प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16)
“प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन” BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 16 है। इस अध्याय में प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, संरक्षण और उनके संपोषित प्रबंधन के बारे में बताया गया है। इसमें वन एवं वन्यजीव, जल संसाधन, कोयला एवं पेट्रोलियम, प्राकृतिक संसाधनों के समान वितरण तथा पर्यावरण-मित्र जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।
प्रकृति ने मनुष्य को जल, वायु, मिट्टी, वन, वन्यजीव, खनिज, कोयला और पेट्रोलियम जैसे अनेक संसाधन दिए हैं। लेकिन जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण इन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसलिए वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?
प्रकृति से प्राप्त वे सभी पदार्थ और साधन जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। वायु, जल, मिट्टी, वन, वन्यजीव, सूर्य का प्रकाश, कोयला और पेट्रोलियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। हमारा भोजन, आवास, वस्त्र, ऊर्जा तथा अनेक औद्योगिक गतिविधियाँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं।
संपोषित प्रबंधन
प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा उपयोग जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी हों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें, संपोषित प्रबंधन कहलाता है। इसका उद्देश्य संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकना और उनका संतुलित उपयोग करना है।
संपोषित प्रबंधन में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। केवल संसाधनों का संरक्षण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका योजनाबद्ध और न्यायपूर्ण उपयोग भी आवश्यक है।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता
प्राकृतिक संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। कुछ संसाधनों का निर्माण प्राकृतिक रूप से बहुत धीमी गति से होता है, जबकि कुछ संसाधन एक बार समाप्त होने के बाद आसानी से दोबारा उपलब्ध नहीं होते। इनके अत्यधिक दोहन से पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।
- प्राकृतिक संसाधनों का भंडार सीमित है।
- जनसंख्या बढ़ने से संसाधनों की माँग बढ़ रही है।
- औद्योगीकरण से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
- अत्यधिक दोहन से पर्यावरण का संतुलन प्रभावित होता है।
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
तीन R का सिद्धांत
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए तीन R का सिद्धांत महत्वपूर्ण है। ये हैं—Reduce, Reuse और Recycle। हिंदी में इन्हें कम उपयोग करना, पुनः उपयोग करना और पुनर्चक्रण करना कहा जा सकता है।
Reduce – उपयोग कम करना
अनावश्यक वस्तुओं और संसाधनों की खपत को कम करना Reduce कहलाता है। उदाहरण के लिए अनावश्यक बिजली के पंखे और बल्ब बंद रखना, पानी की बर्बादी रोकना तथा छोटी दूरी के लिए वाहन की जगह पैदल चलना।
Reuse – पुनः उपयोग
किसी वस्तु को फेंकने के बजाय उसका दोबारा उपयोग करना Reuse कहलाता है। इससे नई वस्तुओं के निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल और ऊर्जा की बचत होती है।
Recycle – पुनर्चक्रण
बेकार हो चुकी वस्तुओं से उपयोगी पदार्थ प्राप्त करके नई वस्तुएँ बनाना Recycle कहलाता है। कागज, काँच, धातु और कुछ प्लास्टिक पदार्थों का पुनर्चक्रण किया जा सकता है।
वन एवं वन्यजीव
वन पृथ्वी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक हैं। वन हमें लकड़ी, बाँस, औषधियाँ, फल, चारा और अनेक अन्य उत्पाद प्रदान करते हैं। इसके अलावा वन अनेक जीव-जंतुओं और पौधों को आवास प्रदान करते हैं।
वन जैव विविधता के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। किसी वन क्षेत्र में अनेक प्रकार के पौधे, जन्तु, पक्षी, कीट, कवक और सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं। इसलिए वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ों की रक्षा करना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता की रक्षा करना है।
वनों का महत्व
- वन अनेक जीवों को आवास प्रदान करते हैं।
- वन जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं।
- वन मिट्टी के अपरदन को कम करते हैं।
- वन जल चक्र को प्रभावित करते हैं।
- वन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करते हैं।
- वन अनेक उपयोगी उत्पाद प्रदान करते हैं।
- वन स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं।
वन उत्पाद
