ऊर्जा के स्रोत – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 14 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 14)
“ऊर्जा के स्रोत” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के विज्ञान पाठ्यक्रम का अध्याय 14 है। इस अध्याय में ऊर्जा के विभिन्न पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोतों का अध्ययन किया जाता है। इसमें ऊर्जा के आदर्श स्रोत के गुण, जीवाश्म ईंधन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, जैवमात्रा, महासागरीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा और नाभिकीय ऊर्जा जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाया गया है।
ऊर्जा हमारे दैनिक जीवन, कृषि, उद्योग, परिवहन और घरेलू कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है। इसलिए ऐसे ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है जो पर्याप्त, सुरक्षित, सस्ते और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हों।
ऊर्जा का उत्तम स्रोत
ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह होता है जो कम मात्रा में अधिक कार्य करने की क्षमता रखता हो और जिसे आसानी से प्राप्त, भंडारित तथा परिवहित किया जा सके। एक अच्छे ऊर्जा स्रोत की लागत कम और उपयोग सुरक्षित होना चाहिए।
ऊर्जा के आदर्श स्रोत के गुण
- प्रति इकाई द्रव्यमान या आयतन अधिक ऊर्जा प्रदान करे।
- आसानी से उपलब्ध हो।
- भंडारण करना आसान हो।
- परिवहन आसानी से किया जा सके।
- सस्ता और सुरक्षित हो।
- पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचाए।
उत्तम ईंधन के गुण
उत्तम ईंधन वह है जिसका कैलोरी मान अधिक हो, जिसका ज्वलन ताप उपयुक्त हो और जिसके जलने पर कम से कम हानिकारक पदार्थ उत्पन्न हों।
- कैलोरी मान अधिक होना चाहिए।
- ज्वलन ताप मध्यम होना चाहिए।
- दहन के बाद हानिकारक गैसें कम उत्पन्न हों।
- ठोस अवशेष बहुत कम या नहीं होना चाहिए।
- सस्ता और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।
- भंडारण और परिवहन आसान होना चाहिए।
ऊर्जा के स्रोतों का वर्गीकरण
ऊर्जा के स्रोतों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है। मुख्य रूप से इन्हें नवीकरणीय और अनवीकरणीय तथा परंपरागत और गैर-परंपरागत स्रोतों में बाँटा जाता है।
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
वे ऊर्जा स्रोत जो प्रकृति में लगातार उपलब्ध होते रहते हैं और जिनका उपयोग बार-बार किया जा सकता है, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं। उदाहरण के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा और जैवमात्रा।
अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
वे ऊर्जा स्रोत जिनके भंडार सीमित हैं और जिनके समाप्त होने के बाद उन्हें पुनः बनने में बहुत लंबा समय लगता है, अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम इसके उदाहरण हैं।
जीवाश्म ईंधन
करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों और जीवों के अवशेष पृथ्वी की परतों के नीचे दब गए। लंबे समय तक उच्च ताप, उच्च दाब और ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में रहने के कारण ये अवशेष ईंधन में परिवर्तित हो गए। इन्हें जीवाश्म ईंधन कहते हैं।
कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन के प्रमुख उदाहरण हैं।
जीवाश्म ईंधन की हानियाँ
- जीवाश्म ईंधन बनने में लाखों वर्ष लगते हैं।
- इनके भंडार सीमित हैं।
- ये अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं।
- इनके जलने से वायु प्रदूषण होता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से वैश्विक ताप वृद्धि में योगदान होता है।
- सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड अम्लीय वर्षा का कारण बन सकते हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता
तकनीकी विकास और आधुनिक जीवनशैली के कारण ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है। जीवाश्म ईंधनों के सीमित भंडार और उनके उपयोग से होने वाले प्रदूषण के कारण वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता महसूस हुई है। सौर, पवन, जल, जैवमात्रा और नाभिकीय ऊर्जा जैसे स्रोत इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
