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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 15 – पृथ्वी पर जीवन में जैवमंडल, पारिस्थितिकी, पारितंत्र, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, बायोम, जैव-भू-रासायनिक चक्र, पारिस्थितिक संतुलन तथा विभिन्न स्थलीय और जलीय बायोम का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में सवाना, भूमध्यसागरीय, शीतोष्ण घास प्रदेश, टैगा और टुण्ड्रा जैसे प्रमुख बायोम की विशेषताओं को भी समझाया गया है।

इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल अध्याय 15 पृथ्वी पर जीवन के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आसान और परीक्षा-उपयोगी भाषा में दिए गए हैं।

Table of Contents

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन के प्रश्न-उत्तर

बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन जैवमंडल में सम्मिलित हैं …………….

(क) केवल पौधे
(ख) केवल प्राणी
(ग) सभी जैव व अजैव जीव
(घ) सभी जीवित जीव

उत्तर: (ग) सभी जैव व अजैव जीव

प्रश्न 2. उष्णकटिबंधीय घास के मैदान निम्न में से किस नाम से जाने जाते हैं …………….

(क) प्रेचरी
(ख) आयरन ऑक्साइड
(ग) सवाना
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (ग) सवाना

प्रश्न 3. चट्टानों में पाए जाने वाले लोहांश के साथ ऑक्सीजन मिलकर निम्नलिखित में से क्या बनाती है ……………..

(क) आयरन कार्बोनेट
(ख) आयरन ऑक्सइड
(ग) आयरन नाइट्राइट
(घ) आयरन सल्फेट

उत्तर: (ख) आयरन ऑक्साइड

प्रश्न 4. प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान, प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड जल के साथ मिलकर क्या बनाती है ………………

(क) प्रोटीन
(ख) कार्बोहाइड्रेट्स
(ग) एमिनोएसिड
(घ) विटामिन्स

उत्तर: (ख) कार्बोहाइड्रेट्स

लगभग 30 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जीवधारियों और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच होने वाले पारस्परिक संबंधों के वैज्ञानिक अध्ययन को पारिस्थितिकी कहा जाता है। इसमें ऊर्जा प्रवाह और खाद्य संबंधों का भी अध्ययन होता है।

प्रश्न 2. पारितंत्र (Ecological System) क्या है? संसार के प्रमुख पारितंत्र प्रकारों को बताएँ।

उत्तर: किसी क्षेत्र में जीवित तथा अजैविक घटकों के बीच होने वाले पारस्परिक संबंधों की व्यवस्थित इकाई को पारितंत्र कहते हैं। इसके प्रमुख प्रकार स्थलीय और जलीय पारितंत्र हैं।

प्रश्न 3. खाद्य श्रृंखला क्या है? चराई खाद्य श्रृंखला का एक उदाहरण देते हुए उसके अनेक स्तर बताएं?

उत्तर: उत्पादक से शुरू होकर विभिन्न उपभोक्ताओं तक भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण के क्रम को खाद्य श्रृंखला कहते हैं। उदाहरण: घास → हिरण → शेर।

प्रश्न 4. खाद्य जाल (food wed) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताएँ।

उत्तर: जब अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं, तो उनके इस जटिल संबंध को खाद्य जाल कहते हैं। इसमें एक जीव कई जीवों का भोजन हो सकता है।

प्रश्न 5. बायोम (Biome) क्या है?