वनों से प्राप्त होने वाले अनेक पदार्थों का उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के लिए करता है। लकड़ी, बाँस, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटियाँ, फल, कंद-मूल, चारा, मछली तथा अन्य वन उत्पाद इसके उदाहरण हैं।
वनों के प्रमुख दावेदार
वन संसाधनों के उपयोग और प्रबंधन में विभिन्न समूहों के हित जुड़े होते हैं। इनमें मुख्य रूप से वन के अंदर या आसपास रहने वाले स्थानीय लोग, वन विभाग, उद्योग तथा वन्यजीव एवं प्रकृति-प्रेमी शामिल हैं।
स्थानीय लोगों की भूमिका
वनों के समीप रहने वाले स्थानीय लोग अपनी अनेक आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर रहते हैं। उन्हें ईंधन की लकड़ी, चारा, फल, कंद-मूल, औषधियाँ तथा अन्य उपयोगी सामग्री वनों से मिलती है। इसलिए वन संरक्षण की योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी
स्थानीय लोग लंबे समय से वनों के साथ जुड़े हुए हैं। वे वन संसाधनों के उपयोग की पारंपरिक विधियों को जानते हैं। यदि स्थानीय लोगों को वन प्रबंधन में भागीदारी दी जाए, तो वन संरक्षण और स्थानीय आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
चिपको आंदोलन
चिपको आंदोलन वृक्षों की रक्षा के लिए चलाया गया एक प्रसिद्ध पर्यावरण आंदोलन था। इस आंदोलन में लोगों ने पेड़ों को काटे जाने से बचाने के लिए उनसे चिपककर विरोध किया। इस आंदोलन ने वन संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी के महत्व को उजागर किया।
चिपको आंदोलन का उद्देश्य केवल पेड़ों को बचाना नहीं था, बल्कि जंगलों पर निर्भर स्थानीय समुदायों के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को सामने लाना भी था।
अराबारी वन क्षेत्र
अराबारी वन क्षेत्र वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। स्थानीय समुदाय को वन संरक्षण में शामिल करने से वन क्षेत्र के पुनरुत्थान में सहायता मिली। यह उदाहरण बताता है कि स्थानीय लोगों को साथ लेकर प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
वन एवं वन्यजीव संरक्षण क्यों आवश्यक है?
वन और वन्यजीव पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी क्षेत्र से प्रजातियों के समाप्त होने पर खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए जैव विविधता को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।
जल संसाधन
जल पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है। मनुष्य, पौधे और जन्तु सभी अपने अस्तित्व के लिए जल पर निर्भर हैं। पीने, कृषि, उद्योग, स्वच्छता और ऊर्जा उत्पादन के लिए जल का उपयोग किया जाता है।
हालाँकि पृथ्वी पर जल की मात्रा बहुत अधिक है, लेकिन इसका अधिकांश भाग समुद्रों में पाया जाता है और खारा होता है। पीने योग्य मीठे जल की मात्रा सीमित है। इसलिए जल का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
जल का समान वितरण
प्राकृतिक संसाधनों के समान वितरण का प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी क्षेत्र में जल की अधिकता हो सकती है, जबकि दूसरे क्षेत्र में जल की गंभीर कमी हो सकती है। इसलिए जल संसाधनों के उपयोग और वितरण में न्यायपूर्ण दृष्टिकोण आवश्यक है।
बाँध और जल प्रबंधन
बाँधों का निर्माण जल संग्रहण, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। बड़े बाँधों से कई लाभ प्राप्त होते हैं, लेकिन इनके निर्माण से कुछ पर्यावरणीय और सामाजिक समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
बाँधों के लाभ
- सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जा सकता है।
- जल विद्युत उत्पन्न की जा सकती है।
- बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिल सकती है।
- जल का संग्रहण किया जा सकता है।
बड़े बाँधों की समस्याएँ
- बड़े क्षेत्र में भूमि जलमग्न हो सकती है।
- लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है।
- स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।
- वन एवं वन्यजीवों को नुकसान हो सकता है।
- नदियों के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है।
वर्षा जल संचयन
वर्षा के जल को एकत्र करके भविष्य में उपयोग करने या उसे भूमिगत जल के पुनर्भरण में लगाने की प्रक्रिया को वर्षा जल संचयन कहा जाता है। यह जल संरक्षण की एक महत्वपूर्ण विधि है।
भारत में विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक पद्धतियाँ विकसित हुई हैं। स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार इन पद्धतियों के रूप अलग-अलग रहे हैं।
खादिन या ढोरा पद्धति
खादिन, जिसे ढोरा भी कहा जाता है, वर्षा जल के संग्रहण और कृषि में उपयोग की पारंपरिक पद्धति है। इसमें वर्षा के समय बहने वाले जल को बाँध जैसी संरचना द्वारा रोककर मिट्टी में नमी बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। बाद में इस नमी का उपयोग कृषि के लिए किया जाता है।