पवन ऊर्जा
चलती हुई वायु में उपस्थित गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। पवन चक्की के ब्लेडों को घुमाने के लिए पवन की गतिज ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। इस घूर्णन गति से जल पंप चलाए जा सकते हैं तथा विद्युत जनित्र के माध्यम से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।
पवन ऊर्जा के लाभ
- यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
- ईंधन की आवश्यकता नहीं होती।
- वायु प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है।
- पवन ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जा सकता है।
पवन ऊर्जा की सीमाएँ
- पवन हमेशा एक समान गति से नहीं चलती।
- पवन ऊर्जा संयंत्र के लिए बड़े क्षेत्र की आवश्यकता हो सकती है।
- उपयुक्त पवन वेग वाले स्थानों पर ही इसका प्रभावी उपयोग संभव है।
- प्रारंभिक स्थापना लागत अधिक हो सकती है।
जल विद्युत
ऊँचाई पर स्थित जल में स्थितिज ऊर्जा होती है। बाँध बनाकर इस जल को ऊँचाई से नीचे गिराया जाता है और उसकी ऊर्जा से टरबाइन चलाकर विद्युत जनित्र के माध्यम से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। इस प्रकार उत्पन्न विद्युत को जल विद्युत कहते हैं।
जल विद्युत के लाभ
- यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
- ईंधन जलाने की आवश्यकता नहीं होती।
- विद्युत उत्पादन के साथ सिंचाई में भी सहायता मिल सकती है।
- बाढ़ नियंत्रण में बाँध उपयोगी हो सकते हैं।
जल विद्युत की सीमाएँ
- बाँध बनाने से बड़े क्षेत्र में भूमि जलमग्न हो सकती है।
- लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है।
- स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है।
- बाँध निर्माण में बड़ी लागत आती है।
सौर ऊर्जा
सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे विशाल प्राकृतिक स्रोत है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं। पृथ्वी पर उपलब्ध अनेक ऊर्जा स्रोत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सौर ऊर्जा से जुड़े हुए हैं।
सौर ऊर्जा का उपयोग सौर कुकर, सौर जल तापक और सौर सेल जैसे उपकरणों में किया जाता है।
सौर कुकर
सौर कुकर सूर्य की ऊर्जा का उपयोग भोजन पकाने के लिए करता है। सौर कुकर में सूर्य के प्रकाश और ऊष्मा को एकत्र करके भोजन को गर्म किया जाता है।
सौर कुकर के लिए उपयुक्त परावर्तक व्यवस्था सूर्य की किरणों को अधिक मात्रा में अवशोषित या एक स्थान पर केंद्रित करने में सहायता करती है। संकेन्द्रक प्रकार के सौर कुकर में अवतल दर्पण का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि यह समानांतर सूर्य किरणों को फोकस पर एकत्र कर सकता है।
सौर कुकर के लाभ
- ईंधन की आवश्यकता नहीं होती।
- धुआँ उत्पन्न नहीं होता।
- सौर ऊर्जा निःशुल्क उपलब्ध होती है।
- यह नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करता है।
सौर कुकर की सीमाएँ
- रात में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
- बादल वाले दिनों में इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है।
- बहुत अधिक तापमान पर भोजन तलने के लिए यह उपयुक्त नहीं होता।
- ध्रुवीय तथा अत्यधिक पहाड़ी क्षेत्रों में इसका उपयोग सीमित हो सकता है।
सौर जल तापक
सौर जल तापक सूर्य की ऊष्मा का उपयोग करके पानी को गर्म करता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से धूप वाले दिनों में किया जाता है। बादल वाले दिनों में सूर्य का पर्याप्त विकिरण उपलब्ध न होने के कारण इसकी कार्यक्षमता कम हो सकती है।
सौर सेल
सौर सेल एक ऐसी युक्ति है जो सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। सौर सेल मुख्यतः अर्द्धचालक पदार्थों से बनाए जाते हैं। सिलिकॉन सौर सेल बनाने में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला पदार्थ है।
सौर सेल के उपयोग
- कृत्रिम उपग्रहों में।
- दूरदराज के अनुसंधान केंद्रों में।
- दूरदर्शन रिले स्टेशनों में।
- ट्रैफिक लाइटों में।
- सौर ऊर्जा संयंत्रों में।
जैवमात्रा
पौधों और जीवों से प्राप्त जैविक पदार्थों को ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करने पर इसे जैवमात्रा कहा जाता है। लकड़ी, कृषि अवशेष और गोबर इसके उदाहरण हैं।
