📢 महत्वपूर्ण सूचना: BSEB Class 11वीं और 12वीं के Notes, Questions & Answers अभी तैयार किए जा रहे हैं। नए Chapters लगातार जोड़े जा रहे हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 14 – महासागरीय जल संचलन में महासागरीय तरंगों, ज्वार-भाटा, महासागरीय धाराओं तथा समुद्री जल की विभिन्न गतियों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति, गर्म एवं ठंडी जलधाराएँ, तरंगों के प्रकार, ज्वार-भाटा के कारण तथा महासागरीय जल संचलन के मानव जीवन पर प्रभाव को समझाया गया है।

इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल अध्याय 14 महासागरीय जल संचलन के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आसान और परीक्षा-उपयोगी भाषा में दिए गए हैं।

Table of Contents

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 14 महासागरीय जल संचलन के प्रश्न-उत्तर

बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे गति किससे संबंधित है ……………..

(क) ज्वार
(ख) तरंग
(ग) धाराएँ
(घ) ऊपर में से कोई नहीं

उत्तर: (ग) धाराएँ

प्रश्न 2. वृहत् ज्वार आने का क्या कारण है?

(क) सूर्य और चन्द्रमा का पृथ्वी एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल
(ख) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा एक-दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल
(ग) तटरेखा का दंतुरित होना
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (ख) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा एक-दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल

प्रश्न 3. पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?

(क) अपसौर
(ख) उपसौर
(ग) उपभू
(घ) अपभू

उत्तर: (ग) उपभू

प्रश्न 4. पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?

(क) अक्टूबर
(ख) जुलाई
(ग) सितम्बर
(घ) जनवरी

उत्तर: (घ) जनवरी

लगभग 30 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. तरंगें क्या हैं?

उत्तर: तरंगें मुख्यतः ऊर्जा का संचरण हैं। पवन द्वारा समुद्री जल को ऊर्जा मिलने से तरंगें उत्पन्न होती हैं। जल के कण तरंगों के साथ दोलनात्मक गति करते हैं।

प्रश्न 2. महासागरीय तरंगें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?

उत्तर: महासागरीय तरंगें मुख्यतः पवन से ऊर्जा प्राप्त करती हैं। पवन जितनी तेज और लंबे समय तक समुद्र की सतह पर बहती है, तरंगों की ऊर्जा और ऊँचाई उतनी अधिक हो सकती है।

प्रश्न 3. ज्वारभाटा क्या है?

उत्तर: चन्द्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण तथा पृथ्वी-चन्द्रमा प्रणाली के बलों के कारण समुद्री जल के नियमित रूप से ऊपर उठने और नीचे गिरने की प्रक्रिया को ज्वार-भाटा कहते हैं।

प्रश्न 4. ज्वारभाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?

उत्तर: ज्वार-भाटा का मुख्य कारण चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण है। सूर्य का गुरुत्वाकर्षण भी इसमें योगदान देता है। पृथ्वी-चन्द्रमा प्रणाली से संबंधित अपकेंद्रीय प्रभाव भी ज्वारीय उभार बनाने में सहायक होता है।

प्रश्न 5. ज्वारभाटा नौकासंचालन से कैसे संबंधित हैं?

उत्तर: ज्वार के समय नदी और समुद्र के मुहाने पर जल की गहराई बढ़ जाती है। इससे बड़े जलयान अधिक आसानी से तटीय नदियों और बंदरगाहों तक पहुँच सकते हैं।

लगभग 150 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. जलधाराएँ तापमान को कैसे प्रभावित करती हैं? उत्तर पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को ये कैसे प्रभावित करते हैं?

