Bihar Board Class 11 Geography Chapter 11 – वायुमंडल में जल में वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प, आर्द्रता, वाष्पीकरण, संघनन, बादल, वर्षण तथा वर्षा के विभिन्न प्रकारों का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय पृथ्वी के जल चक्र और मौसम संबंधी घटनाओं को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस पोस्ट में Bihar Board Class 11 Geography Chapter 11 के पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर, बहुविकल्पीय प्रश्न, अतिलघु उत्तरीय प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और परियोजना कार्य को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
अध्याय 11 : वायुमंडल में जल
वायुमंडल में जलवाष्प
वायुमंडल में जल मुख्यतः जलवाष्प के रूप में मौजूद रहता है। जलवाष्प का प्रमुख स्रोत महासागर, समुद्र, झील, नदियाँ तथा अन्य जलस्रोत हैं। सूर्य की ऊष्मा के कारण जल का वाष्पीकरण होता है और जलवाष्प वायुमंडल में पहुँचती है।
वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा स्थान, तापमान, समुद्र से दूरी और अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है।
आर्द्रता क्या है?
वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा मौसम और वर्षा की प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।
आर्द्रता के प्रमुख प्रकार
- निरपेक्ष आर्द्रता
- सापेक्ष आर्द्रता
- विशिष्ट आर्द्रता
निरपेक्ष आर्द्रता
किसी निश्चित तापमान पर एक निश्चित आयतन की वायु में उपस्थित जलवाष्प की वास्तविक मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहा जाता है। इसे सामान्यतः जलवाष्प के भार और वायु के आयतन के संबंध में व्यक्त किया जाता है।
सापेक्ष आर्द्रता
किसी निश्चित तापमान पर वायु में मौजूद वास्तविक जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर वायु की अधिकतम जलवाष्प धारण क्षमता के अनुपात को प्रतिशत में व्यक्त करने पर सापेक्ष आर्द्रता प्राप्त होती है।
सरल शब्दों में, वायु अपनी पूरी क्षमता की तुलना में जितनी नमी धारण कर रही है, उसका प्रतिशत सापेक्ष आर्द्रता कहलाता है।
संतृप्त वायु
जब किसी निश्चित तापमान पर वायु अपनी अधिकतम जलवाष्प धारण क्षमता तक पहुँच जाती है, तो उसे संतृप्त वायु कहा जाता है। इस स्थिति में वायु में और जलवाष्प शामिल करने की क्षमता बहुत कम या नहीं रहती।
वाष्पीकरण
तरल जल के जलवाष्प में बदलने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। सूर्य की ऊष्मा वाष्पीकरण की प्रमुख ऊर्जा प्रदान करती है। महासागर, समुद्र, झील, नदियाँ और मिट्टी से जल वाष्पित होकर वायुमंडल में पहुँचता है।
वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक
- तापमान
- वायु की शुष्कता
- वायु परिसंचरण
- जलखंड का विस्तार
वाष्पोत्सर्जन
पौधों द्वारा अपनी पत्तियों आदि के माध्यम से जलवाष्प को वायुमंडल में छोड़ने की प्रक्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन मिलकर भूमि से वायुमंडल में नमी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ओसांक
वह तापमान जिस पर वायु में उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर जल में बदलना शुरू करती है, ओसांक कहलाता है। वायु में नमी की मात्रा अधिक होने पर वायु अपेक्षाकृत कम शीतलन के बाद भी ओसांक तक पहुँच सकती है।
संघनन
जलवाष्प के गैसीय अवस्था से तरल अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं। जब नम वायु ठंडी होकर अपने ओसांक तक पहुँचती है, तो जलवाष्प का संघनन शुरू हो सकता है।
संघनन से ओस, कोहरा, धुंध, बादल तथा कुछ परिस्थितियों में तुषार आदि का निर्माण होता है।
संघनन के प्रमुख रूप
- ओस
- तुषार
- कोहरा
- धुंध
- बादल
ओस
जब धरातल के निकट ठंडी सतहों, जैसे घास, पत्तियों या अन्य वस्तुओं पर जलवाष्प संघनित होकर पानी की बूंदों के रूप में जमा होती है, तो उसे ओस कहते हैं। साफ आकाश, शांत हवा, उच्च सापेक्ष आर्द्रता तथा ठंडी और लंबी रातें ओस बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं।
तुषार
जब तापमान जमाव बिंदु के आसपास या उससे नीचे पहुँच जाता है और जलवाष्प बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टलों के रूप में ठंडी सतह पर जमा होती है, तो उसे तुषार कहते हैं।
कोहरा
धरातल के बहुत निकट बनने वाले बादल जैसी स्थिति को कोहरा कहा जाता है। जब नम वायु ठंडी होकर ओसांक तक पहुँचती है, तो जलवाष्प सूक्ष्म जल बूंदों में बदल सकती है। ये बूंदें वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों के आसपास रहकर कोहरे का निर्माण करती हैं।
बादल क्या हैं?
