स्वच्छ गाँव की कल्पना प्रत्येक व्यक्ति करता है। भारत की बहुसंख्यक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए देश के समग्र विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों का स्वच्छ होना अति आवश्यक है। इस अध्याय में ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों, समस्याओं तथा उनके समाधान की विस्तृत जानकारी दी गई है। स्वच्छता न केवल व्यक्तिगत शरीर के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि समाज और वातावरण की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview
ग्रामीण स्वच्छता का अर्थ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों तथा उनके आसपास के वातावरण की साफ-सफाई से है। इसका मुख्य उद्देश्य बीमारियों को रोकना, स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना है। इस अध्याय में व्यक्तिगत, घरेलू, सामुदायिक तथा पर्यावरणीय स्वच्छता के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।
मुख्य अवधारणाएँ
- ग्रामीण (Gramin): गाँव अथवा देहात।
- स्वच्छता (Sanitation/Cleanliness): अपने शरीर, वस्त्र, निवास स्थान और आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखना।
- स्वास्थ्य (Health): शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होने की स्थिति।
- ओडीएफ (ODF – Open Defecation Free): खुले में शौच से मुक्ति।
- एसबीएम (SBM – Swachh Bharat Mission): स्वच्छ भारत मिशन।
विषय 1: ग्रामीण स्वच्छता का अर्थ एवं आवश्यकता
विस्तृत व्याख्या
ग्रामीण स्वच्छता का अर्थ गाँव में रहने वाले लोगों की व्यक्तिगत सफाई तथा उनके आसपास के वातावरण, जल स्रोतों और नालियों की स्वच्छता से है।
ग्रामीण स्वच्छता की आवश्यकता एवं महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
- बीमारियों की रोकथाम: खुले में शौच और दूषित जल से हैजा, दस्त (डायरिया) जैसी बीमारियाँ फैलती हैं, जिन्हें स्वच्छता अपनाकर रोका जा सकता है।
- स्वास्थ्य में सुधार: स्वच्छ वातावरण रहने से लोग स्वस्थ और ऊर्जावान रहते हैं।
- बाल मृत्यु दर में कमी: अस्वच्छ वातावरण में बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे वे बीमारियों के शिकार होते हैं; स्वच्छता से बच्चों की मृत्यु दर घटती है।
- सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि: स्वच्छ गाँव और घर में शौचालय का निर्माण समाज में सम्मान का प्रतीक माना जाता है, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।
- स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ में कमी: गंदगी से होने वाली बीमारियों में गिरावट आने से अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर वित्तीय बोझ कम होता है।
- छात्राओं की स्कूल में उपस्थिति: विद्यालयों में शौचालयों की सुविधा उपलब्ध होने से विशेषकर लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति और ठहराव में वृद्धि हुई है।
- मानसिक शांति और सामाजिक विकास: स्वच्छ वातावरण से केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और सामाजिक विकास भी होता है।
विषय 2: स्वच्छता के प्रकार (Types of Sanitation)
विस्तृत व्याख्या
स्वच्छता को मुख्य रूप से चार प्रकारों में विभाजित किया गया है:
1. व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene)
परिभाषा: स्वयं के शरीर, वस्त्रों और आदतों को स्वच्छ रखना व्यक्तिगत स्वच्छता कहलाता है।
घटक: नियमित स्नान करना, साफ कपड़े पहनना, खाना खाने से पहले व शौच के बाद हाथ धोना तथा बाल व नाखून साफ रखना।
2. घरेलू स्वच्छता (Domestic Sanitation)
परिभाषा: घर के अंदर तथा आंगन की साफ-सफाई रखना घरेलू स्वच्छता कहलाता है।
घटक: घर की नियमित सफाई, भोजन को ढककर रखना, साफ बर्तनों का प्रयोग करना और घरेलू शौचालयों की सफाई।
3. सामुदायिक स्वच्छता (Community Sanitation)
परिभाषा: गाँव के सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई सुनिश्चित करना सामुदायिक स्वच्छता कहलाता है।
घटक: स्कूल, मंदिर, अस्पताल, पंचायत भवन, गलियों व नालियों की सफाई तथा कूड़ेदान (Dustbin) की व्यवस्था करना।
4. पर्यावरणीय स्वच्छता (Environmental Sanitation)
परिभाषा: आसपास के प्राकृतिक एवं भौतिक वातावरण को दूषित होने से बचाना पर्यावरणीय स्वच्छता कहलाता है।
घटक: जल स्रोतों (कुएँ, तालाब) की सफाई, पेड़-पौधे लगाना और प्लास्टिक व कूड़े का सही निस्तारण।
स्वच्छता के प्रकारों की तुलना
| स्वच्छता का प्रकार | मुख्य कार्य | लाभ |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत स्वच्छता | स्नान, हाथ धोना, नाखून काटना, साफ वस्त्र | व्यक्तिगत रोगों से सुरक्षा और ऊर्जावान जीवन |
| घरेलू स्वच्छता | घर, बर्तन, शौचालय की सफाई, भोजन ढकना | घर में मक्खी-मच्छर व रोगाणुओं से बचाव |
| सामुदायिक स्वच्छता | स्कूल, अस्पताल, मंदिर, गलियों व नालियों की सफाई | पूरे समाज में संक्रामक रोगों का फैलाव रुकना |
| पर्यावरणीय स्वच्छता | जल स्रोतों की सफाई, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन | पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण में कमी |
विषय 3: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़ी समस्याएँ
विस्तृत व्याख्या
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने के मार्ग में निम्नलिखित प्रमुख समस्याएँ हैं:
- शौचालयों की कमी: ग्रामीण इलाकों में कई घरों में आज भी शौचालय उपलब्ध नहीं हैं, जिससे लोग खुले में शौच करने के लिए विवश होते हैं।
- साफ पानी की अनुपलब्धता: कई गाँवों में पीने योग्य शुद्ध जल की कमी है।
- जागरूकता की कमी: ग्रामीणों में स्वच्छता के नियमों और गंदगी से होने वाली बीमारियों के प्रति अज्ञानता का होना।
- खुले में कूड़ा फेंकना: घर के कचरे और गोबर आदि को खुले में जहाँ-तहाँ फेंक देना।
- नालियों की सफाई न होना: नालियों की नियमित सफाई न होने से गंदा पानी जमा होता है, जो मच्छरों व बैक्टीरिया का केंद्र बनता है।
- योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होना: सरकारी योजनाओं का धरातल पर सही ढंग से लागू न हो पाना।
विषय 4: ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम एवं विकास का इतिहास
विस्तृत व्याख्या
भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने हेतु समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम चलाए गए हैं।
1. केंद्र प्रायोजित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (CRSP)
- शुरुआत: वर्ष 1986 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किया गया।
- तत्कालीन प्रधानमंत्री: श्री राजीव गांधी।
- उद्देश्य: ग्रामीण स्वच्छता की स्थिति सुधारना और शौचालय निर्माण को बढ़ावा देना।
2. संपूर्ण स्वच्छता अभियान (TSC – Total Sanitation Campaign)
- शुरुआत: वर्ष 1999 में CRSP का पुनर्गठन कर इसे चलाया गया।
- तत्कालीन प्रधानमंत्री: श्री अटल बिहारी वाजपेयी।
3. निर्मल भारत अभियान (NBA)
- शुरुआत: वर्ष 2012 में अभियान का नाम बदलकर निर्मल भारत अभियान किया गया।
- तत्कालीन प्रधानमंत्री: डॉ. मनमोहन सिंह।
4. स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण (SBM-G)
- शुरुआत: 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर प्रारंभ किया गया।
- प्रारंभकर्ता: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी।
- मुख्य उद्देश्य: देश को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाना, हर घर में शौचालय निर्माण, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन और जन-जागरूकता फैलाना।
- प्रथम चरण (Phase 1): 2014 से 2019 तक संचालित।
- द्वितीय चरण (Phase 2): 2020 से 2025 तक टिकाऊ स्वच्छता (Sustainable Sanitation) पर केंद्रित।
विषय 5: प्रमुख सरकारी योजनाएँ (Government Schemes)
विस्तृत व्याख्या
1. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
शौचालयों के निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा खुले में शौच की प्रथा को पूर्णतः समाप्त करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
2. नल-जल योजना (Nal-Jal Yojana)
प्रत्येक ग्रामीण घर तक पाइप के माध्यम से शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना संबंधित है।
3. स्वच्छ विद्यालय अभियान (Swachh Vidyalaya Abhiyan)
विद्यालयों में छात्र एवं छात्राओं के लिए पृथक शौचालयों का निर्माण और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
विषय 6: ग्राम पंचायत की भूमिका एवं स्वच्छता समिति
विस्तृत व्याख्या
ग्रामीण स्वच्छता को सफल बनाने में ग्राम पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्राम पंचायत के सहयोग से नालियों की सफाई, स्वच्छता संबंधी कार्यों और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है।
ग्राम पंचायत स्वच्छता समिति
ग्रामीण स्वच्छता को सुचारू रूप से चलाने के लिए ग्राम स्तर पर 12 सदस्यों की समिति गठित की जाती है।
- ग्राम पंचायत प्रतिनिधि जैसे मुखिया, वार्ड सदस्य आदि।
- 50% महिला सदस्य: आशा कर्मी, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षिकाएँ शामिल हैं।
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा समाज के कमजोर वर्गों के प्रतिनिधि।
विषय 7: ग्रामीण स्वच्छता योजना तैयार करने के चरण
विस्तृत व्याख्या
ग्रामीण स्वच्छता योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए निम्नलिखित 5 चरण अपनाए जाते हैं:
1. स्थिति का मूल्यांकन (Assessment of Situation)
गाँव में शौचालयों की उपलब्धता, जल स्रोतों और कचरा प्रबंधन का सर्वेक्षण करना स्थिति के मूल्यांकन के अंतर्गत आता है।
2. लक्ष्य निर्धारण (Goal Setting)
स्पष्ट और निश्चित समय-सीमा वाले लक्ष्य तय करना, जैसे गाँव को ODF बनाना, लक्ष्य निर्धारण कहलाता है।
3. जन सहभागिता (Community Participation)
गाँव के लोगों को शामिल करना आवश्यक है ताकि वे योजना के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और उसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग करें।
4. कार्य योजना एवं संसाधन जुटाना (Action Plan & Resource Mobilization)
योजना बनाकर आवश्यक संसाधन और धन जुटाना तथा निर्धारित कार्यों के लिए उचित व्यवस्था करना इस चरण का हिस्सा है।
5. क्रियान्वयन और निगरानी (Implementation & Monitoring)
योजना को लागू करना तथा समय-समय पर उसकी निगरानी व मूल्यांकन करके आवश्यक सुधार करना इस चरण में शामिल है।
शब्दावली / Key Terms
- ग्रामीण स्वच्छता (Rural Sanitation): गाँव के लोगों, घरों, गलियों और आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ रखने की प्रक्रिया।
- व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene): स्वयं के शरीर, वस्त्रों तथा आदतों की सफाई।
- ओडीएफ (ODF – Open Defecation Free): खुला शौच मुक्त क्षेत्र या गाँव।
- एसबीएम (SBM): स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission)।
- सीआरएसपी (CRSP): केंद्र प्रायोजित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (Central Rural Sanitation Programme)।
- कोलेस्ट्रम (Colostrum): मां के स्तन से निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध, जो शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
- जलजनित रोग (Water-borne Diseases): दूषित जल के सेवन से होने वाली बीमारियाँ जैसे दस्त और हैजा।
- आईसीडीएस (ICDS): एकीकृत बाल विकास सेवा (Integrated Child Development Scheme), जो आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों व महिलाओं के लिए कार्य करती है।
अध्याय का सारांश
ग्रामीण स्वच्छता Class 12 Home Science का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अध्याय है। स्वच्छता का अर्थ केवल शरीर को साफ रखना नहीं, बल्कि घर, समाज और पर्यावरण की समग्र स्वच्छता से है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित जल, खुले में शौच और कचरे के सही प्रबंधन के अभाव से बीमारियाँ फैलती हैं। स्वच्छता अपनाने से बीमारियों में कमी आती है, बाल मृत्यु दर घटती है, स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कम होता है और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।
भारत सरकार ने इसके लिए 1986 में CRSP, 1999 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान, 2012 में निर्मल भारत अभियान और 2 अक्टूबर 2014 से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत की। स्वच्छता को सफल बनाने में ग्राम पंचायत, स्वच्छता समिति और प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है।
त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision
- ग्रामीण = गाँव; स्वच्छता = साफ-सफाई।
- स्वच्छता के 4 प्रकार: व्यक्तिगत, घरेलू, सामुदायिक और पर्यावरणीय।
- CRSP की शुरुआत: 1986।
- संपूर्ण स्वच्छता अभियान: 1999।
- निर्मल भारत अभियान: 2012।
- स्वच्छ भारत मिशन (SBM) की शुरुआत: 2 अक्टूबर 2014।
- ODF: Open Defecation Free अर्थात खुला शौच मुक्त।
- SBM चरण 1: 2014-2019; चरण 2: 2020-2025।
- ग्राम पंचायत स्वच्छता समिति: 12 सदस्य।
- महिला भागीदारी: 50%।
- स्वच्छता योजना तैयार करने के 5 चरण: स्थिति का मूल्यांकन, लक्ष्य निर्धारण, जन सहभागिता, कार्य योजना एवं संसाधन जुटाना, और क्रियान्वयन एवं निगरानी।
- अस्वच्छता से होने वाले मुख्य जलजनित रोग: दस्त (डायरिया) और हैजा।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: स्वच्छ भारत मिशन (SBM) की शुरुआत किस तिथि को हुई थी?
(A) 15 अगस्त 2015
(B) 2 अक्टूबर 2014
(C) 26 जनवरी 2014
(D) 2 अक्टूबर 2019
सही उत्तर: (B) 2 अक्टूबर 2014
Explanation: स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर की गई थी।
प्रश्न 2: ODF का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है?
(A) Open Defecation Free
(B) Official Defecation Free
(C) Open Disease Free
(D) Outdoor Sanitation Free
सही उत्तर: (A) Open Defecation Free
Explanation: ODF का पूरा नाम Open Defecation Free है, जिसका हिंदी अर्थ ‘खुला शौच मुक्त’ होता है।
प्रश्न 3: ग्रामीण स्वच्छता से निम्नलिखित में से किस बीमारी को रोका जा सकता है?
(A) मधुमेह (Diabetes)
(B) कैंसर
(C) दस्त और हैजा
(D) इनमें से सभी
सही उत्तर: (C) दस्त और हैजा
Explanation: अस्वच्छता और दूषित खान-पान व जल से दस्त और हैजा जैसे संक्रामक रोग फैल सकते हैं, जिन्हें स्वच्छता द्वारा रोकने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 4: व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) के अंतर्गत कौन-सी बात आती है?
(A) नियमित स्नान करना
(B) साफ कपड़े पहनना
(C) नाखून काटना व साफ रखना
(D) उपयुक्त सभी
सही उत्तर: (D) उपयुक्त सभी
Explanation: नियमित स्नान करना, साफ वस्त्र पहनना, हाथ धोना और बाल व नाखून साफ रखना व्यक्तिगत स्वच्छता के मुख्य घटक हैं।
प्रश्न 5: प्रथम केंद्र प्रायोजित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (CRSP) किस वर्ष शुरू किया गया था?
(A) 1986
(B) 1999
(C) 2012
(D) 2014
सही उत्तर: (A) 1986
Explanation: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार CRSP की शुरुआत वर्ष 1986 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी।
प्रश्न 6: वर्ष 1999 में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का नाम बदलकर क्या रखा गया था?
(A) निर्मल भारत अभियान
(B) संपूर्ण स्वच्छता अभियान
(C) स्वच्छ भारत मिशन
(D) स्वच्छ ग्राम योजना
सही उत्तर: (B) संपूर्ण स्वच्छता अभियान
Explanation: वर्ष 1999 में CRSP का पुनर्गठन कर इसे संपूर्ण स्वच्छता अभियान (Total Sanitation Campaign) के रूप में चलाया गया।
प्रश्न 7: निर्मल भारत अभियान किस वर्ष शुरू किया गया था?
(A) 2005
(B) 2010
(C) 2012
(D) 2014
सही उत्तर: (C) 2012
Explanation: दिए गए स्रोत-सामग्री के अनुसार वर्ष 2012 में इस कार्यक्रम को ‘निर्मल भारत अभियान’ नाम दिया गया था।
प्रश्न 8: ग्राम पंचायत की स्वच्छता समिति में कुल कितने सदस्य शामिल होते हैं?
(A) 8 सदस्य
(B) 10 सदस्य
(C) 12 सदस्य
(D) 15 सदस्य
सही उत्तर: (C) 12 सदस्य
Explanation: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार ग्रामीण स्वच्छता समिति में 12 सदस्य होते हैं, जिनमें 50% महिलाएँ शामिल होती हैं।
प्रश्न 9: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का दूसरा चरण (Phase-II) किस अवधि के लिए संचालित है?
(A) 2014 से 2019
(B) 2019 से 2024
(C) 2020 से 2025
(D) 2021 से 2026
सही उत्तर: (C) 2020 से 2025
Explanation: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार पहला चरण 2014 से 2019 तक और दूसरा चरण 2020 से 2025 तक संचालित बताया गया है।
प्रश्न 10: निम्नलिखित में से कौन प्राथमिक रंग (Primary Color) नहीं है?
(A) लाल
(B) पीला
(C) नीला
(D) हरा
सही उत्तर: (D) हरा
Explanation: दिए गए स्रोत-सामग्री के अनुसार प्राथमिक रंग लाल, पीला और नीला बताए गए हैं। हरा रंग द्वितीयक रंग के रूप में बताया गया है।
प्रश्न 11: मां के स्तन से निकलने वाले पहले गाढ़े पीले दूध को क्या कहते हैं?
(A) कोलेस्ट्रम (Colostrum)
(B) लैक्टोज
(C) प्रोटीन
(D) प्लाज्मा
सही उत्तर: (A) कोलेस्ट्रम (Colostrum)
Explanation: मां के स्तन से निकलने वाले पहले गाढ़े पीले दूध को कोलेस्ट्रम कहा जाता है, जो शिशु को प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है।
प्रश्न 12: मानव शरीर में मुख्यतः अंतःस्रावी ग्रंथियों की संख्या कितनी होती है?
(A) 6
(B) 8
(C) 10
(D) 12
सही उत्तर: (B) 8
Explanation: दिए गए स्रोत-सामग्री में मुख्य अंतःस्रावी ग्रंथियों की संख्या 8 बताई गई है।
प्रश्न 13: 2 वर्ष से 6 वर्ष की आयु को किस अवस्था के रूप में जाना जाता है?
(A) शैशवावस्था
(B) बाल्यावस्था
(C) किशोरावस्था
(D) प्रौढ़ावस्था
सही उत्तर: (B) बाल्यावस्था
Explanation: दिए गए स्रोत-सामग्री के अनुसार 2 वर्ष से 6 वर्ष की आयु की अवधि को बाल्यावस्था कहा गया है।
प्रश्न 14: ICDS (एकीकृत बाल विकास सेवा) मुख्य रूप से किनके लिए कार्य करती है?
(A) केवल पुरुषों के लिए
(B) छोटे बच्चों और महिलाओं के लिए
(C) केवल वृद्धों के लिए
(D) केवल युवाओं के लिए
सही उत्तर: (B) छोटे बच्चों और महिलाओं के लिए
Explanation: ICDS आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तथा महिलाओं, विशेषकर गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं से संबंधित सेवाओं के लिए कार्य करती है।
प्रश्न 15: डिप्थीरिया रोग मानव शरीर के किस अंग को प्रभावित करता है?
(A) यकृत (Liver)
(B) गला (Throat)
(C) आँख
(D) पैर
सही उत्तर: (B) गला (Throat)
Explanation: डिप्थीरिया एक जीवाणु जनित रोग है जो मुख्य रूप से गले और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: स्वच्छता (Sanitation/Cleanliness) की क्या परिभाषा है?
उत्तर: अपने शरीर, पहने जाने वाले वस्त्रों, निवास स्थान (घर) तथा आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखना ही स्वच्छता कहलाता है।
प्रश्न 2: ग्रामीण स्वच्छता के दो मुख्य उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण कराकर खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करना।
- ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और जलजनित बीमारियों से बचाना।
प्रश्न 3: व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
- प्रतिदिन नियमित रूप से स्नान करना और साफ कपड़े पहनना।
- भोजन करने से पूर्व और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना।
प्रश्न 4: सामुदायिक स्वच्छता (Community Sanitation) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: गाँव के सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूल, मंदिर, अस्पताल, पंचायत भवन, गलियों और नालियों की साफ-सफाई बनाए रखना सामुदायिक स्वच्छता कहलाता है।
प्रश्न 5: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़ी दो प्रमुख समस्याएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
- ग्रामीण परिवारों में शौचालयों की कमी होना।
- पीने के लिए साफ पानी की अनुपलब्धता तथा खुले में कचरा फेंकना।
प्रश्न 6: CRSP तथा SBM का पूरा नाम (Full Form) लिखिए।
उत्तर:
- CRSP: Central Rural Sanitation Programme (केंद्र प्रायोजित ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम)।
- SBM: Swachh Bharat Mission (स्वच्छ भारत मिशन)।
प्रश्न 7: ग्राम पंचायत स्वच्छता समिति में महिलाओं की कितनी भागीदारी तय की गई है?
उत्तर: दिए गए स्रोत-सामग्री के अनुसार ग्राम पंचायत स्वच्छता समिति के कुल 12 सदस्यों में से 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिनमें आशा कर्मी, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व शिक्षिकाएँ शामिल होती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों, घटकों तथा मानव स्वास्थ्य पर इसके महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परिचय
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वच्छता योजना है, जिसे 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर प्रारंभ किया गया था।
मुख्य उद्देश्य
- भारत के ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त (ODF) बनाना।
- ग्रामीण भारत के प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण सुनिश्चित करना।
- ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन (Solid & Liquid Waste Management) हेतु उचित संसाधनों का निर्माण करना।
- ग्रामीणों में स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति व्यवहारिक बदलाव एवं जागरूकता लाना।
मानव स्वास्थ्य एवं समाज पर महत्व
- बीमारियों में कमी: खुले में शौच बंद होने और स्वच्छ वातावरण निर्मित होने से जलजनित रोगों तथा संक्रामक बीमारियों को कम करने में सहायता मिलती है।
- बाल मृत्यु दर में गिरावट: अस्वच्छता से बच्चे शीघ्र संक्रमित होते हैं। स्वच्छता से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायता मिलती है।
- स्वास्थ्य व्यय पर बोझ कम होना: गंदगी से फैलने वाली बीमारियों में कमी आने से परिवारों का इलाज पर होने वाला खर्च घट सकता है तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कम हो सकता है।
- छात्राओं की शिक्षा में सुधार: स्कूलों में शौचालयों की समुचित व्यवस्था होने से छात्राओं के लिए विद्यालयी वातावरण बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
- सामाजिक सम्मान एवं प्रतिष्ठा: घरेलू शौचालय निर्माण से महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से संबंधित परिस्थितियों में सुधार हो सकता है।
प्रश्न 2: स्वच्छता के विभिन्न प्रकारों की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए तथा ग्रामीण स्वच्छता बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय बताइए।
उत्तर:
स्वच्छता के प्रकार
- व्यक्तिगत स्वच्छता: स्वयं की शारीरिक सफाई रखना; जैसे- प्रतिदिन स्नान करना, साफ धुले कपड़े पहनना, नाखून काटना और भोजन से पहले व शौच के बाद हाथ धोना।
- घरेलू स्वच्छता: घर के आंतरिक एवं बाह्य परिसर को साफ रखना; जैसे- नियमित झाड़ू-पोंछा करना, भोजन को ढककर रखना, बर्तनों की सफाई और शौचालय साफ रखना।
- सामुदायिक स्वच्छता: सार्वजनिक संपत्तियों और स्थानों की सफाई; जैसे- स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल, मंदिर, गलियों व सार्वजनिक नालियों को साफ रखना तथा कूड़ेदान की व्यवस्था करना।
- पर्यावरणीय स्वच्छता: प्रकृति व पर्यावरण को स्वच्छ रखना; जैसे- जल स्रोतों के पास गंदगी न फैलने देना, प्लास्टिक कचरे का सही निस्तारण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
ग्रामीण स्वच्छता बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय
- हर घर में शौचालय का निर्माण कराया जाए और उसका नियमित प्रयोग सुनिश्चित हो।
- नालियों की सफाई नियमित रूप से की जाए ताकि जलभराव और मच्छर न पनपें।
- कचरे को खुले में फेंकने के बजाय निर्धारित कूड़ेदान या जैविक गड्ढों में डाला जाए।
- पीने के पानी को हमेशा ढककर रखा जाए तथा आवश्यकतानुसार उबालकर या उपयुक्त विधि से शुद्ध करके प्रयोग किया जाए।
- ग्राम पंचायत द्वारा सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और समय-समय पर निगरानी की जाए।
- ग्रामीणों में जागरूकता रैलियाँ, बैठकें व शिक्षा के माध्यम से स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा दिया जाए।
प्रश्न 3: ग्रामीण स्वच्छता योजना तैयार करने के प्रमुख चरणों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण स्वच्छता योजना को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करने के लिए 5 प्रमुख चरण अपनाए जाते हैं:
- स्थिति का मूल्यांकन (Situation Assessment): सबसे पहले गाँव में वर्तमान स्वच्छता की स्थिति का व्यापक सर्वेक्षण किया जाता है। इसमें देखा जाता है कि गाँव में कितने घरों में शौचालय हैं, जल स्रोत कितने स्वच्छ हैं और कचरा निस्तारण की क्या व्यवस्था है।
- लक्ष्य निर्धारण (Goal Setting): सर्वेक्षण के आधार पर स्पष्ट और समयबद्ध लक्ष्य तय किए जाते हैं; जैसे- गाँव को निश्चित अवधि में 100% ODF बनाना, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना या नालियों को पक्का करना।
- जन सहभागिता (Community Participation): योजना की सफलता के लिए गाँव के लोगों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, ताकि ग्रामीण योजना के प्रति जिम्मेदारी महसूस करें।
- कार्य योजना एवं संसाधन जुटाना (Action Plan & Resource Mobilization): निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु धन, सामग्री और श्रम का प्रबंध किया जाता है तथा विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाती है।
- क्रियान्वयन और निगरानी (Implementation & Monitoring): कार्य योजना को लागू किया जाता है और समय-समय पर कार्यों की निगरानी व अवलोकन किया जाता है ताकि कमियों को दूर कर योजना को टिकाऊ बनाया जा सके।
बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- ग्रामीण स्वच्छता से क्या लाभ हैं? विस्तार से समझाइए।
- व्यक्तिगत स्वच्छता में कौन-कौन सी बातें शामिल हैं?
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत कब और किसके द्वारा की गई? इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़ी प्रमुख समस्याओं एवं उनके समाधानों की चर्चा कीजिए।
- स्वच्छता के प्रमुख चार प्रकारों का वर्णन कीजिए।
- ओडीएफ (ODF) तथा एसबीएम (SBM) से आप क्या समझते हैं?
- भारत में ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों के विकास क्रम (CRSP से SBM तक) को स्पष्ट कीजिए।
- ग्राम पंचायत की स्वच्छता समिति की संरचना और उसके कार्यों पर प्रकाश डालिए।
- स्वच्छता और मानव स्वास्थ्य के बीच क्या संबंध है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
- ग्रामीण स्वच्छता योजना तैयार करने के विभिन्न चरणों को रेखांकित कीजिए।
अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points
- ग्रामीण स्वच्छता का सीधा संबंध जनस्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा से है।
- अस्वच्छ जल व भोजन से दस्त (डायरिया) व हैजा जैसे रोग हो सकते हैं।
- CRSP: 1986।
- TSC: 1999।
- NBA: 2012।
- SBM: 2014।
- SBM-G चरण 1: 2014-2019।
- SBM-G चरण 2: 2020-2025।
- स्वच्छता समिति: 12 सदस्य।
- महिला भागीदारी: 50%।
- व्यक्तिगत, घरेलू, सामुदायिक और पर्यावरणीय — ये स्वच्छता के चार मुख्य रूप हैं।
अध्याय का निष्कर्ष
ग्रामीण स्वच्छता केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्रामीण नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक कर्तव्य है। स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है। स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं तथा व्यक्तिगत व सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण भारत को न केवल स्वच्छ और रोगमुक्त बनाने में सहायता मिल सकती है, बल्कि इससे देश के सतत विकास और सामाजिक सम्मान को भी नई दिशा मिलती है।
इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने घर, गाँव, जल स्रोत, सार्वजनिक स्थान और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। ग्रामीण स्वच्छता की सफलता सरकारी योजनाओं के साथ-साथ जनभागीदारी और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर भी निर्भर करती है।