उत्तर: महासागरीय जलधाराएँ पृथ्वी के अलग-अलग भागों के बीच ऊष्मा का स्थानांतरण करती हैं। गर्म जलधाराएँ निम्न अक्षांशों से गर्म जल को उच्च अक्षांशों की ओर ले जाती हैं, जबकि ठंडी जलधाराएँ ठंडे क्षेत्रों से अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों की ओर बहती हैं। इस कारण इनके संपर्क में आने वाले तटीय क्षेत्रों के तापमान पर प्रभाव पड़ता है।

उत्तर-पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों पर उत्तरी अटलांटिक अपवाह का महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह गर्म जल को यूरोप की ओर ले जाती है। इसके कारण ब्रिटेन और नॉर्वे के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों का तापमान समान अक्षांशों पर स्थित कई अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक रहता है।

इसके विपरीत कनाडा के उत्तर-पूर्वी तट पर ठंडी लैब्राडोर धारा का प्रभाव पड़ता है। इसलिए समान अक्षांशों पर होने के बावजूद पश्चिमी यूरोप और पूर्वी कनाडा की शीत ऋतु की दशाओं में काफी अंतर दिखाई देता है।

प्रश्न 2. जलधाराएँ कैसे उत्पन्न होती हैं?

उत्तर: महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति एक ही कारण से नहीं होती, बल्कि अनेक कारक मिलकर इनके निर्माण और दिशा को प्रभावित करते हैं। प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

1. पवन

स्थायी तथा प्रचलित पवनें समुद्र की सतह पर घर्षण पैदा करके जल को एक निश्चित दिशा में प्रवाहित करती हैं। व्यापारिक पवनें और पछुआ पवनें कई प्रमुख महासागरीय धाराओं को प्रभावित करती हैं।

2. तापमान और लवणता

समुद्री जल के तापमान और लवणता में अंतर से उसके घनत्व में अंतर उत्पन्न होता है। घनत्व में यह अंतर गहरे समुद्र में जल की गति को प्रभावित करता है।

3. पृथ्वी का घूर्णन

पृथ्वी के घूर्णन के कारण चलती हुई जलराशियाँ कोरिऑलिस प्रभाव के अधीन आती हैं। इसके कारण महासागरीय धाराओं की दिशा में विचलन होता है।

4. वायुमंडलीय दाब

वायुदाब में अंतर और उससे संबंधित पवन व्यवस्था समुद्री जल की गति को प्रभावित करती है।

5. वर्षा और वाष्पीकरण

वर्षा तथा वाष्पीकरण से समुद्री जल की लवणता और घनत्व में परिवर्तन हो सकता है, जिससे जल की गति प्रभावित होती है।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. एक ग्लोब या मानचित्र लें, जिसमें महासागरीय धाराएँ दर्शाई गई हैं, यह भी बताएँ कि क्यों कुछ जलधाराएँ गर्म हैं व अन्य ठंडी। इसके साथ ही यह भी बताएं कि निश्चित स्थानों पर यह क्यों विक्षेपित होती है। कारणों का विवेचन करें।

उत्तर: महासागरीय धाराओं को तापमान के आधार पर मुख्यतः गर्म और ठंडी जलधाराओं में बाँटा जाता है। गर्म धाराएँ सामान्यतः निम्न अक्षांशों से ऊँचे अक्षांशों की ओर गर्म जल ले जाती हैं, जबकि ठंडी धाराएँ उच्च अक्षांशों या ठंडे क्षेत्रों से अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों की ओर ठंडा जल ले जाती हैं।

महासागरीय धाराओं की दिशा पर प्रचलित पवनें, पृथ्वी का घूर्णन, कोरिऑलिस प्रभाव, महाद्वीपों की स्थिति, समुद्री तटों का आकार और जल के तापमान एवं लवणता से उत्पन्न घनत्व अंतर प्रभाव डालते हैं। इसी कारण धाराएँ कई स्थानों पर अपनी मूल दिशा से मुड़ जाती हैं।

ठंडा जल अधिक घना होने के कारण नीचे जाने की प्रवृत्ति रखता है, जबकि अपेक्षाकृत गर्म और हल्का जल ऊपर रहने की प्रवृत्ति रखता है। इस प्रकार सतही और गहरी महासागरीय धाराओं का निर्माण होता है।

प्रश्न 2. किसी तालाब के पास जाएँ तथा तरंगों की गति का अवलोकन करें एक पत्थर फेंकें एवं देखें की तरंगें कैसे उत्पन्न होती हैं। एक तरंग का चित्र बनाएँ एवं इसकी लम्बाई, दूरी तथा आयाम को मापें तथा अपनी कापी में इसे लिखें।

उत्तर: इस परियोजना कार्य को विद्यार्थी स्वयं करें। तालाब के शांत जल में छोटा पत्थर डालने पर उत्पन्न तरंगों का निरीक्षण करें। दो क्रमिक तरंग शृंगों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य तथा मध्य स्थिति से शृंग की अधिकतम दूरी को आयाम के रूप में मापा जा सकता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. ‘उद्घावन’ क्या है?

