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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 16 – जैव विविधता एवं संरक्षण में जैव-विविधता का अर्थ, इसके विभिन्न स्तर, जैव-विविधता हॉट-स्पॉट, जैव-विविधता का महत्व, इसके विनाश के कारण तथा संरक्षण के उपायों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में यह भी बताया गया है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न पौधे, जीव-जंतु और पारितंत्र मानव जीवन तथा पर्यावरण के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।

इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल अध्याय 16 जैव विविधता एवं संरक्षण के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, वस्तुनिष्ठ प्रश्न, लघु उत्तरीय प्रश्न तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आसान भाषा में दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी अच्छी तरह कर सकें।

Table of Contents

अध्याय 16: जैव विविधता एवं संरक्षण – महत्वपूर्ण बिंदु

  • जैव-विविधता: जीवों की विविधता और उनके बीच पाए जाने वाले अंतर को जैव-विविधता कहते हैं।
  • जैव-विविधता के स्तर: आनुवंशिक विविधता, प्रजातीय विविधता और पारितंत्रीय विविधता।
  • जैव-विविधता हॉट-स्पॉट: ऐसे क्षेत्र जहाँ जैव-विविधता अधिक होने के साथ-साथ संरक्षण की आवश्यकता भी अधिक होती है।
  • विदेशज प्रजातियाँ: ऐसी प्रजातियाँ जो किसी क्षेत्र की मूल प्रजाति नहीं हैं, लेकिन वहाँ स्थापित हो गई हैं।
  • Project Tiger: भारत में बाघों के संरक्षण के लिए 1973 में शुरू किया गया।
  • Project Elephant: हाथियों के संरक्षण के लिए 1992 में शुरू किया गया।
  • Earth Summit: 1992 में रियो डी जेनेरो, ब्राजील में हुआ।
  • वन्य जीव संरक्षण: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र इसके प्रमुख साधन हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. जैव-विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए महत्वपूर्ण है?

(क) जन्तु
(ख) पौधे
(ग) पौधे और प्राणी
(घ) सभी जीवधारी

उत्तर: (घ) सभी जीवधारी

प्रश्न 2. असुरक्षित प्रजातियाँ कौन-सी हैं?

(क) जो दूसरों को असुरक्षा दें
(ख) बाघ व शेर
(ग) जिनकी संख्या अत्यधिक हो
(घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है

उत्तर: (घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है।

प्रश्न 3. राष्ट्रीय पार्क (National Parks) और अभयारण्य (Sanctuaries) किस उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं?

(क) मनोरंजन के लिए
(ख) पालतू जीवों के लिए
(ग) शिकार के लिए
(घ) संरक्षण के लिए

उत्तर: (घ) संरक्षण के लिए।

प्रश्न 4. जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र हैं?

(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(ख) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(ग) ध्रुवीय क्षेत्र
(घ) महासागरीय क्षेत्र

उत्तर: (क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र।

प्रश्न 5. निम्न में से किस देश में अर्थ सम्मेलन (Earth Summit) हुआ था?

(क) यू.के.
(ख) ब्राजील
(ग) मैक्सिको
(घ) चीन

उत्तर: (ख) ब्राजील।

प्रश्न 6. प्रोजेक्ट टाइगर निम्नलिखित में से किस उद्देश्य से शुरू किया गया है?

(क) बाघ मारने के लिए
(ख) बाघ को शिकार से बचाने हेतु
(ग) बाघ को चिड़ियाघर में डालने हेतु
(घ) बाघ पर फिल्म बनाने हेतु

उत्तर: (ख) बाघ को शिकार से बचाने तथा उसके संरक्षण के लिए।

प्रश्न 7. प्रोजेक्ट एलिफेंट (Project Elephant) किस वर्ष लागू किया गया?

(क) 1992
(ख) 1993
(ग) 1994
(घ) 1995

उत्तर: (क) 1992।

प्रश्न 8. होमो-सेपियन (Homo sapiens) प्रजाति किससे संबंधित है?

(क) पौधे
(ख) शाकाहारी जीव
(ग) मांसाहारी जीव
(घ) मानव

उत्तर: (घ) मानव।

प्रश्न 9. जैव विविधता का समृद्ध क्षेत्र है?