ऊँचाई पर मुक्त वायु में जल की छोटी बूंदों या बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टलों के समूह को बादल कहते हैं। नम वायु के ऊपर उठने और ठंडी होने पर जब उसका तापमान ओसांक तक पहुँचता है, तब जलवाष्प का संघनन होकर बादल बन सकते हैं।
बादलों का वर्गीकरण
ऊँचाई के आधार पर बादलों को सामान्यतः तीन वर्गों में समझाया जाता है:
1. उच्च स्तरीय मेघ
लगभग 6,000 से 10,000 मीटर की ऊँचाई वाले बादलों में पक्षाभ, पक्षाभ स्तरी तथा पक्षाभ कपासी जैसे बादल शामिल किए जाते हैं।
2. मध्यम स्तरीय मेघ
लगभग 3,000 से 6,000 मीटर की ऊँचाई वाले बादलों में मध्य स्तर के कपासी एवं स्तरी प्रकार के बादल पाए जाते हैं।
3. निम्न स्तरीय मेघ
लगभग 3,000 मीटर तक के बादलों में स्तरी, कपासी, वर्षा स्तरी तथा कपासी वर्षा जैसे बादलों को शामिल किया जाता है।
वर्षण क्या है?
वायुमंडल से जल का विभिन्न रूपों में धरातल पर गिरना वर्षण कहलाता है। वर्षण तरल या ठोस दोनों रूपों में हो सकता है।
वर्षण के प्रमुख रूप
- वर्षा
- हिमवर्षा
- ओलावृष्टि
वर्षा
जब बादलों में बने जलकण पर्याप्त बड़े और भारी हो जाते हैं तथा गुरुत्वाकर्षण के कारण धरातल पर गिरते हैं, तो इसे वर्षा कहते हैं। वर्षा के लिए वायुमंडल में पर्याप्त नमी तथा वायु का ठंडा होकर संघनित होना आवश्यक है।
वर्षा के प्रकार
उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर वर्षा को तीन प्रमुख प्रकारों में समझाया जाता है:
- संवहनीय वर्षा
- पर्वतीय वर्षा
- चक्रवाती वर्षा
1. संवहनीय वर्षा
जब धरातल अधिक गर्म होने के कारण उसके संपर्क में मौजूद नम वायु गर्म होकर ऊपर उठती है और ऊपर जाकर ठंडी होती है, तब संघनन के बाद वर्षा हो सकती है। इस प्रकार की वर्षा को संवहनीय वर्षा कहते हैं।
संवहनीय वर्षा प्रायः तीव्र बौछारों तथा गरज-चमक के साथ हो सकती है।
2. पर्वतीय वर्षा
जब नम वायु किसी पर्वत या ऊँचे भू-भाग के कारण ऊपर उठने के लिए बाध्य होती है और ऊपर जाकर ठंडी होकर संघनित होती है, तब होने वाली वर्षा को पर्वतीय वर्षा या ओरोग्राफिक वर्षा कहा जाता है।
पर्वत की पवनाभिमुख ढाल पर अधिक वर्षा हो सकती है, जबकि दूसरी ओर नीचे उतरती वायु के कारण वर्षा कम होती है और वृष्टि छाया क्षेत्र विकसित हो सकता है।
3. चक्रवाती वर्षा
जब अलग-अलग तापमान और आर्द्रता वाली वायुराशियाँ मिलती हैं और गर्म नम वायु ऊपर उठती है, तब संघनन तथा वर्षा हो सकती है। ऐसी वर्षा को चक्रवाती या वाताग्रीय वर्षा कहा जाता है।
वृष्टि छाया
पर्वत की पवनाभिमुख ढाल से ऊपर उठने वाली नम वायु वर्षा करने के बाद पर्वत की दूसरी ओर नीचे उतरती है। नीचे उतरते समय वायु गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क हो जाती है। इस कारण पर्वत की दूसरी ओर कम वर्षा होती है। ऐसे शुष्क क्षेत्र को वृष्टि छाया क्षेत्र कहते हैं।
विश्व में वर्षा का वितरण
