोग।
- अंतरिक्ष में स्थापित सेटेलाइट्स और विभिन्न संचार उपकरण।
- परमाणु ऊर्जा संयंत्र, परमाणु हथियार परीक्षण और एक्स-रे मशीनें जैसे विकिरण स्रोत।
3. प्रभाव
- विभिन्न विकिरण स्रोतों के पर्यावरणीय और जैविक प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।
- उच्च स्तर के आयनकारी विकिरण से कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान हो सकता है।
- पर्यावरण में विभिन्न जीवों पर विकिरण के प्रभाव स्रोत, मात्रा और संपर्क की अवधि पर निर्भर करते हैं।
4. रोकथाम के उपाय
- विकिरण स्रोतों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करना।
- अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कम करना।
- परमाणु परीक्षणों और विकिरण स्रोतों पर उचित सुरक्षा एवं नियमन लागू करना।
विषय 8: ग्लोबल वार्मिंग, अम्लीय वर्षा एवं ओजोन क्षरण
| विषय | मुख्य कारण | प्रभाव | निवारण |
|---|---|---|---|
| अम्लीय वर्षा (Acid Rain) | SO2 और NO2 जैसी गैसों से बनने वाले अम्लीय यौगिक | ऐतिहासिक इमारतों का क्षरण, फसलों एवं जलजीवों को नुकसान | उत्सर्जन में कमी, स्वच्छ ईंधन और प्रदूषण नियंत्रण तकनीक का उपयोग |
| ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) | CO2, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ी हुई मात्रा | पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि, जलवायु परिवर्तन और हिमनदों पर प्रभाव | वृक्षारोपण, ऊर्जा दक्षता तथा सौर एवं पवन ऊर्जा का उपयोग |
| ओजोन परत का क्षरण (Ozone Depletion) | ओजोन-क्षयकारी पदार्थों का वातावरण में उत्सर्जन | पराबैंगनी (UV) विकिरण का अधिक प्रभाव और स्वास्थ्य पर जोखिम | ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उत्सर्जन को कम करना |
शब्दावली / Key Terms
- प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment): प्रकृति द्वारा निर्मित परिवेश जिसमें पहाड़, नदियाँ, हवा और जीव-जंतु शामिल हैं।
- मानव निर्मित पर्यावरण (Human-made Environment): मनुष्य द्वारा अपनी सुविधा के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके बनाया गया परिवेश, जैसे भवन, सड़कें और मशीनें।
- अजैविक अपशिष्ट (Non-biodegradable Waste): वे अपशिष्ट पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से आसानी से सड़ते या गलते नहीं हैं, जैसे प्लास्टिक और पॉलीथीन।
- डेसीबल (Decibel – dB): ध्वनि स्तर को व्यक्त करने की इकाई।
- अम्लीय वर्षा (Acid Rain): वायुमंडलीय प्रदूषकों से बनने वाले अम्लीय यौगिकों के कारण होने वाली अम्लीय प्रकृति की वर्षा।
- जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels): लाखों वर्षों पूर्व जमीन के अंदर दबे पेड़-पौधों और जीवों के अवशेषों से बने ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोल और डीजल।
- जैविक खाद (Organic Manure): गोबर, फसल अवशेष और प्राकृतिक पदार्थों से तैयार खाद जो मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है।
- पराली (Crop Residue): फसल की कटाई के बाद खेत में बचा हुआ अवशेष।
- सीएनजी (Compressed Natural Gas): संपीड़ित प्राकृतिक गैस, जिसका उपयोग वाहन ईंधन के रूप में किया जाता है।
- रेडिएशन पोल्यूशन (Radiation Pollution): हानिकारक स्तर के विकिरण के पर्यावरण और जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित प्रदूषण की अवधारणा।
अध्याय का सारांश
गृह विज्ञान कक्षा 12 का अध्याय ‘पर्यावरण प्रदूषण’ पर्यावरण संतुलन और मानव स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करता है। पर्यावरण हमारे चारों ओर का आवरण है, जिसे प्राकृतिक, मानव निर्मित और सामाजिक घटकों के रूप में समझा जा सकता है। मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन, औद्योगीकरण, जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण के कारण पर्यावरण में अवांछनीय तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा होती है।