(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(ख) ध्रुवीय क्षेत्र
(ग) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(घ) महासागरीय क्षेत्र

उत्तर: (क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. जैव-विविधता क्या है?

उत्तर: किसी निश्चित क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की विविधता तथा उनके आनुवंशिक और पारितंत्रीय अंतर को जैव-विविधता कहते हैं।

प्रश्न 2. जैव-विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?

उत्तर: जैव-विविधता को मुख्यतः तीन स्तरों पर समझा जाता है—

  1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)
  2. प्रजातीय विविधता (Species Diversity)
  3. पारितंत्रीय विविधता (Ecosystem Diversity)

प्रश्न 3. हॉट-स्पॉट (Hot Spots) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: ऐसे जैव-विविधता वाले क्षेत्र जहाँ प्रजातियों की समृद्धि अधिक होती है और संरक्षण की आवश्यकता भी अत्यधिक होती है, जैव-विविधता हॉट-स्पॉट कहलाते हैं।

प्रश्न 4. मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्त्व का वर्णन संक्षेप में करें।

उत्तर: जंतु मानव को भोजन, वस्त्र, औषधि और अनेक संसाधन प्रदान करते हैं। वे पारितंत्र के संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैव-विविधता का पारिस्थितिक, आर्थिक, नैतिक और वैज्ञानिक महत्व है।

प्रश्न 5. विदेशज प्रजातियों (Exotic Species) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: ऐसी प्रजातियाँ जो किसी क्षेत्र की मूल प्रजाति नहीं होतीं, लेकिन किसी कारण से वहाँ लाई जाती हैं और स्थापित हो जाती हैं, विदेशज प्रजातियाँ कहलाती हैं।

लगभग 150 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर: जैव-विविधता प्रकृति और पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पारितंत्र में प्रत्येक प्रजाति का कोई न कोई कार्य होता है। पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं, जबकि अन्य जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर रहते हैं।

विभिन्न जीव ऊर्जा के प्रवाह, कार्बनिक पदार्थों के निर्माण और अपघटन तथा जल एवं पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायता करते हैं। वनस्पतियाँ वायुमंडलीय गैसों के संतुलन और जलवायु नियंत्रण में भी योगदान देती हैं।

किसी पारितंत्र में जितनी अधिक प्रजातीय और आनुवंशिक विविधता होती है, वह पारितंत्र पर्यावरणीय बदलावों को उतनी ही अच्छी तरह सहन कर सकता है। इसलिए जैव-विविधता की रक्षा करना प्राकृतिक संतुलन और मानव जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 2. जैव-विविधता के विनाश के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करें। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।

उत्तर: जैव-विविधता के विनाश के प्रमुख कारणों में प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना, वनों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, कीटनाशकों का प्रयोग, विदेशज प्रजातियों का फैलाव और अवैध शिकार शामिल हैं। प्राकृतिक आपदाएँ जैसे भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी, सूखा और दावानल भी कुछ क्षेत्रों में जैव-विविधता को प्रभावित कर सकते हैं।

जैव-विविधता के संरक्षण के लिए संकटापन्न प्रजातियों की रक्षा, प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य स्थापित करना तथा वन्यजीवों के अवैध व्यापार और शिकार पर रोक लगाना आवश्यक है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा पर्यावरण-अनुकूल विकास भी संरक्षण को प्रभावी बनाता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. पर्यावरण के प्रदूषण का किन तत्त्वों पर प्रभाव पड़ा है?

उत्तर: वायु, जल और मृदा पर।

प्रश्न 2. इस समय विश्व के कितने प्रतिशत ज्ञात पशु तथा पौधे विलोपन के कगार पर खड़े हैं?

उत्तर: स्रोत में 2% पशु तथा 8% पौधे दिया गया है।

प्रश्न 3. जल की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव का क्या कारण है?

उत्तर: अम्लीय वर्षा, सिंचाई तथा उर्वरकों के बहाव से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

प्रश्न 4. भारत में धार्मिक अनुष्ठानों में कितने पौधों की प्रजातियाँ प्रयोग की जाती हैं?

उत्तर: 100 पौधों की प्रजातियाँ।

प्रश्न 5. ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ कब शुरू किया गया?