जैवमात्रा को सीधे जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जा सकती है या इससे जैव-गैस जैसे ईंधन बनाए जा सकते हैं।
जैव-गैस
जैविक पदार्थों के ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन से बनने वाली ज्वलनशील गैस को जैव-गैस कहते हैं। इसका प्रमुख घटक मीथेन (CH4) होता है।
जैव-गैस संयंत्र में गोबर और अन्य जैविक पदार्थों को पानी के साथ मिलाकर डाइजेस्टर में डाला जाता है। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीव इन पदार्थों का अपघटन करते हैं और जैव-गैस उत्पन्न होती है।
जैव-गैस के लाभ
- यह अच्छा ईंधन है।
- कम धुआँ उत्पन्न करता है।
- जैविक अपशिष्ट का उपयोग हो जाता है।
- इसके निर्माण के बाद बची स्लरी खाद के रूप में उपयोगी होती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विशेष महत्व है।
अवायुजीवी अपघटन
ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा जैविक पदार्थों का अपघटन अवायुजीवी या अनॉक्सी अपघटन कहलाता है। जैव-गैस संयंत्र में इसी प्रक्रिया द्वारा जैव-गैस का निर्माण होता है।
महासागरीय ऊर्जा
महासागर ऊर्जा के विशाल भंडार हैं। महासागरों से मुख्य रूप से सागरीय तापीय ऊर्जा, समुद्री तरंगों की ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा का दोहन किया जा सकता है।
सागरीय तापीय ऊर्जा
महासागर की ऊपरी सतह और गहराई के जल के तापमान में अंतर होता है। इस तापांतर का उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है। इस उद्देश्य से OTEC अर्थात Ocean Thermal Energy Conversion संयंत्रों का उपयोग किया जाता है।
ज्वारीय ऊर्जा
समुद्र में चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण जल के स्तर में नियमित उतार-चढ़ाव होता है। ज्वार और भाटा से प्राप्त ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं। इसका उपयोग टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पादन में किया जा सकता है।
समुद्री तरंग ऊर्जा
समुद्र की सतह पर चलने वाली तरंगों में गतिज और स्थितिज ऊर्जा होती है। उपयुक्त तकनीक द्वारा इस ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
भूतापीय ऊर्जा
पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म क्षेत्रों से प्राप्त ऊष्मा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। पृथ्वी के अंदर का तापमान बहुत अधिक होता है और कुछ स्थानों पर गर्म जल या भाप सतह के पास उपलब्ध होती है। इस ऊष्मा का उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है।
नाभिकीय ऊर्जा
परमाणु के नाभिक में संचित ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। नाभिकीय ऊर्जा मुख्यतः नाभिकीय विखंडन जैसी प्रक्रियाओं से प्राप्त की जाती है। यूरेनियम जैसे भारी नाभिकों के विखंडन से बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
नाभिकीय विखंडन
जब किसी भारी नाभिक को न्यूट्रॉन द्वारा विखंडित करके दो या अधिक हल्के नाभिकों में बाँट दिया जाता है और इसके साथ बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं।
यूरेनियम-235 का विखंडन नाभिकीय रिएक्टरों में ऊर्जा प्राप्त करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें अतिरिक्त न्यूट्रॉन भी निकल सकते हैं, जो अन्य नाभिकों के विखंडन को प्रारंभ कर सकते हैं।
नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया
जब एक नाभिक के विखंडन से उत्पन्न न्यूट्रॉन दूसरे नाभिकों का विखंडन करते हैं और यह प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रहती है, तो इसे नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया कहते हैं।
अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया
जब श्रृंखला अभिक्रिया पर नियंत्रण नहीं रहता और बहुत कम समय में बड़ी संख्या में नाभिकों का विखंडन होने लगता है, तो बहुत अधिक ऊर्जा अचानक मुक्त होती है। इसे अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया कहते हैं।
नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया
नाभिकीय रिएक्टर में श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित रखा जाता है ताकि ऊर्जा धीरे-धीरे और सुरक्षित रूप से प्राप्त की जा सके। इसके लिए नियंत्रक छड़ों और मंदक पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
