हमारा पर्यावरण – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 15 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 15)
“हमारा पर्यावरण” BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 15 है। इस अध्याय में पर्यावरण, पारितंत्र, जैविक एवं अजैविक घटक, उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, पोषी स्तर, ऊर्जा का प्रवाह, जैव आवर्धन, ओजोन परत तथा पर्यावरणीय प्रदूषण जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।
मनुष्य सहित सभी जीव अपने अस्तित्व के लिए पर्यावरण पर निर्भर हैं। वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश, तापमान, पौधे, जन्तु और सूक्ष्मजीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनमें किसी एक घटक में होने वाला परिवर्तन पूरे पारितंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसलिए पर्यावरण का संरक्षण केवल प्रकृति की रक्षा नहीं बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
पर्यावरण क्या है?
जीवों के चारों ओर उपस्थित वे सभी जैविक और अजैविक परिस्थितियाँ, जो उनके जीवन, वृद्धि, विकास और क्रियाओं को प्रभावित करती हैं, मिलकर पर्यावरण कहलाती हैं।
पर्यावरण के मुख्य रूप से दो घटक होते हैं—जैविक घटक और अजैविक घटक। पौधे, जन्तु और सूक्ष्मजीव जैविक घटक हैं, जबकि वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश और तापमान आदि अजैविक घटक हैं।
पर्यावरण के जैविक घटक
पर्यावरण में उपस्थित सभी जीवित घटकों को जैविक घटक कहते हैं। इनमें पौधे, जन्तु तथा सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं। पारितंत्र में जैविक घटकों को मुख्य रूप से उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक के रूप में समझा जाता है।
उत्पादक
हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य के प्रकाश की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसलिए इन्हें उत्पादक कहा जाता है। वे पारितंत्र में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख माध्यम हैं।
हरे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बनिक भोजन का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया में सूर्य की प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित होकर भोजन में संचित हो जाती है।
उपभोक्ता
जो जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें उपभोक्ता कहा जाता है। अधिकांश जन्तु उपभोक्ता होते हैं।
प्राथमिक उपभोक्ता
जो जीव सीधे हरे पौधों या उत्पादकों को खाते हैं, वे प्राथमिक उपभोक्ता कहलाते हैं। ये सामान्यतः शाकाहारी होते हैं। उदाहरण के लिए गाय, बकरी, हिरन, खरगोश और टिड्डा।
द्वितीयक उपभोक्ता
जो जीव प्राथमिक उपभोक्ताओं का भोजन करते हैं, उन्हें द्वितीयक उपभोक्ता कहा जाता है। उदाहरण के लिए मेंढक, छिपकली और कुछ मांसाहारी पक्षी।
तृतीयक उपभोक्ता
जो जीव द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं और खाद्य श्रृंखला के उच्च स्तर पर स्थित होते हैं, उन्हें तृतीयक या उच्च श्रेणी के उपभोक्ता कहा जाता है। उदाहरण के लिए बाज और कुछ बड़े मांसाहारी जन्तु।
अपघटक
मृत पौधों, जन्तुओं तथा अन्य जैविक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ने वाले सूक्ष्मजीव अपघटक कहलाते हैं। बैक्टीरिया और कवक इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
अपघटक मृत जीवों के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। इससे पोषक तत्व पुनः मिट्टी और पर्यावरण में लौट आते हैं और उनका दोबारा उपयोग संभव होता है। इसलिए अपघटक पारितंत्र में पदार्थों के पुनर्चक्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
पर्यावरण के अजैविक घटक
पर्यावरण के निर्जीव घटकों को अजैविक घटक कहा जाता है। इनमें वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश, तापमान, आर्द्रता, खनिज लवण तथा अन्य भौतिक और रासायनिक कारक शामिल होते हैं।
अजैविक घटकों के प्रमुख उदाहरण
- वायु
- जल
- मृदा
- सूर्य का प्रकाश
- तापमान
- खनिज लवण