उत्तर: 1973 ई. में।

प्रश्न 6. पृथ्वी शिखर कब और कहाँ हुआ?

उत्तर: 1992 में रियो डी जेनेरो, ब्राजील में।

प्रश्न 7. वाइल्ड लाइफ एक्ट कब बनाया गया?

उत्तर: 1972 ई. में।

प्रश्न 8. जैव विविधता का आधार क्या है?

उत्तर: स्रोत में इसका उत्तर अपक्षयण दिया गया है।

प्रश्न 9. अधिक प्रजातीय विविधता वाले क्षेत्रों को क्या कहते हैं?

उत्तर: हॉट-स्पॉट (Hot Spot)।

प्रश्न 10. प्रजातियों की क्षति का क्या प्रभाव है?

उत्तर: पारितंत्र की स्थिरता और कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है।

प्रश्न 11. कृषि जैव विविधता क्या है?

उत्तर: कृषि में उपयोग की जाने वाली विभिन्न फसलों और उनकी किस्मों की विविधता को कृषि जैव-विविधता कहते हैं।

प्रश्न 12. मानव को भोजन प्रदान करने वाले दो साधन बताएँ।

उत्तर: पौधे तथा जीव-जंतु।

प्रश्न 13. हरित क्रांति में किन तत्त्वों का योगदान है?

उत्तर: उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई और कीटनाशकों जैसी कृषि तकनीकों का योगदान रहा है।

प्रश्न 14. प्रजातीय विविधता किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी निश्चित क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या, प्रकार और विविधता को प्रजातीय विविधता कहते हैं।

प्रश्न 15. कुछ प्रजातियों के समाप्त होने का क्या कारण है?

उत्तर: प्राकृतिक आवास का विनाश, संसाधनों का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, शिकार और बढ़ती मानव आवश्यकताएँ इसके प्रमुख कारण हैं।

प्रश्न 16. प्लीस्टोसिन युग कब था?

उत्तर: स्रोत के अनुसार लगभग 20 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 17. अनाज के भंडार की वृद्धि का क्या कारण है?

उत्तर: कृषि के यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से अनाज के उत्पादन में वृद्धि हुई।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. प्रजातियों के संरक्षण के दो पहलू बताएँ।

उत्तर:

  1. मानव को पर्यावरण-अनुकूल पद्धतियों को अपनाना चाहिए।
  2. विकास के लिए सतत और पोषणीय गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए।
  3. स्थानीय समुदायों की संरक्षण कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

प्रश्न 2. महाविविधता केन्द्र से क्या अभिप्राय है? विश्व के महत्त्वपूर्ण महाविविधता केन्द्र बताएँ।

उत्तर: जिन देशों में प्रजातीय विविधता बहुत अधिक पाई जाती है, विशेषकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, उन्हें महाविविधता केन्द्र कहा जाता है। स्रोत में प्रमुख महाविविधता देशों के रूप में मैक्सिको, कोलम्बिया, इक्वेडोर, पेरू, ब्राजील, जायरे, मेडागास्कर, चीन, भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का उल्लेख है।

प्रश्न 3. मानव के लिए पौधे किस प्रकार महत्त्वपूर्ण हैं?

उत्तर: पौधे मानव को भोजन, फल, अनाज, प्रोटीन, औषधियाँ, लकड़ी और अनेक आवश्यक संसाधन प्रदान करते हैं। वे प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराते हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।

प्रश्न 4. जैविक विविधता का संरक्षण क्या है?

उत्तर: जैव-विविधता संरक्षण का अर्थ विभिन्न पौधों, जीव-जंतुओं, उनकी प्रजातियों तथा पारितंत्रों को सुरक्षित रखना है, ताकि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियाँ इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकें।

प्रश्न 5. जैव विविधता का इतिहास बताएं। किस कटिबंध में जैव विविधता अधिक है?