उत्तर: समान जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों वाले बड़े भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले संबंधित पारितंत्रों के समूह को बायोम कहते हैं। उदाहरण के लिए वन, मरुस्थल और घासभूमि बायोम हैं।

लगभग 150 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. संसार के विभिन्न वन बायोम (Forest biomes) की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ का वर्णन करें।

उत्तर: वन बायोम ऐसे बड़े प्राकृतिक क्षेत्र हैं जहाँ वृक्षों का प्रभुत्व होता है और जलवायु के अनुसार अलग-अलग प्रकार की वनस्पति तथा जीव-जंतु पाए जाते हैं। उष्णकटिबंधीय वर्षा वन बायोम में वर्ष भर अधिक तापमान और पर्याप्त वर्षा होती है। इसलिए यहाँ घने सदाबहार वन तथा जैव विविधता अधिक पाई जाती है।

शीतोष्ण वनों में तापमान और वर्षा की स्थिति उष्णकटिबंधीय वनों से अलग होती है। यहाँ पर्णपाती और मिश्रित वन मिलते हैं। उच्च अक्षांशों में शीतोष्ण कोणधारी या टैगा वन पाए जाते हैं। यहाँ लंबी और कठोर शीत ऋतु तथा छोटी ग्रीष्म ऋतु होती है। स्प्रूस, पाइन, फर और लार्च जैसे कोणधारी वृक्ष प्रमुख होते हैं।

इस प्रकार वन बायोम का स्वरूप तापमान, वर्षा, मिट्टी, अक्षांश और ऊँचाई जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। स्रोत में वन बायोम के अंतर्गत सवाना, भूमध्यसागरीय तथा शीतोष्ण कोणधारी वन जैसे विस्तृत उदाहरण भी दिए गए हैं। 1

प्रश्न 2. जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeo-chemical cycle) क्या है? वायुमंडल में नाइट्रोजन का यौगिकीकरण (Fixation) कैसे होता है, वर्णन करें?

उत्तर: जीवमंडल में रासायनिक तत्वों का जीवित घटकों और अजैविक पर्यावरण के बीच लगातार स्थानांतरण होता रहता है। इस प्रकार के चक्रीय संचरण को जैव-भू-रासायनिक चक्र कहा जाता है। इसके प्रमुख प्रकार गैसीय चक्र और तलछटी चक्र हैं।

नाइट्रोजन वायुमंडल में बड़ी मात्रा में उपस्थित है, लेकिन अधिकांश जीव वायुमंडलीय नाइट्रोजन का सीधे उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया में कुछ विशेष सूक्ष्मजीव वायुमंडलीय नाइट्रोजन को ऐसे यौगिकों में बदलते हैं जिन्हें पौधे उपयोग कर सकते हैं। बिजली चमकने जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाएँ भी नाइट्रोजन यौगिकीकरण में योगदान करती हैं।

इसके बाद पौधे नाइट्रोजनयुक्त यौगिकों को ग्रहण करते हैं और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से यह नाइट्रोजन अन्य जीवों तक पहुँचती है। मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों के अपघटन से नाइट्रोजन पुनः मिट्टी में लौटती है और चक्र आगे चलता रहता है।

प्रश्न 3. पारिस्थितिक संतुलन (Ecological balance) क्या है? इसके असंतुलन को रोकने के महत्त्वपूर्ण उपायों की चर्चा करें।

उत्तर: किसी पारितंत्र में जीवों, वनस्पतियों और अजैविक घटकों के बीच ऐसी गतिशील अवस्था जिसमें प्राकृतिक प्रक्रियाएँ संतुलित रूप से चलती रहें, पारिस्थितिक संतुलन कहलाती है। इसमें विभिन्न जीव एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं और ऊर्जा तथा पदार्थ का प्रवाह चलता रहता है।

पारिस्थितिक असंतुलन प्राकृतिक आपदाओं, नई प्रजातियों के आगमन तथा मानव गतिविधियों के कारण हो सकता है। वनों की कटाई, अत्यधिक शिकार, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और अनियोजित शहरीकरण इसके प्रमुख मानवजनित कारण हैं।

इसे रोकने के लिए वन संरक्षण, वनीकरण, वन्यजीव संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जल और मृदा संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग तथा जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है। पारिस्थितिक तंत्र के घटकों के बीच संबंधों की समझ भी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। स्रोत भी मानव हस्तक्षेप और संसाधनों पर बढ़ते दबाव को पारिस्थितिक असंतुलन से जोड़ता है। 2

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. प्रत्येक बायोम की प्रमुख विशेषताओं को बताते हुए विश्व के मानचित्र पर विभिन्न बायोम के वितरण दर्शाइए।

उत्तर: इस परियोजना में विश्व मानचित्र पर प्रमुख बायोमों को उनके भौगोलिक वितरण के साथ दर्शाया जा सकता है। प्रत्येक बायोम की पहचान उसकी जलवायु, वनस्पति और जीव-जंतुओं के आधार पर की जाती है।

सवाना बायोम

सवाना उष्णकटिबंधीय घासभूमि का प्रमुख बायोम है। इसमें स्पष्ट आर्द्र और शुष्क ऋतुएँ होती हैं। घासों का प्रभुत्व होता है और इनके बीच वृक्ष तथा झाड़ियाँ बिखरे रूप में पाई जाती हैं। अफ्रीका का सवाना इसका प्रमुख उदाहरण है।

भूमध्यसागरीय बायोम

यह मुख्यतः महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में लगभग 30° से 40° अक्षांशों के बीच पाया जाता है। यहाँ गर्म और शुष्क ग्रीष्म ऋतु तथा अपेक्षाकृत नम शीत ऋतु होती है। इसकी वनस्पति ग्रीष्मकालीन शुष्कता के अनुकूल होती है।

शीतोष्ण घास प्रदेश बायोम

उत्तरी गोलार्द्ध में प्रेयरी और स्टेपी तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में पम्पाज और वेल्ड इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन क्षेत्रों में घासों का प्रभुत्व होता है और अनेक स्थानों पर कृषि का व्यापक विकास हुआ है।

टैगा बायोम

टैगा या शीतोष्ण कोणधारी वन बायोम उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के उच्च अक्षांशीय भागों में पाया जाता है। स्प्रूस, पाइन, फर और लार्च जैसे कोणधारी वृक्ष प्रमुख हैं।

टुण्ड्रा बायोम

टुण्ड्रा उच्च अक्षांशों तथा ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। यहाँ तापमान बहुत कम, वृद्धि काल छोटा और मृदा के नीचे स्थायी रूप से जमी हुई परत यानी परमाफ्रास्ट पाई जा सकती है। वृक्षों का विकास अत्यंत सीमित रहता है। स्रोत में सवाना, भूमध्यसागरीय, शीतोष्ण घासभूमि, टैगा और टुण्ड्रा बायोम का विस्तृत वर्णन दिया गया है। 3

प्रश्न 2. आपके स्कूल प्रांगण में पाए जाने वाले पेड़, झाड़ी व सदाबहार पौधों पर एक संक्षिप्त लेख लिखें और लगभग आधे दिन यह पर्यवेक्षण करें कि किस प्रकार के पक्षी इस वाटिका में आते हैं। क्या आप इन पक्षियों की विविधता का भी उल्लेख कर सकते हैं।

उत्तर: यह परियोजना कार्य विद्यार्थी अपने विद्यालय परिसर में स्वयं करें। पेड़ों, झाड़ियों और सदाबहार पौधों की सूची बनाकर उनके आकार, पत्तियों और उपयोग का निरीक्षण करें। लगभग आधे दिन तक आने वाले पक्षियों को देखें और उनके नाम, संख्या तथा भोजन की आदतों को नोट करें। अंत में पक्षियों की विविधता और वनस्पतियों के बीच संबंध पर संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार करें।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. ‘कृषि पारिस्थितिकी’ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: कृषि फसलों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों के अध्ययन को कृषि पारिस्थितिकी कहा जाता है। इसमें फसल, जलवायु, मिट्टी और मानव गतिविधियों के संबंध का अध्ययन होता है।

प्रश्न 2. अप्रकाशी क्षेत्र किसे कहते हैं?

उत्तर: महासागर का वह गहरा क्षेत्र जहाँ सूर्य का प्रकाश प्रकाश-संश्लेषण के लिए पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँचता, अप्रकाशी क्षेत्र कहलाता है।

प्रश्न 3. हरे पौधे को उत्पादक क्यों कहा जाता है?

उत्तर: हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन बनाते हैं। इसलिए खाद्य श्रृंखला में उन्हें उत्पादक कहा जाता है।

प्रश्न 4. प्रथम उपभोक्ता किसे कहते हैं?

उत्तर: जो जीव अपना भोजन सीधे उत्पादकों अर्थात पौधों से प्राप्त करते हैं, उन्हें प्रथम उपभोक्ता या प्राथमिक उपभोक्ता कहते हैं। शाकाहारी जीव इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 5. जैवमंडल के अजैविक घटक कौन-कौन से हैं?

उत्तर: जैवमंडल के प्रमुख अजैविक घटकों में तापमान, वर्षा, आर्द्रता, जल, मिट्टी, प्रकाश, वायुदाब और खनिज पदार्थ शामिल हैं।

प्रश्न 6. पारिस्थितिक की परिभाषा लिखें।

उत्तर: जीवों और उनके पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों के वैज्ञानिक अध्ययन को पारिस्थितिकी कहते हैं।

प्रश्न 7. प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा दें।

उत्तर: हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

प्रश्न 8. पारिस्थितिक तंत्र के घटकों के दो वर्ग बताएँ।

उत्तर: पारिस्थितिक तंत्र के दो मुख्य घटक हैं:

  1. जैविक घटक
  2. अजैविक घटक

प्रश्न 9. कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?

उत्तर: मानव द्वारा निर्मित या अत्यधिक नियंत्रित किया गया पारिस्थितिक तंत्र कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है। कृषि क्षेत्र, उद्यान, पार्क और कृत्रिम जलाशय इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 10. ‘सुपोषी झील’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: पोषक तत्वों से समृद्ध और जैविक उत्पादकता वाली अपेक्षाकृत उथली झील को सुपोषी झील कहा जाता है। इसमें शैवाल और अन्य जलीय जीवों की मात्रा अधिक हो सकती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. महासागरों का जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: महासागर पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण घटक हैं। महासागर सूर्य से प्राप्त ऊष्मा को बड़ी मात्रा में अवशोषित और संग्रहित करते हैं। इससे तटीय क्षेत्रों के तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव कम होता है।

महासागरों से वाष्पीकरण के कारण वायुमंडल में नमी पहुँचती है, जिससे वर्षा और आर्द्रता प्रभावित होती है। महासागरीय धाराएँ भी गर्मी और ठंड को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर तटीय क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 2. प्राकृतिक पर्यावरण तथा मानवीय (कृत्रिम) पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्राकृतिक पर्यावरण में भूमि, जल, वायु, मिट्टी, वनस्पति और प्राकृतिक जीव-जंतु जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये तत्व मुख्यतः प्राकृतिक प्रक्रियाओं से विकसित होते हैं।

मानवीय या कृत्रिम पर्यावरण वह है जिसमें मनुष्य प्राकृतिक पर्यावरण में परिवर्तन करके अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नई संरचनाएँ विकसित करता है। जनसंख्या, बस्तियाँ, सड़कें, परिवहन, कृषि क्षेत्र और उद्योग इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 3. मरुस्थलीय बायोम पर चर्चा कीजिए।

उत्तर: मरुस्थलीय बायोम की प्रमुख विशेषता बहुत कम वर्षा और उच्च वाष्पीकरण है। यहाँ दिन और रात के तापमान में काफी अंतर हो सकता है। जल की कमी के कारण वनस्पति विरल होती है।

कैक्टस, यूफोर्बिया, बबूल जैसी शुष्कतारोधी वनस्पतियाँ कई मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इनके साथ छिपकली, साँप, बिच्छू, मकड़ी, मरुस्थलीय चूहे, खरगोश, लोमड़ी और विभिन्न पक्षी जैसे जीव पाए जा सकते हैं। कई जीव रात के समय सक्रिय रहकर अत्यधिक गर्मी से बचते हैं।

प्रश्न 4. जलीय पारिस्थितिक तंत्र, स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र से किस प्रकार भिन्न है?

आधारस्थलीय पारिस्थितिक तंत्रजलीय पारिस्थितिक तंत्र
माध्यमभूमि मुख्य माध्यम है।जल मुख्य माध्यम है।
प्रमुख कारकमिट्टी, तापमान, वर्षा आदि।जल का तापमान, लवणता, गहराई और प्रकाश आदि।
जीवस्थलीय पौधे और जीव-जंतु।मछली, प्लवक, जलीय पौधे आदि।
प्रकाशसामान्यतः अधिक उपलब्ध।गहराई बढ़ने के साथ घटता जाता है।

प्रश्न 5. महासागरीय द्रोणियों में किस प्रकार का पर्यावरण पाया जाता है?

उत्तर: महासागरीय द्रोणियों में अलग-अलग गहराई और स्थिति के अनुसार विभिन्न समुद्री पर्यावरण पाए जाते हैं। प्रमुख रूप से वेलांचली क्षेत्र, नितलस्थ क्षेत्र और वेलापवर्ती क्षेत्र का उल्लेख किया जाता है। इनमें तटीय क्षेत्र से लेकर समुद्र के गहरे जल और तल तक अलग-अलग प्रकार के जीवों के आवास मिलते हैं।

प्रश्न 6. प्लवक क्या होते हैं?

उत्तर: ऐसे सूक्ष्म जलीय जीव जो जलधाराओं के साथ बहते रहते हैं और अपनी गति को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित नहीं कर पाते, प्लवक कहलाते हैं। ये मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—पादप प्लवक और प्राणी प्लवक।

प्रश्न 7. प्राकृतिक वातावरण तथा मानवीय वातावरण में क्या अंतर है?

आधारप्राकृतिक वातावरणमानवीय वातावरण
निर्माणप्राकृतिक प्रक्रियाओं से विकसित।मानव गतिविधियों से निर्मित या परिवर्तित।
घटकभूमि, जल, वायु, मिट्टी, वनस्पति आदि।बस्तियाँ, सड़कें, कृषि, उद्योग, परिवहन आदि।
उदाहरणवन, नदी, पर्वत।शहर, खेत, सड़क और बाँध।

प्रश्न 8. पारिस्थितिक तंत्र से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी क्षेत्र में जैविक और अजैविक घटकों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं की व्यवस्थित इकाई को पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं। इसमें ऊर्जा का प्रवाह और पदार्थों का चक्र चलता रहता है।

प्रश्न 9. पारिस्थितिकी संतुलन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब किसी पारितंत्र में जीवों की संख्या, खाद्य संबंध, ऊर्जा प्रवाह और पर्यावरणीय परिस्थितियाँ एक गतिशील संतुलन में रहती हैं, तो उसे पारिस्थितिक संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 10. पारिस्थितिक समर्था से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: खाद्य श्रृंखला के एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक ऊर्जा के स्थानांतरण की क्षमता को पारिस्थितिक दक्षता या समर्था के संदर्भ में समझा जाता है। प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा आदि के रूप में नष्ट हो जाता है।

प्रश्न 11. प्रकृति का संतुलन कैसे बना रहता है?

उत्तर: प्रकृति में जीव एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक खाद्य संबंधों के माध्यम से जुड़े रहते हैं। भोजन की उपलब्धता, प्रतिस्पर्धा, परभक्षण और प्राकृतिक चक्रों के कारण जीवों की संख्या में संतुलन बना रहता है। यही पारस्परिक निर्भरता प्रकृति के गतिशील संतुलन को बनाए रखने में सहायता करती है।

प्रश्न 12. जैव मंडल में ऊर्जा का प्रवाह कैसे होता है?

उत्तर: जैवमंडल में ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है। हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। इसके बाद यह ऊर्जा शाकाहारी और फिर मांसाहारी जीवों तक खाद्य श्रृंखला के माध्यम से पहुँचती है। प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में बाहर निकल जाता है।

इसलिए खाद्य श्रृंखला में ऊपर जाने पर उपलब्ध ऊर्जा कम होती जाती है। अपघटक मृत जीवों और जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं और पदार्थों को पुनः पर्यावरण में पहुँचाने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 13. पारिस्थितिक तंत्रों की क्या-क्या सीमाएँ हैं?

उत्तर: पारिस्थितिक तंत्रों की सीमाएँ हमेशा स्पष्ट और स्थिर नहीं होतीं। एक पारितंत्र से दूसरे पारितंत्र में ऊर्जा, जल, पोषक तत्व और जीवों का आवागमन होता रहता है। इसलिए कई पारितंत्र आपस में जुड़े हुए होते हैं। उदाहरण के लिए नदियाँ पर्वतीय क्षेत्रों से मिट्टी और पोषक तत्वों को मैदानी और समुद्री क्षेत्रों तक ले जाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखें –

1. तुंगता के अनुसार बायोम

उत्तर: ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान और वर्षा की दशाओं में परिवर्तन होता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में नीचे से ऊपर की ओर विभिन्न बायोम क्रमशः दिखाई देते हैं। उष्णकटिबंधीय पर्वतों में आधार क्षेत्र से ऊँचाई बढ़ने पर उष्णकटिबंधीय वन, पर्णपाती वन, कोणधारी वन और अंततः टुण्ड्रा जैसी वनस्पतियाँ मिल सकती हैं। स्रोत में हिमालय, एंडीज और रॉकीज जैसे पर्वतीय क्षेत्रों को इसके उदाहरण के रूप में दिया गया है। 4

2. मानवकृत पारिस्थितिक तंत्र

उत्तर: मानव द्वारा निर्मित या अत्यधिक परिवर्तित पारिस्थितिक तंत्र को मानवकृत पारिस्थितिक तंत्र कहा जाता है। गाँव, शहर, बागान, पार्क, कृषि क्षेत्र, बाँध, नहर और कृत्रिम जलाशय इसके उदाहरण हैं। मानव अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्राकृतिक वनस्पति और भूमि उपयोग में परिवर्तन करता है।

कृषि पारिस्थितिक तंत्र मानवकृत पारिस्थितिक तंत्र का प्रमुख उदाहरण है। इसमें मनुष्य कुछ चुनी हुई फसलों का उत्पादन करता है। ऐसे तंत्र प्राकृतिक पारितंत्र की तुलना में कम विविध हो सकते हैं।

3. मितपोषणी झीलें

उत्तर: अपेक्षाकृत गहरी झीलों में पोषक तत्वों की मात्रा कम होने पर उन्हें मितपोषणी झील कहा जाता है। इनमें सामान्यतः जैविक उत्पादन सुपोषी झीलों की तुलना में कम होता है। इनके भौतिक गुण स्थान, ऊँचाई, गहराई और आसपास के बायोम से प्रभावित होते हैं।

4. पारिस्थितिक तंत्रों की सीमाएँ

उत्तर: पारिस्थितिक तंत्र की सीमाएँ हमेशा निश्चित नहीं होतीं। ऊर्जा और पदार्थ एक पारिस्थितिक तंत्र से दूसरे में जाते रहते हैं। नदियाँ मिट्टी और पोषक तत्वों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक ले जाती हैं तथा पक्षियों और अन्य जीवों का प्रवास भी पारितंत्रों को जोड़ता है। इसलिए पृथ्वी के विभिन्न पारितंत्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

प्रश्न 2. अंतर स्पष्ट कीजिए –

1. प्रथम श्रेणी का उपभोक्ता एवं द्वितीय श्रेणी का उपभोक्ता

आधारप्रथम श्रेणी का उपभोक्ताद्वितीय श्रेणी का उपभोक्ता
भोजनमुख्यतः पौधों को खाता है।मुख्यतः शाकाहारी जीवों को खाता है।
पोषण स्तरदूसरा पोषण स्तर।तीसरा पोषण स्तर।
उदाहरणहिरण, गाय, खरगोश।मेंढक, साँप, कुछ मांसाहारी पक्षी।

2. जैविक तथा अजैविक कारक

आधारजैविक कारकअजैविक कारक
अर्थजीवित घटक।निर्जीव पर्यावरणीय घटक।
उदाहरणपौधे, पशु, सूक्ष्मजीव।जल, तापमान, मिट्टी, प्रकाश, वायु।
भूमिकाखाद्य श्रृंखला और जैविक संबंधों में भाग लेते हैं।जीवों के जीवन और वितरण को प्रभावित करते हैं।

3. खाद्य शृंखला तथा खाद्य जाल

आधारखाद्य श्रृंखलाखाद्य जाल
स्वरूपभोजन का सरल क्रम।कई खाद्य श्रृंखलाओं का परस्पर जुड़ाव।
संबंधएक जीव सामान्यतः अगले स्तर के जीव से जुड़ा होता है।एक जीव कई जीवों से जुड़ा हो सकता है।
जटिलताअपेक्षाकृत सरल।अधिक जटिल।

प्रश्न 3. अंतर स्पष्ट कीजिए –

1. स्थलीय तथा जलीय पारिस्थितिक तंत्र

आधारस्थलीय पारिस्थितिक तंत्रजलीय पारिस्थितिक तंत्र
माध्यमभूमि।जल।
मुख्य कारकमिट्टी, तापमान, वर्षा और प्रकाश।लवणता, गहराई, तापमान और प्रकाश।
उदाहरणवन, घासभूमि और मरुस्थल।नदी, झील, समुद्र और महासागर।

2. समुद्री तथा अलवणीय जल पर्यावरण

आधारसमुद्री पर्यावरणअलवणीय जल पर्यावरण
लवणतालवणता अधिक होती है।लवणता बहुत कम होती है।
उदाहरणसमुद्र और महासागर।नदियाँ, झीलें और तालाब।
जीवसमुद्री परिस्थितियों के अनुकूल जीव।मीठे जल के अनुकूल जीव।

3. टैगा तथा टुंड्रा

आधारटैगाटुंड्रा
स्थितिउच्च अक्षांशों में टुंड्रा के दक्षिण में।ध्रुवों के निकट और वृक्ष रेखा के ऊपर।
वनस्पतिमुख्यतः कोणधारी वन।काई, लाइकेन, छोटी झाड़ियाँ और घास।
वृक्षस्प्रूस, पाइन, फर और लार्च।वृक्ष लगभग अनुपस्थित।
जलवायुलंबी और अत्यधिक ठंडी शीत ऋतु।अत्यधिक ठंडी जलवायु और बहुत छोटा वृद्धि काल।

अध्याय 15 के प्रमुख बायोम

1. सवाना बायोम

सवाना उष्णकटिबंधीय घासभूमि बायोम है। इसमें घासों का प्रभुत्व और वृक्षों का अपेक्षाकृत विरल वितरण होता है। आर्द्र और शुष्क ऋतुओं का स्पष्ट अंतर इसकी प्रमुख विशेषता है। अफ्रीकी सवाना में हाथी, जिराफ, जेब्रा और अन्य बड़े शाकाहारी जीवों की विविधता पाई जाती है। स्रोत में सवाना के वन सवाना, वृक्ष सवाना, झाड़ी सवाना और घास सवाना जैसे प्रकार भी दिए गए हैं। 5

2. भूमध्यसागरीय बायोम

भूमध्यसागरीय बायोम सामान्यतः महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में पाया जाता है। यहाँ गर्म और शुष्क ग्रीष्म तथा अपेक्षाकृत नम शीत ऋतु होती है। पौधों में मोटी और कठोर पत्तियाँ तथा गहरी जड़ें जैसी शुष्कता-अनुकूल विशेषताएँ पाई जाती हैं।