उत्तर: जब टूटने के बाद अत्यधिक विक्षुब्ध जल की परत तट की ओर आगे बढ़ती है, तो इस गति को उद्घावन कहा जाता है।

प्रश्न 2. जल में सूर्य का प्रकाश कितनी गहराई तक प्रवेश कर सकता है?

उत्तर: स्रोत के अनुसार सूर्य का प्रकाश लगभग 900 मीटर तक प्रवेश कर सकता है, लेकिन वनस्पतियों के प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोगी प्रकाश मुख्यतः ऊपरी लगभग 100 मीटर तक ही पर्याप्त रहता है।

प्रश्न 3. सागरीय जल के तापमान का वार्षिक अंतर किन घटकों पर निर्भर करता है?

उत्तर: समुद्री जल के तापमान के वार्षिक अंतर को विभिन्न गहराइयों का तापमान, ताप संचरण, संवहनी धाराएँ तथा जलराशियों का पार्श्व विस्थापन प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 4. महासागरीय जल के कौन-से गुण समुद्री जन्तुओं और वनस्पतियों को प्रभावित करते हैं?

उत्तर: समुद्री जीव-जंतुओं और वनस्पतियों को मुख्यतः जल का तापमान, घनत्व, लवणता तथा जल का संचरण प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5. उन कारकों के नाम बताइए, जो महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति को नियंत्रित करते हैं।

उत्तर: महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति में मुख्य रूप से पवनों का घर्षण, जल के घनत्व में अंतर, तापमान, लवणता, पृथ्वी का घूर्णन और कोरिऑलिस प्रभाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 6. महासागरीय धाराएं किसे कहते हैं?

उत्तर: महासागर में जलराशि का लंबे समय तक किसी निश्चित दिशा में व्यवस्थित रूप से प्रवाहित होना महासागरीय धारा कहलाता है।

प्रश्न 7. थर्मोक्लाइन धाराएं किसे कहते हैं?

उत्तर: समुद्री जल के घनत्व में अंतर के कारण उत्पन्न होने वाली गहरी या ऊर्ध्वाधर जलगतियों को घनत्व-प्रेरित महासागरीय परिसंचरण से जोड़ा जाता है।

प्रश्न 8. गल्फ स्ट्रीम का क्या अर्थ है?

उत्तर: गल्फ स्ट्रीम उत्तरी अटलांटिक महासागर की एक प्रमुख गर्म जलधारा है। यह मेक्सिको की खाड़ी और फ्लोरिडा क्षेत्र से निकलकर उत्तर-पूर्व दिशा में यूरोप की ओर गर्म जल पहुँचाती है।

प्रश्न 9. तरंग-आवर्त काल किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी निश्चित बिंदु से लगातार गुजरने वाले दो क्रमिक तरंग शृंगों या गर्तों के बीच लगने वाले समय को तरंग-आवर्त काल कहते हैं।

प्रश्न 10. ‘भग्नोर्मि’ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब समुद्री तरंग उथले तट की ओर बढ़ते हुए अस्थिर होकर टूट जाती है और विक्षुब्ध जल के रूप में बदल जाती है, तो इसे भग्नोर्मि कहा जाता है।

प्रश्न 11. तरंग का वेग कैसे मापा जाता है?

उत्तर: तरंग का वेग तरंगदैर्ध्य और आवर्तकाल के संबंध से निर्धारित किया जा सकता है। इसका सामान्य सूत्र है:

तरंग वेग = तरंगदैर्ध्य ÷ आवर्तकाल

अर्थात् V = λ / T, जहाँ V तरंग वेग, λ तरंगदैर्ध्य और T आवर्तकाल है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. भग्नोर्मि तथा उद्घावन किस प्रकार बनती है?