कुल्ह पद्धति
हिमाचल प्रदेश के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक नहर प्रणाली को कुल्ह कहा जाता था। इसमें नदियों के पानी को छोटी-छोटी नहरों द्वारा गाँवों तक पहुँचाया जाता था। स्थानीय लोग आपसी सहमति से इन जल प्रणालियों का प्रबंधन करते थे।
जल संरक्षण के उपाय
- नलों से पानी का अनावश्यक बहाव रोकना।
- वर्षा जल का संग्रहण करना।
- भूजल का अत्यधिक दोहन रोकना।
- जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना।
- कृषि में जल की बचत करने वाली तकनीकों का उपयोग करना।
- घरों और विद्यालयों में पानी की बर्बादी रोकना।
कोयला एवं पेट्रोलियम
कोयला और पेट्रोलियम महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन हैं। इनका उपयोग ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, उद्योग तथा अनेक अन्य कार्यों में किया जाता है। इनके भंडार सीमित हैं और इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं। इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।
कोयला
कोयला एक जीवाश्म ईंधन है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तापीय विद्युत उत्पादन और उद्योगों में किया जाता है। कोयले के दहन से ऊर्जा प्राप्त होती है, लेकिन इससे वायु प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी होता है।
पेट्रोलियम
पेट्रोलियम एक महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है। इसके परिष्करण से पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, पेट्रोलियम गैस तथा अन्य उपयोगी पदार्थ प्राप्त किए जाते हैं। परिवहन क्षेत्र में पेट्रोलियम उत्पादों का व्यापक उपयोग होता है।
कोयला और पेट्रोलियम का संरक्षण
कोयला और पेट्रोलियम सीमित संसाधन हैं। इनके उपयोग को कम करने के लिए ऊर्जा की बचत, सार्वजनिक परिवहन, सामुदायिक वाहनों और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए।
- अनावश्यक बिजली की खपत कम करनी चाहिए।
- छोटी दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग करना चाहिए।
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
- वाहन को अनावश्यक रूप से चालू नहीं रखना चाहिए।
- सौर और पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
गंगा सफाई योजना
गंगा भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। लंबे समय तक औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू सीवेज, कृषि अपवाह तथा अन्य प्रदूषकों के कारण गंगा का जल प्रदूषित होता रहा है। गंगा की स्वच्छता और जल गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से गंगा कार्य योजना वर्ष 1985 में प्रारंभ की गई थी।
नदी में अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह को रोकना नदी प्रदूषण नियंत्रण का महत्वपूर्ण उपाय है। गंगा जैसी बड़ी नदी की सफाई के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।
जल प्रदूषण और कोलिफॉर्म जीवाणु
जल में मानव या पशु मल से संबंधित प्रदूषण का संकेत देने वाले सूक्ष्मजीवों में कोलिफॉर्म जीवाणु महत्वपूर्ण हैं। जल में इनकी अधिक मात्रा जल की स्वच्छता और प्रदूषण की स्थिति के बारे में संकेत दे सकती है।
संसाधनों का समान वितरण
प्राकृतिक संसाधनों पर पृथ्वी के सभी जीवों का अधिकार है। यदि कुछ लोग संसाधनों का अत्यधिक उपयोग करते हैं, तो अन्य लोगों के लिए उनकी उपलब्धता कम हो सकती है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में समानता और न्याय का विचार महत्वपूर्ण है।
संसाधनों का असमान वितरण सामाजिक संघर्ष और पर्यावरणीय समस्याओं को बढ़ा सकता है। संपोषित विकास के लिए संसाधनों का न्यायपूर्ण और विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।
पर्यावरण-मित्र जीवनशैली
हम अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे परिवर्तन करके प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम कर सकते हैं। बिजली, पानी, ईंधन और अन्य संसाधनों का अनावश्यक उपयोग रोकना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- अनावश्यक बल्ब और पंखे बंद रखें।
- पानी की बर्बादी रोकें।
- छोटी दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग करें।
- सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।
- वस्तुओं का पुनः उपयोग करें।
- कचरे को अलग-अलग करके पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों का पुनर्चक्रण करें।
- प्लास्टिक का अनावश्यक उपयोग कम करें।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- निम्न में से कौन प्राकृतिक संसाधन है?