उत्तर: वर्तमान जैव-विविधता लंबे समय से चल रही विकासात्मक प्रक्रियाओं का परिणाम है। पृथ्वी पर जीवन के विकास के साथ अनेक नई प्रजातियाँ बनीं और अनेक प्रजातियाँ विलुप्त भी हुईं। मानव गतिविधियों के बढ़ने के साथ कई प्रजातियों और उनके आवासों पर दबाव बढ़ा है।

जैव-विविधता सामान्यतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है। उष्णकटिबंधीय वनों में विभिन्न प्रकार के पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की बहुत अधिक विविधता होती है।

प्रश्न 6. स्पष्ट कीजिए कि किस प्रकार अपक्षय पृथ्वी पर जैव विविधता हेतु उत्तरदायी है?

उत्तर: अपक्षय शैलों को छोटे कणों में तोड़कर मृदा निर्माण में सहायता करता है। मृदा पौधों के विकास का आधार है और पौधों पर अनेक जीव-जंतुओं की निर्भरता होती है। इस प्रकार अपक्षय मृदा निर्माण तथा पारितंत्र के विकास में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान करता है।

प्रश्न 7. पारितंत्र में प्रजातियों की भूमिका बताएँ।

उत्तर:

  • जीव और प्रजातियाँ ऊर्जा ग्रहण करती हैं।
  • पौधे कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करते हैं।
  • जीव जल और पोषक तत्वों के चक्र में योगदान देते हैं।
  • प्रजातियाँ वायुमंडलीय गैसों के संतुलन में सहायता करती हैं।
  • ये पारितंत्र की स्थिरता बनाए रखने में योगदान देती हैं।

प्रश्न 8. जैव विविधता के क्या कारण हैं?

उत्तर: जैव-विविधता किसी क्षेत्र में उपलब्ध ऊर्जा, जल, तापमान, मृदा, जलवायु और आवास की परिस्थितियों से प्रभावित होती है। जहाँ अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियाँ होती हैं, वहाँ प्रजातियों की विविधता सामान्यतः अधिक होती है।

प्रश्न 9. जैव विविधता सतत् विकास का तंत्र है? स्पष्ट करें।

उत्तर: जैव-विविधता प्राकृतिक संसाधनों और पारितंत्रों का महत्वपूर्ण आधार है। विभिन्न प्रजातियाँ भोजन, औषधि, ऊर्जा, पोषक चक्र और पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देती हैं। इसलिए जैव-विविधता का संरक्षण सतत् विकास के लिए आवश्यक है। यदि प्रजातियाँ तेजी से समाप्त होंगी तो पारितंत्र की स्थिरता और मानव जीवन के लिए उपलब्ध संसाधन भी प्रभावित होंगे।

प्रश्न 10. पौधों और जीवों को संरक्षण के आधार पर विभिन्न प्रजातियों में बाँटें।

उत्तर: संरक्षण की दृष्टि से संकटग्रस्त प्रजातियों को मुख्यतः निम्न श्रेणियों में समझा जा सकता है:

  1. संकटापन्न प्रजातियाँ (Endangered Species): ऐसी प्रजातियाँ जिनके विलुप्त होने का गंभीर खतरा होता है।
  2. कमजोर प्रजातियाँ (Vulnerable Species): ऐसी प्रजातियाँ जिन पर वर्तमान परिस्थितियाँ बनी रहने पर भविष्य में विलुप्त होने का खतरा बढ़ सकता है।
  3. दुर्लभ प्रजातियाँ (Rare Species): ऐसी प्रजातियाँ जिनकी संख्या बहुत कम होती है या जो सीमित क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 11. जैव विविधता की हानि के चार कारण बताएँ।

उत्तर:

  1. प्राकृतिक आपदाएँ
  2. कीटनाशक और प्रदूषण
  3. विदेशज प्रजातियाँ
  4. अवैध शिकार

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. जैव विविधता के विनाश के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करो। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।

उत्तर: जैव-विविधता पृथ्वी के जीवन तंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। विभिन्न प्रजातियाँ एक-दूसरे से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी होती हैं। किसी प्रजाति के समाप्त होने से पारितंत्र के दूसरे भाग भी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए जैव-विविधता का संरक्षण आवश्यक है।

जैव विविधता की हानि के प्रमुख कारण

1. प्राकृतिक आवास का विनाश: वनों की कटाई, कृषि विस्तार, शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण अनेक जीवों के प्राकृतिक आवास कम हो रहे हैं।