- आर्द्रता
- वायुमंडलीय गैसें
पारितंत्र
किसी क्षेत्र के जैविक घटकों और उनके अजैविक वातावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं से बने तंत्र को पारितंत्र या पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं।
किसी तालाब, जंगल, घासभूमि या खेत को पारितंत्र का उदाहरण माना जा सकता है। एक पारितंत्र में उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक तथा अजैविक घटक परस्पर जुड़े होते हैं।
पारितंत्र के प्रमुख घटक
पारितंत्र को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है:
- जैविक घटक: उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक।
- अजैविक घटक: जल, वायु, मिट्टी, प्रकाश, तापमान और खनिज आदि।
पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह
पारितंत्र में ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है। हरे पौधे सूर्य की प्रकाश ऊर्जा को प्रकाश संश्लेषण द्वारा रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। यह ऊर्जा भोजन के माध्यम से प्राथमिक उपभोक्ताओं और फिर अन्य उपभोक्ताओं तक पहुँचती है।
ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है। अर्थात ऊर्जा सूर्य से उत्पादकों और फिर विभिन्न उपभोक्ता स्तरों तक जाती है। यह ऊर्जा पुनः उसी रूप में सूर्य के पास वापस नहीं लौटती।
खाद्य श्रृंखला
किसी पारितंत्र में जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण का क्रम खाद्य श्रृंखला कहलाता है। इसमें एक जीव दूसरे जीव का भोजन बनता है और इस प्रकार ऊर्जा एक स्तर से दूसरे स्तर तक पहुँचती है।
उदाहरण:
घास → हिरन → शेर
इस खाद्य श्रृंखला में घास उत्पादक है, हिरन प्राथमिक उपभोक्ता है और शेर उच्च श्रेणी का उपभोक्ता है।
खाद्य श्रृंखला के अन्य उदाहरण
- घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज
- पौधे → कीट → पक्षी → बाज
- शैवाल → छोटी मछली → बड़ी मछली → पक्षी
पोषी स्तर
खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक चरण या स्तर को पोषी स्तर कहा जाता है।
- प्रथम पोषी स्तर: उत्पादक
- द्वितीय पोषी स्तर: प्राथमिक उपभोक्ता
- तृतीय पोषी स्तर: द्वितीयक उपभोक्ता
- चतुर्थ पोषी स्तर: तृतीयक या उच्च उपभोक्ता
जैसे—घास → हिरन → शेर में घास प्रथम पोषी स्तर, हिरन द्वितीय पोषी स्तर और शेर तृतीय पोषी स्तर पर है।
खाद्य जाल
प्रकृति में सामान्यतः एक जीव केवल एक ही प्रकार का भोजन नहीं करता। एक ही जीव कई खाद्य श्रृंखलाओं का हिस्सा हो सकता है। जब अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ जाती हैं, तो उनके जटिल संबंधों का जाल खाद्य जाल कहलाता है।
खाद्य जाल किसी पारितंत्र को अधिक स्थिर बनाता है क्योंकि जीवों के पास भोजन के अनेक विकल्प हो सकते हैं।
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर
| आधार | खाद्य श्रृंखला | खाद्य जाल |
|---|---|---|
| अर्थ | जीवों में भोजन का एक क्रम | अनेक खाद्य श्रृंखलाओं का आपसी संबंध |
| संरचना | सरल और अपेक्षाकृत सीधी | जटिल और जाल जैसी |
| भोजन के विकल्प | सीमित | अनेक |
| स्थिरता | अपेक्षाकृत कम | अपेक्षाकृत अधिक |
10 प्रतिशत का नियम
खाद्य श्रृंखला में एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर तक ऊर्जा का केवल लगभग 10 प्रतिशत भाग ही स्थानांतरित होता है। शेष ऊर्जा का बड़ा भाग जीवों की जीवन-क्रियाओं में खर्च हो जाता है और ऊष्मा के रूप में बाहर निकल जाता है।
इसी कारण खाद्य श्रृंखलाएँ सामान्यतः बहुत लंबी नहीं होतीं और उच्च पोषी स्तरों पर उपलब्ध ऊर्जा कम होती जाती है।
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ
वे पदार्थ जिन्हें सूक्ष्मजीव प्राकृतिक रूप से सरल पदार्थों में तोड़ सकते हैं, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए सब्जियों के छिलके, कागज, पत्तियाँ, लकड़ी और जैविक कचरा।
इन पदार्थों का उचित अपघटन होने पर वे प्राकृतिक चक्र में वापस शामिल हो जाते हैं।
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