विश्व में वर्षा का वितरण समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि कुछ क्षेत्र बहुत कम वर्षा प्राप्त करते हैं। विषुवतीय क्षेत्रों, मानसूनी क्षेत्रों के कुछ तटीय भागों तथा पर्वतों की पवनाभिमुख ढालों पर अधिक वर्षा हो सकती है। इसके विपरीत महाद्वीपों के आंतरिक भागों, मरुस्थलों, ध्रुवीय क्षेत्रों तथा वृष्टि छाया क्षेत्रों में वर्षा कम होती है।
वर्षा को प्रभावित करने वाले कारक
- भूमध्य रेखा से दूरी
- समुद्र से दूरी
- समुद्र तल से ऊँचाई
- प्रचलित पवनें
- महासागरीय धाराएँ
- पर्वत एवं उच्चावच
- तापमान तथा वायुमंडलीय दशाएँ
पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. वर्षण के तीन प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर: उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर वर्षण या वर्षा के प्रमुख प्रकार हैं—संवहनीय वर्षा, पर्वतीय वर्षा और चक्रवाती वर्षा।
प्रश्न 2. सापेक्ष आर्द्रता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: किसी निश्चित तापमान पर वायु में उपस्थित वास्तविक जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर वायु की अधिकतम जलवाष्प धारण क्षमता के अनुपात को प्रतिशत में व्यक्त करने पर सापेक्ष आर्द्रता प्राप्त होती है।
प्रश्न 3. बादल कैसे बनते हैं?
उत्तर: जब नम वायु ऊपर उठकर फैलती और ठंडी होती है तथा उसका तापमान ओसांक तक पहुँचता है, तब जलवाष्प का संघनन होने लगता है। सूक्ष्म जल बूंदों या बर्फ के क्रिस्टलों के समूह से बादल बनते हैं।
प्रश्न 4. बादलों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: ऊँचाई के आधार पर बादलों को उच्च स्तरीय, मध्यम स्तरीय और निम्न स्तरीय मेघों में बाँटा जाता है। उच्च स्तरीय मेघों में पक्षाभ आदि, मध्यम स्तर में मध्यवर्ती कपासी/स्तरी प्रकार और निम्न स्तर में स्तरी, कपासी तथा वर्षा वाले बादल शामिल किए जाते हैं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ओसांक क्या है?
उत्तर: वह तापमान जिस पर वायु में उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर जल में बदलना शुरू करती है, ओसांक कहलाता है।
प्रश्न 2. वृष्टि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: वायुमंडल से जल का वर्षा, हिम या ओले आदि के रूप में धरातल पर गिरना वृष्टि कहलाता है।
प्रश्न 3. संघनन प्रक्रिया कब होती है?
उत्तर: जब जलवाष्प वाली वायु ठंडी होकर अपने ओसांक तक पहुँचती है, तब जलवाष्प के तरल या ठोस रूप में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
प्रश्न 4. आर्द्रता का क्या अर्थ है?
उत्तर: वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं।
प्रश्न 5. वाष्पीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर: तरल जल के जलवाष्प में बदलने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं।
प्रश्न 6. सापेक्ष आर्द्रता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी निश्चित तापमान पर वायु में मौजूद वास्तविक नमी की उसकी अधिकतम नमी धारण क्षमता से प्रतिशत तुलना को सापेक्ष आर्द्रता कहते हैं।
प्रश्न 7. हल्के कोहरे को क्या कहते हैं?
उत्तर: हल्के कोहरे को सामान्यतः धुंध (Mist) कहा जाता है।
प्रश्न 8. हिमपात कैसे होता है?