नाभिकीय रिएक्टर
नाभिकीय रिएक्टर वह उपकरण है जिसमें नियंत्रित नाभिकीय विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। इसका प्रमुख उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है।
नाभिकीय रिएक्टर के प्रमुख घटक
- ईंधन: यूरेनियम जैसे विखंडनीय पदार्थ।
- मंदक: तेज न्यूट्रॉनों की गति कम करने के लिए।
- नियंत्रक छड़ें: न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए।
- शीतलक: उत्पन्न ऊष्मा को बाहर ले जाने के लिए।
- परिरक्षण: हानिकारक विकिरणों से सुरक्षा के लिए।
नाभिकीय ऊर्जा के लाभ
- बहुत कम मात्रा के ईंधन से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र लगातार बड़ी मात्रा में विद्युत ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं।
- ईंधन की ऊर्जा घनत्व बहुत अधिक होती है।
नाभिकीय ऊर्जा की सीमाएँ
- नाभिकीय दुर्घटनाओं का गंभीर खतरा हो सकता है।
- रेडियोधर्मी अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान की आवश्यकता होती है।
- नाभिकीय संयंत्र स्थापित करने में बहुत अधिक लागत आती है।
- रेडियोधर्मी विकिरण मानव और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।
ऊर्जा स्रोत और पर्यावरण
ऊर्जा के किसी भी स्रोत का उपयोग पर्यावरण पर कुछ न कुछ प्रभाव डाल सकता है। जीवाश्म ईंधनों के दहन से वायु प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। बड़े बाँध स्थानीय पर्यावरण और पारिस्थितिकी को प्रभावित कर सकते हैं। नाभिकीय ऊर्जा में रेडियोधर्मी अपशिष्ट की समस्या होती है। इसलिए ऊर्जा के स्रोतों का चयन करते समय उनकी उपयोगिता के साथ पर्यावरणीय प्रभावों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
ऊर्जा की बढ़ती माँग और उसके परिणाम
औद्योगीकरण, शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और आधुनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है। यदि ऊर्जा की माँग पूरी करने के लिए जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग किया जाता है, तो वायु प्रदूषण, वैश्विक ताप वृद्धि और अम्लीय वर्षा जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
ऊर्जा की खपत कम करने के उपाय
- ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।
- अनावश्यक विद्युत उपकरण बंद रखने चाहिए।
- सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना चाहिए।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए।
- ऊर्जा का अनावश्यक अपव्यय रोकना चाहिए।
- सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे विशाल प्राकृतिक स्रोत कौन है?
(a) कोयला (b) सूर्य (c) पेट्रोलियम (d) प्राकृतिक गैस
उत्तर: (b) सूर्य - निम्नलिखित में से कौन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है?
(a) कोयला (b) पेट्रोलियम (c) सौर ऊर्जा (d) यूरेनियम
उत्तर: (c) सौर ऊर्जा - निम्नलिखित में से कौन अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है?
(a) पवन ऊर्जा (b) सौर ऊर्जा (c) जल ऊर्जा (d) कोयला
उत्तर: (d) कोयला - जैव-गैस का मुख्य घटक कौन-सा है?
(a) ऑक्सीजन (b) मीथेन (c) नाइट्रोजन (d) हाइड्रोजन
उत्तर: (b) मीथेन - सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति कौन-सी है?
(a) सौर कुकर (b) सौर सेल (c) सौर जल तापक (d) टरबाइन
उत्तर: (b) सौर सेल - सौर कुकर में संकेन्द्रण के लिए कौन-सा दर्पण उपयुक्त है?
(a) समतल (b) उत्तल (c) अवतल (d) कोई नहीं
उत्तर: (c) अवतल - पवन ऊर्जा किस ऊर्जा का रूप है?
(a) रासायनिक ऊर्जा (b) वायु की गतिज ऊर्जा (c) नाभिकीय ऊर्जा (d) ध्वनि ऊर्जा
उत्तर: (b) वायु की गतिज ऊर्जा - नाभिकीय ऊर्जा प्राप्त करने के लिए प्रमुख विखंडनीय पदार्थ कौन-सा है?
(a) यूरेनियम (b) कार्बन (c) ऑक्सीजन (d) सिलिकॉन
उत्तर: (a) यूरेनियम - नाभिकीय विखंडन में किस कण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है?
(a) इलेक्ट्रॉन (b) न्यूट्रॉन (c) फोटॉन (d) प्रोटॉन
उत्तर: (b) न्यूट्रॉन - नाभिकीय रिएक्टर में श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
(a) लकड़ी की छड़ (b) कैडमियम की छड़ (c) काँच की छड़ (d) ताँबे की छड़
उत्तर: (b) कैडमियम की छड़ - ऊर्जा का SI मात्रक क्या है?
