Bihar Board Class 11 Geography Chapter 10 – वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ में वायुदाब, पवनों की दिशा एवं गति, कोरिओलिस प्रभाव, वायुदाब कटिबंध, भूमंडलीय वायुमंडलीय परिसंचरण, स्थानीय पवनें, वायुराशियाँ, वाताग्र, चक्रवात और प्रतिचक्रवात जैसी महत्वपूर्ण भौगोलिक अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।
इस अध्याय में यह समझाया गया है कि पृथ्वी पर वायुदाब में अंतर किस प्रकार पवनों को जन्म देता है और पृथ्वी का घूर्णन पवनों की दिशा को किस प्रकार प्रभावित करता है। साथ ही व्यापारिक पवनों, पछुआ पवनों, ध्रुवीय पवनों, मानसूनी पवनों तथा विभिन्न स्थानीय पवनों की विशेषताओं को भी समझाया गया है।
इस पोस्ट में Bihar Board Class 11 Geography Chapter 10 के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, बहुविकल्पीय प्रश्न, अतिलघु उत्तरीय प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और परियोजना कार्य को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
अध्याय 10 : वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ
वायुदाब क्या है?
वायुमंडल में उपस्थित वायु का भार पृथ्वी की सतह पर दबाव डालता है। किसी स्थान पर वायु के स्तंभ द्वारा डाला गया दबाव वायुमंडलीय दाब कहलाता है। वायुदाब का वितरण मौसम तथा पवनों के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
वायुदाब की माप
वायुदाब को सामान्यतः मिलीबार या हेक्टोपास्कल (hPa) में व्यक्त किया जाता है। समुद्र तल पर औसत वायुदाब लगभग 1013.25 hPa माना जाता है।
वायुदाब में ऊँचाई के साथ परिवर्तन
ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब सामान्यतः घटता जाता है। इसका कारण यह है कि ऊँचाई पर वायु का घनत्व कम हो जाता है और ऊपर स्थित वायु स्तंभ का भार भी कम होता जाता है।
इसी कारण मौसम मानचित्रों में अलग-अलग स्थानों के वायुदाब की तुलना करने के लिए दाब को समुद्र तल के स्तर पर समायोजित किया जाता है।
समदाब रेखा
समान वायुदाब वाले स्थानों को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा को समदाब रेखा कहा जाता है। मौसम मानचित्रों में वायुदाब के वितरण को दिखाने के लिए समदाब रेखाओं का उपयोग किया जाता है।
वायुदाब प्रवणता
दो स्थानों के बीच वायुदाब में परिवर्तन की दर को वायुदाब प्रवणता कहा जाता है। समदाब रेखाएँ यदि एक-दूसरे के बहुत पास हों तो दाब प्रवणता अधिक होती है और सामान्यतः पवनों की गति भी अधिक होती है। यदि समदाब रेखाएँ दूर-दूर हों तो दाब प्रवणता कम होती है और पवनों की गति अपेक्षाकृत कम होती है।
पवन क्या है?
धरातल के लगभग समानांतर बहने वाली गतिशील हवा को पवन कहा जाता है। पवन सामान्यतः उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र की ओर चलती है। पवन की दिशा और गति पर कई बलों का प्रभाव पड़ता है।
पवनों की दिशा एवं गति को प्रभावित करने वाले कारक
1. दाब प्रवणता बल
वायुदाब में अंतर पवन को गति प्रदान करता है। उच्च दाब और निम्न दाब के बीच अंतर जितना अधिक होगा, दाब प्रवणता उतनी अधिक होगी और पवन की गति सामान्यतः उतनी ही तेज होगी।
2. कोरिओलिस प्रभाव
पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वायु अपनी सीधी दिशा से विक्षेपित होती है। इसे कोरिओलिस प्रभाव कहा जाता है। उत्तरी गोलार्द्ध में पवनें अपनी मूल दिशा से दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर विक्षेपित होती हैं। भूमध्य रेखा पर इसका प्रभाव लगभग शून्य होता है और ध्रुवों की ओर इसका प्रभाव बढ़ता जाता है।
3. घर्षण बल
धरातल की असमानता, पर्वत, पठार, वनस्पति तथा अन्य अवरोध पवनों की गति को प्रभावित करते हैं। धरातल के निकट घर्षण का प्रभाव अधिक होता है और ऊँचाई बढ़ने पर इसका प्रभाव कम होता जाता है।
4. अभिकेंद्रीय प्रभाव
वक्राकार या घूर्णनशील वायु प्रवाह में अभिकेंद्रीय प्रभाव भी पवनों की गति और दिशा को प्रभावित करता है। विशेष रूप से चक्रवाती तथा प्रतिचक्रवाती परिसंचरण में इसका महत्व समझा जाता है।
भूविक्षेपी पवनें
धरातल से लगभग 2 से 3 किलोमीटर या उससे अधिक ऊँचाई पर जब घर्षण का प्रभाव बहुत कम हो जाता है और दाब प्रवणता बल तथा कोरिओलिस प्रभाव के बीच संतुलन स्थापित होता है, तब पवनें समदाब रेखाओं के लगभग समानांतर बह सकती हैं। ऐसी पवनों को भूविक्षेपी पवनें (Geostrophic Winds) कहा जाता है।
समुद्र समीर और स्थल समीर
समुद्र समीर
दिन के समय स्थल समुद्र की तुलना में जल्दी गर्म होता है। स्थल के ऊपर गर्म वायु ऊपर उठती है और वहाँ निम्न दाब विकसित हो सकता है। समुद्र अपेक्षाकृत ठंडा रहने के कारण वहाँ अपेक्षाकृत उच्च दाब रहता है। परिणामस्वरूप हवा समुद्र से स्थल की ओर बहती है। इसे समुद्र समीर कहते हैं।
स्थल समीर
रात्रि में स्थल समुद्र की तुलना में जल्दी ठंडा हो जाता है। तब स्थल के ऊपर अपेक्षाकृत उच्च दाब और समुद्र के ऊपर अपेक्षाकृत निम्न दाब बन सकता है। परिणामस्वरूप हवा स्थल से समुद्र की ओर बहती है। इसे स्थल समीर कहते हैं।
पृथ्वी के सात प्रमुख वायुदाब कटिबंध
पृथ्वी पर वायुदाब का वितरण लगभग सात प्रमुख कटिबंधों के रूप में समझाया जाता है। ये निम्नलिखित हैं:
- विषुवतीय निम्न दाब पट्टी
- उत्तरी उपोष्ण उच्च दाब पट्टी
- दक्षिणी उपोष्ण उच्च दाब पट्टी
- उत्तरी उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टी
- दक्षिणी उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टी
- उत्तरी ध्रुवीय उच्च दाब पट्टी
- दक्षिणी ध्रुवीय उच्च दाब पट्टी
विषुवतीय निम्न दाब पट्टी
भूमध्य रेखा के आसपास वर्ष भर तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है। गर्म वायु हल्की होकर ऊपर उठती है, जिसके कारण धरातल के पास निम्न वायुदाब की स्थिति बनती है। इस क्षेत्र में व्यापारिक पवनों का अभिसरण होता है।
अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ)
ITCZ वह क्षेत्र है जहाँ दोनों गोलार्द्धों की व्यापारिक पवनें आपस में अभिसरित होती हैं। यह क्षेत्र सामान्यतः भूमध्य रेखा के आसपास पाया जाता है, लेकिन ऋतु के अनुसार इसकी स्थिति उत्तर या दक्षिण की ओर खिसक सकती है।
उपोष्ण उच्च दाब पट्टी
लगभग 30° उत्तर और 30° दक्षिण अक्षांशों के आसपास उच्च दाब की पट्टियाँ पाई जाती हैं। भूमध्यरेखीय क्षेत्रों से ऊपर उठी वायु ऊपरी वायुमंडल में ध्रुवों की ओर जाती है और उपोष्ण क्षेत्रों में नीचे उतरती है। इससे उच्च दाब का विकास होता है।
घोड़ों का अक्षांश
उपोष्ण उच्च दाब पट्टियों के आसपास शांत या कमजोर क्षैतिज पवनों की स्थिति के कारण इन क्षेत्रों को पारंपरिक रूप से घोड़ों का अक्षांश (Horse Latitudes) कहा जाता है।
उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टी
लगभग 60° उत्तर और 60° दक्षिण अक्षांशों के आसपास उपध्रुवीय निम्न दाब की पट्टियाँ पाई जाती हैं। यहाँ अपेक्षाकृत गर्म पछुआ पवनें और ठंडी ध्रुवीय पूर्वी पवनें मिलती हैं, जिससे वायु ऊपर उठने की प्रवृत्ति रखती है।
ध्रुवीय उच्च दाब पट्टी
ध्रुवीय क्षेत्रों में अत्यधिक ठंडी और घनी वायु नीचे उतरती है। इसके कारण ध्रुवों के आसपास उच्च वायुदाब की स्थिति बनती है। यहाँ से ध्रुवीय पूर्वी पवनें निम्न अक्षांशों की ओर बहती हैं।
भूमंडलीय वायुमंडलीय परिसंचरण
भूमंडलीय वायुमंडलीय परिसंचरण पृथ्वी पर ताप और दाब के असमान वितरण तथा पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न होता है। निम्न अक्षांशों से ऊष्मा का स्थानांतरण उच्च अक्षांशों की ओर होता है। सामान्य परिसंचरण को समझाने के लिए तीन प्रमुख परिसंचरण कोशिकाओं का उल्लेख किया जाता है:
- हेडली कोशिका
- फेरेल कोशिका
- ध्रुवीय कोशिका
हेडली कोशिका
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में गर्म वायु ऊपर उठती है और ऊपरी वायुमंडल में ध्रुवों की ओर बढ़ती है। उपोष्ण क्षेत्रों में इसके नीचे उतरने से परिसंचरण कोशिका का निर्माण होता है, जिसे हेडली कोशिका कहा जाता है।
फेरेल कोशिका
मध्य अक्षांशों में उपोष्ण उच्च दाब और उपध्रुवीय निम्न दाब के बीच वायुमंडलीय परिसंचरण को फेरेल कोशिका से समझाया जाता है। इस क्षेत्र में पछुआ पवनों का प्रभुत्व पाया जाता है।
ध्रुवीय कोशिका
ध्रुवीय क्षेत्रों में ठंडी और भारी वायु नीचे उतरती है तथा निम्न अक्षांशों की ओर बढ़ती है। उपध्रुवीय क्षेत्रों में इसके ऊपर उठने के साथ ध्रुवीय परिसंचरण कोशिका बनती है।
प्रमुख भूमंडलीय पवनें
व्यापारिक पवनें
उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों से भूमध्यरेखीय निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहने वाली पवनों को व्यापारिक पवनें कहते हैं। उत्तरी गोलार्द्ध में ये सामान्यतः उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें कहलाती हैं।
पछुआ पवनें
मध्य अक्षांशों में उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों से उपध्रुवीय निम्न दाब क्षेत्रों की ओर बहने वाली पवनों को पछुआ पवनें कहा जाता है। इनकी दिशा सामान्यतः पश्चिम से पूर्व की ओर होती है।
ध्रुवीय पूर्वी पवनें
ध्रुवीय उच्च दाब क्षेत्रों से उपध्रुवीय निम्न दाब क्षेत्रों की ओर बहने वाली पवनों को ध्रुवीय पूर्वी पवनें कहा जाता है।
डोलड्रम
भूमध्य रेखा के आसपास स्थित अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र को डोलड्रम कहा जाता है। यहाँ धरातलीय पवनों की गति कमजोर हो सकती है और गर्म वायु ऊपर उठने की प्रवृत्ति रखती है।
मानसूनी पवनें
ऐसी मौसमी पवनें जिनकी दिशा ऋतु के अनुसार बदल जाती है, उन्हें मानसूनी पवनें कहा जाता है। इनके निर्माण में स्थल और जल के अलग-अलग ढंग से गर्म तथा ठंडा होने और उससे उत्पन्न वायुदाब के अंतर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्थानीय पवनें
किसी क्षेत्र की स्थानीय भौगोलिक एवं तापीय परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होने वाली पवनों को स्थानीय पवनें कहा जाता है। इस अध्याय में चिनूक, फॉन, मिस्ट्रल, बोरा और लू जैसी स्थानीय पवनों का उल्लेख किया गया है।
चिनूक
चिनूक एक गर्म और शुष्क स्थानीय पवन है जो रॉकी पर्वतों के पूर्वी ढालों से नीचे उतरकर उत्तरी अमेरिका के मैदानों को प्रभावित करती है। इसके कारण तापमान तेजी से बढ़ सकता है और बर्फ तेजी से पिघल सकती है। इसी कारण इसे हिम भक्षी कहा जाता है।
फॉन
आल्प्स पर्वतों से नीचे उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन को फॉन (Foehn) कहा जाता है। यह यूरोप के कुछ क्षेत्रों में तापमान बढ़ाने और बर्फ पिघलाने में प्रभाव डालती है।
मिस्ट्रल
दक्षिणी फ्रांस की ओर बहने वाली ठंडी, शुष्क और तेज स्थानीय पवन को मिस्ट्रल कहा जाता है।
पवन के अपरदन से बनने वाली स्थलाकृतियाँ
1. मरु-कुट्टिम
जब पवन महीन कणों को हटाकर ले जाती है और धरातल पर अपेक्षाकृत बड़े कण तथा गुटिकाएँ बच जाती हैं, तो इस प्रकार की सतह को मरु-कुट्टिम या Desert Pavement कहा जाता है।
2. वातगर्त
पवन द्वारा महीन पदार्थों के अपवहन से बनने वाले गर्त या गड्ढों को वातगर्त (Deflation Hollows) कहा जाता है।
3. छत्रक शैल
पवन द्वारा रेत के कणों के प्रभाव से चट्टानों के निचले भाग का अधिक अपरदन होने पर छत्रक जैसी आकृति बन सकती है। इसे छत्रक शैल कहा जाता है।
वायुराशि क्या है?
वायुमंडल के ऐसे विशाल भाग को वायुराशि (Air Mass) कहा जाता है जिसमें तापमान और आर्द्रता की विशेषताएँ अपेक्षाकृत समान होती हैं। वायुराशि अपने स्रोत प्रदेश की विशेषताओं को ग्रहण करती है।
स्रोत प्रदेश
पृथ्वी की सतह के वे विस्तृत और अपेक्षाकृत समान क्षेत्र जहाँ वायुराशियों का निर्माण होता है, स्रोत प्रदेश कहलाते हैं। इन प्रदेशों की सतह और तापीय दशाएँ वायुराशि की प्रारंभिक विशेषताओं को निर्धारित करती हैं।
ध्रुवीय महाद्वीपीय स्रोत प्रदेश
उच्च अक्षांशों के महाद्वीपीय क्षेत्र, विशेषकर जहाँ लंबे समय तक बर्फ और ठंड की स्थिति रहती है, ध्रुवीय महाद्वीपीय वायुराशियों के स्रोत प्रदेश हो सकते हैं। ऐसी वायुराशियाँ सामान्यतः ठंडी और शुष्क प्रकृति की होती हैं।
वाताग्र
दो अलग-अलग गुणों वाली वायुराशियों के बीच की सीमा को वाताग्र (Front) कहा जाता है। विभिन्न तापमान और आर्द्रता वाली वायुराशियों के मिलने से मौसम में परिवर्तन और वर्षा जैसी घटनाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
शीत वाताग्र
जब ठंडी वायु आगे बढ़कर गर्म वायु को ऊपर उठाने लगती है, तो ऐसी सीमा को शीत वाताग्र कहा जाता है।
उष्ण वाताग्र
जब गर्म वायु ठंडी वायु के ऊपर चढ़ते हुए आगे बढ़ती है, तो ऐसी सीमा को उष्ण वाताग्र कहा जाता है।
अधिविष्ट वाताग्र
जब ठंडी और गर्म दोनों प्रकार के वाताग्र मिल जाते हैं और एक वायुराशि दूसरी को पूरी तरह प्रभावित करने लगती है, तो अधिविष्ट वाताग्र की स्थिति बन सकती है।
चक्रवात
वायुदाब की ऐसी व्यवस्था जिसमें वायु किसी निम्न दाब केंद्र की ओर अभिसरित होकर चक्राकार गति करती है, चक्रवात कहलाती है। चक्रवात मौसम में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात
उष्णकटिबंधीय चक्रवात मुख्यतः गर्म महासागरीय क्षेत्रों के ऊपर विकसित होते हैं। इनके निर्माण के लिए गर्म समुद्री सतह, पर्याप्त नमी, कोरिओलिस प्रभाव और कम ऊर्ध्वाधर पवन कर्तन जैसी परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में तीव्र हवाएँ, भारी वर्षा और समुद्री तूफानी लहरें उत्पन्न हो सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में इनके पहुँचने को Landfall कहा जाता है।
चक्रवात की आँख
एक विकसित उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र में अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र पाया जा सकता है, जिसे चक्रवात की आँख (Eye) कहा जाता है। इसके चारों ओर तीव्र पवनों और बादलों का क्षेत्र पाया जाता है।
शीतोष्ण चक्रवात
शीतोष्ण चक्रवात मुख्यतः मध्य अक्षांशों में विकसित होते हैं और विभिन्न तापमान वाली वायुराशियों तथा वाताग्रों से जुड़े होते हैं। इनके साथ बादल, वर्षा और मौसम में परिवर्तन हो सकता है।
अध्याय 10 के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. वायुदाब मापने की इकाई क्या है?