उत्तर: जब वायुमंडल में तापमान इतना कम हो कि जलकण बर्फ के क्रिस्टलों के रूप में बने रहें और धरातल पर गिरें, तो हिमपात होता है।
प्रश्न 9. बादल कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: ऊँचाई के आधार पर बादलों को उच्च स्तरीय, मध्यम स्तरीय और निम्न स्तरीय मेघों में बाँटा जाता है।
प्रश्न 10. बादल कैसे बनते हैं?
उत्तर: नम वायु के ऊपर उठने और ठंडी होकर ओसांक तक पहुँचने पर जलवाष्प का संघनन होता है। सूक्ष्म जल बूंदों या हिमकणों के समूह से बादल बनते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ओसांक क्या है? नमी की मात्रा से इसका क्या संबंध है?
उत्तर: जिस तापमान पर वायु में उपस्थित जलवाष्प संघनित होना शुरू करती है, उसे ओसांक कहते हैं। वायु में नमी की मात्रा अधिक होने पर उसका ओसांक सामान्यतः अधिक होता है। अधिक सापेक्ष आर्द्रता वाली वायु को थोड़े शीतलन से भी ओसांक तक पहुँचाया जा सकता है।
प्रश्न 2. आर्द्रता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: वायु में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। इसका संबंध वाष्पीकरण, तापमान और जलस्रोतों से है। आर्द्रता को निरपेक्ष तथा सापेक्ष आर्द्रता जैसे मापों से व्यक्त किया जाता है।
प्रश्न 3. कोहरा कैसे बनता है?
उत्तर: जब धरातल के निकट नम वायु पर्याप्त ठंडी होकर ओसांक तक पहुँचती है, तो जलवाष्प सूक्ष्म जल बूंदों में संघनित हो जाती है। ये बूंदें हवा में तैरती रहती हैं और धरातल के निकट दृश्यता कम कर देती हैं। इसे कोहरा कहते हैं।
प्रश्न 4. संसार में वर्षा का वार्षिक वितरण बताइए।
उत्तर: संसार में वर्षा का वितरण असमान है। विषुवतीय क्षेत्र और कुछ मानसूनी तटीय क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है। महाद्वीपों के आंतरिक भागों में वर्षा सामान्यतः कम होती है। गर्म मरुस्थल, ध्रुवीय प्रदेश और वृष्टि छाया क्षेत्र बहुत कम वर्षा प्राप्त करते हैं।
प्रश्न 5. वृष्टि किसे कहते हैं? वृष्टि के रूप कौन-कौन से हैं?
उत्तर: वायुमंडल से जल का विभिन्न रूपों में धरातल पर गिरना वृष्टि कहलाता है। इसके प्रमुख रूप वर्षा, हिमवर्षा और ओलावृष्टि हैं।
प्रश्न 6. संघनन कब और कैसे होता है?
उत्तर: जब जलवाष्प वाली वायु ठंडी होकर ओसांक तक पहुँचती है, तो उसकी जलवाष्प धारण क्षमता घट जाती है और जलवाष्प संघनित होने लगती है। वायु के ऊपर उठने, पर्वतों के कारण ऊपर जाने अथवा अलग-अलग तापमान वाली वायुराशियों के मिलने से भी संघनन हो सकता है।
प्रश्न 7. किसी स्थान की वर्षा किन तत्वों पर निर्भर करती है?
उत्तर: वर्षा को भूमध्य रेखा से दूरी, समुद्र से दूरी, समुद्र तल से ऊँचाई, प्रचलित पवनें, महासागरीय धाराएँ, पर्वतीय अवरोध तथा तापमान जैसी परिस्थितियाँ प्रभावित करती हैं।
प्रश्न 8. ओस तथा ओसांक में क्या अंतर है?
| आधार | ओस | ओसांक |
|---|---|---|
| अर्थ | ठंडी सतह पर जमा हुई जल की बूंदें | वह तापमान जिस पर संघनन शुरू होता है |
| स्वरूप | जल की बूंदों के रूप में दिखाई देती है | एक तापमान का मान है |
| निर्माण | सतह पर संघनन से बनती है | वायु की संतृप्ति से संबंधित है |
प्रश्न 9. वर्षा तथा वृष्टि में क्या अंतर है?