(a) वाट (b) जूल (c) न्यूटन (d) कैलोरी
उत्तर: (b) जूल - पवन चक्की में ऊर्जा का कौन-सा रूप उपयोगी कार्य में परिवर्तित किया जाता है?
(a) गतिज ऊर्जा (b) रासायनिक ऊर्जा (c) नाभिकीय ऊर्जा (d) प्रकाश ऊर्जा
उत्तर: (a) गतिज ऊर्जा - भूतापीय ऊर्जा किससे प्राप्त होती है?
(a) समुद्र से (b) पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से (c) सूर्य के प्रकाश से (d) पवन से
उत्तर: (b) पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से - महासागर से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का एक प्रमुख रूप कौन-सा है?
(a) ज्वारीय ऊर्जा (b) रासायनिक ऊर्जा (c) कोयला ऊर्जा (d) नाभिकीय ऊर्जा
उत्तर: (a) ज्वारीय ऊर्जा - जीवाश्म ईंधन का उदाहरण कौन-सा है?
(a) सूर्य (b) पवन (c) कोयला (d) जल
उत्तर: (c) कोयला - जीवाश्म ईंधन के जलने से मुख्य रूप से कौन-सी गैस बढ़ती है?
(a) CO2 (b) O2 (c) He (d) Ne
उत्तर: (a) CO2 - नाभिकीय रिएक्टर का प्रमुख उपयोग क्या है?
(a) भोजन पकाना (b) विद्युत ऊर्जा उत्पादन (c) पानी शुद्ध करना (d) प्रकाश उत्पन्न करना
उत्तर: (b) विद्युत ऊर्जा उत्पादन - ऊर्जा के आदर्श स्रोत में कौन-सा गुण होना चाहिए?
(a) महँगा होना (b) कठिन परिवहन (c) अधिक ऊर्जा प्रदान करना (d) अधिक प्रदूषण करना
उत्तर: (c) अधिक ऊर्जा प्रदान करना - बादल वाले दिन सौर जल तापक की कार्यक्षमता क्यों घट जाती है?
(a) हवा बंद हो जाती है (b) पर्याप्त सौर विकिरण नहीं मिलता (c) पानी जम जाता है (d) दाब बढ़ जाता है
उत्तर: (b) पर्याप्त सौर विकिरण नहीं मिलता - जैव-गैस संयंत्र में किस प्रकार का अपघटन होता है?
(a) वायवीय (b) अवायुजीवी (c) प्रकाशीय (d) रासायनिक
उत्तर: (b) अवायुजीवी
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: ऊर्जा का उत्तम स्रोत किसे कहते हैं?
उत्तर: जो स्रोत अधिक ऊर्जा प्रदान करे, आसानी से उपलब्ध हो, सुरक्षित हो तथा जिसका भंडारण और परिवहन सरल हो, उसे ऊर्जा का उत्तम स्रोत कहते हैं। - प्रश्न: जीवाश्म ईंधन क्या है?
उत्तर: प्राचीन जीवों और वनस्पतियों के अवशेषों से लाखों वर्षों में बने कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों को जीवाश्म ईंधन कहते हैं। - प्रश्न: सौर सेल क्या है?
उत्तर: सौर सेल वह युक्ति है जो सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। - प्रश्न: जैव-गैस का मुख्य घटक क्या है?
उत्तर: जैव-गैस का मुख्य घटक मीथेन है। - प्रश्न: पवन ऊर्जा क्या है?
उत्तर: गतिशील वायु में उपस्थित गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। - प्रश्न: भूतापीय ऊर्जा क्या है?
उत्तर: पृथ्वी के अंदर मौजूद गर्म क्षेत्रों से प्राप्त ऊष्मा ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं। - प्रश्न: नाभिकीय विखंडन क्या है?
उत्तर: भारी नाभिक के दो या अधिक हल्के नाभिकों में टूटने और ऊर्जा मुक्त होने की प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं। - प्रश्न: जैव-गैस किस प्रक्रिया से बनती है?
उत्तर: जैव-गैस जैविक पदार्थों के अवायुजीवी अपघटन से बनती है। - प्रश्न: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत क्या हैं?