2. प्राकृतिक आपदाएँ: भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी, दावानल और सूखा जैसी घटनाएँ कई क्षेत्रों में वनस्पति और जीव-जंतुओं को प्रभावित कर सकती हैं।

3. प्रदूषण और कीटनाशक: जल, वायु और मृदा प्रदूषण अनेक संवेदनशील प्रजातियों के लिए हानिकारक है। विषैले रसायन और कीटनाशक खाद्य श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकते हैं।

4. विदेशज प्रजातियाँ: किसी नए क्षेत्र में आने वाली गैर-मूल प्रजातियाँ वहाँ की स्थानीय प्रजातियों और पारितंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

5. अवैध शिकार: बाघ, हाथी, गैंडा और अन्य वन्यजीवों का अवैध शिकार उनकी संख्या में कमी का कारण बनता है।

जैव विविधता संरक्षण के उपाय

  • संकटापन्न प्रजातियों का संरक्षण करना चाहिए।
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करनी चाहिए।
  • राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र विकसित किए जाने चाहिए।
  • वन्यजीवों के अवैध शिकार और व्यापार पर रोक लगानी चाहिए।
  • खाद्यान्न, चारा, पशुधन और वनस्पतियों की विविध किस्मों को सुरक्षित रखना चाहिए।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों में शामिल करना चाहिए।
  • पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास की गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए।

इस प्रकार जैव-विविधता संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा का कार्य नहीं है, बल्कि मानव जीवन और पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन की सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

प्रश्न 2. जैव विविधता का विभिन्न स्तरों पर वर्णन करें।

उत्तर: जैव-विविधता को मुख्यतः तीन स्तरों पर समझा जाता है—आनुवंशिक विविधता, प्रजातीय विविधता और पारितंत्रीय विविधता।

1. आनुवंशिक विविधता

एक ही प्रजाति के अलग-अलग जीवों में पाए जाने वाले आनुवंशिक अंतर को आनुवंशिक विविधता कहते हैं। उदाहरण के लिए एक ही फसल की विभिन्न किस्मों में रंग, आकार, उत्पादन क्षमता और रोग-प्रतिरोधकता में अंतर हो सकता है।

2. प्रजातीय विविधता

किसी निश्चित क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या और विविधता को प्रजातीय विविधता कहते हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रजातियों की संख्या बहुत अधिक होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में कम।

3. पारितंत्रीय विविधता

पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पारितंत्रों में अंतर को पारितंत्रीय विविधता कहते हैं। वन, घासभूमि, मरुस्थल, नदी, झील और समुद्री पारितंत्र इसके उदाहरण हैं।

इन तीनों स्तरों की विविधता मिलकर पृथ्वी की समग्र जैव-विविधता को बनाती है।

प्रश्न 3. प्रकृति को बनाए रखने में जैव विविधता की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर: जैव-विविधता प्रकृति के संतुलन और पारितंत्र की कार्यप्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रजातियाँ पारितंत्र में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाती हैं।

जैव विविधता की पारिस्थितिक भूमिका

  • जीव ऊर्जा का ग्रहण और संचरण करते हैं।
  • हरे पौधे भोजन का निर्माण करते हैं।
  • अपघटक कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हैं।
  • जल और पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायता मिलती है।
  • वायुमंडलीय गैसों के संतुलन में योगदान मिलता है।
  • जलवायु को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

जैव विविधता की आर्थिक भूमिका

जैव-विविधता से मनुष्य को भोजन, औषधियाँ, लकड़ी, फाइबर, ईंधन और अनेक उपयोगी संसाधन प्राप्त होते हैं। फसलों की विविधता को कृषि जैव-विविधता कहा जाता है।

जैव विविधता की वैज्ञानिक भूमिका

विभिन्न प्रजातियों के अध्ययन से जीवन की उत्पत्ति, विकास और पारितंत्र की कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिलती है।

जैव विविधता की नैतिक भूमिका

पृथ्वी पर सभी जीवों को अस्तित्व का अधिकार है। इसलिए केवल मानव उपयोग के लिए अन्य प्रजातियों को अनावश्यक रूप से समाप्त करना उचित नहीं है।