इस अध्याय में प्रमुख रूप से वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण का अध्ययन किया गया है। वायु प्रदूषण उद्योगों, वाहनों और ईंधन के दहन से, जल प्रदूषण रासायनिक कचरे और सीवेज से, मृदा प्रदूषण प्लास्टिक और रसायनों से तथा ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक शोर से उत्पन्न हो सकता है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वृक्षारोपण, स्वच्छ ऊर्जा, उचित कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, जैविक खाद और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को अपनाना आवश्यक है।
त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision
- पर्यावरण शब्द ‘परि + आवरण’ से मिलकर बना है।
- विश्व पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है।
- पर्यावरण के प्रमुख प्रकारों में प्राकृतिक, मानव निर्मित और सामाजिक पर्यावरण शामिल हैं।
- प्रदूषण के प्रमुख प्रकार हैं—वायु, जल, मृदा, ध्वनि एवं इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण।
- ध्वनि स्तर को डेसीबल (dB) में व्यक्त किया जाता है।
- वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में उद्योग, वाहन और ईंधन का दहन शामिल हैं।
- जल प्रदूषण से पीलिया, हैजा और डायरिया जैसी जलजनित बीमारियाँ फैल सकती हैं।
- जल को सुरक्षित बनाने के लिए उचित जल-शोधन और कीटाणुशोधन आवश्यक है।
- प्लास्टिक और पॉलीथीन प्रमुख अजैविक अपशिष्टों में शामिल हैं।
- मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जैविक खाद का उपयोग उपयोगी है।
- अम्लीय वर्षा वायुमंडलीय SO2 और NOx जैसे प्रदूषकों से बनने वाले अम्लीय यौगिकों से संबंधित है।
- ग्लोबल वार्मिंग मुख्य रूप से बढ़ी हुई ग्रीनहाउस गैसों से संबंधित है।
- ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- प्रदूषण नियंत्रण के प्रमुख उपायों में वृक्षारोपण, स्वच्छ ऊर्जा, जैविक कृषि और उचित कचरा प्रबंधन शामिल हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: ध्वनि की तीव्रता मापने की वैज्ञानिक इकाई कौन सी है?
(A) किलोमीटर
(B) लीटर
(C) डेसीबल
(D) हर्ट्ज
सही उत्तर: (C) डेसीबल
Explanation: ध्वनि स्तर को डेसीबल (dB) में व्यक्त किया जाता है।
प्रश्न 2: वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत निम्न में से कौन सा है?
(A) वृक्ष
(B) उद्योग एवं कारखाने
(C) समुद्र
(D) पर्वत
सही उत्तर: (B) उद्योग एवं कारखाने
Explanation: औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला धुआँ और विभिन्न उत्सर्जन वायु प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
प्रश्न 3: पीलिया (Jaundice) किस प्रकार के प्रदूषण से संबंधित जलजनित रोगों में शामिल है?
(A) वायु प्रदूषण
(B) जल प्रदूषण
(C) ध्वनि प्रदूषण
(D) मृदा प्रदूषण
सही उत्तर: (B) जल प्रदूषण
Explanation: दूषित जल विभिन्न संक्रमणों और जलजनित रोगों के प्रसार का माध्यम बन सकता है।
प्रश्न 4: ध्वनि स्तर को सामान्यतः किस इकाई में व्यक्त किया जाता है?
(A) 40 डेसीबल
(B) 60 डेसीबल
(C) डेसीबल
(D) 120 डेसीबल
सही उत्तर: (C) डेसीबल
Explanation: ध्वनि स्तर को डेसीबल (dB) में मापा/व्यक्त किया जाता है। अत्यधिक और लंबे समय तक तेज ध्वनि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
प्रश्न 5: विश्व पर्यावरण दिवस किस तिथि को मनाया जाता है?
(A) 15 अगस्त
(B) 5 जून
(C) 26 जनवरी
(D) 2 अक्टूबर
सही उत्तर: (B) 5 जून
Explanation: प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
प्रश्न 6: प्लास्टिक किस प्रकार के अपशिष्ट का उदाहरण है?
(A) जैविक अपशिष्ट
(B) अजैविक अपशिष्ट
(C) प्राकृतिक अपशिष्ट
(D) घुलनशील अपशिष्ट
सही उत्तर: (B) अजैविक अपशिष्ट
Explanation: प्लास्टिक प्राकृतिक परिस्थितियों में आसानी से विघटित नहीं होता, इसलिए इसे सामान्यतः अजैविक या non-biodegradable waste के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
प्रश्न 7: मानव शरीर में जल की मात्रा लगभग कितनी होती है?
(A) 20 से 30%
(B) 35 से 45%
(C) 50 से 60%
(D) 75 से 85%
सही उत्तर: (C) 50 से 60%
Explanation: शरीर में जल की मात्रा व्यक्ति की आयु, लिंग और शरीर की संरचना के अनुसार बदलती है। दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार लगभग 50 से 60% माना गया है।
प्रश्न 8: जल प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत कौन सा है?
(A) औद्योगिक अपशिष्ट
(B) स्वच्छ वर्षा जल
(C) वृक्षारोपण
(D) सौर ऊर्जा
सही उत्तर: (A) औद्योगिक अपशिष्ट
Explanation: बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल स्रोतों में मिलने पर जल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रश्न 9: प्राकृतिक रूप से प्राप्त जल का प्रमुख स्रोत कौन सा है?
(A) वर्षा का जल
(B) पेट्रोल
(C) डीजल
(D) तेल
सही उत्तर: (A) वर्षा का जल
Explanation: वर्षा जल प्राकृतिक जलचक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सामान्यतः प्राकृतिक स्रोतों में अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है।
प्रश्न 10: जल को कीटाणुरहित करने के लिए निम्न में से किसका उपयोग किया जा सकता है?
(A) अमोनिया
(B) यूरिया
(C) क्लोरीन
(D) पेट्रोल
सही उत्तर: (C) क्लोरीन
Explanation: जल-शोधन में उचित मात्रा में क्लोरीन का उपयोग कीटाणुशोधन के लिए किया जाता है।
प्रश्न 11: अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से किन वायु प्रदूषकों से संबंधित है?
(A) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड
(B) ऑक्सीजन और हाइड्रोजन
(C) हीलियम और नीयॉन
(D) नाइट्रोजन और ऑक्सीजन
सही उत्तर: (A) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड
Explanation: SO2 और NOx वायुमंडल में रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से अम्लीय यौगिकों के निर्माण में योगदान कर सकते हैं।
प्रश्न 12: इस अध्याय में प्रदूषण के कितने प्रमुख प्रकारों का अध्ययन किया गया है?
(A) 3
(B) 4
(C) 5
(D) 6
सही उत्तर: (C) 5
Explanation: दिए गए अध्ययन-सामग्री में वायु, जल, मृदा, ध्वनि और इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण का अध्ययन किया गया है।
प्रश्न 13: मोबाइल टावर और अन्य संचार उपकरण किस प्रकार के प्रदूषण की चर्चा से संबंधित हैं?
(A) मृदा प्रदूषण
(B) इलेक्ट्रॉनिक या रेडिएशन प्रदूषण
(C) जल प्रदूषण
(D) वायु प्रदूषण
सही उत्तर: (B) इलेक्ट्रॉनिक या रेडिएशन प्रदूषण
Explanation: संचार उपकरणों से जुड़े विद्युतचुंबकीय विकिरणों का अध्ययन इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण के संदर्भ में किया जाता है।
प्रश्न 14: जल प्रदूषण में निम्न में से कौन सा भारी धातु प्रदूषक हो सकता है?
(A) सीसा (Lead)
(B) ऑक्सीजन
(C) नाइट्रोजन
(D) हाइड्रोजन
सही उत्तर: (A) सीसा (Lead)
Explanation: सीसा जैसे भारी धातु प्रदूषक जल में मिलकर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
प्रश्न 15: वस्तुओं और ईंधनों के अपूर्ण दहन से कौन सी विषैली गैस बन सकती है?
(A) ऑक्सीजन
(B) कार्बन मोनोऑक्साइड
(C) नाइट्रोजन
(D) क्लोरीन
सही उत्तर: (B) कार्बन मोनोऑक्साइड
Explanation: कार्बनयुक्त ईंधनों के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) उत्पन्न हो सकती है।
प्रश्न 16: मृदा प्रदूषण को कम करने के लिए निम्न में से कौन सा उपाय उपयोगी है?