उत्तर: वे ऊर्जा स्रोत जो प्रकृति में पुनः उपलब्ध होते रहते हैं और बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं। - प्रश्न: ऊर्जा का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: ऊर्जा का SI मात्रक जूल है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: जीवाश्म ईंधन की प्रमुख हानियाँ लिखिए।
उत्तर: जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय हैं और इनके भंडार सीमित हैं। इनके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। इनके दहन से वायु प्रदूषण होता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों का उत्सर्जन पर्यावरण को प्रभावित करता है। - प्रश्न: ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है और जीवाश्म ईंधनों के भंडार सीमित हैं। इनके उपयोग से प्रदूषण भी बढ़ता है। इसलिए ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने और पर्यावरण की रक्षा के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग आवश्यक है। - प्रश्न: पवन ऊर्जा के दो लाभ और दो सीमाएँ लिखिए।
उत्तर: लाभ: यह नवीकरणीय है और ईंधन जलाने की आवश्यकता नहीं होती। सीमाएँ: पवन की गति हमेशा समान नहीं रहती और इसके लिए उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती है। - प्रश्न: जल विद्युत के दो लाभ और दो हानियाँ लिखिए।
उत्तर: लाभ: यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है और सिंचाई तथा बाढ़ नियंत्रण में भी सहायता मिल सकती है। हानियाँ: बाँध बनाने से भूमि जलमग्न हो सकती है और लोगों का विस्थापन हो सकता है। - प्रश्न: सौर कुकर के लाभ लिखिए।
उत्तर: सौर कुकर में ईंधन की आवश्यकता नहीं होती, धुआँ उत्पन्न नहीं होता और सौर ऊर्जा निःशुल्क उपलब्ध होती है। यह स्वच्छ तथा नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करता है। - प्रश्न: सौर सेल के उपयोग लिखिए।
उत्तर: सौर सेल का उपयोग कृत्रिम उपग्रहों, दूरदराज के अनुसंधान केंद्रों, दूरदर्शन रिले स्टेशनों, ट्रैफिक लाइटों और सौर ऊर्जा संयंत्रों में किया जाता है। - प्रश्न: जैव-गैस को उत्तम ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर: जैव-गैस अच्छा ईंधन है क्योंकि यह कम धुआँ देती है, ठोस अवशेष बहुत कम छोड़ती है और जैविक अपशिष्ट से बनाई जा सकती है। इसके निर्माण के बाद बची स्लरी खाद के रूप में उपयोगी होती है। - प्रश्न: नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्व है?
उत्तर: नाभिकीय ऊर्जा से कम मात्रा के ईंधन से बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है। - प्रश्न: नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में अंतर बताइए।
उत्तर: नवीकरणीय स्रोत प्रकृति में पुनः उपलब्ध होते रहते हैं, जैसे सौर और पवन ऊर्जा। अनवीकरणीय स्रोत सीमित होते हैं और उनके पुनः बनने में बहुत लंबा समय लगता है, जैसे कोयला और पेट्रोलियम। - प्रश्न: नाभिकीय रिएक्टर में नियंत्रक छड़ों का क्या कार्य है?