(a) सीमेंट (b) ईंट (c) समुद्र (d) प्लास्टिक
उत्तर: (c) समुद्र - निम्न में से कौन प्राकृतिक संसाधन नहीं है?
(a) जल (b) वायु (c) पर्वत (d) कूड़ा-करकट
उत्तर: (d) कूड़ा-करकट - प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) संसाधनों का अत्यधिक उपयोग (b) संसाधनों का संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग (c) संसाधनों को नष्ट करना (d) केवल औद्योगिक विकास
उत्तर: (b) संसाधनों का संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग - तीन R में R का अर्थ क्या है?
(a) Reduce, Reuse, Recycle (b) Read, Run, Rest (c) Reduce, Run, Repair (d) Reuse, Remove, Return
उत्तर: (a) Reduce, Reuse, Recycle - चिपको आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(a) जल संरक्षण (b) वृक्षों की रक्षा (c) खनिज संरक्षण (d) पशुपालन
उत्तर: (b) वृक्षों की रक्षा - वनों का एक प्रमुख महत्व क्या है?
(a) जैव विविधता का संरक्षण (b) प्रदूषण बढ़ाना (c) मृदा अपरदन बढ़ाना (d) जल की बर्बादी
उत्तर: (a) जैव विविधता का संरक्षण - वन संपदा का उदाहरण कौन-सा है?
(a) ताँबा (b) एलुमिनियम (c) लकड़ी (d) सीमेंट
उत्तर: (c) लकड़ी - खादिन या ढोरा पद्धति किससे संबंधित है?
(a) जल संग्रहण (b) खनन (c) वायु प्रदूषण (d) वन कटाई
उत्तर: (a) जल संग्रहण - कुल्ह पद्धति किससे संबंधित है?
(a) पारंपरिक जल प्रबंधन (b) वन प्रबंधन (c) खनन (d) पशुपालन
उत्तर: (a) पारंपरिक जल प्रबंधन - गंगा सफाई योजना कब प्रारंभ हुई थी?
(a) 1975 (b) 1980 (c) 1985 (d) 1995
उत्तर: (c) 1985 - कोलिफॉर्म किस प्रकार का जीव है?
(a) विषाणु (b) जीवाणु (c) कवक (d) शैवाल
उत्तर: (b) जीवाणु - निम्न में से कौन जीवाश्म ईंधन है?
(a) सौर ऊर्जा (b) पवन ऊर्जा (c) कोयला (d) जल ऊर्जा
उत्तर: (c) कोयला - कोयला और पेट्रोलियम किस प्रकार के संसाधन हैं?
(a) नवीकरणीय (b) अनवीकरणीय (c) असीमित (d) जैविक
उत्तर: (b) अनवीकरणीय - वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?
(a) वे वन से जुड़े होते हैं (b) वे वन नष्ट करते हैं (c) वे केवल उद्योग चलाते हैं (d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) वे वन से जुड़े होते हैं - टिहरी बाँध किस राज्य में स्थित है?
(a) बिहार (b) उत्तराखंड (c) राजस्थान (d) मध्य प्रदेश
उत्तर: (b) उत्तराखंड - भूमिगत जल का उदाहरण कौन-सा है?
(a) समुद्र (b) नदी (c) कुआँ (d) वर्षा
उत्तर: (c) कुआँ - गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत कौन-सा है?
(a) कोयला (b) पेट्रोलियम (c) पवन ऊर्जा (d) डीजल
उत्तर: (c) पवन ऊर्जा - ग्लोबल वार्मिंग में प्रमुख योगदान देने वाली गैस कौन-सी है?
(a) ऑक्सीजन (b) कार्बन डाइऑक्साइड (c) नाइट्रोजन (d) हीलियम
उत्तर: (b) कार्बन डाइऑक्साइड - वन्यजीवों के विलुप्त होने का एक प्रमुख कारण क्या है?
(a) निर्वनीकरण (b) वृक्षारोपण (c) जल संरक्षण (d) वन संरक्षण
उत्तर: (a) निर्वनीकरण - प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कौन-सा उपाय उचित है?
(a) अत्यधिक उपयोग (b) अपव्यय (c) पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण (d) संसाधनों का अनियंत्रित दोहन
उत्तर: (c) पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?
उत्तर: प्रकृति से प्राप्त वे पदार्थ और साधन जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। - प्रश्न: संपोषित प्रबंधन क्या है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा विवेकपूर्ण उपयोग जिससे वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताएँ पूरी हो सकें, संपोषित प्रबंधन कहलाता है। - प्रश्न: तीन R क्या हैं?
उत्तर: Reduce, Reuse और Recycle अर्थात कम उपयोग, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण तीन R कहलाते हैं। - प्रश्न: चिपको आंदोलन किससे संबंधित था?
उत्तर: चिपको आंदोलन वृक्षों और वनों की रक्षा से संबंधित था। - प्रश्न: खादिन पद्धति क्या है?
उत्तर: खादिन या ढोरा वर्षा जल के संग्रहण और कृषि में उसके उपयोग की पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धति है। - प्रश्न: कोयला किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर: कोयला एक अनवीकरणीय जीवाश्म ईंधन है। - प्रश्न: पेट्रोलियम के दो उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर: पेट्रोल और डीजल पेट्रोलियम के प्रमुख उत्पाद हैं। - प्रश्न: कोलिफॉर्म क्या है?
उत्तर: कोलिफॉर्म जीवाणुओं का एक समूह है, जिसकी उपस्थिति जल में मलजनित प्रदूषण का संकेत दे सकती है। - प्रश्न: वन उत्पादों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: लकड़ी और बाँस वन उत्पादों के दो उदाहरण हैं। - प्रश्न: जल संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: मीठे जल की उपलब्धता सीमित है और जीवन की सभी प्रमुख गतिविधियाँ जल पर निर्भर हैं। इसलिए जल का संरक्षण आवश्यक है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका अत्यधिक दोहन पर्यावरणीय असंतुलन पैदा कर सकता है। इसलिए वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखना आवश्यक है। - प्रश्न: वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका समझाइए।
उत्तर: स्थानीय लोग वनों पर अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए निर्भर रहते हैं और उन्हें वन संसाधनों के पारंपरिक उपयोग का ज्ञान होता है। इसलिए उनकी भागीदारी से वन संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। - प्रश्न: तीन R सिद्धांत को समझाइए।
उत्तर: Reduce का अर्थ संसाधनों की अनावश्यक खपत कम करना, Reuse का अर्थ वस्तुओं का दोबारा उपयोग करना और Recycle का अर्थ बेकार पदार्थों से उपयोगी सामग्री बनाना है। ये तीनों उपाय संसाधनों के संरक्षण में सहायक हैं। - प्रश्न: बड़े बाँधों से होने वाले दो लाभ और दो हानियाँ लिखिए।
उत्तर: लाभ—सिंचाई और जल विद्युत उत्पादन। हानियाँ—भूमि का जलमग्न होना तथा लोगों का विस्थापन। इसके अतिरिक्त स्थानीय पारिस्थितिकी भी प्रभावित हो सकती है। - प्रश्न: कोयला और पेट्रोलियम के उपयोग को कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर: ऊर्जा की बचत, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, छोटी दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग और सौर तथा पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देकर कोयला और पेट्रोलियम की खपत कम की जा सकती है। - प्रश्न: वर्षा जल संचयन का महत्व क्या है?
उत्तर: वर्षा जल संचयन से वर्षा के पानी को संग्रहित करके उपयोग किया जा सकता है और भूजल का पुनर्भरण भी बढ़ाया जा सकता है। इससे जल की कमी वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर हो सकती है। - प्रश्न: वन और वन्यजीव संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: वन जैव विविधता के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं और वन्यजीवों को आवास प्रदान करते हैं। इनके संरक्षण से पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने में सहायता मिलती है। - प्रश्न: संसाधनों के समान वितरण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। यदि कुछ लोग उनका अत्यधिक उपयोग करते हैं तो दूसरों के लिए उनकी उपलब्धता कम हो सकती है। इसलिए सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन के लिए संसाधनों का समान और विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित प्रबंधन की अवधारणा को विस्तार से समझाइए।
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाता है कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी होने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें। इसके लिए संसाधनों का अनावश्यक दोहन रोकना, उनका समान और न्यायपूर्ण वितरण करना तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। Reduce, Reuse और Recycle जैसे उपाय संसाधनों की खपत कम करने में सहायता करते हैं। वन, जल, कोयला और पेट्रोलियम जैसे संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग संपोषित विकास के लिए आवश्यक है। - प्रश्न: वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर रहते हैं। वे लकड़ी, चारा, फल, कंद-मूल, औषधियाँ और अन्य वन उत्पाद प्राप्त करते हैं। स्थानीय लोगों को वन संरक्षण से अलग रखने के बजाय उन्हें प्रबंधन में शामिल करना अधिक प्रभावी हो सकता है। उनके पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय अनुभव का उपयोग करके वन संसाधनों का संपोषित उपयोग किया जा सकता है। चिपको आंदोलन और अराबारी वन क्षेत्र जैसे उदाहरण स्थानीय भागीदारी के महत्व को स्पष्ट करते हैं। - प्रश्न: जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के विभिन्न उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: जल संसाधनों के संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल की बर्बादी रोकना, जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और कृषि में जल की बचत करने वाली तकनीकों का उपयोग करना आवश्यक है। भारत में खादिन और कुल्ह जैसी पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियाँ विकसित हुई थीं। बड़े बाँध सिंचाई, जल विद्युत और बाढ़ नियंत्रण में उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इनके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को भी ध्यान में रखना चाहिए। इसलिए जल प्रबंधन में स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। - प्रश्न: कोयला और पेट्रोलियम के संरक्षण की आवश्यकता तथा उपाय बताइए।
उत्तर: कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय जीवाश्म ईंधन हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं और इनके भंडार सीमित हैं। इनके अत्यधिक उपयोग से वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। इसलिए इनका संरक्षण आवश्यक है। बिजली की बचत, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, छोटी दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग, वाहनों के अनावश्यक इंजन को बंद रखना तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना इनके संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं। - प्रश्न: गंगा सफाई योजना की आवश्यकता और उद्देश्य समझाइए।
उत्तर: गंगा नदी में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह और अन्य प्रदूषकों के मिलने से जल की गुणवत्ता प्रभावित हुई। इस समस्या से निपटने और नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से गंगा कार्य योजना वर्ष 1985 में प्रारंभ की गई। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना और गंगा की जल गुणवत्ता में सुधार करना था। नदी को स्वच्छ रखने के लिए केवल सरकारी योजनाएँ पर्याप्त नहीं हैं; नागरिकों को भी नदी में कचरा और अनुपचारित अपशिष्ट डालने से बचना चाहिए। - प्रश्न: पर्यावरण-मित्र जीवनशैली अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर: पर्यावरण-मित्र जीवनशैली में संसाधनों की अनावश्यक खपत कम करना महत्वपूर्ण है। अनावश्यक बिजली बंद करना, पानी की बर्बादी रोकना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, छोटी दूरी के लिए पैदल या साइकिल चलना, वस्तुओं का पुनः उपयोग करना और कचरे का पुनर्चक्रण करना उपयोगी उपाय हैं। तीन R—Reduce, Reuse और Recycle—को दैनिक जीवन में अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम किया जा सकता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- प्राकृतिक संसाधन क्या हैं? इनके प्रमुख उदाहरण लिखिए।
- प्राकृतिक संसाधनों के संपोषित प्रबंधन से क्या समझते हैं?
- तीन R सिद्धांत को उदाहरण सहित समझाइए।
- वनों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
- वनों के प्रमुख दावेदार कौन-कौन हैं?
- वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
- चिपको आंदोलन क्या था?
- अराबारी वन क्षेत्र वन संरक्षण का अच्छा उदाहरण क्यों है?
- जल संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
- वर्षा जल संचयन क्या है?
- खादिन या ढोरा पद्धति को समझाइए।
- कुल्ह पद्धति क्या है?
- बड़े बाँधों के लाभ और हानियाँ लिखिए।
- कोयला और पेट्रोलियम के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
- गंगा सफाई योजना कब और क्यों प्रारंभ की गई?
- कोलिफॉर्म जीवाणु क्या है?
- संसाधनों के समान वितरण की आवश्यकता क्यों है?
- पर्यावरण-मित्र जीवनशैली से क्या समझते हैं?
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में तीन R की भूमिका लिखिए।
- प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से होने वाली समस्याओं को समझाइए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- प्राकृतिक संसाधन प्रकृति से प्राप्त उपयोगी पदार्थ और साधन हैं।
- संपोषित प्रबंधन का उद्देश्य वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना है।
- तीन R हैं—Reduce, Reuse और Recycle।
- वन जैव विविधता के महत्वपूर्ण स्थल हैं।
- वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
- चिपको आंदोलन वृक्षों की रक्षा से संबंधित था।
- अराबारी वन क्षेत्र स्थानीय सहभागिता द्वारा वन संरक्षण का उदाहरण है।
- खादिन या ढोरा वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक पद्धति है।
- कुल्ह हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली से संबंधित है।
- कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय जीवाश्म ईंधन हैं।
- गंगा कार्य योजना वर्ष 1985 में प्रारंभ की गई थी।
- कोलिफॉर्म जीवाणु जल में मलजनित प्रदूषण का संकेत दे सकते हैं।
- प्राकृतिक संसाधनों का समान और न्यायपूर्ण वितरण आवश्यक है।
- जल, वायु, वन और जीवाश्म ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
- संसाधनों के संरक्षण के लिए ऊर्जा और पानी की बर्बादी रोकना आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 16 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 16 “प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन” है। - प्रश्न: प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?
उत्तर: प्रकृति से प्राप्त वे पदार्थ और साधन जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। - प्रश्न: तीन R क्या हैं?
उत्तर: तीन R हैं—Reduce अर्थात उपयोग कम करना, Reuse अर्थात पुनः उपयोग करना और Recycle अर्थात पुनर्चक्रण करना। - प्रश्न: चिपको आंदोलन किसके लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: चिपको आंदोलन पेड़ों और वनों को कटने से बचाने के लिए प्रसिद्ध है। - प्रश्न: खादिन पद्धति किससे संबंधित है?
उत्तर: खादिन या ढोरा वर्षा जल के संग्रहण और कृषि में उपयोग की पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धति है। - प्रश्न: कोयला और पेट्रोलियम का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर: ये सीमित और अनवीकरणीय संसाधन हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं और इनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। - प्रश्न: गंगा सफाई योजना कब शुरू हुई थी?
उत्तर: गंगा कार्य योजना वर्ष 1985 में गंगा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई थी। - प्रश्न: वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: स्थानीय लोग वनों पर निर्भर रहते हैं और उन्हें स्थानीय संसाधनों के उपयोग का पारंपरिक ज्ञान होता है। उनकी भागीदारी से संरक्षण और संसाधनों के उपयोग के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है। - प्रश्न: जल संरक्षण के दो उपाय लिखिए।
उत्तर: वर्षा जल संचयन करना और पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकना जल संरक्षण के दो प्रमुख उपाय हैं। - प्रश्न: पर्यावरण-मित्र जीवनशैली कैसे अपनाई जा सकती है?
उत्तर: बिजली और पानी की बचत, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, वस्तुओं का पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और प्लास्टिक की खपत कम करके पर्यावरण-मित्र जीवनशैली अपनाई जा सकती है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16)
“प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन” अध्याय हमें प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और उनके विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता समझाता है। वन, जल, कोयला और पेट्रोलियम जैसे संसाधन मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके अत्यधिक दोहन से पर्यावरणीय असंतुलन और संसाधनों की कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
संसाधनों के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी, जल संरक्षण, वन संरक्षण, ऊर्जा की बचत और तीन R—Reduce, Reuse तथा Recycle—को अपनाना आवश्यक है। यदि वर्तमान पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और न्यायपूर्ण उपयोग करे, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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