(A) प्लास्टिक का अधिक उपयोग
(B) प्लास्टिक जलाना
(C) जैविक खाद का प्रयोग करना
(D) पेड़ों की कटाई करना
सही उत्तर: (C) जैविक खाद का प्रयोग करना
Explanation: जैविक खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: जब हमारे आसपास की वायु, जल, मिट्टी या अन्य पर्यावरणीय घटकों में हानिकारक या अवांछनीय तत्व मिल जाते हैं और इससे जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों तथा मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो इस स्थिति को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।
प्रश्न 2: पर्यावरण के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं? संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर: पर्यावरण को प्राकृतिक, मानव निर्मित और सामाजिक पर्यावरण के रूप में समझा जा सकता है। प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा निर्मित है, जैसे नदियाँ, पहाड़, हवा और जंगल। मानव निर्मित पर्यावरण मनुष्य द्वारा बनाया जाता है, जैसे मकान, सड़कें और पुल। सामाजिक पर्यावरण मानवीय संबंधों, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक नियमों से संबंधित होता है।
प्रश्न 3: जल शुद्धिकरण के दो प्रभावी तरीके बताइए।
उत्तर: (1) उबालना: पानी को उचित रूप से उबालने से अनेक रोगजनक सूक्ष्मजीव नष्ट किए जा सकते हैं। (2) क्लोरीनीकरण: उचित मात्रा में क्लोरीन का प्रयोग जल के कीटाणुशोधन के लिए किया जाता है।
प्रश्न 4: अम्लीय वर्षा (Acid Rain) क्या है? यह क्यों होती है?
उत्तर: वायु प्रदूषण से संबंधित सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) जैसी गैसें वातावरण में रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से अम्लीय यौगिकों का निर्माण कर सकती हैं। इन यौगिकों के वर्षा जल में शामिल होने से अम्लीय वर्षा की स्थिति उत्पन्न होती है।
प्रश्न 5: ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर क्या दो मुख्य प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर: अत्यधिक और लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और नींद में बाधा जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रश्न 6: इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण क्या है? इसका एक प्रभाव लिखिए।
उत्तर: विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक एवं विकिरण स्रोतों से निकलने वाले विकिरणों के पर्यावरण और जीवों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से संबंधित स्थिति को इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण के संदर्भ में समझा जाता है। उच्च स्तर के आयनकारी विकिरण से कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान हो सकता है।
प्रश्न 7: अजैविक अपशिष्ट (Non-biodegradable Waste) किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर: वे अपशिष्ट पदार्थ जो प्राकृतिक परिस्थितियों में आसानी से सड़ते या गलते नहीं हैं, अजैविक अपशिष्ट कहलाते हैं। इसके उदाहरण प्लास्टिक की बोतलें और पॉलीथीन हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: जल प्रदूषण के मुख्य कारणों, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और रोकथाम के उपायों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. जल प्रदूषण का अर्थ: जल में हानिकारक रसायनों, कचरे, रोगाणुओं व अपशिष्ट पदार्थों के मिलने से जल की प्राकृतिक गुणवत्ता का नष्ट होना जल प्रदूषण कहलाता है।
2. जल प्रदूषण के मुख्य कारण:
- औद्योगिक कचरा: कारखानों से निकलने वाले विषैले रसायन और अपशिष्ट सीधे नदियों और जलाशयों में बहा दिए जाने पर जल को प्रदूषित कर सकते हैं।
- घरेलू सीवेज और कचरा: शहरों का गंदा पानी, सीवेज और कचरा जल स्रोतों में जाने से जल की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
- कृषि रसायन: फसलों में प्रयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक बारिश के पानी के साथ बहकर नदियों और तालाबों में मिल सकते हैं।
- सीसा एवं विषैली धातुएँ: जल में सीसा (Pb) जैसे विषैले तत्वों का मिलना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
3. मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव:
- जलजनित बीमारियाँ: दूषित जल विभिन्न संक्रमणों के प्रसार का माध्यम बन सकता है और पीलिया, हैजा तथा डायरिया जैसी समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