उत्तर: नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया की दर को नियंत्रित करती हैं। इससे रिएक्टर में उत्पन्न ऊर्जा को सुरक्षित सीमा में रखा जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: जैव-गैस प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर: जैव-गैस संयंत्र में गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों को पानी के साथ मिलाकर डाइजेस्टर में डाला जाता है। डाइजेस्टर में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति रहती है। अवायुजीवी सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों का अपघटन करते हैं और इसके परिणामस्वरूप मीथेन सहित विभिन्न गैसों का मिश्रण उत्पन्न होता है, जिसे जैव-गैस कहते हैं। इस गैस को पाइप के माध्यम से ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। डाइजेस्टर में बची स्लरी नाइट्रोजन और फॉस्फोरस यौगिकों से समृद्ध होती है और खाद के रूप में उपयोगी होती है। - प्रश्न: पवन चक्की का कार्य-सिद्धांत और उपयोग समझाइए।
उत्तर: पवन चक्की वायु की गतिज ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। जब तेज हवा पवन चक्की के ब्लेडों से टकराती है, तो ब्लेड घूमने लगते हैं। ब्लेडों की घूर्णन गति से जल पंप या अन्य यांत्रिक उपकरण चलाए जा सकते हैं। इसी सिद्धांत पर आधारित पवन टरबाइन को विद्युत जनित्र से जोड़कर विद्युत ऊर्जा भी उत्पन्न की जाती है। - प्रश्न: सौर कुकर की संरचना, कार्यविधि और लाभ समझाइए।
उत्तर: सौर कुकर में सूर्य की किरणों को अवशोषित या केंद्रित करके ऊष्मा प्राप्त की जाती है। बॉक्स प्रकार के सौर कुकर में अंदर की सतह सामान्यतः काली होती है और ऊपर काँच का ढक्कन लगाया जाता है। काली सतह अधिक सौर विकिरण अवशोषित करती है और काँच का ढक्कन अंदर की ऊष्मा को बाहर निकलने से कम करता है। इस प्रकार अंदर का तापमान बढ़ता है और भोजन गर्म या पक जाता है। इसके प्रमुख लाभ हैं कि इसमें ईंधन की आवश्यकता नहीं होती, धुआँ नहीं निकलता और सौर ऊर्जा निःशुल्क उपलब्ध होती है। - प्रश्न: सौर सेल क्या है? इसके उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सौर सेल एक ऐसी युक्ति है जो सौर प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। सौर सेल अर्द्धचालक पदार्थों से बनाए जाते हैं। सिलिकॉन इसका प्रमुख उदाहरण है। इनका उपयोग कृत्रिम उपग्रहों, दूरसंचार केंद्रों, दूरदराज के क्षेत्रों, ट्रैफिक लाइटों, कैलकुलेटर और सौर विद्युत संयंत्रों में किया जाता है। सौर सेल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें ईंधन की आवश्यकता नहीं होती और सूर्य का प्रकाश नवीकरणीय स्रोत है। - प्रश्न: महासागर से ऊर्जा के विभिन्न रूपों का दोहन कैसे किया जा सकता है?
उत्तर: महासागर में सागरीय तापीय ऊर्जा, समुद्री तरंगों की ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा उपलब्ध होती है। महासागर की ऊपरी और गहरी परतों के तापांतर का उपयोग OTEC संयंत्रों में किया जा सकता है। समुद्री तरंगों की गति से यांत्रिक उपकरण चलाए जा सकते हैं और ज्वार-भाटा के कारण जल के आवागमन से टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पन्न की जा सकती है। हालांकि इन स्रोतों का बड़े स्तर पर उपयोग तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण सीमित है। - प्रश्न: नाभिकीय रिएक्टर की कार्यविधि समझाइए।
उत्तर: नाभिकीय रिएक्टर में यूरेनियम जैसे विखंडनीय पदार्थ का नियंत्रित नाभिकीय विखंडन कराया जाता है। विखंडन से ऊर्जा और न्यूट्रॉन निकलते हैं। मंदक पदार्थ तेज न्यूट्रॉनों की गति कम करता है ताकि वे आगे विखंडन कर सकें। नियंत्रक छड़ें अतिरिक्त न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके श्रृंखला अभिक्रिया की गति नियंत्रित करती हैं। विखंडन से उत्पन्न ऊष्मा का उपयोग पानी को भाप में बदलने के लिए किया जाता है और भाप टरबाइन को घुमाती है। टरबाइन जनित्र को चलाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है। - प्रश्न: ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है? ऊर्जा बचाने के उपाय लिखिए।
उत्तर: ऊर्जा की बढ़ती माँग के कारण जीवाश्म ईंधनों का अधिक उपयोग होता है, जिससे वायु प्रदूषण, कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन और वैश्विक ताप वृद्धि जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। ऊर्जा बचाने के लिए ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग करना चाहिए, अनावश्यक बिजली बंद रखनी चाहिए, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना चाहिए और सौर तथा पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग करना चाहिए।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- ऊर्जा के आदर्श स्रोत के गुण लिखिए।
- उत्तम ईंधन के गुणों को समझाइए।
- जीवाश्म ईंधन क्या है? इसके उदाहरण और हानियाँ लिखिए।
- हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं?
- पवन ऊर्जा का कार्य-सिद्धांत समझाइए।
- पवन ऊर्जा की सीमाएँ लिखिए।
- जल विद्युत क्या है? इसके लाभ और हानियाँ लिखिए।
- सौर ऊर्जा क्या है? इसके प्रमुख उपयोग लिखिए।
- सौर कुकर का सिद्धांत और कार्यविधि समझाइए।
- सौर सेल क्या है? इसके उपयोग लिखिए।
- जैव-गैस प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाइए।
- अवायुजीवी अपघटन क्या है?