उत्तर: जब समुद्री तरंग उथले तटीय जल में प्रवेश करती है तो उसकी गति कम होने लगती है और उसकी ऊँचाई बढ़ने लगती है। अंततः तरंग का अग्र भाग अस्थिर होकर टूट जाता है। इस टूटती हुई तरंग को भग्नोर्मि कहते हैं।

भग्नोर्मि के बाद विक्षुब्ध जल तट की ओर आगे बढ़ता है। इस आगे बढ़ते हुए जल को उद्घावन कहा जाता है।

प्रश्न 2. स्वेल और सर्फ में क्या अंतर है?

आधारस्वेलसर्फ
स्थितिखुले समुद्र में नियमित रूप से चलने वाली तरंगें।तट के पास टूटने वाली तरंगें।
स्वरूपतुलनात्मक रूप से नियमित और लंबी तरंगें।टूटकर विक्षुब्ध जल का रूप लेती हैं।
स्थानखुले समुद्र में प्रमुख।समुद्र तट के निकट।

प्रश्न 3. ज्वारीय भित्ति किसे कहते हैं?

उत्तर: जब ज्वारीय लहर किसी नदी या संकरी खाड़ी के मुहाने में प्रवेश करके नदी की ओर आगे बढ़ती है और पानी की एक ऊँची दीवार जैसी आकृति दिखाई देती है, तो इसे ज्वारीय भित्ति कहते हैं। कुछ नदियों में यह घटना नौकायन को प्रभावित कर सकती है।

प्रश्न 4. पवन निर्मित तरंगों के विभिन्न प्रकार बताएं।

उत्तर: पवन द्वारा उत्पन्न तरंगों को सामान्यतः निम्न प्रकार से समझा जाता है:

  • सी (Sea): विभिन्न दिशाओं और अनियमित गति वाली पवन-जनित तरंगें।
  • स्वेल (Swell): नियमित रूप से एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ने वाली तरंगें।
  • सर्फ (Surf): तट के निकट टूटने वाली तरंगें।

तट की ओर जाने वाले जल को स्वाश तथा वापस समुद्र की ओर लौटने वाले जल को बैकवाश कहा जाता है।

प्रश्न 5. ज्वारभाटा किसे कहते हैं? चर्चा कीजिए।

उत्तर: समुद्र के जल का नियमित रूप से ऊपर उठना और नीचे गिरना ज्वार-भाटा कहलाता है। जल के ऊपर उठने को ज्वार तथा नीचे उतरने को भाटा कहा जाता है।

ज्वार-भाटा मुख्यतः चन्द्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से संबंधित है। ज्वार की ऊँचाई प्रत्येक स्थान पर समान नहीं होती। तट की आकृति, समुद्र की गहराई और स्थानीय परिस्थितियाँ भी इसकी ऊँचाई को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 6. समुद्री जल की विसंगति तथा समविसंगतीय रेखा से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: किसी स्थान के वास्तविक समुद्री तापमान और उसी अक्षांश पर अपेक्षित औसत तापमान के बीच के अंतर को समुद्री तापीय विसंगति कहा जा सकता है। गर्म जलधारा से धनात्मक तथा ठंडी जलधारा से ऋणात्मक तापीय विसंगति उत्पन्न हो सकती है। समान विसंगति वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाओं को समविसंगतीय रेखाएँ कहा जाता है।

प्रश्न 7. महासागरीय जलधाराओं की मुख्य विशेषताएं बताएँ।

उत्तर: महासागरीय जलधाराओं की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. जलधाराएँ सामान्यतः एक निश्चित दिशा में प्रवाहित होती हैं।
  2. निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर जाने वाली धाराएँ सामान्यतः गर्म होती हैं।
  3. उच्च अक्षांशों से निम्न अक्षांशों की ओर आने वाली धाराएँ सामान्यतः ठंडी होती हैं।
  4. पृथ्वी के घूर्णन के कारण कोरिऑलिस प्रभाव धाराओं की दिशा को मोड़ता है।
  5. महासागरीय धाराएँ तटीय क्षेत्रों के तापमान और जलवायु को प्रभावित करती हैं।
  6. प्रचलित पवनें महासागरीय सतही धाराओं को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 8. साउथैम्पटन (इंग्लैंड) के तट पर प्रतिदिन चार बार ज्वार क्यों आते हैं?