| आधार | वर्षा | वृष्टि |
|---|---|---|
| अर्थ | जल बूंदों के रूप में जल का धरातल पर गिरना | वायुमंडल से जल के सभी प्रमुख रूपों का गिरना |
| रूप | मुख्यतः तरल जल | वर्षा, हिमवर्षा, ओलावृष्टि आदि |
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. वर्षा किस प्रकार होती है? वर्षा के विभिन्न प्रकारों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर: वर्षा के लिए वायुमंडल में पर्याप्त नमी और वायु का ठंडा होकर संघनित होना आवश्यक है। नम वायु ऊपर उठती है और ऊपर जाने पर ठंडी होती है। जब वायु ओसांक तक पहुँचती है, तब जलवाष्प का संघनन शुरू होता है। सूक्ष्म जल बूंदों या हिमकणों से बादल बनते हैं। जब जल बूंदों का आकार और भार इतना बढ़ जाता है कि वे वायु में निलंबित नहीं रह पातीं, तो वे गुरुत्वाकर्षण के कारण धरातल पर गिरती हैं। इसे वर्षा कहते हैं।
उत्पत्ति के आधार पर वर्षा के तीन प्रमुख प्रकार हैं:
- संवहनीय वर्षा: धरातल के अधिक गर्म होने से नम वायु ऊपर उठती है और ठंडी होकर वर्षा करती है।
- पर्वतीय वर्षा: नम वायु पर्वत से टकराकर ऊपर उठती है, ठंडी होती है और वर्षा करती है।
- चक्रवाती वर्षा: अलग-अलग गुणों वाली वायुराशियों के मिलने और गर्म नम वायु के ऊपर उठने से होने वाली वर्षा।
प्रश्न 2. निरपेक्ष आर्द्रता तथा सापेक्ष आर्द्रता क्या है? विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर: किसी निश्चित तापमान और आयतन की वायु में मौजूद जलवाष्प की वास्तविक मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता कहा जाता है। इसका संबंध वायु में वास्तविक रूप से मौजूद जलवाष्प से होता है। वाष्पीकरण से इसकी मात्रा बढ़ सकती है और वर्षा के बाद घट सकती है।
सापेक्ष आर्द्रता किसी निश्चित तापमान पर वायु में मौजूद वास्तविक जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर उसकी अधिकतम जलवाष्प धारण क्षमता के प्रतिशत अनुपात को कहते हैं। तापमान बढ़ने पर वायु की जलवाष्प धारण क्षमता बढ़ती है, इसलिए समान मात्रा में जलवाष्प होने पर सापेक्ष आर्द्रता कम हो सकती है। तापमान घटने पर सापेक्ष आर्द्रता बढ़ती है।
संक्षिप्त टिप्पणी
1. संघनन
जलवाष्प के गैसीय अवस्था से तरल या उपयुक्त परिस्थितियों में ठोस अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को संघनन कहा जाता है। वायु के ठंडा होकर ओसांक तक पहुँचने पर संघनन शुरू हो सकता है। इससे ओस, कोहरा, बादल और तुषार जैसी घटनाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
2. पर्वतीय वर्षा
जब नम वायु किसी पर्वत या ऊँचे भू-भाग के कारण ऊपर उठती है, तो उसका तापमान कम होता है और जलवाष्प संघनित होकर वर्षा करती है। पर्वत की पवनाभिमुख ढाल पर अधिक वर्षा तथा दूसरी ओर कम वर्षा होने से वृष्टि छाया क्षेत्र बन सकता है।
3. उच्च मेघ
उच्च स्तरीय बादल सामान्यतः अधिक ऊँचाई पर पाए जाते हैं। पक्षाभ, पक्षाभ स्तरी और पक्षाभ कपासी इनके प्रमुख प्रकार हैं। ये मुख्यतः बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टलों से बने हो सकते हैं और मौसम में आने वाले परिवर्तन के संकेत दे सकते हैं।
4. वृष्टि छाया