- महासागर से प्राप्त होने वाली ऊर्जाओं के नाम लिखिए।
- OTEC शक्ति संयंत्र क्या है?
- भूतापीय ऊर्जा क्या है?
- नाभिकीय विखंडन क्या है?
- नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया को समझाइए।
- नाभिकीय रिएक्टर के प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
- नियंत्रित और अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया में अंतर बताइए।
- ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के पर्यावरणीय परिणाम और ऊर्जा बचाने के उपाय लिखिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे विशाल प्राकृतिक स्रोत है।
- सौर, पवन और जल ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं।
- कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन हैं।
- जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं।
- जैव-गैस का मुख्य घटक मीथेन है।
- जैव-गैस अवायुजीवी अपघटन से बनती है।
- सौर सेल सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
- सौर कुकर में सूर्य की ऊष्मा का उपयोग भोजन पकाने के लिए किया जाता है।
- पवन चक्की वायु की गतिज ऊर्जा का उपयोग करती है।
- महासागरों से तापीय, तरंग और ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के अंदर की ऊष्मा से प्राप्त होती है।
- नाभिकीय विखंडन में भारी नाभिक टूटकर हल्के नाभिक बनाते हैं।
- नाभिकीय रिएक्टर में नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया होती है।
- नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके श्रृंखला अभिक्रिया नियंत्रित करती हैं।
- ऊर्जा की बढ़ती माँग से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 14 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 14 “ऊर्जा के स्रोत” है। - प्रश्न: ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत कौन है?
उत्तर: सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे विशाल प्राकृतिक स्रोत है। - प्रश्न: जीवाश्म ईंधन क्या हैं?
उत्तर: कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों को जीवाश्म ईंधन कहते हैं। ये प्राचीन जैविक अवशेषों से लाखों वर्षों में बने हैं। - प्रश्न: जैव-गैस का मुख्य घटक क्या है?
उत्तर: जैव-गैस का मुख्य घटक मीथेन है। - प्रश्न: सौर सेल का क्या कार्य है?
उत्तर: सौर सेल सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। - प्रश्न: सौर कुकर के लिए कौन-सा दर्पण उपयुक्त होता है?
उत्तर: संकेन्द्रक सौर कुकर में अवतल दर्पण सूर्य की किरणों को एक स्थान पर केंद्रित करने के लिए उपयुक्त होता है। - प्रश्न: नाभिकीय रिएक्टर में ऊर्जा कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर: नाभिकीय रिएक्टर में यूरेनियम जैसे पदार्थों के नियंत्रित नाभिकीय विखंडन से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है। - प्रश्न: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत क्या हैं?
उत्तर: जो ऊर्जा स्रोत प्रकृति में पुनः उपलब्ध होते रहते हैं और बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं, उन्हें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहते हैं। - प्रश्न: नाभिकीय ऊर्जा की एक प्रमुख समस्या क्या है?
उत्तर: नाभिकीय ऊर्जा में रेडियोधर्मी अपशिष्ट और दुर्घटना की स्थिति में विकिरण का खतरा प्रमुख समस्या है। - प्रश्न: ऊर्जा की खपत कम करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: ऊर्जा की बचत से सीमित ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण होता है, प्रदूषण कम होता है और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 14)
“ऊर्जा के स्रोत” अध्याय में ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों और उनके उपयोग, लाभ तथा सीमाओं का अध्ययन किया जाता है। जीवाश्म ईंधनों के सीमित भंडार और उनसे होने वाले प्रदूषण के कारण नवीकरणीय तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, जैव-गैस, महासागरीय ऊर्जा और भूतापीय ऊर्जा भविष्य के लिए महत्वपूर्ण विकल्प हैं।
नाभिकीय ऊर्जा भी कम मात्रा के ईंधन से अधिक ऊर्जा प्रदान कर सकती है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और रेडियोधर्मी अपशिष्ट जैसी चुनौतियाँ जुड़ी हैं। इसलिए ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग, ऊर्जा की बचत और पर्यावरण-अनुकूल स्रोतों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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