वे पदार्थ जिन्हें सूक्ष्मजीव आसानी से सरल पदार्थों में नहीं बदल सकते, अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं। प्लास्टिक, कुछ रासायनिक पदार्थ और अनेक कृत्रिम पदार्थ इसके उदाहरण हैं।
इन पदार्थों का अत्यधिक संचय पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है क्योंकि ये लंबे समय तक पर्यावरण में बने रह सकते हैं।
जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अंतर
| आधार | जैव निम्नीकरणीय | अजैव निम्नीकरणीय |
|---|---|---|
| अपघटन | सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से अपघटित | आसानी से अपघटित नहीं |
| पर्यावरण में बने रहने की अवधि | आमतौर पर कम | लंबी |
| उदाहरण | पत्तियाँ, कागज, भोजन का कचरा | प्लास्टिक, कुछ रसायन |
जैव आवर्धन
जब किसी अजैव निम्नीकरणीय विषैले रसायन की मात्रा खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक उच्च पोषी स्तर पर बढ़ती जाती है, तो इस घटना को जैव आवर्धन कहते हैं।
उदाहरण के लिए कुछ कीटनाशक जल या मिट्टी से पौधों में पहुँच सकते हैं। पौधों को खाने वाले शाकाहारी जीवों में इनकी मात्रा बढ़ सकती है और आगे मांसाहारी जीवों तक पहुँचते-पहुँचते इनकी सांद्रता और अधिक हो सकती है।
इसका प्रभाव खाद्य श्रृंखला के उच्च स्तर पर स्थित जीवों और मनुष्यों पर गंभीर हो सकता है।
ओजोन
ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है, जिसके एक अणु में तीन ऑक्सीजन परमाणु होते हैं। इसका रासायनिक सूत्र O3 है। वायुमंडल के ऊपरी भाग में ओजोन की परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों के एक बड़े हिस्से को अवशोषित करती है।
ओजोन परत का महत्व
सूर्य से आने वाली पराबैंगनी अर्थात UV विकिरण जीवों के लिए हानिकारक हो सकती है। ओजोन परत इन विकिरणों का एक महत्वपूर्ण भाग अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने में सहायता करती है।
ओजोन परत का क्षरण
कुछ रासायनिक पदार्थ, विशेषकर क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे यौगिक, वायुमंडल की ऊपरी परतों में पहुँचकर ओजोन के विनाश की प्रक्रिया में योगदान कर सकते हैं। ओजोन परत के क्षरण से अधिक UV विकिरण पृथ्वी की सतह तक पहुँच सकता है।
ओजोन क्षरण के संभावित प्रभाव
- त्वचा को नुकसान और त्वचा कैंसर का जोखिम बढ़ना।
- आँखों पर प्रतिकूल प्रभाव।
- पौधों की वृद्धि और उत्पादकता प्रभावित होना।
- जलीय एवं स्थलीय पारितंत्रों पर प्रभाव पड़ना।
पर्यावरण प्रदूषण
जब पर्यावरण में ऐसे अवांछित पदार्थ या ऊर्जा की मात्रा बढ़ जाती है जिससे प्राकृतिक संतुलन और जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो इसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।
वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण के प्रमुख माध्यम हैं। प्रदूषण प्राकृतिक कारणों से भी हो सकता है, लेकिन आधुनिक समय में मानवीय गतिविधियाँ इसका प्रमुख कारण हैं।
वायु प्रदूषण
वायु में धुआँ, विषैली गैसें, धूल-कण और अन्य हानिकारक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाने से वायु प्रदूषण होता है। वाहन, कारखाने, ईंधन का दहन और औद्योगिक गतिविधियाँ इसके प्रमुख कारण हैं।
वायु प्रदूषण के प्रभाव
- श्वसन संबंधी समस्याएँ।
- वायु की गुणवत्ता में कमी।
- पौधों की वृद्धि पर प्रभाव।
- अम्लीय वर्षा की संभावना।
- जलवायु परिवर्तन में योगदान।
जल प्रदूषण
जब जल में ऐसे अवांछित पदार्थ मिल जाते हैं जो उसके भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों को खराब कर देते हैं, तो इसे जल प्रदूषण कहते हैं। घरेलू अपशिष्ट, औद्योगिक रसायन, कृषि रसायन और रोगजनक सूक्ष्मजीव जल प्रदूषण के प्रमुख कारण हो सकते हैं।
मृदा प्रदूषण
मिट्टी में हानिकारक रसायनों, प्लास्टिक, औद्योगिक अपशिष्ट तथा अन्य प्रदूषकों के अत्यधिक संचय से मृदा प्रदूषण होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता और जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अम्लीय वर्षा