इस प्रकार जैव-विविधता प्रकृति, मानव समाज और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जैव विविधता संरक्षण के प्रमुख कार्यक्रम

Project Tiger

भारत में बाघों के संरक्षण के लिए Project Tiger वर्ष 1973 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बाघों की व्यवहार्य आबादी को सुरक्षित रखना और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना है।

Project Elephant

हाथियों, उनके आवास और गलियारों के संरक्षण के लिए Project Elephant वर्ष 1992 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण के साथ मानव-हाथी संघर्ष जैसी समस्याओं से निपटना भी है।

Earth Summit

वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरो में United Nations Conference on Environment and Development आयोजित हुआ, जिसे Earth Summit के नाम से जाना जाता है।

जैव विविधता संरक्षण के प्रमुख साधन

  • राष्ट्रीय उद्यान: महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए।
  • वन्यजीव अभयारण्य: वन्यजीवों और उनके आवास की सुरक्षा के लिए।
  • जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र: बड़े प्राकृतिक पारितंत्रों और जैव-विविधता के संरक्षण के लिए।
  • हॉट-स्पॉट संरक्षण: जैव-विविधता से समृद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों को संरक्षण देना।

परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. जैव-विविधता क्या है?
  2. जैव-विविधता के तीन स्तर कौन-कौन से हैं?
  3. हॉट-स्पॉट से आप क्या समझते हैं?
  4. विदेशज प्रजातियाँ क्या हैं?
  5. जैव-विविधता प्रकृति को बनाए रखने में किस प्रकार सहायक है?
  6. जैव-विविधता के विनाश के प्रमुख कारण क्या हैं?
  7. जैव-विविधता संरक्षण के उपाय लिखिए।
  8. Project Tiger कब शुरू किया गया?
  9. Project Elephant कब शुरू किया गया?
  10. Earth Summit कब और कहाँ हुआ?
  11. महाविविधता केन्द्र क्या है?
  12. जैव-विविधता की आर्थिक, वैज्ञानिक और नैतिक भूमिका समझाइए।
  13. जैव-विविधता की हानि के चार कारण लिखिए।
  14. पारितंत्र में प्रजातियों की भूमिका बताइए।
  15. संकटापन्न, कमजोर और दुर्लभ प्रजातियों में अंतर बताइए।

अध्याय का सारांश

जैव विविधता एवं संरक्षण अध्याय में पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न जीवों और उनके पारितंत्रों की विविधता का अध्ययन किया गया है। जैव-विविधता को आनुवंशिक, प्रजातीय और पारितंत्रीय तीन स्तरों पर समझा जाता है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सामान्यतः जैव-विविधता अधिक पाई जाती है।

मानव जीवन के लिए जैव-विविधता भोजन, औषधि, प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक ज्ञान का महत्वपूर्ण आधार है। वनों की कटाई, आवास विनाश, प्रदूषण, कीटनाशक, विदेशज प्रजातियाँ और अवैध शिकार जैव-विविधता के लिए गंभीर खतरे हैं।

इसलिए राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, संकटापन्न प्रजातियों का संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे उपाय आवश्यक हैं। जैव-विविधता की रक्षा करके ही पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Class 11 Geography के अन्य अध्याय

Chapter 1 – भूगोल एक विषय के रूप में

Chapter 2 – पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

Chapter 3 – पृथ्वी की आंतरिक संरचना

Chapter 4 – महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

Chapter 5 – खनिज एवं शैल

Chapter 6 – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ

Chapter 7 – भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Chapter 9 – सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान

Chapter 10 – वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ

Chapter 11 – वायुमंडल में जल

Chapter 12 – विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन

Chapter 13 – महासागरीय जल

Chapter 14 – महासागरीय जल संचलन

Chapter 15 – पृथ्वी पर जीवन

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 16 – जैव विविधता एवं संरक्षण परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें जैव-विविधता के स्तर, हॉट-स्पॉट, जैव-विविधता के महत्व, जैव-विविधता की हानि के कारण तथा संरक्षण के उपायों को समझना आवश्यक है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से Project Tiger, Project Elephant, Earth Summit, जैव-विविधता के तीन स्तर और संरक्षण के उपाय अच्छी तरह तैयार करने चाहिए।

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