उत्तर: साउथैम्पटन क्षेत्र में ज्वारीय व्यवस्था स्थानीय तटरेखा और जलमार्गों की स्थिति से प्रभावित होती है। यहाँ ज्वारीय लहरों का प्रभाव अलग-अलग दिशाओं से पहुँचने के कारण दिन में सामान्य स्थानों की तुलना में अधिक ज्वारीय उतार-चढ़ाव अनुभव किया जा सकता है।

प्रश्न 9. हुगली नदी में नौका संचालन के लिए ज्वार-भाटा का महत्त्व बताएँ।

उत्तर: हुगली नदी में ज्वार के समय जल स्तर और गहराई बढ़ जाती है। इससे बड़े जलयान नदी के अंदर तक पहुँच सकते हैं। कोलकाता बंदरगाह की नौवहन व्यवस्था में ज्वारीय उतार-चढ़ाव का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए जहाजों के आगमन और प्रस्थान की योजना बनाते समय ज्वार की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।

प्रश्न 10. समुद्री तरंगों की उत्पत्ति किस प्रकार होती है?

उत्तर: समुद्री तरंगें मुख्यतः पवन के समुद्री जल की सतह पर घर्षण के कारण उत्पन्न होती हैं। पवन अपनी ऊर्जा जल को देती है और जल में तरंग गति उत्पन्न होती है।

तरंगों की ऊँचाई मुख्यतः तीन बातों से प्रभावित होती है:

  1. पवन की गति
  2. पवन के लगातार बहने की अवधि
  3. जिस समुद्री क्षेत्र पर पवन लगातार बहती है उसका विस्तार अर्थात् fetch

पवन जितनी तेज होगी, अधिक समय तक चलेगी और जितने बड़े समुद्री क्षेत्र पर प्रभाव डालेगी, तरंगों में उतनी अधिक ऊर्जा और ऊँचाई विकसित हो सकती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1. ज्वार विलम्ब से क्यों आते हैं? किसी स्थान पर नित्य चारभाटा एक ही समय पर नहीं आता, क्यों?

उत्तर: ज्वार के समय में प्रतिदिन थोड़ा परिवर्तन होने का प्रमुख कारण चन्द्रमा की पृथ्वी के चारों ओर गति है। पृथ्वी अपने अक्ष पर लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है, लेकिन इसी दौरान चन्द्रमा भी अपनी कक्षा में आगे बढ़ता रहता है। इसलिए पृथ्वी को चन्द्रमा के सापेक्ष उसी स्थिति में आने के लिए 24 घंटे से थोड़ा अधिक समय लगता है।

इसी कारण अगले दिन ज्वार लगभग 50 मिनट देर से दिखाई देता है। दो लगातार उच्च ज्वारों के बीच औसत समय लगभग 12 घंटे 25 मिनट होता है। इसी प्रकार ज्वार और भाटा का समय प्रत्येक दिन थोड़ा आगे खिसकता रहता है।

स्थानीय तटरेखा, समुद्र की गहराई, खाड़ी का आकार और अन्य समुद्री परिस्थितियाँ भी किसी स्थान पर ज्वार की वास्तविक समय-सारणी को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 2. प्रशांत महासागर की धाराओं का वर्णन करें। इस महासागर के आस-पास के प्रदेशों पर इन धाराओं के प्रभाव बताएँ।

उत्तर: प्रशांत महासागर बहुत विशाल है और इसमें अनेक गर्म तथा ठंडी जलधाराएँ पाई जाती हैं। प्रमुख धाराएँ निम्नलिखित हैं:

1. उत्तरी भूमध्यरेखीय धारा

यह एक गर्म धारा है, जो व्यापारिक पवनों के प्रभाव से सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। इसका प्रभाव प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में देखा जाता है।

2. क्यूरोशियो धारा

यह जापान की ओर बहने वाली प्रमुख गर्म धारा है। यह गर्म जल को निम्न अक्षांशों से जापान और उसके आसपास के उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों की ओर ले जाती है।

3. उत्तरी प्रशांत ड्रिफ्ट

क्यूरोशियो की आगे की धारा उत्तरी प्रशांत क्षेत्र में पूर्व की ओर मुड़कर उत्तरी प्रशांत ड्रिफ्ट का रूप लेती है।

4. कैलिफोर्निया धारा

यह एक ठंडी धारा है जो उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ दक्षिण की ओर बहती है। इसका प्रभाव कैलिफोर्निया तट के तापमान और जलवायु पर पड़ता है।

5. ओयाशियो धारा

यह एक ठंडी जलधारा है जो उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से जापान के पूर्वी तट की ओर आती है। क्यूरोशियो के साथ इसकी भेंट जापान के समुद्री क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव पैदा करती है।

6. दक्षिणी भूमध्यरेखीय धारा

यह गर्म धारा भूमध्य रेखा के दक्षिण में पश्चिम की ओर बहती है और प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय परिसंचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

7. प्रति भूमध्यरेखीय धारा

यह भूमध्यरेखीय धाराओं की विपरीत दिशा में पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली गर्म धारा है।

8. पूर्वी ऑस्ट्रेलियाई धारा

यह गर्म धारा ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के साथ दक्षिण की ओर बहती है। यह ऑस्ट्रेलिया और आसपास के समुद्री क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती है।

9. पश्चिमी पवन प्रवाह

उच्च दक्षिणी अक्षांशों में पश्चिमी पवनों के प्रभाव से जल का व्यापक पूर्व की ओर प्रवाह पाया जाता है। यह दक्षिणी महासागरीय परिसंचरण का महत्वपूर्ण भाग है।

10. पेरू या हम्बोल्ट धारा

यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के साथ उत्तर की ओर बहने वाली ठंडी धारा है। इसका प्रभाव पेरू और चिली के तटीय क्षेत्रों की जलवायु पर पड़ता है तथा दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के शुष्क क्षेत्रों के विकास में इसकी भूमिका है।

प्रश्न 3. दीर्घ ज्वार तथा लघु ज्वार में अंतर बताओ। ज्वार प्रतिदिन 50 मिनट विलम्ब से क्यों आते हैं?

उत्तर:

दीर्घ ज्वार

जब सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में होते हैं, तब सूर्य और चन्द्रमा का संयुक्त गुरुत्वीय प्रभाव ज्वार की ऊँचाई बढ़ा देता है। यह स्थिति सामान्यतः अमावस्या और पूर्णिमा के आसपास होती है। इसे दीर्घ ज्वार या वृहद् ज्वार कहा जाता है।

लघु ज्वार

जब सूर्य और चन्द्रमा पृथ्वी के साथ लगभग समकोण की स्थिति में होते हैं, तब उनके ज्वारीय प्रभाव एक-दूसरे को आंशिक रूप से कम करते हैं। यह स्थिति सामान्यतः प्रथम और तृतीय चतुर्थांश के आसपास होती है। इसे लघु ज्वार कहते हैं।

आधारदीर्घ ज्वारलघु ज्वार
समयअमावस्या और पूर्णिमा के आसपास।प्रथम और तृतीय चतुर्थांश के आसपास।
सूर्य-चन्द्र स्थितिलगभग एक सीध में।लगभग समकोण पर।
ज्वार की ऊँचाईसामान्य से अधिक।सामान्य से कम।

प्रतिदिन लगभग 50 मिनट की देरी का कारण: पृथ्वी के घूर्णन के साथ-साथ चन्द्रमा भी अपनी कक्षा में आगे बढ़ता रहता है। इसलिए पृथ्वी को चन्द्रमा के सापेक्ष उसी स्थिति में लौटने में 24 घंटे से थोड़ा अधिक समय लगता है। इसी कारण ज्वार का समय प्रतिदिन लगभग 50 मिनट आगे बढ़ जाता है।

प्रश्न 4. संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए –

1. हिन्द महासागर की धाराएँ

उत्तर: हिन्द महासागर की धाराओं का परिसंचरण प्रशांत और अटलांटिक महासागरों से कुछ अलग है। इसका प्रमुख कारण उत्तरी हिन्द महासागर पर मानसूनी पवनों का प्रभाव है। मानसून की दिशा बदलने के साथ यहाँ की सतही धाराओं की दिशा में भी मौसमी परिवर्तन दिखाई देता है।

दक्षिणी हिन्द महासागर में धाराओं का परिसंचरण मुख्यतः दक्षिणी गोलार्द्ध के सामान्य महासागरीय परिसंचरण से जुड़ा है। दक्षिणी भूमध्यरेखीय धारा, मोजांबिक धारा, अगुलहास धारा, पश्चिमी पवन प्रवाह तथा पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई धारा इसके प्रमुख घटक हैं।

2. ज्वारभाटा की उत्पत्ति

उत्तर: ज्वार-भाटा समुद्री जल का नियमित उतार-चढ़ाव है। इसका मुख्य कारण चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण है, जबकि सूर्य का गुरुत्वाकर्षण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पृथ्वी-चन्द्रमा प्रणाली से संबंधित अपकेंद्रीय प्रभाव के कारण पृथ्वी के चन्द्रमा की ओर वाले तथा विपरीत दोनों ओर ज्वारीय उभार बनते हैं।

अमावस्या और पूर्णिमा के समय सूर्य तथा चन्द्रमा का प्रभाव एक-दूसरे के साथ जुड़कर अधिक ऊँचे ज्वार उत्पन्न करता है, जिन्हें दीर्घ ज्वार कहते हैं। प्रथम और तृतीय चतुर्थांश में इनके प्रभाव के आंशिक विरोध के कारण लघु ज्वार उत्पन्न होते हैं।

महासागरीय जल संचलन के महत्वपूर्ण तथ्य

  • तरंगें मुख्यतः पवन से ऊर्जा प्राप्त करती हैं।
  • ज्वार-भाटा मुख्यतः चन्द्रमा और सूर्य के गुरुत्वीय प्रभाव से संबंधित है।
  • दीर्घ ज्वार अमावस्या और पूर्णिमा के आसपास आता है।
  • लघु ज्वार प्रथम और तृतीय चतुर्थांश के आसपास आता है।
  • ज्वार का समय प्रतिदिन लगभग 50 मिनट आगे बढ़ता है।
  • गर्म जलधाराएँ निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर ऊष्मा का स्थानांतरण करती हैं।
  • ठंडी जलधाराएँ उच्च अक्षांशों या ठंडे क्षेत्रों से अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों की ओर बहती हैं।
  • कोरिऑलिस प्रभाव महासागरीय धाराओं की दिशा को प्रभावित करता है।
  • गल्फ स्ट्रीम एक प्रमुख गर्म जलधारा है।
  • पेरू या हम्बोल्ट धारा एक प्रमुख ठंडी जलधारा है।

अन्य BSEB Class 11 Geography Chapters

Chapter 1 – भूगोल एक विषय के रूप में

Chapter 2 – पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

Chapter 3 – पृथ्वी की आंतरिक संरचना

Chapter 4 – महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

Chapter 5 – खनिज एवं शैल

Chapter 6 – भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ

Chapter 7 – भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

Chapter 8 – वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Chapter 9 – सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान

Chapter 10 – वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ

Chapter 11 – वायुमंडल में जल

Chapter 12 – विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन

Chapter 13 – महासागरीय जल

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 14 – महासागरीय जल संचलन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें तरंगों, ज्वार-भाटा और महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति तथा उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से दीर्घ ज्वार एवं लघु ज्वार, महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति, गर्म एवं ठंडी धाराएँ, प्रशांत महासागर की धाराएँ और ज्वार के समय में प्रतिदिन होने वाले परिवर्तन से संबंधित प्रश्नों की अच्छी तैयारी करनी चाहिए।

Leave a Comment