पर्वत की पवनाभिमुख ढाल पर नम वायु ऊपर उठकर वर्षा करती है। पर्वत के दूसरी ओर उतरती वायु अपेक्षाकृत शुष्क होती है, इसलिए वहाँ वर्षा कम होती है। इस शुष्क क्षेत्र को वृष्टि छाया कहते हैं।
विभिन्न अवधारणाओं में अंतर
विशिष्ट ऊष्मा और गुप्त ऊष्मा
| विशिष्ट ऊष्मा | गुप्त ऊष्मा |
|---|---|
| किसी पदार्थ के तापमान को एक इकाई बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा से संबंधित है। | अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान में आवश्यक परिवर्तन किए बिना अवशोषित या मुक्त होने वाली ऊष्मा से संबंधित है। |
निरपेक्ष आर्द्रता और सापेक्ष आर्द्रता
| निरपेक्ष आर्द्रता | सापेक्ष आर्द्रता |
|---|---|
| वायु में वास्तविक जलवाष्प की मात्रा। | वास्तविक जलवाष्प की अधिकतम क्षमता से प्रतिशत तुलना। |
| वायु के आयतन से संबंधित होती है। | तापमान के साथ इसकी मात्रा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है। |
वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन
| वाष्पीकरण | वाष्पोत्सर्जन |
|---|---|
| जल की सतह से जलवाष्प बनने की प्रक्रिया। | पौधों द्वारा जलवाष्प छोड़ने की प्रक्रिया। |
| समुद्र, नदी, झील, मिट्टी आदि से हो सकता है। | मुख्यतः पौधों की पत्तियों आदि से होता है। |
ओस और पाला
| ओस | पाला |
|---|---|
| ठंडी सतह पर जल की बूंदों के रूप में जमती है। | बहुत कम तापमान पर बर्फ के क्रिस्टलों के रूप में जमता है। |
| तापमान जमाव बिंदु से ऊपर हो सकता है। | तापमान जमाव बिंदु के आसपास या उससे नीचे होता है। |
मेघ और कोहरा
| मेघ | कोहरा |
|---|---|
| वायुमंडल में ऊँचाई पर जल बूंदों या हिमकणों का समूह। | धरातल के बहुत निकट बनने वाला बादल जैसा जल बूंदों का समूह। |
| आकाश में दिखाई देता है। | धरातल के पास दृश्यता को कम करता है। |
संवहनीय वर्षा और चक्रवाती वर्षा
| संवहनीय वर्षा | चक्रवाती वर्षा |
|---|---|
| गर्म नम वायु के ऊपर उठने से होती है। | विभिन्न गुणों वाली वायुराशियों के मिलने से संबंधित होती है। |
| उष्ण क्षेत्रों में तीव्र बौछार के रूप में हो सकती है। | मध्य अक्षांशों में वाताग्रीय प्रणालियों से संबंधित हो सकती है। |
विश्व में वर्षण के वितरण के प्रमुख लक्षण
विश्व में वर्षण का वितरण वायुदाब और पवन प्रणाली, स्थल-जल वितरण तथा उच्चावच से प्रभावित होता है। विषुवतीय निम्न दाब क्षेत्र में वायु के ऊपर उठने के कारण वर्षा अधिक होती है। इसके विपरीत उच्च दाब वाले कुछ क्षेत्रों में नीचे उतरती वायु के कारण शुष्क परिस्थितियाँ विकसित होती हैं।
महाद्वीपों के आंतरिक भागों में समुद्र से दूरी के कारण वर्षा कम हो सकती है। पर्वतीय बाधाएँ भी वर्षा के वितरण को बदलती हैं। पर्वतों की पवनाभिमुख ढाल पर अधिक वर्षा और प्रतिपवन ढाल पर कम वर्षा होती है।
वाष्पीकरण की दर को नियंत्रित करने वाले कारक
- शुष्कता: शुष्क वायु अधिक जलवाष्प ग्रहण कर सकती है।
- तापमान: तापमान बढ़ने पर वाष्पीकरण सामान्यतः बढ़ता है।
- वायु परिसंचरण: हवा की गति बढ़ने से वाष्पीकरण की दर बढ़ सकती है।
- जलखंड: बड़े जलखंडों से वाष्पीकरण की मात्रा अधिक हो सकती है।
मेघ कैसे बनते हैं?