उत्तर: वायुदाब को सामान्यतः मिलीबार या हेक्टोपास्कल में व्यक्त किया जाता है। मौसम मानचित्रों में अलग-अलग स्थानों की तुलना करने के लिए वायुदाब को समुद्र तल के स्तर पर समायोजित किया जाता है।
प्रश्न 2. ITCZ कहाँ पाया जाता है?
उत्तर: अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र अर्थात ITCZ सामान्यतः भूमध्य रेखा के आसपास पाया जाता है। यहाँ दोनों गोलार्द्धों की व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं। इसकी स्थिति ऋतु के अनुसार बदलती रहती है।
प्रश्न 3. उत्तरी गोलार्द्ध में निम्न दाब के चारों ओर पवनों की दिशा कैसी होती है?
उत्तर: उत्तरी गोलार्द्ध में निम्न दाब के चारों ओर पवनें सामान्यतः वामावर्त दिशा में घूमती हुई निम्न दाब केंद्र की ओर अभिसरित होती हैं।
प्रश्न 4. भूविक्षेपी पवनें क्या हैं?
उत्तर: जब धरातलीय घर्षण का प्रभाव नगण्य हो और दाब प्रवणता बल तथा कोरिओलिस प्रभाव के बीच संतुलन हो जाए, तब पवनें समदाब रेखाओं के लगभग समानांतर बहती हैं। इन्हें भूविक्षेपी पवनें कहते हैं।
प्रश्न 5. समुद्र समीर और स्थल समीर में क्या अंतर है?
उत्तर: समुद्र समीर दिन के समय समुद्र से स्थल की ओर चलती है, जबकि स्थल समीर रात के समय स्थल से समुद्र की ओर चलती है। इसका मुख्य कारण स्थल और जल के गर्म तथा ठंडा होने की अलग-अलग दर है।
प्रश्न 6. पवनों की दिशा एवं गति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: प्रमुख कारक हैं—दाब प्रवणता बल, कोरिओलिस प्रभाव, घर्षण बल तथा वक्राकार गति से संबंधित अभिकेंद्रीय प्रभाव।
प्रश्न 7. चिनूक को हिम भक्षी क्यों कहा जाता है?
उत्तर: चिनूक एक गर्म और शुष्क पवन है। इसके कारण सर्दियों में तापमान तेजी से बढ़ सकता है और बर्फ पिघलने लगती है। इसी कारण इसे हिम भक्षी कहा जाता है।
प्रश्न 8. डोलड्रम क्या है?
उत्तर: भूमध्य रेखा के आसपास का अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र, जहाँ धरातलीय पवनों की गति कमजोर होती है और गर्म वायु ऊपर उठती है, डोलड्रम कहलाता है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. कोरिओलिस बल किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वायु के अपने मूल पथ से विक्षेपित होने के प्रभाव को कोरिओलिस प्रभाव या बल कहा जाता है।
प्रश्न 2. समदाब रेखा क्या है?
उत्तर: समान वायुदाब वाले स्थानों को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा को समदाब रेखा कहते हैं।
प्रश्न 3. वायुदाब प्रणालियों के दो प्रकार कौन-से हैं?
उत्तर: उच्च दाब और निम्न दाब।
प्रश्न 4. 60° उत्तर और 60° दक्षिण अक्षांशों के आसपास किस प्रकार का दाब पाया जाता है?
उत्तर: उपध्रुवीय निम्न दाब।
प्रश्न 5. उच्च दाब की प्रमुख उपोष्ण पट्टियाँ लगभग कहाँ पाई जाती हैं?
उत्तर: लगभग 30° उत्तर और 30° दक्षिण अक्षांशों के आसपास।
प्रश्न 6. विषुवत रेखा के दोनों ओर से आने वाली व्यापारिक पवनें कहाँ मिलती हैं?
उत्तर: अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) में।
प्रश्न 7. स्थल समीर किसे कहते हैं?
उत्तर: रात के समय स्थल से समुद्र की ओर बहने वाली स्थानीय पवन को स्थल समीर कहते हैं।
प्रश्न 8. मिस्ट्रल क्या है?
उत्तर: मिस्ट्रल दक्षिणी फ्रांस की ओर बहने वाली ठंडी, शुष्क और तेज स्थानीय पवन है।
प्रश्न 9. ‘गरजने वाला चालीसा, प्रचंड पचासा और चीखता साठ’ किससे संबंधित हैं?