वायु में मौजूद सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड जलवाष्प के साथ अभिक्रिया करके अम्लीय पदार्थ बना सकते हैं। जब ऐसे अम्ल वर्षा के जल के साथ पृथ्वी पर पहुँचते हैं, तो इसे अम्लीय वर्षा कहा जाता है।
अम्लीय वर्षा से मिट्टी, जल स्रोत, वनस्पति तथा ऐतिहासिक इमारतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रीनहाउस प्रभाव
वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा के एक भाग को रोककर पृथ्वी के तापमान को प्रभावित करती हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया को ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है।
कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, जलवाष्प आदि ग्रीनहाउस गैसों के उदाहरण हैं। इन गैसों की मात्रा में अत्यधिक वृद्धि से वैश्विक ताप वृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
वैश्विक ताप वृद्धि
ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि को वैश्विक ताप वृद्धि कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप हिमनदों का पिघलना, समुद्र स्तर में वृद्धि, मौसम के स्वरूप में बदलाव और पारिस्थितिक तंत्रों पर प्रभाव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
सुपोषण
जलाशयों में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों की अत्यधिक मात्रा पहुँचने से शैवाल और अन्य जलीय पौधों की अत्यधिक वृद्धि हो सकती है। इस घटना को सुपोषण या Eutrophication कहते हैं।
शैवाल की अत्यधिक वृद्धि और बाद में उनके अपघटन से जल में घुली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियाँ पैदा होती हैं।
मृदा अपरदन
जल या वायु जैसे प्राकृतिक कारकों द्वारा मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत के हटने की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं। पेड़ों की कटाई, अत्यधिक चराई, गलत कृषि पद्धतियाँ और भूमि का अनुचित उपयोग भी मृदा अपरदन को बढ़ा सकते हैं।
मृदा अपरदन रोकने के उपाय
- अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना।
- वनस्पति आवरण बनाए रखना।
- ढलान वाले क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती करना।
- अत्यधिक चराई पर नियंत्रण करना।
- मिट्टी और जल संरक्षण की उचित तकनीकों का उपयोग करना।
कचरा प्रबंधन
पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए कचरे का उचित प्रबंधन आवश्यक है। कचरे को उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग करना चाहिए। जैविक कचरे से खाद बनाई जा सकती है, जबकि पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को रिसाइकिल किया जा सकता है।
कचरा कम करने के उपाय
- एकल-उपयोग प्लास्टिक का कम उपयोग करना।
- कपड़े या पुनः उपयोग योग्य थैलों का प्रयोग करना।
- जैविक कचरे से कम्पोस्ट बनाना।
- कागज, धातु और काँच जैसी वस्तुओं का पुनर्चक्रण करना।
- कचरे को गीले और सूखे रूप में अलग करना।
पर्यावरण संरक्षण में हमारी भूमिका
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक व्यवहार में छोटे-छोटे बदलाव करके पर्यावरण की रक्षा में योगदान दे सकता है। बिजली और पानी की बचत, पेड़ लगाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, प्लास्टिक का कम उपयोग तथा कचरे का उचित निपटान इसके सरल उपाय हैं।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- पारितंत्र के प्रमुख घटक कौन-से हैं?
(a) केवल जैविक घटक (b) केवल अजैविक घटक (c) जैविक और अजैविक दोनों (d) केवल उत्पादक
उत्तर: (c) जैविक और अजैविक दोनों
- हरे पौधों को क्या कहा जाता है?
(a) उपभोक्ता (b) उत्पादक (c) अपघटक (d) परजीवी
उत्तर: (b) उत्पादक
- निम्न में से कौन अपघटक है?
(a) गाय (b) घास (c) कवक (d) हिरन
उत्तर: (c) कवक
- खाद्य श्रृंखला का प्रथम पोषी स्तर कौन होता है?
(a) प्राथमिक उपभोक्ता (b) उत्पादक (c) द्वितीयक उपभोक्ता (d) अपघटक
उत्तर: (b) उत्पादक
- घास → हिरन → शेर में हिरन किस पोषी स्तर पर है?
(a) प्रथम (b) द्वितीय (c) तृतीय (d) चतुर्थ
उत्तर: (b) द्वितीय
- खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह कैसा होता है?