नम वायु जब ऊपर उठती है तो वायुदाब कम होने के कारण फैलती है और ठंडी होती है। जब इसका तापमान ओसांक तक पहुँचता है, तब जलवाष्प का संघनन होने लगता है। संघनित जलकण या हिमकण वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कणों के आसपास एकत्रित होकर बादलों का निर्माण करते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1. मानव के लिए वायुमंडल का सबसे महत्वपूर्ण घटक निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) जलवाष्प
(ख) धूल कण
(ग) नाइट्रोजन
(घ) ऑक्सीजन
उत्तर: (क) जलवाष्प
प्रश्न 2. जल के द्रव से गैस में बदलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(क) संघनन
(ख) वाष्पीकरण
(ग) वाष्पोत्सर्जन
(घ) अवक्षेपण
उत्तर: (ख) वाष्पीकरण
प्रश्न 3. वायु की वह अवस्था जिसमें वह अपनी जलवाष्प धारण क्षमता की सीमा तक पहुँच जाती है, कहलाती है—
(क) सापेक्ष आर्द्रता
(ख) निरपेक्ष आर्द्रता
(ग) विशिष्ट आर्द्रता
(घ) संतृप्त वायु
उत्तर: (घ) संतृप्त वायु
प्रश्न 4. वर्षा के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
(क) संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवाती
(ख) हिम, ओस और तुषार
(ग) कोहरा, धुंध और बादल
(घ) समुद्री, स्थलीय और मानसूनी
उत्तर: (क) संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवाती
परियोजना कार्य
जून से 31 दिसम्बर तक के समाचार-पत्रों से जानकारी एकत्र कीजिए कि देश के किन-किन भागों में अत्यधिक वर्षा हुई। प्रत्येक घटना का स्थान, वर्षा की मात्रा, तिथि और वर्षा से प्रभावित क्षेत्र की जानकारी एकत्र करके एक तालिका तैयार कीजिए।
इस परियोजना में विद्यार्थियों को शिक्षक या अभिभावक की सहायता से समाचारों और उपलब्ध मौसम संबंधी आँकड़ों का उपयोग करना चाहिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- आर्द्रता: वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा।
- निरपेक्ष आर्द्रता: वायु में वास्तविक जलवाष्प की मात्रा।
- सापेक्ष आर्द्रता: वास्तविक जलवाष्प की अधिकतम क्षमता से प्रतिशत तुलना।
- ओसांक: वह तापमान जिस पर संघनन शुरू होता है।
- संघनन: जलवाष्प का तरल या ठोस अवस्था में बदलना।
- वाष्पीकरण: जल का जलवाष्प में बदलना।
- वाष्पोत्सर्जन: पौधों से जलवाष्प का निकलना।
- वृष्टि: वायुमंडल से जल का धरातल पर गिरना।
- वृष्टि छाया: पर्वत की प्रतिपवन ढाल के पीछे स्थित कम वर्षा वाला क्षेत्र।
- संवहनीय वर्षा: गर्म वायु के ऊपर उठने से होने वाली वर्षा।
- पर्वतीय वर्षा: पर्वत के कारण ऊपर उठी नम वायु से होने वाली वर्षा।
- चक्रवाती वर्षा: वायुराशियों के मिलने और ऊपर उठने से संबंधित वर्षा।
अध्याय का सारांश
वायुमंडल में जल अध्याय में वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प तथा उससे संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जलस्रोतों से वाष्पीकरण और पौधों से वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से जलवाष्प वायुमंडल में पहुँचती है। वायु में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहा जाता है।
जब नम वायु ठंडी होकर ओसांक तक पहुँचती है, तो संघनन शुरू हो सकता है। इससे ओस, तुषार, कोहरा और बादल बनते हैं। बादलों से जलकण या हिमकण धरातल पर गिरते हैं, जिसे वर्षण कहा जाता है। वर्षा, हिमवर्षा और ओलावृष्टि वर्षण के प्रमुख रूप हैं।
उत्पत्ति के आधार पर वर्षा को संवहनीय, पर्वतीय और चक्रवाती वर्षा में बाँटा जाता है। किसी क्षेत्र की वर्षा को अक्षांश, समुद्र से दूरी, ऊँचाई, प्रचलित पवनें, महासागरीय धाराएँ तथा पर्वतीय उच्चावच प्रभावित करते हैं।
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 11 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से आर्द्रता, निरपेक्ष आर्द्रता, सापेक्ष आर्द्रता, ओसांक, संघनन, बादल, वृष्टि, वर्षा के प्रकार और वृष्टि छाया को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए। परिभाषाओं के साथ-साथ वर्षा की प्रक्रिया और विभिन्न प्रकारों के बीच अंतर समझना भी आवश्यक है।
Class 11 Geography के अन्य अध्याय
Chapter 9 – सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान