Bihar Board Class 11 Geography Chapter 13 – महासागरीय जल में महासागरीय जल, जल चक्र, महासागरीय तल की संरचना, महाद्वीपीय शेल्फ, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान, महासागरीय गर्त, समुद्री तापमान, लवणता तथा महासागरीय उच्चावच का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में महासागरों के आर्थिक महत्व और विभिन्न महासागरीय भू-आकृतियों को भी समझाया गया है।
इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल अध्याय 13 महासागरीय जल के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आसान और परीक्षा-उपयोगी भाषा में दिए गए हैं।
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 13 महासागरीय जल के प्रश्न-उत्तर
बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. उस तत्त्व की पहचान करें जो जलीय चक्र का भाग नहीं है ……………..
(क) वाष्पीकरण
(ख) वर्षन
(ग) जलयोजन
(घ) संघनन
उत्तर: (ग) जलयोजन
प्रश्न 2. महाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई निम्नलिखित के बीच होती है ……………….
(क) 2-20 मीटर
(ख) 20-200 मीटर
(ग) 200-2,000 मीटर
(घ) 2,000-20,000 मीटर
उत्तर: (ग) 200-2,000 मीटर
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन की लघु उच्चावच आकृति महासागरों में नहीं पाई जाती है?
(क) समुद्री टीला
(ख) महासागरीय गंभीर
(ग) प्रवाल द्वीप
(घ) निमग्न द्वीप
उत्तर: (ग) प्रवाल द्वीप
प्रश्न 4. निम्न में से कौन-सा सबसे छोटा महासागर है?
(क) हिंद महासागर
(ख) अटलांटिक महासागर
(ग) आर्कटिक महासागर
(घ) प्रशांत महासागर
उत्तर: (ग) आर्कटिक महासागर
प्रश्न 5. लवणता को प्रति समुद्री जल में घुले हुए नमक (ग्राम) की मात्रा से व्यक्त किया जाता है ………………..
(क) 10 ग्राम
(ख) 100 ग्राम
(ग) 1,000 ग्राम
(घ) 10,000 ग्राम
उत्तर: (ग) 1,000 ग्राम
लगभग 30 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. हम पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी की सतह का बहुत बड़ा भाग जल से ढका हुआ है। अंतरिक्ष से पृथ्वी का अधिकांश भाग नीला दिखाई देता है। इसलिए पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है।
प्रश्न 2. महाद्वीपीय सीमांत क्या होता है?
उत्तर: महाद्वीपीय सीमांत महाद्वीप का वह विस्तृत जलमग्न किनारा है, जो महाद्वीप और गहरे महासागर के बीच स्थित होता है। इसमें महाद्वीपीय शेल्फ और ढाल प्रमुख भाग हैं।
प्रश्न 3. विभिन्न महासागरों के सबसे गहरे गर्तों की सूची बनाइए।
उत्तर: महासागरीय गर्त महासागरों के अत्यधिक गहरे और संकरे भाग हैं। प्रमुख गर्तों में प्रशांत महासागर का मेरियाना गर्त, अटलांटिक का प्यूर्टो रिको गर्त तथा हिंद महासागर की जावा-सुंडा खाई प्रमुख हैं।
प्रश्न 4. ताप प्रवणता क्या है?
उत्तर: महासागर में जिस गहराई पर तापमान तेजी से कम होता है, उस संक्रमण क्षेत्र को ताप प्रवणता या थर्मोक्लाइन कहा जाता है।
प्रश्न 5. समुद्र में नीचे जाने पर आप ताप की किन परतों का सामना करेंगे? गहराई के साथ तापमान में भिन्नता क्यों आती है?
उत्तर: समुद्र की ऊपरी सतह अपेक्षाकृत गर्म होती है। इसके नीचे थर्मोक्लाइन क्षेत्र में तापमान तेजी से घटता है और उसके बाद गहरे समुद्र का जल अपेक्षाकृत ठंडा रहता है।
प्रश्न 6. समुद्री जल की लवणता क्या है?
उत्तर: समुद्री जल में घुले हुए लवणों की मात्रा को लवणता कहते हैं। सामान्यतः समुद्री जल की लवणता को प्रति हजार भाग अर्थात ‰ (पार्ट्स पर थाउजेंड) में व्यक्त किया जाता है।
लगभग 150 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. जलीय चक्र के विभिन्न तत्त्व किस प्रकार अंतर-संबंधित हैं?
उत्तर: जल एक चक्रीय संसाधन है। पृथ्वी पर जल लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान और एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित होता रहता है। इस निरंतर प्रक्रिया को जलीय चक्र कहा जाता है।
सूर्य की ऊष्मा के कारण महासागरों, नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों से जल का वाष्पीकरण होता है। पौधों से जलवाष्प निकलने की प्रक्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन से जलवाष्प वायुमंडल में पहुँचती है। ऊपर जाकर जलवाष्प ठंडी होती है और संघनन द्वारा बादलों का निर्माण करती है। इसके बाद वर्षा, हिमपात या अन्य रूपों में जल पृथ्वी की सतह पर वापस आता है।
वर्षा का कुछ जल नदियों और धाराओं के रूप में बहकर महासागरों में पहुँचता है, कुछ भूमि में रिसकर भूमिगत जल बनता है और कुछ हिम के रूप में संग्रहित रहता है। इस प्रकार वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, अपवाह और भूमिगत जल जैसी प्रक्रियाएँ मिलकर जलीय चक्र को पूरा करती हैं।
प्रश्न 2. महासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का निरीक्षण कीजिए।
उत्तर: महासागरीय जल का तापमान सभी स्थानों पर समान नहीं होता। इसके वितरण को कई कारक प्रभावित करते हैं। प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
1. अक्षांश: विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर सौर विकिरण की मात्रा घटती जाती है। इसलिए महासागरीय सतह का तापमान भी सामान्यतः कम होता जाता है।
2. स्थल एवं जल का असमान वितरण: उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थल तथा जल का वितरण समान नहीं है। इससे महासागरों के तापमान में अंतर उत्पन्न होता है।
3. प्रचलित हवाएँ: हवाएँ समुद्र के गर्म या ठंडे जल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं। इससे महासागरीय तापमान का वितरण प्रभावित होता है।
4. महासागरीय धाराएँ: गर्म धाराएँ ठंडे क्षेत्रों का तापमान बढ़ा सकती हैं, जबकि ठंडी धाराएँ गर्म क्षेत्रों के तापमान को कम कर सकती हैं। उदाहरण के लिए गल्फ स्ट्रीम यूरोप के पश्चिमी तट के तापमान को प्रभावित करती है।
परियोजना कार्य
प्रश्न 1. विश्व की एटलस की सहायता से महासागरीय नितल के उच्चावच्चों को विश्व के मानचित्र पर दर्शाइए।
उत्तर: इस परियोजना कार्य में विश्व मानचित्र पर महासागरीय नितल की प्रमुख आकृतियों को दर्शाया जा सकता है। इनमें महाद्वीपीय शेल्फ, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान, मध्य-महासागरीय कटक, समुद्री टीले, निमग्न द्वीप और महासागरीय गर्त प्रमुख हैं।
प्रश्न 2. एटलस की सहायता से हिन्द महासागर में महासागरीय कटकों के क्षेत्रों को पहचानिए।
उत्तर: हिन्द महासागर में प्रमुख महासागरीय कटकों में सोकोत्रा-चागोस कटक, चागोस कटक, सेशेल्स कटक, चागोस-सेंट पॉल कटक, भारत-अंटार्कटिका कटक, कारगेलन-गासबर्ग कटक, मैडागास्कर कटक तथा अटलांटिक-अंटार्कटिका कटक शामिल हैं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन किसे कहते हैं?
उत्तर: जल स्रोतों से जल के वाष्पीकरण तथा पौधों की पत्तियों से जल के वाष्पोत्सर्जन की संयुक्त प्रक्रिया को वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है।
प्रश्न 2. पृथ्वी पर शुद्ध जल की प्राप्ति कहाँ से होती है?
उत्तर: पृथ्वी पर मीठा या शुद्ध जल मुख्यतः वर्षा, हिम और हिमनदों, नदियों, झीलों तथा भूमिगत जल के रूप में प्राप्त होता है।
प्रश्न 3. ‘थर्मोक्लाइन’ किसे कहते हैं?
उत्तर: महासागरीय जल की वह परत जिसमें गहराई बढ़ने के साथ तापमान तेजी से कम होता है, उसे थर्मोक्लाइन या ताप प्रवणता कहते हैं।
प्रश्न 4. महासागरीय जल के तापमान को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
उत्तर: महासागरीय जल के तापमान को अक्षांश, स्थल और जल का असमान वितरण, प्रचलित पवनें, महासागरीय धाराएँ तथा समुद्र की आकृति एवं आकार जैसे कारक प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 5. रेजिडेंस या आवास काल किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी तत्व के महासागरीय जल में घुले रहने और वहाँ से बाहर निकलने से पहले तक के औसत समय को रेजिडेंस या आवास काल कहा जाता है।
प्रश्न 6. कैनियन का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: जब जल का प्रवाह महाद्वीपीय शेल्फ और ढाल को काटता है, तो वहाँ गहरी और संकरी घाटी जैसी आकृति बन सकती है। इसे अंतः समुद्री कैनियन कहते हैं।
प्रश्न 7. तट की परिभाषा बताइए।
उत्तर: समुद्र के किनारे का अपेक्षाकृत कम गहराई वाला समतल या हल्का ऊँचा क्षेत्र, जो मत्स्य पालन के लिए उपयोगी होता है, तट कहलाता है।
प्रश्न 8. महासागरीय कटक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: महासागरीय तल पर फैली लंबी अंतःसमुद्री पर्वत श्रृंखला को महासागरीय कटक कहा जाता है। मध्य-महासागरीय कटक इसका प्रमुख उदाहरण है।
प्रश्न 9. महासागरीय खाई क्या होती है?
उत्तर: महासागर के अत्यधिक गहरे, लंबे और संकरे भागों को महासागरीय खाई या गर्त कहा जाता है। इनमें कई की गहराई 6,000 मीटर से अधिक होती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. जलमंडल किसे कहते हैं? हिन्द महासागर को आधा महासागर क्यों कहा जाता है?
उत्तर: पृथ्वी पर उपस्थित समस्त जल के क्षेत्र को जलमंडल कहा जाता है। इसमें महासागर, समुद्र, नदियाँ, झीलें, हिमनद और भूमिगत जल आदि शामिल हैं। पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है।
हिन्द महासागर को आधा महासागर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका उत्तरी भाग एशिया महाद्वीप से बंद है। इसके विपरीत अटलांटिक और प्रशांत महासागर उत्तर से दक्षिण तक अधिक खुले रूप में फैले हुए हैं। हिन्द महासागर का विस्तार मुख्यतः दक्षिण दिशा में अधिक है।
प्रश्न 2. गम्भीर समुद्री उद्रेरव (Submarine Ridges) किसे कहते हैं तथा गम्भीर समुद्री पहाड़ियों (कटकों) का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: महासागरीय तल पर आसपास के तल से ऊपर उठे हुए लंबे भागों को समुद्री उद्रेरव या महासागरीय कटक कहा जाता है। इनका निर्माण मुख्यतः भूपर्पटी में होने वाली विवर्तनिक गतिविधियों और ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं से संबंधित है।
जहाँ महासागरीय तल में दरारें बनती हैं, वहाँ मैग्मा ऊपर आकर ठंडा होता है और नई बेसाल्टिक चट्टान बनाता है। इस प्रकार लंबे समय तक होने वाली प्रक्रिया से मध्य-महासागरीय कटक विकसित हो सकते हैं।
प्रश्न 3. महासागरीय नितलों पर पाए जाने वाली सबसे अधिक सामान्य आकृतियों के नाम लिखो।
उत्तर: महासागरीय नितल पर निम्नलिखित प्रमुख आकृतियाँ पाई जाती हैं:
- महाद्वीपीय शेल्फ
- महाद्वीपीय ढाल
- महासागरीय मैदान
- महासागरीय गर्त
- महासागरीय कटक
- समुद्री टीले
- निमग्न द्वीप
- समुद्री कैनियन
- प्रवाल भित्तियाँ
प्रश्न 4. महासागरीय खाइयों तथा गर्तों को विवर्तनिक उत्पत्ति वाला क्यों समझा जाता है?
उत्तर: महासागरीय खाइयाँ प्रायः उन क्षेत्रों में पाई जाती हैं जहाँ प्लेटों की गति और अभिसरण जैसी विवर्तनिक गतिविधियाँ होती हैं। इन क्षेत्रों में भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियाँ भी अधिक होती हैं। इसलिए महासागरीय खाइयों का संबंध पृथ्वी की विवर्तनिक हलचलों से माना जाता है।
प्रश्न 5. महाद्वीपीय शेल्फ किसे कहते हैं तथा विभिन्न प्रकारों के नाम बताएँ?
उत्तर: महाद्वीप के किनारे का वह विस्तृत और मंद ढाल वाला जलमग्न क्षेत्र, जो अपेक्षाकृत कम गहराई तक फैला होता है, महाद्वीपीय शेल्फ कहलाता है। यह वास्तव में महाद्वीपीय भू-भाग का ही जलमग्न किनारा है।
महाद्वीपीय शेल्फ के प्रमुख प्रकार हैं:
- हिमानीकृत शेल्फ
- बड़ी नदियों के मुहानों पर बने शेल्फ
- प्रवाल भित्ति शेल्फ
- द्रुमाकृतिक घाटियों से युक्त शेल्फ
- नवीन वलित पर्वत के पार्श्व शेल्फ
प्रश्न 6. महासागरीय नितल की गहराई कैसे मापी जाती है तथा संसार में सबसे गहरा स्थान कौन-सा है?
उत्तर: महासागरीय नितल की गहराई मापने के लिए ध्वनि तरंगों पर आधारित इको साउंडिंग जैसी तकनीक का प्रयोग किया जाता है। यंत्र से भेजी गई ध्वनि तरंग महासागरीय तल से परावर्तित होकर वापस आती है। आने-जाने में लगे समय के आधार पर गहराई का अनुमान लगाया जाता है।
विश्व का सबसे गहरा ज्ञात महासागरीय क्षेत्र मेरियाना गर्त है, जो प्रशांत महासागर में स्थित है।
प्रश्न 7. समुद्री खाई तथा समुद्री कैनियन में अंतर बताओ।
| आधार | समुद्री खाई | समुद्री कैनियन |
|---|---|---|
| स्वरूप | लंबी, संकरी और अत्यधिक गहरी अवनति। | समुद्री शेल्फ और ढाल पर बनी गहरी घाटी। |
| स्थिति | अक्सर प्लेटों के अभिसरण क्षेत्रों के पास। | मुख्यतः महाद्वीपीय शेल्फ और ढाल पर। |
| गहराई | बहुत अधिक गहरी हो सकती है। | खाई की तुलना में सामान्यतः कम गहरी होती है। |
| आकार | लंबी और संकरी अवनति। | अक्सर V-आकार की घाटी जैसी आकृति। |
प्रश्न 8. महासागरों का आर्थिक महत्त्व क्या है? वर्णन करें।
उत्तर: महासागर मानव जीवन और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके प्रमुख आर्थिक महत्व निम्नलिखित हैं:
- महासागर मछली और अन्य जलीय जीवों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
- तटीय क्षेत्रों के लोगों की आजीविका समुद्र से जुड़ी होती है।
- महासागरों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और परिवहन किया जाता है।
- महाद्वीपीय शेल्फ से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे संसाधन प्राप्त किए जाते हैं।
- समुद्री तल पर मैंगनीज, निकिल, ताँबा और कोबाल्ट जैसी खनिज संपदाएँ मिल सकती हैं।
- समुद्री पर्यटन भी आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार है।
प्रश्न 9. प्रति ध्रुवीय स्थिति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: पृथ्वी पर कुछ स्थल और जल क्षेत्र एक-दूसरे के लगभग विपरीत स्थित पाए जाते हैं। जल और स्थल के इस प्रकार के विपरीत वितरण को प्रति ध्रुवीय स्थिति कहा जाता है। उदाहरण के रूप में आर्कटिक महासागर के विपरीत अंटार्कटिका का क्षेत्र स्थित है।
प्रश्न 10. समुद्री कैनियन की विशेषताओं एवं निर्माण को स्पष्ट करें।
उत्तर: समुद्री कैनियन महाद्वीपीय शेल्फ और महाद्वीपीय ढाल पर पाई जाने वाली गहरी, संकरी तथा अक्सर V-आकार की घाटियाँ होती हैं। इनके कुछ भाग नदी घाटियों के समान दिखाई देते हैं।
इनका निर्माण समुद्र में आने वाले अवसादों, ढाल पर नीचे की ओर जाने वाली धाराओं तथा अपरदनकारी प्रक्रियाओं से संबंधित माना जाता है। ये कई स्थानों पर नदियों के मुहानों के सामने समुद्र की ओर बढ़ते हुए पाए जाते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखिए –
1. महाद्वीपीय उत्थान
महाद्वीपीय ढाल के बाद महासागरीय दिशा में अपेक्षाकृत मंद ढाल वाला क्षेत्र पाया जाता है, जिसे महाद्वीपीय उत्थान कहा जाता है। यह महाद्वीप और गहरे महासागरीय तल के बीच संक्रमण क्षेत्र का कार्य करता है। यहाँ समुद्री अवसादों का संचय अधिक हो सकता है।
2. मध्य महासागरीय कटक
मध्य महासागरीय कटक महासागर के भीतर फैली एक विशाल अंतःसमुद्री पर्वत श्रृंखला है। यह कई महासागरीय बेसिनों के बीच विस्तृत है। समुद्री तल के प्रसरण से संबंधित प्रक्रियाओं में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
3. महासागरीय द्रोण
महासागरीय द्रोण महासागर के विशाल गहरे क्षेत्र होते हैं। इनमें वितलीय मैदान, समुद्री पहाड़ियाँ, महासागरीय उत्थान और समुद्री टीले जैसी अनेक आकृतियाँ पाई जाती हैं। इनका तल लंबे समय तक जमा हुए अवसादों से प्रभावित होता है।
4. अंतः समुद्री कैनियन
अंतः समुद्री कैनियन महाद्वीपीय शेल्फ और ढाल पर बनी गहरी तथा संकरी घाटियाँ हैं। ये समुद्री तल की महत्वपूर्ण भू-आकृतियाँ हैं और कई स्थानों पर नदी घाटियों के विस्तार जैसी दिखाई देती हैं।
प्रश्न 2. अटलांटिक महासागरीय सतह का मानचित्र बनाइए और उसमें महासागरीय द्रोणियाँ तथा मध्य अटलांटिक कटक दिखाइए।
उत्तर: इस प्रश्न के लिए मानचित्र में अटलांटिक महासागर की स्थिति दिखाते हुए बीच से उत्तर-दक्षिण दिशा में फैले मध्य अटलांटिक कटक को दर्शाइए। इसके दोनों ओर स्थित प्रमुख महासागरीय द्रोणियों को भी नाम सहित अंकित कीजिए।
प्रश्न 3. हिन्द महासागरीय सतह के उच्चावच का वर्णन कीजिए।
उत्तर: हिन्द महासागर की समुद्री सतह पर विभिन्न प्रकार के उच्चावच पाए जाते हैं। इसके महाद्वीपीय शेल्फ की चौड़ाई अलग-अलग स्थानों पर अलग है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के किनारों पर इसका पर्याप्त विस्तार मिलता है।
हिन्द महासागर में मध्य हिन्द महासागरीय कटक एक महत्वपूर्ण भू-आकृति है। यह उत्तर में भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग से दक्षिण की ओर अंटार्कटिका तक विस्तृत है। इसके अतिरिक्त सोकोत्रा-चागोस, मालदीव, चागोस-सेंट पॉल, इंडियन-अंटार्कटिक तथा मैडागास्कर जैसे कटक पाए जाते हैं।
ये कटक हिन्द महासागर को विभिन्न महासागरीय द्रोणियों में विभाजित करते हैं। इनमें ओमान द्रोणी, अरबियन द्रोणी, सोमाली द्रोणी, अगुल्हास-नटाल द्रोणी और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया द्रोणी प्रमुख हैं। हिन्द महासागर में जावा-सुंडा क्षेत्र के पास गहरी महासागरीय खाई भी पाई जाती है।
प्रश्न 4. अंतर स्पष्ट कीजिए –
1. महाद्वीपीय शेल्फ एवं महाद्वीपीय ढाल
| आधार | महाद्वीपीय शेल्फ | महाद्वीपीय ढाल |
|---|---|---|
| स्थिति | महाद्वीप का जलमग्न किनारा। | शेल्फ के बाद स्थित क्षेत्र। |
| ढाल | बहुत मंद ढाल। | शेल्फ की तुलना में अधिक तीव्र ढाल। |
| गहराई | अपेक्षाकृत कम गहराई। | गहराई तेजी से बढ़ती है। |
2. तट एवं भित्ति
| आधार | तट | भित्ति |
|---|---|---|
| स्वरूप | कम गहराई वाला समुद्री क्षेत्र। | प्रवाल या अन्य जैविक अवशेषों से बनी संरचना। |
| निर्माण | भौगोलिक एवं समुद्री प्रक्रियाओं से संबंधित। | मुख्यतः प्रवाल जीवों की गतिविधि से। |
| महत्त्व | मत्स्य पालन के लिए उपयोगी। | समुद्री जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण। |
3. महासागरीय जल के प्रथम एवं तृतीय स्तर
| आधार | प्रथम स्तर | तृतीय स्तर |
|---|---|---|
| स्थिति | समुद्र की ऊपरी परत। | गहरे महासागर की परत। |
| तापमान | सूर्य के प्रभाव के कारण अपेक्षाकृत अधिक। | बहुत कम तापमान। |
| प्रभाव | वायुमंडल के साथ अधिक संपर्क। | सौर विकिरण का प्रभाव बहुत कम। |
4. थर्मोक्लाइन एवं हैलोक्लाइन
| आधार | थर्मोक्लाइन | हैलोक्लाइन |
|---|---|---|
| अर्थ | तापमान में तेजी से परिवर्तन वाला क्षेत्र। | लवणता में तेजी से परिवर्तन वाला क्षेत्र। |
| मुख्य तत्व | तापमान। | लवणता। |
| प्रभाव | गहराई के साथ तापमान की संरचना को प्रभावित करता है। | गहराई के साथ लवणता की संरचना को प्रभावित करता है। |
प्रश्न 5. अन्ध महासागर की स्थल रूपरेखा के प्रमुख लक्षणों का वर्णन करो।
उत्तर: अटलांटिक महासागर का आकार सामान्यतः अंग्रेजी के ‘S’ अक्षर के समान दिखाई देता है। इसके दोनों ओर उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका तथा यूरोप और अफ्रीका के महाद्वीपीय भाग स्थित हैं।
महाद्वीपीय शेल्फ: अटलांटिक महासागर के कई तटीय क्षेत्रों में विस्तृत महाद्वीपीय शेल्फ पाए जाते हैं। ये मत्स्य पालन तथा समुद्री संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मध्य अटलांटिक कटक: महासागर के बीचोंबीच उत्तर से दक्षिण दिशा में मध्य अटलांटिक कटक फैला हुआ है। यह अटलांटिक महासागर को अलग-अलग बेसिनों में विभाजित करता है।
महासागरीय बेसिन: अटलांटिक महासागर में अनेक बेसिन पाए जाते हैं। इनमें लेब्राडोर बेसिन, स्पेनिश बेसिन, उत्तरी अमेरिकी बेसिन, गिनी बेसिन और ब्राजील बेसिन प्रमुख हैं।
महासागरीय गर्त: अटलांटिक महासागर में प्रशांत महासागर की तुलना में गर्त कम हैं। प्यूर्टो रिको गर्त इसका प्रमुख उदाहरण है।
तटीय समुद्र और द्वीप: अटलांटिक महासागर में बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, कैरेबियन सागर और मेक्सिको की खाड़ी जैसे तटीय जल क्षेत्र पाए जाते हैं। ग्रेट ब्रिटेन, आइसलैंड, बरमूडा और अन्य द्वीप भी इसके प्रमुख द्वीप हैं।
प्रश्न 6. महासागरों की तली के उच्चावच के सामान्य लक्षणों का वर्णन करें।
उत्तर: महासागरों की तली पूरी तरह समतल नहीं है। इसमें विभिन्न प्रकार की ऊँचाई और गहराई वाली भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। महासागरीय तल को प्रमुख रूप से निम्नलिखित भागों में समझा जा सकता है:
1. महाद्वीपीय शेल्फ: यह महाद्वीपों का जलमग्न किनारा है। इसका ढाल बहुत मंद होता है और यह अपेक्षाकृत कम गहरा क्षेत्र होता है। यह मत्स्य पालन तथा समुद्री संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है।
2. महाद्वीपीय ढाल: महाद्वीपीय शेल्फ के बाद अधिक तीव्र ढाल वाला क्षेत्र महाद्वीपीय ढाल कहलाता है। इसके बाद महासागर की गहराई तेजी से बढ़ती है।
3. महासागरीय मैदान: महाद्वीपीय ढाल के बाद महासागर में विस्तृत और अपेक्षाकृत समतल क्षेत्र पाए जाते हैं। इन्हें महासागरीय या वितलीय मैदान कहा जाता है। यहाँ लंबे समय तक जमा हुए अवसाद पाए जाते हैं।
4. महासागरीय गर्त: ये महासागर के अत्यधिक गहरे, लंबे और संकरे भाग होते हैं। ये अक्सर विवर्तनिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं और भूकंप तथा ज्वालामुखीय गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं।
5. अन्य विशेष आकृतियाँ: महासागरीय तल पर महासागरीय कटक, समुद्री टीले, निमग्न द्वीप, समुद्री कैनियन और प्रवाल भित्तियाँ जैसी अनेक भू-आकृतियाँ भी पाई जाती हैं।
अध्याय 13 महासागरीय जल का सारांश
महासागरीय जल अध्याय में पृथ्वी के जलमंडल और महासागरों की संरचना का अध्ययन किया जाता है। महासागरों में जल का तापमान और लवणता स्थान तथा गहराई के अनुसार बदलती रहती है। महासागरीय जल के तापमान को अक्षांश, पवनें, स्थल एवं जल का वितरण तथा महासागरीय धाराएँ प्रभावित करती हैं।
महासागरीय तल पर महाद्वीपीय शेल्फ, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान, महासागरीय गर्त, कटक, समुद्री टीले और कैनियन जैसी विभिन्न भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। इनका निर्माण विभिन्न भौगोलिक और विवर्तनिक प्रक्रियाओं से संबंधित है।
महासागर आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मछली, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खनिज, समुद्री परिवहन और पर्यटन जैसी अनेक गतिविधियाँ महासागरों से जुड़ी हुई हैं।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है, याद रखें।
- महाद्वीपीय शेल्फ और महाद्वीपीय ढाल में अंतर समझें।
- महासागरीय मैदान और महासागरीय गर्त की विशेषताएँ याद करें।
- थर्मोक्लाइन और हैलोक्लाइन का अर्थ याद रखें।
- महासागरीय जल की लवणता की परिभाषा याद करें।
- महासागरीय जल के तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों की तैयारी करें।
- मध्य महासागरीय कटक की विशेषताएँ पढ़ें।
- समुद्री कैनियन की विशेषताएँ और निर्माण समझें।
- महासागरों के आर्थिक महत्व के बिंदु याद करें।
- हिन्द महासागर के प्रमुख कटक और द्रोणियों की जानकारी तैयार करें।
- अटलांटिक महासागर की स्थल रूपरेखा से संबंधित प्रश्न को अच्छी तरह तैयार करें।
अन्य BSEB Class 11 Geography Chapters
Chapter 1 – भूगोल एक विषय के रूप में
Chapter 2 – पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास
Chapter 3 – पृथ्वी की आंतरिक संरचना
Chapter 4 – महासागरों और महाद्वीपों का वितरण
Chapter 6 – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
Chapter 7 – भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास
Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना
Chapter 9 – सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान
Chapter 10 – वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ
Chapter 12 – विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 13 – महासागरीय जल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें महासागरीय जल के तापमान और लवणता, महासागरीय तल की प्रमुख भू-आकृतियों, महाद्वीपीय शेल्फ, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान, गर्त, कटक तथा महासागरों के आर्थिक महत्व का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से MCQ, अंतर स्पष्ट करने वाले प्रश्न तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की अच्छी तैयारी करनी चाहिए।