(a) द्विदिशीय (b) एकदिशीय (c) वृत्ताकार (d) कोई निश्चित दिशा नहीं
उत्तर: (b) एकदिशीय
- एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक लगभग कितनी ऊर्जा पहुँचती है?
(a) 1 प्रतिशत (b) 5 प्रतिशत (c) 10 प्रतिशत (d) 50 प्रतिशत
उत्तर: (c) 10 प्रतिशत
- प्लास्टिक किस प्रकार का पदार्थ है?
(a) जैव निम्नीकरणीय (b) अजैव निम्नीकरणीय (c) प्राकृतिक खाद (d) अपघटक
उत्तर: (b) अजैव निम्नीकरणीय
- जैव आवर्धन किससे संबंधित है?
(a) ऊर्जा की वृद्धि (b) विषैले रसायनों की सांद्रता में वृद्धि (c) जल की मात्रा (d) ऑक्सीजन उत्पादन
उत्तर: (b) विषैले रसायनों की सांद्रता में वृद्धि
- ओजोन का रासायनिक सूत्र क्या है?
(a) O (b) O2 (c) O3 (d) CO2
उत्तर: (c) O3
- ओजोन परत किस विकिरण से हमारी रक्षा करती है?
(a) अवरक्त (b) पराबैंगनी (c) रेडियो तरंग (d) ध्वनि तरंग
उत्तर: (b) पराबैंगनी
- वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण कौन-सा है?
(a) वृक्षारोपण (b) वाहन और उद्योगों से निकलने वाला धुआँ (c) वर्षा (d) प्रकाश संश्लेषण
उत्तर: (b) वाहन और उद्योगों से निकलने वाला धुआँ
- ग्रीनहाउस गैस का उदाहरण कौन-सा है?
(a) ऑक्सीजन (b) कार्बन डाइऑक्साइड (c) नीयॉन (d) हीलियम
उत्तर: (b) कार्बन डाइऑक्साइड
- जल में पोषक लवणों की अत्यधिक वृद्धि से होने वाली घटना क्या कहलाती है?
(a) जैव आवर्धन (b) सुपोषण (c) मृदा अपरदन (d) अम्ल वर्षा
उत्तर: (b) सुपोषण
- मिट्टी की ऊपरी परत के हटने को क्या कहते हैं?
(a) मृदा अपरदन (b) जैव आवर्धन (c) अपघटन (d) सुपोषण
उत्तर: (a) मृदा अपरदन
- निम्न में से कौन जैव निम्नीकरणीय पदार्थ है?
(a) प्लास्टिक (b) काँच (c) सब्जियों के छिलके (d) धातु
उत्तर: (c) सब्जियों के छिलके
- निम्न में से कौन प्राथमिक उपभोक्ता है?
(a) घास (b) हिरन (c) शेर (d) बाज
उत्तर: (b) हिरन
- पर्यावरण में मृत जीवों के अपघटन का कार्य कौन करते हैं?
(a) उत्पादक (b) उपभोक्ता (c) अपघटक (d) परजीवी
उत्तर: (c) अपघटक
- अम्लीय वर्षा मुख्यतः किन गैसों के कारण होती है?
(a) ऑक्सीजन और हाइड्रोजन (b) सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड (c) हीलियम और नीयॉन (d) केवल ऑक्सीजन
उत्तर: (b) सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
- पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे उपयुक्त व्यवहार कौन-सा है?
(a) अनावश्यक बिजली जलाना (b) प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग (c) ऊर्जा और संसाधनों की बचत (d) कचरा खुले में फेंकना
उत्तर: (c) ऊर्जा और संसाधनों की बचत
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: पर्यावरण क्या है?
उत्तर: जीवों के चारों ओर उपस्थित जैविक और अजैविक परिस्थितियों के समुच्चय को पर्यावरण कहते हैं।
- प्रश्न: पारितंत्र क्या है?
उत्तर: जैविक घटकों और उनके अजैविक वातावरण के बीच पारस्परिक क्रियाओं से बना तंत्र पारितंत्र कहलाता है।
- प्रश्न: उत्पादक किसे कहते हैं?
उत्तर: जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें उत्पादक कहते हैं। हरे पौधे इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- प्रश्न: अपघटक कौन होते हैं?
उत्तर: बैक्टीरिया और कवक जैसे जीव जो मृत जैविक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदलते हैं, अपघटक कहलाते हैं।
- प्रश्न: खाद्य श्रृंखला क्या है?
उत्तर: जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण के क्रम को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।
- प्रश्न: पोषी स्तर क्या है?
उत्तर: खाद्य श्रृंखला का प्रत्येक भोजन स्तर पोषी स्तर कहलाता है।
- प्रश्न: जैव आवर्धन क्या है?
उत्तर: खाद्य श्रृंखला के उच्च पोषी स्तरों पर विषैले अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों की सांद्रता बढ़ने की घटना जैव आवर्धन कहलाती है।
- प्रश्न: ओजोन का सूत्र क्या है?
उत्तर: ओजोन का रासायनिक सूत्र O3 है।
- प्रश्न: मृदा अपरदन क्या है?
उत्तर: जल या वायु द्वारा मिट्टी की ऊपरी परत के हटने की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं।
- प्रश्न: सुपोषण क्या है?
उत्तर: जल में पोषक तत्वों की अत्यधिक वृद्धि के कारण शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होने की घटना को सुपोषण कहते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: पारितंत्र में अपघटकों की क्या भूमिका है?
उत्तर: अपघटक मृत पौधों और जन्तुओं के जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदलते हैं। इससे पोषक तत्व मिट्टी और पर्यावरण में वापस पहुँचते हैं तथा पदार्थों का पुनर्चक्रण बना रहता है।
- प्रश्न: जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अंतर बताइए।
उत्तर: जैव निम्नीकरणीय पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं, जैसे पत्तियाँ और भोजन का कचरा। अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ आसानी से अपघटित नहीं होते, जैसे प्लास्टिक और कुछ कृत्रिम रसायन।
- प्रश्न: खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय क्यों होता है?
उत्तर: ऊर्जा सूर्य से उत्पादकों में आती है और फिर विभिन्न उपभोक्ता स्तरों तक पहुँचती है। प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में निकल जाता है, इसलिए ऊर्जा उसी रूप में वापस पिछले स्तर पर नहीं लौटती।
- प्रश्न: जैव आवर्धन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जब कोई अजैव निम्नीकरणीय विषैला पदार्थ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करता है और उच्च पोषी स्तरों पर उसकी सांद्रता बढ़ती जाती है, तो इसे जैव आवर्धन कहते हैं। कुछ कीटनाशक इसका उदाहरण हैं।
- प्रश्न: ओजोन परत हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक UV किरणों के एक बड़े भाग को अवशोषित करती है। इससे पृथ्वी पर रहने वाले जीवों को इन विकिरणों के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षा मिलती है।
- प्रश्न: ग्रीनहाउस प्रभाव क्या है?
उत्तर: वायुमंडल की कुछ गैसों द्वारा पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा के एक भाग को रोकने की प्रक्रिया ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाती है। इन गैसों की अत्यधिक वृद्धि वैश्विक ताप वृद्धि में योगदान कर सकती है।
- प्रश्न: मृदा अपरदन रोकने के उपाय लिखिए।
उत्तर: वृक्षारोपण, घास का आवरण बनाए रखना, ढलान वाले क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती, अत्यधिक चराई रोकना और उचित जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग करके मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है।
- प्रश्न: सुपोषण के हानिकारक प्रभाव क्या हैं?
उत्तर: सुपोषण के कारण जल में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होती है। इनके अपघटन से जल में घुली ऑक्सीजन कम हो सकती है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु या संख्या में कमी हो सकती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: पारितंत्र के जैविक और अजैविक घटकों को समझाइए।
उत्तर: पारितंत्र में जैविक और अजैविक दोनों प्रकार के घटक पाए जाते हैं। जैविक घटकों में सभी जीवित पदार्थ शामिल होते हैं। हरे पौधे उत्पादक हैं, जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। पौधों और अन्य जीवों पर निर्भर रहने वाले जीव उपभोक्ता कहलाते हैं। बैक्टीरिया और कवक जैसे सूक्ष्मजीव मृत जैविक पदार्थों का अपघटन करते हैं और अपघटक कहलाते हैं। अजैविक घटकों में जल, वायु, मिट्टी, प्रकाश, तापमान तथा खनिज लवण आदि शामिल हैं। जैविक और अजैविक घटक एक-दूसरे के साथ निरंतर क्रिया करते हैं और मिलकर पारितंत्र का निर्माण करते हैं।
- प्रश्न: खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: किसी पारितंत्र में भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण का क्रम खाद्य श्रृंखला कहलाता है। उदाहरण के लिए घास → हिरन → शेर एक खाद्य श्रृंखला है। इसमें घास उत्पादक, हिरन प्राथमिक उपभोक्ता और शेर उच्च उपभोक्ता है। प्रकृति में अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ी रहती हैं। इन खाद्य श्रृंखलाओं के पारस्परिक संबंधों से खाद्य जाल बनता है। खाद्य जाल किसी पारितंत्र में जीवों के भोजन संबंधों को अधिक व्यापक रूप से प्रदर्शित करता है।
- प्रश्न: ओजोन परत के महत्व और उसके क्षरण के प्रभावों को समझाइए।
उत्तर: वायुमंडल के ऊपरी भाग में मौजूद ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों का एक महत्वपूर्ण भाग अवशोषित करती है। इसलिए यह पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुछ रासायनिक पदार्थ, जैसे CFC, ओजोन के क्षरण में योगदान कर सकते हैं। ओजोन परत के अधिक क्षरण से UV विकिरण पृथ्वी की सतह तक अधिक मात्रा में पहुँच सकता है। इससे त्वचा, आँखों, पौधों और पारितंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- प्रश्न: पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पर्यावरण प्रदूषण को मुख्य रूप से वायु, जल और मृदा प्रदूषण के रूप में समझा जा सकता है। वायु प्रदूषण वाहन, उद्योग और ईंधन के दहन से उत्पन्न धुएँ और गैसों से हो सकता है। जल प्रदूषण घरेलू अपशिष्ट, औद्योगिक रसायनों, कृषि रसायनों और रोगजनकों के कारण हो सकता है। मृदा प्रदूषण में प्लास्टिक, रसायन और औद्योगिक अपशिष्ट की भूमिका होती है। इन सभी प्रकार के प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य, पौधों, जन्तुओं और पूरे पारितंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- प्रश्न: जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय कचरे का पर्यावरण पर प्रभाव समझाइए।
उत्तर: जैव निम्नीकरणीय कचरा सूक्ष्मजीवों द्वारा अपेक्षाकृत आसानी से अपघटित हो जाता है और प्राकृतिक चक्र में वापस शामिल हो सकता है। हालांकि बड़ी मात्रा में जमा होने पर इससे दुर्गंध और स्थानीय प्रदूषण हो सकता है। अजैव निम्नीकरणीय कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में बना रह सकता है और मिट्टी तथा जल को प्रदूषित कर सकता है। प्लास्टिक जैसे पदार्थों का अत्यधिक संचय पारिस्थितिक तंत्र के लिए गंभीर समस्या है। इसलिए कचरे को अलग-अलग करना, जैविक कचरे से खाद बनाना और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों का पुनर्चक्रण करना आवश्यक है।
- प्रश्न: ऊर्जा के प्रवाह और 10 प्रतिशत नियम को समझाइए।
उत्तर: पारितंत्र में ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा सूर्य की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। यह ऊर्जा खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्राथमिक, द्वितीयक और उच्च उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का बड़ा भाग जीवन-क्रियाओं में खर्च हो जाता है और ऊष्मा के रूप में निकल जाता है। लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा ही अगले पोषी स्तर तक पहुँचती है। इसी को 10 प्रतिशत का नियम कहा जाता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- पर्यावरण की परिभाषा दीजिए।
- पारितंत्र क्या है? इसके प्रमुख घटक लिखिए।
- उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक को उदाहरण सहित समझाइए।
- पारितंत्र में अपघटकों की भूमिका क्या है?
- खाद्य श्रृंखला क्या है? उदाहरण दीजिए।
- खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर बताइए।
- पोषी स्तर क्या हैं?
- 10 प्रतिशत का नियम समझाइए।
- जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अंतर लिखिए।
- जैव आवर्धन क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
- ओजोन क्या है? इसका महत्व लिखिए।
- ओजोन परत के क्षरण के कारण और प्रभाव बताइए।
- पर्यावरण प्रदूषण क्या है?
- वायु प्रदूषण के कारण और प्रभाव लिखिए।
- जल प्रदूषण के कारण लिखिए।
- अम्लीय वर्षा क्या है?