- आंतरिक अंगों पर प्रभाव: कुछ रासायनिक प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क से शरीर के विभिन्न अंग प्रभावित हो सकते हैं।
- जलीय जीवों पर प्रभाव: जल में प्रदूषकों की मात्रा बढ़ने और घुलित ऑक्सीजन में कमी जैसी स्थितियों से मछलियों और अन्य जलीय जीवों को नुकसान हो सकता है।
4. रोकथाम के उपाय:
- औद्योगिक अपशिष्टों का उचित उपचार किए बिना नदियों और अन्य जल स्रोतों में न बहाया जाए।
- जल को सुरक्षित बनाने के लिए उचित जल-शोधन और कीटाणुशोधन विधियों का उपयोग किया जाए।
- पीने के पानी को आवश्यकतानुसार उबालकर या उपयुक्त जल-शोधन विधि से सुरक्षित बनाया जाए।
- कृषि में रसायनों के संतुलित उपयोग और जैविक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।
प्रश्न 2: वायु प्रदूषण क्या है? इसके मुख्य कारणों, दुष्प्रभावों तथा नियंत्रण के उपायों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
1. वायु प्रदूषण का अर्थ: जब स्वच्छ वायु में विषैली गैसें, धुआँ, धूल कण और हानिकारक रसायन मिल जाते हैं, तो इसे वायु प्रदूषण कहते हैं।
2. वायु प्रदूषण के मुख्य कारण:
- उद्योगों और कारखानों से निकलने वाला विषैला धुआँ।
- ऑटोमोबाइल/वाहनों में पेट्रोल और डीजल का दहन।
- जंगलों की अंधाधुंध कटाई और खेतों में पराली जलाना।
- जीवाश्म ईंधनों जैसे कोयला और पेट्रोलियम उत्पादों का अत्यधिक उपयोग।
3. वायु प्रदूषण के प्रमुख दुष्प्रभाव:
- श्वसन संबंधी रोग: वायु प्रदूषण से दमा, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
- अम्लीय वर्षा: SO2 और NOx जैसे प्रदूषक अम्लीय वर्षा के निर्माण में योगदान कर सकते हैं। इससे इमारतों, फसलों और जलीय पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान हो सकता है।
- ओजोन परत का क्षरण: ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के कारण समतापमंडलीय ओजोन परत प्रभावित हो सकती है, जिससे UV विकिरण का प्रभाव बढ़ सकता है।
- ग्लोबल वार्मिंग: ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ी हुई सांद्रता पृथ्वी के तापमान और जलवायु प्रणाली को प्रभावित करती है।
4. नियंत्रण एवं सुधार के उपाय:
- वाहनों में स्वच्छ और कम-उत्सर्जन वाले ईंधनों तथा तकनीकों का उपयोग बढ़ाना।
- व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करना।
- कारखानों में उत्सर्जन नियंत्रण और फिल्टर तकनीक का प्रयोग करना।
- सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना।
प्रश्न 3: ध्वनि प्रदूषण और इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करते हुए मानव स्वास्थ्य पर इनके प्रभावों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
1. ध्वनि प्रदूषण का विवरण
- परिभाषा: वातावरण में अत्यधिक, तीव्र और अप्रिय शोर का होना ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।
- मापन: ध्वनि स्तर को डेसीबल (dB) में व्यक्त किया जाता है।
- कारण: लाउडस्पीकर, डीजे, वाहनों के हॉर्न, ट्रेन, निर्माण कार्य और कारखानों की मशीनें।
- स्वास्थ्य प्रभाव: मानसिक तनाव, सुनने की क्षमता में कमी, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन।
- निवारण: वाहनों और मशीनों में ध्वनि नियंत्रण उपकरणों का प्रयोग, अनावश्यक हॉर्न एवं तेज संगीत से बचाव और निर्धारित ध्वनि नियमों का पालन।
2. इलेक्ट्रॉनिक एवं रेडिएशन प्रदूषण का विवरण
- परिभाषा: विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और विकिरण स्रोतों से निकलने वाले विकिरण के पर्यावरण तथा जीवों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण के संदर्भ में किया जाता है।
- कारण: विभिन्न संचार उपकरण, विकिरण स्रोत और परमाणु तकनीक से जुड़े उपकरण।
- स्वास्थ्य प्रभाव: अत्यधिक आयनकारी विकिरण के संपर्क से कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान हो सकता है।
- पर्यावरण पर प्रभाव: विकिरण का प्रभाव स्रोत के प्रकार, मात्रा और संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है।
- निवारण: विकिरण सुरक्षा मानकों का पालन, अनावश्यक जोखिम से बचाव तथा सुरक्षित तकनीक और नियमन का उपयोग।
बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं? इसके प्रमुख प्रकारों का नाम लिखिए।
- प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण में उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए।
- जल प्रदूषण के कौन-कौन से मुख्य कारण हैं? दूषित जल से कौन-कौन सी बीमारियाँ फैल सकती हैं?
- ध्वनि प्रदूषण मापने की इकाई क्या है? इसके प्रमुख कारणों एवं स्वास्थ्य प्रभावों को लिखिए।
- अम्लीय वर्षा (Acid Rain) किस प्रकार होती है और इसका इमारतों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन प्रदूषण क्या है? इससे संबंधित प्रमुख स्रोतों और प्रभावों को लिखिए।
- मिट्टी को बंजर होने से बचाने के लिए किसानों को किस प्रकार की खाद का प्रयोग करना चाहिए और क्यों?
- वायु प्रदूषण को कम करने में स्वच्छ ईंधन किस प्रकार सहायक हैं?
- पर्यावरण संरक्षण में आम नागरिक की क्या भूमिका हो सकती है?
- ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण और इसके बचाव के उपाय बताइए।
अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points
- पर्यावरण हमारे चारों ओर मौजूद प्राकृतिक, मानव निर्मित और सामाजिक परिवेश से संबंधित है।
- विश्व पर्यावरण दिवस: 5 जून।
- पर्यावरण के प्रमुख प्रकार: प्राकृतिक, मानव निर्मित और सामाजिक।
- प्रदूषण के प्रमुख प्रकार: वायु, जल, मृदा, ध्वनि और इलेक्ट्रॉनिक/रेडिएशन।
- ध्वनि की इकाई: डेसीबल (dB)।
- जल प्रदूषण: औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज, कृषि रसायन और अन्य प्रदूषकों से बढ़ सकता है।
- जलजनित रोग: हैजा और डायरिया जैसी बीमारियाँ दूषित जल से संबंधित हो सकती हैं।
- जल शोधन: उबालना और उचित कीटाणुशोधन उपयोगी उपाय हैं।
- अजैविक अपशिष्ट: प्लास्टिक और पॉलीथीन।
- मृदा संरक्षण: जैविक खाद, उचित कृषि पद्धतियाँ और वृक्षारोपण उपयोगी हैं।
- अम्लीय वर्षा: SO2 और NOx जैसे वायु प्रदूषकों से बनने वाले अम्लीय यौगिकों से संबंधित है।
- ग्लोबल वार्मिंग: ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ी हुई मात्रा से संबंधित है।
- ओजोन परत: सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- वायु प्रदूषण नियंत्रण: उत्सर्जन नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और वृक्षारोपण महत्वपूर्ण उपाय हैं।
अध्याय का निष्कर्ष
गृह विज्ञान कक्षा 12 का यह अध्याय यह संदेश देता है कि मानव जीवन का स्वास्थ्य और अस्तित्व हमारे पर्यावरण की स्वच्छता और संतुलन पर निर्भर है। यदि हम अपने स्वार्थ और आधुनिकता की अंधी दौड़ में पर्यावरण को लगातार दूषित करते रहेंगे, तो जलजनित रोग, श्वसन संबंधी बीमारियाँ, सुनने की क्षमता में कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
अतः प्रत्येक विद्यार्थी और नागरिक का कर्तव्य है कि वह वृक्षारोपण करे, प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग को कम करे, जल का संरक्षण करे, कचरे का उचित प्रबंधन करे, जैविक एवं टिकाऊ विकल्पों को अपनाए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहन दे। एक स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण ही स्वस्थ और समृद्ध समाज के निर्माण में सहायक हो सकता है।