3. शीतोष्ण घास प्रदेश बायोम

प्रेयरी, स्टेपी, पम्पाज और वेल्ड इसके प्रमुख उदाहरण हैं। घासें यहाँ की प्रमुख वनस्पति हैं। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक घासभूमि को साफ करके गेहूँ और अन्य खाद्यान्नों की खेती की गई है। स्रोत में इन क्षेत्रों को विश्व के प्रमुख अन्न उत्पादन और दुग्ध व्यवसाय क्षेत्रों से जोड़ा गया है। 6

4. टैगा या शीतोष्ण कोणधारी वन बायोम

टैगा बायोम उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के उच्च अक्षांशों में पाया जाता है। यहाँ स्प्रूस, पाइन, फर और लार्च जैसे कोणधारी वृक्ष प्रमुख हैं। शीत ऋतु लंबी और कठोर होती है तथा ग्रीष्म ऋतु छोटी होती है। 7

5. टुण्ड्रा बायोम

टुण्ड्रा बायोम में अत्यधिक ठंड, छोटा वृद्धि काल और वृक्षों का अभाव प्रमुख विशेषताएँ हैं। यहाँ काई, लाइकेन और छोटी शाकीय वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। स्थायी रूप से जमी हुई भूमि की परत को परमाफ्रास्ट कहा जाता है। स्रोत के अनुसार आर्कटिक टुण्ड्रा को निम्न, मध्य और उच्च टुण्ड्रा क्षेत्रों में भी बाँटा गया है। 8

6. सागरीय बायोम

सागरीय बायोम में समुद्री जल के भीतर पाए जाने वाले विभिन्न जीव और उनके आवास शामिल हैं। स्रोत के अनुसार इसे मुख्यतः पेलैजिक बायोम और नितलीय बायोम में विभाजित किया जाता है। समुद्री जीवों को उनके आवास और जीवन-शैली के आधार पर प्लैंकटन, नेक्टन और बेन्थस जैसी श्रेणियों में समझा जाता है। 9

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • पारिस्थितिकी की परिभाषा याद करें।
  • पारितंत्र के जैविक और अजैविक घटकों को समझें।
  • खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर तैयार करें।
  • बायोम की परिभाषा और प्रमुख प्रकार याद करें।
  • सवाना बायोम की विशेषताएँ पढ़ें।
  • भूमध्यसागरीय बायोम की जलवायु और वनस्पति समझें।
  • शीतोष्ण घास प्रदेश के प्रेयरी, स्टेपी, पम्पाज और वेल्ड याद रखें।
  • टैगा और टुण्ड्रा के बीच अंतर तैयार करें।
  • जैव-भू-रासायनिक चक्र का अर्थ समझें।
  • पारिस्थितिक संतुलन और उसके संरक्षण के उपाय याद करें।
  • जैवमंडल में ऊर्जा के प्रवाह का क्रम समझें।
  • सागरीय बायोम में प्लैंकटन, नेक्टन और बेन्थस की विशेषताएँ याद करें।

अन्य BSEB Class 11 Geography Chapters

Chapter 1 – भूगोल एक विषय के रूप में

Chapter 2 – पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

Chapter 3 – पृथ्वी की आंतरिक संरचना

Chapter 4 – महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

Chapter 5 – खनिज एवं शैल

Chapter 6 – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ

Chapter 7 – भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Chapter 9 – सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान

Chapter 10 – वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ

Chapter 11 – वायुमंडल में जल

Chapter 12 – विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन

Chapter 13 – महासागरीय जल

Chapter 14 – महासागरीय जल संचलन

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 15 – पृथ्वी पर जीवन में पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित करने वाले जैविक और अजैविक घटकों, पारिस्थितिकी, पारितंत्र, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल और विभिन्न बायोम का अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से पारिस्थितिक संतुलन, जैव-भू-रासायनिक चक्र, बायोम, सवाना, टैगा, टुण्ड्रा तथा खाद्य श्रृंखला विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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