- ग्रीनहाउस प्रभाव और वैश्विक ताप वृद्धि को समझाइए।
- सुपोषण क्या है? इसके हानिकारक प्रभाव लिखिए।
- मृदा अपरदन क्या है? इसके कारण और रोकथाम के उपाय लिखिए।
- पर्यावरण संरक्षण में मनुष्य की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- पारितंत्र में जैविक और अजैविक दोनों घटक होते हैं।
- हरे पौधे उत्पादक कहलाते हैं।
- पौधों पर निर्भर जीव प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं।
- बैक्टीरिया और कवक प्रमुख अपघटक हैं।
- खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।
- एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा पहुँचती है।
- अनेक खाद्य श्रृंखलाओं के आपसी संबंध से खाद्य जाल बनता है।
- प्लास्टिक जैसे पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय होते हैं।
- विषैले रसायनों की उच्च पोषी स्तरों पर बढ़ती सांद्रता जैव आवर्धन कहलाती है।
- ओजोन का सूत्र O3 है।
- ओजोन परत UV विकिरण से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
- CO2 और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की अत्यधिक वृद्धि वैश्विक ताप वृद्धि में योगदान कर सकती है।
- जल में पोषक तत्वों की अत्यधिक वृद्धि से सुपोषण हो सकता है।
- जल और वायु द्वारा मिट्टी की ऊपरी परत का हटना मृदा अपरदन कहलाता है।
- वृक्षारोपण मृदा संरक्षण का महत्वपूर्ण उपाय है।
- कचरे को कम करना, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 15 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 15 “हमारा पर्यावरण” है।
- प्रश्न: पारितंत्र के कितने प्रमुख घटक होते हैं?
उत्तर: पारितंत्र के दो प्रमुख घटक होते हैं—जैविक घटक और अजैविक घटक।
- प्रश्न: उत्पादक किसे कहते हैं?
उत्तर: जो जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें उत्पादक कहते हैं। हरे पौधे इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- प्रश्न: अपघटक के दो उदाहरण क्या हैं?
उत्तर: बैक्टीरिया और कवक अपघटक के प्रमुख उदाहरण हैं।
- प्रश्न: खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह किस दिशा में होता है?
उत्तर: ऊर्जा का प्रवाह सूर्य से उत्पादकों और फिर विभिन्न उपभोक्ता स्तरों की ओर एकदिशीय रूप से होता है।
- प्रश्न: जैव आवर्धन क्या है?
उत्तर: खाद्य श्रृंखला के उच्च पोषी स्तरों पर अजैव निम्नीकरणीय विषैले पदार्थों की सांद्रता बढ़ने की घटना जैव आवर्धन कहलाती है।
- प्रश्न: ओजोन परत का क्या महत्व है?
उत्तर: ओजोन परत सूर्य की हानिकारक UV किरणों के एक बड़े भाग को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
- प्रश्न: ग्रीनहाउस प्रभाव क्या है?
उत्तर: वायुमंडल की कुछ गैसों द्वारा पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा के एक भाग को रोकने की प्रक्रिया ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाती है।
- प्रश्न: सुपोषण क्या है?
उत्तर: जल में पोषक तत्वों की अत्यधिक मात्रा के कारण शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होने की प्रक्रिया सुपोषण कहलाती है।
- प्रश्न: मृदा अपरदन को कैसे रोका जा सकता है?
उत्तर: वृक्षारोपण, घास का आवरण बनाए रखने, सीढ़ीनुमा खेती, अत्यधिक चराई रोकने और उचित मृदा एवं जल संरक्षण तकनीकों से मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 15)
“हमारा पर्यावरण” अध्याय हमें यह समझाता है कि जीवित और निर्जीव घटक एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक मिलकर पारितंत्र में ऊर्जा तथा पदार्थों के प्रवाह को बनाए रखते हैं। खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल के माध्यम से जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा का संबंध स्पष्ट होता है।
अध्याय में जैव आवर्धन, ओजोन परत, प्रदूषण, अम्लीय वर्षा, ग्रीनहाउस प्रभाव, वैश्विक ताप वृद्धि, सुपोषण और मृदा अपरदन जैसी पर्यावरणीय समस्याओं को भी समझाया जाता है। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, कचरे का उचित प्रबंधन, वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण आवश्यक है।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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