उत्तर: ये मध्य अक्षांशों की प्रबल पछुआ पवनों से संबंधित पारंपरिक नाम हैं।
प्रश्न 10. वायुराशि क्या है?
उत्तर: तापमान और आर्द्रता की अपेक्षाकृत समान विशेषताओं वाला वायुमंडल का विशाल भाग वायुराशि कहलाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. वायुदाब प्रवणता की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: दूरी के संदर्भ में वायुदाब में होने वाले परिवर्तन की दर को वायुदाब प्रवणता कहते हैं। समदाब रेखाएँ पास-पास होने पर दाब प्रवणता अधिक होती है और पवनों की गति सामान्यतः अधिक होती है। समदाब रेखाएँ दूर-दूर होने पर दाब प्रवणता कम होती है।
प्रश्न 2. घोड़ों के अक्षांश से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: लगभग 30° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के आसपास उपोष्ण उच्च दाब की पट्टियाँ पाई जाती हैं। यहाँ वायु के अवतलन और कमजोर क्षैतिज पवनों के कारण शांत दशाएँ बन सकती हैं। इन्हीं क्षेत्रों को परंपरागत रूप से घोड़ों के अक्षांश कहा जाता है।
प्रश्न 3. डोलड्रम क्षेत्र का क्या अर्थ है?
उत्तर: भूमध्य रेखा के आसपास का शांत क्षेत्र, जहाँ दोनों गोलार्द्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं और गर्म वायु ऊपर उठती है, डोलड्रम क्षेत्र कहलाता है। यहाँ धरातलीय पवनें सामान्यतः कमजोर होती हैं।
प्रश्न 4. फैरेल के नियम को समझाइए।
उत्तर: पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील पवनें अपनी मूल दिशा से विक्षेपित होती हैं। उत्तरी गोलार्द्ध में यह विक्षेपण दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर होता है। इस घटना को पवनों के विक्षेपण से संबंधित फैरेल के नियम के रूप में समझाया जाता है।
प्रश्न 5. वायुमंडलीय दाब से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: गुरुत्वाकर्षण के कारण वायुमंडल में उपस्थित वायु का भार पृथ्वी की सतह पर दबाव डालता है। किसी स्थान पर वायु के स्तंभ द्वारा उत्पन्न इस दबाव को वायुमंडलीय दाब कहा जाता है।
प्रश्न 6. चिनूक तथा फॉन पवनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: चिनूक रॉकी पर्वतों के पूर्वी ढालों से नीचे उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन है। यह बर्फ पिघलाने के कारण ‘हिम भक्षी’ कहलाती है। फॉन आल्प्स पर्वतों को पार करके नीचे उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन है, जो यूरोप के कुछ क्षेत्रों को प्रभावित करती है।
प्रश्न 7. पृथ्वी के सात दाब कटिबंधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
- विषुवतीय निम्न दाब पट्टी
- उत्तरी उपोष्ण उच्च दाब पट्टी
- दक्षिणी उपोष्ण उच्च दाब पट्टी
- उत्तरी उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टी
- दक्षिणी उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टी
- उत्तरी ध्रुवीय उच्च दाब पट्टी
- दक्षिणी ध्रुवीय उच्च दाब पट्टी
प्रश्न 8. वायुराशि और पवन में अंतर बताइए।
उत्तर: वायुराशि वायुमंडल का विशाल भाग है जिसमें तापमान और आर्द्रता की विशेषताएँ अपेक्षाकृत समान होती हैं। इसके विपरीत पवन वायु की गति या प्रवाह है। इसलिए वायुराशि की पहचान उसकी विशेषताओं से और पवन की पहचान उसकी गति तथा दिशा से होती है।
प्रश्न 9. स्रोत प्रदेश किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी की सतह के ऐसे विस्तृत और अपेक्षाकृत समान क्षेत्र जहाँ वायुराशियों का निर्माण होता है, स्रोत प्रदेश कहलाते हैं। वायुराशि तापमान और आर्द्रता जैसी विशेषताएँ अपने स्रोत प्रदेश से प्राप्त करती है।
प्रश्न 10. वाताग्र क्या है?
उत्तर: विभिन्न गुणों वाली दो वायुराशियों के बीच की सीमा को वाताग्र कहते हैं। इनके मिलने से बादल, वर्षा और मौसम में परिवर्तन जैसी घटनाएँ हो सकती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. वायुदाब के क्षैतिज वितरण के विश्व प्रतिरूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पृथ्वी पर वायुदाब का क्षैतिज वितरण मुख्यतः उच्च और निम्न दाब की लगभग एकांतर पट्टियों के रूप में देखा जाता है। भूमध्य रेखा के आसपास गर्म वायु ऊपर उठने के कारण निम्न दाब की स्थिति बनती है। इसे विषुवतीय निम्न दाब पट्टी कहा जाता है।
लगभग 30° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के आसपास ऊपर से नीचे उतरती वायु के कारण उपोष्ण उच्च दाब पट्टियाँ बनती हैं। लगभग 60° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के आसपास उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टियाँ पाई जाती हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों में अत्यधिक ठंडी और भारी वायु के अवतलन से ध्रुवीय उच्च दाब पट्टियाँ बनती हैं।
इस प्रकार पृथ्वी पर सात प्रमुख दाब कटिबंधों का प्रतिरूप बनता है—एक विषुवतीय निम्न दाब पट्टी, दो उपोष्ण उच्च दाब पट्टियाँ, दो उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टियाँ और दो ध्रुवीय उच्च दाब पट्टियाँ।
प्रश्न 2. पवनों के मुख्य प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पवनों को उनके विस्तार, अवधि और उत्पत्ति के आधार पर विभिन्न प्रकारों में समझा जाता है। भूमंडलीय या प्राथमिक पवनों में व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पूर्वी पवनें प्रमुख हैं। इनके अलावा विषुवतीय क्षेत्र का शांत क्षेत्र भी सामान्य परिसंचरण का हिस्सा है।
व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों से भूमध्यरेखीय निम्न दाब क्षेत्र की ओर चलती हैं। पछुआ पवनें मध्य अक्षांशों में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं। ध्रुवीय पूर्वी पवनें ध्रुवीय उच्च दाब क्षेत्रों से उपध्रुवीय निम्न दाब क्षेत्रों की ओर चलती हैं।
द्वितीयक पवनों में मानसूनी पवनें, चक्रवात, प्रतिचक्रवात तथा पर्वतीय और घाटीय पवनें शामिल की जाती हैं। स्थानीय पवनों में चिनूक, फॉन, मिस्ट्रल, बोरा और लू जैसी पवनें प्रमुख हैं।
प्रश्न 3. पृथ्वी पर सामान्य वायुमंडलीय परिसंचरण को समझाइए।
उत्तर: पृथ्वी के विभिन्न भागों में सौर ऊर्जा की मात्रा समान नहीं होती। भूमध्यरेखीय क्षेत्र अधिक गर्म होते हैं और गर्म वायु ऊपर उठती है। ऊपरी स्तरों पर वायु ध्रुवों की ओर जाती है और उपोष्ण क्षेत्रों में नीचे उतरती है। इससे उच्च दाब और निम्न दाब की पट्टियों का निर्माण होता है।
भूमंडलीय परिसंचरण को तीन प्रमुख कोशिकाओं से समझाया जाता है—हेडली कोशिका, फेरेल कोशिका और ध्रुवीय कोशिका। इनके कारण व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पूर्वी पवनें उत्पन्न होती हैं। पृथ्वी का घूर्णन इन पवनों की दिशा को कोरिओलिस प्रभाव द्वारा प्रभावित करता है।
प्रश्न 4. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति समुद्रों पर क्यों होती है?
उत्तर: उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को विकसित होने के लिए गर्म समुद्री जल, पर्याप्त नमी, कोरिओलिस प्रभाव और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। गर्म समुद्र से बड़ी मात्रा में जलवाष्प वायुमंडल में जाती है। जलवाष्प के संघनन से ऊष्मा मुक्त होती है, जिससे चक्रवाती परिसंचरण को ऊर्जा मिलती है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में केंद्र के आसपास तीव्र पवनें और घने बादल पाए जाते हैं। केंद्र का अपेक्षाकृत शांत भाग ‘आँख’ कहलाता है। चक्रवात तट पर पहुँचने के बाद समुद्री नमी की आपूर्ति कम होने और स्थल की घर्षण शक्ति बढ़ने के कारण धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है।
चक्रवात और प्रतिचक्रवात में अंतर
| आधार | चक्रवात | प्रतिचक्रवात |
|---|---|---|
| दाब | निम्न दाब केंद्र | उच्च दाब केंद्र |
| वायु की गति | केंद्र की ओर अभिसरण | केंद्र से बाहर की ओर अपसरण |
| ऊर्ध्वाधर गति | वायु के ऊपर उठने की प्रवृत्ति | वायु के नीचे उतरने की प्रवृत्ति |
| मौसम | बादल और वर्षा की संभावना अधिक | सामान्यतः साफ और शुष्क मौसम |
परियोजना कार्य
मौसम प्रणाली को समझने के लिए समाचार पत्र, टेलीविजन, रेडियो और उपलब्ध मौसम संबंधी स्रोतों से मौसम की जानकारी एकत्र कीजिए। किसी समाचार पत्र या मौसम मानचित्र में बादलों से ढके क्षेत्रों को पहचानिए और उनके वितरण का अध्ययन कीजिए।
इसके बाद मौसम पूर्वानुमान की तुलना वास्तविक मौसम से कीजिए और यह लिखिए कि सप्ताह के कितने दिनों का पूर्वानुमान वास्तविक स्थिति के निकट रहा। इस परियोजना से विद्यार्थियों को मौसम मानचित्र, बादल वितरण और वायुमंडलीय परिसंचरण को समझने में सहायता मिलेगी।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- समदाब रेखा: समान वायुदाब वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा।
- दाब प्रवणता: दूरी के अनुसार वायुदाब में परिवर्तन की दर।
- कोरिओलिस प्रभाव: पृथ्वी के घूर्णन के कारण पवनों का विक्षेपण।
- ITCZ: व्यापारिक पवनों के अभिसरण का क्षेत्र।
- डोलड्रम: भूमध्य रेखा के आसपास का शांत क्षेत्र।
- घोड़ों का अक्षांश: उपोष्ण उच्च दाब के आसपास का पारंपरिक नाम।
- समुद्र समीर: दिन में समुद्र से स्थल की ओर चलने वाली हवा।
- स्थल समीर: रात में स्थल से समुद्र की ओर चलने वाली हवा।
- चिनूक: गर्म और शुष्क स्थानीय पवन, जिसे हिम भक्षी कहा जाता है।
- फॉन: आल्प्स से नीचे उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन।
- मिस्ट्रल: दक्षिणी फ्रांस की ओर बहने वाली ठंडी और शुष्क पवन।
- वायुराशि: समान तापमान और आर्द्रता वाली विशाल वायु इकाई।
- वाताग्र: विभिन्न गुणों वाली वायुराशियों की सीमा।
- चक्रवात: निम्न दाब से संबंधित वायुमंडलीय परिसंचरण।
अध्याय का सारांश
वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ अध्याय में पृथ्वी के वायुदाब और पवनों के वितरण का अध्ययन किया जाता है। वायुदाब में अंतर पवनों को गति प्रदान करता है, जबकि पृथ्वी का घूर्णन कोरिओलिस प्रभाव के माध्यम से उनकी दिशा को प्रभावित करता है। घर्षण भी विशेषकर धरातल के निकट पवनों की गति को प्रभावित करता है।
पृथ्वी पर सात प्रमुख दाब कटिबंध पाए जाते हैं। इन्हीं दाब क्षेत्रों के कारण व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पूर्वी पवनें विकसित होती हैं। भूमध्य रेखा के आसपास ITCZ और डोलड्रम क्षेत्र पाए जाते हैं, जबकि लगभग 30° अक्षांशों के आसपास उपोष्ण उच्च दाब पट्टियाँ और लगभग 60° अक्षांशों के आसपास उपध्रुवीय निम्न दाब पट्टियाँ पाई जाती हैं।
अध्याय में समुद्र समीर, स्थल समीर, मानसूनी पवनें, पर्वतीय एवं घाटीय पवनें तथा चिनूक, फॉन और मिस्ट्रल जैसी स्थानीय पवनों का भी अध्ययन किया जाता है। इसके अतिरिक्त वायुराशि, स्रोत प्रदेश, वाताग्र, चक्रवात और मौसम प्रणालियों की जानकारी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 10 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से वायुदाब, दाब प्रवणता, कोरिओलिस प्रभाव, सात दाब कटिबंध, ITCZ, भूमंडलीय पवनें, स्थानीय पवनें, वायुराशि, वाताग्र और चक्रवात को अच्छी तरह समझना चाहिए। इन अवधारणाओं को केवल याद करने के बजाय उनके कारण और आपसी संबंध को समझकर पढ़ने से वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।
Class 11 Geography के अन्य अध्याय
Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना